Saturday, 4 March 2017

सेंसर बोर्ड की फिल्मकार को फटकार, ‘हनुमान जी का अश्लील चित्रण, कैसे पास करें


सेंसर बोर्ड की फिल्मकार को फटकार, ‘हनुमान जी का अश्लील चित्रण, कैसे पास करें फिल्म ‘का बॉडीस्केप्स’ 

मुंबई : मलयाली फिल्मकार जयन चेरियन की फिल्म ‘का बॉडीस्केप्स’ को प्रमाणपत्र देने से सेंसर बोर्ड ने इनकार किया है। दूसरी संशोधन समिति ने फिल्म में गे और होमोसेक्सुअल संबंधों का ‘महिमा-मंडन’ किए जाने की वजह से फिल्म को प्रमाणपत्र ना दिए जाने की सिफारिश की है।
‘का बॉडीस्केप्स’ के निर्देशक जयन चेरियन न्यूयॉर्क में रहते हैं। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की ओर से तिरुवनंतपुरम स्थित क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. प्रतिभा ए. ने जयन चेरियन को चिट्ठी भेजकर फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं दिए जाने की जानकारी दी।

क्या कहा सेंसर बोर्ड ने ?

इस चिट्ठी में लिखा गया है कि, ‘दूसरी संशोधन समिति ने सर्वसम्मति से फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं देने की सिफारिश की है। उनका मानना है कि, फिल्म में समलैंगिक संबंधों को महिमा मंडन वाले तरीके से दिखाया गया है। फिल्म में पेंटिंग्स के जरिए पुरुष के शरीर के अहम अंगों को निरूपित करने वाली नग्नता को क्लोज शाट्स में दिखाया गया है। फिल्म में हिंदू धर्म को अवमानना वाले ढंग से दिखाया गया है। खास तौर पर भगवान हनुमान का जिस तरह (अश्लील चित्रण) उल्लेख किया गया है उससे समाज में कानून और व्यवस्था की समस्या हो सकती है। फिल्म में समलैंगिकता को दिखाने वाले पोस्टर हैं और महिलाओं के विरुद्ध भी अवमानना वाली टिप्पणियां हैं। फिल्म में हिंदू संगठनों को लेकर संदर्भ हैं जो कि अवांछित हैं।’

पहले भी संशोधन समिति ने किया था खारिज

बता दें कि, इस फिल्म को पहले भी एग्जामनिंग समिति और संशोधन समिति की ओर से पिछले वर्ष भी प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया गया था। तब फिल्मकार ने केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। २ दिसंबर २०१६ को केरल उच्च न्यायालय ने सीबीएफसी से कहा था कि ,फिल्म में जिन दृश्यों को आपत्तिजनक माना गया है उन्हें फिल्मकार को संशोधित करने या फिल्म से हटाने का मौका दिया जाए। साथ ही उच्च न्यायालय ने फिल्म को प्रमाणपत्र पर दोबारा विचार करने के लिए कहा।

क्या कहना है सीबीएफसी के सीईओ का ?

सीबीएफसी के सीईओ अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार, उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद मुंबई में दूसरी संशोधन समिति ने फिल्म को फरवरी में देखा। फिल्म मेंअश्लीलता, समलैंगिकता का महिमा मंडन, हिंदू धर्म को अवमाननापूर्ण तरीके से दिखाया गया है।
श्रीवास्तव ने कहा, ‘मैंने फिल्म को नहीं देखा परंतु संशोधन समिति पैनल के सदस्यों ने जो कारण दिए हैं उन पर उनका संतुष्ट होना जरूरी है। साफ है कि, दिशानिर्देशों के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। समलैंगिकता अकेला मुद्दा नहीं बल्कि कई और दिशानिर्देशों का भी उल्लंघन हुआ है।


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