Tuesday, 7 March 2017

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष



मैं एक स्त्री हूं इसलिए मैं आगे नहीं बढ़ सकती इस सोच से खुद को मुक्त करें। आप स्त्री होने के बावजूद भी बहुत कुछ कर सकती है।

संयुक्त राष्ट्र संघ का भी कहना है कि यदि महिलाओं को कामकाज के बेहतर मौके मिलें तो भारतीय अर्थव्यवस्था में 4.2 प्रतिशत का बड़ा उछाल आ सकता है। 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: स्त्री होने के बावजूद...!!!
8 मार्च के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की सभी सहेलियों को असीम शुभकामनाएं...। आज इक्किसवी सदी में भी महिलाओं को उसके संघर्ष और उपलब्धियों में “स्त्री होने के बावजूद” वाले भाव का दंश झेलना पड़ता है। आपने कभी सुना है कि कोई ‘पुरुष होने की वजह’ से नाकामयाब हुआ?


इसलिए ...
• मैं एक स्त्री हूं इसलिए मैं आगे नहीं बढ़ सकती इस सोच से खुद को मुक्त करें। आप स्त्री होने के बावजूद भी बहुत कुछ कर सकती है।

• यदी आपके पति या सास आपको पसंद नहीं करते है, तो यह उनकी अपनी समस्या है। आप जैसी है, वैसी ही बने रहिए। मूलत: आप में जो गुण है...उन्हीं गुणों के सहारे आप और बेहतर कर सकती है, न कि दूसरों की अपेक्षाओं के अनुरुप अपने आप को बदल कर।

• कुछ नया और अच्छा सीखने के लिए अपने आप को तैयार रखें। कम से कम कोई भी एक हुनर ऐसा ज़रुर सीखें जिससे वक्त आने पर आप अपना एवं अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।

• यदि आप घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारियां निभा रही है, तो फ़ालतू की बातों का तनाव या कुंठा मन में न पालें। जैसे क्या करुं...नौकरी की वजह से मैं अपने परिवार को ज्यादा समय नहीं दे पाती या अपनी सहेली की तरह अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाने का मेरे पास वक्त नहीं है। अपने परिवार के साथ क्वालिटी वक्त बिताए और यह तभी संभव है जब आप तनावमुक्त रहेंगी।

• अपने आप को दुनिया की सबसे खुबसुरत स्त्री माने। क्योंकि खुबसुरती सिर्फ़ शारीरिक नहीं होती। अच्छा दिखने के लिए न जीए बल्कि अच्छा बनने के लिए जीएं।

• घर के सभी लोगों का ख्याल रखते हुए कभी-कभी थोड़ा सा ख्याल अपना भी रखें।

• एक खुश इंसान ही किसी और को खुशी दें सकता है और आप तो किसी एक नहीं, पूरे घर की खुशी और हँसी का कारण है इसलिये अगर आप अपने घरवालों से प्यार करती हैं तो खुद से इश्क करना ना भूलें।

• आदर्श बेटी, पत्नी, बहु और माँ बनने के चक्कर में खुद की छोटी-छोटी इच्छाओं का गला न घोटें। आप भी एक इंसान है...अत: आपकी अपनी भी कुछ इच्छायें हो सकती है। जहां तक संभव हो छोटी-छोटी इच्छाएं पूरी करें। जिससे आपका तनाव कम होगा और इसका फायदा आपके पूरे परिवार को मिलेगा।

इक्किसवी सदी की स्त्री के मनोभाव, एक कविता के माध्यम से पढ़िए...
मैं स्त्री होने के बावजूद...एक इंसान भी हूं...
मैं कोई माल नहीं… जो बिकती रहूँगी चुपचाप रहकर।
मैं चेतना हूं कोई जड़ नहीं… जो निलाम हो जाऊंगी बोलीयों पर।
मैं सीता नहीं हूं...जिसकी राम द्वारा अग्निपरिक्षा ली जाएगी।
मैं द्रोपदी नहीं हूं...जो युधिष्ठिर द्वारा दांव पर लगा दी जाऊंगी।
मैं गांधारी नहीं हूं...जो अंधे के पिछे चलती रहुंगी पट्टी बांधकर।
मैं नारी अर्धांगिनी हूं...अंधे के संग चलूंगी ज्योति बनकर।
मैं ऐसी शक्ति हूं… ठोकर अगर लगाओगे,खुद गिरोगे पलटकर।
मैं प्रेम की भुखी हूं...फ़िर भी नहीं जिऊंगी अपनी अस्मिता खोकर।
मैं आज की नारी हूं...जिऊंगी अपनी आन पर, मरुंगी अपनी शान पर।
बहुत सह चुकी...अब न सहूंगी जुल्मों-सितम।
मैं स्त्री होने के बावजूद...एक इंसान भी हूं...!!!


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