Thursday, 2 March 2017

दिल्ली में बैठी सोनिया गांधी को जैसे ही बम धमाके के बारे में पता लगा, उनका पहला सवाल था, ‘क्या राजीव जिंदा हैं?’

मौत से पहले राजीव गांधी ने लिया था इस महिला का नाम, पहले से पहनकर आई थी वो महिला सफ़ेद साड़ी !

21 मई 1991 के दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक बम धमाके में मौत हो गई थी। यह बम धमाका आंतकी संगठन लिट्टे ने करवाया था। 21 मई 2016 को उनकी 25वीं पुण्यतिथि पर वरिष्ठ पत्रकार रेहान फजल ने उन्हें याद किया था । इसके लिए उन्होंने फेसबुक पर कुछ फोटोज के साथ एक ऑडियो शेयर किया। उसी के कुछ अंश ये रहे…
फजल बताते हैं कि उस दिन 30 साल की एक छोटे कद की लड़की राजीव गांधी की तरफ चंदन का हार लेकर आगे बढ़ती है। फिर जैसे ही वह पैर छूने के लिए झुकती है तभी कानों को बहरा करने वाला बम धमका हो जाता है। इसमें राजीव गांधी समेत 15 लोगों की मौत हो जाती है। उस वक्त वहां पर इंदिरा और राजीव के सम्मान में ‘इंदिरा गांधी जीएं, राजीव गांधी जीएं’ गीत बज रहा होता है। जब धमाके की धुंध थोड़ी सी छंटी तो बचे हुए लोगों ने राजीव गांधी की तलाश शुरू की। राजीव के शरीर का एक हिस्सा वहीं उल्टा पड़ा था। उनका सिर फट चुका था। उनके बाकी शरीर को लोगों ने हाथ में पहनी हुई ‘गूची’ घड़ी से पहचाना। दिल्ली में बैठी सोनिया गांधी को जैसे ही बम धमाके के बारे में पता लगा, उनका पहला सवाल था, ‘क्या राजीव जिंदा हैं?’ ….

दिल्ली में बैठी सोनिया गांधी को जैसे ही बम धमाके के बारे में पता लगा, उनका पहला सवाल था, ‘क्या राजीव जिंदा हैं?’ इसपर जब राजीव गांधी के निजी सचिव ने कुछ नहीं बोला तो सोनिया अपना आपा खो बैठीं। इसी वक्त सोनिया को अस्थमा का अटैक भी आ गया था। मां को अस्थमा का अटैक आता देख प्रियंका गांधी जो की सिर्फ 19 साल की थीं उन्हें कुछ समझ नहीं आया। वह बस दवाई ढूंढ़ने में लगी रहीं। राजीव गांधी की मौत के वक्त चुनाव चल रहे थे। तत्‍कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन सेशन ने आगे के चरण के चुनाव स्थगित कर दिए थे। फिर इसके बाद 24 मई को राजीव की अंत्योष्टि हुई। जिसमें देश के बड़े नेता शामिल हुए। इसके बाद…
सीआरपीएफ के आईजी डीआर कार्तिकेयन के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया।जांच के बाद 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया, पर मुख्य अभियुक्त ने गिरफ्तारी से पहले ही साइनाइड खाकर जान दे दी।आखिरी वक्त में जिसका नाम राजीव गांधी की जुबान पर आया…

वह पत्रकार नीना गोपाल थीं। नीना उस वक्त गल्फ न्यूज की रिपोर्टर थीं। राजीव ने उन्हें बुलाने के लिए किसी को भेजा ही था कि तभी धमाका हो गया। नीना इस समय डेक्कन क्रॉनिकल, बंगलौर की स्थानीय संपादक नीना गोपाल, राजीव गांधी के सहयोगी सुमन दुबे से बात कर रही थीं l
नीना याद करती हैं, “मुझे सुमन से बातें करते हुए दो मिनट भी नहीं हुए थे कि मेरी आंखों के सामने बम फटा l  मैं आमतौर पर सफ़ेद कपड़े नहीं पहनती, उस दिन जल्दी-जल्दी में एक सफ़ेद साड़ी पहन ली, बम फटते ही मैंने अपनी साड़ी की तरफ़ देखा l  वो पूरी तरह से काली हो गई थी और उस पर मांस के टुकड़े और ख़ून के छींटे पड़े हुए थे l  ये एक चमत्कार था कि मैं बच गई मेरे आगे खड़े सभी लोग उस धमाके में मारे गए थे”
नीना बताती हैं, “बम के धमाके से पहले पट-पट-पट की पटाखे जैसी आवाज़ सुनाई दी थी फिर एक बड़ा सा हूश हुआ और ज़ोर के धमाके के साथ बम फटा जब मैं आगे बढ़ीं तो मैंने देखा लोगों के कपड़ो में आग लगी हुई थी, लोग चीख रहे थे और चारों तरफ़ भगदड़ मची हुई थी हमें पता नहीं था कि राजीव गांधी जीवित हैं या नहीं”
तो ये थीं वो महिला जिनका नाम लेते समय राजिव गाँधी की मौत हुई थी…. !


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