Tuesday, 7 March 2017

27 को थी यूपी दहलाने की साजिश, 3 महीने सोती रही पुलिस

27 को थी यूपी दहलाने की साजिश, 3 महीने सोती रही पुलिस

यूपी एटीएस ने यदि समय रहते खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के नेटवर्क को नेस्तनाबूत नहीं किया होता, तो इसका खामियाजा पूरे उत्तर प्रदेश को उठाना पड़ता. जी हां, आईएसआईएस के इन आतंकियों की साजिश पूरे यूपी को दहलाने की थी. यह खुलासा हुआ है कि आईएसआईएस खुरासान मॉड्यूल द्वारा यूपी के बाराबंकी के एक कस्बे में 27 मार्च को बम ब्लास्ट की योजना में था, जिसे भोपाल ट्रेन ब्लास्ट के बाद विफल कर दिया गया.
एडीजी (कानून और व्यवस्था) दलजीत सिंह चौधरी ने बताया कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल के छह संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है. भोपाल-उज्जैन पैसेंजर में बम ब्लास्ट की साजिश कानपुर के जाजमऊ इलाके के रहने वाले सैफुल्लाह ने रची थी. इसके लिए लखनऊ के काकोरी के हाजी कॉलोनी में किराए का मकान लेकर तैयारी की गई. यह वही जगह है, जहां मंगलवार 11 घंटे एनकाउंटर चला है.
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पिछले कुछ समय से भारतीय रेल लगातार आतंकियों के निशाने पर है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के खास गुर्गे शमसुल हुदा ने बताया था कि भारतीय रेलों को सॉफ्ट टारगेट करके ज्यादा से ज्यादा टेरर प्लान को कामयाब बनाना ही आईएसआई की नई आतंकी रणनीति है.
पिछले साल से भारतीय रेल लगातार आतंकी हमलों की गवाह बनी हुई है. बीते साल नवंबर में कानपुर के पास हुए इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की बात सामने आई थी. इस मामले में तीन लोगों को अरेस्ट किया गया था. एक आरोपी मोतीलाल पासवान ने बताया था कि ट्रेन ट्रैक को उड़ाने के लिए प्रेशर कुकर बम का इस्तेमाल किया गया था.
दरअसल पिछले साल उत्तर प्रदेश के कानपुर में दो ट्रेन हादसे हुए थे. हालांकि प्रारंभिक जांच में रेल पटरी में दरार को मुख्य कारण बताया गया था, लेकिन बिहार के मोतिहारी में दो लोगों की हत्या के सिलसिले में छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की बात सामने आई थी.
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के दो युवक अरुण राम और दीपक राम के शव नेपाल में 28 दिसंबर को मिले थे. अरूण और दीपक की हत्या महज इसलिए कर दी गई थी, क्योंकि उन्हें पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन में एक अक्टूबर को रेलवे ट्रैक पर बम ब्लास्ट करना था लेकिन वह दोनों इस आतंकी साजिश में नाकाम हो गए थे. दोनों को नेपाल बुलाकर उनकी हत्या कर दी गई और उनकी हत्या के फोटो और वीडियोज दुबई में बैठे मास्टरमाइंड शमसुल हुदा को भेजे गए.
फिलहाल इन आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड शमसुल हुदा को नेपाल पुलिस ने बीते महीने दुबई से गिरफ्तार कर लिया था. जिसके बाद भारतीय जांच एजेंसियां भी कई बार हुदा से पूछताछ कर चुकी है. पूछताछ में हुदा ने भारतीय रेल को निशाना बनाए जाने के पीछे आईएसआई का हाथ बताया था. हुदा को भारत लाने के लिए एजेंसियां पुरजोर कोशिशों में जुटी हैं मगर अभी तक कानूनी अड़ंगों की वजह से हुदा को भारत नहीं लाया जा सका है.
इस साजिश में सैफुल्लाह के अलावा कानपुर केएडीए कॉलोनी निवासी दानिश अख्तर उर्फ जफर, अलीगढ़ के इन्द्रानगर निवासी सैयद मीर हुसैन उर्फ हम्जा और कानपुर के जाजमऊ निवासी आतिश मुजफ्फर के अलावा कुछ अन्य सदस्य भी शामिल थे. सैफुल्लाह और एक साथी को छोड़ यही तीनों मध्य प्रदेश ब्लास्ट ऑपरेशन में गए थे. ब्लास्ट के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने तीनों को पिपरिया से गिरफ्तार कर लिया था.
पुलिस को थी आतंकियों की जानकारी 
यूपी एटीएस और आईएसआईएस आतंकियों की मुठभेड़ के दौरान एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि तीन महीने से काकोरी पुलिस को आतंकियों के बारे में जानकारी थी. इस बारे में एक स्थानीय युवक ने पुलिस को जानकारी दी थी. इसके बावजूद लखनऊ पुलिस ने आतंकियों का सत्यापन नहीं कराया. आतंकी लखनऊ के हाजी कॉलोनी स्थित मकान में तीन महीने से किराए पर रह रहे थे. तीनों की जानकारी के बाद भी पुलिस ने उनका सत्यापन नहीं कराया था.
शुरू से ही संदिग्ध थीं गतिविधियां 
हाजी कॉलोनी में पड़ोस में रहने वाले अकरम ने बताया कि करीब तीन महीने से तीनों आतंकी मकान में किराये पर रह रहे थे. इनका अक्सर देर रात मकान में आना होता था और तड़के ही चले जाते थे. ये लोग बड़े-बड़े भरे हुए बैग भी अपने साथ लेकर आते थे. आस-पड़ोस के लोगों से उनका कोई तालमेल भी नहीं था. तीनों लड़के एक ही कमरे में रहते थे. देर रात तक इनके कमरों की लाइट भी जलती रहती थी. इनकी गतिविधियां शुरू से ही संदिग्ध थीं.

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