Sunday, 19 March 2017

पत्थरबाजों के समर्थक कृपया ध्यान दें - सन 2016 में भारतीय फ़ौज ने खोये 68 जांबाज़

पत्थरबाजों के समर्थक कृपया ध्यान दें - सन 2016 में भारतीय फ़ौज ने खोये 68 जांबाज़


ये भारत की विचलित कर देने वाली तस्वीर है जो भारत की तुष्टिकरण की राजनीति ने निर्मित की है  .. यहाँ उन पत्थरबाजों के एक एक घाव का हिसाब रखने के लिए हजारों मुह खुल रहे , सैकड़ों हाथ उठ रहे पर शायद ही कहीं कोई चर्चा इस बात पर भी कर रहा हो कि सिर्फ सन 2016 में ही हमारी फ़ौज के 68 जांबाज़ अपनी ही मातृभूमि कि रक्षा अपने ही देश के लोगों से करते हुए वीरगति पाए ...  लोक सभा के अंदर रक्षा राज्यमंत्री श्री सुभाष भामरे जी द्वरा प्रस्तुत आंकड़े विषम परिस्थितयों में सामने से गोली , बारूद और पठार झेलती और पीठ पीछे से जहरीले विरोधी बयान झेलती हमारी पराक्रमी सेना की एक दर्दनाक कहानी कह रहे हैं  .. आंकड़ों के मुताबिक़ जम्मू कश्मीर में सन 2016 में 15 बड़े आतंकी हमले हुए , 449 बार पाकिस्तान कि तरफ से संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ...  इन आंकड़ों में वृद्धि इसलिए भी हुई क्योंकि सेना और आतंक विरोधी मुठभेड़ में अक्सर कुछ नेताओं द्वारा घोषित तथाकथित मासूम भी सेना के सामने पत्थर ले कर आ जाते हैं जो सेना के मानवाधिकार आदि नियमो का अनुचित लाभ उठा कर आतंकियों को ना सिर्फ सुरक्षा कवर प्रदान करते हैं बल्कि सेना के जवानो के लिए भी प्राणघातक साबित होते हैं  ... ऐसी विषम परिस्थिति से भी लड़ कर जब हमारा जवान उन आतंकियों को मार पाने में सफल होता है तब उसे दिल्ली में बैठे तमाम तथाकथित बुद्धिजीवियों , मानवाधिकारवादियों व् राजनेताओं के उलटे सीधे सवालों का उत्तर देना पड़ता है जिनमे सेना का बेहद गोपनीय एनकाउंटर का सबूत तक शामिल होता है  


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