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Tuesday, 12 April 2016

हर साल नापी जाती है इस शिवलिंग की लम्बाई…


विश्व प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र खजुराहो एक तीर्थ स्थल के रूप में भी जाना जाता है. यहां किसी समय 85 मंदिर होते थे, लेकिन अब गिने-चुने मंदिर ही शेष बचे हैं. 9वीं सदी में बने इन मंदिरों को शक्ति पूजा का बड़ा केंद्र माना जाता था. मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के तहत आने वाली इसी पर्यटन नगरी में मतंगेश्वर महादेव का एक ऐसा मंदिर भी है, जहां शिवलिंग 9 फीट जमीन के अंदर और उतना ही बाहर है. इतिहासकारों के मुताबिक मतंगेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 920 ई. के लगभग चंदेला राजा हर्षवर्मन ने करवाया था. खजुराहो के पुरातत्व मंदिरों में यह ही एक ऐसा मंदिर है, जिसमें अब भी पूजा-पाठ होता है. इसे खजुराहो में सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है. मंदिर के पुजारी अवधेश अग्निहोत्री बताते हैं कि हर साल कार्तिक माह की शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग की लंबाई एक तिल के आकार के बराबर बढ़ जाती है.
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पुजारी ने बताया कि मतंगेश्वर भगवान के शिवलिंग की लंबाई को पर्यटन विभाग के कर्मचारी बकायदा इंची टेप से नापते हैं. जिसके बाद वाकई लंबाई पहले से कुछ ज्यादा मिलती है. खास बात यह है कि शिवलिंग जितना ऊपर की ओर बढ़ता है, ठीक उतना ही नीचे की तरफ भी बढ़ता है. यह चमत्कार देखने लोगों का हुजूम उमड़ता है.इस मंदिर के बारे में एक पौराणिक कथा है कि भगवान शंकर के पास मरकत मणि थी. जिसे शिव ने पांडवों के भाई युधिष्ठिर को दे दी थी. युधिष्ठिर के पास से वह मणि मतंग ऋषि पर पहुंची और उन्होंने राजा हर्षवर्मन को दे दी. मतंग ऋषि की मणि की वजह से ही इनका नाम मतंगेश्वर महादेव पड़ा, क्योंकि 18 फीट के शिवलिंग के बीच मणि सुरक्षा की दृष्टि से गाड़ दी गई थी.
खजुराहो में भगवान मतंगेश्वर की बड़ी महिमा है. यहां के घरों में बिना मतंगेश्वर की पूजा के कोई शुभ काम नहीं होता. लोकमत के अनुसार यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. यही कारण है कि महादेव का मंदिर सबसे ऊंचा है. बालू पत्थर से बना हुआ यह मंदिर शिल्पकारी की दृष्टि से बहुत ही साधारण है. रचना की दृष्टि से ब्रम्हा मंदिर का ही विशाल रूप है.
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मंदिर की छत वर्माकार सुंदर और विशाल है. गर्भगृह के तीन और अहातेदार झरोखे हैं, जिनमें से उत्तरी झरोखे से होकर नीचे की ओर सीढ़ियां बनी हैं. मंदिर का एक ही शिखर पिरामिड शैली का है. प्रवेश द्वार के ऊपर शिखर पर गड़े हुए मुकुट से शिखर का सौंदर्य देखते ही बनता है.

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