Sunday, 24 April 2016

सिंहस्थ महाकुंभ में दिखेगा 7 टन का त्रिशूल जानिये ख़ास बाते

सिंहस्थ महाकुंभ में दिखेगा 7 टन का                 त्रिशूल जानिये ख़ास बाते
5 अप्रैल, मंगलवार को पहली पेशवाई जूना अखाड़ा की निकलेगी, इसके साथ ही मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2016 का आगाज हो जाएगा। पेशवाई का स्वागत करने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी यहां पहुंचेंगे। श्री चौहान क्षिप्रा तट स्थित जूना अखाड़े में करीब 7 टन वजनी स्टील से बने विशालकाय त्रिशूल का लोकार्पण भी इस अवसर पर करेंगे।


1. यह त्रिशूल नासिक से बन कर उज्जैन आया है।
2. इसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपए है।
3. इसकी लंबाई करीब 131 फीट है।
4. यह स्टेनलेस स्टील से बना है।
5. इस त्रिशूल के साथ डमरू भी है, वह स्टील से बना है।
6. इसका डमरू और त्रिशूल नासिक में बना है और राड बजाज कंपनी से तैयार कराया गया है।
                                  क्या है प्रवेशाई?
प्रवेशाई का मतलब सिंहस्थ क्षेत्र में प्रवेश है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान देवता भी सिंहस्थ में शामिल होते हैं।
– श्रीमहंत हरि गिरि के मुताबिक, सिंहस्थ में बनने वाले योग में देवता भी शामिल होते हैं। देवताओं के राजा इंद्र हैं। राजा के दरबार में देवता विराजते हैं। देवताओं के दर्शन, पूजन और गुरुओं के दर्शन के लिए साधु-संतों का आगमन होता है।

प्रवेशाई नीलगंगा से शुरू होकर तीन बत्ती चौराहा, टावर, चामुंडा चौराहा, देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज, नई सड़क और कंठाल पहुंचेगी। इसके बाद गोपाल मंदिर, पटनीबाजार, गुदरी, महाकाल, हरसिद्धि, रामानुजकोट, दानीगेट, छोटी रपट होकर दत्त अखाड़ा और वहां से भूखी माता रोड जाएगी। प्रवेशाई महाकाल, हरसिद्धि मंदिर और दत्त अखाड़ा पर रुकेगी। अखाड़े में पीर संध्या पुरीजी की समाधि पर पूजा की जाएगी।

                         ये हैं त्रिशूल से जुड़ी खास बातें

                   इन जगहों से निकलेगी प्रवेशाई

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