Thursday, 16 March 2017

अब ट्रेन ब्लास्ट केस की जांच करेंगी IPS अफसर संजुक्ता

अब ट्रेन ब्लास्ट केस की जांच करेंगी IPS अफसर संजुक्ता
भोपालट्रेन ब्लास्ट केस की जांच एनआईए (दिल्ली) में एसपी संजुक्ता के हाथ में है। वह 15 महीनों में 16 उग्रवादियों को मार चुकी हैं और 64 उग्रवादियों को जेल भेज चुकी हैं।
संजुक्ता पारासोर गुरुवार को इस केस को लेकर पहली बार जिला अदालत पहुंचीं। विशेष न्यायाधीश गिरीश दीक्षित की कोर्ट में संजुक्ता पारासोर ने आरोपियों की गिरफ्तारी के संबंध में कार्रवाई और कोर्ट में अर्जी पेश कर आरोपियों का पुलिस रिमांड मांगा। न्यायाधीश ने संजुक्ता की ओर से लगाई गई दोनों ही अर्जी स्वीकार कर ली और आरोपियों को 27 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। 
2006 बैच की IPS अफसर संजुक्ता JNU से पढ़ी हैं और यूएस फॉरेन पॉलिसी में पीएचडी हैं। वे असम की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर हैं। मुश्किल हालातों में काम करना उनका जुनून है। मात्र 15 महीनों में 16 उग्रवादियों को मार गिराने वाली संजुक्ता 64 बोडो उग्रवादियों को जेल भेज चुकी हैं। भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद का जखीरा अलग से बरामद किया।
संजुक्ता की ऑल इंडिया रैंकिंग 85 थी। आईएएस बन सकती थीं लेकिन पुलिस सर्विसेज ही चुनी। 2008 में असम के माकुम में असिस्टेंट कमाडेंट के रूप में पहली फील्ड पोस्टिंग हुई।
उन्हें बोडो और बांग्लादेशी उग्रवादियों की बीच होने वाली झड़पों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। विवाह असम के आईएएस अफसर पुरू गुप्ता से हुआ। एक बेटाभी है, लेकिन व्यस्तता के चलते संजुक्ता की मां उसका ध्यान रखती हैं। 
संजुक्ता ने असम के सोनितपुर जिले में एसपी रहते हुए खुद एके-47 से CRPF जवानों की टीम के साथ बोडो उग्रवादियों से लोहा लिया। पढ़ने-लिखने की शौकीन संजुक्ता का मानना है कि अपराधियों को उनसे डर लगना चाहिए। 

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