Thursday, 25 February 2016

पौराणिक कथा : ज्वाला देवी माता में है अपार शक्ति,बिना तेल के निरंतर जलती आ रही है ज्योति...



हिमाचल की भूमि पर अनेक पराक्रमी वीर हुए,जिन्होंने हिमाचल की प्राचीन धरोहर यानि देवभूमि के रूप में हिमाचल की प्रवृति को हमेशा कायम रखा.हिमाचल की धरती देव भूमि के नाम से विश्व विख्यात है.

यहीं के एक स्थान कांगड़ा में स्थित है विश्व विख्यात माता ज्वाला का मंदिर.कहा जाता है कि यहाँ भगवती सती की जीभ गिरी थी इसलिए यह स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक है.

मान्यता है कि भगवान शिव यहां उन्मत भैरव के रूप में स्थित है.यहां देवी के दर्शन ज्योति रूप में किए जाते हैं.पर्वत की चट्टान से नौ विभिन्न स्थानों पर बिना किसी ईंधन के ज्योति स्वत ही जलती रहती है.

यही कारण है कि यहां देवी को ज्वाला देवी के नाम से जाना जाता है.मान्यता है कि सभी शक्तिपीठों में देवी मां हमेशा निवास करती हैं.शक्तिपीठ में माता की आराधना करने से माता जल्दी प्रसन्न होती है. मंदिर र्निमाण की कथा:- सतयुग में सम्राट भूमिचन्द्र ने यह अनुमान लगाया था कि देवी सती की जीभ हिमालय की धौलाधार पहाड़ियों पर गिरी होगी.

उस स्थान पर खूब खोज की गई मगर सफलता नहीं मिली.उसके बाद उन्होंने नगरकोट कांगड़ा में एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया.कुछ सालों के पश्चात एक ग्वाले ने सम्राट भूमिचन्द्र को यह सूचना दी की उसने धौलाधार पहाड़ियों में एक ज्वाला निकली हुई देखी है,

जो निरंतर ज्योति के रूप में जल रही है.सम्राट ने स्वयं जाकर वहां दर्शन किए और घोर वन में मंदिर का र्निमाण भी करवाया.मंदिर में पूजा हेतू शाकद्वीप से दो भोजक ब्राह्मणों को बुलाकर नियुक्त किया गया.तब से लेकर आज तक उन्हीं दोंनो भोजक ब्राह्मणों के वंशज ज्वालामुखी तीर्थ की पूजा करते आ रहे हैं.माता के इस मंदिर की महिमा ऐसी है कि यहां आकर नास्तिक भी आस्तिक हो जाते हैं.

यह स्थान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है.पंजाब के होशियारपुर से गौरीपुरा डेरा नामक स्थान से होते हुए ज्वाला जी पहुंचा जा सकता है.डेरा से ज्वाला जी का मंदिर 20 कि मी की दूरी पर है.मंदिर में देवी के दर्शन नौ ज्योतियों के रूप में होते हैं.ये ज्योतियां स्वप्रभाव से ही धीरे तेज जलती रहती है.मुख्य ज्योति चांदी के आले में जलती रहती है.

नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला जो चांदी के आले के बीच स्थित है उसे महाकाली कहते हैं.अन्य आठ ज्वालाओं के रूप में मां अन्नपूर्णा, चण्डी, हिंगलाज, विध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका एवं अंजी देवी ज्वाला देवी मंदिर में निवास करती हैं.

सेजा भवन, टेढ़ा मंदिर, अम्बिकेश्वर महादेव, सिद्धनागार्जुन यहां पर मुख्य दार्शनिक स्थल हैं.मुख्य दर्शनिय स्थलों के अलावा मंदिर परिसर व उसके पास ही अन्य दर्शनिय स्थल भी हैं.जिनका महत्व सर्वविदित है

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