Tuesday, 11 April 2017

पाक में फांसी की सजा तक, पढ़ें कुलभूषण की पूरी कहानी

नेवी की नौकरी से पाक में फांसी की सजा तक, पढ़ें कुलभूषण की पूरी कहानी

पाकिस्तान में भारतीय जासूस होने के आरोप में मार्च 2016 में गिरफ्तार हुए कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई गई है. पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के मुताबिक फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने जाधव को मौत की सजा सुनाई और पाक आर्मी चीफ ने इसकी पुष्टि भी कर दी यानी जाधव को 90 दिन के भीतर फांसी की सजा दी जानी है.
आईएसपीआर ने पिछले साल एक वीडियो जारी किया था जिसे उसने जाधव का कबूलनामा बताया था. जाधव को इसी कबूलनामे के आधार पर पाक उसे भारतीय जासूस बता रहा है जबकि भारत ने साफ कर दिया है कि जाधव नौसेना में जरूर था लेकिन वो ये नौकरी छोड़कर ईरान से व्यापार करने लगा था और पाक एजेंसियों ने उसका वहीं से अपहरण किया है.
कुलभूषण के कबूलनामे की पाक की कहानी 
पाक का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना में सेवारत अफसर है और कमांडर है. वो नौसेना के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से है और उसका कवर नाम हुसैन मुबारक पटेल था जो उसने भारतीय एजेंसियों के लिए खुफिया जानकारियां जुटाने के लिए अपनाया था. पाक का दावा है कि कुलभूषण ने 1987 में नेशनल डिफेंस अकेडमी जॉइन की और उसके बाद जनवरी 1991 में उसने इंडियन नेवी में नौकरी शुरू की. दिसंबर 2001 में जब संसद पर हमला हुआ तो कुलभूषण ने अपनी सेवाएं खुफिया सूचनाएं जुटाने के लिए देना शुरू कर दीं. पाक दावा कर रहा है कि कुलभूषण मुंबई में रहता है और अब भी वह नौसेना में सेवारत अफसर है जो 2022 तक रिटायर होगा.
जाधव ने लिया था रॉ के ज्वाइंट सेक्रेटरी का नाम
पाक का कहना है कि जाधव ने ईरान के चाबाहार में एक छोटा बिजनेस शुरू किया था वो इसी मकसद से किया गया था ताकि वो भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम कर सके. जाधव 2003 और 2004 में रॉ के मिशन को पूरा करने के लिए कराची भी आया था. पाक ने जो कबूलनामा जारी किया है उसके मुताबिक जाधव 2013 में रॉ द्वारा चुना गया और तब से वो बलूचिस्तान और कराची में एजेंसी से लिए कई मिशन पूरे कर चुका है. वीडियो में जाधव कहता दिख रहा है कि वो रॉ में संयुक्त सचिव अनिल कुमार गुप्ता को सीधे रिपोर्ट करता है और गुप्ता के पाक खासकर बलूचिस्तान छात्र संगठन में अच्छे कॉन्ट्रैक्ट हैं.
ईरान से पाक में घुसते वक्त गिरफ्तार हुआ
वीडियो में कुलभूषण के हवाले से कहा जा रहा है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ बलूच आंदोलन को फाइनेंस कर रही है और इन आंदोलनकारियों की मदद से पाकिस्तान में देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रही है जिससे पाकिस्तानी नागरिकों की जानमाल का नुकसान हो रहा है. कुलभूषण ने इस कथित कबूलनामे में अपने पकड़े जाने की भी कहानी बताई. उसने कहा कि वो 3 मार्च 2016 को सरावान सीमा से ईरान से पाक में घुसने की कोशिश कर रहा था तभी पाक अथॉरिटीज ने उसे पकड़ लिया. उसने बताया कि वो बलूचिस्तान के अलगाववादियों के साथ मीटिंग करने और उन्हें भारतीय एजेंसियों के संदेश पहुंचाने के लिए पाकिस्तान आ रहा था. इस वीडियो में कुलभूषण खुद को रॉ का जासूस बता रहा है लेकिन पाक एजेंसियों की जमकर तारीफ कर रहा है कि उन्होंने उसके साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया और उसके साथ बर्ताव में उसे उचित सम्मान दिया.
सरताज अजीज ने माना था, जाधव के खिलाफ सबूत नहीं
दिसंबर में ही खबर आई थी कि पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने एक मीटिंग में माना था कि कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाक सरकार और एजेंसियों के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं. पाकिस्तानी टीवी चैनल जिओ न्यूज ने खबर दी थी कि अजीज ने सीनेट चैंबर में सांसदों को ब्रीफ करते हुए साफ कहा कि जाधव ने कबूलनामे के अलावा उसके खिलाफ हमारे पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है. अजीज ने ये भी कहा था कि भारत को दिए जाने वाले डोजियर में जो सबूत हमने रखे हैं, वो काफी नहीं हैं. अब एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वो जाधव के खिलाफ सबूत जुटाने में कितना वक्त लगाती हैं.
कबूलनामे पर उठ चुके हैं सवाल
पाक ने जाधव के कबूलनामे का जो वीडियो जारी किया है उसपर भी एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाए हैं. तकरीबन छह मिनट के इस वीडियो में कई कट हैं. वीडियो को देखकर कई जगह ऐसा लगता है कि कुलभूषण अपनी मर्जी से कुछ बोलने की बजाय सामने टेलीप्रिंटर पर लिखा कुछ पढ़ रहा है. इसीलिए कुलभूषण का वो वीडियो कबूलनामा नहीं बल्कि दबाव डालकर दिलवाया गया बयान ज्यादा साबित हुआ है. हालांकि पाक इस मुद्दे पर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है. भारत ने कई बार पाकिस्तान से कुलभूषण से मिलने देने की अपील की है लेकिन पाकिस्तान ने इसकी इजाजत भारतीय एजेंसियों को नहीं दी.
नेवी में था कुलभूषण, मुंबई में रहने की बात सही
भारत ने कुलभूषण जाधव के भारतीय नागरिक होने या फिर नेवी में नौकरी करने पर कोई सवाल नहीं उठाया लेकिन उसका कहना है कि जाधव नेवी की नौकरी छोड़ने के बाद ईरान में अपना बिजनेस शुरू कर चुका है जिसके उसके पास वैध दस्तावेज हैं. कुलभूषण जाधव ने वीडियो में खुद को मुंबई का निवासी बताया था. बताया जाता है कि उसे 2014 में ही एक पासपोर्ट मुंबई के ठाणे से इश्यू हुआ था. जिसमें ओल्ड मुंबई-पुणे रोड का एक पता दर्ज है. बताया जाता है कि यहां के एक कॉप्लेक्स के जिस फ्लैट में जाधव रहता था वो उसकी मां के नाम रजिस्टर्ड है.

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