Sunday, 30 October 2016



                        गोवर्धन पूजन विशेष



हमारे वेदों में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन वरुण, इन्द्र, अग्नि आदि देवताओं की पूजा का विधान है। इसी दिन बलि पूजा, गोवर्धन पूजा, मार्गपाली आदि होते हैं। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर, फूल माला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है। यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई। उस समय लोग इन्द्र भगवान की पूजा करते थे तथा छप्पन प्रकार के भोजन बनाकर तरह-तरह के पकवान व मिठाइयों का भोग लगाया जाता था। ये पकवान तथा मिठाइयां इतनी मात्रा में होती थीं कि उनका पूरा पहाड़ ही बन जाता था।

अन्न कूट परिचय
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अन्न कूट एक प्रकार से सामूहिक भोज का आयोजन है जिसमें पूरा परिवार और वंश एक जगह बनाई गई रसोई से भोजन करता है। इस दिन चावल, बाजरा, कढ़ी, साबुत मूंग, चौड़ा तथा सभी सब्जियां एक जगह मिलाकर बनाई जाती हैं। मंदिरों में भी अन्नकूट बनाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

अन्नकूट पूजन विधि
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इस दिन प्रात:गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है। अनेक स्थानों पर इसके मनुष्याकार बनाकर पुष्पों, लताओं आदि से सजाया जाता है। शाम को गोवर्धन की पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, फूल, खील, बताशे आदि का प्रयोग किया जाता है।
गोवर्धन में ओंगा (अपामार्ग) अनिवार्य रूप से रखा जाता है।
पूजा के बाद गोवर्धनजी के सात परिक्रमाएं उनकी जय बोलते हुए लगाई जाती हैं। परिक्रमा के समय एक व्यक्ति हाथ में जल का लोटा व अन्य खील (जौ) लेकर चलते हैं। जल के लोटे वाला व्यक्ति पानी की धारा गिराता हुआ तथा अन्य जौ बोते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं।
गोवर्धनजी गोबर से लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाए जाते हैं। इनकी नाभि के स्थान पर एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रख दिया जाता है। फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे आदि पूजा करते समय डाल दिए जाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांट देते हैं।
अन्नकूट में चंद्र-दर्शन अशुभ माना जाता है। यदि प्रतिपदा में द्वितीया हो तो अन्नकूट अमावस्या को मनाया जाता है।
इस दिन प्रात:तेल मलकर स्नान करना चाहिए।
इस दिन पूजा का समय कहीं प्रात:काल है तो कहीं दोपहर और कहीं पर सन्ध्या समय गोवर्धन पूजा की जाती है।
इस दिन सन्ध्या के समय दैत्यराज बलि का पूजन भी किया जाता है। वामन जो कि भगवान विष्णु के एक अवतार है, उनकी राजा बालि पर विजय और बाद में बालि को पाताल लोक भेजने के कारण इस दिन उनका पुण्यस्मरण किया जाता है। यह माना जाता है कि भगवान वामन द्वारा दिए गए वरदान के कारण असुर राजा बालि इस दिन पातल लोक से पृथ्वी लोक आता है।

गोवर्धन गिरि भगवान के रूप में माने जाते हैं और इस दिन उनकी पूजा अपने घर में करने से धन, धान्य, संतान और गोरस की वृद्धि होती है। आज का दिन तीन उत्सवों का संगम होता है।
इस दिन दस्तकार और कल-कारखानों में कार्य करने वाले कारीगर भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी करते हैं। इस दिन सभी कल-कारखाने तो पूर्णत: बंद रहते ही हैं, घर पर कुटीर उद्योग चलाने वाले कारीगर भी काम नहीं करते। भगवान विश्वकर्मा और मशीनों एवं उपकरणों का दोपहर के समय पूजन किया जाता है।

गोबर्धन पूजा की पौराणिक कथा
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एक बार एक महर्षि ने ऋषियों से कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन व अन्नकूट की पूजा करनी चाहिए। तब ऋषियों ने महर्षि से पूछा-' अन्नकूट क्या है? गोवर्धन कौन हैं? इनकी पूजा क्यों तथा कैसे करनी चाहिए? इसका क्या फल होता है? इस सबका विधान विस्तार से कहकर कृतार्थ करें।'
महर्षि बोले- 'एक समय की बात है- भगवान श्रीकृष्ण अपने सखा और गोप-ग्वालों के साथ गाय चराते हुए गोवर्धन पर्वत की तराई में पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि हज़ारों गोपियां 56 (छप्पन) प्रकार के भोजन रखकर बड़े उत्साह से नाच-गाकर उत्सव मना रही थीं। पूरे ब्रज में भी तरह-तरह के मिष्ठान्न तथा पकवान बनाए जा रहे थे। श्रीकृष्ण ने इस उत्सव का प्रयोजन पूछा तो गोपियां बोली-'आज तो घर-घर में यह उत्सव हो रहा होगा, क्योंकि आज वृत्रासुर को मारने वाले मेघदेवता, देवराज इन्द्र का पूजन होगा। यदि वे प्रसन्न हो जाएं तो ब्रज में वर्षा होती है, अन्न पैदा होता है, ब्रजवासियों का भरण-पोषण होता है, गायों का चारा मिलता है तथा जीविकोपार्जन की समस्या हल होती है।
यह सुनकर श्रीकृष्ण ने कहा- 'यदि देवता प्रत्यक्ष आकर भोग लगाएं, तब तो तुम्हें यह उत्सव व पूजा ज़रूर करनी चाहिए।' गोपियों ने यह सुनकर कहा- 'कोटि-कोटि देवताओं के राजा देवराज इन्द्र की इस प्रकार निंदा नहीं करनी चाहिए। यह तो इन्द्रोज नामक यज्ञ है। इसी के प्रभाव से अतिवृष्टि तथा अनावृष्टि नहीं होती।' 
श्रीकृष्ण बोले- 'इन्द्र में क्या शक्ति है, जो पानी बरसा कर हमारी सहायता करेगा? उससे अधिक शक्तिशाली तो हमारा यह गोवर्धन पर्वत है। इसी के कारण वर्षा होती है। अत: हमें इन्द्र से भी बलवान गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए।' इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के वाक-जाल में फंसकर ब्रज में इन्द्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं। सभी गोप-ग्वाल अपने-अपने घरों से सुमधुर, मिष्ठान्न पकवान लाकर गोवर्धन की तलहटी में श्रीकृष्ण द्वारा बताई विधि से गोवर्धन पूजा करने लगे।
उधर श्रीकृष्ण ने अपने आधिदैविक रूप से पर्वत में प्रवेश करके ब्रजवासियों द्वारा लाए गए सभी पदार्थों को खा लिया तथा उन सबको आशीर्वाद दिया। सभी ब्रजवासी अपने यज्ञ को सफल जानकर बड़े प्रसन्न हुए। नारद मुनि इन्द्रोज यज्ञ देखने की इच्छा से वहां आए। गोवर्धन की पूजा देखकर उन्होंने ब्रजवासियों से पूछा तो उन्होंने बताया- 'श्रीकृष्ण के आदेश से इस वर्ष इन्द्र महोत्सव के स्थान पर गोवर्धन पूजा की जा रही है।' 
यह सुनते ही नारद उल्टे पांव इन्द्रलोक पहुंचे तथा उदास तथा खिन्न होकर बोले-'हे राजन! तुम महलों में सुख की नींद सो रहे हो, उधर गोकुल के निवासी गोपों ने इद्रोज बंद करके आप से बलवान गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी है। आज से यज्ञों आदि में उसका भाग तो हो ही गया। यह भी हो सकता है कि किसी दिन श्रीकृष्ण की प्रेरणा से वे तुम्हारे राज्य पर आक्रमण करके इन्द्रासन पर भी अधिकार कर लें।'
नारद तो अपना काम करके चले गए। अब इन्द्र क्रोध में लाल-पीले हो गए। ऐसा लगता था, जैसे उनके तन-बदन में अग्नि ने प्रवेश कर लिया हो। इन्द्र ने इसमें अपनी मानहानि समझकर, अधीर होकर मेघों को आज्ञा दी- 'गोकुल में जाकर प्रलयकालिक मूसलाधार वर्षा से पूरा गोकुल तहस-नहस कर दें, वहां प्रलय का सा दृश्य उत्पन्न कर दें।'
पर्वताकार प्रलयंकारी मेघ ब्रजभूमि पर जाकर मूसलाधार बरसने लगे। कुछ ही पलों में ऐसा दृश्य उत्पन्न हो गया कि सभी बाल-ग्वाल भयभीत हो उठे। भयानक वर्षा देखकर ब्रजमंडल घबरा गया। सभी ब्रजवासी श्रीकृष्ण की शरण में जाकर बोले- 'भगवन! इन्द्र हमारी नगरी को डुबाना चाहता है, आप हमारी रक्षा कीजिए।'
गोप-गोपियों की करुण पुकार सुनकर श्रीकृष्ण बोले- 'तुम सब गऊओं सहित गोवर्धन पर्वत की शरण में चलो। वही सब की रक्षा करेंगे।' कुछ ही देर में सभी गोप-ग्वाल पशुधन सहित गोवर्धन की तलहटी में पहुंच गए। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर छाता सा तान दिया और सभी गोप-ग्वाल अपने पशुओं सहित उसके नीचे आ गए। सात दिन तक गोप-गोपिकाओं ने उसी की छाया में रहकर अतिवृष्टि से अपना बचाव किया। सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर एक बूंद भी जल नहीं पड़ा। इससे इन्द्र को बड़ा आश्चर्य हुआ। यह चमत्कार देखकर और ब्रह्माजी द्वारा श्रीकृष्ण अवतार की बात जानकर इन्द्र को अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ। वह स्वयं ब्रज गए और भगवान कृष्ण के चरणों में गिरकर अपनी मूर्खता पर क्षमायाचना करने लगे। सातवें दिन श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को नीचे रखा और ब्रजवासियों से कहा- 'अब तुम प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा कर अन्नकूट का पर्व मनाया करो।' तभी से यह उत्सव (पर्व) अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा।

श्री गोवर्धन महाराज जी की आरती
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श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरी सात कोस की परिकम्मा,
और चकलेश्वर विश्राम
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,
तेरी झाँकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।
करो भक्त का बेड़ा पार
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
🔶🔹🔶🔹🔶🔹🔶🔹🔶
प्रातःकाल मुहूर्त : 
प्रातः 06:36 बजे से 08:47 बजे तक

सायं काल मुहूर्त : 
दोपहर बाद 03:21 से सायं 05:32 बजे तक


Thursday, 27 October 2016

जाकिर नाइक के भाषण देश के लिए खतरनाक – केंद्रीय गृह मंत्रालय

जाकिर नाइक के भाषण देश के लिए खतरनाक – केंद्रीय गृह मंत्रालय

जल्‍द से जल्‍द कार्रवाई की सिफारिश

राष्ट्रप्रेमी सनातन संस्था पर प्रतिबन्ध की मांग करनेवाले तथाकथित आधुनिकतावादी कभी जाकिर नाइक पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग नहीं करते, यह ध्यान में लें ! – सम्पादक, हिन्दूजागृति

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नई देहली – केंद्र सरकार जल्‍द ही विवादित इस्‍लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नाइक और उनके एनजीओ इस्‍लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) को लेकर एक नोट तैयार किया है जिसमें नाइक के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इस नोट में आईआरएफ को ‘गैरकानूनी संगठन’ बताया गया है।

जाकिर के वक्तव्य तथा भाषण को माना खतरनाक

केन्द्र सरकार नाइक के एनजीओ को गैरकानूनी संगठन घोषित करने पर विचार कर रही है। नोट में सरकार ने माना है क‍ि जाकिर नाइक ने जो वक्तव्य और भाषण दिए है, वे आपत्तिजनक और स्‍वभाव से विस्फोटक हैं और इनके जरिए ओसामा बिन लादेन जैसे घोषित आतंकवादियों की प्रशंसा की गई है।
नोट में कहा गया है कि जाकिर नाइक विभिन्‍न धार्मिक समुदायों के बीच शत्रूता और द्वेष को बढ़ावा देते रहे हैं। साथ ही वह मुस्लिम युवाओं को आतंकवादी कृत्‍य के लिए प्रेरित करते रहे हैं।

Sunday, 23 October 2016

अगर ब्राह्मण न होते तो सब हिन्दू हमारा धर्म स्वीकार कर लेते

ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज़ – 6 : अगर ब्राह्मण न होते तो सब हिन्दू हमारा धर्म स्वीकार                        कर लेते


 इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि समाज को तीन वर्गों में बाँटने की रणनीति बनाई जाए – मुस्लिम को हिन्दुओं के विरुद्ध भड़काया जाए, हिन्दुओं को ब्राह्मण और गैर ब्राह्मण वर्ग में बांटा जाए. इस काम के लिए उन्होंने जिन्ना, नेहरू और अम्बेडकर जैसे महत्वकांक्षी नेताओं को चुना.

सन 1879 में तंजोर के कलक्टर ने फेमिन कमीशन के सदस्य सर जेम्स केयर्ड को अपने संदेश में लिखा “There was no class (except Brahmins) which was so hostile to the English.”
उस समय के सभी राष्ट्रीय आंदोलनों में ब्राह्मणों की भागीदारी से अंग्रेज घबरा गये थे. बहुत से CID सूत्रों की रिपोर्ट्स के आधार पर एक पर्यवेक्षक ने लिखा –
“If any community could claim credit for driving the British out of the country, it was the Brahmin community. Seventy per cent of those who were felled by British bullets were Brahmins”.
ये विश्व इतिहास में अद्भुत सामाजिक व्यवस्था थी जो ब्राह्मण संचालित करते थे. इसमें सबको अपनी इच्छानुसार विकसित होने की स्वतंत्रता थी. कहीं कोई विरोध या आक्रोश इस व्यवस्था के प्रति नहीं था. भारत को उत्तरी और दक्षिणी भारत में बांटने के बाद ब्राह्मण विरोधी साहित्य सृजन करने के लिए दक्षिण भारत में प्रयोग शुरू किये गये. अंग्रेजों द्वारा बहुत से विद्वान इस काम में लगाये गये.
लेकिन कुल मिलाकर निष्कर्ष यह निकलता है कि जिस प्रकार उस समय एक विशेष प्रकार के शुतुरमुर्ग थे जो अपनी गर्दन की लंबाई पर गौरवान्वित थे, आज शेर, चीते, शेरनी, लोमड़ी, लकड़बग्घे हैं जिन्हें लोग अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की चाशनी में ही इस कदर लपेट देते हैं कि बेचारे मिठास के चक्कर में साँस लेना भी भूल जाते हैं.

मैं भी पता नही क्यों इतना लिखता हूँ, सब कुछ तो किताबों में और नेट पर लिखा ही है. सबको पता है कि लौट के बुद्धू ही घर आते हैं, सिद्धू नहीं. पुराने अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि प्रत्येक पढ़ाने वाला व्यक्ति अध्यापक, प्रत्येक संस्कृत जानने वाला ब्राह्मण, उच्च पद प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति प्रशासक ही है ये जरूरी नहीं होता…. ये लोग सिर्फ पढ़े-लिखे होते हैं. पढा-लिखा होना समझदार होने की गारंटी नही होती.इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि समाज को तीन वर्गों में बाँटने की रणनीति बनाई जाए – मुस्लिम को हिन्दुओं के विरुद्ध भड़काया जाए, हिन्दुओं को ब्राह्मण और गैर ब्राह्मण वर्ग में बांटा जाए. इस काम के लिए उन्होंने जिन्ना, नेहरू और अम्बेडकर जैसे महत्वकांक्षी नेताओं को चुना.

सन 1879 में तंजोर के कलक्टर ने फेमिन कमीशन के सदस्य सर जेम्स केयर्ड को अपने संदेश में लिखा “There was no class (except Brahmins) which was so hostile to the English.”
उस समय के सभी राष्ट्रीय आंदोलनों में ब्राह्मणों की भागीदारी से अंग्रेज घबरा गये थे. बहुत से CID सूत्रों की रिपोर्ट्स के आधार पर एक पर्यवेक्षक ने लिखा –
“If any community could claim credit for driving the British out of the country, it was the Brahmin community. Seventy per cent of those who were felled by British bullets were Brahmins”.
ये विश्व इतिहास में अद्भुत सामाजिक व्यवस्था थी जो ब्राह्मण संचालित करते थे. इसमें सबको अपनी इच्छानुसार विकसित होने की स्वतंत्रता थी. कहीं कोई विरोध या आक्रोश इस व्यवस्था के प्रति नहीं था. भारत को उत्तरी और दक्षिणी भारत में बांटने के बाद ब्राह्मण विरोधी साहित्य सृजन करने के लिए दक्षिण भारत में प्रयोग शुरू किये गये. अंग्रेजों द्वारा बहुत से विद्वान इस काम में लगाये गये.
लेकिन कुल मिलाकर निष्कर्ष यह निकलता है कि जिस प्रकार उस समय एक विशेष प्रकार के शुतुरमुर्ग थे जो अपनी गर्दन की लंबाई पर गौरवान्वित थे, आज शेर, चीते, शेरनी, लोमड़ी, लकड़बग्घे हैं जिन्हें लोग अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की चाशनी में ही इस कदर लपेट देते हैं कि बेचारे मिठास के चक्कर में साँस लेना भी भूल जाते हैं.
मैं भी पता नही क्यों इतना लिखता हूँ, सब कुछ तो किताबों में और नेट पर लिखा ही है. सबको पता है कि लौट के बुद्धू ही घर आते हैं, सिद्धू नहीं. पुराने अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि प्रत्येक पढ़ाने वाला व्यक्ति अध्यापक, प्रत्येक संस्कृत जानने वाला ब्राह्मण, उच्च पद प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति प्रशासक ही है ये जरूरी नहीं होता…. ये लोग सिर्फ पढ़े-लिखे होते हैं. पढा-लिखा होना समझदार होने की गारंटी नही होती.
इतिहास Francis Xavier के उस वक्तव्य का गवाह है जिसमे उसने लिखा है,”अगर ब्राह्मण न होते तो सब हिन्दू हमारा धर्म स्वीकार कर लेते.”
“If there were no Brahmins in the area, all Hindus would accept conversion to our faith.”
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और इतिहासकार सुश्री मीनाक्षी जैन जी का ” द इंडियन एक्सप्रेस ” में 18 सितम्बर 1990 को छपा एक लेख पढ़ा. ऐतिहासिक तथ्यों के परिपेक्ष में उन्होंने लिखा है कि क्रिस्चियन मिशनरीज और उनके बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा 19वीं सदी के प्रारंभ में अंग्रेजों ने अपने अनुभव और विभिन्न प्रयोगों के आधार पर “सोशल इंजीनियरिंग” शुरू की.
इसका मुख्य उद्देश्य था – ब्राह्मणों के विरुद्ध जहर उगलना, अस्पृश्यों को ब्राह्मणों के विरुद्ध भड़काना. अंग्रेज समझ चुके थे कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के रक्षक ब्राह्मण हैं. सब रीति-रिवाज ब्राह्मण ही संचालित करते हैं. ब्राह्मण पढ़े-लिखे हैं और उनको बौद्धिक रूप से गुलाम बनाना दुष्कर कार्य है.
इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि समाज को तीन वर्गों में बाँटने की रणनीति बनाई जाए – मुस्लिम को हिन्दुओं के विरुद्ध भड़काया जाए, हिन्दुओं को ब्राह्मण और गैर ब्राह्मण वर्ग में बांटा जाए. इस काम के लिए उन्होंने जिन्ना, नेहरू और अम्बेडकर जैसे महत्वकांक्षी नेताओं को चुना.
सन 1879 में तंजोर के कलक्टर ने फेमिन कमीशन के सदस्य सर जेम्स केयर्ड को अपने संदेश में लिखा “There was no class (except Brahmins) which was so hostile to the English.”
उस समय के सभी राष्ट्रीय आंदोलनों में ब्राह्मणों की भागीदारी से अंग्रेज घबरा गये थे. बहुत से CID सूत्रों की रिपोर्ट्स के आधार पर एक पर्यवेक्षक ने लिखा –
“If any community could claim credit for driving the British out of the country, it was the Brahmin community. Seventy per cent of those who were felled by British bullets were Brahmins”.
ये विश्व इतिहास में अद्भुत सामाजिक व्यवस्था थी जो ब्राह्मण संचालित करते थे. इसमें सबको अपनी इच्छानुसार विकसित होने की स्वतंत्रता थी. कहीं कोई विरोध या आक्रोश इस व्यवस्था के प्रति नहीं था. भारत को उत्तरी और दक्षिणी भारत में बांटने के बाद ब्राह्मण विरोधी साहित्य सृजन करने के लिए दक्षिण भारत में प्रयोग शुरू किये गये. अंग्रेजों द्वारा बहुत से विद्वान इस काम में लगाये गये.
लेकिन कुल मिलाकर निष्कर्ष यह निकलता है कि जिस प्रकार उस समय एक विशेष प्रकार के शुतुरमुर्ग थे जो अपनी गर्दन की लंबाई पर गौरवान्वित थे, आज शेर, चीते, शेरनी, लोमड़ी, लकड़बग्घे हैं जिन्हें लोग अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की चाशनी में ही इस कदर लपेट देते हैं कि बेचारे मिठास के चक्कर में साँस लेना भी भूल जाते हैं.
मैं भी पता नही क्यों इतना लिखता हूँ, सब कुछ तो किताबों में और नेट पर लिखा ही है. सबको पता है कि लौट के बुद्धू ही घर आते हैं, सिद्धू नहीं. पुराने अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि प्रत्येक पढ़ाने वाला व्यक्ति अध्यापक, प्रत्येक संस्कृत जानने वाला ब्राह्मण, उच्च पद प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति प्रशासक ही है ये जरूरी नहीं होता…. ये लोग सिर्फ पढ़े-लिखे होते हैं. पढा-लिखा होना समझदार होने की गारंटी नही होती.

Friday, 21 October 2016

ये वही खानदान है जिसने झाँसी की रानी की हत्या करवाई थी !

ये वही खानदान है जिसने झाँसी की रानी की हत्या करवाई थी !



झसी के रानी को मरवाने का काम किन लोगो ने  किया 
खड़िया  सिंधिया खानदान   ए सिंधिया खानदान   है जिस के सपूत  माता राव सिंधिया  आज भे हिरे की अघूठी लेकर मंत्री बन बैठा है 
ए वही लोग है झांसी की रानी के हत्या करवाई थी अंग्रेज़ो के साथ सदिश रची 

माधवराव सिंधिया का विवाह माधवीराजे सिंधिया से हुआ था। माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य व पुत्री चित्रांगदा राजे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राजनीति में हैं। माधवराव सिंधिया का नाम मध्यप्रदेश के चुनिंदा राष्ट्रीय ..

उनके खानदान की छवि की बात करें तो उनके पिता माधव राव सिंधिया की याद में दिल्ली में एक सड़क का नाम रखा गया और उसे कहा गया "श्रीमंत माधव राव सिंधिया मार्ग."

उनकी दादी के नाम पर दिल्ली में एक दूसरी सड़क का नाम है "राजमाता विजयाराजे सिंधिया मार्ग."

Saturday, 15 October 2016

जब औरंगजेब ने बनारस के लिए बदल डाली शरीयत

जब औरंगजेब ने बनारस के लिए बदल डाली शरीयत




आज देश में ट्रिपल तलाक को पाबन्द करने को लेकर जिस तरह से हो हल्ला मचा हुआ है और शरीयत में किसी प्रकार के बदलाव को खतरनाक बताया जा रहा है वो चौंकाने वाला है।मुग़ल इतिहास में सर्वाधिक कट्टर माने जाने वाले औरंगजेब ने एक वक्त बनारस के लिए शरीयत को बदलने का फैसला किया था।यह फैसला इसलिए 
महत्वपूर्ण है कि इससे ही बनारस की सांस्कृतिक धरोहरें सुरक्षित रही सकी।
यह 1669 का वक्त था।बादशाह औरंगजेब ने काशी में जबरदस्‍त विध्वंस मचाया था । उसने विश्‍वनाथ मंदिर को तोड़कर लिंग को मंदिर से हटाकर ज्ञानवापी कुएं में फिंकवा दिया। मंदिर के एक हिस्से को नष्‍ट कर उस पर मस्जिद का निर्माण करा दिया। इसके बाद उसने गंगा नदी के पंचगंगा घाट पर स्थित बिंदुमाधव के बेहद भव्‍य मंदिर को भी नष्‍ट कर दिया और उस पर भी मस्जिद का निर्माण करा दिया। औरंगजेब के भय से बिंदुमाधव की मूर्ति को पहले ही पूजारियों ने हटा दिया था।
बनारस में विश्‍वेश्‍र व बिंदुमाधव मंदिर को तोड़े जाने से औरंगजेब का दरबारी कवि पंडित चंद्रभान काश्‍मीरी बहुत आहत हुआ। और उसने औरंगजेब के समक्ष अपनी कविता से विरोध दर्ज कराया,चन्द्रभान ने कहा कि "''बर्बी करामते बुतखानये मरा ऐ श: कि चूं खराब शुवद खानये खुदागर्दद।'' अर्थात ऐ शहंशाह मेरे मंदिर की करामात देख कि खराब होने पर तेरे खुदा का घर बनता है"।

औरंगजेब चंद्रभान काश्‍मीरी के इस विरोध से इतना शर्मिंदा हुआ कि उसने बाद में एक शाही फरमान जारी किया कि ''हमारे शरियत के अनुसार यह निश्चित किया गया है कि हिंदुओं के पुराने मंदिरों को न गिराया जाए, परंतु नए मंदिर नहीं बनने दिया जाए।'' एक दरबारी कवि ने उस धर्मांध बादशाह को अपनी कविता से लज्जित कर उसे बदलने पर मजबूर कर दिया था।औरंगजेब ने इस आदेश के बाद बनारस में कोई भी मंदिर नहीं तोडा गया |

समंदर के भीतर भी मल्टी लेयर सुरक्षा, मिसाइलें तैनात


समंदर के भीतर भी मल्टी लेयर सुरक्षा, मिसाइलें तैनात






ब्रिक्स सम्मेलन: आसमान, समंदर के भीतर भी मल्टी लेयर सुरक्षा, मिसाइलें तैनात



नई दिल्ली(15 अक्टूबर): आज से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए गोवा पूरी तरह तैयार है। सरकार इसके लिए किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती इसलिए सुरक्षा से लेकर विदेशी मेहमानों के ठहरने और उनके लजीज खाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

- पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ब्रिक्स सम्मेलन की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। खुद एनएसए अजित डोभाल ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है।

- ज़मीन से आसमान और समंदर के भीतर भी मल्टी लेयर सुरक्षा को चाक चौबंद किया गया है।

- नेवी के कई वॉरशिप, आधुनिक मिसाइल फ्रिगेट, कॉस्ट गॉर्ड और नेवी की फ़ास्ट इंटेरशेप्टर बोट गोवा के आस-पास के समंदर में पेट्रोलिंग करेगी।

- नेवी और कोस्ट गार्ड के हेलीकाप्टर समुद्र के ऊपर एयर पेट्रोलिंग करेंगे। नेवी के मिग 29 फाइटर एयरक्राफ्ट को हर हमले के लिए 24 घंटे तैयार रखा गया है। मार्कोस कमांडो गोवा एयरपोर्ट की सुरक्षा के तैनात किये गए हैं।


- सभी राष्ट्राध्यक्षों की मेजबानी करने जा रहे होटल ताज एक्जॉटिका ने इसके लिए खासतौर पर अपने कमरों को नया रूप दिया है। इसी होटल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ठहरेंगे। होटल ने दो सुइट्स को खास तौर पर बनाया है, जिनमें प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ठहरने की व्यवस्था होगी। दोनों सूइट्स होटल के दो अलग-अलग हिस्सों में हैं।

- बता दें ‘ब्रिक्स’ दुनिया की 5 उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का एक समूह है।


 सभी राष्ट्राध्यक्षों की मेजबानी करने जा रहे होटल ताज एक्जॉटिका ने इसके लिए खासतौर पर अपने कमरों को नया रूप दिया है। इसी होटल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ठहरेंगे। होटल ने दो सुइट्स को खास तौर पर बनाया है, जिनमें प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ठहरने की व्यवस्था होगी। दोनों सूइट्स होटल के दो अलग-अलग हिस्सों में हैं।

- बता दें ‘ब्रिक्स’ दुनिया की 5 उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का एक समूह है।

Thursday, 13 October 2016

तीन तलाक के मुद्दे पर भारत के खिलाफ जंग छेड़ेगा

 
तीन तलाक के मुद्दे पर भारत के खिलाफ जंग
छेड़ेगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड......





गुरुवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के
महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने ट्रिपल
तलाक के मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने केंद्र
की मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह "Uniform
Civil Code" लाकर देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
ट्रिपल तलाक पर सरकार का विरोध गलत है.
देश का मुस्लमान शरीयत के हिसाब से चलेगा किसी
देश के काले कानून के हिसाब से नहीं
इतना ही नहीं मौलाना रहमानी ने ये भी कहा कि
भारत जैसे देश के लिए यूनिफार्म सिविल कोड कतई
मुनासिब नहीं है. सरकार देश को तोड़ने की कोशिश कर
रही है.
मौलाना ने धमकी दी की अगर तीन तलाक ख़त्म
किया गया और "Uniform Civil Code" लाया गया तो
देश की शांति ख़त्म हो जायेगा और देश टूट जायेगा
समझ से परे है की "Uniform Civil Code" लाने से देश कैसे
टूटेगा, क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भारत के
खिलाफ जिहाद या जंग छेड़ देगा और 1947 की तरह
फिर से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश के टुकड़े कर देने की
मांग करेगा, मुस्लिमो के लिए अलग देश की मांग करेगा
आखिर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना धमकी
किसको दे रहे है, भारत की सरकार को या सीधे भारत
को
मौलाना रहमानी ने ये भी कहा कि पंडित जवाहर
लाल नेहरू बड़े दिल के आदमी थे. इसलिए उन्होंने अलग-
अलग ट्राइब्स के लिए संविधान में अलग-अलग प्रावधान
रखवाया है. भारत की मोदी सरकार देश तोड़ने की
कोशिश न करे और "Uniform Civil Code" लाने की जुर्रत
भी न करे
अन्यथा इसके परिणाम गंभीर होंगे
आपको बता दें की "Uniform Civil Code" का मतलब
होता है 1 देश का 1 कानून, सभी लोगों के लिए बराबर
का कानून और एक जैसा कानून
मुस्लिमो को कांग्रेस ने सेक्युलर भारत में भी शरीयत के
हिसाब से निजी कानून की सुविधा दे रखी है
कहने को तो भारत में सेक्युलर संविधान चलता है परंतु ये
कोरा झूठ है, क्योंकि मुस्लिमो के लिए यहाँ शरीयत के
हिसाब से निजी कानून चलते है
अतः कहा जा सकता है की भारत एक इस्लामिक
राष्ट्र है
"Uniform Civil Code" लाने का मतलब ही है इस तरह के
भेदभाव को ख़त्म कर एक जैसा कानून लाना
परंतु "Uniform Civil Code" का नाम सुनते ही कट्टरपंथी
मुस्लिम भारत को तोड़ देने की धमकी तक देने लगते है,
वैसे ये कट्टरपंथी पहले भी देश तोड़ चुके है
भारत से इन कट्टरपंथी तत्वों को कितना प्यार है इसका
प्रमाण है पाकिस्तान तथा बांग्लादेश

Wednesday, 12 October 2016

३० वर्ष पुराने हथियारों से भारतीय सैनिकों को करनी पडी सर्जिकल स्‍ट्राइक !

३० वर्ष पुराने हथियारों से भारतीय सैनिकों को करनी 


पडी सर्जिकल स्‍ट्राइक !



११ हजार पैराशूट और एम्‍युनिशन की भी कमी

अब आैर विलंब न करते हुए सरकार जल्द ही सैनिकों के हथियारों के इस कमी की आपूर्ति करनी चाहिए –

नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर में सात सर्जिकल स्‍ट्राइक करने वाले विशेष बलों के कमांडो ने यह कार्रवाई पुराने हथियारों के साथ की। हालांकि, जून २०१५ में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर उनके हथियार बदले जाने के निर्देश दे चुके हैं। खरीद प्रक्रिया में देरी के चलते पैरा कमांडो को पुराने हथियारों से ही २८-२९ सितंबर की रात को आतंकी ठिकानों पर आक्रमण करना पडा।

कुल खर्च १८० करोड रुपए

जानकारी के अनुसार, पिछले साल जून में म्‍यांमार में २१ विशेष बल बटालियन के सीमारेखा पार कर आतंकविरोधी अभियान को अंजाम देने के बाद रक्षामंत्री पर्रिकर के सामने आधुनिकीकरण का प्रस्‍ताव सेना ने रखा था। नए हथियारों के लिए कुल खर्च लगभग १८० करोड रुपए के आसपास है। अधिकारियों के अनुसार नई रक्षा खरीद नीति के बाद रक्षा मंत्रालय ने प्रस्‍ताव पर काम करने का निर्णय लिया किंतु सेना की ओर से कार्रवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है।

विशेष बलों काे हथियारों की आवश्यकता

एक सैन्‍य अधिकारी ने बताया कि म्‍यांमार में सेना ने मणिपुर में १८ सैनिकों के हुतात्मा होने के बाद संदिग्‍ध एनएससीएन-के के ठिकानों पर आक्रमण किया था। यदि म्‍यांमार जैसा अभियान आगे भी करना है तो उन्हे इसके लिए कुछ हथियारों को फौरन खरीदने का विचार था। यदि इस योजना पर काम किया गया होता तो सर्जिकल स्‍ट्राइक करने वाले ४ एसएफ और ९ एसएफ के सैनिक ज्‍यादा आधुनिक और लाइटवेट रॉकेट लॉन्‍चर उपयोग करते। इसकी अपेक्षा उन्हें इस अभियान में ३० साल पुराने कार्ल गुस्‍तोव ८४ एमएम वर्जन से काम चलाना पड़ा।

Saturday, 8 October 2016

कंक्रीट की दीवार, लेजर बीम और रडार से सील की जाएगी 3323 km भारत-पाक बॉर्डर

                   कंक्रीट की दीवार, लेजर बीम और रडार से               सील की जाएगी 3323 km भारत-पाक बॉर्डर

जोधपुर.पाकिस्तान से सटी 3323 किमी लंबी सीमा अभेद बनेगी। सीमा पर कंक्रीट, लेजर बीम, रडार और सैटेलाइट सेंसर की दीवार खड़ी की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी बॉर्डर मैनेजमेंट डिविजन को दी गई है। तय समय पर काम पूरा करने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। पंजाब में 45 जगहों पर और कश्मीर में 6.9 किलोमीटर लंबी लेजर वॉल पहले ही लगाई जा चुकी है। पाक सीमा से सटे 4 राज्यों के आईजी ने सबसे पहले भास्कर को इसकी चुनौतियों के बारे में बताया। इजरायल से तकनीकी मदद मिलेगी...
- जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात की सीमा पाकिस्तान से लगती है। इन चारों जगहों पर भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी।
- पंजाब और जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर पक्की दीवार तो गुजरात के रण और सिर क्रीक में लेजर वॉल और लेजर बीम से बॉर्डर सील होगी


- कैमरे, रडार और सैटेलाइट से कंट्रोल होने वाले सेंसर लगाए जाएंगे। इससे छोटी-छोटी हरकत की जानकारी कुछ सेकंड में मिल जाएगी।
- सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में पक्की दीवार बनेगी। यह 10 फीट ऊंची होगी। सैटेलाइट सेंसर कोहरे में भी सीमा पर पैनी नजर रखेंगे।
- बीएसएफ फिलहाल पंजाब में 45 स्थानों पर प्रायोगिक तौर पर लेजर वॉल से सुरक्षा कर रहा है। जम्मू-कश्मीर में सेंसर और लेजर से युक्त 6.9 किमी लंबी दीवार बनाने का प्रयोग सफल रहा है।
पाक बॉर्डर पर सेना के सामने कई चुनौतियां
- भारत के चार राज्यों जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात की सीमाएं पाकिस्तान के बॉर्डर से लगी हुई हैं।
- इन 4 राज्यों के आईजी ने भास्कर को चुनौतियों के बारे में बताया। इनमें अजय तोमर, आईजी बीएसएफ गुजरात सीमांत, अनिल पालीवाल, आईजी बीएसएफ पंजाब सीमांत, बीआर मेघवाल, आईजी बीएसएफ राजस्थान सीमांत, विकास चंद्रा, आईजी बीएसएफ श्रीनगर सीमांत शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर
- LoC को छोड़कर बॉर्डर की लंबाई 210 किमी है। 18,000 फीट तक ऊंची दुर्गम चोटियां हैं। यहां पारा शून्य से 50 डिग्री नीचे तक जाता है।
- इस ऊंचाई पर सांस लेना मुश्किल। सर्दी ऐसी कि उंगली की चमड़ी ट्रिगर पर रखते ही जम जाती है। दुश्मन के साथ आतंकवाद की दोहरी चुनौती।
पारंपरिक उपाय: दोहरी तारबंदी, गश्ती के वाहन, सामान ढोने के लिए खच्चर।
तकनीकी उपाय : स्नो स्कूटर, हाई टेरेन व्हीकल्स, फ्लड लाइट, कोबरा वायर।
गुजरात
- यहां दलदल और नमक के सफेद रण में 508 किमी का बॉर्डर है। 262 किमी के दलदल में तारबंदी भी नहीं। जीरो लाइन पिलर भी नहीं दिखते।
- सफेद रण में दिशा पता नहीं चलती। नमकीन हवा चमड़ी गलाती है। फेफड़ों में नमक भर जाता है। क्रीक में पानी के कारण बॉर्डर का पता ही नहीं चलता।
पारंपरिक उपाय: पानी, जमीन और दलदल में लड़ने में दक्ष क्रोकोडाइल कमांडो।
तकनीकी उपाय : तैरती बोओपी, होवरक्राफ्ट, कोबरा वायर (करंट वाली तारबंदी)।
राजस्थान
- कुल बॉर्डर 1037 किमी है। यहां 50 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर में जूते जल जाते हैं। रेत के 80-90 फीट ऊंचे शिफ्टिंग वाले टीले। बड़े-बड़े जानकार भी भटक जाते हैं।
- यहां तारबंदी रेत में दब जाती है। बॉर्डर का पता नहीं चलता। गर्मी में जूते जल जाते हैं। सांप-बिच्छू का डर अलग।
पारंपरिक उपाय : पैदल, ऊंटों से गश्त, तारबंदी पर घंटियां बांधने जैसे प्रयोग।
तकनीकी उपाय : फ्लड लाइट, सैंड स्कूटर, हाइटेक कम्पास, 90 फीट ऊंचे टावर।
पंजाब
- कुल बॉर्डर 553 किमी। नदी-नालों में बहता खतरा। हर नदी-नाला सर्पिलाकार। रावी नदी 11 बार तो सतुलज 9 बार बॉर्डर से इन व आउट होती है। घुसपैठ का खतरा यहीं से।
- सर्दियों में घना कोहरा। आतंकी घुसपैठ के साथ हथियारों और ड्रग्स की तस्करी रोकना सबसे बड़ी चुनौती।
तकनीकी उपाय : लेजर वॉल, थर्मल इमेजर, कैमरे, फ्लड लाइट, कोबरा वायर।
पारंपरिक उपाय : पैदल, घोड़ों, बाइक, जिप्सी व बोट से गश्त, नावों पर नाके।
आगे की स्लाइड में पढ़ें : सिर्फ इजरायल के पास है यह टेक्नीक...

Tuesday, 4 October 2016

वीर सावरकर जी के बारें में 25 ऐतिहासिक बातें जो आप सभी को जाननी चाहिये......


जब कुछ लोग मात्र किसी पार्टी को खुश करने के लिए भारत के महान क्रांतिकारी देशभक्त वीर सावरकर जी     को गद्दार बता रहे हैं तो इससे उनकी आत्मा बहुत दुखती होगी!


वीर सावरकर जी के बारें में 25 ऐतिहासिक बातें जो आप सभी को जाननी चाहिये......

1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?

2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ…

3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी…

4. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…

5. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के 16 वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया…

6. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुरमाना किया… इसके विरोध में हड़ताल हुई… स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…

7. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ नही ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया…

8. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा ग़दर कहे जाने वाले संघर्ष को ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया…

9. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था…

10. ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंह ने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी… भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…

11. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे…

12. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नही मिला और बंदी बनाकर भारत लाया गया…

13. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी…

14. सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले- “चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया.”

15. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने काला पानी की सजा के समय 10 साल से भी अधिक समय तक आजादी के लिए कोल्हू चलाकर 30 पोंड तेल प्रतिदिन निकाला…

16. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखी और 6000 पंक्तियाँ याद रखी..

17. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर आजादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा…

18. वीर सावरकर पहले विद्वान लेखक थे जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि-

‘आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत भूमिका.
पितृभू: पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः.’

अर्थात समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभू है जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भू है, जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है..

19. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा तथा आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया… देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था…

20. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया कि वे संसद सदस्य नही थे जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था…

21.वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर थे जिनके मरणोपरांत 26 फरवरी 2003 को उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमे कभी उनके निधन पर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था….

22. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे जिनके चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया…

23. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया..

24. वीर सावरकर ने दस साल आजादी के लिए काला पानी में कोल्हू चलाया था जबकि गाँधी ने कालापानी की उस जेल में कभी दस मिनट चरखा नही चलाया..

25. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया…

पर आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी विरोधियों के घोर अँधेरे को चीरकर आज वीर सावरकर के राष्ट्रवादी विचारों का सूर्य उदय हो रहा है………

जय जननी, जय मातृभूमि.....


    CIA ने PM मोदी के बारे में जो कहा, जानकार पाकिस्तान के पसीने छूट जायेंगे

अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी, CIA ने अपनी एक रिपोर्ट में पेंटागन को सूचित किया है कि –
“नरेन्द्र मोदी की आक्रमता से पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा है”
अमेरिका के बाद भारत दूसर ऐसा देश बन सकता है, जो एक दुसरे देश पर परमाणु हथियारों से वार करेगा। 
उन्होंने इस बात को साफ़-साफ शब्दों में व्यक्त किया है कि मोदी जी एक आक्रामक नेता हैं, और इतने सालों में उन्होंने भारत में ऐसा नेता नहीं देखा है।
ये बातें तो हम जानते ही हैं लेकिन जब दुनिया की सबसे बड़ी और धूर्त ख़ुफ़िया एजेंसी ऐसी बात कहे, तो पाकिस्तान के पसीने छूटने वाजिब हैं!
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उन्होंने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी, निर्णायक जंग का मन बना चुके हैं। और उनकामनपसंद हथियार है बम।
इतना ही नहीं, कहा जा रहा है कि उनके आदेश पर 18 एयरबस दिल्ली में एक दम तैयार खड़ी हैं।
उनके एक इशारे पर वह किसी भी देश पर हमला करने को तैयार हैं। आपको इस मामले कि संजीदगी का इस से अन्द्ज़ा हो जायेगा, कि भारत ने खतरनाक ब्रह्मोस मिसाइल को भी सुखोई विमानों पर लोड कर दिया है।
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रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान कि एक भूल, उनके अस्तित्व का सफाया का कारण बन सकती है। और ऐसा भी हो सकता है कि भारत उनके भूल करने का इंतज़ार ही ना करें।
CIA  का यह दावा है कि युद्ध कि पहल भारत कि तरफ से होगी, और भारत पाकिस्तान कि छाती पर अनेकों बम गिराकर उसे नस्तो-नाबूद कर देगा।
मसलन, भारत पाकिस्तान के तरफ से परमाणु बम आने का इंतज़ार नहीं करेगा! यदि पाकिस्तान के घटिया इरादों और खासकर, मिसाइल हमले और परमाणु हमले की भनक भी भारत को लगी, तो प्रधानमंत्री मोदी, पाकिस्तान पर पूरी ताकत का इस्तेमाल करेंगे! और ये भी हो सकता है की भारत अपनी no-first-use वाली पालिसी को दरकिनार कर दे!

Sunday, 2 October 2016

पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम ने अपने सभी भारतीय फैंस को बड़ा                                    गिफ्ट दे दिया है 



वो फैंस जो आतिफ असलम के गाने अपने मोबाइल में डालकर, कान में लीड लगाकर दिनभर सुनते रहते है 

आतिफ असलम आये दिन भारत आते रहते है, कॉन्सर्ट करते है, करोडो रुपए कमाते है, फिल्मो में गाने गाते है, भारतीयों के बीच बड़े फेमस है 

रेडियो पाकिस्तान आतिफ असलम का इंटरव्यू पाकिस्तान में लाइव कर रहा था 
काफी देर आतिफ असलम से बाते होती रही, इंटरव्यू के अंत से पहले रेडियो पाकिस्तान ने आतिफ असलम से पूछा की, इंडिया में अब त्यौहारो का मौसम आ रहा है, आप अपने प्रशंसको को क्या कहना चाहेंगे 

अब ना जाने क्या हुआ की आतिफ असलम एकदम खीज गए और कहा, मैं इंडिया केवल काम करने के लिए जाता हूँ (पैसा कमाने), इंडिया काफिरो का देश है, दशहरा, दिवाली से मेरा क्या लेना देना 
आतिफ असलम ने भारत के लोगों को दशहरा और दीपावली की बधाई देने से लाइव रेडियो पर मना कर दिया 

आपको अगर याद हो तो ये वही आतिफ असलम है जिन्होंने 14 अगस्त 2015 को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत को स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की बधाई देने से इनकार कर दिया था 

वैसे हम आतिफ असलम को आज कुछ बुरा भला नहीं कहेंगे, वो तो अपने देश और अपने मजहबी जूनून के लिए अच्छा ही काम कर रहा है 
हम तो आज इस बात से अधिक दुखी है की भारत में आतिफ असलम को अपना आदर्श मानने वालो, आतिफ असलम के फैन्स की कोई कमी नहीं है 

नोट : पाकिस्तान का हर शख्स चाहे वो आतिफ असलम को, कोई भी हो सभी स्कूलों में ये पढ़कर बड़े हुए है की "हिन्दू काफ़िर है, गजवा हिन्द करना है", ये चीजे पाकिस्तान के स्कुल में बच्चों को 8वीं की सोशल स्टडी की किताब में पढाई जाती है, सभी पाकिस्तानी ये पढ़कर बड़े होते है 

पाकिस्तानी मुसलमानो के लिए तो पाकिस्तान और मजहब पहले है, अपने भारत के लोगों के लिए न भारत और न ही धर्म मायने रखता है 
हमारे बॉलीवुड वालो के लिए तो सबसे पहले पैसा है और अंत में भी पैसा ही है, जो आतिफ असलम जैसों को गाने के लिए बुलाते है जबकि भारत में अच्छे गायकों की कमी नहीं 

भारत के असंख्य लोगों में पाकिस्तान परस्ती है, 1-2 की क्या बात करना 

आपको बता दें की पाकिस्तान में लाइव टीवी, लाइव न्यूज़ डिबेट में हिन्दुओ को गाली देना, भारत को गाली देना कोई बड़ी चीज नहीं है, वहां ये बड़ी ही आम बात है 
हिन्दुओ को गाली पाकिस्तान शो में भी दिया जाता है जिसे सुनकर पाकिस्तानी दर्शक खूब हँसते है

Saturday, 1 October 2016

चीन ने ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोका 

hydro-project
बीजिंग : चीन ने तिब्बत में अपने सबसे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी को बंद कर दिया है। भारत के लिए यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि चीन के इस कदम से भारत के आसाम , सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पानी की आपूर्ति में कमी आ सकती है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे चीन के इस हाइड्रो प्रोजेक्ट पर लगभग ७४० मिलियन डॉलर की लागत आएगी। इसी के चलते चीन ने इस नदी को रोक दिया है। यह प्रोजेक्ट तिब्बत के जाइगस में है जो सिक्किम के नजदीक पड़ता है। जाइगस से ही ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल में बहते हुए प्रवेश करती है।
चीन यह हरकत ऐसे समय में कर रहा है जब भारत ने उरी में सेना मुख्यालय में हुए आतंकी आक्रमण के बाद पाकिस्तान से सिंधु जल समझौते पर समीक्षा करने का निर्णय लिया है। ऐसे में चीन का यह नया रूख इस आशंका को जन्म देता है कि, कहीं वह पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत पर दवाब बनाने का प्रयास तो नहीं कर रहा है।
इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जून २०१४ में शुरू हुआ था और २०१९ में इसका निर्माण कार्य पूरा होना है। इसी वर्ष मार्च में जल संसाधन राज्य मंत्री सांवर लाल जाट ने कहा था कि, भारत ने इस निर्माण से भारत पर पड़ने वाले प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चीन से बात की है। हालांकि दोनों देशों के बीच कोई जल संधि नहीं है, परंतु दोनों देशों ने सीमा की आेर बहने वाली नदियों को लेकर विशेष स्तर का एक मैकेनिज्म तैयार किया है।
ब्रह्मपुत्र नदी का पानी आसाम , सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पहुंचता है। एक सहायक नदी को बंद किए जाने से इन राज्यों में पानी की आपूर्ति में कमी आ सकती है। इससे पहले पाकिस्तान यह धमकी दे चुका है कि, अगर भारत ने सिंधु नदी का पानी रोका तो वह चीन के जरिए ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रुकवा देगा।
ब्रह्मचारिणी : मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप




नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर बहुत ही विधि-विधान से माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। आइए जानते हैं ‍दूसरी देवी ब्रह्मचारिणी के बारे में :-
भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया।
मांदुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं।
पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।
कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।
कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।
मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।