Saturday, 9 April 2016

जानिए दुनिया के 10 रहस्यमय ऐतिहासिक             शहरों के बारे में – तथ्य।

जब धार्मिक स्थलों की बात होती है तो भारत की ओर बरबस ही नजर ठहर जाती है। निश्चित ही भारत धार्मिक स्थलों के मामले में अमीर है। लेकिन हम बात कर रहे हैं दुनिया के उन प्रमुख स्थलों की कि जो जितने प्रसिद्ध हैं उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण और विवादित भी।
धर्मों के इतिहास की बात करें तो आज से 13 हजार वर्ष पूर्व आर्यों ने वेदों के धर्म का प्रचार कर एक अलग आर्यावर्त की स्थापना की थी। इसकी सीमा अयोध्या-आगरा से लेकर हिन्दूकुश पर्वत और पारस (ईरान) तक फैली थी। इसमें उत्तर ईरान भी शामिल था। दूसरी ओर इसकी सीमा तिब्बत-कश्मीर से लेकर नर्मदा-कावेरी के किनारे तक फैली थी। हालांकि बाद में इस सीमा का ययाति के काल में विस्तार हुआ। ययाति और उसके पुत्रों की कहानी सभी धर्मों में मिल जाएगी।
हम आपको दुनिया के उन ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों के बारे में बताएंगे, जो प्राचीनकाल में धर्म, राजनीति, समाज और व्यापार के केंद्र में रहे और जिनके लिए भयंकर युद्ध भी हुए। ये ऐसे शहर हैं जिनका रहस्य आज भी बरकरार है।
हालांकि उससे पहले इन शहरों का नाम भी जान लें। यह भी प्राचीन और ऐतिहासिक शहर रहे हैं:- स्पेन के लोर्का और केदिज, साइप्रस का लोर्नाका, अफगानिस्तान का बल्ख, इराक का तिर्कुक और अर्बिल, लेबनान का बेयरूत, सिडान और त्रिपोली, तुर्की का गाजियांतेप, बुल्गारिया का प्लोवदीव, मिश्र का फाइयान, ईरान का सुसा, सीरिया का दमश्क और एलेप्पो, फिलिस्तीन का जेरिका आदि भी प्राचीन शहरों की लिस्ट में शुमार हैं, लेकिन हम यहां इन्हें छोड़कर अन्य शहरों की बात कर रहे हैं।
पहला शहर…
काशी : वैसे तो भारत में कई प्राचीन शहर हैं, जैसे मथुरा, अयोध्या, द्वारिका, कांची, उज्जैन, रामेश्वरम, प्रयाग (इलाहाबाद), पुष्कर, नासिक, श्रावस्ती, पेशावर (पुरुषपुर), बामियान, सारनाथ, लुम्बिनी, राजगिर, कुशीनगर, त्रिपुरा, गोवा, महाबलीपुरम, कन्याकुमारी, श्रीनगर आदि। लेकिन काशी का स्थान इन सबमें सबसे ऊंचा है। काशी को वाराणसी और बनारस भी कहा जाता है। हालांकि प्राचीन भारत में 16 जनपद थे जिनके नाम इस प्रकार हैं- अवंतिका, अश्मक, कम्बोज, अंग, काशी, कुरु, कौशल, गांधार, चे‍दि, वज्जि, वत्स, पांचाल, मगध, मत्स्य, मल्ल और सुरसेन।

काशी

काशी की प्राचीनता :  शहरों और नगरों में बसाहट के अब तक प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर एशिया का सबसे प्राचीन शहर वाराणसी को ही माना जाता है। इसमें लोगों के निवास के प्रमाण 3,000 साल से अधिक पुराने हैं। हालांकि कुछ विद्वान इसे करीब 5,000 साल पुराना मानते हैं। लेकिन हिन्दू धर्मग्रंथों में मिलने वाले उल्लेख के अनुसार यह और भी पुराना शहर है।
विश्व के सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में काशी का उल्लेख मिलता है। यूनेस्को ने ऋग्वेद की 1800 से 1500 ई.पू. की 30 पांडुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि यूनेस्को की 158 सूची में भारत की महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की सूची 38 है। इसका मतलब यह कि 1800+2014= 3814 वर्ष पुरानी है काशी। वेद का वजूद इससे भी पुराना है। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल की शुरुआत 4500 ई.पू. से मानी है या‍नी आज से 6500 वर्ष पूर्व। हालांकि हिन्दू इतिहास के अनुसार 10 हजार वर्ष पूर्व हुए कश्यप ऋषि के काल से ही काशी का अस्तित्व रहा है।
काशी : भारत के उत्तरप्रदेश में स्‍थित काशी नगर भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसा है। काशी संसार की सबसे पुरानी नगरी है। यह नगरी वर्तमान वाराणसी शहर में स्थित है।
पुराणों के अनुसार पहले यह भगवान विष्णु की पुरी थी, जहां श्रीहरि के आनंदाश्रु गिरे थे, वहां बिंदुसरोवर बन गया और प्रभु यहां बिंधुमाधव के नाम से प्रतिष्ठित हुए। महादेव को काशी इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने इस पावन पुरी को विष्णुजी से अपने नित्य आवास के लिए मांग लिया। तब से काशी उनका निवास स्थान बन गई। काशी में हिन्दुओं का पवित्र स्थान है ‘काशी विश्वनाथ’।
भगवान बुद्ध और शंकराचार्य के अलावा रामानुज, वल्लभाचार्य, संत कबीर, गुरु नानक, तुलसीदास, चैतन्य महाप्रभु, रैदास आदि अनेक संत इस नगरी में आए। एक काल में यह हिन्दू धर्म का प्रमुख सत्संग और शास्त्रार्थ का स्थान बन गया था।
दो नदियों वरुणा और असि के मध्य बसा होने के कारण इसका नाम वाराणसी पड़ा। संस्कृत पढ़ने के लिए प्राचीनकाल से ही लोग वाराणसी आया करते थे। वाराणसी के घरानों की हिन्दुस्तानी संगीत में अपनी ही शैली है। सन् 1194 में शहाबुद्दीन गौरी ने इस नगर को लूटा और क्षति पहुंचाई। मुगलकाल में इसका नाम बदलकर मुहम्मदाबाद रखा गया। बाद में इसे अवध दरबार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रखा गया।

गांधार

गांधार प्राचीन भारत के 16 जनपदों में से एक था जिसके प्रमुख दो नगर थे- पुरुषपुर (पेशावर) और तक्षशिला। पाकिस्तान का पश्चिमी तथा अफगानिस्तान का पूर्वी क्षेत्र। महाभारतकाल में यहां के राजा शकुनि के पिता सुबल थे। गांधार की होने के कारण धृतराष्ट्र की पत्नी को गांधारी कहा जाता था। प्राचीनकाल में अफगानिस्तान आर्यों का प्रमुख केंद्र था। हिन्दूकुश पर्वत ऐसा क्षेत्र था, जहां के दर्रे से निकलकर अन्य जातियों के लोग आए और उन्होंने अफगानिस्तान (आर्याना) और यहां के हिन्दुओं को बर्बाद कर दिया। बामियान, जलालाबाद, बगराम, काबुल और कंदहार यहां के प्रमुख प्राचीन स्थल थे, लेकिन इस्लाम के आगमन के बाद ये सभी नष्ट कर दिए गए।

No comments:

Post a Comment