Saturday, 18 March 2017

जो महज़ 26 साल की उम्र में सांसद बने, अब वो यूपी के सीएम बनेंगे

जो महज़ 26 साल की उम्र में सांसद बने, अब वो यूपी के सीएम बनेंगे


गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना है. पूरा यूपी बोल रहा है, योगी योगी बोल रहा है.
ये वो नारे थे, जो 2017 के विधानसभा चुनाव में खूब गूंजा. यूपी का सीएम कौन होगा. इस सवाल पर विराम लग गया. विधायक मंडल की बैठक में योगी आदित्यनाथ के नाम पर मोहर लग गई. इससे पहले तक मनोज सिन्हा का नाम सुर्ख़ियों में रहा. मगर योगी ने अपनी रफ़्तार तेज़ की और सीएम की कुर्सी पर जा बैठे. जी हां, पूर्वांचल की राजनीति में खुद को चमकाने वाले योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम बन गए. वो 21वें सीएम होंगे. केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा डिप्टी सीएम होंगे.
योगी आदित्यनाथ 5 जून 1972 को उत्तराखंड के एक छोटे से गांव (पहले उत्तर प्रदेश का हिस्सा था) में पैदा हुए. योगी आदित्यनाथ का असल नाम अजय सिंह नेगी है. गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बीएससी की डिग्री हासिल कर चुके हैं. गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, जिसके बाद वे राजनीति में आए.
योगी आदित्यनाथ वो नेता भी हैं जिनके नाम सबसे कम उम्र यानी 26 साल में सांसद बनने का रिकॉर्ड है. उन्‍होंने पहली बार 1998 में लोकसभा का चुनाव जीता था. इसके बाद आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार लोकसभा का चुनाव जीतते रहे.

क्या है योगी आदित्यनाथ का तिलिस्म?

योगी आदित्यनाथ हर साल विराट हिंदू सम्मेलन करवाते हैं. जिसमें संघ परिवार से लेकर, हिंदुस्तान और नेपाल के पंडे-साधु सब आते हैं. रिटायर्ड अफसर, नेता, व्यापारी, सेना से रिटायर्ड हर वर्ग के लोग हिंदू धर्म की समस्याओं पर विचार करते हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में हिंदू युवा वाहिनी के कैंडिडेट भाजपा के खिलाफ भी लड़े, क्योंकि भाजपा ने योगी को यूपी का सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं किया था. खैर अब वो सीएम बन गए हैं.
उस वक़्त की बात है जब गोधरा कांड होने के बाद गोरखपुर में भी गहमा-गहमी थी. माहौल बन नहीं पा रहा था. गोरखपुर सदर से विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल ने उस वक्त ऐलान किया था- गोरखपुर हिंदू राष्ट्र है. योगीजी इसके प्रेसिडेंट और प्राइम मिनिस्टर दोनों हैं. तमाम अखबारों में छपा था ये. योगी की उम्र उस वक्त 30 भी नहीं हुई थी.
देश में राइट विंग के दो नेता उभर रहे थे उस वक्त. नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ. पर मोदी बाजी मार ले गए थे. योगी की मार्क्सशीट में खाली वाइवा के नंबर थे. पर उम्मीद थी. 1998 की बारहवीं लोकसभा में योगी 26 की उम्र में सबसे कम उम्र के सांसद बने थे. तब से वो हारे नहीं हैं. बस जीत का अंतर बढ़ता गया है.
2002-03 में योगी आदित्यनाथ ने अपना संगठन हिंदू युवा वाहिनी की स्थापना की थी.

गोरखनाथ मठ और योगी

महंत गोरखनाथ ने ग्यारहवीं शताब्दी में गोरखनाथ मठ की नींव रखी थी. वो उदासीन पंथ को मानने वाले थे. कबीरदास भी इनसे प्रभावित थे. मठवाले कबीर से. आज भी कबीरवाणी मठ की दीवारों पर अंकित है. मठ निर्गुण मानने वाला है. मतलब मूर्तिपूजा में यकीन नहीं रखता. पर आज मठ में सिर्फ मूर्तियां ही हैं. गोरखनाथी नेपाल और उत्तरी भारत में बड़े लोकप्रिय हुआ करते थे. काले और नारंगी रंग के कपड़ों में वो गांव-गांव घूमते रहते. गोरखवाणी कहते. इनमें मुसलमान भी होते थे. पर गोरखनाथी अब मंदिर में नहीं जा सकते.
इस मठ का हिंदूकरण शुरू हुआ 1940 के दशक में. उस वक्त के महंत द्विग्विजयनाथ ने हिंदू महासभा से हाथ मिला लिया. और इसके प्रेसिडेंट बने. 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के आरोपी बने और जेल भी गए. पर मठ अब मंदिर बनने लगा था. पॉपुलैरिटी बढ़ने लगी थी. मंदिर को राजनीति में लेकर आए अगले महंत अवैद्यनाथ. 1962 में विधायकी जीत गए. फिर जब राम मंदिर का मुद्दा जोर पकड़ने लगा तो वो भाजपा के साथ आ गये. आंदोलन में आगे रहे. 1991 में सांसद भी बन गये. लोकल लोगों के मुताबिक मठ का बड़ा योगदान है आदित्यनाथ की राजनीति में. यहां पर कथित पिछड़ी और नीची जातियों के वोट भी मठ के नाम पर मिल जाते हैं. मुस्लिमों की आबादी मात्र 8 प्रतिशत है, तो ज्यादा विरोध है नहीं. बाकी ठाकुर और ब्राह्मण जंग की बात करें तो ठाकुर आदित्यनाथ के नाम पर वोट देते हैं. क्योंकि आदित्यनाथ ठाकुर हैं. इनका असली नाम अजय सिंह विष्ट है. ब्राह्मणों के पास कोई चेहरा नहीं है. और मठ के चक्कर में वो ज्यादा विरोध नहीं कर पाते.

वो आरोप जो योगी और उनके संगठन पर लगे

1. 2011 में पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ऑफ उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रपति को लेटर लिखकर बताया था कि एक मुस्लिम लड़के सोहराब की हत्या में हिंदू युवा वाहिनी के लोगों के शामिल होने की संभावना है. लूटपाट के दौरान हत्या हुई थी. इस मामले में पुलिस ने चंदन गोरखपुरी नाम के एक लड़के गिरफ्तार भी किया था. चंदन के हिंदूवादी संगठनों से रिश्ते बताए जाते थे.
2. मिलीगजट में ही 2013 में छपा था कि पुलिस ने हिंदू युवा वाहिनी के सुनील सिंह औऱ उनके कई साथियों के खिलाफ दो लोगों के अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था. फुटपाथ वाले अपना ट्रेड एसोशिएशन अध्यक्ष चुन रहे थे. इसी क्रम में उन लोगों ने योगी आदित्यनाथ का पुतला जला दिया था. सुनील ने कहा था कि ये अपमान हम नहीं सहेंगे. 2017 में भाजपा के खिलाफ लड़ने का ऐलान करने पर सुनील को आदित्यनाथ ने संगठन से बाहर कर दिया है.
3. 2014 में एक वीडियो आया था. जिसमें कथित तौर पर आदित्यनाथ हिंदू मर्दों से आह्वान कर रहे थे कि कम से कम 100 मुस्लिम लड़कियों को हिंदू धर्म कबूल करवायें. उनकी वेबसाइट पर लव जिहाद की परिभाषा दी गई थी (आउटलुक में छपा था)-
ये एक ऐसा सिस्टम है जिसमें सुगंधित लड़की एक महकते हुए संसार में चली जाती है. वो अपने संस्कारी मां-बाप को छोड़कर उन मां-बाप के पास चली जाती है जो पास्ट में उनके भाई-बहन हो सकते हैं. पवित्रता की जगह कुरुपता आ जाती है. जहां रिश्तों का कोई मतलब नहीं होता. जहां हर औरत को हर 9 महीने में बच्चा पैदा करना होता है. औरत को अपना धर्म प्रैक्टिस करने की छूट नहीं थी. अगर लड़की को अपनी गलती का अहसास हो जाता है औऱ वो स्वतंत्र होना चाहती है तो उसे बेच दिया जाता है.

योगी के बोल जो चर्चा में रहे

28 फरवरी 2017 को अपने भाषण में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा सरकार दलितों के पैसे को मदरसों में दे देती है. देवा शरीफ को चौबीसों घंटे बिजली देते हैं, पर महादेव को नहीं देते. फंड को कब्रिस्तान की दीवार बनवाने में लगा देते हैं.
25 फरवरी 2017 को कहा कि सपा जीती तो कर्बला-कब्रिस्तान बनेंगे, भाजपा जीतेगी तो राम मंदिर बनेगा.
मिलीगजट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में हरियाणा में महा हिंदू सम्मेलन में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था- देश की मुख्य समस्या गरीबी या भुखमरी नहीं, जिहादी पॉलिटिक्स है. मुस्लिम बहुलता वाले इलाके देश की सुरक्षा के लिए सेंसिटिव हैं. जब इंडिया क्रिकेट मैच जीतता है, तो लोग शोक मनाते हैं. जिहादी जुनून ही मुख्य समस्या है. यूपी में तो हमने ठीक कर दिया माहौल, आप लोग भी करिए.
मिलीगजट में ही छपी रिपोर्ट में 2016 में सांसद आदित्यनाथ ने कहा था- इस देश के शिक्षण संस्थानों में जिन्ना पैदा नहीं होंगे. हम उन्हें गाड़ देंगे.

2007 में योगी आदित्यनाथ को अपनी राजनीति बदलनी पड़ी

2007 का साल योगी के लिए बदलाव वाला था. भाजपा के प्रत्याशियों के खिलाफ वो यूपी में अपने कैंडिडेट उतार चुके थे. जबकि भाजपा से खुद वो सांसद थे. और इसी साल गोरखपुर और आस-पास के इलाकों में दंगे हो गए. दो लोग मरे. पर करोड़ों की प्रॉपर्टी जल गई. शहर में कर्फ्यू लगा रहा. कहा जाता है कि योगी उस वक्त रोज दरबार लगाने लगे थे. तो सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया. एक कड़े अफसर जगमोहन सिंह यादव को गोरखपुर भेजा गया. उन्होंने पहले युवा वाहिनी के लोगों को गांव-गांव जाकर उठाया. कुछ को जेल में डाला गया. कुछ मार खा के सुधर गए. संगठन लुढ़क गया. आदित्यनाथ को दंगे फैलाने का आरोपी बनाया गया. उनकी सिक्यूरिटी हटा दी गई. और संसद में इस बारे में बताते हुए हिंदू हृदय सम्राट रो पड़े. कहा कि मेरी जान को खतरा है. जैसे नक्सलियों ने झारखंड में सुनील महतो को मारा, मुझे भी मार देंगे.
इसके बाद योगी की राजनीति फायरब्रांड नहीं रह गई. वो विकास की बात करने लगे. हॉस्पिटल और बीमारियों की बात करने लगे. कुछ-कुछ काम भी करने लगे. 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में एम्स की शिला भी रख दी.

योगी पर हुआ था जानलेवा हमला

7 सितंबर 2008 को सांसद योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था. इस हमले में वे बाल-बाल बचे थे, यह हमला इतना बड़ा था कि 100 अधिक वाहनों को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहुलुहान कर दिया.

No comments:

Post a Comment