Friday, 21 April 2017

बिहार में स्थित एक प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां रात को मूर्तियां भी बातें करती हैं।

400 साल पुराने मंदिर में देर रात को मूर्तियां करती हैं एक दुसरे से बातें


कहा जाता है कि अध्यात्म और विज्ञान में परस्पर विरोध है। अध्यात्म में प्राय: तर्क-वितर्क को प्रधानता नहीं दी जाती और विज्ञान हर मान्यता के पीछे तार्किक आधार तलाश करता है। आज भी ऐसे अनेक स्थान हैं जिनसे जुड़ी मान्यताएं श्रद्धालुओं के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। दूसरी ओर विज्ञान उन्हें नकारता है।
बिहार में स्थित एक प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां रात को मूर्तियां भी बातें करती हैं। यह कथन किसी को भी आश्चर्य में डाल सकता है लेकिन श्रद्धालुओं का मानना है कि इसके पीछे भी एक अतिप्राचीन रहस्य है।
इस 400 साल पुराने मंदिर में देर रात को मूर्तियां करती हैं बातें, जानिए क्या है इसका रहस्य!
यह मंदिर बिहार के बक्सर में स्थित है, नाम है- राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर। मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं इसे रहस्यमय बनाती हैं। यह मुख्यत: तंत्र साधना के लिए जाना जाता है। यहां तंत्र-मंत्र के साधक देर रात तक देवी की साधना करते रहते हैं।
इस मंदिर में त्रिपुर सुंदरी की आराधना की जाती है। इसके अलावा बगलामुखी, तारा देवी, भगवान भैरव आदि की आराधना भी होती है। मंदिर में देवी-देवताओं की कई प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। तंत्र साधक इनकी आराधना करते हैं। मान्यता है कि जब रात को यहां पूरी तरह खामोशी होती है तो विशेष प्रकार की आवाज सुनाई देती है। तंत्र साधकों और श्रद्धालुओं का मानना है कि ये आवाजें इन मूर्तियों से आती हैं।
यहीं नहीं, मंदिर के करीब से गुजरने वाले कई राहगीर भी यह मानते हैं कि तंत्र साधना से सिद्ध इन मूर्तियों से रात को विशेष प्रकार की आवाजें आती हैं। वहीं, कुछ लोगों का यह मानना है कि मंदिर की बनावट इस प्रकार है कि यहां सूक्ष्म ध्वनि काफी देर तक गूंजती रहती है। यही कारण है कि शब्द यहां के वातावरण में भ्रमण करते रहते हैं।
कितना पुराना है मंदिर
यह मंदिर करीब 400 साल पुराना माना जाता है। इसकी स्थापना एक तांत्रिक ने की थी। उसका नाम भवानी मिश्र था। मंदिर में देवी की विभिन्न प्रतिमाएं तंत्र साधना के लिए स्थापित की गई हैं। भवानी मिश्र के बाद उनके वंशज इस मंदिर में पुजारी बनते रहे हैं।

Thursday, 20 April 2017

नहीं थम रहा हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों का गलत प्रयोग

नहीं थम रहा हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों का गलत प्रयोग, भड़के भारतीय

    मां काली मां काली
    aajtak.in [Edited By: आरती मिश्रा]
    नई दिल्‍ली, 20 अप्रैल 2017, अपडेटेड 14:16 IST

    एक बार फिर सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों के प्रयोग पर बहस छिड़ गई है. इस बार मामला गर्माया है केटी पेरी के मां काली का चित्र प्रयोग करने पर‍.
    दरअसल, हॉलीवुड सिंगर केटी पेरी ने अपने इंस्‍टाग्राम अकाउंट पर मां काली की तस्‍वीर पोस्‍ट की है. उन्‍होंने जबसे ये तस्‍वीर पोस्‍ट की है, तबसे वे भारतीयों के निशाने पर है. 
    ये है केटी पेरी का पोस्‍ट- 
    हालांकि केटी ने अपने मूड को जाहिर करने के लिए ये तस्‍वीर शेयर की थी, लेकिन इसके लिए उन्‍हें काफी ट्रोल किया जा रहा है. लोगों का कहना है कि वे अपने मूड को दर्शाने के लिए इस तरह भारतीय देवी के चित्र का प्रयाेग नहीं कर सकतीं. 
    बीयर बोतल पर गणेश तो जूते पर ऊं, ऑनलाइन कंपनी के खिलाफ केस दर्ज 
    ये इस तरह का पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी भारतीय देवी-देवताओं की तस्‍वीरों के गलत प्रयोग पर लोगों ने आपत्ति जताई है. कुछ समय पहले ही अमेरिका की एक कंपनी ने बियर की बोतल पर भगवान गणेश की तस्वीर का इस्तेमाल किया था जबकि जबकि एक अन्‍य कंपनी ने जूतों पर ओम लिख दिया था. 
    गौरतलब है कि ओम लिखे जूते बेचने के मामले में वेबसाइट yeswevibe.com और भगवान गणेश की तस्वीर वाली बीयर बोतल बेचने के मामले में lostcoast.com के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी. 
    पाकिस्तान के सिंध में बिक रहे हैं 'ऊँ' लिखे हुए जूते, हिंदू संगठन ने जताया आक्रोश 
    इससे पहले, ऑनलाइन वेबसाइट अमेजन पर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर वाले पायदान बेचने का मामला तो खूब गर्माया था. 
    फिर अमेजन पर ही तिंरगा झंडा वाले पायदान की बिक्री भी विवादों में रही थी. भारतीय विदेश मंत्रालय ने जब कड़ा रुख अपनाया तो अमेजन ने ये उत्पाद हटा लिए थे.

    Wednesday, 19 April 2017

    अब इस मामले में सिंगर मीका सिंह ने भी सोनू को सलाह दे डाली है.

    मीका ने दी सोनू को सलाह, कहा- ज्यादा दिक्कत है तो घर बदलें


    सोनू निगम के लाउडस्पीकर वाले ट्वीट ने बड़े विवाद का रूप ले लिया है. हालांकि उन्होंने बाद में ट्वीट्स में मंदिर और गुरुद्वारे के बारे में लिखा लेकिन बड़े रूप में यह अजान वर्सेज सोनू निगम बन गया है. इस विवाद में कई बॉलीवुड सेलेब्स सोनू के साथ हैं तो कई उनके विरोध में हैं. अब इस मामले में सिंगर मीका सिंह ने भी सोनू को सलाह दे डाली है.
    मीका ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि बड़े भाई मैं सिंगर के रूप में आपकी बहुत इज्जत करता हूं और अगर आपको अजान से परेशानी होती है तो आपको अपना घर बदल लेना चाहिए. 
    इसके जवाब में सोनू निगम ने लिखा कि अगर में लाउडस्पीकर की बात कर रहा हूं तो मैंने उसमें मंदिर और मस्जिद की बात भी की है. क्या इसे समझना इतना मुश्किल है.
    इसके बाद मीका ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च सिर्फ लाउडस्पीकर के लिए नहीं जाने जाते हैं बल्कि लंगर, सम्मानजनक चीजों और दान के लिए भी जाने जाते हैं. 
    बता दें कि सोनू निगम ने लिखा था कि सुबह लाउडस्पीकर से दी जाने वाली अजान से उनकी नींद खराब होती है और जब वह मुस्ल‍िम नहीं हैं तो वह इस धार्मिक कट्टरता को बर्दाश्त करें. ऐसा करना तो सरासर गुंडागर्दी है. हालांकि सोनू निगम ने अपने निशाने पर मंदिर और गुरुद्वारों में बजने वाले लाउडस्पीकर को भी लिया. 

    Saturday, 15 April 2017

    बलिदान दिवस क्रन्तिकारी विश्वनाथ शाहदेव . वो महायोद्धा जिसे हमें जानने ही नहीं दिया गया

    16 अप्रैल - बलिदान दिवस क्रन्तिकारी विश्वनाथ शाहदेव . वो महायोद्धा जिसे हमें जानने ही नहीं दिया गया
    1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानी विश्वनाथ शाहदेव झारखंड की एक छोटी सी रियासात बड़कागढ़ के नरेश थे। मातृभूम का प्रेम , गौरवमय स्वाभिमान और देशभक्ति उनकी नसों में रक्त के साथ बहती थी। उसी स्वाभिमान , राष्ट्रप्रेम को आत्मसात करते हुए वो महासमर 1857 की क्रांति में अपना राज पाट व् सुख सुविधा छोड़ कर कूद गये थे। 

    जिस तरह ब्रिटिश सरकार अत्याचार और अन्याय पर उतारू थी उसे देख कर भारत की वीरभूमि झारखंड में भी क्रान्ति की ज्वाला भड़क उठी थी । उस समय वहां क्रान्ति के प्रमुख नेतृत्वकर्ता  ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव समूचे झारखंड को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने की घोषणा कर चूके थे। ठाकुर विश्वनाथ जी के जांबाज़ सैनिक कई मोर्चों पर अंग्रेजों का बेहद सधे तात्रीके से आमना सामना कर रहे थे। यह युद्ध कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा गया .  क्रांतिकारियों के एक दल ने अंग्रेजों को धूल चटा कर अपनी विजय पताका को झारखंड के चतरा तक पहुंचा दिया। इस जांबाज़ फौजी दल का नेतृत्व ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव और दूसरे दल का नेतृत्व उनके दीवान गणपत राय कर रहे थे। भारत माँ को आज़ाद करवाने का जूनून इस कदर हावी था उन सब पर की उनके आक्रमण इतना तेज थे कि आततायी अंग्रेजों को रांची छोड़कर भागना पड़ा। रांची की कचहरी, थाना, जेल जैसी सार्वजनिक और सरकारी जगहों पर क्रांतिकारियों का कब्जा हो गया । झारखंड के रांची शहर को क्रांतिवीरों ने स्वतंत्र घोषित कर डाला जो १ महीने तक आज़ाद रहा लेकिन कई बार की तरह एक बार और देश के अंदर छुपे हुए गद्दारों की वजह से यह स्थिति ज्यादा समय नहीं बन पायी रही .  ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को पकडने के लिए अंग्रेजों बड़ा ने ईनाम घोषित किया। उस समय ब्रिटिश सेना का कैप्टन ओक्स निकल पड़ा था उनकी तलाश में जो आज के समय में गद्दार और दगाबाज बोले जाते हैं और वो अपनी इस खोज में सफल भी रहा. पर गाद्दारों की गद्दारी क्रांतिवीरों के कदम नहीं रोक पायी पर सीमित संसाधनों और पुराने अस्त्रों से लड़ रही क्रांतिकारियों की टोली को गद्दारों की गद्दारी एक और बोझ दे गयी.जयचंद और मीरजाफर जैसे लोगों ने झारखंड के क्रांतिकारियों को अंग्रेजों की जेलों में डलवा दिया। 1858 में जब ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव चतरा तालाब के पास अंग्रजों से युद्ध कर रहे  थे, तभी धोखे से उन्हें घेर कर पकड़ लिया गया। जनता में दहशत बनाने के लिए अंग्रजों ने उन्हें पैदल चतरा से रांची लाकर अपर बाजार जेल में निरुद्ध किया ।आज ही के दिन अर्थात  16 अप्रैल 1858 को ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को रांची जिला स्कूल के गेट के निकट एक कदंब पेड़ की डाली से लटका कर फांसी  दी गयी और आज़ादी की चाहे में छोटी से दल को ले कर ब्रिटिश हुकूमत से भिड़ गया यह महायोद्धा सदा के लिए अमर हो गया . दुर्भाग्य है कि ऐसे महावीरों को हमारी शाश्कीय पुस्तकों में वो स्थान नहीं मिला जिसके वो पात्र थे . उनके बलिदान के स्तर को कम कर के आँका गया जिसका परिणाम वर्तमान पीढ़ी दिग्भर्मित हो कर झेल रही है . निश्चित रूप से भारत विरोधी नारे लगाने वाले कुछ संस्थानों में यदि ऐसे वीरों की जीवनी उपलब्ध होती तो कोई भी भारत के टुकड़े जैसी बात नहीं करता . 

    Friday, 14 April 2017

    The post Tour Programme of Jagadgurus from May 2 to June 10, 2017 appeared first on Sringeri Sharada Peetham.

    has been announced and is available for download. The Jagadgurus will continue Their Vijaya Yatra in Tamil Nadu after observing the Shankara Jayanti Celebrations at Coimbatore

      New to Sringeri Sharada Peetham? Click here to know more »

    Tour Programme of Jagadgurus from May 2 to June 10, 2017

    The tour programme of the Jagadgurus from May 2 to June 10, 2017 has been announced and is available for download. The Jagadgurus will continue Their Vijaya Yatra in Tamil Nadu after observing the Shankara Jayanti Celebrations at Coimbatore, and grace many districts including Tiruppur, Karur, Tiruchirappalli, Ramanathapuram, Thoothukkudi, Tirunelveli and Kanyakumari.

    Tour Programme of Jagadgurus from April 14 to May 2, 2017

    The tour programme of the Jagadgurus from April 14, 2017 to May 2, 2017 has been announced and is available for download. The Ubhaya Jagadgurus will continue their Vijaya Yatra in Tamil Nadu and will observe the Shankara Jayanti Celebrations of the Hemalamba Samvatsara in the Sringeri Shankara Math, Coimbatore.

    Jagadgurus undertake Vijaya Yatra

    Jagadguru Shankaracharya Sri Sri Sri Bharati Tirtha Mahasannidhanam and Jagadguru Shankaracharya Sri Sri Sri Vidhushekhara Bharati Sannidhanam have undertaken a Vijaya Yatra. The Jagadgurus will enter Tamil Nadu on March 14, 2017. The 67th Vardhanti of Jagadguru Mahasannidhanam will be celebrated at Sringeri Shankara Math, Bypass Road, Madurai. The Jagadgurus will celebrate Shankara Jayanti at the Sringeri Shankara Math, Coimbatore.
    For detailed programme of the Yatra, please click the below link.
    For the benefit of devotees, a list of lodging facilities close to the Math in Madurai is given here – Lodging Facilities at Madurai

    IMPORTANT ANNOUNCEMENTS

    Shankara Jayanti 2017 – Veda Poshaka Sabha Exam

    Jagadguru Shankaracharya Sri Sri Sri Bharati Tirtha Mahasannidhanam and Sri Sri Sri Vidhushekhara Bharati Sannidhanam will observe this year’s Shankara Jayanti Celebrations at Coimbatore.
    As part of the Shankara Jayanti Celebrations, the Annual  Veda Poshaka Sabha Examinations will be held from April 27, 2017 to April 30, 2017.
    Advanced students of the Vedas are welcome to participate in the Vedic examinations to be conducted during this time. The application form can be downloaded below.
    Veda Poshaka Sabha Sringeri Pariksha registration form Shankara Jayanti 2017

    Sri Adi Shankaracharya Ashtottara Shatanama Parayana Yajna – Tamil Nadu


    With the blessings of Jagadguru Shankaracharya Sri Sri Bharati Tirtha Mahasannidhanam, and Jagadguru Shankaracharya Sri Sri Vidhushekhara Bharati Sannidhanam,Sri Adi Shankaracharya Ashtottara Shatanama Parayana Yajna commenced throughout Tamilnadu on January 11, 2017. 
    Thanks to the effort of all the coordinators, hundreds of centres with groups of devotees across Tamil Nadu have sprung up. As part of the Yajna, tens of thousands of devotees are to chant the Ashtottara Shatanama of Sri Adi Shankaracharya in groups in various districts of Tamil Nadu. As part of the Parayana session, devotees chant the Ekashloki Prakaranam of Sri Adi Shankaracharya, Guru Vandanam, Sri Sharada Bhujanga Stotram of Sri Adi Shankaracharya and the Ashtottara Shatanamavali of Sri Adi Shankaracharya and a Mangalam song.

    Advaita Sharada Project Second Release

    Jagadguru Shankaracharya Sri Sri Bharati Tirtha Mahasannidhanam released the second version of the Advaita Sharada Project of the Sringeri Math on February 2, 2017 as part of the ongoing Sharadalaya Swarna Shikhara Kumbhabhisheka Celebrations.
    The project being undertaken by the Sri Shankara Advaita Research Centre of the Math in association with M/s Sriranga Digital Software Technologies, Mysore, was originally made live on the internet during the Shankara Jayanti 2014 Celebrations and contained the Prasthana-traya Bhashyam-s of Sri Adi Shankara Bhagavatpada as searchable and hyperlinked text.
    Being executed under the guidance and direction of Sri Mahasannidhanam and Sri Sannidhanam, the Advaita Sharada Project has now introduced for the first-ever time an elegant interface for featuring sub-commentaries or Vyakhyana-s.
    The revamped second release features Vyakhyana-s (Ratnaprabha and Sri Padmapadacharya’s Panchapadika) to the Brahma Sutra Bhashyam and to the Gita Bhashyam. Sri Sureshwaracharya’s Vartikas on the Taittireeya Upanishad Bhashyam are also part of this release.
    Other texts include the 14th century work pertaining to the Brahma Sutras namely “Vaiyasika Nyaya Mala” of the 11th Acharya of the Peetham (Jagadguru Sri Bharati Tirtha I), Sri Totakacharya’s Shruti-Saara-Samuddharanam and Sri Hastamalakacharya’s Hastamalakeeyam (along with the commentary by Sri Adi Shankaracharya).
    A sub-commentary on Panchapadika titled Vaktavya Kashika, written by Sri Uttamajna Yati, a Sannyasi disciple of Jagadguru Sri Jnanottamacharya, the 5th Acharya of the Peetham has also been included.
    Prakaranas of Bhagavatpada such as Vivekachoodamani, Sarva-Vedanta-Siddhanta-Saara-Sangraha and Shatashloki are also featured. More texts, sub-commentaries and features will be added in the subsequent months.
    The contents may be accessed at the Project’s website that has been blessed with the Srimukham of Sri Mahasannidhanam.

    GALLERY

    (Click to Enlarge)

      

    सीता की जन्मस्थली को लेकर केंद्रीय मंत्री के विवादास्पद बयान

    सीता की जन्मस्थली को लेकर केंद्रीय मंत्री के विवादास्पद बयान से संत समाज नाराज

    केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के सीतामढ़ी को लेकर दिए गए बयान से सीतामढ़ी के संत समाज में आक्रोश है. संत समाज ने मंत्री से अपने बयान पर माफी मांगने को कहा नहीं तो दुष्परिणाम की चेतावनी दी है. बिहार के सीतामढ़ी में माता सीता की प्रकट्य स्थली है. सदियों से ये मान्यता चली आ रही है कि मिथिला के राजा जनक ने भयंकर सूखे चपेट में आए राज्य में वर्षा के लिए जब हल चलाया तो सीतामढ़ी के निकट पुनौरा धरती से माता सीता का जन्म हुआ. वाल्मीकि रामायण में भी ये चर्चा की गई है कि मिथिला में माता सीता का जन्म हुआ था.
    लेकिन केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने राज्यसभा में जो जवाब दिया उससे पूरा संत समाज आंदोलित हो उठा है. संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने राज्यसभा में कहा कि सीतामढ़ी बस आस्था और विश्वास का केंद्र है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वहां ऐसा कोई प्रमाण नहीं पाया है जिसकी वजह से सीतामढ़ी को सीता की जन्मस्थली माना जाए. महेश शर्मा मध्य प्रदेश के बीजेपी सांसद प्रभात झा के सवाल का जवाब दे रहे थे. प्रभात झा सीतामढ़ी के मूल निवासी है.
    केंद्रीय मंत्री के इस बयान से केवल सीतामढ़ी ही नहीं बल्कि नेपाल में स्थित जनकपुर में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है. सीतामढ़ी के संत समाज ने तो आंदोलन की चेतावनी दी है. उनकी मांग है कि मंत्री अपने बयान के लिए माफी मांगें. इसके लिए संत समाज की शुक्रवार को सीतामढ़ी के जानकी मंदिर में एक आपात बैठक आयोजित की गई. बैठक में शामिल संतों ने मंत्री की आध्यात्मिक जानकारी पर प्रश्न उठाते हुए उनकी मानसिक स्थिति पर भी सवाल खड़ा किया.
    मंदिर के पुजारी त्रिलोकी दास ने कहा कि सीतामढ़ी में त्रेयता युग में माता सीता के जन्म का प्रमाण है, जब राक्षसों के अत्याचार से 12 वर्षों तक भयानक सूखे के बाद राजा जनक के द्वारा हल जोतने के दौरान संतों के रक्त से भरे घड़े से माता सीता प्रकट हुई. ऐसे में सीता के जन्म पर सवाल उठाने वाले मंत्री जी राम को मानते हैं सीता को नहीं? इसका सीतामढ़ी का संत समाज कड़ा विरोध करता है और मंत्री जी को अविलंब माफी मांगनी चाहिए, इतना ही नहीं नारद मुनि के आवाह्न पर सीता की प्राकट्य स्थली का नाम सीतामढ़ी रखा गया. इसके प्रमाण पौराणिक ग्रंथों में भी है.
    महेश शर्मा बीजेपी के सांसद है. उनकी पार्टी अयोध्या को राम की जन्म भूमि मानती है पर सीता की जन्मस्थली पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. हालांकि ये सही है कि अयोध्या में श्री राम का जन्म हुआ है इसका प्रमाण पुरात्व विभाग को मिला है. लेकिन सीता माता की जन्मस्थली के लिए उस स्तर पर शोध नहीं किया गया तो फिर प्रामाणिकता का क्या सवाल है. रही बात पौराणिक ग्रंथों में तो इसकी चर्चा जरूर मिलती है. और सबसे बड़ी बात अगर सीतामढ़ी में माता सीता का जन्म नहीं हुआ है तो फिर नेपाल में स्थित जनकपुर की क्या प्रामाणिकता है.
    जबकि उस समय के मिथिला राज्य में गंगा से उतर स्थित भूभाग को मिथिला का सीमा माना गया है. साथ ही सरयू नदी से लगे क्षेत्रों मे रामायण काल की हुई घटनाओं का जिक्र है. चाहे वो अहिल्या स्थान हो पुनौरा धाम हलेश्वर स्थान पंथ पाकर धनुषा व जनकपुर ये सभी स्थान एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. पौराणिक ग्रंथों में इसकी चर्चा है कि सूखे से जल रही धरती पर वर्षा कराने के आहवान के साथ राजा जनक ने जनकपुर से कुछ दुरी पर हल चलाया था. सीतामढ़ी के पुनौराधाम से जनकपुर की दूरी कोई बहुत ज्यादा नहीं है.
    हर साल विवाह पंचमी के अवसर पर अयोध्या से श्रीराम की बारात जनकपुर जाता है. तो क्या ये बिना किसी प्रमाण के ये आयोजन सदियों से चल रहा है. जिन धर्मग्रंथों में राम अयोध्या जनकपुर और लंका का जिक्र है उन्हीं में सीता और उनकी जन्मभूमि मिथिला का भी जिक्र है. उन्हीं धर्मग्रंथों से सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मस्थली माना है.

    दुबई के एक गुरुद्वारे ने 101 देशों के अधिकतम लोगों को मुफ्त में नाश्ता कराकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है.

    दुबई में गुरुद्वारे ने 101 देशों के लोगों को नाश्ता कराकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

    दुबई के एक गुरुद्वारे ने 101 देशों के अधिकतम लोगों को मुफ्त में नाश्ता कराकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. दुबई के जेबेल अली स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार में घंटे भर के कार्यक्रम में 101 देशों के 600 लोगों के लिए नाश्ता परोसा गया. इसके लिए गुरुद्वारे का नाम गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया. इस बाबत आयोजित कार्यक्रम का नाम 'विविधता के लिए नाश्ता' रखा गया था.
    खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूली बच्चों, सरकारी अधिकारियों और राजनयिकों ने इस समारोह में भाग लिया. कार्यक्रम में संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत नवदीप सिंह सूरी मुख्य अतिथि थे. शहर के विभिन्न भागों से लोग जेबेल अली गार्डन में जमा हुए और नाश्ते के लिए लगाया गया तंबू पूरी तरह से लोगों से भर गया.
    गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों ने पुष्टि की कि गुरुद्वारा ने 2015 में इटली के मिलान एक्सपो में नुटेला द्वारा आयोजित 55 देशों के लोगों के नाश्ते करने के पहले के रिकॉर्ड को तोड़ा है. गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार के अध्यक्ष सुरेंद्र कंधारी ने कहा, "सिख धर्म ने हमेशा से विविधता को गले लगाया है, क्योंकि यह हमारे विश्वास और धर्म का हिस्सा है. हम सभी मानव हैं और सबका सम्मान किया जाना चाहिए."

    Wednesday, 12 April 2017

    1984 कांग्रेस ही है असली कसूरवार

    फुल्का का बयान, 84 दंगों के दौरान हिंदूओं ने बचाई थी सिखों की जान, कांग्रेस ही है असली कसूरवार

    1984 के सिख दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्टलड़ाई लड़ रहे पंजाब के आप विधायक और विपक्ष नेता एच.एस. फूलका ने ओन्टारियो विधानसभा में पारित उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें  सिख विरोधी दंगों को सिख नरसंहार माना गया है। फूलका ने कहा कि हिंदुओं ने सिखों को नहीं मारा। बल्कि यह तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा सिखों के खिलाफ चली गई चाल थी।
    यही कारण है कि दंगा सिखों-हिंदूओं के बीच नहीं। कांग्रेस और सिखों के बीच हुआ था। इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि दंगों के दौरान उन्हें तथा उनके परिवार की रक्षा हिंदु मकान मालिक ने ही की थी। इसके बाद उन्हें सुरक्षित पंजाब भेज दिया गया।अगर उनके मकान मालिक उनकी मदद न करते तो आज वह तथा उनका परिवार जीवित नहीं होता।  हिंदूओ ने कई सिख  परिवारो की जान बचाई थी। उस समय कांग्रेस सरकार ने तो बहुत कोशिश की थी कि कोई भी सिख परिवार बच न पाए।फूलका ने कहा कि इस नरसंहार मानकर के लिए जिम्मेदार आरोपियों को कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए।उल्लेखनीय है कि  कनाडा के ओंटारियो प्रांत की विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर भारत में 1984 में हुए दंगों को आधिकारिक तौर पर सिख नरसंहार माना है।

    Tuesday, 11 April 2017

    दरअसल, पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर हिंदी और उर्दू में बंगाल, इंग्लिश में बेंगाल और बांग्ला भाषा में 'बांग्ला' पुकारे जाने का प्रस्ताव है. ममता का मानना था कि, जब पूर्वी पाकिस्तान नहीं रहा, वह बांग्लादेश हो गया, ऐसे में विभाजन के वक़्त को हम क्यों याद करें.

    पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बंगाल' करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की विधानसभा से पास करवाकर केंद्र को भेज चुकीं हैं,
    पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बंगाल' करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की विधानसभा से पास करवाकर केंद्र को भेज चुकीं हैं, लेकिन केंद्र ने अब तक उस पर कोई फैसला नहीं किया है. इससे मुख्यमंत्री ममता नाराज़ हैं.
    दरअसल, पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर हिंदी और उर्दू में बंगाल, इंग्लिश में बेंगाल और बांग्ला भाषा में 'बांग्ला' पुकारे जाने का प्रस्ताव है. ममता का मानना था कि, जब पूर्वी पाकिस्तान नहीं रहा, वह बांग्लादेश हो गया, ऐसे में विभाजन के वक़्त को हम क्यों याद करें.लेकिन केंद्र ने इस प्रस्ताव पर कुछ सवाल उठाये हैं, जैसे बांग्ला भाषा में प्रदेश का नाम भी 'बांग्ला' होगा, जिस पर कुछ को ऐतराज है. साथ ही एक प्रदेश के तीन नाम पर भी सवाल हैं. इसी के चलते मामला अटका हुआ है. इससे ममता खासी नाखुश हैं, इस बावत बंगाल सरकार ने गृह मंत्रालय को खत भी लिखा है. इस मसले पर तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर का कहना है कि, विभाजन का वक़्त गया, पूर्वी पाकिस्तान ख़त्म हो गया, फिर नाम बदलने में देरी क्यों?वहीं इस मामले में बीजेपी के पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं कि विधानसभा से जो प्रस्ताव आया है, वह सर्वसम्मति से नहीं बल्कि बहुमत से आया है, इसलिए जल्दबाज़ी में फैसला नहीं किया जा सकता. साथ ही इस मुद्दे पर राज्य में दो राय हैं.वैसे इस मसले पर ममता से विपक्षी चुटकी भी ले रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी कहते हैं कि, राज्यों की होने वाली बैठकों में मुख्यमंत्री के बोलने का नंबर अंग्रेजी वर्णमाला के west bengal के w के चलते बाद में आता था, उनको इंतज़ार करना पड़ता था, इसलिए तुगलकी अंदाज़ में उन्होंने ये फैसला कर लिया. ये होना चाहिए, लेकिन सभी दलों के साथ ही समाज के अहम लोगों और बुद्धिजीवी वर्ग से विचार करके माहौल तैयार करके आगे बढ़ना चाहिए था. कुल मिलाकर एक और मुद्दे पर ममता और केंद्र आमने सामने आ गये हैं.

    इस बार सरकार ने राज्य में इतिहास की किताबों में तृणमूल कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा नेताओं के नाम जोड़ने का फैसला किया है.

    EXCLUSIVE: पश्चिम बंगाल में बच्चे पढ़ेंगे ममता बनर्जी और TMC नेताओं पर चैप्टर

    स्कूल पाठ्यपुस्तकों से भगवान राम के संदर्भ को हटाने के फैसले के बाद ममता बनर्जी सरकार ने एक और विवादित कदम उठाया है. इस बार सरकार ने राज्य में इतिहास की किताबों में तृणमूल कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा नेताओं के नाम जोड़ने का फैसला किया है.पास पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की ओर से तैयार नई पाठ्यपुस्तक की ड्राफ्ट कॉपी है जिसमें सिंगुर जमीन आंदोलन पर अध्याय जोड़ा गया है. बता दें कि इसी आंदोलन की वजह से ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की मुहिम को तेजी मिली थी. 'अतीत ओ एत्झयो' नाम की ये पाठ्यपुस्तक कक्षा आठ के लिए प्रकाशित की जा रही है. इसे अगले शैक्षणिक सत्र से पढ़ाया जाएगा. 
    सिंगुर संबंधी अध्याय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद के संदर्भ से शुरू होता है. फिर इसमें तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं- पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय, पुर्णेंदु बासु, अशिमा पात्रा, डोला सेन, बृत्या बासु, अर्पिता घोष, सोवन चटर्जी, फिरहद हकीम, सोवनदेब चटर्जी, सुब्रता बक्शी, रबिंद्रनाथ भट्टाचार्जी, बेचाराम मन्ना आदि के भी नाम आते हैं.
    अध्याय में सिंगुर आंदोलन को 'ऐतिहासिक' बताते हुए ममता बनर्जी को ऐसा नेता बताया गया है जिन्होंने जमीन अधिगृहण विरोधी आंदोलन को संगठित किया और किसानों के संघर्ष को दिशा दी. अध्याय में कहा गया है कि आंदोलन ने बहुफसली जमीन पर लखटकिया कार प्रोजेक्ट के लिए फैक्ट्री स्थापित करने की खराब कोशिश को रोक दिया जिसके पीछे विकास के लिए औद्योगिकरण और रोजगार सृजन का नाम लिया जा रहा था.
    राज्य सरकार की ओर से पाठ्यपुस्तकों को रिडिजाइन करने के लिए जिम्मेदार एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन अवीक मजूमदार ने इस कदम को सही ठहराया है. मजूमदार ने कहा, 'अगर उन्होंने आंदोलन की अगुआई की है तो ये वैधानिक है कि उन्हें शामिल किया जाए. क्या हम किसी को इसलिए शामिल नहीं करें कि वो एक राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं.'
    मजूमदार के मुताबिक पाठ्यक्रम कमेटी ने ये संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की है कि पुराने जमीन आंदोलनों को भी बनाए रखा जाए. इस संबंध में मजूमदार ने तेभागा आंदोलन का नाम गिनाया. मजूमदार के मुताबिक सिंगुर को भारत के अन्य जमीन आंदोलनों की कड़ी मे शामिल किया गया है. इस आंदोलन के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आया जिसने शताब्दी पुरानी जमीन अधिगृहण व्यवस्था को बदल दिया.
    बीते साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की पूर्व लेफ्ट फ्रंट सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया था जिसमें टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिगृहीत की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसे किसानों को जमीन वापस करने का आदेश भी दिया था जिन्होंने प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए अपनी जमीन नहीं देने की इच्छा जताई थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ममता बनर्जी के लिए ऐतिहासिक राजनीतिक जीत बताया गया था. बीते साल आने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से ममता बनर्जी सरकार को सिंगुर अध्याय को पाठ्यक्रम से जोड़ने का विचार आया था. यहां ये बताना दिलचस्प होगा कि राजस्थान में वसुंधरा राजे की अगुआई वाली बीजेपी सरकार ने भी हाल में ऐसा ही फैसला किया. वसुंधरा राजे सरकार ने 12वीं कक्षा की अर्थशास्त्र की पुस्तक में नोट बंदी और कैशलेस अर्थव्यवस्था पर चैप्टर जोड़ने का फैसला किया. इसे अगले शैक्षणिक सत्र से पढ़ाया जाएगा.

    पुलिस का लाठीचार्ज मंगलवार की सुबह हिंदू जागरण मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता 'जय श्री राम' के नारों के साथ सड़कों पर उतर आए. हालांकि पुलिस ने उन्हें जुलूस की इजाजत नहीं दी थी.

    बंगाल के बीरभूम में हनुमान जयंती के जुलूस पर लाठीचार्ज, इलाके में सुरक्षा कड़ी

    पुलिस का लाठीचार्ज
    मंगलवार की सुबह हिंदू जागरण मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता 'जय श्री राम' के नारों के साथ सड़कों पर उतर आए. हालांकि पुलिस ने उन्हें जुलूस की इजाजत नहीं दी थी. सूरी के बस स्टैंड के पास पुलिसकर्मियों ने जुलूस को रोका तो दोनों ओर से बहस होने लगी. थोड़ी ही देर में नौबत हाथापाई तक पहुंच गई. इसके बाद पुलिस को गुस्साए कार्यकर्ताओं को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. झड़प के बाद इलाके में रेपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है. करीब 10 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है.
    ममता पर निशाना 
    इससे पहले बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस मामले में तानाशाही रवैये का आरोप लगाया था. राज्य के दौरे पर आए किरन रिजिजू ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधने के लिए कर रही हैं. दूसरी ओर, ममता बनर्जी का कहना है कि बीजेपी और आरएसएस राज्य के सांप्रदायिक सौहार्द को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं.

    पाक में फांसी की सजा तक, पढ़ें कुलभूषण की पूरी कहानी

    नेवी की नौकरी से पाक में फांसी की सजा तक, पढ़ें कुलभूषण की पूरी कहानी

    पाकिस्तान में भारतीय जासूस होने के आरोप में मार्च 2016 में गिरफ्तार हुए कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई गई है. पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के मुताबिक फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने जाधव को मौत की सजा सुनाई और पाक आर्मी चीफ ने इसकी पुष्टि भी कर दी यानी जाधव को 90 दिन के भीतर फांसी की सजा दी जानी है.
    आईएसपीआर ने पिछले साल एक वीडियो जारी किया था जिसे उसने जाधव का कबूलनामा बताया था. जाधव को इसी कबूलनामे के आधार पर पाक उसे भारतीय जासूस बता रहा है जबकि भारत ने साफ कर दिया है कि जाधव नौसेना में जरूर था लेकिन वो ये नौकरी छोड़कर ईरान से व्यापार करने लगा था और पाक एजेंसियों ने उसका वहीं से अपहरण किया है.
    कुलभूषण के कबूलनामे की पाक की कहानी 
    पाक का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना में सेवारत अफसर है और कमांडर है. वो नौसेना के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से है और उसका कवर नाम हुसैन मुबारक पटेल था जो उसने भारतीय एजेंसियों के लिए खुफिया जानकारियां जुटाने के लिए अपनाया था. पाक का दावा है कि कुलभूषण ने 1987 में नेशनल डिफेंस अकेडमी जॉइन की और उसके बाद जनवरी 1991 में उसने इंडियन नेवी में नौकरी शुरू की. दिसंबर 2001 में जब संसद पर हमला हुआ तो कुलभूषण ने अपनी सेवाएं खुफिया सूचनाएं जुटाने के लिए देना शुरू कर दीं. पाक दावा कर रहा है कि कुलभूषण मुंबई में रहता है और अब भी वह नौसेना में सेवारत अफसर है जो 2022 तक रिटायर होगा.
    जाधव ने लिया था रॉ के ज्वाइंट सेक्रेटरी का नाम
    पाक का कहना है कि जाधव ने ईरान के चाबाहार में एक छोटा बिजनेस शुरू किया था वो इसी मकसद से किया गया था ताकि वो भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम कर सके. जाधव 2003 और 2004 में रॉ के मिशन को पूरा करने के लिए कराची भी आया था. पाक ने जो कबूलनामा जारी किया है उसके मुताबिक जाधव 2013 में रॉ द्वारा चुना गया और तब से वो बलूचिस्तान और कराची में एजेंसी से लिए कई मिशन पूरे कर चुका है. वीडियो में जाधव कहता दिख रहा है कि वो रॉ में संयुक्त सचिव अनिल कुमार गुप्ता को सीधे रिपोर्ट करता है और गुप्ता के पाक खासकर बलूचिस्तान छात्र संगठन में अच्छे कॉन्ट्रैक्ट हैं.
    ईरान से पाक में घुसते वक्त गिरफ्तार हुआ
    वीडियो में कुलभूषण के हवाले से कहा जा रहा है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ बलूच आंदोलन को फाइनेंस कर रही है और इन आंदोलनकारियों की मदद से पाकिस्तान में देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रही है जिससे पाकिस्तानी नागरिकों की जानमाल का नुकसान हो रहा है. कुलभूषण ने इस कथित कबूलनामे में अपने पकड़े जाने की भी कहानी बताई. उसने कहा कि वो 3 मार्च 2016 को सरावान सीमा से ईरान से पाक में घुसने की कोशिश कर रहा था तभी पाक अथॉरिटीज ने उसे पकड़ लिया. उसने बताया कि वो बलूचिस्तान के अलगाववादियों के साथ मीटिंग करने और उन्हें भारतीय एजेंसियों के संदेश पहुंचाने के लिए पाकिस्तान आ रहा था. इस वीडियो में कुलभूषण खुद को रॉ का जासूस बता रहा है लेकिन पाक एजेंसियों की जमकर तारीफ कर रहा है कि उन्होंने उसके साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया और उसके साथ बर्ताव में उसे उचित सम्मान दिया.
    सरताज अजीज ने माना था, जाधव के खिलाफ सबूत नहीं
    दिसंबर में ही खबर आई थी कि पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने एक मीटिंग में माना था कि कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाक सरकार और एजेंसियों के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं. पाकिस्तानी टीवी चैनल जिओ न्यूज ने खबर दी थी कि अजीज ने सीनेट चैंबर में सांसदों को ब्रीफ करते हुए साफ कहा कि जाधव ने कबूलनामे के अलावा उसके खिलाफ हमारे पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है. अजीज ने ये भी कहा था कि भारत को दिए जाने वाले डोजियर में जो सबूत हमने रखे हैं, वो काफी नहीं हैं. अब एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वो जाधव के खिलाफ सबूत जुटाने में कितना वक्त लगाती हैं.
    कबूलनामे पर उठ चुके हैं सवाल
    पाक ने जाधव के कबूलनामे का जो वीडियो जारी किया है उसपर भी एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाए हैं. तकरीबन छह मिनट के इस वीडियो में कई कट हैं. वीडियो को देखकर कई जगह ऐसा लगता है कि कुलभूषण अपनी मर्जी से कुछ बोलने की बजाय सामने टेलीप्रिंटर पर लिखा कुछ पढ़ रहा है. इसीलिए कुलभूषण का वो वीडियो कबूलनामा नहीं बल्कि दबाव डालकर दिलवाया गया बयान ज्यादा साबित हुआ है. हालांकि पाक इस मुद्दे पर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है. भारत ने कई बार पाकिस्तान से कुलभूषण से मिलने देने की अपील की है लेकिन पाकिस्तान ने इसकी इजाजत भारतीय एजेंसियों को नहीं दी.
    नेवी में था कुलभूषण, मुंबई में रहने की बात सही
    भारत ने कुलभूषण जाधव के भारतीय नागरिक होने या फिर नेवी में नौकरी करने पर कोई सवाल नहीं उठाया लेकिन उसका कहना है कि जाधव नेवी की नौकरी छोड़ने के बाद ईरान में अपना बिजनेस शुरू कर चुका है जिसके उसके पास वैध दस्तावेज हैं. कुलभूषण जाधव ने वीडियो में खुद को मुंबई का निवासी बताया था. बताया जाता है कि उसे 2014 में ही एक पासपोर्ट मुंबई के ठाणे से इश्यू हुआ था. जिसमें ओल्ड मुंबई-पुणे रोड का एक पता दर्ज है. बताया जाता है कि यहां के एक कॉप्लेक्स के जिस फ्लैट में जाधव रहता था वो उसकी मां के नाम रजिस्टर्ड है.