Sunday, 17 April 2016


बकेश्‍वर के मंदिर के न्यासी, पुजारी, ग्रामवासियोंसहित २५० लोगोंपर अपराध प्रविष्ट


त्र्यंबकेश्‍वर के मंदिर के गर्भगृह में जानेवाली महिलाआें को रोकनेका प्रकरण

धर्मद्रोहियोंपर नहीं, अपितु धर्मपरंपराआें की रक्षा करनेवालोंपर अपराध प्रविष्ट किए जाते ह, यह क्रोधजनक ! इस स्थिति में परिवर्तन लाने हेतु हिन्दु राष्ट्रही चाहिए !

त्र्यंबकेश्‍वर  – स्वराज्य महिला संगठन की वनिता गुट्टे, साथ ही अन्य महिलाएं यहां के शिवमंदिर के गर्भगृह में घुसने का प्रयास कर रही थीं । गर्भगृह में महिलाएं प्रवेश न करने की इस मंदिर की परंपरा है । उसको तोडते हुए १३ एवं १४ अप्रैल को आंदोलनकारी महिलाआें ने गर्भगृह में घुसने का प्रयास किया; परंतु वहां के श्रद्धालुआें ने उन्हें ऐसा करने से रोका । इस प्रकरण के अंतर्गत गर्भगृह में प्रवेश करने के लिए प्रतिबंध करने के प्रकरण में, साथ ही महिलाआें से धक्कामुक्की करने के प्रकरण में महाराष्ट्र हिन्दु प्रार्थनास्थल प्रवेशमान्यता अधिनियम १९५६ भाग ४ (अ), ५ के अनुसार मंदिर केन्यासी, पुरोहित, पुजारी, ग्रामवासी महिला-पुरुष एवं पार्षद, ऐसे कुल २५० लोगों के विरोध में त्र्यंबकेश्‍वर पुलिस थाने में अपराध प्रविष्ट किया गया है । (धर्मपरंपराआें की रक्षा करनेवालोंपर अपराध प्रविष्ट करनेवाली पुलिस धर्मपरंपराआें को तोडकर गांव का वातावरण दूषित करनेवाली लोकप्रियता की भूखी महिला आंदोलनकारियोंपर अपराध प्रविष्ट करेगी क्या ? – संपादक)
लोकप्रियता के लोभवश किए जा रहे इस आंदोलन के कारण वहां केखरे श्रद्धालुआें को, साथ ही ग्रामवासियों कोकष्ट सहना पडा; परंतु गुट्टे एवं उनकी महिला सहयोगियों ने परंपरा को तोडने का अपना हठ बनाए रखा । इसके कारण न्यासी एवं ग्रामवासियों ने भी स्वराज्य महिला संगठन की महिला कार्यकर्ताआें के विरोध में परिवाद ज्ञापन प्रविष्ट किया है, यह ज्ञात हुआ है ।

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