Friday, 17 March 2017

दिल्ली में बन रहा एक और कैराना..शिव मंदिर की संरक्षिका वृद्धा साध्वी जी रही है हर पल खौफ के साए में .

दिल्ली में बन रहा एक और कैराना..शिव मंदिर की संरक्षिका वृद्धा साध्वी जी रही है 
हर पल खौफ के साए में .
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मंदिर के ऊपर लिखी लाईन निश्चित रूप से आप को हैरान कर रही होगी ...  यह नज़ारा ना ही पाकिस्तान का है  , ना अफगानिस्तान का  ... असल में ये भारत है और भारत में भी राजधानी दिल्ली .. यह नज़ारा है तुष्टिकरण की पराकाष्ठा झेलते दिल्ली का जहाँ एक एक कर के इलाके सुन्दर नगरी की बेहद वीभत्स कहानी बयान करते हैं  ... यमुनापार इलाके के घडोली एक्टेंशन जो हरिजन बस्ती के नाम से जाना जाता है उसी क्षेत्र की रहने वाली शादाशिव मंदिर की संरक्षिका साध्वी शकुंतला देवी इस समय हर दिन हर पल खौफ के साए में जी रही हैं  .. कारण है उनके मंदिर पर इस्लामिक ट्टरपंथियों की काली कुदृष्टि ..  अपनी अधिक जनसंख्या का नाजायज लाभ उठा कर एक समुदाय विशेष वहां आये दिन अपनी कट्टरता का खुला प्रदर्शन कर रहा है  ,, इस खौफ से वहां के अधिकतर हिन्दू पहले ही कहीं और बस गए   ... जो बचे उन पर आये दिन विभिन्न प्रकार से अत्याचारों का सिलसिला जारी है  ...  मंदिर की संरक्षिका साध्वी शकुन्तला के अनुसार 7 मार्च को एक वर्ग विशेष ने मंदिर में प्रसाद चढाने ीआये जाटव समाज पर हमला किया, उसका विरोध करने के कारण साध्वी शकुंतला को भी जान से मारने की धमकी दी गयी  .. दहशत के कारण काफी दिन खुद को अपने ही मंदिर में नजरबन्द कर के ये वृद्ध साध्वी मंदिर के अन्दर ही बंद रही जहाँ उन्हें भूख प्यास से संघर्ष करना पड़ा  ... उनके अनुसार इस पूरे इलाके में इस्लामिक कट्टरपंथियों की खुली चुनौती है कि जो भी उस मंदिर में पूजा अर्चना करने जाएगा उसे बेरहमी से पीटा जाएगा  ... आये दिन 2 - 4 कट्टरपंथी झुण्ड बना कर उन्हें पलायन करने का दबाव बना रहे हैं  ...  सबसे बड़े ताज्जुब का विषय ये है कि इस हिन्दू दलित बस्ती में आतंक मचाने का आरोप साध्वी जी उस पार्टी एक कार्यकर्ता पर लगा रही हैं जो उत्तर प्रदेश में इस चुनावों से पहले स्वय को दलितों का सबसे बड़ा मसीहा बता रही थी  ..  साध्वी शकुंतला पर अतिरिक्त दहशत बनाने व उन्हें मंदिर छोड़ कर भागने को मजबूर करने की नियति से कट्टरपंथियों ने वहां लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए.. खुद की जान बचा कर छुपी साध्वी शकुन्तला के पास मोबाईल में इतना पैसा भी नहीं बचा कि वो अपनी मदद के लिए किसी को बुला सकें  ...  स्थानीय क्षेत्र के राजनेताओं के चौखट पर बार बार निराश हो कर वापस लौटी ये वृद्ध साध्वी अब पूरी तरह निराश हो चुकी हैं और अंत में इसी निराशा के चलते उन्होंने अपना मंदिर बेचने का फैसला किया है  ...  इन घटनाओं के बाद उन लोगों के मौन पर एक प्रश्न जरूर बनता है जो चुनावों में दलितों का मसीह बन कर अचानक प्रकट हो जाते हैं पर जब किसी साध्वी शकुंतला के मंदिर में एक पूरे समाज पर वर्ग विशेष द्वारा हमला होता है तो ना जाने कहाँ गायब हो जाते हैं  ,,, मंदिर के बाहर लिखा ये इश्तहार पूरे समाज को एक संदेश है अभी भी कट्टरता के विरुद्ध उठ खड़े होने के लिए  ... साथ ही वर्षों से जेहादी विचारधारा से अपने अकेले खुद के दम पर बूढी हड्डियाँ ले कर जूझती साध्वी शकुन्तला के साहस को सुदर्शन न्यूज का नमन है  ..

http://www.sudarshannews.com/category/state/delhi--293

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