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Tuesday, 12 May 2020

e-pass across India during the lockdown

From Kerala to Kashmir, how to get an e-pass across India during the lockdown

Here is a list of state-wise e-pass links in the country: 

1.     Andaman & Nicobar Islands: Nicobars districtNorth and Middle AndamanSouth Andaman – download the application form here.

2.     Andhra Pradesh: apply for an e-pass here 

3.     Assam: apply for an e-pass here 

4.     Bihar: apply for an e-pass here 

5.     Chandigarh: apply for an e-pass here 

6.     Chhattisgarh: apply for an e-pass here 

7.     Daman and Diu: apply for an e-pass here 

8.     Delhi: apply for an e-pass here 

9.     Goa. apply for a Travel Permit here and for Temporary Pass here.

10. Gujarat:
a) Write to the DC/Sub DM to seek permission to open factory/warehouse, movement of employees and cargo/truck.
b) Include details such as Company name and factory address, line of business (specify why it is an essential commodity, names and copies of ID cards of the employees, any other specifications) and follow up with them.
c) For any further queries, the person can call 079 2325 1900 to seek an update. Click 
here for DC numbers

11. Haryana: apply for an e-pass here (apply for an e-pass in Gurugram here)

12. Himachal Pradesh: Apply for an e-pass here. For a vehicle movement e-pass in Kangra, Kullu and Una, apply here

13. Jammu and Kashmir: apply for an e-pass here 

14. Jharkhand: apply for an e-pass here 

15. Karnataka: apply for an e-pass here 

16. Kerala: apply for an e-pass here 

17. Ladakh: apply for an e-pass here 

18. Madhya Pradesh: apply for an e-pass here 

19. Maharashtra
a) Learn more about operating a factory/plant during the lockdown 
here

20. b) Apply for the movement of a restricted number of employees in Maharashtra (except Pune) here
c) Apply for the movement of a restricted number of employees in Pune here

21. Meghalaya: apply for an e-pass here 

22. Odisha: apply for an e-pass here 

23. Puducherry: apply for an e-pass here 

24. Punjab: apply for an e-pass here 

25. Rajasthan: apply for an e-pass here 

26. Tamil Nadu: apply for an e-pass here 

27. Telangana: apply for an e-pass here 

28. Uttar Pradesh: apply for an e-pass here 

29. Uttarakhand: apply for an e-pass here 

30. West Bengal: apply for an e-pass here

 


Friday, 1 May 2020

इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी बना कोरोना, लाशों को दफ्न करने के लिए जगह पड़ी कम

    दुनिया के सामने लाशों के अंतिम संस्कार की समस्या
   कई देशों में कम पड़ रही हैं लाशों को दफनाने की जगह
क्या अमेरिका, क्या इटली, क्या फ्रांस, क्या स्पेन और क्या ईरान. तमाम देशों के नाम लेते जाइए, पर मुर्दों की किस्मत और मौत की कहानी एक जैसी ही मिलेगी. कब्रिस्तानों में ताबूतों का अंबार है. दफनाने के लिए जमीन कम पड़ती जा रही है. कहीं एंबुलेंस से लाशें आ रही हैं तो कही क्रेन के जरिए उन्हें कब्र में उतारा जा रहा है. कहीं कब्र को पाटने के लिए मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है. तो कहीं इत्र की जगह दवाओं का स्प्रे किया जा रहा है.

फ्रांस में अंतिम संस्कार के इंतज़ार में लाशें!

फ्रांस की राजधानी पेरिस के एक नर्सिंग होम में बाहर से देखने में सबकुछ बिलकुल शांत लग रहा है. लेकिन जैसे जैसे आप इसके अंदर जाते जाएंगे. यहां वहां पड़ी लाशें आपको परेशान करने लगेंगी. किसी की लाश बिस्तर पर है. तो कोई फर्श पर पड़ी है. पेरिस के इस नर्सिंग होम में करीब दो महीनों से कोरोना के सैकड़ों मरीजों का इलाज चल रहा था.
अंतिम प्रक्रिया की वजह से बस चंद ही लाशें ऐसी हैं, जिन्हें अंतिम संस्कार मय्यसर हुआ है. बाकी लाशें अभी भी अपने अंतिम संस्कार के इंतजार में यहां पड़ी हैं. क्योंकि पेरिस के कब्रिस्तान में अब जगह कम पड़ने लगी हैं. और इन नई लाशों को दफनाने के इंतजाम में अभी वक्त लग रहा है. जिसकी वजह से यहां हालत ये है कि इंसानी लाशों की बू अंदर नहीं घुसने दे रही है. मगर यहां के मेडिकल स्टाफ के पास लोगों की जान बचाने के लिए कोई चारा भी नहीं हैं.

इटली में कम पड़ी कब्रिस्तान की जमीन!

कोरोना से त्रस्त देशों में बाजार भले बर्बाद हों मगर कब्रिस्तान में लोगों का आना-जाना लगा हुआ है. उसके बावजूद इटली में कोरोना की आपदा में लोगों को अपनों के अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. मरने वालों की तादाद हर दिन इतनी बढ़ती जा रही है कि अंतिम संस्कार की सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त पड़ चुकी हैं. जाहिर है इतनी ज्यादा लाशों को पूरे धार्मिक रीति रिवाजों के साथ अलग-अलग दफनाना बहुत मुश्किल है. इसीलिए इस चर्च में 90 शवों को एक साथ रखकर अंतिम क्रिया पूरी की जा रही है.

स्पेन में बिना रिश्तेदारों के अंतिम संस्कार!

इटली के बाद स्पेन में कोरोना की वजह से बहुत बुरा हाल है. मरने वालों की तादाद 20 हजार के करीब पहुंचने को है. लिहाजा शवों से वायरस के फैलने के खतरे को देखते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया ड्राइव थ्रू के जरिए की जा रही है. ड्राइव थ्रू में होता ये है कि अस्पताल से एक एक ताबूत को शव ले जाने वाली गाड़ी में रखा जाता है और फिर इन्हें चर्च में ले जाया जाता है. चर्च में पादरी बाहर आकर अंतिम रस्में पूरी करते हैं. इस दौरान सिर्फ पांच लोगों को ही वहां रहने की इजाजत दी जाती है.

लाशों को दफ्नाने के लिए ईरान ने बनाया कब्रिस्तान!

कोरोना की तबाही के बीच ईरान की सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है. अंतरिक्ष से ली गई इस तस्वीर में नया कब्रिस्तान दिखने का दावा किया गया है. इसके मुताबिक ये कब्रिस्तान ईरान के कुम शहर का है. इसका एरिया 100 एकड़ बताया जा रहा है. इसलिए अंदाजा लगाइए कि ईरान में मरने वालों की तादाद इस तेजी से बढ़ी कि उन्हें लाशों को दफनाने के लिए नया कब्रिस्तान बनाना पड़ा. ईरान में भी कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 5 हजार के करीब पहुंच चुका है. लिहाजा कई लाशों को यहां भी सामूहिक रूप से दफनाया जा रहा है.

इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी

यकीनन दुनिया के इतिहास की ये सबसे बड़ी त्रासदी का दौर है. तारीख में इसे काले अक्षरों से लिखा जाएगा. लिखा जाएगा कि कैसे इस दौर में लोगों को मरने के बाद दो गज जमीन भी मय्यसर नहीं हो पा रही थी. कैसे लोग मरने के बाद अपनों को छोड़कर भाग रहे थे. कैसे एक-एक कब्र में कई मुर्दों को दफनाया गया था.

स्पार्टा की 300 वाली जंग को यूरोप ने दुनिया भर में प्रचारित किया, पर उस से भी भयानक 300 की जंग लड़ी गयी थी भारत मे, जिसे मिटा दिया बिके कलमकारों ने


स्पार्टा की 300 वाली जंग को यूरोप ने दुनिया भर में प्रचारित किया, पर उस से भी भयानक 300 की जंग लड़ी गयी थी भारत मे, जिसे मिटा दिया बिके कलमकारों ने




कुछ साल पहले 1 हॉलीवुड फिल्म आई थी द- 300 ,ये फिल्म आधारित थी ग्रीक और पर्शिया के युध पर ,पर्शिया के राजा ने एक विशाल सेना के साथ ग्रीक पर हमला किया ज्यादातर ग्रीक राजाओं ने बिना युध के हार मान ली,परंतु स्पार्टा ने सिर् झुकाने से मना कर दिया ,स्पार्टा के पास सिर्फ 300 सैनिक थे परंतु उन्होने पर्शिया के सेनाओं से जमकर मुकाबला किया .क्यूंकि ये युरोप की घटना थी इसलिये इसे इतिहास में बड़ा स्थान मिला...,ऐसा ही एक युध भारत में भी हुआ था , The 300- (पावन खींद का युध )-- भारत की भूमि मे अगर सबसे दूरदर्शी ,साहसी और महान व्यक्ति की गणना की जायेगी तो शिवा जी महराज का नाम सबसे अग्रणी होगा भारतीय इतिहास में बहुत कम लोगों के पास शिवाजी जैसा साहस,दूरदर्शिता और त्याग की क्षमता थी . ,हालांकि की शिवाजी के पिता आदिलशाही में 2000 सिपाहियों वाले छोटे सरदार थे परंतु शिवाजी ने साधारण मराठा युवकों को अजेय योधा बनकर महान मराठा साम्राज्या की स्थापना की . शिवजी की बढ़ती ताकत को रोकने के लिये आदिलशाही ने बहुत प्रयत्न किये परंतु हर बार उन्हे असफलता ही हाथ लगी ,अफ़ज़ल ख़ान और रुस्तमे जमा के मारे जाने के बाद आदिलशाही ने एक बड़ी सेना सिद्दी जुहार के नेत्रत्वा में भेजी जिसने पन्हाल क़िले के चारों ओर घेरा डाल दिया. हालांकि 4 महीने की घेरा बंदी के बाद भी दोनो पक्षों को कोई सफलता हाथ नही लगी परंतु क़िले में खत्म हो रहे राशन की वजह से शिवाजी ने विशालगड के दुर्ग मे जाने का निश्चय किया ,आदिलशाही सेना को धोके में रखने के लिये .शिवाजी जैसे कद काठी वाले नाई को एक छोटि टुकड़ी के साथ बाहर भेजा गया और शिवाजी दूसरे रास्ते से 500 सैनिकों के साथ विशालगड के दुर्ग मे जाने का निश्चय किया ,आदिलशाही सेना को धोके में रखने के लिये .शिवाजी जैसे कद काठी वाले नाई को एक छोटि टुकड़ी के साथ बाहर भेजा गया और शिवाजी दूसरे रास्ते से 500 सैनिकों के साथ विशालगड की ओर निकल गये. , परंतु शीघ्र ही आदिल शाही सेना को इस बात का पता लग गया और उसने शिवाजी का पीछा किया ,आदिलशाही सेना को करीब आते देख मराठा सरदार बाजीप्रभु देशपाण्डे ने 300 सैनकों के साथ पावन खींद के पास इस्लामी सेना को रोकने का निश्चय किया इस ऐतिहासिक युध में 300 मराठा वीरों ने 10,000 आदिलशाही इस्लामिक सेना को मौत के घाट उतारा और जब तक शिवाजी सुरक्षित विशालगड क़िले में पहुंच नही गये आदिलशाही सेना को एक इंच भी आगे बढ़ने नही दिया ,मराठा सैनिको ने शरीर पर अनेकों घाव और लगातार खून बहते रहने पर भी तलवार नही छोड़ी ,सिर्फ 300 सैनिकों के हाथों करीब करीब आधी सेना गवाने के बाद आदिलशाही इस्लामिक सेना की आगे बढ़ने और युध करने की हिम्मत नही हुई । इस युध का भारतीय इतिहास की किताबों में ज्यादा जिक्र नही है क्यूंकि झोलाछाप इतिहासकारों के खुद के नियमो के अनुसार ये उनकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के स्वघोषित मूल्यों के खिलाफ है।