Tuesday, 21 February 2017

इस मन्दिर में जाते ही ठीक हो जाती है लकवा की बीमारी!

इस मन्दिर में जाते ही ठीक हो जाती है लकवा की बीमारी!


लकवा यानी शरीर का कोई हिस्सा या अंग काम करना बंद कर देता है। लकवे का मारा अंग मुंह से लेकर पैर तक हो सकता है जिसका इलाज करने में कभी—कभार तो डॉक्टर भी असफल रहते हैं। लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मन्दिर भी है जहां पैरालायसिस यानी लकवे का शर्तिया इलाज होता है! इस मन्दिर में हर साल हजारो लोग अपने लकवे के रोग से मुक्त होकर जाते है। यह मन्दिर नागोर जिले के कुचेरा कस्बे के पास है।
सिद्ध योगी की कृपा से होता है लकवा ठीक
कुचेरा के पास स्थित ग्राम बुटाटी में लगभग 500 साल पहले एक संत चतुरदास जी हुए थे जो सिद्ध योगी थे। ये संत अपनी तपस्या से लोगो को रोग मुक्त करते थे। इसके बाद आज भी उनकी समाधी पर सात फेरी लगाने से लकवा जैसी खतरनाक बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है। इस स्थान पर नागोर जिले के अलावा पूरे देश से लोग आते है और रोग मुक्त होकर जाते है। यहां हर वर्ष वैसाख, भादवा और माघ महीने मे पूरे महीने मेला भी लगता है।
नि:शुल्क मिलता है खाना
सन्त चतुरदास जी महाराज के मन्दिर ग्राम बुटाटी में लकवे का इलाज करवाने राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश भर से लोग आते हैं| इस मन्दिर में नि:शुल्क रहने व खाने की व्यवस्था भी है| सबसे बडी और खास बात ये है कि लकवे के रोगियों को यहां कुछ भी चढाने की जरूरत नहीं ब​ल्कि मंदिर में परिक्रमा लगाने से ही बीमारी ठीक हो जाती है। यहां पर मरीज को मन्दिर की महज नियमित 7 परिक्रमा लगवानी होती हैं| इसके बाद हवन कुण्ड की भभूति लगानी होती है इसके बाद लकवे का प्रभाव अपने आप कम होता जाता है।
अपने आप काम करते हैं अंग
सन्त चतुरदास जी महाराज के मन्दिर की परिक्रमा और उनकी भभूति लगाने के बाद शरीर के जो अंग हिलते डुलते नहीं हैं वो धीरे-धीरे काम करने लगते हैं। लकवे से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति की आवाज बन्द हो जाती है वह भी बोलने लगता है। यहां पर ऐसे भी मरीज लाभ प्राप्त कर चुके हैं जो अपना इलाज डॉक्टरो से करवाने के बाद निराश हो गए थे, लेकिन अब वो यहां आकर लाभान्वित है।

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