Sunday, 17 April 2016

"लालकिला"  अथवा  "लाल कोट" ||  



लाल कोट


क्या आप वास्तविक सत्य जानते हैं ???
हम सभी ने आज तक यही रट्टा लगाया है की "लालकिला मुगलों/शाहजहाँ की देन  है" | बिना ये सोचे-समझे अथवा तार्किक प्रश्नोत्तर किये हुए हमने इस पाखंड को भी उसी तरह सत्य मान लिय,, जैसा की "ताजमहल=तेजोमहालय" ,, "कुतुबमीनार=विश्नुस्त्म्भ" ,, "बाबरी मस्जिद=राम मंदिर" ,, "फतेहपुर का किला" ,, इत्यादि- इत्यादि के बारे में हमलोग मानते आये हैं || 
    
दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ निर्मित नहीं,एक हिन्दू राजपूती निर्माण “लाल कोट” है | भारतीय इतिहास के मुग़ल काल का एक और झूठ “कि दिल्ली के लालकिले  का निर्माण शाहजहाँ ने करवाया था” |

सफ़ेद झूठ है ये कहानी यह “लाल किला” महाराजा "प्रथ्वीराज चौहान" काल में लिखित “प्रथ्वीराज रासो” नामक काव्य में वर्णित “लाल कोट” ही है | इसका निर्माण प्रथ्वीराज चौहान के नाना महाराजा "अनंगपाल तोमर (द्वितीय)" ने दिल्ली बसाने के क्रम में 1060 AD में करवाया था और महाराजा प्रथ्वीराज चौहान ने इसे पूरा कराया था।

शाहजहाँ ने इसे बनवाना तो दूर इसे अपना निर्माण सिद्ध करने के लिए इसमे हिन्दू साक्ष्यों और प्रतीकों को नष्ट करने और मिटाने का ही कार्य ही किया था, ठीक वैसे ही जैसा की उसने "ताजमहल=तेजोमहालय" के सन्दर्भ में किया था | मुल्ले शाशकों ने केवल भारत की स्मिता को नुक्सान ही पोह्न्चाया है | उन्होंने भारत को सुदृढ़ बनाने में कोई भी  सहयोग कभी भी  नहीं दिया | अगर मुल्ले इतने ही सहयोगी एवम परोपकारी होते तो अपने देश का उद्धार कर दिया होता | वे केवल लुटेरे थे,, इसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं ||

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इसके हिन्दू निर्माण होने के कुछ प्रमाण इस प्रकार हैं :--
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

1 - दिल्ली गेट पर दोनों ओर पूर्ण आकार के पत्थर के दो हाथी स्थापित थे (चित्र नं 1) इनका निर्माण गज प्रेमी राजपूत राजाओं ही संभव हो सकता है शाहजहाँ द्वारा इन्हें तोडा गया होगा और इसके टूटे टुकड़े किसी तहखाने मे फेंक दिए गए होंगे

2 - दीवाने खास / प्रमुख महल में द्वार (गेट) पर सामने की ओर दो तलवारें ऊपर को रखी हुयी,उसके ऊपर फिर कलश,कमल और न्याय तुला (तराजू) सूर्य की परिधि में बनाए गए हैं | तलवारों के सिरों पर दोनों ओर शंख कि आकृतियाँ बनी है  | ये तलवारें और न्याय तुला तोमर राजाओं का राज्य चिन्ह रहा है | ये सब चिन्ह मुसलमानों द्वारा स्वीकार नहीं किये जा सकते थे |

3 - दीवाने खास / प्रमुख महल के द्वार (गेट) पर मेहराब में ऊपर की ओर सूर्य का चिन्ह बना है और उसके दोनों ओर ॐ कि आकृतियाँ बनी है ये भी हिन्दू धार्मिक चिन्ह हैं और मुसलमानों द्वारा निर्मित होने का खंडन करते है |

4 - खास महल के प्रत्येक द्वार पर दरवाजों के कुंडों पर हाथी पर सवार महावत ढाले गए है ये भी मुस्लिम परम्परा विरोधी और हिन्दू निर्माण के समर्थक है |

5 – ऊपर पेन्टिंग में मुग़ल शाहजहाँ को 1628 ईसवी में गद्दी पर बैठे हुए पर्शियन राजदूत का, दिल्ली के लाल किले के दीवाने आम में स्वागत करते हुए दिखाया गया है | यह पेन्टिंग बोद्लियन Bodleian Library Oxford में सुरक्षित है और भारत में इलस्ट्रेटेड Illustrated weekly मार्च 14 ,1971 में page 32 पर छपी थी | मुग़ल शाहजहाँ ( जिसे श्रेय दिया जाता है कि इन्होने 1638 ईसवी से 1648 ईसवी में लाल किला बनवाया था ), वही पेन्टिंग के अनुसार 1628 ईसवीं में गद्दी पर बैठे पर्शियन राजदूत का स्वागत करता दिख रहा है | इस प्रकार शाहजहाँ अपनी गद्दी पर बैठने के समय लाल किले में ही उपस्थित था | अतः किला पहले से ही बना हुआ था और उसका लालकिला के निर्माण कर्ता होने का प्रश्न ही नहीं उठता |

6 – किले में एक स्थल “केसर कुंड” नाम से है जिसके फर्श पर कमल पुष्प अंकित है केसर और कुंड दोनों शब्द हिन्दू शब्दावली से हैं हिन्दू राजा केसर व पुष्पों से भरे जल स्थान जिन्हें कुंड कहते थे स्नान के लिए प्रयोग मे लाते थे यह भी हिन्दू निर्माण का प्रमाण है |

7 – लाल किले में पीछे यमुना नदी की ओर का स्थल “राज घाट” के नाम से है यदि यह मुसलमान निर्मित होता तो घाट का नाम “बादशाह घाट’ जैसा कुछ होता | 

8 – छतों से पानी गिराने के लिए जो ड्रेन पाईप के सिरे वराह (सुवर) के मुह से सजे है “वराह” (सुवर) हिन्दुओ में भगवन विष्णु का अवतार माना जाता है और मुसलमानों में एक घ्रणित वस्तु जिसे वे कभी न बनने देते | 

9 – लाल किला कुछ दूरी (( अगर आप कभी वहाँ गए हो तो वो स्तन पुराणी दिल्ली है, और वो दोनों मंदिर बोहत ही प्रसिद्ध हैं )) पर सम सामयिक निर्मित एक जैन मंदिर जिसे लाल मंदिर कहते है और एक गौरी शंकर मंदिर है क्या किला बनाते समय शाहजहाँ ये मंदिर बनने देता ,यह भी सिद्ध करता है ये दोनों मंदिर और लाल किला शाहजहाँ से पूर्व निर्मित हैं |

10– तवारीखे फिरोज्शाही पेज 160 पर लिखा है कि अलाउद्दीन खिलजी 1296 AD में जब सेना के साथ दिल्ली पहुँछा तो कुश्क–ए-लाल यानि लाल महल में विश्राम किया तो वह लाल किला ही होगा जो कि 1296 AD से पहले ही मौजूद था |

11 – लाल किले के अन्दर कोई ऐसा प्रमाण या शिला लेख नहीं मिला है जो यह प्रमाणित करे कि लाल किला शाहजहाँ का बनवाया था इस प्रकार हम देखते है कि लालकिला में अनेको साक्ष्य और चिन्ह बचे हैं वे सब यही प्रमाणित करते है कि यह हिन्दू निर्माण है और वही यह भी प्रमाणित करते हैं कि यह मुसलमानी इस्लामिक निर्माण नहीं है निश्चय ही यह ”लाल किला” शाहजहाँ से लगभग 500 वर्ष पूर्व महाराजा अनंगपाल तोमर द्वारा 1060 AD में बनवाया गया ” लाल कोट” ही है।

*************************************
धन्यवाद "सुरेश चौहाण जी" का जो की "सुदर्शन न्यूज़" के करता-धर्ता हैं |  वे ही ऐसे मनुष्य है, जिन्होंने तेजोमहालय,लालकोट,विश्नुस्त्म्भ,इत्यादि जैसे प्राचीन भारतीय गौरवों पे सत्य बोलने का साहस दिखाया है, जिसपे की #presstitute    #paidmedia     #indianpaidmedia    चुप्पी साध जाती है |  

आज रात (अर्थात 18 may 2015 को) इस कार्यक्रम का पुनः प्रसारण होगा सुदर्शन न्यूज़ पे |  सुरेश जी इसको अपने चैनल पर बड़ी ही कठिन परिश्तम एवम शोध के बाद  दिखा रहे है | अतएव आप सभी से अनुरोध है, की इस कार्यक्रम को देखें एवम इस जानकारी की साझा करें |  

No comments:

Post a Comment