Thursday, 18 January 2018

15 सालों में मूर्खों की तरह पाकिस्तान को तकरीबन 33 अरब डॉलर की सहायता राशि दी

हम से भीख लेकर आतंकियों के पेट भरता था पाकिस्तान.. अब और भीख नहीं देगें
 भारत के बाद अब अमेरिका भी पाकिस्तान को लेकर सख्ती में आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के धमकी भरे ट्वीट के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया था। ट्रंप ने कहा कि हम से भीख लेकर आतंकियों के पेट भरता है पाकिस्तान और अब हम उसको इस काम के लिए और भीख बिल्कुल भी नहीं देगे। अमेरिका ने आतंकवाद
रोकने के लिए पाकिस्तान को दी जा रही फंडिंग को रोकने का फैसला था। आपको बता दे कि अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली करीब दो अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। जिसको लेकर अब अमेरिकी के व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप के इस फैसले का समर्थन किया है।
आपको बता दे की राष्ट्रपति ट्रंप ने साल के पहले ट्वीट में कहा था, अमेरिका ने पिछले 15 सालों में मूर्खों की तरह पाकिस्तान को तकरीबन 33 अरब डॉलर की सहायता राशि दी और उन्होंने हमारे नेताओं को मूर्ख समझते हुए, बदले में हमें झूठ एवं धोखे के अलावा कुछ भी नहीं दिया। 


जिन आतंकवादियों को हम अफगानिस्तान में तलाश करते हैं उन्हें उन्होंने सुरक्षित पनाहगाहें दे रखी है। डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट का पूरी तरह समर्थन करते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने कहा कि इस ट्वीट के बाद अमेरिका पाकिस्तान को दी जाने वाली उस सहायता पर पूरी तरह रोक लगा देगा और इस संबंध

में हमारा रुख पूरी तरह दृढ़ है।


Wednesday, 17 January 2018

योगी सरकार ने राज्य में एक बार फिर हिंदुस्तान की पहचान को उजागर करने के लिए हिन्दू परिवार संघठन संस्था की और से धन्यवाद

भगवामय होने की राह पर उत्तर प्रदेश... इलाहाबाद के साइनबोर्ड पर अब नाम है "प्रयागराज"
 उत्तरप्रदेश में राम राज्य का कार्य जोरों पर है. राज्य में राम भक्तों की गूँज बढ़ते जा रही है. एक बार फिर यूपी में पुरानी पहचान और संस्कृति उजागर हो रही है. बता दें कि मुस्लिम मुग़ल आक्रमणकारियों ने अपने शासनकाल में हिंदुस्तान के कई शहरों का नाम बदलकर उनकी पहचान मिटा दी. आज भी देश में कई स्थान ऐसे है जो अब भी उन्ही के नाम से जाने जाते है. लेकिन यूपी की योगी सरकार ने राज्य में एक बार फिर हिंदुस्तान की पहचान को उजागर करने का काम शुरू कर दिया है. कहा जाता है कि मुग़ल आक्रमणकारि अकबर ने प्रयागराज का नाम बदलकर इलाहाबाद किया था. वेद, रामायण तथा महाभारत जैसे महाकाव्यों और पुराणों में इस स्थान को 'प्रयाग' कहे जाने के साक्ष्य आज भी मौजूद है. प्रत्येक वर्ष इलाहबाद के संगम किनारे माघ मेंले का आयोजन किया जाता है. लेकिन इस बार मेले में आकर्षण का केन्द्र सरकारी साइन बोर्डों पर इलाहबाद की जगह प्रयागराज नाम रहेगा।

आपको बता दें कि माघ मेला हिन्दुओं का सर्वाधिक प्रिय धार्मिक एवं सांस्कृतिक मेला है. जो कि हर साल जनवरी में वर्ष मकर संक्रांति को आरंभ होकर फरवरी में महा शिवरात्रि को समाप्त होता है. प्रयाग का माघ मेला विश्व का सबसे बड़ा मेला है। हिन्दु पुराणों में, हिन्दु धर्म के अनुसार सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान
ब्रह्मा द्वारा इसे 'तीर्थ राज' अथवा तीर्थस्थलों का राजा कहा गया है, जिन्होंने तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर 'प्राकृष्ठ यज्ञ' संपन्न किया था।

पहले हम समझते हैं कि शत्रु संपत्ति होती क्या है.

 बहुत बड़ी खबर के मुताबिक मोदी सरकार देशभर में करीब एक लाख करोड़ रुपए की शत्रु संपत्ति की नीलामी करने की तैयारी कर रही है
 अभी तक पिछली सरकारों में सरकारी खजाने के लुटने, या करोड़ों लाखों के घोटालों की ही खबरें आती थी. लेकिन अब आज़ादी के बाद मोदी सरकार में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है जिससे सरकारी ख़ज़ाने में करीब 1 00,000 करोड़ रूपए की बड़ी धनराशि आने वाली. इसके लिए मोदी सरकार ने सबसे पहले 49 साल पुराने उस कानून में बदलाव किया जिसकी वजह से ये बड़े काम करने में रुकावट आ रही थी.

अभी मिल रही बहुत बड़ी खबर के मुताबिक मोदी सरकार देशभर में करीब एक लाख करोड़ रुपए की शत्रु संपत्ति की नीलामी करने की तैयारी कर रही है. आपको बता दें कि पूरे भारत में कुल 9,400 शत्रुओं की 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक कीमत की संपत्तियां हैं. गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार मंत्रालय ने ऐसी सभी संपत्तियों की पहचान करना शुरू कर दिया है.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि हमनें कुछ समय पहले ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह को बताया था कि 6,289 शत्रु संपत्तियों का सर्वे कर लिया गया है और बाकी 2,991 संपत्तियों का सर्वे किया जा रहा है. गृह मंत्री ने तभी आदेश दिया था कि ऐसी संपत्तियां जिनमें कोई बसा नहीं है, उन्हें जल्दी खाली करा लिया जाए ताकि उनकी बोली लगवाई जा सके.

पहले हम समझते हैं कि शत्रु संपत्ति होती क्या है.
जब देश का विभाजन हुआ तो हज़ारों लोग कुछ पाकिस्तान में बस गए तो कुछ चीन में बस गए. लेकिन देश में अब तक इनकी संपत्ति बिना वजह मौजूद है और जगह घेर रही है. इसी संपत्ति को शत्रु संपत्ति कहते हैं. पिछली कांग्रेस सरकार ऐसे मुद्दे पर आखें बंद करे बैठी रही. लेकिन मोदी सरकार ने फटाफट 49 साल पुराने शत्रु संपत्ति अधिनियम में संशोधन किया और अब कार्रवाई होने जा रही है. नए कानून के मुताबिक विभाजन के दौरान या उसके बाद पाकिस्तान और चीन जाकर बसने वाले लोगों की संपत्तियों पर उनके वारिस का अधिकार नहीं रहता.लिहाजा यह संपत्ति सरकार के कब्जे में आ जाएगी.
पाकिस्तान बेच चुका है भारतियों की संपत्ति
आपको जानकार बेहद हैरानी होगी कि पाकिस्तान में भी इस तरह की संपत्तियों थी जो भारतीयों की थी, उन्हें पाकिस्तान बहुत साल पहले ही बेच कर खा चुका है. गटक चुका है. लेकिन हमारे देश में लचर सरकार और कानून व्यवस्था के कारण शत्रु संपत्ति पर कोई एक्शन नहीं लिया गया. जैसे की दक्षिण मुंबई में मलबार हिल स्थित जिन्ना हाउस, जिन्ना हाउस को देश के विभाजन के षड़यंत्र का प्रतीक बताते हुए बीजेपी विधायक लोढ़ा ने सरकार से इसका कब्जा लेकर वहां पर कला व संस्कृति केंद्र शुरू करने की मांग करी थी.
इससे पहले पाकिस्तान ने मुंबई स्थित जिन्नाह हाउस को अपनी संपत्ति बताया था और भारत से कहा था कि भारत सरकार उसकी इज्जत करे और हमें उसे सौंप दे.आपको बता दे जिन्ना हाउस में ही भारत विभाजन की नीव रखी गयी थी. पिछली सरकारों ने जिन्ना हाउस की रखवाली के लिए बेवजह लाखों रूपए खर्च करवा दिए. लेकिन अब वो भारत सरकार की संपत्ति है.
आपको जानकार बेहद हैरानगी होगी कि पाकिस्तान जाकर बसने वाले लोगों की भारत में कुल 9,280 संपत्ति हैं जिसमें से उत्तर प्रदेश का हिस्सा सबसे अधिक है.
अकेले उत्तर प्रदेश में ही कुल 4,991 शत्रु की संपत्ति हैं, पश्चिम बंगाल में ऐसी 2,735 और
राजधानी दिल्ली में ऐसी 487 संपत्तियां हैं.
इनमें से कुल 126 संपत्तियां ऐसी हैं जिन्होंने चीन की नागरिकता ले ली थी. चीन के नागरिकों से जुड़ी सबसे अधिक शत्रु संपत्तियां मेघायल में हैं,
मेघायल में 57 शत्रु संपत्तियां हैं
जबकि 29 पश्चिम बंगाल में हैं.
असम में ऐसी 7 समपत्ति हैं.
अब !!!!
आप या मैं आसानी से समझ सकते हैं कि इस प्रकार के काम करने लिए कोई खास हिम्मत करने की जरूरत नहीं है ना ही ये कोई राकेट साइंस हैं जो समझ से परे हो लेकिन फिर भी ये काम नहीं किया,
कारण ? .................
बस अब समझे आप 🙏


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अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने केंद्र सरकार के खिलाफ जहर उगलते हुए कहा

भारत में आतंक का आरोप संघ पर लगाने वाले उस्मानी अब तक नहीं बता पाए बाकी दुनिया में हो रहे ख़ून खराबे की वजह

 उस्मानी ने केन्द्र की बीजेपी सरकार पर कश्मीरी युवाओं को आतंकि बनाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि कश्मीर के युवा केंद्र सरकार की वजह से आतंकी बन रहे है. आपको बता दें कि आजादी के बाद से कश्मीरी युवा आतंकि बन रहे है. आये दिन ये लोग सेना के जवानों पर हमला करते रहते है. और ये वही आतंकि है
जिन्होंने कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार किया था. लेकिन उस्मानी को ये बात कहा याद होगी उन्हें तो सिर्फ केन्द्र की बीजेपी सरकार पर आरोप लगाना है. उस्मानी को बताना चाहिए कि अगर भाजपा की सरकार की वजह से आतंकवाद हो रहा है तो क्या इराक, सीरिया जैसे जगहों पर क्या बीजेपी की सरकार है. क्या वहां भी आतंकी बीजेपी
की सरकार की वजह से आतंकवाद हो रहा है तो क्या इराक, सीरिया जैसे जगहों पर क्या बीजेपी की सरकार है. क्या वहां भी आतंकी बीजेपी की वजह से बन रहें हैं और कत्लेआम मचा रहे हैं.
अपने पैतृक गांव बिहार के दरभंगा पहुंचे अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने केंद्र सरकार के खिलाफ जहर उगलते हुए कहा कि मन्नान वानी ने आतंक का रास्ता केन्द्र सरकार की वजह से चुना है. इसीलिए वह आतंकी संगठन हिज़बुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा. उन्हें लगता है कि जब से बीजेपी की
सत्ता में आई है तब से कश्मीर के युवा आतंकि बन रहे है.

क्या इससे पहले कश्मीर का कोई युवा आतंकि नहीं बना? यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष का ऐसा बयान तब आया जब उन्ही के कॉलेज में पढने वाले दो कश्मीरी युवाओं का आतंकी बनने की खबरे आ रही है. अच्छा होता यदि अध्यक्ष साहब अपने कॉलेज के छात्रों को आतंकी रास्ते से दूर रहने की सलाह देते. लेकिन वो तो उल्टा उस सरकार पर आरोप

लगा रहे है जो देश से आतंकवाद को जड़ से मिटाने में लगी है. कही उस्मानी भी अब उमर खालिद, कन्ह्या या जिग्नेश की तरह कोई योजना तो नहीं बना रहे है ?

विदेशी पर्यटकों की संख्या पहुंची 1 करोड़, कमाई 27 बिलियन डॉलर के पार

Foreign tourist arrivals hit new high of one crore, earnings cross $27-billion mark

 The year 2017 ended on a high with the number of foreign tourist arrivals (FTAs) crossing the 10-million mark.

  • This pushed the country's earnings to over 27 billion dollars.
  • The sector is looking to ramp up tourist arrivals this year with new and niche projects.

NEW DELHI: In happy tidings for India's tourism sector, the year 2017 ended on a high with the number of foreign tourist arrivals (FTAs) crossing the 10-million mark, which pushed the country's earnings to over 27 billion dollars.


The sector is looking to ramp up tourist arrivals this year+ with new and niche projects. "I think our sector is doing very well. But am I happy with the numbers? I want these numbers to increase dramatically because India is an incredible place and we have everything for everybody. So we are trying to bring in lot more people," Union tourism minister KJ Alphons said in Kochi on Tuesday.

‘Mud therapy’ soils Taj Mahal's tourist appeal



The minister also said the sector is contributing 6.88 per cent to India's GDP and had a 12 per cent share of jobs in the total employment figures in 2017.

The increase in numbers has helped India ramp up its overall ranking on the Tourism Competitiveness Index, 2017. It jumped 25 places from 65 in 2013 to 40 in 2017. Ministry sources attributed the improvement to the government's renewed focus on developing infrastructure besides promoting theme-based and religious circuits under the Swadesh Darshan scheme. "Eleven projects have been sanctioned under this scheme in 2017-18 alone, taking the total number up to 67 projects. The plan is for holistic development of pilgrimage destinations, the Buddhist circuit being a case in point," a ministry official said.

tourist

Tuesday, 16 January 2018

भगवान् राम का वनवास सिर्फ चौदह वर्ष ही क्यों ?

प्रश्न ये हैं की श्री राम को आखिर चौदहवर्ष का ही वनवास क्यों ? क्यों नहीं चौदह से कम या चौदह से ज्यादा ?
 माता कैकयी ने महाराज दशरथ से भरत जी को राजगद्दी और श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास माँगा, हो सकता हैं की बहुत से विद्वानों के लिए ये साधारण सा प्रश्न हो ,
लेकिन जब भी ये प्रश्न मस्तिष्क में आता हैं संतोषजनक उत्तर प्राप्त करने के लिए मन बेचैन हो जाता हैं।

प्रश्न ये हैं की श्री राम को आखिर चौदहवर्ष का ही वनवास क्यों ? क्यों नहीं चौदह से कम या चौदह से ज्यादा ?

भगवान् राम ने एक आदर्श पुत्र, भाई, शिष्य, पति,मित्र और गुरु बन कर ये ही दर्शाया की व्यक्ति को रिश्तो का निर्वाह किस प्रकार करनाचाहिए।

राम का दर्शन करने पर हम पाते है कि अयोध्या हमारा शरीर है जो की सरयू नदी यानि हमारे मन के पास है। अयोध्या का एक नाम अवध भी है। (अ वध) अर्थात जहाँ कोई या अपराध न हों। जब इस शरीर का चंचल मन सरयू सा शांत हो जाता है और इससे कोई अपराध नहीं होता तो ये शरीर ही अयोध्या कहलाता है।

शरीर का तत्व (जीव), इस अयोध्या का राजादशरथ है। दशरथ का अर्थ हुआ वो व्यक्ति जो इस शरीर रूपी रथ में जुटे हुए दसों इन्द्रिय रूपी घोड़ों (५ कर्मेन्द्रिय ५ ज्ञानेन्द्रिय) को अपने वश में रख सके।

तीन गुण सतगुण, रजोगुण और तमोगुण दशरथ तीन रानियाँ कौशल्या, सुमित्रा और कैकई है। दशरथ रूपी साधक ने अपने जीवन में चारों पुरुषार्थों धर्म, अर्थ काम और मोक्ष को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूपमें
प्राप्त किया था।

तत्वदर्शन करने पर हम पाते है कि धर्मस्वरूप भगवान्
राम स्वयं ब्रहा है।शेषनाग भगवान् लक्ष्मण वैराग्य है, माँ सीता शांति और भक्ति है और बुद्धि का ज्ञानहनुमान जी है।

रावण घमंड का, कुभंकर्ण अहंकार, मारीच लालच और मेंघनादकाम का प्रतीक है. मंथरा कुटिलता, शूर्पनखा काम और ताडका क्रोध है।

चूँकि काम क्रोधकुटिलता ने ने संसार को वश में कर रखा है इसलिए प्रभु राम ने सबसे पहले क्रोधयानि ताडका का वध ठीक वैसे ही किया जैसे भगवान् कृष्ण नेपूतना का किया था।

नाक और कान वासना के उपादानमाने गए है, इसलिए प्रभु ने शुपर्नखा के नाकऔर कान काटे। भगवान् ने अपनी प्राप्ति का मार्ग स्पष्ट रूप से दर्शाया है। उपरोक्त भाव से अगर हम देखे तो पाएंगे कि भगवान् सबसे पहले वैराग्य (लक्ष्मण)को मिले थे।

फिर वो भक्ति (माँ सीता) और सबसे बाद में ज्ञान (भक्त शिरोमणि हनुमानजी) के द्वारा हासिल किये गए थे। जब भक्ति (माँ सीता) ने लालच (मारीच) के छलावे में आ कर वैराग्य (लक्ष्मण) को अपने से दूर किया तो घमंड (रावण) ने आ कर भक्ति की शांति (माँ सीता की छाया) हर ली और उसे ब्रम्हा (भगवान्) से दूर कर दिया।

भगवान् ने चौदह वर्ष के वनवास के द्वारा ये समझाया कि अगर व्यक्ति जवानी में चौदह पांच ज्ञानेन्द्रियाँ (कान, नाक, आँख, जीभ, चमड़ी), पांच कर्मेन्द्रियाँ (वाक्, पाणी, पाद, पायु, उपस्थ), तथा मन, बुद्धि,चित और अहंकार
को वनवासमें रखेगा तभी प्रत्येक मनुष्य अपने अन्दर
के घमंड या रावण को मार पायेगा।

रावण की अवस्था में 14 ही वर्ष शेष थे,,प्रश्न उठता है ये बात कैकयी कैसे जानती थी,,,बन्धुओं ये घटना घट तो रही है अयोध्या परन्तु योजना देवलोक की है,,

अजसु पिटारी तासु सिर,गई गिरा मति फेरि।

सरस्वती ने मन्थरा की मति में अपनी योजना की कैसेट फिट कर दी,,उसने कैकयी को वही सब सुनाया समझाया कहने को उकसाया जो सरस्वती को इष्ट था,, ,इसके सूत्रधार हैं स्वयं श्रीराम,,वे ही निर्माता निर्देशक तथा अभिनेता हैं,,सूत्रधार उर अन्तरयामी,,,।

।मेघनाद को वही मार सकता था जो 14 वर्ष की कठोर साधना सम्पन्न कर सके,,जो निद्रा को जीत ले,,ब्रह्मचर्य का पालन कर सके,, यह कार्य लक्ष्मण द्वारा सम्पन्न हुआ,, आप कहेंगे वरदान में लक्ष्मण थे ही नहीं तो इनकी
चर्चा क्यों????

परन्तु भाई राम के बिना लक्ष्मण रह ही नहींसकते,श्रीराम का यश यदि झंडा है तो लक्ष्मण उस झंडा के डंडा हैं,,बिना डंडा के झंडा ,,,,,
1.माता कैकयी यथार्थ जानती है,,जो नारी युद्ध भूमि में दशरथ के प्राण बचाने के लिये अपना हाथ रथ के धुरे में लगा सकती है,रथ संचालन की कला मे दक्ष है,,वह राजनैतिक परिस्थितियों से अनजान कैसे रह सकती है।

2.मेरे राम का पावन यश चौदहों भुवनों में फैलजाये,,और यह विना तप के रावण वध के सम्भव न था अतः...

.3,,,मेरे राम केवल अयोध्या के ही सम्राट् न रह जाये विश्व के समस्त प्राणियों हृहयों के सम्राट बनें,,उसके लिये अपनी साधित शोधित इन्द्रियों तथा अन्तःकरण को पुनश्च तप के द्वारा ,तदर्थ सिद्ध करें,,

,4,,सारी योजना का केन्द्र राक्षस वध है अतः
दण्डकारण्य को ही केन्द्र बनाया गया,, महाराज अनरण्यक के उस शाप का समय पूर्ण होने में 14 ही वर्ष शेष हैं जो शाप उन्होंने रावण को दिया था कि मेरे वंश का राजकुमार तेरा वध करेगा,,

16 जनवरी- आज ही हुआ था महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में क्षत्रपति शिवाजी के पुत्र संभाजी का भव्य राज्याभिषेक

महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में क्षत्रपति शिवाजी के पुत्र संभाजी का भव्य राज्याभिषेक हुआ जिसे याद दिलाना हिन्दू परिवार संघठन संस्था  का पावन कर्तव्य है 
 शम्भाजी / शंभू राजे छत्रपति शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र और उत्तराधिकारी थे, जिसने 1680 से 1689 ई. तक राज्य किया।शम्भुजी ने नीलोपन्त को अपना पेशवा बनाया। उसने 1689 ई. तक शासन किया। संभाजी ने उन्होंने साहस एवं निडरता के साथ औरंगजेब की आठ लाख सेना का सामना किया तथा अधिकांश मुग़ल सरदारों को युद्ध में पराजित
नहीं हुआ। इसलिए औरंगजेब दीर्घकाल तक महाराष्ट्र में युद्ध करता रहा। उसके दबाव से संपूर्ण उत्तर हिंदुस्तान मुक्त रहा। यदि उन्होंने औरंगजेब के साथ समझौता किया होता अथवा उसका आधिपत्य स्वीकार किया होता तो, वह दो-तीन वर्षों में ही पुन: उत्तर हिंदुस्तान में आ धमकता; परंतु संभाजी राजा के संघर्ष के कारण औरंगजेब को 27 वर्ष दक्षिण भारत में ही रुकना पडा। इससे उत्तर में बुंदेलखंड, पंजाब और राजस्थान में हिंदुओं की नई सत्ताएं
स्थापित होकर हिंदू समाज को सुरक्षा मिली। ज्येष्ठ शुद्ध 12 शके 1579, गुरुवार दिनांक 14 मई 1657 को पुरंदरगढ पर स्वराज्य के दूसरे छत्रपति का जन्म हुआ। शंभू राजा के जन्म के दो वर्ष पश्चात् इनकी माता सई बाई की मृत्यु हो गई एवं राजा मातृसुख से वंचित हो गए। परंतु जिजाऊ ने इस अभाव की पूर्ति की। जिस जिजाऊ
संभाजी राजा पर भी संस्कार किए। संभाजी शक्ति संपन्नता एवं रूप सौंदर्य की प्रत्यक्ष प्रतिमा ही थे।

14 वर्ष की आयु तक बुधभूषणम् (संस्कृत), नायिकाभेद, सातसतक, नखशिख (हिंदी) इत्यादि ग्रंथों की रचना करने वाले संभाजी विश्व के प्रथम बालसाहित्यकार थे। मराठी, हिंदी, फ़ारसी , संस्कृत, अंग्रेज़ी, कन्नड़ आदि भाषाओं पर उनका प्रभुत्व था। जिस तेजी से उन्होंने लेखनी चलाई, उसी तेजी से उन्होंने तलवार भी चलाई।
संभाजी महाराज ने 'शुद्धीकरणके लिए' अपने राज्य में स्वतंत्र विभाग की स्थापना की थी। छत्रपति संभाजी महाराज एवं कवि कलश ने बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनाए गए हरसुल के ब्राह्मण गंगाधर कुलकर्णी को शुद्ध कर पुनः हिंदू धर्म में परिवर्तित करने का साहस दिखाया।
संगमेश्वर से बहादुरगढ की दूरी लगभग 250 मील की है; परंतु मुक़र्रब ख़ाँ ने मराठों के भय से केवल 13 दिनों में यह दूरी पार की एवं 15 फ़रवरी 1689 को शम्भुजी तथा कवि कलश को लेकर वह बहादुरगढ में प्रवेश किया। पकड़े गए संभाजी कैसे दिखाई देते हैं, यह देखने के लिए मुग़ल सेना उत्सुक हो गई थी। औरंगजेब की छावनी
अर्थात बाज़ार बुणगों का विशाल नगर ही था। छावनी का घेरा 30 मील का था, जिसमें 60 सहस्र घोड़े, 4 लाख पैदल, 50 सहस्र ऊंट, 3 सहस्र हाथी, 250 बाज़ार पेठ तथा जानवर कुल मिलाकर 7 लाख अर्थात बहुत बडी सेना थी। इसके पश्चात् भी आयु के 24वें से 32वें वर्ष तक शंभुराजा ने मुग़लों की पाश्विक शक्ति से लड़ाई
की तथा यह योद्धा एक बार भी पराजित न हुआ।आज ही के दिन अर्थात 16 जनवरी को इस महान वीर बलिदानी का राज्यभिशेषक रायगढ़ के किले में हुआ था इसलिए ये दिन हिन्दुओं के लिए किसी पावन पर्व से कम नही है . 1681- महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में क्षत्रपति शिवाजी के पुत्र संभाजी का भव्य राज्याभिषेक हुआ जिसे याद दिलाना हिन्दू परिवार संघठन संस्था  का पावन कर्तव्य है
जिसे तथाकथित नकली कलमकार या झोलाछाप इतिहासकार कभी सामने नहीं ला सकते क्योकि शिवाजी और शम्भाजी ऐसे वीर हैं जिन्होंने हिन्दवी साम्राज्य के लिए हिन्दुओं को जगाया है . आज इस पावन दिवस की संसार के सभी स्वाभिमानी जनता को बारम्बार शुभकामनाएं .

Monday, 15 January 2018

भौमवती मौनी अमावस्या विशेष

भौमवती मौनी अमावस्या विशेष मौनी अमावस्या का महत्व
 अमावस्या तिथि आरंभ - ०५:१३ बजे से (१६ जनवरी २०१८)

अमावस्या तिथि समाप्त - ०७:४७ बजे (१७ जनवरी २०१८)


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हिन्दू धर्मग्रंथों में माघ मास को बेहद पवित्र और धार्मिक पुण्य प्राप्ति का समय चक्र माना जाता है और इस मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन के पवित्र स्नान को कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के समान ही माना जाता है। पवित्र नदियों और सरोवरों में देवी देवताओ का वास होता है। धर्म ग्रंथों में ऐसा उल्लेख है कि इसी दिन से द्वापर युग का शुभारंभ हुआ था। लोगों का यह भी मानना है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने मनु महाराज तथा महारानी शतरुपा को प्रकट करके सृष्टि की शुरुआत की थी।
उन्ही के नाम के आधार पर इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है।

चन्द्रमा को मन का स्वामी माना गया है और अमावस्या को चन्द्रदर्शन नहीं होते, जिससे मन की स्थिति कमज़ोर होती है। इसलिए इस दिन मौन व्रत रखकर मन को संयम में रखने का विधान बनाया गया है।
साधु, संत, ऋषि, महात्मा सभी प्राचीन समय से प्रवचन सुनाते रहे हैं कि मन पर नियंत्रण रखना चाहिये। मन बहुत तेज गति से दौड़ता है, यदि मन के अनुसार चलते रहें तो यह हानिकारक भी हो सकता है। इसलिये अपने मन रूपी घोड़े की लगाम को हमेशा कस कर रखना चाहिये। मौनी अमावस्या का भी यही संदेश है कि इस दिन मौन व्रत धारण कर मन को संयमित किया जाये। मन ही मन ईश्वर के नाम का स्मरण किया जाये उनका जाप किया जाये। यह एक प्रकार से मन को साधने की यौगिक क्रिया भी है। मौनी अमावस्या योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यता है कि यदि किसी के लिये मौन रहना संभव न हो तो वह अपने विचारों में किसी भी प्रकार की मलिनता न आने देने, किसी के प्रति कोई कटुवचन न निकले तो भी मौनी अमावस्या का व्रत उसके लिये सफल होता है। सच्चे मन से भगवान विष्णु व भगवान शिव की पूजा भी इस दिन करनी चाहिये शास्त्रों में भी वर्णित है कि होंठों से ईश्वर का जाप करने से जितना पुण्य मिलता है, उससे कई गुणा अधिक पुण्य मन में हरि का नाम लेने से मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु और शिव दोनों की पूजा का विधान है। वास्तव में शिव और विष्णु दोनों एक ही हैं, जो भक्तों के कल्याण हेतु दो स्वरूप धारण किए हुए हैं।

शास्त्रों में इस दिन दान-पुण्य करने के महत्व को बहुत ही अधिक फलदायी बताया है। तीर्थराज प्रयाग में स्नान किया जाये तो कहने ही क्या यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य प्रयाग त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है तो उसे अपने घर में ही प्रात:काल उठकर दैनिक कर्मों से निवृत होकर नहाने के जल में गंगा जल मिलाकर स्नान आदि करना चाहिए या घर के समीप किसी भी नदी या नहर में स्नान कर सकते हैं क्योंकि पुराणों के अनुसार इस दिन सभी नदियों का जल गंगाजल के समान हो जाता है।

इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर इस कारण भक्त एक मास तक कुटी बनाकर गंगा सेवन करते हैं। इस दिन श्रद्धालुओं को अपनी क्षमता के अनुसार दान, पुण्य तथा माला जप नियम पूर्वक करना चाहिए।

व्रत नियम
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प्रात:काल पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान किया जाता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्रादि किसी गरीब ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण करने से भी उन्हें शांति मिलती है।

विशेष कर स्नान , पूजा पाठ और माला जाप करने के समय मौन व्रत का पालन करें। इस दिन झूठ, छल-कपट , पाखंड से दूर रहे। यह दिन अच्छे कर्मो और पुण्य कमाने में बिताये। मानसिक जाप, हवन एवं दान करना चाहिए। दान में स्वर्ण, गाय, छाता, वस्त्र, बिस्तर एवं उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए। ऐसा करने से सभी पापों का नाश होता है। इस दिन किया गया गंगा स्नान अश्वमेध यज्ञ के फल के सामान पुण्य दिलवाता है।

भौमवती मौनी अमावस्या कथा
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कांचीपुरी में देवस्वामी नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम धनवती था। उनके सात पुत्र तथा एक पुत्री थी। पुत्री का नाम गुणवती था। ब्राह्मण ने सातों पुत्रों को विवाह करके बेटी के लिए वर खोजने अपने सबसे बड़े पुत्र को भेजा। उसी दौरान किसी पण्डित ने पुत्री की जन्मकुण्डली देखी और बताया- "सप्तपदी होते-होते यह कन्या विधवा हो जाएगी।" तब उस ब्राह्मण ने पण्डित से पूछा- "पुत्री के इस वैधव्य दोष का निवारण कैसे होगा?" पंडित ने बताया- "सोमा का पूजन करने से वैधव्य दोष दूर होगा।" फिर सोमा का परिचय देते हुए उसने बताया- "वह एक धोबिन है। उसका निवास स्थान सिंहल द्वीप है। उसे जैसे-तैसे प्रसन्न करो और गुणवती के विवाह से पूर्व उसे यहाँ बुला लो।" तब देवस्वामी का सबसे छोटा लड़का बहन को अपने साथ लेकर सिंहल द्वीप जाने के लिए सागर तट पर चला गया। सागर पार करने की चिंता में दोनों एक वृक्ष की छाया में बैठ गए। उस पेड़ पर एक घोंसले में गिद्ध का परिवार रहता था। उस समय घोंसले में सिर्फ़ गिद्ध के बच्चे थे। गिद्ध के बच्चे भाई-बहन के क्रिया-कलापों को देख रहे थे। सायंकाल के समय उन बच्चों (गिद्ध के बच्चों) की माँ आई तो उन्होंने भोजन नहीं किया। वे माँ से बोले- "नीचे दो प्राणी सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं। जब तक वे कुछ नहीं खा लेते, तब तक हम भी कुछ नहीं खाएंगे।" तब दया और ममता के वशीभूत गिद्ध माता उनके पास आई और बोली- "मैंने आपकी इच्छाओं को जान लिया है। इस वन में जो भी फल-फूल, कंद-मूल मिलेगा, मैं ले आती हूं। आप भोजन कर लीजिए। मैं प्रात:काल आपको सागर पार कराकर सिंहल द्वीप की सीमा के पास पहुंचा दूंगी।" और वे दोनों भाई-बहन माता की सहायता से सोमा के यहाँ जा पहुंचे। वे नित्य प्रात: उठकर सोमा का घर झाड़कर लीप देते थे।

एक दिन सोमा ने अपनी बहुओं से पूछा- "हमारे घर कौन बुहारता है, कौन लीपता-पोतता है?" सबने कहा- "हमारे सिवाय और कौन बाहर से इस काम को करने आएगा?" किंतु सोमा को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। एक दिन उसने रहस्य जानना चाहा। वह सारी रात जागी और सब कुछ प्रत्यक्ष देखकर जान गई। सोमा का उन बहन-भाई से वार्तालाप हुआ। भाई ने सोमा को बहन संबंधी सारी बात बता दी। सोमा ने उनकी श्रम-साधना तथा सेवा से प्रसन्न होकर उचित समय पर उनके घर पहुंचने का वचन देकर कन्या के वैधव्य दोष निवारण का आश्वासन दे दिया। किंतु भाई ने उससे अपने साथ चलने का आग्रह किया। आग्रह करने पर सोमा उनके साथ चल दी। चलते समय सोमा ने बहुओं से कहा- "मेरी अनुपस्थिति में यदि किसी का देहान्त हो जाए तो उसके शरीर को नष्ट मत करना। मेरा इन्तजार करना।" और फिर सोमा बहन-भाई के साथ कांचीपुरी पहुंच गई। दूसरे दिन गुणवती के विवाह का कार्यक्रम तय हो गया। सप्तपदी होते ही उसका पति मर गया। सोमा ने तुरन्त अपने संचित पुण्यों का फल गुणवती को प्रदान कर दिया। तुरन्त ही उसका पति जीवित हो उठा। सोमा उन्हें आशीर्वाद देकर अपने घर चली गई। उधर गुणवती को पुण्य-फल देने से सोमा के पुत्र, जामाता तथा पति की मृत्यु हो गई। सोमा ने पुण्य फल संचित करने के लिए मार्ग में अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष की छाया में विष्णु जी का पूजन करके १०८ परिक्रमाएं कीं। इसके पूर्ण होने पर उसके परिवार के मृतक जन जीवित हो उठे।

निष्काम भाव से सेवा का फल मधुर होता है, यही मौनी अमावस्या के व्रत का लक्ष्य है।

मौनी अमावस्या २०१८ तिथि व मुहूर्त
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अमावस्या तिथि - मंगलवार, १६ जनवरी

अमावस्या तिथि आरंभ - ०५:१३ बजे से (१६ जनवरी २०१८)

अमावस्या तिथि समाप्त - ०७:४७ बजे (१७ जनवरी २०१८)

Friday, 12 January 2018

2018 मकर संक्रांति पर बना दुर्लभ संयोग 14 और 15 जनवरी को पुण्यकाल

2018 मकर संक्रांति पर बना दुर्लभ संयोग 14 और 15 जनवरी को पुण्यकाल

 मकर संक्रांति का त्योहार हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है। बीते कुछ वर्षों से मकर संक्रांति की तिथि और पुण्यकाल को लेकर उलझन की स्थिति बनने लगी है। इस साल भी कुछ ज्योतिषी कह रहे हैं कि मकर संक्रांति 14 की नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाई जाएगी। आइए देखें कि यह उलझन की स्थिति क्यों बनी हैं और मकर संक्रांति का पुण्यकाल और तिथि मुहूर्त क्या है। दरअसल इस उलझन के पीछे खगोलीय गणना है। गणना के अनुसार हर साल सूर्य के धनु से मकर राशि में आने का समय करीब 20 मिनट बढ़ जाता है। इसलिए करीब 72 साल के बाद एक दिन के अंतर पर सूर्य मकर राशि में आता है। ऐसा उल्लेख मिलता है कि मुगल कल में अकबर के शासन काल के दौरान मकर संक्रांति 10 जनवरी को मनाई जाती थी। अब सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय 14 और 15 के बीच में होने लगा क्योंकि यह संक्रमण काल है।

 साल 2012 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 15 जनवरी को हुआ था इसलिए मकर संक्रांति इस दिन मनाई गई थी। आने वाले कुछ वर्षों में मकर संक्रांति हर साल 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी ऐसी गणना कहती है। इतना ही नहीं करीब 5000 साल बाद मकर संक्रांति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनाई जाने लगेगी।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस साल सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपर दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर होगा। देवी पुराण के अनुसार संक्रांति से 15 घटी पहले और बाद तक का समय पुण्यकाल होता है। संक्रांति 14 तारीख की दोपहर में होने की वजह से साल 2018 में मकर संक्रांति का त्योहर 14 जनवरी को मनाया जाएगा और इसका पुण्यकाल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक होगा जो बहुत ही शुभ संयोग है क्योंकि इस साल पुण्यकाल का लाभ पूरे दिन लिया जा सकता है।

लेकिन 15 जनवरी को उदया तिथि के कारण भी मकर संक्रांति कई जगह मनाई जाएगी। इस दिन मकर राशि में सूूर्योदय होने के कारण करीब ढ़ाई घंटे तक संक्रांति के पुण्यकाल का दान पुण्य करना भी शुभ रहेगा। इसलिए इस साल मेघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान दोनों दिन यानी 14 और 15 जनवरी को होगा। 

राशि के अनुसार मकर संक्रांति पर करें दान, बन रहे हैं शुभ संयोग

 इस साल मकर संक्रांति के साथ कई शुभ संयोग बने हैं। सबसे पहले तो रविवार के दिन मकर संक्रांति का होना ही अच्छा संयोग है क्योंकि रविवार के स्वामी ग्रह सूर्यदेव हैं। अपने दिन में ही सूर्य उत्तरायण हो रहे हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना है जिसे सभी सिद्धियों को पूर्ण करने में सक्षम माना गया है। तीसरा इस दिन प्रदोष व्रत भी है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इसदिन ध्रुव योग भी बना हुआ है। ऐसे में इस मकर संक्रांति पर किया गया दान-पुण्य और पूजन का अन्य दिनों की अपेक्षा हजारों गुणा पुण्य प्राप्त होगा और ग्रह दोषों के प्रभाव से भी आप राहत महसूस कर सकते हैं। इस मौके पर राशि के अनुसार कुछ वस्तुओं का दान आपके लिए विशेष लाभदायी रहेगा.

 इस साल मकर संक्रांति मेष राशि   के लोग तिल के साथ-साथ मच्छरदानी का भी दान करें। ऐसा करने से शीघ्र ही उनकी मनोकामना पूरी हो सकती है।

 ज्योतिष के अनुसार, वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है इसलिए मकर संक्रांति के दिन ऊनी वस्त्र और तिल का दान करना आपके लिए शुभ रहेगा।

 मिथुन राशि का स्वामी बुध है। इस राशि के लोग भी तिल और मच्छरदानी का दान करें तो बहुत लाभ होगा।

 मकर संक्रांति के दिन कर्क राशि के लोग तिल, साबूदाना और ऊन का दान करना शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा।

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सिंह राशि वालों को अपनी क्षमता के अनुसार तिल और कंबल का दान करना बेहतर होगा।

 कन्या राशि के स्वामी बुध हैं। मकर संक्रांति के दिन इस राशि के लोग कंबल के अलावा तेल और उड़द दाल का दान जरूर करें।

 मकर संक्रांति के दिन, तुला राशि के लोग तेल, रुई, वस्त्र, तिल और राई का दान करें। इससे आपकी हर मनोकामनाएं पूरी होगी।

 मकर संक्रांति के दिन वृश्चिक राशि के लोग गरीबों को चावल और दाल की कच्ची खिचड़ी और अपनी क्षमता अनुसार कंबल दान करना चाहिए।

 धनु राशि का स्वामी गुरु है। इस राशि के लोग मकर संक्रांति के दिन तिल व चने की दाल का दान करें।

 मकर राशि के लोग मकर संक्रांति के दिन तेल, तिल, कंबल और पुस्तक, गरीबों को खाना, चावल का दान करें तो इनकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

 ज्योतिष के अनुसार, कुंभ राशि वालों के लिए तिल, साबुन, वस्त्र और अन्न का दान करना बेहतर होगा। इससे आपकी हर मनोकामना पूरी होगी।

 मकर संक्रांति के दिन, मीन राशि वाले तिल, चना, साबूदाना और कंबल का दान करें। इससे आपकी हर समस्या का समाधान हो जाएगा।

 

ममता बनर्जी का आरोप - न्यायपालिका में केंद्र के दखल से देश का लोकतंत्र खतरे में

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा, कहा- देश का लोकतंत्र खतरे में है.

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने और सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने की खबर पर राजनीति होने लगी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. ममता ने कई ट्वीट करके कहा कि देश का लोकतंत्र खतरे में है. ममता ने लिखा, "हम आज सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के उठाए गए सवाल से दुखी हैं. सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाए गए सवालों से एक नागरिक के तौर पर मैं बहुत दुखी हूं. न्यायपालिका और मीडिया लोकतंत्र के स्तंभ हैं. केंद्र सरकार का न्यायपालिका में बहुत ज्यादा दखल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है." उधर, बीजेपी ने कहा है कि ममता बनर्जी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है. बीजेपी ने उन्हें लोकतंत्र की दुश्मन करार दिया है.
कांग्रेस ने भी कहा लोकतंत्र खतरे में 
उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशें द्वारा खुलेआम शीर्ष न्यायालय में स्थिति ठीक नहीं बताये जाने के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार (12 जनवरी) को कहा कि ‘लोकतंत्र खतरे में है.’ कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया, ‘‘हम यह सुनकर बहुत चिंतित हैं कि उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों ने शीर्ष न्यायालय के कामकाज पर चिंता जतायी है. लोकतंत्र खतरे में है.’’ एक अप्रत्याशित कदम में उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन बुलवाया और कि उच्चतम न्यायालय में स्थिति ठीक नहीं है तथा कई ऐसी चीजें हुईं जिनकी जरूरत नहीं थी. चारों न्यायाधीशों ने कहा कि जब तक संस्थानों ने कहा कि जब तक संस्थानों का संरक्षण नहीं होता, देश में लोकतंत्र नहीं चल पाएगा. उधर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज शाम पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं.


सरकार नहीं देखी मामले में दखल
इसी बीच, सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने अप्रत्याशित संवाददाता सम्मेलन में जो मुद्दे उठाए हैं, वे न्यायपालिका का ‘‘आंतरिक’’ मामला हैं. सूत्रों ने इशारा किया कि इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप करने की संभावना बहुत कम है. सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सरकार कुछ नहीं कह सकती और वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहती. उन्होंने कहा कि यह न्यायपालिका का आंतरिक मामला है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत को इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए क्योंकि लोगों का न्यायपालिका में भरोसा दांव पर है.
आज सुबह की थी चार जजों ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस
न्यायालय ने चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार (12 जनवरी) को एक संवाददाता सम्मेलन किया और कहा कि शीर्ष अदालत में हालात ‘‘सही नहीं हैं’’ और कई ऐसी बातें हैं जो ‘‘अपेक्षा से कहीं कम’’ थीं. प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘‘... कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई चीजें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं कम थीं.’’ संवादाता सम्मेलन में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के अलावा न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ मौजूद थे. कानून मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में बातचीत के लिए अभी तक मुलाकात नहीं की है.


जानिए सर्दी, भांगड़े, आग, तिल और दुल्ला भट्टी से जुड़ी लोहड़ी की खास बातें

जानिए सर्दी, भांगड़े, आग, तिल और दुल्ला भट्टी से जुड़ी लोहड़ी की खास बातें
 लोहड़ी

आज हम आपको उत्तर भारत के एक महत्वपूर्ण पर्व “लोहड़ी” के बारे में कुछ रोचक जानकारी देंगे।

लोहड़ी का त्यौहार

लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्यौहार है जिसे मुख्यत: मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। उत्तर भारत विशेषकर पंजाब में इसकी धूम देखते ही बनती है। इस दिन लोग रात्रि में आग के चारों तरफ चक्कर लगाकर उसमें रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि को अग्नि को समर्पित कर उसका प्रसाद ग्रहण करते हैं। पंजाब में लोग आग के चारों तरफ झूम-झूम कर भागंडा करते हैं।

क्यों मनायी जाती है लोहड़ी

लोहड़ी को मनाने के पीछे कई कथाएं हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण होता है शीत ऋतु की सबसे बड़ी रात को सेलेब्रेट करना। लोहड़ी के अगले दिन से सूर्य की गति दक्षिणायन की जगह उत्तरायण हो जाती है। कई लोग यह भी मानते हैं कि इस त्यौहार का संबंध माता पार्वती से जुड़ा हुआ है।

क्यों मनायी जाती है लोहड़ी

दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के अग्नि में दहन होने की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। लेकिन पंजाब में इस त्यौहार को मनाने के पीछे दुल्ला भट्टी की कहानी को माना जाता है। आपने देखा होगा कि लोहड़ी के गीतों का केन्द्र अकसर दुल्ला भट्टी ही होते हैं लेकिन क्या आप उनके बारे में जानते हैं?

क्या है दुल्ला भट्टी की कथा

सुंदर मुंदरिये ! ..................हो तेरा कौन बेचारा, .................हो दुल्ला भट्टी वाला, ...............हो दुल्ले घी व्याही, ..................हो सेर शक्कर आई, .................हो कुड़ी दे बाझे पाई, .................हो कुड़ी दा लाल पटारा, ...............हो


क्या है दुल्ला भट्टी की कथा

लोककथाओं के अनुसार दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। लोग उसे पंजाब का नायक मानते थे क्योंकि वह अमीरों से लूट कर गरीबों में बांटा करता था। इसके अलावा उस समय लड़कियों को गुलाम के रूप में बलपूर्वक अमीरों को बेचा जाता था।

क्या है दुल्ला भट्टी की कथा

दुल्ला भट्टी ने एक प्लान बनाकर लड़कियों को न ही सिर्फ गुलाम होने से बचाया बल्कि उनकी शादी की सारी व्यवस्थाएं भी करवाई।

क्यों खास होती है नई पुत्रवधु या बच्चे के लिए लोहड़ी

पंजाब और हरियाणा आदि जगहों पर ससुराल में बहू और नवजात बच्चे की पहली लोहड़ी को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। नवविवाहित जोड़े इस दिन लोहड़ी की जलती लकड़ियों (समिधा) को साक्षी मानकर अपने सुखमय दांपत्य जीवन के लिये मंगलकामनाएं करते हैं।
लोहड़ी के गीत

लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही बच्चे 'लोहड़ी' के गाने गाकर लकड़ी, उपले आदि इकट्ठे करते हैं। इसके बाद इस सामान को किसी स्थान पर रखकर उसमें आग जलाई जाती है। लोग अपने-अपने घरों से अग्नि के चारों आकर इसकी परिक्रमा करते हैं। अग्नि में मूंगफली, रेवड़ी या मक्के के भुने दानों आदि की आहुति दी जाती है।
संगीत और भांगड़ा

संगीत और भांगड़ा

बात लोहड़ी की हो और भांगडे की बात ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। पंजाब में लोहड़ी के दिन अग्नि के चारों ओर चक्कर लगाते भांगड़ा करते लोगों को देखना आम बात है। इस दिन पुरुष और महिलाएं विशेष रूप से तैयार होकर भांगड़ा नृत्य और गिद्दा नृत्य करते हैं।

Thursday, 11 January 2018

125 साल पहले जब स्वामी विवेकानन्द ने अपने भाषण की शुरुआत 'मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनों' कहकर की थी

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए' का संदेश देने वाले युवाओं के प्रेरणास्त्रो‍त, समाज सुधारक युवा युग-पुरुष 'स्वामी विवेकानंद' 
 'स्वामी विवेकानंद' का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) में हुआ। इनके जन्मदिन को ही राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
आइये ऐसे महान व्यक्ति को सम्मान जताते हुए हम उनकी तस्वीर में उनका जन्मदिवस मनाये।  

125 साल पहले जब स्वामी विवेकानन्द ने अपने भाषण की शुरुआत 'मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनों' कहकर की थी 
 जिसके बाद सभागार कई मिनटों तक तालियों की गूंज हर तरफ गूंजती रही. आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद के उस भाषण की खास बातें:
आज स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस है, जिसे पूरा देश युवा दिवस के रुप में मना रहा है. नरेंद्र नाथ का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था, जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से मशहूर हुए. विवेकानंद के बारे में कहा जाता है कि वह खुद भूखे रहकर अतिथियों को खाना ख‍िलाते थे और बाहर ठंड में सो जाते थे. विवेकानंद बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे. कम उम्र में ही उन्‍होंने वेद और दर्शन शास्‍त्र का ज्ञान हासिल कर लिया था.
वहीं विवेकानंद की जब भी बात होती है तो अमरीका के शिकागो की धर्म संसद में साल 1893 में दिए गए उनके भाषण के बारे में बात जरूर की जाती है. 125 साल पहले जब स्वामी विवेकानन्द ने अपने भाषण की शुरुआत 'मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनों' कहकर की थी जिसके बाद सभागार कई मिनटों तक तालियों की गूंज हर तरफ गूंजती रही. आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद के उस भाषण की खास बातें:

- अमेरिका के बहनों और भाइयों, आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है और मैं आपको दुनिया की प्राचीनतम संत परम्परा की तरफ से धन्यवाद देता हूं. मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं और सभी जातियों, संप्रदायों के लाखों, करोड़ों हिन्दुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं.

- मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी है, जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया. हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं.

- मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों और सभी देशों के सताए गए लोगों को अपने यहां शरण दी. मुझे गर्व है कि हमने अपने दिल में इसराइल की वो पवित्र यादें संजो रखी हैं जिनमें उनके धर्मस्थलों को रोमन हमलावरों ने तहस-नहस कर दिया था और फिर उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं जिसने पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और लगातार अब भी उनकी मदद कर रहा है.

- भाइयों, मैं आपको एक श्लोक की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहूंगा, जिन्हें मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है और जो रोज़ करोड़ों लोगों द्वारा हर दिन दोहराया जाता है - 'रुचिनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम... नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव...' इसका अर्थ है - जिस तरह अलग-अलग स्रोतों से निकली विभिन्न नदियां अंत में समुद्र में जाकर मिल जाती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता है, जो देखने में भले ही सीधे या टेढ़े-मेढ़े लगें, परंतु सभी भगवान तक ही जाते हैं.

- सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं और इनकी भयानक वंशज हठधर्मिता लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं. इन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है. कितनी ही बार यह धरती खून से लाल हुई है, कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं. अगर ये भयानक राक्षस न होते, तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता, लेकिन अब उनका समय पूरा हो चुका है.

गरीब लड़ते रहे रोटी की जंग . इस राज्य के विधायकों ने बढ़वा ली अपनी सैलरी , खुद को बताया सबसे गरीब

यहाँ बात हो रही है तमिलनाडु की जहाँ विधानसभा में मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी ने सभी विधायकों की सैलरी जबर्दस्त मात्रा में बढाने का प्रस्ताव पेश किया है

 कहाँ एक तरफ जनता का एक बड़ा वर्ग गरीबी के बोझ तले दबा जा रहा है वहीँ दूसरी तरफ उनको गरीबी से मुक्त करवाने का वादा कर के चुनाव लड़े और उसी गरीब जनता के वोट से जीतने के बाद खुद को ही गरीब साबित कर डाला .. दशकों से त्राहिमाम करती जनता को पता ही नहीं चला और पल भर में इन माननीय विधायकों ने खुद की गरीबी को
दूर करने का जुगाड़ कर डाला . बीते साल दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल सरकार ने सत्ता में आते ही विधायकों की सैलरी चार गुना करने का प्रस्ताव किया था, जिसमें विधायकों की सैलरी ढाई लाख के आसपास हो जाती. मगर, केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी. अभी विधायकों को करीब पचास हज़ार रुपए महीना मिलता है और इसी
को बढा़ने की मांग के लिए राखी बिड़लान ने सदन में मुद्दा उठाया.लेकिन एक ऐसा प्रदेश भी है जो इन सबसे कहीं आगे निकल गया है .


यहाँ बात हो रही है तमिलनाडु की जहाँ विधानसभा में मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी ने सभी विधायकों की सैलरी जबर्दस्त मात्रा में बढाने का प्रस्ताव पेश किया है. इस प्रस्ताव के बाद माननीय विधायकों की सैलरी लगभग 91% बढ़ जायेगी जो तय मानी जा रही है . अभी तमिलनाडु के विधायक 55 हज़ार रुपये प्रतिमाह पा रहे हैं है,
जो इस नए आदेश के बाद लगभग 1 लाख 5 हजार रुपए हो जायेगी