Sunday, 6 March 2016

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क्या झूठ और मक्कारी में केजरीवाल से भी आगे है कन्हैया कुमार: पढ़ें


kejriwal and kanhaiya kumar
New Delhi: जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर चौतरफा हमले शुरू हो गए हैं। देशद्रोह के मामले में 14 दिन की जेल काटने के बाद 6 महीने की जमानत पर रिहाई के बाद कन्हैया कुमार ने JNU में जोरदार भाषण दिया था। इस भाषण में कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पर जमकर हमला बोला था। जिस प्रकार से केजरीवाल किसी भी चीज के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगा देते हैं वैसे ही कन्हैया कुमार ने भारत में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और जातिवाद के लिए मोदी पर आरोप लगा दिया जबकि मोदी सरकार को देश में आये केवल डेढ़ साल हुए हैं और इससे पहले ज्यादातर समय देश में कांग्रेस का शासन रहा है।
सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा हो रही है की झूठ और मक्कारी में कन्हैया कुमार दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के समान है। वैसे आजकल कन्हैया कुमार और केजरीवाल में खूब जम भी रही है। केजरीवाल ने कन्हैया कुमार को निर्दोष साबित करने के लिए दिल्ली सरकार की पूरी ताकत लगा दी है। उन्होंने खुद से JNU मामले की जांच का आदेश दिया था जिसके बाद उन्होंने कन्हैया कुमार को क्लीन चिट दे दी जबकि दिल्ली हाई कोर्ट स्वयं इस मामले की निगरानी कर रहा है।
हालाँकि पूरे मामले में कन्हैया कुमार ने कुछ ऐसी गलतियाँ की जिसे देखकर लोग कह रहे हैं कि झूठ और मक्कारी में कन्हैया कुमार केजरीवाल के रिकॉर्ड को तोड़ रहा है और केजरीवाल खुद का रिकॉर्ड तोड़ने में कन्हैया कुमार की मदद कर रहे हैं।
पढ़ें क्या गलतियाँ की कन्हैया कुमार ने
  • आतंकी अफजल गुरु की बरसी का आयोजन कन्हैया कुमार ने उमर खालिद के साथ मिलकर किया था, उस पोस्टर में उसका नाम था जिसमें अफजल गुरु की फांसी को न्यायिक हत्या बताया गया था, कन्हैया कुमार इस कार्यक्रम में शामिल भी हुआ था, कार्यक्रम में भारत के खिलाफ नारेबाजी की गयी थी लेकिन कन्हैया कुमार ने इस मामले को दबाना चाहा और सारा आरोप ABVP पर लगाना चाहा, यही नहीं घटना के दूसरे दिन उसने खुद के बचाव के लिए फिर से छात्रों और मीडिया को इकठ्ठा किया और उमर खालिद की बगल में खड़ा होकर भाषण दिया, इन भाषण में उमर खालिद चुपचाप खड़ा रहा और कन्हैया कुमार ने बीजेपी, मोदी, आरएसएस, संघवाद, मनुवाद, गरीबी, भुखमरी और जातिवाद से आजादी के नारे लगाए। इस भाषण से पहले उसने मीडिया को भी आमंत्रित किया था ताकि पहले वाली नारेबाजी वाली घटना को दबाया जा सके
  • कालेधन के बारे में उसने वही भ्रमित करने वाली बातें बताई जो लालू यादव, नीतीश कुमार, राहुल गाँधी और केजरीवाल जैसे नेता राजनीतिक फायदा लेने के लिए बताते हैं, उसने कहा कि मोदी ने 15 लाख रुपये सभी लोगों के बैंक अकाउंट में डलवाने का वादा दिया है, जबकि मोदी ने ऐसा कोई भी वादा किया नही है, उन्होंने कहा था की विदेश में इतना सारा कालाधन है कि अगर उसे वापस लाया जाय तो सभी को 15-15 लाख मिल सकता है। उन्होंने ये नहीं कहा था कि कालाधन लाकर मै उसे सबको बराबर बराबर मात्रा में बाँट दूंगा, यह दर्शाता है कि एक छात्र होकर भी कन्हैया कुमार झूठी और भ्रमित करने वाली बातों का सहारा लेता है
  • मोदी सरकार को देश में आये केवल डेढ़ साल हुए हैं, कन्हैया कुमार ने देश की सभी समस्याओं का जिम्मेदार मोदी सरकार को ठहराते हुए उसे उखाड़ फेंकने की बात की जबकि देश में करीब 60 वर्षों तक कांग्रेस ने शासन किया है, अगर देश में समस्याएँ हैं तो वो सिर्फ कांग्रेस की वजह से हैं, कन्हैया कुमार ने कांग्रेस के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला, उसने सभी बुराइयों के जड़ कांग्रेस से आजादी की मांग नहीं की बल्कि मोदी सरकार से आजादी की मांग की
  • बिहार में 25 साल से लालू यादव और नीतीश कुमार की सरकार है, 15 साल लालू यादव ने शासन किया जबकि 10 साल से नीतीश कुमार सत्ता संभाल रहे हैं। आज अगर देश के किसी राज्य में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, जातिवाद की सबसे अधिक समस्या है तो वह बिहार में हैं। इन्हीं समस्याओं की वजह से बिहार को देश का सबसे पिछड़ा राज्य कहा जाता है, स्वयं कन्हैया कुमार ने अपने भाषण में कहा है कि वह देश के सबसे पिछड़े राज्य बिहार से आता है और उसका परिवार इतना गरीब है कि केवल 3000 रुपये में गुजारा करता है। लोग कह रहे हैं कि अगर बिहार में इतनी समस्याएं हैं तो उसकी वजह मोदी सरकार, बीजेपी और आरएसएस कैसे हो गया, बीजेपी की तो बिहार में कभी सरकार ही नहीं बनी और मोदी सरकार को भी केंद्र में आये केवल डेढ़ साल हुए हैं। कन्हैया कुमार बिहार की समस्याओं के लिए बिहार सरकार से आजादी क्यूँ नहीं मांगता।
  • इसके अलावा पश्चिम बंगाल की हालत भी सही नहीं कही जा सकती, वहां भी गरीबी और भुखमरी का बोलबाला है, वहां भी बीजेपी सरकार कभी नहीं बनी, ममता बनर्जी और कन्हैया की विचारधारा वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का शाशन रहा है, ऐसे में कन्हैया कुमार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और ममता बनर्जी की सरकार से आजादी की मांग क्यूँ नहीं करता।
  • कन्हैया कुमार का एक और झूठ सामने आया है, उसने संघ पर टिप्पड़ी करते हुए कहा था कि पूर्व सरसंघ चालक गोलवरकर मुसोलिनी से मिलने गए थे, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राकेश सिन्हा ने कहा है कि कन्हैया ने गोलवरकर के बारे दुष्प्रचार का सहारा लिया है, अगर वह सिद्ध कर दे कि गोलवरकर मुसोलिनी से मिलने गए थे तो मै अपने पद से इस्तीफ़ा दे दूंगा, उन्होंने गलत बयानबाजी के लिए कन्हैया कुमार से माफी मांगने की बात की है
इन सब बातों से सिद्ध होता है कि कन्हैया कुमार और केजरीवाल एक ही सिक्के के दो पहलु हैं, दोनों ही झूठ और मक्कारी की बातें करते हैं, दोनों ही अपनी कमियां दूर करने के बजाय दूसरों में कमियां निकालते हैं, दोनों ही झूठे तथ्यों का सहारा लेते हैं, दोनों ही सभी समस्याओं के लिए मोदी पर आरोप लगाते हैं। शायद इसीलिए केजरीवाल कन्हैया कुमार को बचाने के लिए जी जान से लगे हुए हैं।

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