Tuesday, 8 March 2016

एक महान अमेरिकन वैज्ञानिक कार्ल सेगन ने बताया की कैसे भगवान शिव ने इस ब्रम्हांड को जन्मा था !!

 
न मे मृत्युशंका न मे जातिभेदः,
पिता नैव मे नैव माता न जन्मः ।
न बन्धुर्न मित्रं गुरूर्नैव शिष्यः,
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ।।
☆माॅ पार्वती वामाड़्ग रहे,
नन्दी भृंगी करे घेरा…
कैलाश बनाकर मन को मेरे,
शिवजी करो बसेरा..
हर हर महादेव.
नीचे दी गई वीडियो मे इस बात का उल्लेख किया गया है कि कैसे भगवान शिव ने इस ब्रह्मांड को जन्मा। यह वीडियो एक अमेरिकन वैज्ञानिक का वीडियो है, इसलिए यह वीडियो अंग्रेजी भाषा में है — किंतु जो मित्र हिंदी भाषा में इसको समझना चाहते हैं उनके लिए भी हमने भगवान शिव के द्वारा ब्रम्हांड की रचना के विषय का वीडियो अलग से नीचे दिया है।
वैज्ञानिक कार्ल सेगन ने पूरी वीडियो में वैदिक रुप से ही सृष्टि के निर्माण की बात की है, और उन्होंने इस बात को स्पष्ट रुप में सामने लाने का सफल प्रयास किया है।
आप यहां पर देखिए महान अमेरिकन वैज्ञानिक कार्ल सेगन के ब्रम्हांड की रचना का वीडियो, जो उन्होंने हिंदुत्व के आधार पर बनाई है।
इस वीडियो में, विश्व प्रसिद्ध अमेरिकन खगोल शास्त्री और भौतिक वैज्ञानिक कार्ल सेगन बहुत ही अच्छे ढंग से हिंदू सिद्धांतो की व्याख्या करते है, और हिंदू भगवान जैसे भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के समय चक्र के आधार पर ब्रम्हांड की रचना की बात को सिद्ध करते हैं।
कौन है यह कार्ल सेगन?
कार्ल सेगन एक खगोल शास्त्री, खगोल भोतिकीविद, ब्रमांड वैज्ञानिक और एक लेखक थे, जो 1980 में बहुत प्रसिद्ध हुए। उनका एक टेलीविजन सीरियल “कॉसमॉस: ए पर्सनल जर्नी” यूएसए में सबसे अधिक देखे जाने वाला उस समय का टीवी प्रोग्राम था। जब 1996 में उनकी अचानक से मृत्यु हुई, उस समय कार्ल सेगन अमेरिका के मुख्य विज्ञान संचारक थे। वह नियमित मेहमान भी थे दोनों नाइटली न्यूज़ और “दी टू नाइट शो स्टारिंग: जॉनी कार्सन” के।
जब कार्ल सेगन को यह पूछा गया की “ब्रम्हांड की रचना कैसे हुई?” तो उन्होंने कहा की:
“इस बात का जवाब तो निश्चित तौर पर कोई भी नहीं दे सकता। कौन इस बात की घोषणा कर सकता है कि ब्रम्हांड उस वक्त और ऐसे बना? कब इसकी रचना हुई? हमारे लिए भगवान भी इस दुनिया की रचना के बाद ही आए हैं तो फिर कोई और कैसे जान सकता है की इस दुनियां की रचना कब हुई? कोई भी नहीं जानता की कब ब्रहमांड जन्मा, इंसान केवल सर्वेक्षण ही कर सकता है। हो सकता है उसने जान लिया हो, और यह भी हो सकता है कि नहीं, कुछ भी नहीं जाना। किसने जाना और किसने नहीं जाना, यह किसने जाना।”
यह कथन हजारों वर्ष पुराने हैं, जो रिग वेद से लिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सबसे अधिक परिष्कृत और प्राचीन ब्रम्हांड संबंधी विचार एशिया से ही आए हैं और खास तौर पर भारत से। वहां का विज्ञान बहुत ही उचित तर्क का रहा है और उस पर ओर शोध करने की आवश्यकता है।
ब्रम्हांड की उत्पत्ति हिंदुत्व के आधार पर समझने के लिए हिंदी में दी गई इस वीडियो को देखें।
वीडियो के प्रारंभ में आप देखेंगे केवल एक शुद्ध ज्योति रूपी चेतना है, और इस ज्योति रूपी चेतना को ही शिव कहा जाता है। इसी चैतन्य शक्ति से ऊर्जा की उत्पत्ति हुई और उसी ऊर्जा से इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन की उत्पत्ति हुई। इन्ही से अनु बने और फिर मॉलिक्यूल। इनके असंख्य गुनाह हो जाने के कारण ही ब्रम्हांड की रचना हुई, और यह ब्रम्हांड आज भी बढ़ता ही जा रहा है और अंत में यह ब्रम्हांड शिव की चैतन्य शक्ति में ही विलीन हो जाएगा।
ॐ नमः शिवाय
।। जय श्री महाकाल ।।

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