Tuesday, 1 March 2016


श्रीकृष्ण एवं द्रौपदी में लैंगिक संबंध थे’ ऐसा लिखनेवाले आंध्रप्रदेश के डॉ. यरलागद्दा लक्ष्मी प्रसाद को पद्मभूषण पुरस्कार !



श्रीकृष्ण एवं द्रौपदी में लैंगिक संबंध थे’ ऐसा लिखनेवाले आंध्रप्रदेश के डॉ. यरलागद्दा लक्ष्मी प्रसाद को पद्मभूषण पुरस्कार !

केंद्रशासन डॉ. प्रसाद का सम्मान कर, बहुसंख्य हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाओंको आहत न करे, ऐसी हिन्दुओंकी अपेक्षा है !

ऐसे लेखकोंका सम्मान नहीं, अपितु धार्मिक भावनाएं आहत करने के संदर्भ में उन्हें कारावास में डालना चाहिए !



इस वर्ष दिए जानेवाले पद्मभूषण पुरस्कारोंकी घोषणा की गई है ! इनमें आंध्रप्रदेश के लेखक डॉ. यरलागद्दा लक्ष्मी प्रसाद को देश के तीसरे सर्वाधिक प्रतिष्ठित नागरी पुरस्कार ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया जा रहा है !

१. डॉ. प्रसाद ने कुछ वर्ष पूर्व ‘द्रौपदी, पांडव एवं भगवान श्रीकृष्ण’ की अश्लाघ्य अनादर करनेवाली ‘द्रौपदी’ नामक एक तेलगु पुस्तिका लिखी थी।

२. इस पुस्तक में डॉ. प्रसाद, द्रौपदी को केवल कामुक के रूप में चित्रित कर नहीं रुके, अपितु उन्होंने ‘भगवान श्रीकृष्ण एवं द्रौपदी में लैंगिक संबंध थे’ ऐसा भी लिखा है ! (यह पढ कर जिस हिन्दू का रक्त नहीं खौलता, वो हिन्दू ही नहीं हैं ! केंद्रशासन को चाहिए कि, ऐसे धर्मद्रोही लेखक का सम्मान कर करोडों हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाओंको आहत न करे, एवं यही अपेक्षित है ! हिन्दुओंके लिए ‘द्रौपदी’ स्मरणीय है। ऐसा मान कर चलें कि, द्रौपदी श्रीकृष्ण की मानी हुई बहन है, फिर भी श्रीकृष्ण एवं द्रौपदी के ‘बंधू-भगिनी’ के संबंध एक आदर्श रूप हैं। श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर, उंगली को बांधने हेतु उनकी भगिनी सुभद्रा के मन में एक साधा कपडे का टुकडा देने का विचार भी नहीं आया, जबकि द्रौपदी ने नि:संकोच स्वयं का मूल्यवान शालू फाड कर श्रीकृष्ण की उंगली बांधी एवं सारे विश्व को बता दिया कि एक ‘आदर्श भगिनी’ कैसी हों ! उसी प्रकार कौरवोंकी सभा में द्रौपदी के वस्त्रहरण के समय श्रीकृष्ण ने उसे, उसी सभा में लज्जित होने से बचा कर एक ‘आदर्श बंधू’ होने का उदाहरण 

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