Saturday, 30 January 2016

रघुपति राघव राजा राम” गीत में नही है, ईश्वर                               अल्लाह का जिक्र

कहते है कि किसी की पहचान मिटानी हो तो उस के दस्तावेज में नाम बदल दो ऐसा ही कुछ हिन्दू धर्म के गीत रघुपति राघव राजा राम के साथ हुआ है |

रघुपति राघव राजा राम हिन्दू धर्म का एक प्रशिद्ध गीत है| जिस को राम धुन के नाम से भी जाना जाता है| यह गीत श्री नामा रामयानाम से लिया गया था जिस को लक्ष्मनाचार्य जी ने लिखा था|


Original lyrics:

रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम
Transliteration
Raghupati raghava rajaram
Patita paavana sitaram
Sundara vigraha meghashyam
Ganga tulasi salagram
Bhadra girishwara sitaram
Bhakata janapriya sitaram
Janaki ramana sitaram
Jaya jaya raghava sitaram


जिस गीत को गाँधी ने नमक का कानून तोड़ने के दौरान अपने साथियों के साथ गाया था उस गीत को Vishnu Digambar Paluskar जी ने लिखा था| जिस के शब्द थे :



Hindi

रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान
Transliteration :

raghupati rāghav rājārām,
patit pāvan sītārām
sītārām, jai sītārām,
bhaj tū pyāre sītārām
īśvar allāh tero nām,
sab ko sanmati de bhagavān
Translation:

Chief of the house of Raghu, Lord Rama,
Uplifters of those who have fallen, Sita and Rama,
Sita and Rama, Sita and Rama,
O beloved, praise Sita and Rama,
God and Allah are your names,
Bless everyone with real wisdom, Lord

Wednesday, 27 January 2016

जयपुर (राजस्थान) : नाबालिक कट्टरपंथियोंने राष्ट्रध्वज को फाडकर लगा दी आग !

कट्टरपंथी लोगोंकी भारतविरोधी राष्ट्रद्रोही भूमिका इस घटना से सामने आती है ! – सम्पादक, हिन्दूजागृति

जयपुर : बिचून गांव में स्थित राजकीय विद्यालय में मंगलवार शाम कुछ कट्टरपंथीयों ने विद्यालय पर फहराए गए राष्ट्रीय ध्वज को उतार कर फाड दिया और फिर उसे आग लगा दी । घटना के बाद मौके पर बडी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए आैर प्रदर्शन कर रहे थे । पुलिस और प्रशासन के आधिकारी मौके पर घटना स्थल पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाकर शांत किया ।
पकडे गए आरोपियों में तीन आरोपी नाबालिक हैं । मंगलवार शाम लगभग ६ बजे राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में बिचून निवासी पांच कट्टरपंथी पहुंचे और स्कूल पर लगे तिरंगे को उतार लिया । इसके बाद आरोपियों ने झंडे के दो टुकडे कर दिए और उसे आग लगा दी । मौके पर पहुंचे पाठशाला प्रशासन ने आग बुझाकर झंडे को पूर्णरूप से जलने बचाया । स्थानीय लोगों ने आरोपियों को पकड़ कर सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग की ।
पुलिस ने इस प्रकरण में, अकबर अली (आयु १८ वर्ष), कबू उर्फ मुस्ताक (आयु २० वर्ष) के साथ १३ से १६ वर्ष आयु के तीन बच्चों को बंदी बनाया है । बुधवार को पूछताछ के पश्चात्‌ आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा । आरोपियों के विरुध्द राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम १९७१ की धारा दो में मामला दर्ज किया गया है 

गांधी नहीं सुभाषचंद्र बोस की सेना ने दिलाई थी भारत को स्वतंत्रता !

नई देहली : नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर संशोधन कर चुके सैन्य इतिहासकार (मिलिट्री हिस्टोरियन) जनरल जीडी बख्शी की पुस्तक ‘बोस: इंडियन समुराई’ में दावा किया गया है कि, सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल सेना (आईएनए) ने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । गांधी के ‘भारत छोडो आंदोलन’ से ज्‍यादा सुभाषचंद्र बोस की सेना के कारण भारत काे स्वतंत्रता मिली ।
बख्शी के अनुसार, तब के ब्रिटिश प्रधानमंत्री रहे क्लीमेंट एटली ने कहा था कि, नेताजी की इंडियन नेशनल सेना ने स्वतंत्रता दिलाने में बडी भूमिका निभार्इ । वहीं, गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे अहिंसा आंदोलन का प्रभाव बहुत कम था ।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री की बातचीत का खुलासा

बख्शी ने, एटली और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे न्यायाधीश पीबी चक्रबर्ती के बीच की बातचीत का भी उल्लेख किया है । वर्ष १९५६ में एटली भारत आए थे और कोलकाता में पीबी चक्रबर्ती के अतिथी थे । भारत की स्वतंत्रता के दस्तावेज पर एटली ने ही हस्ताक्षर किए थे । चक्रबर्ती कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और पश्चिम बंगाल के कार्यवाहक राज्यपाल भी थे ।

सुभाषचंद्र बोस की सेना का प्रभाव

चक्रबर्ती ने इतिहासकार आर.सी. मजूमदार को उनकी पुस्तक ‘ए हिस्ट्री ऑफ बंगाल’ के लिए खत लिखा था । चक्रबर्ती ने लिखा, ‘मेरे राज्यपाल रहने के कालावधी में एटली दो दिन के लिए राज्यपाल भवन में रुके थे । इस दौरान ब्रिटिशर्स के भारत छोडने के कारणों पर लम्बा विचार-विमर्श हुआ । मैंने उनसे पूछा था कि, गांधीजी का भारत छोडो आंदोलन (१९४२) स्वतंत्रता के कुछ साल पहले ही शुरू हुआ था । क्या उसका इतना प्रभाव हुआ कि अंग्रेजों को इंग्‍लैण्‍ड लौटना पडा ?’
बक्‍शी की पुस्तक के अनुसार ‘उत्तर में एटली ने, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सेना के प्रयत्नोंको महत्वपूर्ण बताया था ।’ पुस्तक के अनुसार चक्रबर्ती ने जब एटली से पूछा कि गांधीजी के अहिंसा आंदोलन का कितना प्रभाव हुआ तो एटली ने हंसते हुए जवाब दिया – ‘बहुत कम’ । चक्रबर्ती और एटली की इस बातचीत को १९८२ में ऐतिहासिक समीक्षा संस्थान के राजन बोरा ने ‘सुभाष चंद्र बोस-द इंडियन नेशनल सेना एंड द वॉर ऑफ इंडियाज लिबरेशन’ इस लेख में छापा था ।

सैनिकों का विद्रोह आया काम

१९४६ में रॉयल इंडियन नेवी के २० हजार सैनिकाें ने अंग्रेजों के विरुध्द बगावत कर दी थी । सैनिक ७८ जहाज लेकर मुंबई पहुंच गए थे । इन जहाजों पर तिरंगा भी फहरा दिया गया था । हालांकि तब इस बगावत को दबा लिया गया । लेकिन अंग्रेजों के लिए यह घतरे की घंटी थी ।

अयोध्या में राममंदिर के ऊपर बनाई गई थी मस्जिद – डॉ. के.के. मोहम्म

नर्इ देहली : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रसिध्द पुरातत्ववेत्ता डॉ. के.के. मोहम्मद ने, वर्षों बाद भी अयोध्या प्रकरण का समाधान नहीं निकलने के लिए वामपंथी इतिहासकारों को उत्तरदायी ठहराया है । उनके अनुसार वामपंथियों ने इस मुद्दों का समाधान नहीं होने दिया ।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्तर क्षेत्र के पूर्व निदेशक डॉ. मोहम्मद ने मलयालम में लिखी आत्मकथा ‘जानएन्ना भारतीयन’ (मैं एक भारतीय) में यह दावा करते हुए कहा है कि, ‘वामपंथी इतिहासकारों ने इस मुद्दे को लेकर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के नेताओं के साथ मिलकर देश के मुसलमानों को पथभ्रष्ट किया ।’ उनके अनुसार, इन लोगों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक को भी पथभ्रष्ट करने का प्रयास किया था ।
अपनी आत्मकथा में डॉ.के.के. मोहम्मद ने बताया है कि, १९७६-७७ के कालावधि में एएसआइ के तत्कालीन महानिदेशक प्रो. बीबी लाल के नेतृत्व में पुरातत्ववेत्ताओं के दल द्वारा अयोध्या में किए गए उत्खनन के कालावधि में मंदिरों के ऊपर बने कलश के नीचे लगाया जाने वाला गोल पत्थर मिला । यह पत्थर केवल मंदिर में ही लगाया जाता है । इसी प्रकार जलाभिषेक के पश्‍चात, मगरमच्छ के आकार की जल प्रवाहित करनेवाली प्रणाली भी मिली है ।
डॉ.के.के. मोहम्मद
देश के एक प्रमुख पोर्टल समाचार से बात करते हुए डॉ. मोहम्मद ने बताया कि, इस मुद्दे को लेकर इरफान हबीब (भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष) के नेतृत्व में कार्रवाई समिति की कई बैठकें हुईं थीं ।
उन्होंने कहा कि, ‘रोमिला थापर, बिपिन चंद्रा और एस गोपाल सहित इतिहासकारोने कट्टरपंथी मुसलमान समूहों के साथ मिलकर तर्क दिया था कि, १९ वीं शताब्दी से पहले मंदिर की तोडफोड और अयोध्या में बौद्ध जैन केंद्र होने का कोई संदर्भ नहीं है । इसका इतिहासकार इरफान हबीब, आरएस शर्मा, डीएन झा, सूरज बेन और अख्तर अली ने भी समर्थन किया था ।’ इनमें से कइयों ने सरकारी बैठकों में हिस्सा लिया और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का खुला समर्थन किया ।’
पुस्तक के एक अध्याय में डॉ. मोहम्मद ने लिखा है, ‘जो कुछ भी मैंने जाना और कहा है, वह ऐतिहासिक सच है । हमे विवादित स्थल पर एक नहीं, बल्कि १४ स्तंभ मिले थे । सभी स्तंभों पर कलश खुदे थे । ये ११ वीं व १२ वीं शताब्दी के मंदिरों में पाए जानेवाले कलश के समान थे । कलश ऐसे नौ प्रतीकों में एक हैं, जो मंदिर में होते हैं । इस से कुछ मात्रा में यह भी स्पष्ट हो गया था कि, मस्जिद एक मंदिर के अवशेष पर खडी है । उन दिनों मैंने इस बारे में अंग्रेजी के कई समाचार पत्रों को लिखा था ।
उन्होंने यह भी बताया है कि, मेरे विचार को केवल एक समाचार पत्र ने प्रकाशित किया और वह भी ‘लेटर टू एडिटर कॉलम’ में ।’
हिन्दुओ, ध्यान रखें कि कोई कितने भी प्रमाण दे; परंतु हिंदुद्रोही और अल्पसंख्यक कभी भी हिन्दुआें को अयोध्या में राममंदिर नहीं बनाने देंगे । इसलिए राममंदिर का निर्माण करने हेतु संगठित हो जाएं  

Saturday, 23 January 2016

       गाय की पूजा करने वालों को मारकर करेंगे कश्मीर पर कब्जा: IS

नई दिल्ली। खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने कश्मीर पर कब्जा करने और गाय की पूजा करने वाले हिंदुओं को खत्म करने की बात कही है। आईएस ने यह दावा अपने प्रोपेगैंडा मैगजीन दाबिक में किया है। बता दें कि इससे पहले आईएसआईएस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी देख लेने की धमकी दी थी। कश्मीर में रहा है मुसलमानों का शासन इस्लामिक स्टेट प्रोपेगैंडा मैगजीन 'दाबिक' के 13वें एडिशन में एक इंटरव्यू में अफगानिस्तान-पाकिस्तान रीजन के कमांडर हाफिज सईद खान ने कहा है- इतिहास गवाह है कि कश्मीर में मुसलमानों का शासन रह चुका है, लेकिन अब यहां गाय की पूजा करने वाले हिंदू और नास्तिक चीनी रहने लगे हैं।
इन हिंदुओं और काफिर मुस्लिमों को खत्म करने और खलीफा के शासन को बढ़ाने के लिए हम तैयारी कर रहे हैं। अब गाय की पूजा करने वालों का शासन हाफिज सईद खान ने कहा इस रीजन (कश्मीर) में पहले मुस्लिमों का शासन था, लेकिन अब गाय की पूजा करने वाले हिंदुओं, नास्तिक चीनी और दूसरे रिलीजन के लोगों ने कब्जा कर लिया है। उसने कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान रीजन पर आईएस का कंट्रोल होना बहुत जरूरी है। ये खलीफा और मुसलमानों के शासन को बढ़ाने का गेट-वे है। शरिया कानून के तहत सिविल गवर्नेंस लागू दाबिक में आईएस ने दावा किया है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के पांच एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन्स पर संगठन का कब्जा हो गया है। इराक और सीरिया की तरह यहां भी शरिया कानून के तहत सिविल गवर्नेंस लागू किया जा चुका है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान सरकार खलीफा या जिहाद के बीच न आएं, यही बेहतर होगा। इस दौरान आईएस ने इस क्षेत्र में पहले से सक्रिय आतंकी संगठनों तालिबान और लश्कर-ए-तैयबा को भी चेतावनी दी।
कौन है हाफिज खान? - आईएस में अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र का कमांडर यह हाफिज सईद खान लश्कर सरगना हाफिज सईद से अलग है, लेकिन पहले वह इसी क्षेत्र में तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) से जुड़ा था। बाद में आईएस से जुड़ गया। - हाफिज खान को मुल्ला सईद ओरकजई के नाम से भी जाना जाता है। आईएस में जुडऩे के बाद सईद को खुरासान (ईरान) का अमीर बना दिया गया। इसके साथ ही वह अफगानिस्तान-पाकिस्तान में इस टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन का कमांडर है। - आईएस खुरासान पर कब्जा करने की कोशिश में है, वहीं कमांडर अपने शासन को अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, तुर्कमेनिस्तान और कश्मीर से लगते चीन तक फैलाना चाहता है। - दाबिक के अंग्रेजी संस्करण में आईएस ने यह साफ लिखा है कि कश्मीर पर कब्जा करके रहेंगे। गृह मंत्री का दावा- भारत में आईएस का प्रभाव नगण्य गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में केंद्रीय खुफिया विभाग, जांच एजेंसियों और 13 राज्यों की पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों के माध्यम से युवाओं के बीच आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव पर नजर बनाए रखने की बात कही थी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय परंपरा और पारिवारिक मूल्य इस बुराई पर भी विजय पा लेंगे। आईएस का फैलाव भारत में बहुत सीमित है और अन्य देशों के मुकाबले लगभग नगण्य है, लेकिन फिर भी सभी मोर्चों पर निगरानी रखे जाने की जरूरत है।

    Thursday, 21 January 2016


    नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पुराने और दुर्लभ मूल फोटो Rare Photos Of Netaji Subhash Chandra Bose


    Subhas Chandra Bose in 1940
    Subhas Chandra Bose in 1940
     Subhas Chandra Bose (L) greeting admirers in 1940
    Subhas Chandra Bose (L) greeting admirers in 1940
    Subhas Chandra Bose (C) being greeted w. garland of flowers after his arrival in Victoria Station
    Subhas Chandra Bose (C) being greeted w. garland of flowers after his arrival in Victoria Station

    Pro-Japanese, anti-British Indian Nationalist leader Subhas Chandra Bose (C) enjoying a meal at Bardoli Ashram on his way to the 51st Indian National Congress during WWII in 1940.
    Pro-Japanese, anti-British Indian Nationalist leader Subhas Chandra Bose (C) enjoying a meal at Bardoli Ashram on his way to the 51st Indian National Congress during WWII in 1940. Subhas Chandra Bose, the new President of the 51st Indian National Congress, wearing traditional formal clothing in 1940
    Subhas Chandra Bose, the new President of the 51st Indian National Congress, wearing traditional formal clothing in 1940
    Netaji in Germany
    Netaji in Germany
     Netaji in Germany
    Netaji in Germany 
    Netaji in Germany
    Netaji in Germany 
    Subhas Chandra Bose in a Tokyo speech in 1945
    Subhas Chandra Bose in a Tokyo speech in 1945 
    George Lansbury (1859-1940) the Labour politician greets the Indian nationalist leader and President of the All-India Congress Subhas Chandra.
    George Lansbury (1859-1940) the Labour politician greets the Indian nationalist leader and President of the All-India Congress Subhas Chandra.
    Netaji Subhas Chandra Bose and Members of the Azad Hind Fauj - 1940's 
    Netaji Subhas Chandra Bose and Members of the Azad Hind Fauj - 1940's
    Smiling Photo - Subhas Chandra Bose 
    Smiling Photo - Subhas Chandra Bose
    Netaji Subhas Chandra Bose Reviewing the Troops of Azad Hind Fauj - 1940's
    Netaji Subhas Chandra Bose Reviewing the Troops of Azad Hind Fauj - 1940's 

     
     
     
     Rare Pic Of Netaji Subhash Chandra Bose With Adolf HitlerNetaji Subhas Chandra Bose Reviewing the Troops of Azad Hind Fauj - 1940's
     
    Rare photographs of Subhash Chandra Bose, his family 
    Anita-Subhash-Bose 
    Anita-Subhash-Bose
    Emilie-Subhash-Bose 
    Emilie-Subhash-Bose
    Father Janakinath-Bose 
    Father Janakinath-Bose
    Mother Prabhabati-Bose 
    Mother Prabhabati-Bose
    subhas_bose_with_his_wife_emilie_schenkl 
    subhas_bose_with_his_wife_emilie_schenkl
    raja_habib_ur_rahman_khan 
    raja_habib_ur_rahman_khan
    Rare-photographs-associated-with-Subhash-Chandra-Bose-Dnyaneshwar-Deshpande-and-his-Japanese-wife-flanking-unknown-person 
    Rare-photographs-associated-with-Subhash-Chandra-Bose-Dnyaneshwar-Deshpande-and-his-Japanese-wife-flanking-unknown-person
    Group-Photo-with--Shri-Dadasaheb-Khaparde-in-in-center-wearing-a-turban-and-Netaji-sitting-next-to-him-from-1938 
    Group-Photo-with--Shri-Dadasaheb-Khaparde-in-in-center-wearing-a-turban-and-Netaji-sitting-next-to-him-from-1938
    Rare-photographs-associated-with-Subhash-Chandra-Bose-House-of-Dnyaneshwar-Deshpande-in-Rangoon-later-occupied-by-Netaji-Subhash-Chandra-Bose-with-his-residence-and-H.Q..PNG 
    Rare-photographs-associated-with-Subhash-Chandra-Bose-House-of-Dnyaneshwar-Deshpande-in-Rangoon-later-occupied-by-Netaji-Subhash-Chandra-Bose-with-his-residence-and-H.Q.
     

    Wednesday, 6 January 2016

    शिवपुराण में वर्णित है मृत्यु के ये 12 संकेत

    शिवपुराण में वर्णित है मृत्यु के ये 12 संकेत

     
     
    धर्म ग्रंथों में भगवान शिव को महाकाल भी कहा गया है। महाकाल का अर्थ है काल यानी मृत्यु भी जिसके अधीन हो। भगवान शिव जन्म-मृत्यु से मुक्त हैं। अनेक धर्म ग्रंथों में भगवान शंकर को अनादि व अजन्मा बताया गया है। भगवान शंकर से संबंधित अनेक धर्मग्रंथ प्रचलित हैं, लेकिन शिवपुराण उन सभी में सबसे अधिक प्रामाणिक माना गया है।
    इस ग्रंथ में भगवान शिव से संबंधित अनेक रहस्यमयी बातें बताई गई हैं। इसके अलावा इस ग्रंथ में ऐसी अनेक बातें लिखी हैं, जो आमजन नहीं जानते। शिवपुराण में भगवान शिव ने माता पार्वती को मृत्यु के संबंध में कुछ विशेष संकेत बताए हैं। इन संकेतों को समझकर यह जाना जा सकता है कि किस व्यक्ति की मौत कितने समय में हो सकती है। ये संकेत इस प्रकार हैं-

    1- शिवपुराण के अनुसार जिस मनुष्य को ग्रहों के दर्शन होने पर भी दिशाओं का ज्ञान न हो, मन में बैचेनी छाई रहे, तो उस मनुष्य की मृत्यु 6 महीने में हो जाती है।
    2- जिस व्यक्ति को अचानक नीली मक्खियां आकर घेर लें। उसकी आयु एक महीना ही शेष जाननी चाहिए।
    3- शिवपुराण में भगवान शिव ने बताया है कि जिस मनुष्य के सिर पर गिद्ध, कौवा अथवा कबूतर आकर बैठ जाए, वह एक महीने के भीतर ही मर जाता है। ऐसा शिवपुराण में बताया गया है।
    4- यदि अचानक किसी व्यक्ति का शरीर सफेद या पीला पड़ जाए और लाल निशान दिखाई दें तो समझना चाहिए कि उस मनुष्य की मृत्यु 6 महीने के भीतर हो जाएगी। जिस मनुष्य का मुंह, कान, आंख और जीभ ठीक से काम न करें, शिवपुराण के अनुसार उसकी मृत्यु 6 महीने के भीतर हो जाती है।
    5- जिस मनुष्य को चंद्रमा व सूर्य के आस-पास का चमकीला घेरा काला या लाल दिखाई दे, तो उस मनुष्य की मृत्यु 15 दिन के अंदर हो जाती है। अरूंधती तारा व चंद्रमा जिसे न दिखाई दे अथवा जिसे अन्य तारे भी ठीक से न दिखाई दें, ऐसे मनुष्य की मृत्यु एक महीने के भीतर हो जाती है।
    6- त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) में जिसकी नाक बहने लगे, उसका जीवन पंद्रह दिन से अधिक नहीं चलता। यदि किसी व्यक्ति के मुंह और कंठ बार-बार सूखने लगे तो यह जानना चाहिए कि 6 महीने बीत-बीतते उसकी आयु समाप्त हो जाएगी।
    7- जब किसी व्यक्ति को जल, तेल, घी तथा दर्पण में अपनी परछाई न दिखाई दे, तो समझना चाहिए कि उसकी आयु 6 माह से अधिक नहीं है। जब कोई अपनी छाया को सिर से रहित देखे अथवा अपने को छाया से रहित पाए तो ऐसा मनुष्य एक महीने भी जीवित नहीं रहता।
    8- जब किसी मनुष्य का बायां हाथ लगातार एक सप्ताह तक फड़कता ही रहे, तब उसका जीवन एक मास ही शेष है, ऐसा जानना चाहिए। जब सारे अंगों में अंगड़ाई आने लगे और तालू सूख जाए, तब वह मनुष्य एक मास तक ही जीवित रहता है।
    9- जिस मनुष्य को ध्रुव तारा अथवा सूर्यमंडल का भी ठीक से दर्शन न हो। रात में इंद्रधनुष और दोपहर में उल्कापात होता दिखाई दे तथा गिद्ध और कौवे घेरे रहें तो उसकी आयु 6 महीने से अधिक नहीं होती। ऐसा शिवपुराण में बताया गया है।
    10- जो मनुष्य अचानक सूर्य और चंद्रमा को राहू से ग्रस्त देखता है (चंद्रमा और सूर्य काले दिखाई देने लगते हैं) और संपूर्ण दिशाएं जिसे घुमती दिखाई देती हैं, उसकी मृत्यु 6 महीने के अंदर हो जाती है।
    11- शिवपुराण के अनुसार जो व्यक्ति हिरण के पीछे होने वाली शिकारियों की भयानक आवाज को भी जल्दी नहीं सुनता, उसकी मृत्यु 6 महीने के भीतर हो जाती है। जिसे आकाश में सप्तर्षि तारे न दिखाई दें, उस मनुष्य की आयु भी 6 महीने ही शेष समझनी चाहिए।
    12- शिवपुराण के अनुसार जिस व्यक्ति को अग्नि का प्रकाश ठीक से दिखाई न दे और चारों ओर काला अंधकार दिखाई दे तो उसका जीवन भी 6 महीने के भीतर समाप्त हो जाता है।

    विष्णु पुराण- सड़क पर चलते समय दिखाई दें ये 6 चीजें, तो दूर से निकलना चाहिए

     
    रोड पर चलते समय कई प्रकार की चीजें दिखाई देती हैं। इन चीजों में कुछ अशुभ और नुकसानदायक भी होती हैं। यहां 6 ऐसी चीजें बताई जा रही हैं जो अशुभ होती है और यदि रोड पर ये दिखाई दें तो हमें दूर से निकल जाना चाहिए। इन अशुभ चीजों के करीब नहीं जाना चाहिए।
    Vishnu Purana- Tips About Walking On The Road
    विष्णु पुराण में लिखा है इन 6 अशुभ चीजों के बारे में
    कुल 18 पुराण बताए गए हैं। इनमें से एक विष्णु पुराण भी है। इस पुराण में सुख-समृद्धि और पवित्रता बनाए रखने के लिए कई प्रकार के नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के साथ ही सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त की जा सकती है। विष्णु पुराण में बताया गया है कि रास्ते में चलते समय किन वस्तुओं से दूर रहना चाहिए, अन्यथा परेशानियों और दुखों का सामना करना पड़ सकता है, इन चीजों से हमारी पवित्रता भी नष्ट हो जाती है। अत: यहां बताई जा रही 6 चीजों से दूर रहना चाहिए।

    1. स्नान के कारण फैला हुआ पानी
    यदि हम कहीं जा रहे हैं और रास्ते में किसी व्यक्ति के स्नान के बाद फैला हुआ पानी दिखाई दे रहा है तो उस पानी से दूर होकर रास्ता पार करना चाहिए। स्नान के बाद फैला हुआ पानी गंदा और अपवित्र होता है। इस पानी के संपर्क में आने से हमारी पवित्रता नष्ट हो जाती है।
    2. अस्थि यानी हड्डी
    वाहन चालकों की लापरवाही के चलते रोड पर दुर्घटनाएं होती रहती हैं और इन दुर्घटनाओं में कई बार जानवरों (जैसे कुत्ते, सांप आदि) की मौत हो जाती है। ऐसे में मृत प्राणी के अस्थियां रोड पर बिखरी दिखाई देती हैं तो उनसे दूर होकर रास्ता पार करना चाहिए। मृत प्राणी की अस्थियों के संपर्क में आने के बाद स्नान करना बहुत आवश्यक हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार मृत प्राणी के संपर्क में आने के बाद हम अपवित्र हो जाते हैं, इसी वजह से किसी शव यात्रा में शामिल होने के तुरंत बाद स्नान करना आवश्यक बताया गया है।
    3. केश यानी बाल
    कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति के टूटे हुए केश यानी बाल रास्ते में दिखाई देते हैं। बालों को भी अपवित्र माना गया है। रास्ते में दिखाई देने वाले बालों से भी दूर होकर ही निकलना चाहिए। इन्हें लांघना भी नहीं चाहिए। यदि खाने में बाल गिर जाए तो पूरा खाना भी अपवित्र हो जाता है।
    4. कंटक यानी कांटें
    आमतौर पर यदि रास्ते में कहीं कांटें दिखाई देते हैं तो हमें दूर होकर निकलना चाहिए, अन्यथा पैरों में कांटें चुभ सकते हैं। यदि संभव हो सके तो रास्ते से कांटें हटाने के प्रयास करना चाहिए, ताकि दूसरों को कांटों के कारण परेशानियों का सामना ना करना पड़े।
    5. भस्म यानी राख
    जब यज्ञ-हवन जैसे पूजन कर्म पूर्ण हो जाते हैं तो उससे भस्म (राख) प्राप्त होती है। यदि रास्ते में ऐसी भस्म दिखाई दे तो इससे भी दूर होकर ही निकलना चाहिए। यज्ञ-हवन से प्राप्त भस्म पवित्र होती है और यदि इस पर पैर लगता है तो इसे अशुभ माना जाता है।
    6. अपवित्र वस्तु
    यदि रास्ते में किसी भी प्रकार की अपवित्र वस्तु (गंदगी) दिखाई देती है तो उससे दूर रहकर रास्ता पार करना चाहिए। पूजन और किसी भी खास काम में जाते समय पवित्रता बनी रहे, इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

    विष्णु पुराण- रात के समय नहीं करने चाहिए ये तीन काम

    विष्णु पुराण- रात के समय नहीं करने चाहिए ये तीन काम



    सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे, इसके लिए शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों में बताया गया है कि हमें किस समय कौन से काम नहीं करना चाहिए। यहां जानिए विष्णु पुराण के अनुसार 3 ऐसी बातें, जिनसे रात के समय दूर रहना चाहिए…
    Vishnu Puran- We Should Not Do These 3 Works In Night
    विष्णु पुराण में बताए गए गृहस्थ संबंधी नियमों का पालन करने पर भगवान विष्णु, महालक्ष्मी सहित सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त की जा सकती है। यहां जानिए बुद्धिमान व्यक्ति को रात के समय किन 3 से दूर रहना चाहिए…

    1. चौराहों पर नहीं जाना चाहिए
    किसी भी समझदार व्यक्ति को रात के समय चौराहे से दूर ही रहना चाहिए। रात के समय अक्सर चौराहों पर असामाजिक तत्वों की उपस्थिति रहती है। ऐसे में यदि कोई सज्जन व्यक्ति चौराहे पर जाएगा तो उसे परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, ये काम सदाचार के नियमों के विरुद्ध भी है। रात के समय अपने घर में ही रहना चाहिए।
    2. श्मशान के आसपास नहीं जाना चाहिए
    रात के समय श्मशान के आसपास जाना भी नहीं चाहिए। श्मशान क्षेत्र में सदैव नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। इसका बुरा असर हमारे मन और मस्तिष्क पर पड़ सकता है। साथ ही, श्मशान क्षेत्र में जलते हुए शवों से निकलने वाला धुआं भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहता है। उस क्षेत्र के वातावरण में कई सूक्ष्म कीटाणु भी रहते हैं जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसीलिए श्मशान जाने के बाद स्नान करना जरूरी बताया गया है। रात के समय में स्नान करना भी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इन्हीं कारणों के चलते रात के समय श्मशान के आसपास नहीं जाना चाहिए।
    3. बुरे चरित्र वाले व्यक्ति से दूर रहना चाहिए
    वैसे तो बुरे चरित्र वाले व्यक्ति से हमेशा ही दूर रहना चाहिए, लेकिन रात के समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बुरे चरित्र वाले लोग अधिकतर अधार्मिक और गलत कार्य रात के समय में ही करते हैं। ऐसे में यदि कोई सज्जन व्यक्ति इनके साथ रहेगा तो वह परेशानियों में उलझ सकता है। अत: इन लोगों से दूर रहना चाहिए।


    महाभारत: 

       ये 3 लोग कर सकते हैं हर मुसीबत का                                    सामना




    महाभारत के शांतिपर्व में पितामाह भीष्म ने युधिष्ठिर को कई ज्ञान की बातें बताई थीं। वे बातें न की सिर्फ उस समय में बल्कि आज के समय में भी बहुत उपयोगी मानी जाती है। महाभारत में तीन ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है, जो किसी भी परिस्थिति का सामना आसानी से कर सकते हैं।
    Lesson From Mahabharat in Hindi
    श्लोक
    न हि बुद्धयान्वितः प्राज्ञो नीतिशास्त्रविशारदः।
    निमज्जत्यापदं प्राप्य महतीं दारुणमपि।।

    अर्थात-
    बद्धिमान, विद्वान और नीतिशास्त्र में निपुण व्यक्ति भारी और भयंकर विपत्ति आने पर भी उसमें फंसता नहीं है।
    अपनी बुद्धि से ही पार की थी युधिष्ठिर ने धर्म की परीक्षा
    Lesson From Mahabharat in Hindi
    महाभारत में दी गई एक कथा के अनुसार, पांडवों के वनवास के दौरान एक बार खुद यमराज ने युधिष्ठिर की बुद्धिमानी की परीक्षा लेनी चाही। इसी उद्देश्य से यमराज ने यक्ष का रूप धारण कर लिया। यक्षरूपी यमराज ने सरोवर के पास एक-एक करके सभी पांडवों की परीक्षा ली, जिसमें पार न करने की वजह से युधिष्ठिर को छोड़ कर बाकी चारों पांडव सरोवर के पास मृत पड़े थे। जब युधिष्ठिर ने अपने सभी भाइयों को मरा हुआ पाया तब यक्ष से उनको जीवित करने को कहा। यक्ष ने ऐसा करने के लिए युधिष्ठिर के सामने एक शर्त रखी। शर्त यह थी कि धर्म युधिष्ठिर से कुछ सवाल करेंगे और अगर युधिष्ठिर ने उनके सही जवाब दे दिए, तो वह यक्ष उसने सभी भाइयों को जीवित कर देगा। ऐसी विपरीत परिस्थिति में भी युधिष्ठिर ने अपनी बुद्धिमानी से यक्ष की परीक्षा पार कर ली और अपने सभी भाइयों को फिर से जीवित करा लिया। इसलिए कहते है बुद्धिमान मनुष्य अपनी सुझ-बूझ से हर परेशानी का हल निकल सकता है।
    पहले ही कौरव वंश के विनाश की बात कह चुके थें विद्वान विदुर
    Lesson From Mahabharat in Hindi
    कहा जाता है कि जब दुर्योधन का जन्म हुआ था, तब वह जन्म होते ही गीदड़ की तरह जोर-जोर से रोने लगा और शोर मचाने लगा। विदुर महाविद्वान थे, उन्होंने दुर्योधन को देखते ही धृतराष्ट्र को उसका त्याग कर देने की सलाह दी थी। वह जान समझ गए थे कि यह बालक ही कौरव वंश के विनाश का कारण बनेगा। इसके अलावा विदुर ने जीवनभर अपने विद्वान होने के प्रमाण दिए हैं। वे हर समय धृतराष्ट्र को सही सलाह देते थे, लेकिन अपने पुत्र के प्यार में धृतराष्ट्र विद्वान विदुर की बातों को समझ न सकें और इसी वजह से उनके कुल का नाश हो गया।
    पांडवों को हर परिस्थिति में बचाया श्रीकृष्ण की नीतियों ने
    Lesson From Mahabharat in Hindi
    श्रीकृष्ण एक सफल नीतिकार थे। वे सभी तरह की नीतियों के बारे में जानते थे। कौरवों ने जीवनभर पांडवों के लिए कोई न कोई परेशानियां खड़ी की, लेकिन श्रीकृष्ण ने अपनी सफल नीतियों से पांडवों को हर वक्त सहायता की। अगर पांडवों के पास श्रीकृष्ण के जैसे नीतिकार न होते तो शायद पांडव युद्ध में कभी विजयी नहीं हो पाते। उसी तरह नीतियों को जानने वाले और उनका पालन करने वाले व्यक्ति के सामने कैसी भी परेशानी आ जाएं, वह उसका सामान आसानी से कर लेता है।

    महाभारत न सिर्फ एक धर्म ग्रंथ है, बल्कि इसमें लाइफ मैनेजमेंट से जुड़े कई सूत्र भी बताए गए हैं। जीवन प्रबंधन के ये सूत्र आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। महाभारत के तीर्थयात्रा पर्व में बताया गया है कि किन 6 लोगों के सामने हमें गुप्त बातें नहीं करनी चाहिए, नहीं तो हम किसी संकट में फंस सकते हैं। आइए जानते है किन 6 लोगों के सामने राज की बात नहीं करनी चाहिए –
    Mahabharat Tirth Yatra Parva in Hindi
    श्लोक

    स्त्रियां मूढेन बालेन लुब्धेन लघुनापि वा।
    न मंत्रयीत गुह्यानि येषु चोन्मादलक्षणम्।।
    अर्थ- 1. स्त्री, 2. मूर्ख, 3. बालक, 4. लोभी और 5. नीच पुरुषों के साथ तथा जिसमें 6. उन्माद का लक्षण दिखाई दे, उसके साथ भी गुप्त परामर्श न करें।
    1. स्त्री
    स्त्रियों का स्वभाव चंचल होता है। कई बार स्त्रियां ऐसी बातें भी सभी के सामने बोल देती हैं, जिससे परिवार का मान-सम्मान कम होता है। स्त्रियों के बारे में ये भी कहा जाता है कि इनके पेट में कोई भी गुप्त बात नहीं टिक सकती। कभी न कभी ये किसी के सामने गुप्त बात बोल ही देती हैं। इसलिए स्त्रियों के सामने कभी भी कोई गुप्त बात नहीं करनी चाहिए।
    2. मूर्ख
    मूर्ख यानी वह व्यक्ति जिसे अच्छे-बुरे, अपने-पराए या दोस्त-दुश्मन का फर्क मालूम नहीं होता। ऐसे व्यक्ति के सामने यदि कोई गुप्त बात कही जाए तो जाने-अनजाने में वह किसी को भी वह बात बता सकता है। ऐसी बात अगर हमारे दुश्मनों को पता चल जाए तो हम किसी बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। इसलिए मूर्ख व्यक्ति के सामने कभी कोई गुप्त बात नहीं करनी चाहिए।
    3. बालक
    किसी बच्चे के सामने भी कोई गुप्त बात नहीं कहनी चाहिए, क्योंकि उन्हें नहीं पता होता कि किसके सामने क्या बात बोलनी चाहिए और क्या नहीं। ऐसी स्थिति में बच्चे के सामने कही गई गुप्त दूसरे लोगों को पता चल सकती है और इसका नुकसान हमें आने वाले समय में उठाना पड़ सकता है। इसलिए यदि हमारे आस-पास बच्चे हैं तो हमें सोच-समझ कर ही बातें करनी चाहिए।
    4. लोभी
    जिस इंसान को धन का लालच होता है, वह अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए किसी का भी नुकसान करने से नहीं चूकता। ऐसी स्थिति में वह किसी की भी गुप्त बात, किसी दूसरे को पैसे के लालच में आकर बता सकता है। फिर चाहे वह आपका दुश्मन ही क्यों न हो। इसलिए लालची इंसान पर भरोसा कर उसे कभी कोई राज की बात नहीं बतानी चाहिए।
    5. नीच पुरुष (बुरे काम करने वाला)
    जो पुरुष चोरी, लूट, डकैती, मुनाफाखोरी आदि ऐसे काम करते हैं, जिससे दूसरों को नुकसान होता है, वह निम्न श्रेणी के होते हैं। ऐसे लोग अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं। इसलिए न तो ऐसे लोगों के साथ रहना चाहिए और न ही इनके सामने कभी कोई गुप्त बातें करनी चाहिए।
    6. जिसमें उन्माद के लक्षण दिखाई दें
    कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनमें उन्माद (पागलपन) के लक्षण दिखाई देते हैं, हालांकि ये पागल नहीं होते। लेकिन कभी-कभी ये ऐसे काम कर देते हैं जो नहीं करना चाहिए। कभी ये अतिउत्साही हो जाते हैं तो कभी निराश नजर आते हैं। ये बिना कारण कुछ भी कर बैठते हैं। ऐसे लोगों के सामने भी कभी कोई राज की बात नहीं करनी चाहिए।
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