Wednesday, 29 March 2017

12 injured as 8 coaches of Mahakaushal express derailed near Kulapahar in Mahoba, earlier today.

महोबा के पास दो हिस्सों में बंट गई महाकौशल एक्सप्रेस, 22 यात्री हुए घायल

इसके अलावा 20 मार्च 2015 को देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 34 लोग मारे गए थे. यह हादसा रायबरेली के बछरावां रेलवे स्टेशन के पास हुई हुआ था.
हेल्पलाइन नंबर
झांसी: 0510-1072
ग्वालियर: 0751-1072
बांदा: 05192-1072
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन: 22623
नई दिल्ली पीएनटी: 011-23341072, 011-23341074, 011-23342954

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन: 72510, 72389
हजरत निजामुद्दीन पीएनटी: 011-24359748
उत्तर प्रदेश के महोबा में गुरुवार तड़के जबलपुर-महाकौशल एक्सप्रेस (12189) महोबा के नजदीक दुर्घटनाग्रस्त हो गई है. इस हादसे दुर्घटना में ट्रेन की 8 बोगियां पटरी से उतर गई हैं, जिससे कम से कम 22 लोग घायल हो गए.
यह रेल दुर्घटना महोबा-कुलपहाड़ रेलवे स्टेशन के बीच रात दो बजे के लगभग हुई. आपको बता दें कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन जबलपुर से निजामुद्दीन जा रही थी. हालांकि हादसे के वक्त ट्रेन की रफ्तार काफी कम थी, इस वजह से किसी को गंभीर चोटें नहीं आई हैं.
ई ट्रेनें रद्द, कुछ का बदला रद्द
इस रेल हादसे के बाद बांदा-झांसी रेल लाइन बंद हो गई है और झांसी से होकर गुजरने वाली कई ट्रेनें रद्द कर दी गई है. इसके अलावा आधा दर्जन ट्रेनों का रूट बदल कर अब उन्हें कानपुर के रास्ते बांदा लाया जा रहा है. इन ट्रेनों में बनारस से ग्वालियर जाने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस, मानिकपुर से दिल्ली के निज़ामुद्दीन स्टेशन जाने वाली यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, ग्वालियर से हावड़ा जाने वाली हावड़ा एक्सप्रेस शामिल हैं, जिन्हें कानपुर के रास्ते बांदा और दिल्ली भेजा जा रहा है. इसके अलावा बांदा-झांसी पैसेंजर ट्रेन को रद्द कर दिया गया है.
राहत कार्य में जुटा प्रशासन
जानकारी के मुताबिक यह दुर्घटना महोबा और कुलपहाड़ के बीच गेट न. 420 पर 02:07 बजे हुई. ट्रेन के पीछे के 8 डिब्बे पटरी से उतर गए. दुर्घटनाग्रस्त डिब्बों में 4 AC (A-1, B-1, B-2, B-extra), 1 स्लीपर (एस-8), 2 सामान्य यात्री कोच और एक एसएलआर है. दुर्घटना में कुछ यात्री मामूली रूप से घायल हुए हैं. हालांकि किसी के गंभीर घायल होने या मौत की खबर नहीं है. राहत और बचाव कार्य जारी है. महोबा के डीएम के अलावा डीआरएम झांसी और जीएम एमसी चौहान भी घटनास्थल पहुंच चुके हैं. घायलों के उपचार के लिए झांसी और महोबा से दुर्घटना राहत चिकित्सा वैन भी भेजी गई.
वहीं यूपी प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने महोबा में हुई रेल दुर्घटना का संज्ञान लेते हुए यहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न होने पाए. उन्होंने महोबा के सारे डॉक्टरों को अस्पताल में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं. सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि 21 एम्बुलेंसों के जरिये घायल लोगों को अस्पताल पहंचाया गया, जिसमें से एक की हालत गम्भीर बनी हुई है.
रफ्तार धीमी होने से टला बड़ा हादसा
बताया जा रहा है कि महोबा स्टेशन से चलने के 10 किलोमीटर के बाद ही ट्रेन पटरी से उतर गई है. उस समय ट्रेन की रफ्तार बहुत कम थी, वरना बड़ा हादसा हो जाता. पटरी से उतरने के बाद महाकौशल एक्सप्रेस दो भागों में बंट गयी थी. इंजन बाकी बोगियों को लेकर आगे चला गया था और छह डिब्बे जो बेपटरी हो गए थे वो पीछे छूट गए थे.
महोबा के एसपी गौरव सिंह से हुई बातचीत के मुताबिक अभी तक दुर्घटना में किसी के जान जाने की जानकारी नहीं है. राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहा है. 10 घायलों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
हाल ही में हो चुके तीन बड़े रेल हादसे
हालिया ट्रेन हादसों पर नजर डालें तो इसी साल 22 जनवरी को आंध्र प्रदेश में विजयनगरम जिले के कुनेरू स्टेशन के पास जगदलपुर- भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस (18448) दुर्घटनाग्रस्त होने से 32 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
पिछले साल 20 नवंबर 2016 को यूपी के कानपुर के पास पुखरायां में बड़ा रेल हादसा हुआ था. इस रेल हादसे में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
इसके अलावा 20 मार्च 2015 को देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 34 लोग मारे गए थे. यह हादसा रायबरेली के बछरावां रेलवे स्टेशन के पास हुई हुआ था.

किसी व्यक्ति की मौत भूख या बीमारी से हुई तो वहां के DM और CMO दंडित होंगे

किसी व्यक्ति की मौत भूख या बीमारी से हुई तो वहां के DM और CMO दंडित होंगे – CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अगर किसी भी जिले में किसी व्यक्ति की मौत भूख या बीमारी से हुई तो संबंधित जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्साधिकारी को दंडित किया जाएगा। निश्चित तौर पर इस फैसले से गरीब व्यक्ति तक भोजन और चिकित्सा की सुविधा मिलेगी।

राम मंदिर बनवाने के लिए मुस्लिमों ने छेड़ी जंग, राष्ट्रपति को पत्र लिख कहा- काम जल्द पूरा हो, पैसे हम देंगे

राम मंदिर बनवाने के लिए मुस्लिमों ने छेड़ी जंग, राष्ट्रपति को पत्र लिख कहा- काम जल्द पूरा हो, पैसे हम देंगे

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने जब से सत्ता को संभाला है तब से राम मंदिर का मुद्दा और गर्म हो गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही राम मंदिर पर काम शुरु कर दिया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की अनुमति के लिए ऑल इंडिया शिया मंच के लोगों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या मामले में ¨हदू-मुस्लिम दोनों समुदाय से आपसी सहमति से सुलझाने के सुझाव का स्वागत किया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी भेजा।
ऑल इंडिया शिया मंच के अध्यक्ष एडवोकेट खुर्शीद आगा के नेतृत्व में एक दिवसीय धरना देने के लिए हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर दर्जनों लोग एकत्र हुए। धरने को संबोधित करते हुए खुर्शीद आगा ने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म आपसी प्रेम, भाईचारा, सर्वधर्म सम्मान व त्याग की शिक्षा देता है।
उन्होंने कहा कि जहां तक मस्जिद की तामीर बनाने की बात है तो शरियत (इस्लामिक कानून) में साफ तौर पर लिखा है कि मस्जिद वहीं बनाई जा सकती है जो जगह पवित्र हो। बिना जमीन के मालिक की इच्छा हासिल की गई जगह पर मस्जिद बनान शरीयत के खिलाफ है।
ऐसी जमीन पर मस्जिद तो दूर कोई धार्मिक कार्य नहीं किया जा सकता। मंच के उपाध्यक्ष सैयद अली अश्तर ने कहा कि अगर किसी मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था, तो हम लोग फिर से मंदिर निर्माण कराने की अनुमति चाहते हैं। नफरत खत्म कर आपसी भाईचारा बनाए रखना ही इस्लाम की सच्ची शिक्षा है। एक दिवसीय धरने में संगठन मंत्री राज मिर्जा, सनम आगा, फिरोज आगा, नैयर रजा, ख्वाजा रूमी, यूसुफ हुसैन व वाकिफ महमूद और ताहिर हुसैन सहित कई लोग शामिल रहे।


सेना का ट्रक रोककर, कश्मीरी जिहादियों ने जो किया…उसकी सच्चाई पूरा देश देखे

सेना का ट्रक रोककर, कश्मीरी जिहादियों ने जो किया…उसकी सच्चाई पूरा देश देखे

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ये विडियो बताया जा रहा है की जम्मू-कश्मीर का है! विडियो में आप देख सकते हैं कि बहुत से लोग, आकर सेना के एक ट्रक को रोक रहे हैं!
ठीक यही काम, ये लोग उस वक्त भी करते हैं जब आतंकियों के ठिकानों पर सेना हमले करती है! ऐसे ठिकाने, जिनका पता महीनों इंटेलिजेंस जुटाने के बाद लगता है! और तो और, इन जिहादियों ने उस वक्त भी ऐसी हरकतें की हैं जब घायल जवानों को एनकाउंटर साईट से rescue किया जा रहा था!
और आज की ताजा खबर यह है की सेना ने कश्मीर में एक ऑपरेशन के दौरान पत्थर फेंकने वालों में से तीन को जहन्नुम रवाना कर दिया है! ऐसा तब हुआ जब बहुत से स्थानीय लोगों ने न सिर्फ आतंकी को बचाने की कोशिश की बल्कि, उन्होंने 17 जवानों को भी घायल कर दिया! 
देश के डिज़ाइनर पत्रकार, इन पत्थर फेंकने वालों की मौत का खूब मातम मनाएंगे! लेकिन, सच्चाई आप इस विडियो में देख ही चुके हैं… इस पोस्ट को शेयर जरूर करें ताकि लोग जान सकें की आज जिन तीन जिहादियों को जहन्नुम भेजा गया है.. उनके ऐसे हश्र की असल वजह क्या है..

LG ने दिया केजरीवाल सरकार को छटका, 30 दिन में वसूलें 97 करोड़

LG ने दिया केजरीवाल सरकार को छटका, 30 दिन में वसूलें 97 करोड़




उपराज्यपाल अनिल बैजल ने आम आदमी पार्टी का नाम और मुख्यमंत्री की ब्रांडिंग में विज्ञापन पर खर्च किए गए 97 करोड़ रुपये आप से 30 दिन में वसूलने के निर्देश मुख्य सचिव को दिए हैं। इसमें 42 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार एजेंसी को कर चुकी है,दिल्ली के एलजी अनिल बैजल ने केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका दिया है। एलजी बैजल ने चीफ सचिव को आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपए वसूलने के आदेश दिए हैं। दरअसल केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली सरकार के पैसे का अपने प्रमोशन के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया।
दरअसल सरकारी विज्ञापनों में कटेंट रेग्यूलेशन के लिए बनी कमेटी ने अपनी जांच पड़ताल में ये पाया कि सरकारी विज्ञापनों में छापी गई सामग्री सुप्रीम कोर्ट की तय की गई गाइडलाइन के मुताबिक नहीं थी, बल्कि इन विज्ञापनों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का प्रमोशन किया गया, जबकि गाइडलाइऩ में इसकी मनाही थी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार करके मुख्य सचिव को भेज दी थी और अब एलजी हाउस की तरफ से कहा गया है कि विज्ञापनों पर खर्च की गई राशि संबंधित पार्टी यानी आम आदमी पार्टी से वसूली जाए।

बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने मीट की खपत को बढ़ावा देने के लिए इसकी होम डिलिवरी शुरू की है.

UP में बूचड़खाने बैन लेकिन बंगाल में मीट की होम डिलीवरी करेगी ममता सरकार

यूपी में मीट को लेकर बवाल चल रहा है, लेकिन बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने मीट की खपत को बढ़ावा देने के लिए इसकी होम डिलिवरी शुरू की है.
ममता सरकार मांसाहारी लोगों के लिए अब मीट घर-घर पहुंचाने की योजना बना रही है. इस योजना का नाम ‘मीट ऑन व्हील्ज’ है. इस योजना से कोलकाता के लोगों को घर पर ही मीट पहुंचाया जाएगा. इंडियन एक्सप्रेस में की खबर के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत वेस्ट बंगाल लाइवस्टॉक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (WBLDCL) के मशहूर ब्रैंड ‘हरिंघता मीट’ने की है.यह ब्रैंड साधारण मीट के अलावा बटेर, बतख, टर्की और इमू जैसे गैर पारंपरिक मीट भी उपलब्ध कराती है. कॉरपोरेशन के पास पोर्क, चिकन, डक, गोट और लैंब मांस के प्रोडक्ट के लिए दो अत्याधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट हैं.गौरतलब है कि यूपी में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश के कई शहरों में बूचड़खाने बंद कर दिए गए. जिसके बाद राज्य में मीट की सप्लाई ठप हो गई है. मंगलवार को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यूपी में बूचड़खाने बंद करने के हालिया घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा था, 'लोग डरे हुए हैं. बहुत से लोग जाति, धर्म के विभेद से डरे हुए हैं.'
योजना के अनुसार पके हुए नॉन-वेज फूड आइटम के अलावा हरिंघता के पैक आइटम भी बेचे जाएंगे. यह योजना पशु संसाधन विकास विभाग के मंत्री स्वप्न देबनाथ ने विभाग के सॉल्ट लेक हेडक्वार्टर पर लॉन्च की थी. अधिकारियों के मुताबिक कोलकता में फिलहाल डिलिवरी के लिए अभी तीन वैन रखी गई हैं. हालांकि बाद में वैन की संख्या में बढोत्तरी कर दी जाएगी.

जिहादी ममता बनर्जी ने स्वयं को सेक्युलर नेता बताया और कहा की जबतक वे मुख्यमंत्री है तब तक पक्षिम बंगाल में सेक्युलरिज़म रहेगा

पक्षिम बंगाल की जिहादी मुख्यमंत्री ने कहा रोजा इफ्तार नहीं छोडूगी भले आपन धर्म छोड़ दू ......

पक्षिम  बंगाल की मुख्या मंत्री  जिहादी ममता बनर्जी ने 28 मार्च 2017  को जलपुईगुड़ी में हुए एक कार्यक्रम में कहा ही रोजा इफ्तार करना नहीं छोडूगी भले ही आपन धर्म छोड़ दू 

जिहादी ममता बनर्जी जलपाईगुड़ी स्पोट्र्स काम्प्लेक्स में भाषण दे रही थी जहा जिहादी ममता बनर्जी ने कहा की पक्षिम बंगाल में साम्प्रदायिकता की कोई जगह नहीं है . बीजेपी और आरएसएस देश में नफरत फैला रहे है पक्षिम बंगाल में में में ये नहीं होने दूंगी और में सांप्रदायिक सौहाद्र  के लिए खुद हर साल रोजा इफ्तार रखती हु 
आरएसएस और बीजेपी के लोग इसके खिलाफ बोलते है पर अगर रोजा इफ्तार करना धर्म के खिलाफ है तो में धर्म ही छोड़ दूंगी पर बार बार रोजा इफ्तार करुँगी  जिहादी ममता बनर्जी ने स्वयं को सेक्युलर  नेता बताया और कहा की जबतक वे मुख्यमंत्री है तब तक पक्षिम बंगाल में सेक्युलरिज़म रहेगा बता ने की जिहादी  ममता बनर्जी खुदको   को सेक्युलर बता रही है  परंतु सत्य ये है की पक्षिम बंगाल में घोर साम्प्रदायिकता ममता बनर्जी चला रही है जहा धर्मो के नाम  पर फैसले किया आज रहे है . ह्यूज टावर बनाया जा रहा है कुरान पढने के लिए  मस्जिद मदरसों को 2815  करोड़ हर साल दिया जा रहे है 

तेजप्रताप ने कहा DSS आरक्षण के मुधे पर आरएसएस को खदेड़ देंगे आरक्षण हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है हम rss की मनमानी नहीं चलने देंगे ..

RSS  को खदेड़ने  के लोए लालू के बेटे तेज परताप यादव ने भी आपन संघठन बनाया नाम रखा है 
DSS  
लालू प्रसाद यादव के बेटे और बेहर के स्वस्थ मंत्री तिजप्रताप यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS ) की तर्ज पर बिहार में धर्मनिरपेक्ष सेवक संध (DSS ) का गठन किया है तेजप्रताप ने मंगलवारको नए संघठन की घोषणा करते हुवे का की DSS में हिन्दू, मुस्लिम सिख , ईसाई  सभी धर्मो के लोग शामिल होंगे यहाँ संघठन  आरएसएस और योगी आदित्यनाथ के संघठन हिन्दू वाहिनी सेना का मुकाबला करने को तैयार है 

तेजप्रताप ने कहा DSS आरक्षण के मुधे पर आरएसएस को खदेड़ देंगे आरक्षण हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है हम rss  की मनमानी नहीं चलने देंगे ..
DSS के गठन को लेकर भारतीय जन्नत पार्टी (BJP ) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी ने टीएजप्रताप को पहले आरएसएस का प्रशिक्षण लेने की सलाह दे दी 

उन्होंने कहा तिजप्रताप की असफलता का शक काम हो जायेगा बिना परीक्षण के असफलत का भय बना रहेगा  उलेखनीय है की वर्ष 1975  में तत्कालीन प्राड्ढन मंत्री इंद्रा गाँधी ने हिंदूवादी संगठन आरएसएस पर 
प्रतिबन्ध लगा दिया था  इसके बाद rss  से जुड़े कुछ लोग जेल में बंद लिया गए और कुछ ने नेपाल जाकर शरण की थी .. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी rss  की विचारधारा को महात्मा गाँधी की हत्या के लिए जिमेदार मानती है उनके इस आशय के बयान पर पुणे की अदालत में मानहानि का मुकदमा चल रहा है  नाथूराम गौड़से ने rss  छोड़ने के बाद राशपित गाँधी  की हत्या की थी rss  को भारत का सबसे बड़ा देशभक्त संघटन माता जाता है देशभक्त के आधा दर्जन मुख्यमंत्री rss  के जरिये आये है स्वयं प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेजी rss  से संबधित है 

दुनिया का सबसे बड़ा राम मंदिर

 दुनिया का सबसे बड़ा राम मंदिर
Patna : मोतिहारी में बनने वाला विश्व का सबसे ऊंचा विराट रामायण मंदिर धर्मनिरपेक्षता की मिसाल बन सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य पांच साल में पूरा हो जाएगा।
अभी के सबसे बड़े मंदिर कंबोडिया स्थित 'अंगकोर वाट' से दोगुना ऊंचा होगा। 200 एकड़ में बनने वाले इस मंदिर की ऊंचाई 440 फीट होगी। इसमें एक साथ 20000 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। लेकिन निर्माण से पहले ही मंदिर के लिए प्रस्तावित मिट्टी सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बन चुकी है।
अगले साल होली के त्योहार के बाद मंदिर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, क्योंकि कंबोडियाई सरकार की आपत्तियों के बाद मूल योजना में संशोधन किया गया है। बता दें कि कंबोडिया ने प्रस्तावित मंदिर को अंगकोर वाट मंदिर की नकल बताते हुए आपत्ति जताई थी।
मुसलमानों ने भी इसके लिए जमीन दान में दी है। जमीन दान देने की प्रक्रिया भूमि पूजन (21 जून 2012) से पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब निर्माण की कवायद तेज की गई है। हाल में विशेषज्ञों की टीम ने स्थल का निरीक्षण कर जमीन का हाल जाना है।
केसरिया के समीप बहुआरा कैथवलिया गांव में प्रस्तावित विश्व के सबसे ऊंचे विराट रामायण मंदिर के निर्माण को लेकर 17 मई को विशेषज्ञों के दल ने स्थल भ्रमण कर अंतिम रूप से निर्माण कार्यों की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। इस संबंध में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने बताया कि भूकंप जैसी आपदा को ध्यान में रखकर इसकी रूपरेखा की समीक्षा की जा रही है।
इस मंदिर की ऊंचाई 405 फीट निर्धारित की गई थी। मगर तकनीकी कारणों से इसे 380 फीट पर ही रोकना पड़ा। बावजूद इसके मंदिर की वैश्विक श्रेष्ठता प्रभावित नहीं होगी। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष बताते हैं कि इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की राय ली जाएगी।
मंदिर निर्माण को लेकर अब कहीं कोई अड़चन नहीं है। इसके लिए करीब 150 एकड़ भूमि का निबंधन कराया जा चुका है। सभी वर्ग के लोगों ने जमीन दान में दी है। इसमें मुसलमान भी शामिल हैं। निर्माण समिति के अध्यक्ष ललन सिंह बताते हैं कि यह मंदिर शुरुआती दौर से ही ङ्क्षहदू 


गोधरा कांड से सवाल पूछने वाले अब 1984 सिख के दंगों में मारे गए थे 8,000 से ज्यादा लोग कोई सवाल क्यों नहीं पूछता है

सिख दंगों के पांच मामलों को HC ने फिर से खोला, सज्जन कुमार की बढ़ेगी मुश्किलयाचिका में 1986 की चार्जशीट 10, 11, 31, 32 और 33 में सज्जन कुमार और बाकी 

सिर्फ दिल्ली में ही इन दंगों को दौरान 2,733 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर सिख थे.दिल्ली में सिख दंगों से जुड़े 237 केस पीड़ि‍तों के मौजूद न होने और सबूतों के अभाव में बंद कर दिए थे.

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को 1984 के सिख दंगे से जुड़े पांच मामलों को फिर से खोल दिया है, जिन्हें 1986 में बंद कर दिया गया था. हाई कोर्ट ने तीन वकीलों को 'न्याय मित्र' नियुक्त किया है और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि शिकायत करने वालों का पता लगाए. पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह नोटिस देकर शिकायत करने वालों को 20 अप्रैल तक कोर्ट के समक्ष पेश होने को कहे.
ये पांचों मामले दिल्ली कैंट और सुल्तानपुर इलाकों में हुई मौतों से जुड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा था कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले से जुड़े 199 मामलों से संबंधित फाइलें जमा करें, जिन्हें विशेष जांच दल ने बंद करने को कहा था.
सज्जन कुमार की बढ़ेगी मुश्‍िकल
इन दंगों में आरोपी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं. इन सभी मामलों को 1986 में बंद कर दिया गया था. इनमें सज्जन, बलवान खोखर, महेंद्र यादव, कृष्ण खोखर आरोपी हैं.
ये याचिका सीबीआइ की तरफ से दायर की गयी थी. याचिका में 1986 की चार्जशीट 10, 11, 31, 32 और 33 में सज्जन कुमार और बाकी के आरोपियों को बरी करने को चुनौती दी गई थी. हाइकोर्ट ने इन पांच मामलों की जांच में की गई कर्मियों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि इन मामलों में प्रमुख चश्मदीद गवाहों से पूछताछ ही नहीं की गई है. यह बड़ी हास्यास्प्रद बात है. हाईकोर्ट ने कहा कि मामलों को बड़ी जल्दी में बंद किया गया, जिससे ऐसा लगता है कि इनमें सही जांच और ट्रायल हुआ ही नहीं. ऐसे में सभी पांच मामलों में दोबारा जांच करने का आदेश दिया जाता है.
इससे पहले हाइकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सीबीआई से इन मामलों के रिकॉर्ड खोजने का निर्देश दिया था, लेकिन जब रिकॉर्ड नहीं मिला तो हाइकोर्ट ने इन मामलों की फिर से जांच करने का आदेश दिया है. इसके अलावा हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार समेत बाकी के सभी आरोपियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हाइकोर्ट ने आरोपियों से पूछा है कि वह बताएं की इस मामले में दोबारा जांच क्यों न शुरू की जाए. सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने मामले की फिर जांच करने का विरोध किया. उनका तर्क था कि हाइकोर्ट इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जांच के आदेश नहीं दे सकती.
84 के दंगों में मारे गए थे 3 हजार से ज्यादा लोग 
31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में दंगे भड़के थे, जिनमें 3 हजार से ज्यादा सि‍ख मारे गए थे. मोदी सरकार के आने के बाद से सि‍ख 84 दंगों से जुड़े केसों की फाइलें फिर से खोलने की मांग कर रहे थे. सिर्फ दिल्ली में ही इन दंगों को दौरान 2,733 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर सिख थे.दिल्ली में सिख दंगों से जुड़े 237 केस पीड़ि‍तों के मौजूद न होने और सबूतों के अभाव में बंद कर दिए थे.
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असदुद्दीन ओवैसी भारत के प्रधानमंत्री बनने के लिए सबसे काबिलतरीन शख्स!

असदुद्दीन ओवैसी भारत के प्रधानमंत्री बनने के लिए सबसे काबिलतरीन शख्स! – रवीश कुमार 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सदर बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की तारीफ करते हुए रवीश कुमार ने कहा है हम ओवेसी जी के समर्थक तो नहीं और ना ही उनके विरोधी यहां पर इतना जरूर कहेंगे अगर देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के बाद कोई दूसरा शख्स प्रधानमंत्री बनने के लायक या काबिलतरीन शख्स है तो वह बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी है.
ओवैसी की तारीफ करते हुए कहा है की वह तो खुद असदुद्दीन ओवैसी ही है वरना आधे से ज्यादा तो फर्जी डिग्री वाले भरे पड़े हैं और कुछ के हाथों में तो खून की छींटे भी लगी हुई है.
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ADITYANATH"S DECISION WILL BE HEAVY ON FORMER CHIEF MINISTERS IN UTTAR PRADESH

योगी का यहाँ फिसल पूर्व मुख्यमंत्रियों पर पड़ेगा भरी .
उत्तर प्रदेश को योगी सरकार ने पिछले एक सप्तह  में दो दर्जन से अधिक बड़े फैसले लेकर लोगो को चौका दिया 
अब योगी सरककर एक और फैसला लेने की तैयारीमे है सूत्रों की मानो तो मुख्यमतनरी यूजी आदित्यनाथ पूर्ववर्ती सरकार के एक फैलाले को पलटने जा रहा रहा है अगर यहाँ फिसल योगी आदित्यनाथ ने लिया तो उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आपने सरकारी आलीशान बनगे खली करने होंगे .
 इसमें पूर्व मुख्यमंत्री
१. नारायण दत्त तिवारी
२ मुलायम सिंह यादव 
३. राजनाथ सिंह 
४ अखिलेश यादव 
५ . मायावती  
समेत  अन्य पूर्व मुख्यमंत्री शामिल होंगे 
दरअसल एक अगस्त  2106  को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री आवास रूल 1997  को ख़ारिज कर दिया था  इस नियम के तहत प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद जीवन भर सरकारी आवास में रा सकते थे इस मामले में 12  साल पहले 2004  में लोक प्रहरी नमक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में पी आई  एल  दाखिल   कर सलारण के उक्त नियमावली को चुनैती दी थी . याचिका में कहा गया था की सरकार इसके लिए करोडो का आवास आवंटिक कर रही है ....
याचिका में मांग की गयी थी की इस फैसले की रद्द   किया जाए याचिका कर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा थ की अगर इस फैसले को रद्द नहीं किया गया तो इसका असर अन्य राज्यो पर थी पड़ेगा . इस याचिका पर को साल सुनवाई चले इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फैसल दिया के सभी पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले दो माह के भीतर कहली कराए जाए . पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जवाब में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार महीने भर के भीतर ३० अगस्त 2016 को विधानसभा में उत्तर प्रदेश मंत्री ( वेतन , भाता , और प्रकीण उपब्ध ) सषियन विधोयक 2016  पारित कर लिया  इसके तहत मुख्यमंत्री राजमंत्री  ( स्वतंत्र प्रभार ) और राजमंत्री के वेतन भातौ को पुनरीक्षित किया गया . साथ ही पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा के ष्टिगत उन्हें सरकारी आवास तथ अन्य सुविधाएं भी इस विधेयक से मिल गयी 

पर अब योगी सरकार सख्त 

सूत्र बताते है की मुख्यमंत्री योगी सरकार सुप्रीमकोर्ट के फैसले को लागु करने की तैयारी में है 
इसके लिए वे कानून विशेष यधनोसे रे ले रहे है सूत्र बाते है की योगी सरकार इस पर जल्द ही फैसला ले  सकते है 

कविता ने पत्रकार के ट्वीट को जेएनयू विवाद के बाद वहां कंडोम की मिलने और उसकी संख्या बताने से जोड़ दिया।

योगी आदित्यनाथ की गौशाला में गाय की संख्या बताने पर कविता कृष्णन ने पत्रकार पर किया ट्वीट, लिखा- कंडोम गिनने से बेहतर 


कविता ने पत्रकार के ट्वीट को जेएनयू विवाद के बाद वहां कंडोम की मिलने और उसकी संख्या बताने से जोड़ दिया।

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, तब से मीडिया उनसे जुड़ी छोटी-छोटी खबरें भी दिखा रहा है। पिछले दिनों जब योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंचे थे तो उनके साथ पत्रकारों की भी एक दल भी गया था। योगी की दिनचर्या में गौसेवा भी शामिल है।  उसी को कवर करने गए कई पत्रकार उनकी गौशाला भी पहुंच गए। आजतक से जुड़े एक पत्रकार गौरव सावंत ने इस विषय पर एक ट्वीट करते हुए लिखा, “गोरक्षापीठ की गौशाला में 350 से भी ज्यादा गाय हैं। जब वह उन्हें गुड़ खिलाने पहुंचते हैं तो कई बछड़े उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं।” उनके इस ट्वीट पर कई लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। कुछ ने उन्हें केआरके, भक्त और यहां तक कि चाटुकार भी बता दिया। इतना ही नहीं, कुछ ने तो उन्हें पत्रकार मानने से ही इनकार कर दिया। लेकिन कम्युनिस्ट नेता कविता कृष्णन ने इसे जेएनयू विवाद के बाद भाजपा नेता ज्ञानदेव आहूजा के जेएनयू में कंडोम मिलने और उनकी संख्या बताने के बयान से जोड़ दिया। ट्विट में कविता ने लिखा,”गौरव सावंत और योगी आदित्यनाथ दोनों ही गाय के फैन हैं। गाय गिनना कंडोम गिनने से बेहतर है, यही एक अन्य भगवा समर्थक ने किया था।”
यह कहा था ज्ञानदेव ने : दरअसल जेएनयू विवाद के समय राजस्‍थान के बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने बयान दिया था कि इस संस्थान में हर रोज हजारों कंडोम और बीयर की बोतलें मिलती हैं, हर रोज रेप होते हैं। यह आप‍राधिक गतिविधियों का अड्डा है। आहूजा ने कहा कहा था कि 50 हजार हडि्डयां, तीन हजार इस्तेमाल किए हुए कंडोम, 500 गर्भपात के इंजेक्शन, दस हजार सिगरेट के टुकड़े हर रोज यूनिवर्सिटी परिसर में मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्र प्रोग्राम्स के दौरान न्यूड डांस करते हैं। इसी को कविता ने योगी आदित्यनाथ की गाय गिनने से जोड़ दिया।

मतलब राम और सीता इसके बाद पैदा हुवे है अब ए बढाओ सब हिन्दुओ को राम और सीता की कहानी सुना रहा है बेफक़ूक़ समझ है क्या

वामपंथी डी एन झा ने यहां तक दावा किया कि राम और सीता भाई बहन थे. झा 1940  पैदा हुवा था अब वामपंथी को क्या पता राम और सीता भाई बहन थे 
राम_मंदिर केस की संबसे भयानक बात। .....रामसीता भाई बहन
राममंदिर को बाबरी मज्जिद सिद्ध करने के लिए अवार्ड-वापसी गैंग वामपंथी इतिहासकार डी एन झा और रोमिला थापर ने राम और सीता को भाई_बहन ही सिद्ध करदिया था 

इतिहासकार डी एन झा ने यहां तक दावा किया कि राम और सीता भाई बहन थे. फिर इन महान इतिहासकारों ने यह कहा कि जिस जगह पर बाबरी मस्जिद है वहां कभी कोई मंदिर नहीं था. इतना ही नहीं इन वामपंथी इतिहासकारों ने देश भर में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के साथ कैंपेन किया. सिगनेचर कैंपेन किया.
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यहां तक कि कोर्ट में जाकर एक्सपर्ट के रूप में इन ठगों ने गवाही भी दी. बाबरी मस्जिद के इस कैपेन का नेतृत्व रोमिला थापर ने किया और आर एस शर्मा, सूरजभान जैसे तमाम इतिहासकारों की सक्रिय भूमिका रही. लेकिन जब क्रास-एग्जामिनेशन किया गया तो इन सभी फर्जी इतिहासकारों का सच सामने आ गया.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिर्फ फैसला ही नहीं सुनाया बल्कि इन इतिहासकारों के फर्जीवाड़ा को पर्दाफाश किया. हैरानी की बात यह है कि इन वामंपथी इतिहासकारों ने कोर्ट के सामने अपनी अज्ञानता और फर्जीवाड़े को स्वीकार भी किया.
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जब कोर्ट को लगा कि इन वामपंथी इतिहासकारों की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता तब कोर्ट को जमीन खोद कर पता लगाने का आदेश देना पड़ा. जब खुदाई हुई और ये पता चल गया कि बाबरी मस्जिद किसी समतल जमीन पर नहीं बनाई गई थी बल्कि किसी भवन को तोड़ कर उसके मलबे पर बनी थी. खुदाई में मंदिर के निशान मिले. दिन के उजाले की तरह यह बात साफ हो गई कि बाबरी मस्जिद मंदिर को तोड़ कर बनाई गई थी. खुदाई के दौरान मिले सबूतों से वामपंथी इतिहासकारों की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई. वो बेनकाब हो गए
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ये अलग बात है कि इन इतिहासकारों से कोई यह नहीं पूछता कि देश को तोड़ने और सांप्रदायिकता को जीवित रखने के लिए इनलोगों ने झूठ क्यों बोला? इन इतिहासकारों को तो देश से माफी मांगनी चाहिए. कम से कम इन्हें देश के मुसलमानों से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि इन इतिहासकारों ने झूठी व काल्पनिक कहानियों को इतिहास बताकर देश के मुसलमानों के इमोशन के साथ खेला है.
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इस कमीने हरामखोर ने क्या लिखा था पढ़िए

मिथक इतिहास नहीं हो सकता - ड़ी.एन.झा
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अब रामसेतु के मुद्दे को ही लें. जितने भी दक्षिणपंथी लोग हैं, उनका कहना है कि नासा ने जो एरियल फोटो लिये हैं, उनसे यही सिद्ध होता है कि यह वही पुल है, जिसे राम के जमाने में वानर सेना ने बनाया था. लेकिन नासा ने ऐसा कभी नहीं कहा. नासा ने कहा था कि यह जियोलॉजिकल फॉरमेशन है जो कि लाखों वर्ष पुराना है. लेकिन लोग यह बात नहीं सुन रहे हैं.

असल में मिथकों के साथ दिक्कत यह है कि जो चीज आपके सामने होती है, उसे आप मिथ से जोड देते हैं. एक उदाहरण जनकपुर का है. जनकपुर को सीता का जन्मस्थान बताया जाता है. मगर वह सीता का जन्मस्थान हो ही नहीं सकता. वह स्थान मुश्किल से 200 साल पुराना है.

अगर मिथकों से कोई भौगोलिक संरचना जुड जाती है, तब भी उस मिथक को इतिहास नहीं माना जा सकता. सरकार ने रामसेतु के संदर्भ में इतिहासकारों की एक कमेटी बनायी थी, जिसमें प्रो रामशरण शर्मा, डॉ पदइया और प्रो बैकुंठन जैसे लोग थे. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि इस संरचना का मिथकों और रामायण में वर्णित रामसेतु से कोई लेना-देना नहीं है.

एक मिथक के इतिहास का रूप लेने का भ्रम पैदा होने की प्रक्रिया जटिल होती है. बार-बार कोई कहानी अगर लोगों के बीच दोहरायी जाये, उसे प्रस्तुत किया जाये तो वह लोकप्रिय होती जाती है.

हम इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं. बिहार के गांवों में लोग काफी समय से आल्हा-ऊदल की कहानी गाते हैं. अगले सौ सालों में मान लीजिए कि कोई इसे लिपिबद्ध कर दे. उसके बाद इसे काव्य मानना शुरू कर दिया जायेगा. इस तरह लोकप्रिय वाचिक परंपरा लिखित साहित्य परंपरा में बदल जाती है. और फिर लिखित साहित्य को कालांतर में भ्रमपूर्वक इतिहास के बतौर ले लिया जाता है. रामायण के साथ यही हुआ.

हम देखते हैं कि काल और स्थान के अनुरूप रामायण भी अलग-अलग हैं. फादर कामिल बुल्के ने राम कथा पर जो शोध किया था, उसके तहत उन्होंने रामायणों की कुल संख्या 300 बतायी. मगर रामानुजम ने जो शोध किया, तो उनका कहना है कि कन्नड और तेलुगु में ही हजारों रामायण हैं. बाकी भाषाओं को तो छोड दीजिए. और उनके पाठों में भी अंतर है.

ऐसा इसलिए होता है कि कहानी जब ट्रेवल करती है, समाज का एक वर्ग जब दूसरे वर्ग की कहानी को अपनाता है, तो इसमें वह थोडी बदल जाती है और इसे अपनाने की प्रक्रिया की भी अपनी एक कहानी बन जाती है.

आमतौर पर उत्तर भारत में माना जाता है कि सीता बडी पतिव्रता स्त्री थीं. मगर संथालों के रामायण में सीता के चरित्र के बारे में बताया गया है कि उनके रावण से भी संबंध थे और लक्ष्मण से भी. बौद्धों का जो रामायण है-दशरथ जातक-उसमें राम और सीता को भाई-बहन बताया जाता है और वे बाद में शादी करते हैं. इन राम का संबंध अयोध्या से नहीं बल्कि बनारस से है.

तो यह कहना कि कोई भी कहानी स्थिर है, सही नहीं है. वाल्मीकि रामायण के बारे में इतिहासकारों का मानना है कि उसका पहला और अंतिम कांड बाद में लिखा गया. हमें इन चीजों को एक लचीले नजरिये से देखना चाहिए.

हम देखते हैं कि अभी की प्रमुख समस्या सांप्रदायिकता की है. इतिहासकारों को सांप्रदायिकता से लडना है. आरसी मजूमदार जैसे इतिहासकारों का बडा असर रहा है और जो दक्षिणपंथी गिरोह हैं, वे उन्हीं से अपनी लेजिटिमेसी ठहराते रहे हैं. मगर फिर भी आजादी के बाद से इतिहासकारों का नजरिया काफी वैज्ञानिक ही रहा है. इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस में सैकडों इतिहासकार हैं. इतिहास कांग्रेस ने कभी भी सांप्रदायिक दृष्टि नहीं अपनायी. सांप्रदायिक पक्ष जो एक्सक्लूसिव विजन देता है, अल्पसंख्यकों के खिलाफ और अपने अतीत के बारे में वह बिल्कुल गलत है. जो भी इस देश में गंभीर रिसर्चर हैं, वे इसके विरुद्ध हैं. यह एक बडी चुनौती है.

अपने यहां सिर्फ दृष्टि की समस्या ही नहीं है. इतिहास लेखन को व्यवस्थाजन्य चुनौतियों से भी दो-चार होना पडता है. यह एक बडी कमजोरी है कि खुदाइयों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाता कि उनमें क्या मिला और उनसे हम किस निष्कर्ष पर पहुंचें. दरअसल यह गलती आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की है. वह सब जगह खुदाई करवाती रहती है, मगर उसकी रिपोर्टें नहीं जमा की जातीं.

आप इसका नुकसान जानना चाहते हैं तो केवल अयोध्या विवाद का उदाहरण देना काफी होगा. इस विवाद में पूरा मामला इतना गडबडाया सिर्फ इसलिए कि बी लाल ने सालों तक खुदाई की रिपोर्ट नहीं जमा की. जो छोटी खुदाई हुई, कोर्ट के आदेश पर, सिर्फ उसकी रिपोर्ट जमा की गयी. उसके साथ भी छेड-छाड की गयी थी. जहां भी, जो भी अवशेष मिलता है, उसे भंडार में जमा कर दिया जाता है. उसके बारे में रिपोर्ट जमा ही नहीं होती. इससे पता नहीं चलता कि क्या मिला है और उसका क्या महत्व है.

ये लेख का अंश है जो ये बार बार हर जगह सिद्ध करता फिरता है

Tuesday, 28 March 2017

भारतीय इंजीनियरों ने पहाड़ काट बना दी देश की सबसे लंबी सुरंग

कश्मीर में भारतीय इंजीनियरों ने पहाड़ काट बना दी देश की सबसे लंबी सुरंग

                    कश्मीर में भारतीय इंजीनियरों ने पहाड़ काट बना दी देश की सबसे लंबी सुरंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर को एशिया की सबसे लंबी बाई-डायरेक्शनल सुरंग का तोहफ़ा देंगे. कई मायनों में रिकॉर्ड बनाने वाली यह सुरंग देश के किसी भी हाईवे पर बनी सबसे लंबी सुरंग है. इस सुरंग की लंबाई 10.89 किलोमीटर है. जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर चेनानी से नाशरी तक बनी ये सुरंग दोनों इलाकों के बीच की दूरी को दो घंटे तक कम कर देगी.
परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को अपने फेसबुक पेज पर इस सुरंग के निर्माण से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें इसकी कई खूबियों का जिक्र किया गया है. 2519 करोड़ रुपये में बनी इस सुरंग पर भीषण बर्फबारी का भी कोई असर नहीं रहेगा. यानि दिसंबर-जनवरी की बर्फबारी में भी यह खुली रहेगी. यह सुरंग अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा फीचर्स से लैस है. इसे जम्मू कश्मीर की दुर्गम पहाड़ियों जैसे इलाके में भी रिकॉर्ड 4 साल में बना दिया गया.
भारत की इस सबसे लंबी हाईवे सुरंग में अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम लगे हुए हैं. सुरक्षा के लिए इसमें एडवांस्ड स्कैनर भी लगे हैं, जो किसी भी खतरे को भांपने में सक्षम हैं. इस सुरंग में वेंटिलेशन के साथ-साथ इमरजेंसी कॉल बॉक्स और आग से लड़ने के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम भी लगा हुआ है.
ये भी हैं खूबियां...
-इस सुरंग से जम्मू और श्रीनगर के बीच सड़क से सिर्फ पांच घंटे का ही सफर रह जाएगा. अभी जम्मू से कश्मीर जाने में 10 घंटे लगते हैं.
-एक अनुमान के मुताबिक ये सुरंग हर रोज देश का 37 लाख रुपये का ईंधन बचाएगी.
-खराब मौसम में यात्रियों को कश्मीर जाने में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा.
-इस सुरंग से जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा.
- इसमें हर 75 मीटर की दूरी पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.
- यह सुरंग 1200 मीटर की उंचाई पर स्थित है.
-सुरंग के बनने से पेड़ों की कटाई कम होगी.
-इस सुरंग से अब चेनानी और नशरी के बीच की दूरी 41 किलोमीटर के बजाय महज 10.9 किलोमीटर रह जाएगी

सैफुल्लाह इनकाउंटर के बाद यूपी एटीएस को कुछ दस्तावेज मिले थे, जिसमें बाराबंकी की दरगाह सहित लखनऊ और प्रदेश में कई जगह आतंकी घटना को अंजाम दिए जाने की योजना का खुलासा हुआ था

मास्टरमाइंड गौस मोहम्मद को लेकर एनआइए पहुंची कानपुर, एटीएस ने बाराबंकी में की जांच

सैफुल्लाह इनकाउंटर सहित यूपी में कथित आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल के पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों की जांच कर रही एनआइए टीम ने मंगलवार को कानपुर पहुंची. यहां टीम के साथ मास्टरमाइंड गौस मोहम्मद भी था. टीम ने संदिग्ध आतंकियों के ठिकाने आदि की जांच की और कई सबूत इकट्ठा किए.
गौस मोहम्मद को यूपी एटीएस और यूपी एसटीएफ की टीम ने 9 मार्च को लखनऊ से गिरफ्तार किया था. गौस मोहम्मद खान उर्फ जीएम खान इस पूरे ग्रुप का मास्टरमाइंड बताया जा रहा था.पता चला कि 15 साल वायुसेना में काम कर चुका है. उसे अंकल भी कहते हैं. गौस मोहम्मद माड्यूल के सदस्यों को प्रेरित करने का कार्य करता था. वह रायबरेली का निवासी है. पिछले तीन सालों से वह लखनऊ के बालागंज में रस्तोगी नगर में रह रहा था.
सैफुल्लाह को कमरा दिलाने और अन्य सामान उपलब्ध कराने में वह मदद करता रहा. यह भी पता चला कि गौस मोहम्मद नौकरी के बहाने सऊदी अरब में भी रह चुका है. यही नहीं कर्नाटक और नेपाल में भी इसने कई नौजवानों से संपर्क किया और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा. गौस मोहम्मद का नाम पूरे ग्रुप के मास्टरमाइंड के तौर पर उभरकर सामने आया है.
उधर सैफुल्लाह इनकाउंटर के बाद मिली जानकारी के आधार पर बाराबंकी के देवा शरीफ दरगाह में यूपी एटीएस का कमांडो दस्ता पहुंचा. यहां एटीएस टीम ने दरगाह के आस-पास एटीएस का चेकिंग अभियान चलाया. इस दौरान लोकल पुलिस के माध्यम से संदिग्धों की तलाश में गेस्ट हाउस और होटलों की चेकिंग की गई.
गौरतलब है कि सैफुल्लाह इनकाउंटर के बाद यूपी एटीएस को कुछ दस्तावेज मिले थे, जिसमें बाराबंकी की दरगाह सहित लखनऊ और प्रदेश में कई जगह आतंकी घटना को अंजाम दिए जाने की योजना का खुलासा हुआ था. बाद में एनआईए की जांच में भी गिरफ्तार आतंकियों से यही खुलासा हुआ था.