Wednesday, 27 April 2016

सही थे राजीव दीक्षित ! सरकार ने भी देश       की वर्तमान गुलामी को स्वीकारा


भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान पर आधारित हिसार के आर टी आई एक्टिविस्ट श्री राहुल सहरावत जी ने ब्रिटेन की रानी की भारत यात्रा पर भारत सरकार से मांगी थी जानकारी ।


 
27 दिसंबर 2013 को सूचना के अधिकार के तहत मांगी थी जानकारी सर्वप्रथम भारत सरकार ने ऐसी किसी भी सूचना देने से साफ़ इन्कार कर दिया था परंतु राजीव भाई से प्रेरित राहुल जी ने धर्य नहीं खोया सूचना आयोग से इस सत्य को प्रमाणित करने के लिए लगातार 2 वर्ष तक संघर्ष किया अंत में सूचना आयोग के दखल के बाद विदेश मंत्रालय में गोल मोल करके जवाब दिया है ।

सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई सुचना का विवरण इस प्रकार है:-

दिनांक 27 दिसंबर 2013

क्या  ब्रिटेन के राजा रानी को भारत आने के लिए बीजा पासपोर्ट की जरूरत है ?
क्या ब्रिटेन की महारानी बिना बीजा के भारत आई थी ?
ब्रिटेन की महारानी को भारत आने के लिए आखिर क्यों नहीं बीजा की आवश्यकता होती है ?
4.क्या भारत के राष्ट्रपति व प्रधानमन्त्री को ब्रिटेन जाने हेतू बीजा पासपोर्ट की आवश्यकता होती है ?

कृपया उपरोक्त सूचना की सत्यापित प्रति उपलब्ध करवाये ।

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भारत सरकार के विदेशमंत्रालय का जवाब
प्रश्न संख्या 1 से 3 का जवाब ब्रिटेन की वेबसाइट पर उपलब्ध है
(मतलब भारत सरकार ने ये स्वीकार किया है की ब्रिटेन की रानी बिना बीजा के भारत आई थी अन्यथा उनका उत्तर सरल और सीधा होता परंतु अपने दस्तावेज के द्वारा सत्य को भारत सरकार नहीं बताना चाहती।) अब प्रश्न ये है ब्रिटेन की रानी आई थी भारत में सूचना मांगी गई भारत सरकार से लेकिन जवाब देगी ब्रिटेन की वेबसाइट ।
आखिर कैसी ये आजादी कैसा है ये गणतंत्र ?
प्रश्न संख्या 4 का उत्तर बिलकुल स्पष्ठ है की ब्रिटेन में प्रवेश हेतू भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री को बीजा पासपोर्ट की आवश्यकता होती है ।
ड्राइवर बदलने से बात नहीं बनने वाली नई आजादी पूर्ण स्वराज्य के लिए । व्यक्ति नहीं व्यवस्था बदलो ।
सरकार द्वारा आर. टी. आई. का जवाब >>>

और वो जो ब्रिटेन की रानी इस देश में आई है उसको हमारे देश की सरकार ने बाकायदा निमंत्रण दे कर बुलाया है तो एक बाजू में तो हमारी सरकार कहती है कि देश में आजादी के 50 साल पुरे हो गए हैं । और हम आजादी की स्वर्ण जयंती मना रहे हैं दूसरी तरफ हमारी सरकार ऐसे लोगों को बुला कर ला रही है जिन्होंने यह देश गुलाम बनाया था जिन अंग्रेजो ने इस देश पर 250 साल  राज किया था । जिन अंग्रेजो ने इस देश की पूरी की पूरी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया जिन अंग्रेजो ने भारतीय खेती को  बर्बाद कर दिया भारतीय कृषि को बर्बाद कर  दिया जिन अंग्रेजो ने भारतीय संस्कृति भारतीय शिक्षण पद्दिती को बर्बाद कर दिया जिन अनंग्रेजो के कारण हमारे देश की न्याय पद्दिती का नाश हो गया । जिन अंग्रेजो के कारण हमारे देश की कई पीढियां गुलामी के दौर में अपने आप को जिंदा रख कर बढ़ा पायी। ऐसे अंग्रेजो के प्रितिनिधि ब्रिटेन की रानी को हिंदुस्तान में बुलाना मुझे बहुत अखर रहा है मेरे जैसे नौजवान को समझ नहीं आ रहा है की ब्रिटेन की रानी आई क्यों है पिछले 50 साल में ब्रिटन ने और ब्रिटेन की सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया जिस से यह सिद्ध होता हो कि ब्रिटेन की सरकार पश्चाताप करना चाहती है । और अगर वो पश्चाताप ही करना चाहते थे तो हिंदुस्तान से सारी  व्यवस्थाओ को वापिस ले जाते जो उन्होंने हिंदुस्तान में डाल कर छोड़ी लेकिन ऐसा तो हुआ नहीं है और पिछले 50 साल में ब्रिटेन ने ऐसा कोई सबूत भी पेश नहीं किया है कि वो हिंदुस्तान के प्रति दया भाव रखते हैं सद्भावना रखते हैं तो ऐसे समय में जब देश की आजादी की स्वर्ण जयंती मनाई जा रही हो इस देश में गुलामी के दिनों की याद दिलाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को बुलाना …मैं हिंदुस्तान के शहीदों का अपमान मानता हूँ
हिंदुस्तान के जिन लाखों करोडो शहीदों ने ब्रिटेन की शासकीय व्यवस्था को ब्रिटेन की सम्राजी व्यवस्था को हिंदुस्तान से उखाड़ फेंकने में अपने प्राणों का बलिदान किया हो, अपनी कुर्बानियां दी हों, लाखों लाखों नौजवान अंग्रेजो की गोलियों के शिकार हुए हों, हजारों लोगों को काले पानी की सजा मिली हो और हजारो लाखों लोगों को अंग्रेजो ने फांसी के फंदे पर लटकाया हो, ऐसे हिंदुस्तान में उन अंग्रेजो का स्वागत करना मुझे अपमानजनक लग रहा है पिछले 5-6 दिनों से भारत सरकार जशन मन रही है महारानी के हिंदुस्तान में आगमन का और इस देश का पग पग पर अपमान किया जा रहा है रानी के आने से ब्रिटेन की रानी जो हिंदुस्तान में आई है आप में से शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि रानी जो इस देश में आई है उसको हिंदुस्तान में आने के लिए पासपोर्ट और वीजा की जरुरत नहीं है । बिना पासपोर्ट के और बिना वीजा के रानी को हिंदुस्तान में बुलाया गया है । दुनिया के किसी भी देश में आप जाइये आप को पासपोर्ट अगर नहीं है आपके पास तो आप घुस नहीं सकते उस देश में । दुनिया के किसी भी देश में जाइये अगर आपके पास वीजा नहीं है तो आपको एअरपोर्ट से ही वापिस दूसरी फ्लाइट में भेज दिया जायेगा । दुनिया के किसी भी देश में यह प्रोटोकॉल नहीं है की बिना पासपोर्ट और बिना वीजा के कोई आदमी एक देश से दुसरे देश में जा सके.. ऐसा कहीं नहीं होता। ब्रिटेन की रानी को अगर अमेरिका में जाना पड़े तो अमेरिका में बाकायदा पासपोर्ट भी लेना पड़ता है वीजा भी लेना पड़ता है तब ब्रिटेन की रानी अमेरिका जा सकती है अगर ब्रिटेन की रानी को जर्मनी जाना पड़े, फ्रांस जाना पड़े तो फ़्रांस की सरकारे बिना वीजा और पासपोर्ट के ब्रिटेन के किसी भी राजा यां रानी को अपने देश में घुसने की परमिशन नहीं देते। वो लोग क्या मानते है कि ये हमारे देश के राष्ट्रीय सम्मान का प्रशन है इसलिए कभी भी ब्रिटेन की रानी फ्रांस जाये अमरीका जाये किसी भी ऐसे देश में जाए तो वहां पर उनको पासपोर्ट लेना ही पड़ता है वीजा लेना ही पड़ता है लेकिन हिंदुस्तान में रानी आई है बिना पासपोर्ट और बिना वीजा के .. क्यों ..ऐसा क्यों है ?
एक तरफ तो हम यह कहते है कि  ब्रिटेन का सम्राज्य खत्म हो गया है ब्रिटेन का राज्य खत्म हो गया है पहली कभी ब्रिटेन की महारानी हमारी महारानी होती थी अब तो हमारी महारानी वो नहीं नहीं क्योंकि अब तो अंग्रेजो का राज्य नहीं है इस देश में अब तो अंग्रेजो का शासन नहीं है इस देश में अब तो अंग्रेजो की व्यवस्था नहीं चलती तो जब यह देश गुलाम था अंग्रेजो का उस ज़माने में अगर रानी बिना पासपोर्ट और वीजा के आती थी तो समझ में आता था क्योंकि वो अपने ही एक दुसरे देश में जाती थी
इंग्लैंड के लोग हिंदुस्तान को अपना एक उपनिवेश मानते थे अपनी एक कॉलोनी मानते थे । चूँकि हमारा देश अंग्रेजो की एक कॉलोनी था अंग्रेजो का एक उपनिवेश था तो अंग्रेजों के किसी भी राजा को अंग्रेजो के  किसी भी अधिकारी को हिंदुस्तान में आने के लिए पासपोर्ट नहीं लेना पड़ता था वीजा नहीं लेना पड़ता था
तो ये बात अगर 1947 के पहले की होती तो मेरे जैसे आदमी को समझ में आने वाली बात थी
लेकिन आज तो हम अंग्रेजो के उपनिवेश नहीं है ऐसा ही कहा जाता है ना …. आज तो हम आजाद है … यही कहा जाता है ना …
15 अगस्त 1947 में यह देश अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हो गया है यही बताया जाता है हमको  तो अगर आज हम अंग्रेजो के उपनिवेश नहीं है आज हम उनके साम्राज्य के हिस्से नही हैं तो ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा के साथ ही इस देश में आने की अनुमति मिलनी चाहिए थी ।
लेकिन ऐसा तो नहीं हुआ … तो ये 2 बातें हैं
यां तो हम ब्रिटेन के उपनिवेश है आज भी तभी रानी बिना पासपोर्ट और वीजा के सकती है ।
यां अगर हम ब्रिटेन के उपनिवेश नहीं है तो रानी को पासपोर्ट और वीजा लेना चाहिए था ।
कभी भी 2 सत्य एक साथ नहीं चलते । या तो यह सच है कि हिंदुस्तान आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है  तब तो रानी का बिना पासपोर्ट और वीजा के हमारे देश में आना समझ में आता है ।
और या फिर ये सच है कि हिंदुस्तान ब्रिटेन का गुलाम अब नहीं है । इसलिए रानी को पासपोर्ट और वीजा के साथ ही आना चाहिए .. लेकिन घटना तो यह घटित हुयी है कि रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरुरत नहीं है । यह बात हिंदुस्तान की सरकार ने कही है तो इसका एक ही अर्थ निकलता है या तो यह अर्थ निकलता है की या तो आप अगर विदेश जायें  और हिंदुस्तान के नागरिक हैं हिंदुस्तान के नागरिक की हैसियत से दुनिया के किसी भी देश में जाइये घुमने के लिए ।
जब आप वापिस अपने देश में आयेंगे तो कोई आपसे पासपोर्ट नहीं पूछेगा कोई वीजा नहीं पूछेगा । क्यों नहीं  पूछेगा ?
दिल्ली के एअरपोर्ट पर या बम्बई के हवाई अड्डे पर जब आप उतरते हैं । किसी भी दुसरे देश की यात्रा करके जब आप लोटते हैं तो आपसे पासपोर्ट नहीं देखा जाता आपसे वीजा के बारे में नहीं पुछा जाता क्यों  ? क्योंकि  आप इस देश के नागरिक हैं ।
और अगर आप भारत के नागरिक हैं  अपने ही देश में आने के लिए आपको पासपोर्ट की जरुरत नहीं है वीजा की जरुरत नहीं है ।  अगर आप भारत के किसी भी गाँव में जाना चाहें भारत के किसी भी प्रदेश में जान चाहें तो आपको पासपोर्ट की जरुरत नहीं है वीजा की जरुरत नहीं है । तो ब्रिटेन की रानी अगर हिंदुस्तान में आई है तो यां तो ये माना जाना चाहिए की यां तो वो हिंदुस्तान की नागरिक है । क्योंकि हिंदुस्तान के नागरिक को अपने देश में आने के लिए पासपोर्ट वीजा की जरुरत नहीं है या आज भी हिंदुस्तान ब्रिटेन का उपनिवेश हैं इसलिए रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरुरत नहीं है इन दोनों में से कोई एक बात  सत्य है । लेकिन ये सत्य बात हिंदुस्तान के बड़े बड़े नेताओं के दिमाग में आ नहीं रही है जो रानी के स्वागत में लगे हुए हैं ।
और हिंदुस्तान के जितने बड़े अख़बार हैं उनमे से किसी भी अख़बार में ये बात नहीं छपी है कि  रानी को बिना पासपोर्ट और बिना वीजा के हिंदुस्तान में घुसने की अनुमति क्यों मिली और किसने दी । इससे 2 बातें सिद्ध होती है  या तो रानी हिंदुस्तान की नागरिक है और या हिंदुस्तान ब्रिटेन का उपनिवेश है । और अगर यह दोनों बातें सत्य हैं तो ये 15 अगस्त 1947 को हमारी आजादी की बात क्यूं  कही जाती है फिर  तो वो झूठ है इसका मतलब कि 15 अगस्त 1947  को  हम आजाद ही नहीं हुए ।
क्योंकि अगर 15 अगस्त 1947 को हम आजाद हो गए होते तो आज हिंदुस्तान ब्रिटेन का उपनिवेष नहीं होता ।और अगर हिंदुस्तान ब्रिटेन का उपनिवेश नहीं होता तो रानी को हिंदुस्तान में आने के लिए पासपोर्ट लेना पड़ता वीजा लेना पड़ता । और इसलिए मैं बहुत दुखी हूँ ।
आपके देश का  राष्ट्रपति जब किसी दुसरे देश की यात्रा पर जाता है तो उस देश के प्रोटोकॉल के हिसाब से काम करना पड़ता है ।और आपको मैं एक जानकरी दे  दूँ आपके देश का राष्ट्रपति अगर अमरीका की यात्रा पर जाये आपके देश का प्रधानमंत्री अगर अमरीका की यात्रा पर जाए तो आपके राष्ट्रपति के जो अंगरक्षक होते हैं आपके प्रधानमंत्री के जो अंगरक्षक होते हैं  उनसे हथियार रखवा लिए जाते हैं एअरपोर्ट पर
और अंगरक्षकों को राष्ट्रपति के साथ चलने नहीं दिया जाता । अगर हमारे देश का राष्ट्रपति किसी दुसरे देश में जाए राष्ट्रपति के साथ जो फ़ौज जाएगी उनके अंगरक्षक जायेंगे उनके हथियार वहाँ एअरपोर्ट पर रखवा लिए जाते हैं । और उनको बिना हथियार अपने राष्ट्रपति साथ जाने की अनुमति मिलती है । कितनी बार तो अंगरक्षकों को एअरपोर्ट पर रोक दिया जाता है और जाने भी नहीं देते लेकिन ब्रिटेन की महारानी तो अपने साथ पुरे के पुरे अंगरक्षकों को ले कर आई है । उसको तो रोका नहीं गया इस देश में उसके अंगरक्षकों को इस देश में आने की खुली छूट मिली है बल्कि हिंदुस्तान के सिपाही रानी की रक्षा नहीं कर सकते इसलिए ब्रिटेन की सरकार यह कहती है कि हमने अपने अंगरक्षक  भेजे हैं  और जिसने भी  टेलीविजन देखा हो या अखबारों में पढ़ा हो समाचार देखे हो पढ़े हो या फोटोग्राफ देखें हो उसमें बहुत स्पष्ट है की रानी की रक्षा के लिए जितने अंगरक्षक आये हैं वो सब के सब ब्रिटेन से बुलाये गए हैं जबकि आप राष्ट्रपति जाए उनके देश में तो उसको अपने अंगरक्षक ले जाने की परमिशन नहीं है क्यों ?
ये दूसरी बात भी यही सिद्ध करती है कि आपके देश की राजनितिक गुलामी अभी भी बरकरार है
और तीसरी उस से भी ज्यादा अपमान की बात है जो मेरे कलेजे को इस समय आग की तरह चुभा रही है वो अपमान क्या हुआ है
हिंदुस्तान की सरकार ने रानी के सम्मान में दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया और दिल्ली में सरकार का एक म्यूजियम है जिसका नाम है नेशनल म्यूजियम राष्ट्रीय संग्रालय उसमे वो कार्यक्रम आयोजित किया
और उस कार्यक्रम के आयोजन के लिए जो निमंत्रण पत्र बांटे गए उन निमंत्रण पत्रों में राष्ट्रपति का नाम निचे है रानी का नाम ऊपर है क्यों ?
हिंदुस्तान की सारी की सारी राष्ट्रीय अस्मिता और सम्मान को चोट पहुंचाई है जब रानी का नाम ऊपर है और हमारे देश के राष्ट्रपति का नाम ऊपर है और इस देश का राष्ट्रपति इस देश के संविधान का प्रमुख व्यक्ति है
भारतीय संविधान के अनुसार भारतीय संविधान का सबसे प्रमुख व्यक्ति है राष्ट्रपति
सारे राष्ट्र का प्रमुख व्यक्ति है वो भारतीय संविधान के अनुसार वो राष्ट्र का प्रथम पुरुष है पहला व्यक्ति है तो जो हमारे राष्ट्र का पति है जो राष्ट्र का प्रथम पुरुष है जो भारतीय संविधान का सबसे प्रमुख व्यक्ति है इस देश में उसका नाम निचे और एक विदेशी का नाम ऊपर  ये कैसे हो गया
और इसको मैं भारतीय संविधान का सरासर अपमान मानता हूँ
और इसको मैं भारतीय राज्य व्यवस्था का सरासर अपमान मानता हूँ
और ये अपमान आपकी सरकार ने किया है क्योंकि वो निमंत्रण कार्ड भारत की सरकार ने छपाया है । और अगर उस निमंत्रण कार्ड पर राष्ट्रपति का नाम निचे हैं रानी का नाम ऊपर है तो यह जब हिंदुस्तान अंग्रेजो का गुलाम था तब दुर्घटना होती थी  और जब हिंदुस्तान गुलाम था अंग्रेजो का तो अंग्रेजो का राजा इस देश में आया था जिसका नाम था जॉर्ज पंचम सन 1911 में आया था वो इस देश में । और जब जॉर्ज पंचम इस देश में आया था तो जॉर्ज पंचम का नाम ऊपर था  हिंदुस्तान में जो वायसराय था अंग्रेजो का उसका नाम निचे था ।  तो अगर उस ज़माने में यह दुर्घटना हुयी तो मैं यह मानने को तैयार हूँ कि 1911 में यह देश ब्रिटेन का गुलाम था उपनिवेश था ब्रिटेन का शाषण इस देश पर चलता था ।लेकिन अगर आजादी के 50 साल में वही दुर्घटना हो रही है । तो कौनसी बात मैं मानु ।
या तो ये देश ब्रिटेन का उपनिवेश हैं तभी ये संभव हो सकता है की ब्रिटेन की महारानी का नाम ऊपर हो और हिंदुस्तान के राष्ट्रपति का नाम निचे हो । क्योंकि इंग्लैंड और ब्रिटेन में यह परम्परा है इंग्लैंड का जो प्राइम मिनिस्टर होता है ब्रिटेन का जो प्राइम मिनिस्टर होता है उसका नाम हमेशा रानी के नाम के निचे होता है और ब्रिटेन में रानी की हैसियत राष्ट्रपति के बराबर की  होती है तो वहां रानी का नाम ऊपर होता है ब्रिटेन की संसद का जो प्रधानमंत्री होता है उसका नाम निचे होता है क्योंकि रानी ब्रिटेन की महारानी है ।
मेरे देश की तो नहीं है महारानी वो लेकिन मेरे देश में यह क्यों हो गया और यह कोई प्रिंटिंग  मिस्टेक थी  ऐसा नहीं है ।
भारत सरकार ने बाकायदा इसके लिए तर्क दिया है कि हमने ये किया है और जानभूझ कर किया है और मैं यह इंतजार कर रहा हूँ की ये जो सुप्रीम कोर्ट हमने बनाये हैं यह संविधान की रक्षा करने के लिए बनाये है हमने । और अगर संविधान का अपमान हो रहा है तो हिंदुस्तान का सुप्रीम कोर्ट खामोश क्यों हैं ।
क्यों नहीं पिछले 5 दिन में भारत सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने कोई इस्त्रिक्षर इशु किया है । क्या हमने सुप्रीम कोर्ट इसलिए बनाये हैं कि यह ख़ामोशी के साथ देश का अपमान होते देखें देश के संविधान का अपमान होते देखें इसलिए हमने बनाये ये सुप्रीम कोर्ट ।
हिंदुस्तान का सुप्रीम कोर्ट खामोश है इतने बडे राष्ट्रीय अपमान के प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट बोल नहीं रहा है सब ख़ामोशी के साथ मुंह सील कर बैठे हुए हैं और दूसरी तरफ हिंदुस्तान की साडी राजनैतिक पार्टियों के बड़े नेता खामोश है किसी भी नेता का ब्यान नहीं आया है इतने बड़े राष्ट्रीय अपमान के प्रश्न पर किसी भी राजनीतिक पार्टी ने ब्यान नहीं दिया है इतना बड़ा अपमान हुआ है इस देश का इस सवाल पर
और इस देश में कुछ राजनैतिक पार्टियों की तो हम राष्ट्रवादी कहते हैं  कुछ राजनैतिक पार्टियाँ तो भारतीय संस्कृति के लिए मरने मिटने को तैयार हैं ।  कुछ राजनैतिक पार्टियाँ तो भारतीय अस्मिता के लिए अपनी जान न्यौछावर करने को तयार हैं । ऐसी राजनैतिक पार्टियों की तरफ से भी कोई ब्यान नहीं है आज तक
जो अपने आप को राष्ट्रवादी मानते नहीं उनसे तो हम कोई उम्मीद कर नहीं सकते  लेकिन जो हमेशा से अपने आप को राष्ट्रवादी कहते हैं उनकी तरफ से भी तो कोई ब्यान नहीं आया है इतना बड़ा राष्ट्रीय अपमान का प्रशन है ये ।
और उस से भी बड़ा राष्ट्रीय अपमान उस दिन हुआ जब रानी को दिल्ली में 21 तोपों की सलामी दी गयी । हिंदुस्तान में प्रोटोकॉल है प्रोटोकॉल क्या है कि जब कोई  नया राष्ट्रपति पद ग्रहण करता है तब नए राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है । बाकि किसी को नहीं दी जाती
जब कोई नया व्यक्ति राष्ट्रपति बनता है तब हिंदुस्तान के पार्लिमेंट के प्रोटोकॉल के अनुसार उसको 21 तोपों की सलामी दी जाती है
सिर्फ इस देश का राष्ट्रपति हक़दार है 21 तोपों की सलामी लेने के लिए लेकिन ब्रिटेन की रानी के लिए 21 तोपों की सलामी दी गयी है उस दिन जिस दिन वो उतरी है दिल्ली में इस से बड़ा राष्ट्रीय शर्म का दूसरा प्रशन कोई हो नहीं सकता और यह जो राष्ट्रीय प्रश्न खड़ा हो गया है इस देश में ये हार व्यक्ति से 2 ही सवाल पूछ रहा है मैं अपने आप से ये 2 प्रश्न पूछ रहा हूँ  क्या हम आजाद है ?
क्या ये भारत ब्रिटेन का उपनिवेश नहीं है ?
और अगर ये ब्रिटेन का उपनिवेश नहीं है तो ये तमाशा क्यों हो रहा है और या तो फिर हम ये कहें ईमानदारी से कि हम आज भी ब्रिटेन के उपनिवेश हैं तो फिर 15 अगस्त 1947 क्यों मनाते हैं हम फिर ?क्यों पिछले 50 साल से 15 अगस्त का नाटक चलता है इस देश में ? क्यों मुझे यह याद दिलाया गया है की 15 अगस्त तुम्हारा स्वतंत्रता दिवस है ।
काहे का स्वतंत्रता दिवस है जब आज भी हम उसी गुलामी में फसे हुए हैं जो कभी अंग्रेजों के ज़माने में चला करती थी
और उस से भी ज्यादा अपमान मुझे लगा जब ब्रिटेन की रानी के सम्मान में वही गीत गाया गया जो जॉर्ज पंचम के सम्मान में 1911 में गाया गया था कलकत्ता में
कौन सा गीत था वो ?
हिंदुस्तान में ब्रिटेन के लोगों के समर्थक  बहुत बडी संख्या में रहे और न सिर्फ ब्रिटेन के समर्थक रहे बल्कि अंग्रेजो के तलवे चाटने वाले घराने इस देश में रहे । अंग्रेजो की जी हजूरी करने वाले घराने इस देश में रहे । और जिन खानदानो ने अंग्रेजो के जितने ज्यादा तलवे चाते उन्ही खानदानो का नाम इस देश में गर्व से लेते हैं लोग जो अंग्रेजो के सबसे ज्यादा पिठू बन कर रहे जो अंग्रेजो के चरणों में साष्टांग बिछ जाते थे ऐसे ही लोगों को इस देश के इतिहास में पढाया जाता है । और ऐसा ही एक खानदान था जो अंग्रेजों की गुलामी में आकंठ डूबा हुआ था उस खानदान का नाम था टैगोर खानदान । और उस टैगोर खानदान का एक व्यक्ति था जिसका नाम था रविन्द्रनाथ टैगोर उस रविन्द्रनाथ टैगोर ने जॉर्ज पंचम के स्वागत के लिए एक गीत लिख दिया था और न सिर्फ उस आदमी ने वो गीत लिखा बल्कि कलकत्ता में जब जॉर्ज पंचम पहुंचा और उस भरी सभा में जहाँ लाखों लोग उपस्थित थे हिंदुस्तान की गुलामी का गीत गाया गया और ब्रिटेन के राजा का सम्मान किया गया और यह काम   रविन्द्रनाथ टैगोर ने अपने मुंह से किया और वो गीत कौनसा था जो रविन्द्रनाथ टैगोर ने इंग्लैंड के राजा की उसतति का गान करने के लिए लिखा था ।वो गीत वही है जिसको आप कहते हैं
जन गण मन अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता
बहुत शर्म आती है मेरे जैसे आदमी को जब वो गीत गाने के लिए मुझे कोई कहता है कि वो गीत गाओ क्यों गाए उस गीत को ?
रविन्द्रनाथ टैगोर तो चापलूसी करते अंग्रेजों की रविन्द्रनाथ टैगोर तो चाटुकार थे अंग्रेजो के
और रविन्द्रनाथ टैगोर तो साईको सेंट थे अंग्रेजो के इसलिए उन्होंने अंग्रेजों के राजा के सम्मान में वो गीत लिखा था।
मैं तो नहीं हूँ
मुझे  तो अंग्रेजों की चापलूसी से कोई मतलब नहीं है मैं तो अंग्रेजों का उस से ज्यादा विरोधी हूँ जितना कोई हो सकता है लेकिन मेरे आजाद देश में उस गीत को बार बार गवाया जाए ये मेरा राष्ट्रीय अपमान का प्रश्न है और जिस गीत को अंग्रेजों के राजा जॉर्ज पंचम के स्वागत में गाया था रविन्द्रनाथ टैगोर ने वही गीत 5 दिन पहले दिल्ली के एअरपोर्ट पर गाया गया महारानी के सम्मान में
आपने कभी ध्यान दिया है उस गीत के शब्द क्या हैं ?
जन गण मन अधिनायक जय है
हिंदुस्तान की जनता के मनो के अधिनायक तेरी जय हो
ये मतलब है जन गण मन अधिनायक जय है माने जार्ज पंचम तुम हिंदुस्तान की जनता के मनो के जनता के गणों के अधिनायक हो सुपर बॉस हो इसलिए तुम्हारी जय हो ये रविन्द्रनाथ टैगोर गा रहे हैं
भला इस से ज्यादा चाटूकारिता का दूसरा प्रमाण मिल सकता इससे ज्यादा साइको सेंसी का का दूसरा कोई प्रमाण आपको मिल सकता
और दूसरी लाइन है
जन गण मन अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता
माने तुम भारत की भाग्य विधाता हो माने हमारा भाग्य तुम लिख रहे हो ये तो कोई भगवान से भी नहीं कहता है
लेकिन रविन्द्रनाथ टैगोर ने तो हिंदुस्तान के साम्राज्यवादी राजा का प्रतीक जो जार्ज पंचम था उसको भगवान से भी ऊपर रख दिया था ।
कि तुम तो भारत के भाग्य विधाता हो
पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्रविड़ उत्कल बंग
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंगा
तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशीष मागे
माने पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्रविड़ उत्कल बंग ये सारे हिन्दुस्तानी इलाका तुम्हारे लिए आशीष मांग रहा है
तब शुभ आशीष मांगे – तुम्हारी भलाई की प्रार्थना कर रहा है ये पूरा हिन्दुस्तान जो अंग्रेजो की गुलामी में सिसक रहा था उसको रविन्द्रनाथ टैगोर लिख रहे हैं की ये सारा का सारा हिंदुस्तान तुम्हारे लिए आशीष मांग रहा है तब शुभ आशीष मांगे
और वो सारी की सारी आशीष हम तुमको दे रहे हैं अपनी तरफ से
जन गण मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता!
वही भारत के भाग्य विधाता तुम्हारा मंगल हो तुम्हारा कल्याण हो
माने जो हमको गुलाम बनाने के लिए आए हैं उनकी चाटुकारिता में कोई आदमी कितना बिछ सकता है इसका ये निक्रष्ट नमूना है और अंत में वो कह रहे हैं
जय हे, जय हे, जय हे,
माने तुम्हारी ही जय है तुम्हारी ही जय है तुम्हारी ही जय है
ऐसा गुलामी का प्रतीक गीत ये गुलामी के दिनों में गाया गया एक ऐसे हिन्दुस्तानी की तरफ से जिसको शायद आप बडी श्रदा की नजर से देखते हैं और गीत जब ये गा दिया था उन्होंने और चरणों में बिछ गए थे रविन्द्रनाथ टैगोर तब अंग्रेजो ने उनको नोबेल प्राइज दिलवा दिया था पुरुस्कार के रूप में
रविन्द्रनाथ टैगोर को ऐसे ही नोबेल पुरुस्कार नहीं मिला था अंग्रेजो ने कुछ नियम बनाये थे परमपरायें बनायीं थी अंग्रेजो के नियम क्या थे ?
जो अंग्रेजो की जितनी ज्यादा चाटुकारिता करे अंग्रेजो के जितने ज्यादा पैर चाटे  उसी को अंग्रेजी सरकार राय बहादुर का ख़िताब देती थी
उसी को अंग्रेजी सरकार हिंदुस्तान में और इंग्लैंड में नाईट हुड की पद्द्वियाँ देती थी ऐसे ही लोगों को अंग्रेजों की तरफ से इनाम मिलते थे
क्योंकि वो अंग्रेजों के चरण चाटते थे और हिंदुस्तान को गालियाँ देते थे  और ऐसे चरणचाटू लोग आपने नाम सुना है हिंदुस्तान के राजाओं के दरबार में  कुछ चारण और भाट हुआ करते थे ।
वो चारण और भाट क्या करते थे ?
राजा चाहे जितना गन्दा हो चाहे जितना बदमाश हो चाहे जितना लफंगा हो लूचा हो वो चारण और भाट हमेशा राजा की प्रशंसा ही करते थे बदले में राजा उनको कुछ ईनाम बांटता था । ऐसे चारण और भाटों का खानदान है ये टैगोर खानदान
जिन्होंने ये गीत लिखा है और मेरा अन्दर से रोम रोम कांप जाता है जब कोई मुझे कहता है की राजीव भाई गाइये क्यों गाए ?  हिन्दुस्तान का गीत नहीं है ये जन गण मन अधिनायक जय हे
हिन्दुस्तान  का गीत तो वन्दे मातरम रहा है
और ये वन्दे मातरम जैसा गीत जो हिन्दुस्तान  की आजादी का लड़ाई प्रतीक था जो हिन्दुस्तान  के लोगों के खून में जोश भरने का काम करता था उस वंदे मातरम जैसे गीत को हिन्दुस्तान  में राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिलवाने में 50 साल लग गया हमको अब जाके हुआ है
लेकिन जो गुलामी के ज़माने का गीत थे  जन गण मन अधिनायक जय हे
वो आजादी के तुरंत बाद हिंदुस्तान के उन गुलाम लोगों ने जो शरीर से आजाद होंगे पर दिमाग से गुलाम होंगे हिन्दुस्तान का राष्ट्रीय गीत बनाया था  और आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे की कांग्रेस के 2 अधिवेषण हुए थे जिन दोनों अधिवेशनों में ये फैसला हुआ था  सर्वसम्मति से की हिन्दुस्तान की आजादी के बाद जन गण मन हमारा राष्ट्रीय गीत नहीं रहेगा
यह फैसला हुआ था कांग्रेस की समिति में लेकिन उन्ही कांग्रेस के लूचे नेताओं ने आजादी के बाद उसी को राष्ट्रीय गीत घोषित करवा दिया
इस से ज्यादा शर्म की दूसरी बात कोई हो नहीं सकती और वो गीत जिस तरह से गाया गया थाजार्ज पंचम की अगुवाई करने के लिए जार्ज पंचम का स्वागत करने के लिए कलकत्ता में लाखों लोगों के बीच में वही गीत फिर गाया गया है महारानी के सम्मान में उस दिन दिल्ली के एअरपोर्ट पर कैसे कहें की ये देश आजाद है 1911 में जो हमने सुना है वही तो आज हम हमारी आँखों के सामने देख रहे हैं  उस ज़माने में चारण भाटों का काम टैगोर जैसे खानदान करते थे
आज भी चारण भाटों की कमी नहीं है जो रात दिन महारानी  के सम्मान में कवितायें लिख रहे हैं लेख लिख रहे हैं मैं तो पिछले 6 दिनों से अखबार पढ़ रहा हूं इस देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अंग्रेजों के समर्थन में रानी के समर्थन में अपनी लेखनी घिसे  चले जा रहे हैं इसी उम्मीद में कि शायद फिर से अंग्रेजों की दया दृष्टि हो जाए तो हमको भी कोई नोबेल प्राइज मिल जाए या रायबहादुर का खिताब मिल जाए यह देश के राष्ट्रीय अपमान का विषय है इसलिए पिछले 1 हफ्ते से मैं बहुत दुखी हूं
एक दूसरी जानकारी और दूं कि 1911 में जब जॉर्ज पंचम आया था तो हिंदुस्तान में ऐसे हजारों लोग थे जिन्होंने जॉर्ज पंचम का विरोध किया था कांग्रेस के अंदर  गरमदल नाम का जो तपका  था उसने जॉर्ज पंचम का भयंकर विरोध किया था जिसमें लोकमान्य तिलक जैसे लोग शामिल थे लोकमान्य तिलक जॉर्ज पंचम का हिंदुस्तान में आना राष्ट्रीय अपमान मानते थे इसलिए उन्होंने बोल दिया था कि था कि जॉर्ज पंचम के समारोह में कोई भी हिंदुस्तानी जो अपने आप को राष्ट्रवादी कहता है वो जाएगा नहीं और जो भी अपने आपको राष्ट्रवादी मानते थे वह गए नहीं थे जॉर्ज पंचम के सम्मान में  तो तिलक जैसे नेताओं ने उस जमाने में विरोध किया था और तिलक के जो सहयोगी थे उनके ऊपर जॉर्ज पंचम को काले झंडे दिखाने के आरोप में लाठियां चलाई गई थी और उनको जेल में बंद किया गया था तो जॉर्ज पंचम का विरोध जिन्होंने
किया जो हिंदुस्तान को अपनी मां मानते थे जो मातृभूमि मानते थे और हिंदुस्तान का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते थे ऐसे लोगों ने जब जॉर्ज पंचम को काले झंडे दिखाए थे तो  अंग्रेजी  सरकार ने उन पर लाठीचार्ज किया और पकड़ कर जेल में बंद कर दिया था  और वही पिछले एक हफ्ते पहले फिर हुआ है शायद आपको मालूम नहीं लेकिन दिल्ली के अखबारों में तो ये  छपा है बम्बई  के अख़बारों  में ये नहीं छपा  है मेरे आजादी बचाओ आंदोलन के डेढ़ हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज भी हुआ उस दिन दिल्ली में इसलिए कि हमने महारानी का विरोध किया था उस दिन एयरपोर्ट पर
माने हमारे ही देश के पुलिस हम ही को पीट रही थी क्यों क्योंकि हम महारानी का विरोध कर रहे थे विरोध क्यों कर रहे हैं हम सत्य बोल रहे हैं इसलिए हमको मार खानी पड़ी मैं तो दुर्भाग्य से उस दिन बम्बई में था लेकिन मेरी डेढ़ हजार साथी जेल में ठूंस दिए गए हैं अभी भी उनकी जमानत नहीं हुई है और हमने भी संकल्प लिया है कि हमने कोई अपराध किया नहीं  है इसलिए हम जमानत नहीं लेंगे  देखे हिंदुस्तान की  पुलिस और देखे हिंदुस्तान की सरकार कितने दिन उनको जेल में बंद रखती  है हमने देश के सम्मान के प्रति अपने साथियों को दाव पर लगाया है और उन डेढ़ हजार साथियों में आप ये सुन कर आश्चर्य करेंगे ताजूब करेंगे कि बहनों की संख्या 300 है उन 300 बहनों पर भी  पुलिस ने लाठीचार्ज किया है क्यों किया है क्योंकि रानी का विरोध कर रहे थे वो लोग सत्य बोल रहे थे इसलिए लाठीचार्ज हुआ है हमारी पुलिस हम ही को पीट रही थी तो  मेरे दिमाग में वो दृश्य  घूम गया कि सन 1991 में जब लोकमान्य तिलक और उनके सहयोगियों ने जॉर्ज पंचम का विरोध किया होगा तो  जिस तरह से उन  को लाठियों से पीटा गया होगा वही दृश्य अभी दिल्ली में ये  घटित हो चुका है उस जमाने में तो हम मान सकते हैं कि अंग्रेजों की सरकार थी इसलिए जॉर्ज पंचम का विरोध करने का माने अंग्रेजो का विरोध करना और अंग्रेजों का विरोध करना माने  अंग्रेजी सरकार के अत्याचारों को निमंत्रण देना लेकिन आज तो हमारी सरकार है आज तो अंग्रेजी सरकार नहीं है यह हम कैसे भूलेंगे कि जो सरकार चला रहे हैं वह हमारे ही वोट से चुन कर गए हैं वो अंग्रेजों के प्रतिनिधि नहीं है यह हम कैसे भूलें कि इन नेताओं को आपने हमने ही वोट डे कर चुन कर भेजा है दिल्ली में और वो नेता ब्रिटेन की रानी की रक्षा करने के लिए हिंदुस्तान के नागरिकों पर लाठीचार्ज करवा सकता है यह 1911 में होता था वो आज क्यों हो रहा है
इसलिए मेरा दिल बहुत दुखी है कि यह क्या हो रहा है इस देश में कौन सी आजादी है कैसी आजादी है और इस राष्ट्रीय अपमान के प्रश्न को दुर्भाग्य से हिंदुस्तान की कोई राजनीतिक पार्टी उठा नहीं रही है क्योंकि सब को डर लगता है क्या डर लगता है की हो जाये  साल 2 साल में हमारे हाथ में सत्ता आए तो सत्तो अपना कैलकुलेशन कुर्सी और सत्ता के हिसाब से करते हैं कोई भी राष्ट्र के हिसाब से कैलकुलेशन करता नहीं है इस गलत फहमी में आप मत रहिए कि राष्ट्रवादी लोग राष्ट्र के हिसाब से कैलकुलेशन करते हैं अगर वो राष्ट्र के हिसाब से कैलकुलेशन करते  तो उन लोगों के साथ कभी नहीं सोते  जिनको जिंदगी भर गालियां देते रहे सबके कैलकुलेशन अपनी कुर्सी के हिसाब से अपनी सत्ता के हिसाब से हैं
महारानी अकेली नहीं आई है उसके साथ ब्रिटेन की कंपनियों के बड़े अधिकारियों का पूरा दल आया है ब्रिटेन की जो मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन हैं  ब्रिटेन की जो सभी बड़ी कंपनियां हैं उन कंपनियों के बड़े बड़े अधिकारियों का पूरा दल आया है पूरा दस्ता आया है रानी अकेली नहीं आई है जॉर्ज पंचम भी अकेले नहीं आया था 1911 में जब जॉर्ज पंचम आया था तब उसके साथ ब्रिटेन की उस जमाने की बड़ी-बड़ी कंपनियों के बड़े बड़े अधिकारी आए थे क्यों आए थे जॉर्ज पंचम और उसके साथ उस  जमाने में ब्रिटेन की कंपनियों के अधिकारी क्यों आए थे क्योंकि जॉर्ज पंचम यह कहता था की मेरे साथ जो ब्रिटिश कंपनियों के अधिकारी आए हैं वह हिंदुस्तान में अपना बाजार स्थापित करेंगे उसके लिए मैं उनको लेकर आया हूं
तो हिंदुस्तान को ब्रिटेन ने अपना बाजार बनाया था और क्योंकि यह देश ब्रिटेन का बाजार बन गया था इसलिए इस देश को गुलाम बनाया था  उन्होंने तो आज भी महारानी आई है तो अपने साथ सैंकड़ों अमेरिका और ब्रिटेन की कंपनियों के अधिकारी लेकर आई है ताकि वह लोग भी हिंदुस्तान में अपना बाजार बना सकें  जैसा कभी इस्ट इंडिया कंपनी के जमाने में होता था और रानी को हिंदुस्तान में ऐसे ही सद्भावना के तहत नहीं भेजा गया है रानी को हिंदुस्तान में भेजा गया है बहुत सोची-समझी गयी  प्लानिंग के साथ आप में से  शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस समय ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था बहुत गहरे संकट में हैं ब्रिटेन में भयंकर रूप से आर्थिक मंदी चल रही है
और ब्रिटेन में जो भयंकर रूप से आर्थिक मंदी चल रही है उसके परिणाम स्वरुप ब्रिटेन की हजारों हजारों कंपनियां अपने कारखाने बंद कर रही हैं मजदूरों की छटनियाँ की जा रही है पिछले 6  साल में ब्रिटेन में डेड  से 2 लाख  मजदूरों की छटनियाँ की गई हैं कारखाने बंद करके  तो ब्रिटेन में भयंकर मंदी चल रही है उस मंदी के कारण  बेरोजगारी पैदा हो रही है उस बेरोजगारी के कारण ब्रिटेन में गरीबी पैदा हो रही है और ब्रिटेन आज यूरोप का ऐसा देश है जहां सबसे बड़ा अन एंप्लॉयमेंट का रेट है इस समय ब्रिटेन में इस समय अन्य एंप्लॉयमेंट का रेट 12-13  प्रतिशत के आसपास है हिंदुस्तान से भी 4 टका ऊपर है हिंदुस्तान में 8-9 प्रतिशत है वहां 12-13  प्रतिशत है तो  भयंकर अन  एंप्लॉयमेंट है ब्रिटेन में भयंकर  गरीबी  है तो उस गरीबी को दूर करने की बजाए वहां की सरकार ने पिछले 5-6  सालों में लोगों के ऊपर  जबरदस्त टैक्स लगाए हैं ब्रिटेन में और ब्रिटेन के लोगों पर जब जबरदस्त टैक्स लगा दिया थे  तब जॉन मेजर की सरकार नहीं तो जॉन मेजर की सरकार को हारना पड़ा था
और टोरिस लोग जीत गए यह टोनी ब्लेयर कैसे  जीते  और जॉन मेजर क्यों हारे उसका एक ही मूल था कि  जॉन मेजर अपने ब्रिटेन की आर्थिक मंदी को दूर नहीं कर पाए बेरोजगारी बढ़ती चली गई भुखमरी बढ़ती चली गई गरीबी बढ़ती चली गई इसलिए वहां की जनता ने  जॉन मेजर को नकार दिया और टोनी ब्लेयर के हाथों सत्ता सौंपी है लेकिन टोनी ब्लेयर भी कह रहे हैं कि मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है जो ब्रिटेन की डूबती हुई अर्थव्यवस्था को मैं कुछ किनारे लगा सकूं कोई मेरे पास जादू की छड़ी नहीं है तो क्या किया जाए
ब्रिटेन की आर्थिक मंदी है क्योंकि आर्थिक मंदी के दौर में क्या होता है सामान बिकना बंद हो जाता है समान बिकते नहीं हैं  गोदाम भरे रहते हैं कारखानों में उत्पादन चलता रहता है उत्पादन के बाद  गोदाम भरते चले जाते हैं लेकिन माल बाजार में बिकता नहीं है डंप होता चला जाता है तो माल बेचने के लिए बाजार चाहिए तो हिंदुस्तान में महारानी बाजार तलाशने के लिए आई है इस बात को आप समझ लीजिए
कि इस समय ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था डूब रही है और ब्रिटेन बर्बादी के कगार पर खड़ा है एक जमाने में ब्रिटेन जरूर साम्राज्यवादी देश था लेकिन आज ब्रिटेन की कोई औकात नहीं है यूरोप में कोई देश ब्रिटेन को दो टके में पूछता नहीं है बल्कि बातें ये  चल रही है कि जो कॉमन यूरोपियन मार्केट बनने वाला है उसमें ब्रिटेन रहेगा कि नहीं रहेगा इस पर यूरोप के देश एकमत नहीं है फ्रांस कहता है कि इस ब्रिटेन की हमको जरूरत क्या है यह हमारे किस काम का है  जर्मनी कहता है कि ब्रिटेन हमारे किस काम का और फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने ब्रिटेन की एंट्री पर वीटो लगा दिया है इसलिए ब्रिटेन बर्बादी के कगार पर खड़ा है और उस  बर्बादी को खत्म करना है ब्रिटेन की आर्थिक मंदी को दूर करना है ब्रिटेन की बेरोजगारी को दूर करना है ब्रिटेन की गरीबी को दूर करना है इसलिए ब्रिटेन की कंपनियों के अधिकारी रानी के साथ  हिंदुस्तान में आए हैं बाजार तलाशने के लिए और वह बाज़ार तलाशने के लिए वही प्रयास कर रहे हैं जो एक जमाने में जॉर्ज पंचम ने किया था
उनको ब्रिटेन का माल हिंदुस्तान में बिकवाना है उनको ब्रिटेन के सामान हिंदुस्तान में बिकवाने हैं उनको ब्रिटेन की कारें हिंदुस्तान में बिकवानी  हैं इसलिए ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी रॉल्स रॉयस कार का चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर  रानी के साथ आया है रॉल्स रॉयस का चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर  है ये कहता है कि जितनी मारुति  हिंदुस्तान में एक साल में बिकती है अगर उतनी  रॉल्स रॉयस बिकना शुरू हो जाए तो हमारी कंपनी का तो कल्याण हो जाएगा तो आपके देश में अपना बाजार बनाने के लिए आए हैं ना कि आपके प्रति उनके मन में कोई सदाशयता है ना आपके प्रति उनके मन में कोई दया पैदा हो गई है इस राजनीति को समझिये  यह बहुत ऊंचे स्तर की राजनीति इस देश में चल रही है और उस राजनीतिक को प्रोटोकॉल के तहत इस देश में स्थापित किया जा रहा है कभी अगर यह ब्रिटेन के अधिकारी चाहते और  ब्रिटेन की कंपनियां चाहती तो सीधे हिंदुस्तान में आ सकते थे लेकिन सीधे नहीं आए अपने साथ रानी को लेकर आए हैं क्योंकि रानी ट्रंप कार्ड है और वो ट्रंप कार्ड इस्तेमाल करना चाहते हैं इस देश की अर्थव्यवस्था में अपने सामान बेचकर
और हिंदुस्तान की सरकार के साथ रानी के प्रतिनिधि मंडल की जो बातें चल रही है उसमें  सबसे महत्वपूर्ण बात जो चल रही है वह समझने वाली है वह बात क्या चल रही है ब्रिटेन की रानी चाहती है कि ब्रिटेन का जितना माल हिंदुस्तान में आए वो सब टैक्स फ्री हो उस पर टैक्स न लगाया जाए या कम से कम टैक्स लगाया जाए क्यों ताकि ब्रिटेन का माल इस देश में सस्ता बिके और हिंदुस्तानी माल महंगा बिके ये नीति  आज की नहीं है ढाई सौ साल पुरानी अंग्रेजों की पुरानी नीति है ये  उस जमाने में भी अंग्रेजों ने हिंदुस्तान को अपना बाजार बनाया था तो अंग्रेजों ने एक ही नीति चलाई थी कि ईस्ट इंडिया कंपनी का माल टैक्स फ्री बिकता था  और हिंदुस्तानी कंपनियों के माल पर टैक्स लगाया जाता था और हिंदुस्तानी कंपनियों पर एक एक 1000% तक का टैक्स लगाया जाता था और ब्रिटेन का माल टैक्स फ्री बिकता था तो अंग्रेजों को  फायदा क्या हुआ था जिन
अंग्रेजों का माल दुनिया में कहीं नहीं बिकता  था उन्ही  अंग्रेजों का माल हिंदुस्तान में बिकना शुरू हो गया था ब्रिटेन की महारानी दूसरी बातचीत क्या कर रही है ब्रिटेन की महारानी हिंदुस्तान सरकार से दूसरी बातचीत कर रही हैकि  हिंदुस्तान का जो कच्चा माल है जो रा मटेरियल है वह कौड़ी के दाम है सस्ते से सस्ते दाम में ब्रिटेन को मिले और ब्रिटेन उसको पक्का माल बनाकर वापस हिंदुस्तान में लाकर बेचे यह बात चल रही है और इसलिए ब्रिटेन की रानी के साथ जो अंग्रेजों की कंपनियों के अधिकारी आए हैं वह क्या बातें कर रहे हैं वह कोशिश कर रहे हैं कि हिंदुस्तान की सोने की खदान अंग्रेजी कंपनियों को मिल जाए हिंदुस्तान की चांदी की खदानें अंग्रेजी कंपनियों को मिल जाए हिंदुस्तान की चांदी की खदानें अंग्रेजी कंपनियों को मिल जाए हिंदुस्तान की कॉपर और आयरन की खदानें अंग्रेजी कंपनियों को मिल जाएं हिंदुस्तान के जो तेल के कुए हैं वह तेल के कुएं अंग्रेजी कंपनी है जिसका नाम है शेल s h e l l ये  इंग्लैंड की सबसे बड़ी आयल एक्सप्लोरेशन की सबसे बडी  कंपनी है पेट्रोलियम प्रोडक्ट बेचने वाली सबसे बड़ी कंपनी है अंग्रेजों की शैल
शैल  के अधिकारी आए हैं रानी के साथ इस तलाश में हिंदुस्तान में जहां-जहां तेल के कुएं  हैं वो शैल  कंपनी को मिल  जाए तो सतो  गिद्ध की नजर लेकर आए हैं की जहां जहां हिंदुस्तान में कुछ मिले उसको नोच कर खा लो जैसे कभी पहले खाया था यह बातें चल रही हैं ब्रिटेन की रानी के साथ और धनाधन हिंदुस्तान की सरकार एग्रीमेंट साइन कर रही है ब्रिटेन की रानी के साथ और जो अग्रीमेंट साइन हो रहे हैं उन अग्रीमेंट के साइन  करते समय जानते हैं  क्या तमाशा होता है हमारे देश का प्रधानमंत्री ब्रिटेन के दूसरे मंत्रियों के साथ मुस्कुराते हुए हाथ मिलाता है और एक फाइल वो ब्रिटेन के मंत्री के हाथ में पकड़ाता है दूसरी फाइल अपने हाथ में पकड़ता है और देश की संपति बिकने का समझौता हो जाता है
और यह सब कुछ मुस्कुराते हुए चलता है अगर आप समाचार देखते हो तो यही दृश्य दिखाई देते होंगे आपको उस फाइल के अंदर क्या समझोता हुआ है यह कभी आपको नहीं बताया जाता  हिंदुस्तान की जनता को यह नहीं बताया जाता है कि तुम्हारे देश का हमने कौन सा हिस्सा बेच दिया हिंदुस्तान की पार्लिमेंट को भी नहीं बताया जाता कि तुम्हारे देश के कौन से हिस्से का समझोता हमने कर लिया और यह यात्रा नहीं है ब्रिटेन की महारानी की ये  हिंदुस्तान की तबाही के ताबूत में एक कील ठोंकी जा रही है ये यात्रा जो है हमारे लिए आने वाले समय में ऐसा सिद्ध होने वाली है कि आप परेशान हो जाएंगी कि क्या-क्या कर लिया इस देश की सरकार ने और इसलिए मैं बहुत दुखी हूं पिछले 5 दिनों से कि यह देश बिक रहा है मेरी आंखो के सामने और ब्रिटेन की रानी और उसके साथी जो अधिकारी आए हैं वो खरीद रहे हैं इस देश की संपत्ति को लेकिन सब राजनैतिक पार्टियां मौन  है और पार्लिमेंट भी चुप है सुप्रीम कोर्ट भी बोलता नहीं है हाईकोर्ट भी  बोलता नहीं है जिनको बोलने के लिए ही हमने भेजा था वहाँ पार्लिमेंट में वह सब दुम छल्ले बनकर उनके आगे पीछे घूम रहे हैं
दो तो ऐसी राजनीतिक पार्टियों हैं इस देश में सीपीएम और सीपीआई वो  कहते हैं कि हमारा तो जन्म ही हुआ है साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने के लिए तो वो साम्राज्यवाद के खिलाफ कैसे लड़ रहे हैं ब्रिटेन की रानी को  फूल हार  पहना रहे हैं  उनके मंत्री ऐसे साम्राज्यवाद के खिलाफ वो लड़ रहे हैं इस देश में
किसको कहें कभी कभी तो ऐसा लगता है कि जैसे हिंदुस्तान के राजनीति के कुएं में भांग पड़ी हुई है जो पीता है वही बोरा जाता है जो पीता है  कह पागल  हो जाता है कोई एक भी सेन्स वाला नेता इस देश में दिखाई नहीं दे रहा जिसकी जरा भी दूर दृष्टी वो  देख नहीं रहे हैं हम इस देश में कोई भी एक ऐसा नेता  और ब्रिटेन की रानी का आना ये आपके देश की राजनैतिक गुलामी का एक प्रतीक है और शायद यह सच है कि ब्रिटेन की रानी जब हिंदुस्तान में आई है तो आपमें से  बहुत कम जानते हैं कि ब्रिटेन की रानी हिंदुस्तान की नागरिक है कौन से कानून के आधार पर आप पूछेंगे अगर  मुझसे तो कानून कौनसा है
1897 में इस देश में एक कानून बनाया गया था जिसका नाम है  इंडियन सिटीजनशिप एक्ट और 1897 में वो जो  इंडियन सिटीजनशिप एक्ट का कानून बनाया गया उस कानून में यह प्रावधान है कि कोई भी ब्रिटेन का व्यक्ति हिंदुस्तान का नागरिक हो सकता है और यह कानून अंग्रेजो ने बनाया था आज से 100 साल पहले आप चाहें तो इस कानून की प्रतियां बाजार में बिकती हैं भारत सरकार ने पब्लिश किया है इस कानून का टाइटल है इंडियन सिटीजन एक्ट 1897 किसी भी कानून की किताब बेचने वाली  दुकान पर आपको मिल जाएगा 7 रुपे  की कॉपी आती है खरीद लीजिए और पढ़ लीजिए उसका प्रोविज़न बहुत ही स्पष्ट कहता है कि कोई भी ब्रिटेन का नागरिक हिंदुस्तान का नागरिक हो सकता है
और ये 1897 का 100  साल पुराना कानून 1997  में अभी चल रहा है और उसी कानून के आधार पर रानी बिना पासपोर्ट और बिना वीजा के इस देश में आई है और दूसरी बात का जवाब मैं आपको दे रहा हूं कि क्या हम आज भी ब्रिटेन के उपनिवेश हैं तो आप अगर यह जानना चाहते हैं तो 1946 का एक कानून है जिसका नाम है इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट वह खरीद कर पढ़ लीजिए इसका जवाब आपको वहां मिल जाएगा 1946 का जो इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट है वह अंग्रेजों ने पारित किया था लंदन में और अंग्रेजो ने 1946 के इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट को पारित करने के बाद क्या किया था उस कानून के पारित होने के बाद भारत और पाकिस्तान का बंटवारा किया था अंग्रेजो ने बहुत कम लोग ये जानते हैं कि  हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बंटवारा अंग्रेजों ने किया था बाकायदा कानून बनाकर और उस कानून का नाम है  इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट और उस कानून की प्रस्तावना में प्रियम्बुल में  बहुत साफ-साफ लिखा हुआ है कि इस कानून के लागू होने के बाद भारत और पाकिस्तान दो डोमिनियन एस्टेट्स बनेंगे डोमिनियन एस्टेट्स  का माने क्या होता है एक बड़े राज्य के अधीन छोटा राज्य डोमिनियन एस्टेट्स  का अगर शब्द अर्थ जानना चाहें  तो चैम्बोर्स की  डिक्शनरी खोल लीजिए ऑक्सफ़ोर्ड की डिक्शनरी खोल लीजिये दुनिया की किसी भी अंग्रेजी किताब की डिक्शनरी खोल दीजिए
डोमिनियन एस्टेट्स का माने  एक बड़े एस्टेट के अधीन एक छोटा राज्य माने हम भारत और पाकिस्तान 1946 के उस कानून के आधार पर डोमिनियन स्टेटस बनाए गए हैं ना कि इंडिपेंडेंट नेशन
और डोमिनियन एस्टेट्स और इंडिपेंडेंट नेशन  में बहुत फर्क होता है और हम डोमिनियन स्टेट हैं किसके हिस  हाइनेस माने यूनाइटेड किंगडम की रानी उसके हैं हम डोमिनियन स्टेटस 1946 का इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट भी बाजार में मिलता  है वो भी  खरीद लीजिए वह भी ₹10 का आता है उस कानून को पूरा पढ़े यां न  पढ़े  उसका प्रियम्बुल  पढ़ लीजिए आपकी आंखें खुल जाएगी कि क्यों ब्रिटेन की महारानी का नाम हिंदुस्तान के राष्ट्रपति के नाम के ऊपर है इसका जवाब  मिलता है 1946 के इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट के कानून मैं और अगर 1946  के इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट के कानून में हिंदुस्तान और पाकिस्तान दो डोमिनियन एस्टेट्स बने हैं तो हम इंडिपेंडेंट नेशन कहां है फिर तब आजाद कहां हैं हम और शायद आप में से बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदुस्तान की जो एंट्री है कॉमनवेल्थ कंट्रीस में  तो कॉमनवेल्थ में हमारी एंट्री एस अ ब्रिटिश डोमिनियन करके है ना कि इंडियन रिपब्लिक के नाम से है
और ये  इतना गंभीर प्रश्न है यह गंभीर प्रश्न हिंदुस्तान की आजादी के समय उठाया जाना चाहिए था और कुछ लोगों ने उठाया भी था लेकिन उनकी बात को किनारे कर दिया गया क्योंकि उस जमाने के जो बड़े नेता थे उनको सत्ता की ओर कुर्सी की वैसी  ही भूख थी जैसी आज सीताराम केसरी को है मैं आपसे बहुत विनम्र शब्दों में कह रहा हूं कि पंडित नेहरू के मन में जितना लालच था कुर्सी का और सत्ता का वो  उतना ही है जितना सीताराम केसरी के मन में है कोई फर्क नहीं है पंडित नेहरु एक मिनट भी प्रधानमंत्री पद की कुर्सी मेरे हाथ से चली जाए इसके लिए तैयार नहीं थे और इतिहास इस बात को  खोदेगा किसी दिन तो जवाब मिलेगा कि हिंदुस्तान में सरदार पटेल के नाम पर जब कांग्रेस में वोट पड़ा था  कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग हो गई थी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में फार्मूला निकाला गया था कि कांग्रेस के तमाम प्रदेशों के अध्यक्ष जिस नाम पर वोट डालेंगे वही आदमी हिंदुस्तान का पहला प्रधानमंत्री बनेगा और इसका फार्मूला कैसे बनाया गया था कि जिस आदमी के नाम पर सबसे ज्यादा वोट पड़ेंगे वह कांग्रेस का प्रेसिडेंट बनेगा और कांग्रेस का प्रेसिडेंट ही  हिंदुस्तान का प्राइम मिनिस्टर बनेगा ये  फॉर्मूला कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने निकाला था और उस फार्मूले के आधार पर वोट डलवाए गए थे
और उस जमाने में कांग्रेस में 15 प्रदेश अध्यक्ष थे और 15 प्रदेश अध्यक्षों ने जब वोट डाला  तो उनमें से 14 वोट सरदार पटेल के पक्ष में पड़े थे एक वोट पंडित नेहरु के पक्ष में पड़ा  था और जब पंडित नेहरू के पक्ष में एक  वोट पड़ा था तो पंडित नेहरू हार गए और सरदार पटेल जीत गए  तो कांग्रेस वर्किंग कमेटी के फार्मूले के आधार पर सरदार पटेल को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना तय  हुआ  और सरदार पटेल जब अध्यक्ष बनेंगे वही हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बनेंगे ये भी तय हुआ था तब उस समय पंडित नेहरू ने कितनी गद्दारी का काम  किया उसकी एक घटना मैं  आपको सुनाता हूं
बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस आदमी को आप चाचा नेहरु कहते रहे उसने सारे देश को कैसे बेचा है उसकी आप  घटना सुनिए  पंडित नेहरू के चरित्र में और सीताराम केसरी के चरित्र में आपको कोई फर्क नहीं समझ में आएगा हुआ क्या  जब सरदार पटेल वोट जीत गए 14 वोटों से मैसिव मेजोरिटी से तो तय हो गया की अब तो कांग्रेस के प्रेसिडेंट सरदार पटेल बनेंगे और पंडित नेहरू हार गए जमानत जप्त हो गई कारण  क्या था पंडित नेहरू को कांग्रेस में कोई पसंद नहीं करता था यह सबसे बड़ा सच है कांग्रेस में कोई पंडित नेहरु को पसंद नहीं करता था क्योंकि उसका कारण था की पंडित नेहरू चुरूर भी पीते थे सीगरेट भी पीते थे  और लेडी माउंटबेटन के साथ उनके जो संबंध थे उनके बारे में कांग्रेस का बच्चा-बच्चा जानता था नेहरू जैसा चारित्र हीन  व्यक्ति इस देश में शायद ही कोई दूसरा होगा ये  मैं कह रहा हूं और उस कन्वेक्षण  के आधार पर जो नेहरू के बारे में जानकारियां मुझे मिली है और आप अगर वो जानकारियाँ देखना चाहें तो मेरे पास ऐसे 4  फोटोग्राफ है जो पंडित नेहरू की धज्जियां उड़ा सकते हैं इस देश में उनमें से दो फोटोग्राफ तो अभी छप चुके  हैं आपने अगर 15 अगस्त 1997 की इंडिया टुडे पड़ी हो और नहीं पड़ी है तो जरुर खरीद लीजिए कहीं से मिल जाए तो उस 15 अगस्त 1997 की इंडिया टुडे में पंडित नेहरू के दो फोटोग्राफ छपे  हैं और उन दोनों फोटोग्राफ्स को देखने के बाद किसी भी शर्मदार आदमी की आंखें शर्म  से नीचे झुक जाएंगी वो उस आदमी के वो  दृश्य है उसमें कोई भी शर्मसार आदमी यह मानने को तैयार नहीं होगा कि यह हिंदुस्तान का पहला प्रधानमंत्री था
इसलिए कांग्रेस में पंडित नेहरू को कोई पसंद नहीं करता था लेकिन पंडित नेहरू को सबसे ज्यादा पसंद करते थे अंग्रेज और लॉर्ड माउंटबेटन
लॉर्ड माउंटबेटन को बकायदा भेजा गया था पंडित नेहरु को फसाने के लिए और  पंडित नेहरू उसमे फसे थे तो  लॉर्ड माउंटबेटन और अंग्रेजी पंडित नेहरू को पसंद करते थे क्यों क्योंकि  पंडित नेहरू के बारे में सभी अंग्रेज कहा करते थे कि ये आदमी शरीर से हिंदुस्तानी हैं पर लेकिन इसकी आत्मा अंग्रेज है इसलिए इसके हाथ में सत्ता दे दो कोई बाधा  नहीं है अंग्रेजों का ही शासन इस देश में चलता रहेगा इसलिए अंग्रेज पंडित नेहरु को पसंद करते थे और अंग्रेज चूँकि  की पंडित नेहरु को पसंद करते थे तो बकायदा पंडित नेहरू की छवि अखबारों में बनाई गई थी मीडिया हाईक  के आधार पर इस देश के जन नेता नहीं थे वो  जन नेता होते तो क्यों 14  वोट  सरदार पटेल के पक्ष में पड़े और क्यों एक ही वोट  पंडित नेहरु के पक्ष में पड़ा था  और जब पंडित नेहरू ने समझ लिया और देख लिया कि अब दाल गलने वाली नहीं है मैं  चुनाव भी हार गया हूं कांग्रेस वर्किंग कमेटी में अब मेरी मेजोरिटी  भी नहीं रही है तो पंडित नेहरु गए गांधी जी के पास और
ये गांधीजी के जीवन की सबसे ब्लंडर  मिस्टेक मैं मानता हूं जो हुई  क्या किया  पंडित नेहरू गए बापू के पास और बापू को उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि बापू अगर मैं हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री नहीं बना तो मैं कॉन्ग्रेस को तोड़ दूंगा और अगर कोंग्रेस टूट जाएगी तो अंग्रेज हिंदुस्तान से नहीं जाएंगे तो फिर उनको यह बहाना मिल जाएगा कि कौन सी कांग्रेस को हम सत्ता दें जो  कांग्रेस पंडित नेहरू वाली है उसको सत्ता दे या  जो पंडित नेहरु के बाहर की कांग्रेस है उसको  सत्ता दें तो बापू  पंडित नेहरू की इस ब्लैक मेलिंग के शिकार हुए और और बापू ने पर्सनल चिठ्ठी लिखी वह पर्सनल चिठ्ठी गांधीजी के रिकॉर्ड में है आप चाहे तो देख सकते हैं गांधी वांगमय  के 100  अंक है जो भारत सरकार ने छापे  हैं और गांधी वांगमय  के सौ अंकों के जो लास्ट फेस के अंक  हैं उसके आधार पर एक किताब छपी  है जिसका नाम है पूर्ण आहुति और प्यारे लाल जी ने वो किताब लिखी है प्यारे लाल जी गांधी जी के सेक्रेटरी हुआ करते थे तो  प्यारे लाल जी ने पूर्ण आहुति में वो चिठ्ठी छापी है जब गांधी जी ने पटेल को लिखी थी  क्या चिठ्ठी है कि सरदार पटेल मैं जानता हूं कि तुम जीत गए हो  लेकिन नेहरू को प्रधानमंत्री बनाना है इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम वापस ले लो अपना नाम
सरदार पटेल ने बापू से सीधे मिलकर कहा कि बापू यह आपकी अगर अंतरात्मा है तो मैं तो हमेशा आपका सेवक रहा हूं आप कहते हो तो मैं अपना नाम वापस ले लेता हूं और सरदार पटेल ने इतनी दरियादिली दिखाई  गांधीजी ने उनसे यही कहा था कि नेहरू इस समय सत्ता के मद में अंधा हो गया है और कांग्रेस को तोड़ने की बात कर रहा है और अगर इस समय कांग्रेस टूट गई तो अंग्रेज जाएंगे नहीं उनको बहाना मिल जाएगा कि हिंदुस्तान में हम कौन सी कांग्रेस को सत्ता सौंपे  कौनसी कांग्रेस को ना दें इसलिए अंग्रेजो को ये बहाना ना मिलने पाए कांग्रेस ना टूटने पाए तो मैं तुमसे अनुरोध कर रहा हूं कि तुम तुम्हारा नाम वापस ले लो तब सरदार पटेल ने अपना नाम वापस  लिया और इस तरह पंडित नेहरू हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बने इस तरह की चालबाजी से  हिंदुस्तान का पहला प्रधानमंत्री अपने पद तक पहुंचा आप सोचिए जरा इससे कम चालबाजियां आज  चलती हैं क्या कांग्रेस में ऐसे ही चालबाजियां तो चलती है आज कांग्रेस ये कांग्रेस का चरित्र है चालबाजियां करने का कांग्रेस का चरित्र है और उसी चरित्र में से यह पार्टी निकली है और इसलिए इस पार्टी को अपने सत्यानाश और दूरदिन देखने पढ़ रहे हैं हिंदुस्तान में यह वही पार्टी है 1885 में बनी थी और इस पार्टी के बनने का इतिहास भी गजब का है आप में  से बहुत कम लोग जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी को एक अंग्रेज व्यक्ति ने बनाया था ओ हयुम उसका नाम था और कांग्रेस  की जब बम्बई  में स्थापना हुई 1885  में गोकुलदास तेजपाल भवन में तो बकायदा कांग्रेस का प्रियम्बुल लिखा गया था कि कांग्रेस पार्टी एक मनोरंजन क्लब के रूप में स्थापित हुई थी इस देश में मौज मस्ती का क्लब था और अंग्रेज क्या कहा करते थे
कि इस कांग्रेस पार्टी में ऐसे पढ़े-लिखे हिंदुस्तानियों को हम जमा कर देंगे जो हिंदुस्तानियों के मन में थोड़ा बलबला  है और वो बलबला इस पार्टी में निकल आएगा तो  फूटकर बाहर निकल जाएगा और कांग्रेस पार्टी को अंग्रेज कहा करते थे कि ये सेफ्टी वाल्व  है फ्यूज की  तरह से उड़ जाएगा इसलिए कांग्रेस की नींव  पड़ी ऐसे नींव पड़ी है इस पार्टी की और दुर्जन तो इस पार्टी को देखते ही थे मैं आपको पूरी विनम्रता से कह रहा हूं कि अगर महात्मा गांधी  ना आये होते साउथ अफ्रीका से तो कांग्रेस को पूछने वाला कोई नहीं था इस देश में कोई जानता भी नहीं था कि कांग्रेस है और नहीं भी है गांधीजी ने आके  इसमें प्राण फूंके थे  और गांधीजी ने आकर इस को जन आंदोलन का रुप दिया था बाद  में  गांधीजी खुद  इतने  दुखी हुए कि उन्होंने आजीवन कांग्रेस से इस्तीफा दे  दिया था  और बाद में गांधी जी कांग्रेस पार्टी में मेंबर तक नहीं रहे और अंत में जीवन के आखिरी दिनों में गांधी जी ने ये बहुत ही स्पष्ट कह दिया था कि कांग्रेस को खत्म कर कर दो क्यों
गांधी जी कहा करते थे कि  अगर इस कांग्रेस को खत्म नहीं किया तो यह हिंदुस्तान को वैसे ही लूटेगी जैसे अंग्रेज इस देश को लूटते रहे हैं लेकिन इन कांग्रेसियों ने कांग्रेस तो खत्म नहीं कि गांधी को खत्म करवा दिया क्योंकि गांधी उनके रास्ते की रुकावट बनने लगे थे और बाद में जब कांग्रेस खत्म नहीं हुई तो आज आप उसका हश्र देख रहे हैं हिंदुस्तान में घोटाले दर घोटाले इस पार्टी ने  रिकॉर्ड कायम किया है और गांधीजी यही कहा करते थे कि अगर यह कांग्रेस खत्म नहीं हुई तो देश को ऐसे लूटेगी जैसे अंग्रेज लूटा करते थे वही बात आज गांधीजी की सत्य सिद्ध  हो रही है इस देश में और ऐसे धोखाधड़ी से ऐसे 420 के काम  से पंडित नेहरू इस देश के प्रधानमंत्री बने थे और ऐसी धोखाधड़ी से अगर इस देश की आजादी आई हो तो आजादी आजादी है कहां और इसलिए गांधी जी  14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आए वह नोआखाली में थे और कांग्रेस के बड़े नेता गांधी को बुलाने के लिए गए थे कि बापू चलिए आप गांधी ने मना कर दिया क्यों  गांधी कहते थे कि मैं मानता नहीं कि कोई आजादी आ रहे हैं और गांधी ने स्पष्ट कह दिया था कि यह आजादी नहीं आ रही है  सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है आजादी नहीं आ रही है और गांधीजी ने नोआखाली से प्रेस स्टेटमेंट रिलीज़  किया था वह प्रेस स्टेटमेंट  भी पूर्ण आहुति  में छपा  है पूरा का पूरा उस प्रेस स्टेटमेंट में  गांधीजी ने पहले ही वाक्य में ये कहा की मैं  हिंदुस्तान के उन करोड़ों लोगों को यह संदेश देना चाहता हूं कि यह जो  तथाकथित आजादी सो कॉल्ड  फ्रीडम आ रही है यह मैं नहीं लाया ये सत्ता के लालची लोग हस्तांतरण के चक्कर में फस कर लाए हैं मैं मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है और इसलिए गांधी आए नहीं थे 14 अगस्त रात  1947 को दिल्ली में नहीं थे नोआखली में थे माने भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा  जिसने हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नींव रखी हो  वह आदमी दिल्ली में मौजूद नहीं था 14 अगस्त 1947 की रात को क्यों इसके गंभीर अर्थ है गांधीजी इससे सहमत नहीं थे और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी  नहीं आई  ट्रांसफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट साइन हुआ था पंडित नेहरु और लार्ड माउंटबेटन के बीच में ट्रांसफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट और  इंडिपेंडेंस ये दो अलग चीजें है स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजें है और  सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है आप आज भी देखिए एक पार्टी की सरकार है वह चली जाए दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमंत्री जब  शपथ ग्रहण करता है तो वो  शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक कॉपी पर हस्ताक्षर करता है शायद आपने देखा होगा  तो जिस कॉपी पर आने वाला प्रधानमंत्री हस्ताक्षर करता है उसी कॉपी को   ट्रांसफर ऑफ पॉवर की बुक कहते हैं और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमंत्री नये प्रधानमंत्री को सत्ता सौंप देता है
और वो  निकल कर बाहर चला जाता है यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12:00 बजे लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरू के हाथ में सौंपी थी और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य अंग्रेजों के लिए स्वराज्य का मतलब क्या था और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था अंग्रेज  कहते थे कि हमने स्वराज्य दिया माने अंग्रेजों ने अपना राज तुमको सौंप दिया यह अंग्रेजों का इंटरप्रिटेशन था और हिंदुस्तानी लोगों का इंटरप्रिटेशन था कि हमने स्वराज्य ले लिया अंग्रेजों ने अपना राज्य  तुमको सौंपा था ताकि कुछ दिन तुम इसको चला लो और जब जरुरत पड़ेगी तो हम दोबारा आ जाएंगे और अभी  महारानी इसलिए याद दिलाने के लिए वापिस आई है कि हमने 50 साल पहले जो अपना राज  तुमको सौंपा  था उस राज की  हालत क्या है वही देखने के लिए शायद महारानी इस देश में आई है और उससे भी ज्यादा अपमान की बात  मुझे तब लगी
कि  हिंदुस्तान की इस नपुंसक सरकार ने रानी को जलियांवाला बाग की जमीन पर उतरने की छूट दी जिस जलियांवाला बाग में हिंदुस्तान के हजारों शहीदों का खून बिछा  है जिस जलियांवाला बाग में हिंदुस्तान के हजारों शहीदों ने अपनी कुर्बानी दी है उस जलियांवाला बाग में रानी को उतरने की छूट देना हिंदुस्तान के शहीदों की  शहादत का सबसे बड़ा अपमान  है जो इस सरकार ने किया है रानी किस से माफी मांगेगी ब्रिटेन की प्रेस ने  यह हंगामा मगाया की जलियांवाला बाग में जाकर रानी माफी मांगना चाहती है किस से माफी  और कैसी माफ़ी पहले आपने हजारों लोगों को गोली से मार दिया और अब कहते हैं कि आई एम सॉरी पहले हिंदुस्तान के हजारों शहीदों को खून से रंग दिया और फिर कहते हैं सॉरी और रानी किसको माफ कर सकती है इसकी हैसियत क्या है इसकी  औकात क्या है हमको माफ़ करने की  उसकी कोई औकात है हिंदुस्तान के एक-एक शहीद की शहादत इस रानी के करोड़ों करोड़ों के मुकुट पर कुर्बान  की जा सकती है क्या हिंदुस्तान के एक-एक शहीद का खून इतना सस्ता है कि रानी के उसको  आकर  माफ करें कभी कोई देश अपनी शहादत का मूल्य लगाता है क्या कभी किसी देश के शहीद इसलिए शहीद होते हैं कि बाद में हमारा मूल्य लगाया जाएगा हमारी शहादत का मूल्य लगाया जाएगा और वो  दिन तो  यह देश  भूल नहीं सकता किससे माफ़ी मांगेगी  और कौन माफ करेगा इसको 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में
20000 लोगों की सभा हो रही थी बैसाखी का दिन था और उस 20 हजार लोगों की सभा जो हो रही थी जलियांवाला बाग में उस 20000 लोगों की सभा को चारों तरफ से घेरकर डायर ने गोलियां चलवाई थी पता नहीं आप में से कितने लोगों ने जलिया वाला बाग देखा है मैंने मेरे जीवन में तीन बार देखा उस जलियांवाला बाग में अंदर घुसने के लिए छोटा सा गेट है साढ़े तीन फुट का बाकी चारों तरफ से बाउंड्री वॉल से गिरा हुआ है पूरा बाग़ तो डायर ने  क्या किया था साढ़े तीन फुट वाले गेट  में टैंक  लाकर खड़ा कर दिया था ताकि अंदर से कोई बाहर न भाग  सके और  डायर  अंदर अपनी फ़ौज लेकर पहुंचा और 20 हजार हिंदुस्तानी क्रांतिकारी वहां जमा थे  किसी के पास हथियार नहीं था किसी के पास बम नहीं था पिस्तौल नहीं था गोला बारुद नहीं था यह अंग्रेज सरकार जानती थी और सब अहिंसक तरीके से वहां  मीटिंग कर रहे थे और अहिंसक तरीके से 20000 लोगों की जो मीटिंग चल रही थी डायर ने  बिना चेतावनी दिए हुए उन 20  हजार लोगों पर गोली चलाना शुरु कर दिया और 18 मिनट गोलियां चलती रही एक दो मिनट नहीं 18 मिनट गोलियां चली थी और 18 मिनट जो गोलियां चली उनमें से 2000 लोग तो सीधे मर गए  गोलियां खाकर शहीद हो गए और हजारों लोग भगदड़ में मर गए जलियांवाला बाग में एक कुआं है उस कुएं में कूदने के लिए शहीदों को लगा की जान बच जाएगी इस  कुएं में कूदो तो सैकड़ो हजारों तो उस कुएं में कूदने के बाद मर गए कुछ क्रांतिकारियों को लगा की दीवार पर से कूद कर बाहर चले जाओ शायद जान बच  जाएगी तो दीवार से बाहर कूदने में मर गए और कुछ  लोग भगदड़ में पैर के नीचे कुचल कर मर गए और 2000 जिन  लोगों ने अपनी कुर्बानी दी थी उस डायर  की गोलियों से रानी क्या खाकर उनको माफ करेगी और उन 2000 शहीदों में एक नौजवान भी था
14 – 15 साल का एक लड़का था उसका नाम था उधम सिंह उधम सिंह उसी सभा में बैठा था जिस सभा में डायर ने गोली चलाई थी और उधमसिंह अपनी आंखों के सामने एक एक क्रांतिकारी को मरते हुए देख रहा था और एक एक क्रांतिकारी जब मरता था तो उधम सिंह के मन में एक ही संकल्प पैदा होता था कि जिस डायर  ने मेरे देश के 2000 लोगों को जिंदा मार दिया है इस डायर को मैं छोडूंगा नहीं अपने जीवन में उस उधम सिंह के जीवन का एक ही मिशन रहा आजीवन उस आदमी ने उस नौजवान ने अपनी जवानी गुजारी सिर्फ डायर से बदला लेने के लिए और वह 14 साल का बेटा बालक इस भारत मां का 14 साल के बच्चे की उम्र क्या होती है और समझ क्या होती है जरा अंदाजा करिए  हिंदुस्तान में क्रांतिकारियों की उम्र नहीं देखी जाती कभी  और उस 14 साल के बालक की क्या उम्र थी क्या समझ थी वह मरते हुए लोगों की लाश को एक किनारे रखता था और जो मरने वाले क्रांतिकारी थे उनको पानी पिलाने का काम  करता था और जब गोलियां चलना बंद हो गई तो उन सारी मरी हुई लाशों को अंदर जलियांवाला बाग से बाहर लाने के काम  में उधम सिंह और ऊधम सिंह जैसे तमाम नौजवान थे जो जुटे  हुए थे और उधमसिंह ने  उसी दिन संकल्प कर लिया था कि मैं इस डायर को जिंदा नहीं छोडूंगा जिसने मेरे देश के 2000 लोगों को मार दिया है गोलियों से उधमसिंह बाद में बढ़ा हुआ बड़ा होने पर उसके सामने जीविका का प्रश्न आया की जीविका  कैसे  चलाई जाए  नौजवान के मन में जीविका चलाने के प्रति  एक ही उद्देश्य था कि मुझे जिंदा रहना है डायर के मरने तक और कोई उद्देश्य नहीं है जीवन का और वह लड़का बढई  गिरी के काम  में लगा कारपेंटर हो गया  लुहारी का काम  किया बढई गिरी का काम  किया
उसके बाद जीवन में कुछ पैसा बनाया उसने और पैसा बनाकर लंदन गया क्यों गया क्योंकि डायर ने जब यहां हत्याकांड कर दिया था तो डायर  का तबादला कर दिया गया था और उसको लंदन भेज दिया था अंग्रेजों की सरकार ने तो डायर की तलाश में ऊधमसिंह लंदन तक पहुंचा और लंदन पहुंचने के बाद फिर पैसे खत्म हो गए तो उसने लंदन के एक होटल में बैरे की नौकरी की और महीनों महीनों बहरे की नौकरी करने के बाद कुछ  पैसा बनाया तो उससे एक रिवाल्वर खरीदी उस नौजवान ने और वह रिवाल्वर लेकर सारा दिन उसके जीवन का एक ही उद्देश्य रहता था कि डायर  को  ढूंढना है लंदन में कहां रहता है एक बार डायर का पता चल गया उसको और उसके पास भरी हुए पिस्तौल  थी  डायर सामने से आ रहा था उधम सिंह चाहता तो पिस्तौल मार के  उसको वही ढेर कर सकता था लेकिन उसके मन में विचार आया कि नहीं इसको ऐसे नहीं मारूंगा जिस तरह इसने हिंदुस्तान के एक भरी  हुई सभा में 2000 लोगों को मारा है वैसे ही किसी भरी सभा  हुई सभा में इस  उधम सिंह ने संकल्प किया है डायर को मारने का तो मारा नहीं उसने  डायर को तो उसने कहा कि यह तो कमजोरी होगी और मैं कमजोर देश का आदमी नहीं हूं ये  कमजोरी नहीं करूंगा मैं उसके बाद अंग्रेजों की सरकार ने डायर के सम्मान में एक बहुत बड़ा फंक्शन किया लंदन में और डायर के सम्मान में अंग्रेजों की सरकार ने वह फंक्शन क्यों किया डायर के सामान में अंग्रेजों की  सरकार ने इसलिए फंक्शन किया कि डायर ने हिंदुस्तान के 2000 क्रांतिकारियों को मारा तो अंग्रेजी सरकार ने उसको नाइट हुड की उपाधि दी थी किसने हिंदुस्तान के 2000 क्रांतिकारियों को मार दिया है इसलिए उसको इनाम मिलना चाहिए तो  इनाम दिया गया था डायर को  और जिस समारोह में जिस जलसे  में डायर को यह इनाम दिया जा रहा था उसकी उस्तिती  गान किया जा रहा था उसकी प्रशंसा की जा रही थी उसी भरी मीटिंग में उधमसिंह बैठा हुआ था और जब उधम सिंह के बर्दाश्त के बाहर हो गई सभा तो चुप चाप उठा  मंच  तक आया बड़े आराम से पिस्तौल निकाली और गोली चलाई डायर वहीँ ढेर हो गया और जब डायर ढेर हो गया तो अंग्रेजी पुलिस का सुपरिंटेंडेंट दरवाजे पर खड़ा था उसके हाथ कांप गए कि एक  हिंदुस्तानी नौजवान  में इतनी हिम्मत की भरी हुई सभा में से उठकर बड़े आराम से आया और मंच पर गोली चला कर आराम से चला गया
उधमसिंह ने उस  सुपरिटेंडेंट को कहा कि मुझे गिरफ्तार करो तो सुपरिंटेंडेंट भोंचाक्का हो कर  उसके मुंह की तरफ देखने लगा उसकी हिम्मत नहीं हुई उधम सिंह को पकड़ने की  बाद में उधम सिंह को लगा कि यह आदमी डर गया है तो उसने अपनी रिवाल्वर फेंक  दी अब तो गिरफ्तार करो तो डरते डरते उसने उधम सिंह के हाथ में हथकड़ी लगाई पुलिस सुपरीटेंडेंट ने और उधम सिंह ने कहा कि चलो मुझे न्यायालय में ले चलो कोर्ट में ले चलो कोर्ट में ले गए उधम सिंह को और अंग्रेजो के लंदन के न्यायालय में उधम सिंह को कटघरे में खड़ा किया तो न्यायाधीश ने जो सबसे पहला प्रश्न किया उधम सिंहसे वोह क्या था  उधम सिंह तुम चाहते तो डायर की हत्या करने के बाद भाग सकते थे तुम्हारे पास पूरा मौक  था तो उधम सिंह ने जवाब क्या दिया कि जज साहब  हिंदुस्तान की जिस  माटी से मैं पैदा हुआ हूं इस माटी में लोक पीठ दिखाकर नहीं भागा करते जरूरत पड़ने पर सीने में गोली खाते हैं पीठ दिखाकर नहीं भागा करते तो जज आश्चर्य में पड़ गया जज ने फिर दूसरा प्रश्न किया कि उधम सिंह अगर  तुम भाग जाते और हिंदुस्तान चले जाते तो तुम  अपने जैसे सैंकड़ों उधमसिंह पैदा कर सकते थे तो उस ने जवाब दिया की जज साहब आप इस गलतफहमी में मत रहिए जिस दिन आप मुझे फांसी के फंदे पर चढाओगे  उस दिन हिंदुस्तान में एक नहीं 10 हजार उधम सिंह पैदा होंगे मुकदमा चलता गया और मुकदमा चलता गया तो अंग्रेजों की प्रेस  के जो रिपोर्टर थे  वो भोंचक्के  हो गए उस नौजवान का चेहरा देखकर जिसकी उम्र मुश्किल से 20 22  साल की थी और अंग्रेजो के जज के हाथ कांप गये  थे उस लड़के को फांसी का आर्डर सुनाने के लिए उस लड़के ने कहा था कि बिल्कुल परेशान मत होइए मेरी फांसी लगाने के लिए आपको जल्लाद बुलाने की जरुरत नहीं पड़ेगी मैं खुद अपने हाथों से फांसी का फंदा चढाऊंगा और लंदन की जेल में जब उधम  सिंह को फांसी हुई तो यह लन्दन  की जेल के मैनुअल बताते हैं कि उधम सिंह ने  सारे जल्लादों को  हटा दिया था खुद गया बड़े आराम से और बहुत आराम से उसने कहा की ये  नकाब डालने की जरुरत नहीं है क्योंकि अंग्रेजों के कानून थे  की फांसी के पहले काले रंग का नकाब पहनाया जाता  उसने कहा  इसकी कोई जरुरत नहीं है बहुत आराम से उसने फांसी  का फंदा गले लटकाया  और झूल गया  ऐसे नौजवान को रानी माफ करेगी क्या ऐसे नौजवान की शहादत का कोई मूल्य  हो सकता है और ऐसे नौजवान की शहादत की जमीन है अमृतसर का जलियांवाला बाग और उस जलियांवाला बाग में ऐसी रानी के खराब और अपवित्र कदमों का हिंदुस्तान की सरकार के द्वारा वहां पहुँचाया जाना सबसे ज्यादा राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ काम  है और इससे बड़ा राष्ट्र द्रोह  कोई हो नहीं सकता जो भारत सरकार ने अभी किया है यह राष्ट्रद्रोह का काम  है यह कोई छोटा मोटा द्रोह  नहीं है शहीदों की शहादत से खिलवाड़ करना शहीदों की शहादत का मूल्य लगाना शहीदों की कुर्बानी का मूल्य लगाना यह राष्ट्रद्रोह का काम  है और ऐसे राष्ट्रद्रोह के काम  करने वाले लोगों को नेताओं को आप बर्दाश्त कर रहे हैं और मैं आपसे इसी  निवेदन के साथ  अपना व्याख्यान खत्म कर रहा हूं कि यह इतने बड़े प्रश्न है जो आपके बीच में  मैंने उठाए हैं इनका जवाब तलाशिय   मिलकर अगर  हम जवाब नहीं ढूंढेंगे तो आने वाली पीढ़ी हमको माफ नहीं करेगी और आने वाली पीढ़ी जब हम से सवाल पूछेगी तो शायद हमारे पास कोई जवाब नहीं होगा आज मेरा दिल बहुत भरा हुआ है ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं हूं इसलिए आपसे माफी चाहता हूं और विदा चाहता हूं

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