Friday, 31 March 2017

अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मो. आज़म खान पर 700 करोड़ रूपये की पंजीरी खाने का आरोप और इसकी ,उधर दूसरी तरफ आज़म खान पर वक्फ बोर्ड की 500 करोड़ रूपये

गर्भवती महिलाओं की 700 करोड़ रूपये पंजीरी खा गये आज़म खान अब हो सकती है जेल ,योगी ने तलब की रिपोर्ट


उत्तर प्रदेश : अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मो. आज़म खान पर 700 करोड़ रूपये की पंजीरी खाने का आरोप लगा है और इसकी रिपोर्ट फाइल खुद सीएम योगी ने तलब की है ,उधर दूसरी तरफ आज़म खान पर वक्फ बोर्ड की 500 करोड़ रूपये की जमीन बेंचने का भी आरोप लगा है ,वक्फ बोर्ड की जमीन बेंचने का आरोप शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे सादिक ने लगाया है उन्होंने कहा है कि आज़म खान ने गर्भवती महिलाओं में बांटी जाने वाली पंजीरी और वक्फ बोर्ड की जमीन में घोटाला करके जो पैसा कमाया है वो सब अपनी जौहर यूनिवर्सिटी और अपने दूसरे स्कूलों में खर्च कर दिया.मौलाना ने कहा कि सत्ता कि धौंस दिखाकर आज़म खान ने वो कॉलोनी खाली करवाई थी जो वक्फ बोर्ड की जमीन पर बनी हुयी थी
आज़म खान ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए वक्फ बोर्ड की ज़मीन पर बनी कॉलोनी पर पुलिस बल का प्रयोग करके JCB मशीन चलवाई और कॉलोनी को खाली करवाया , उसके बाद इस ज़मीन को आज़म खान ने अपने रामपुर पब्लिक स्कूल को दे दी

तो वहीँ आज़म खान ने गर्भवती महिलाओं में बांटी जाने वाली 700 करोड़ रूपये की पंजीरी में भी जमकर घोटाला किया है ,आज़म खान पर आरोप लगा है कि बालविकास और पुष्टाहार विभाग ने बिना टेंडर के ही 700 करोड़ रूपये मूल्य की पंजीरी बाँट दी ,यूपी के नए सीएम योगी आदित्यनाथ ने 700 करोड़ रूपये की पंजीरी के टेंडरों की फाइल मांगी है योगी ने चीफ सेक्रेटरी डिम्पल वर्मा को भी कड़ी फटकार लगायी है।"

आपको बता दें कि ये 700 करोड़ रूपये की पंजीरी की खुली लूट अखिलेश यादव सरकार में की गयी थी इस पंजीरी वितरण के टेंडर 14 अप्रैल 2016 को खत्म हो गये थे मगर इसके बाद भी अखिलेश यादव के मंत्रियों ने खुली लूट जारी रखी थी। 

क्या है ये पंजीरी वितरण कार्यक्रम ?

  • यूपी में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पंजीरी बांटी जाती है 
  • यूपी में करीब पौने दो लाख आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीरी बांटने का कार्यक्रम है 
  • पंजीरी बांटने का काम बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग करता है  

NDTV के पत्रकार रवीश ने एक बार कहा था-

यदि भारत में मुस्लिम बहु संख्यक हो गए तो कौनसा क़यामत आ जाएगी?
उत्तर इन आंकड़ों में छिपा है--

स्लेवरी, टैररिज्म एंड इस्लाम-द हिस्टोरिकल रूट्स एंड कंटेम्पररी थ्रैट’।
लेखक डा. पीटर हैमंड
‘द हज’के लेखक लियोन यूरिस

उपरोक्त शोध ग्रंथों के अनुसार जब तक मुसलमानों की जनसंख्या किसी देश-प्रदेश क्षेत्र में लगभग 2 प्रतिशत के आसपास होती है, तब वे एकदम शांतिप्रिय, कानूनपसंद अल्पसंख्यक बन कर रहते हैं और किसी को विशेष शिकायत का मौका नहीं देते। जैसे अमरीका में वे (0.6 प्रतिशत) हैं, आस्ट्रेलिया में 1.5, कनाडा में 1.9, चीन में 1.8, इटली में 1.5 और नॉर्वे में मुसलमानों की संख्या 1.8 प्रतिशत है। इसलिए यहां मुसलमानों से किसी को कोई परेशानी नहीं है।

जब मुसलमानों की जनसंख्या 2 से 5 प्रतिशत के बीच तक पहुंच जाती है, तब वे अन्य धर्मावलंबियों में अपना धर्मप्रचार शुरू कर देते हैं। जैसा कि डेनमार्क, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन और थाईलैंड में जहां क्रमश: 2, 3.7, 2.7, 4 और 4.6 प्रतिशत मुसलमान हैं।

जब मुसलमानों की जनसंख्या किसी देश या क्षेत्र में 5 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है, तब वे शॉपिंग मॉल पर ‘हलाल’ का मांस रखने का दबाव बनाने लगते हैं, उन्होंने कई देशों के सुपरमार्कीट के मालिकों पर दबाव डालकर उनके यहां ‘हलाल’ का मांस रखने को बाध्य किया।


जब मुस्लिम जनसंख्या किसी देश में 10 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तब वे उस देश, प्रदेश, राज्य, क्षेत्र विशेष में कानून-व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा करना शुरू कर देते हैं, शिकायतें करना शुरू कर देते हैं, उनकी ‘आॢथक परिस्थिति’ का रोना लेकर बैठ जाते हैं, छोटी-छोटी बातों को सहिष्णुता से लेने की बजाय दंगे, तोड़-फोड़ आदि पर उतर आते हैं, चाहे वह फ्रांस के दंगे हों डेनमार्क का कार्टून विवाद हो या फिर एम्सटर्डम में कारों का जलाना हो, हरेक विवादको समझबूझ, बातचीत से खत्म करने की बजाय खामख्वाह और गहरा किया जाता है। ऐसा गुयाना (मुसलमान 10 प्रतिशत), इसराईल (16 प्रतिशत), केन्या (11 प्रतिशत), रूस (15 प्रतिशत) में हो चुका है।

शोधकत्र्ता और लेखक डा. पीटर हैमंड बताते हैं कि जब किसी देश में मुसलमानों की जनसंख्या 60 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है, तब अन्य धर्मावलंबियों का ‘जातीय सफाया’ शुरू किया जाता है (उदाहरण भारत का कश्मीर), जबरिया मुस्लिम बनाना, अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल तोडऩा, जजिया जैसा कोई अन्य कर वसूलना आदि किया जाता है। जैसे अल्बानिया (मुसलमान 70 प्रतिशत), कतर (मुसलमान 78 प्रतिशत) व सूडान (मुसलमान 75 प्रतिशत) में देखा गया है।

किसी देश में जब मुसलमान बाकी आबादी का 80 प्रतिशत हो जाते हैं, तो उस देश में सत्ता या शासन प्रायोजित जातीय सफाई की जाती है। अन्य धर्मों के अल्पसंख्यकों को उनके मूल नागरिक अधिकारों से भी वंचित कर दिया जाता है। सभी प्रकार के हथकंडे अपनाकर जनसंख्या को 100 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाता है। जैसे बंगलादेश (मुसलमान 83 प्रतिशत), मिस्र (90 प्रतिशत), गाजापट्टी (98 प्रतिशत), ईरान (98 प्रतिशत), ईराक (97 प्रतिशत), जोर्डन (93 प्रतिशत), मोरक्को (98 प्रतिशत), पाकिस्तान (97 प्रतिशत), सीरिया (90 प्रतिशत) व संयुक्त अरब अमीरात (96 प्रतिशत) में देखा जा रहा है।


Dr. Sree Sree Shivakumara Swamiji,110 Birth special edition

Shree .Shivakumara Swamiji 110 Birth Anniversary 

  • Year of Birth: 1907.
  • Place of Birth: Veerapura, Magadi Taluk, Bangalore District.
  • Parents: Patel Honnappa and Gangamma.
  • Primary Education: Veerapura & Nagavalli.
  • Secondary Education: Government High School, Tumkur.
  • Pre-University & Graduation: Central College, Bangalore.
The present Muttadhipathi is His Holiness Dr. Sree Sree Shivakumara Swamiji, Who was initiated into holy order in 1930 by his Guru, His Holiness Sree Sree Uddanashivayogi became Muttadhyaksha of the Mutt in the year 1941. Swamiji is well known to people by his hard work, disciplined life, faith in humanity and sincerity to help the poor and downtrodden. He has profound knowledge of English, Kannada and Sanskrit literatures. He developed educational institution from traditional learning of Sanskrit to the modern science and technology. Sree Swamiji was awarded with the doctor of literature by Karnataka University in 1965. It is his total commitment to the service of humanity that enables Sree swamiji to go through the eighteen - hour daily work schedule even at this age also.

Sree Swamiji created a cosmopolitan atmosphere in the mutt in which people belonging to all religion and creeds can work together for common aims and objectives Swamiji counsels and sympathizes the persons with sickness, worries or troubled various kinds of personal problems. People very much desire his gracious presence in many religious, cultural, social and educational functions and conferences. Sree Swamiji's highly instructive and inspiring speech on such occasions, instill a sprit of righteousness and brotherly love among the people.

With his great personality Swamiji earned the respects of all the dignitaries of the Nation and also abroad. Many delegates of the Nation visited the Mutt seeking his blessings.
Swamiji was awarded the Prestigious Karnataka Ratna award, the highest civilian award given by Karnataka Government on his centenary year 2007, for his Social Service.

Daily schedule

A simple man that he is, Sri Shivakumara Swamiji, even at the ripe age of 105, is both a light eater and a light sleeper. He sleeps only for three hours a day, from 11 pm to 2 am. His routine runs like this:
  • 2 am - 3 am: Study.
  • 3 am - 3:30 am: Bath.
  • 3:30 am - 5:30 am: Meditation, pooja and the singing of bhajans, followed by breakfast.
  • 5:30 am onwards: Participating in the prayer session of students, concentrating on the various developmental and administrative aspects of the math.
  • 6 pm - 8 pm: Evening prayer session with students, followed by the singing of bhajans.
  • 8 pm - 11 pm: Devoted to the study of various philosophers.

Educational Trust

Sanskrit College: It is established by Uddana Swamiji in 1917 which is extended and developed by Sree Shivakumara Swamiji. Now about 3000 students belonging to all communities are studying in this college. Thousands of graduates from this college are serving the cause of Sanskrit learning all over the country at various levels.




Institute of Technology: Realising the importance of Technology for the development of the country, Sree Shivakumara Swamiji started Siddaganga Institute of Technology in 1963. The institute spread over an area of 65 acres has now grown to a full fledged campus having 3000 students from all parts of India & Abroad.
Schools and colleges: Sree Swamiji has established more than a hundred educational institutions ranging from pre-primary to post graduate studies. This includes primary schools, school for the blind, higher secondary school, colleges of arts, science and commerce, and college of pharmacy. About 30000 students are deriving benefits from these institutions every year.

Educational Institutions

Siddaganga Engineering CollageSiddaganga Institute of Business Management college
Siddaganga PolytechnicSiddaganga College of Pharmacy
Siddaganga school of NursingSiddaganga I.T.I College
Siddaganga B.Ed CollegeSiddaganga T.C.H College
Siddaganga Pre University CollegeSiddaganga First Grade College
Siddaganga Co-First Grade CollegeSiddaganga High Schools
Siddaganga Sanskrit CollegeSiddaganga Sanskrit Schools
Siddaganga Primary SchoolsSiddaganga Kannada Pandith Training Institute
Blind school
Siddaganga Primary & Pre Primary schools

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना कर भारतवासियों में स्वाभिमान जाग्रत करने वाले एक ओजस्वी स्वतंत्रता सेनानी...

राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक परम् पूज्य डॉ. केशवराव बलिराम राव हेडगेवार जी की जयंती पर शत- शत नमन।


संक्षिप्त जीवन परिचय

डॉ॰ हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को महाराष्ट्र के नागपुर जिले में पण्डित बलिराम पन्त हेडगेवार के घर हुआ था। इनकी माता का नाम रेवतीबाई था। माता-पिता ने पुत्र का नाम केशव रखा। केशव का बड़े लाड़-प्यार से लालन-पालन होता रहा। उनके दो बड़े भाई भी थे, जिनका नाम महादेव और सीताराम था।पिता बलिराम वेद-शास्त्र के विद्वान थे एवं वैदिक कर्मकाण्ड (पण्डिताई) से परिवार का भरण-पोषण चलाते थे। स्वामी दयानन्द सरस्वती के अनुयायी व आर्य समाज में निष्ठा होने के कारण उन्होंने अग्निहोत्र का व्रत लिया हुआ था। परिवार में नित्य वैदिक रीति से सन्ध्या-हवन होता था।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार का पूरा जीवन अखंड भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने ही देश में पहला हिंदुओं की रक्षा करने के लिए एक संगठन बनाया जो बाद में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ बन गया। आरएसएस का आधार इसकी शाखाएं मानी जाती हैं। पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की जिस संगठन की शुरुआत महाराष्ट्र के नागपुर से हुई थी उसकी पहली शाखा मध्यप्रदेश के खंडवा शहर से हुई थी। इसकी शुरुआत की थी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पहले सर संघ चालक और संघ के आधार स्तंभ डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार ने।
खंडवा में लगी पहली शाखा

डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार द्वारा खंडवा में आरएसएस की पहली शाखा लगाने का जिक्र वर्तमान सर संघ चालक मोहन भागवत ने ही एक बार अपने खंडवा प्रवास के दौरान किया था। उन्होंने कहा था कि खंडवा से संघ का काफी पुराना रिश्ता है। यहीं से शुरू हुई संघ की पहली शाखा आज पूरे विश्व में फैल चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि डॉ. हेडगेवार और माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने भी खंडवा आकर स्वयंसेवकों को जोड़ा था।
फेंक दी थी मिठाई
हेडगेवार जब वे 9-10 साल के थे, तो उन्होंने रानी विक्टोरिया के राज्यारोहण की पचासवीं जयंती पर बांटी गई मिठाई यह कहकर कूड़े में फेंक दी थी कि विदेशी राज्य की खुशियां हम क्यों मनाएं। इसी प्रकार 15-16 वर्ष की अवस्था में स्कूल निरीक्षक के आने पर उन्होंने हर कक्षा द्वारा ‘वन्दे मातरम्’ का नारा लगवाया था। इससे नाराज होकर प्रधानाचार्य ने उनको विद्यालय से निकाल दिया था और फिर वे दूसरे विद्यालय में पढ़े थे। डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक जन्म हिन्दू वर्ष प्रतिपदा के दिन (1 अप्रैल 1889) नागपुर महाराष्ट्र मे हुआ था। डॉक्टरी की पढ़ाई करने कलकत्ता गए। परिवार जनों की इच्छा थी की वह नौकरी करें पर उन्होंने ऐसा न कर देश सेवा का रास्ता चुना।
कलकत्ता में आए क्रांतिकारियों के संपर्क में
मेडीकल की पढ़ाई करते समय ही केशव बलिराम हेडगेवार बंगाल के क्रान्तिकारियों के संपर्क में आ गए और उनके दल के सदस्य बन गए। उनकी नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें हिन्दू महासभा बंगाल प्रदेश का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। किसी संगठन को किस तरह चलाया जाता है सीखकर कलकत्ता से नागपुर आ गए।

हिंदुओं के लिए बना पहला संगठन
इस घटना के बाद कई कई हिंदू नेता केरल के हालात जानने के लिए केरल गए। इनमें नागपुर के प्रमुख हिंदू महासभाई नेता डॉ. बालकृष्ण शिवराम मुंजे, डॉ. हेडगेवार, आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धानंद आदि थे। नागपुर के कुछ हिन्दू नेताओं ने समझ लिया कि हिन्दूओं एकता ही उनकी सुरक्षा कर सकती है। नागपुर में डॉ. मुंजे ने कुछ हिंदू नेताओं की बैठक हुई। जिनमें डॉ. हेडगेवार एवं डॉ. परांजपे भी थे। बैठक में उन्होंने एक हिंदू-मिलीशिया बनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य था हिंदुओं की रक्षा करना एवं हिन्दुस्थान को एक सशक्त हिंदू राष्ट्र बनाना।

डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार को दी गई जिम्मेदारी

नए बनाए गए मिलीशिया को खड़ा करने की जिम्मेदारी डॉ. मुंजे ने डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार को दी। पहले स्वतंत्रता संग्राम की असफल क्रान्ति और तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक अर्ध-सैनिक संगठन की नींव रखी। 28. 9. 1925 विजयदशमी को डॉ. बालकृष्ण शिवराम मुंजे, उनके शिष्य डॉ. हेडगेवार, श्री परांजपे और बापू साहिब सोनी ने एक हिन्दू युवक क्लब की नींव डाली, जिसका नाम राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ हो गया।

वीर सावरकर बने आर्दश

इस मिलीशिया का आधार बना – वीर सावरकर का राष्ट्र दर्शन ग्रन्थ (हिंदुत्व) जिसमे हिंदू की परिभाषा यह की गई थी कि – “भारत के वह सभी लोग हिंदू हैं जो इस देश को पितृभूमि-पुण्यभूमि मानते हैं”. इनमे सनातनी, आर्यसमाजी, जैन , बौद्ध, सिख आदि पंथों एवं धर्म विचार को मानने वाले व उनका आचरण करने वाले समस्त जन को हिंदू के व्यापक दायरे में रखा गया था. मिलीशिया को खड़ा करने के लिए स्वंयसेवको की भर्ती की जाने लगी, सुबह व शाम एक-एक घंटे की शाखायें लगाई जाने लगी. इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षक, मुख्य शिक्षक, घटनायक आदि पदों को बनाया गया।

सैनिक शिक्षा देने की थी तैयारी

शाखायों में व्यायाम, शरारिक श्रम, हिंदू राष्ट्रवाद की शिक्षा के साथ- साथ वरिष्ठ स्वंयसेवकों को सैनिक शिक्षा भी दी जानी थी। रात के समय स्वंयसेवकों की गोष्ठीयां होती थीं। वीर सावरकर की पुस्तक हिंदुत्व के अंश भी पढ़ कर सुनाए जाते थे। प्रारंभ में हेडगेवार का स्वभाव बहुत उग्र था। एक बार एक सभा में एक वक्ता ने अपने भाषण में तिलक के बारे में कोई अपशब्द बोल दिए तो उन्होंने मंच पर जाकर माइक पकड़कर उस वक्ता के मुंह तमाचा मारा और उसे मंच से नीचे धकेल दिया।

न्यूज चैनल ने किया पत्थरबाजों का स्टिंग, पत्थरबाज ने कबूला- 2008 से कर रहा हूं ये काम, एक दिन के 5000 तक मिल जाते हैं

एक निजी टीवी चैनल ने खुफिया स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय नौजवानों को पत्थरबाजी करने के लिए पैसे दिए जाते हैं। इन पत्थरबाजों ने खुफिया कैमरों के सामने स्वीकार किया कि वो नियमित तौर पर पत्थरबाजी करते रहे हैं। एक पत्थरबाज कैमरे के सामने कह रहा था कि वो साल 2008 से ही पत्थरबाज कर रहा है। पत्थरबाज फारूख अहमद लोन ने बताया कि उसे इस काम के लिए 500 से पांच हजार रुपये तक मिलते हैं। पत्थरबाज ने कबूल किया कि हिज्बुल मुजाहिद्दीन के उग्रवादी बुरहान वानी की मौत के बाद हुए हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी उसने पत्थरबाजी की थी।
जाकिर हमद भट नामक एक अन्य पत्थरबाज ने भी टीवी चैनल आज  तक के खुफिया कैमरे के सामने कबूल किया कि उन्हें पुलिस और भारतीय सेना पर पत्थर फेंकने के लिए पैसे, जूते और कपड़े भी दिए जाते हैं। फारूख ने बताया कि उसे उसका एक दोस्त आसिफ पैसा देता था लेकिन उसे ये पता नहीं था कि उसके दोस्त को किससे पैसा मिलता था। फारूख ने बताया कि उसके द्वारा फेंके गए पत्थरों से जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान और भारतीय सुरक्षा बल घायल हो चुके हैं।
फारूख ने बताया कि उन्हें विरोध प्रदर्शन करने और पत्थरबाजी के आदेश मिलते हैं। पकड़े जाने पर वो पुलिस के सामने पैसे मिलने की बात कबूल नहीं करते। पत्थरबाज पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए घर से फरार हो जाते हैं। बुधवार (29 मार्च) को ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया कि राज्य में होने वाले पत्थरबाजी को पाकिस्तान स्थित व्हाट्सऐप ग्रुप से इसके निर्देश मिलते हैं। पुलिस के अनुसार पत्थरबाजों को व्हाट्सऐप से भारतीय सुरक्षा बलों की स्थिति बतायी जाती है।
कश्‍मीर पुलिस के एक अधिकारी ने सीएनएन-न्‍यूज 18 को बताया कि जब सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू होती है तो पाकिस्तानी ग्रुप नौजवानों को वहां जाने के लिए कहा जाता है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य ने चैनल से कहा कि यह एक तथ्‍य है कि सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल देश के दुश्‍मनों द्वारा किया जा रहा है।  मंगलवार (28 मार्च) को कश्मीर के बडगाम में एक मुठभेड़ के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों पर पत्‍थरबाजी की गई। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में तीन नागरिक मारे गए। कश्‍मीरी युवकों और सुरक्षा बलों के बीच इस मुठभेड़ में सीआरपीफ के 63 जवान घायल हुए।

हाट्सएप पर कश्‍मीरी युवकों को पाकिस्‍तान से भेजी जाती है एनकाउंटर की लोकेशन, फिर कराते हैं पत्‍थरबाजी

जम्‍मू-कश्‍मीर में सुरक्षा बलों पर स्‍थानीय नागरिकों द्वारा की जाने वाली पत्‍थरबाजी के पीछे पुलिस ने पाकिस्‍तान का हाथ होने का शक जताया है। हाल ही में श्रीनगर में दर्ज किए गए एक मामले में जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने आरोप लगाया है कि पत्‍थरबाजी के लिए कई व्‍हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिनके एडमिन पाकिस्‍तानी हैं। इन ग्रुन में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे एनकाउंटर की सटीक लोकेशन और समय भेजा जाता है, फिर युवाओं से वहां पहुंचने को कहा जाता है। कश्‍मीर पुलिस के एक अधिकारी ने सीएनएन-न्‍यूज 18 को बताया कि ”जैसे ही एनकांउटर शुरू होता है, पाकिस्‍तान के आतंकी संगठनों के लोग लोकेशन के बारे में सटीक जानकारी भेजकर युवाओं को एक जगह इकट्ठा होने को कहते हैं।” पुलिस ने दावा किया है कि इन व्‍हाट्सएप ग्रुप्‍स में एक एरिया के युवाओं को अगले एरिया के युवाओं से जोड़ने के लिए लिंक भी डाले जाते हैं। डीजीपी एसपी वैद्य ने कहा, ”यह एक तथ्‍य है कि सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल देश के दुश्‍मनों द्वारा किया जा रहा है।”
कश्‍मीर के बडगाम में, मंगलवार (28 मार्च) को एक घर में छिपे आतंकी को पकड़ने की मुहिम में जुटे सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों पर पत्‍थरबाजी की गई, जिसमें तीन नागरिक मारे गए। कश्‍मीरी युवकों और सुरक्षा बलों के बीच इस मुठभेड़ में सीआरपीफ के 63 जवान घायल हुए। पिछले दिनों, जम्‍मू-कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी के युवाओं से पत्‍थरबाजी न करने की अपील की थी। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने सख्‍त लहजे में पत्‍थरबाजों को चेतावनी देते हुए कहा था कि सेना की कार्रवाई में बाधा डालने वालों से कड़ाई से निपटा जाएगा। उन्‍होंने कहा था कि आतंकियों की मदद करने वालों को भी आतंकी ही समझा जाएगा।
दूसरी तरफ, पत्‍थरबाजों से निपटने के लिए केंद्र सरकार पेलेट गन के इस्‍तेमाल को पूरी तरह खत्‍म करने पर तैयार नहीं है। मंगलवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने लोक सभा में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने तय किया है कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बल PAVA- चिली (शेल और ग्रिनेड्स), स्टन लैक (शेल और ग्रिनेड्स) का इस्तेमाल करते रहेंगे। साथ ही अगर यह हथियार कारगर साबित नहीं हुए तो पेलेट गन्स का इस्तेमाल भी किया जाएगा।

कौन है सोनिया गाँधी

सोनिया गाँधी की सम्पति 1 .23  लाख करोड़ रुपये तक है जबकि  वे एक  साधारण  घर से  थी 
कौन है सोनिया गाँधी 
सोनिया एंटोनिया माइनो (सोनिया गांधी)
 जैसा की हमें नाम से ही पता चलता हैं की सोनिया जी इटालियन है और उनका पासपोर्ट भी इटालियन हैं | जबकि इनका शादी राजीव गाँधी के साथ हुआ था| इसीलिए इन्होने कभी भी अधिकारिक रूप से आपना टाइटल नही बदला | वैसे आपको बता दे की राजिव गाँधी और सोनिया गाँधी के मिलने की कहानी भी काफी विवादश्पद हैं आखिर काम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की हुई स्टूडेंट की क्या मजबूरी हो सकती है की वो एक बार डांसर का कम करे और वासना को खुलेयाम परोसे | जरा सोचिये भारत जैसी पवित्र संस्कृति आज किन लोगो के हाथ में हैं और ऐसा सिर्फ और सिर्फ हमारी उदासीनता के कारन ही हैं | 

सोनिया गाँधी का जन्म के समय उसके पिता पिछले 4 साल से जेल में थे !!!!
आज हम सोनिया गांधी के जीवन से जुड़े कई रहस्यों को उजागर करेंगे | और सही मायने में कैसे इन्होने हवा बना कर हमारे भोले-भाले देशवाशियो को ठगने का काम किया हैं |
राजिव गाँधी : वाश्त्विक नाम राजिव खान ,आप फ़िरोज़ खान और इंद्रा प्रियदर्शनी के बेटे हैं.... जन्म से आप मुस्लिम हैं... और भारतीय जनता को भावुकता पूर्ण रूप से लालच देने के लिए खान की जगह गाँधी का उपयोग किया है 
सोनिया गाँधी के सामाजिक या फिर अधिकारिक पिता का नाम स्तेफानो यूजीने मैनो (Stefano Eugene Maino) हैं | सोनिया के पिता जर्मन थे | और हिटलर की आर्मी के मेम्बर भी थे | जब ज़र्मन सेना रूस गई तो वह वो रौस्सियन आर्मी द्वारा पकड़ी गई और उन्हें २० साल की सजा सुनाई गई थी | लेकिन कुछ ही समय में सोनिया के पिता KGB के लिए काम करने लगे फिर उनकी सजा २० साल से कम करके 4 साल कर दी गई | और जब उसने आपनी सजा खत्म करके घर लोटा तो उसने अन्तोनिया albina maino का नाम जो इटालियन था बदल कर सोनिया रख दिया जो की एक रुस्सियन नाम है | 

सोनिया गाँधी दावा करती है की उनका जन्म बेसनो (besano) इटली में हुआ है | जहाँ तक सोनिया गाँधी के जन्म प्रमाण पत्र की बात माने तो सोनिया का जन्म लुसिआना में हुआ था जो की इटली और स्विट्ज़रलैंड के बॉर्डर पे स्थित हैं | ये शहर जर्मन आर्मी के लिए सैर -सपाटा और मजे करने के लिए उस समय प्रसिद्ध था |

शिक्षा : सोनिया गाँधी ने तो सुरुआती दौर में indian govt को ये बताया की वो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से शिक्षा ली है जो की बाद में गलत साबित हो गया | उसने एक और दावा किया था की वो बेल एजुकेशन ट्रस्ट से इंग्लिश की स्टडी की है जो की ये भी बाद में गलत साबित हो गया. 
जहा तक सोनिया गाँधी के शिक्षा की बात है ऐसा कोई भी दस्तावेज़ नही मिला है जिसके अधार पर ये कहा जा सके की वो ५वि पास है |
नागरिकता : अधिकारिक रूप से सोनिया गाँधी के पास भारतीय नागरिक होने का अधिकार नही है | इंद्रा गाँधी ने अपने power का उपयोग किया और गैरकानूनी तरीके से सोनिया गाँधी को भारत के राजनीती में पूर्ण भागीदारी का रास्ता बनाया | सारे दस्तावेज़ , प्रमाण होने का बावजूद भी क्या गृह मंत्रालय ने कभी इस बात पर ध्यान भी दिया? क्या आज़ादी का मतलब यही है ?

धर्म: क्रिस्तियानिती ,इटली में सोनिया गाँधी की बहन alexandria ( अनुष्का ) की अपनी दो दुकाने है जिनमे भारत से चुराई गई मुर्तिया बेचीं जाती है | सोनिया गाँधी अपने ताकत के बलबूते पर अवैध रूप से इन मूर्तियों का हवाई मार्गो से तस्करी कराती हैं | 
BY SUBRAMANIAM SWAMI 

सोनिया का वास्तविक परिचय एवं प्रेम कहानी
यह अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि सैकड़ों वषोर्ं से हमारे देश के लोगों को उनके शासकों के वास्तविक परिचय से अंधेरे में रखा गया। मैं यहां इस देश के आम लोगों की बात नही कर रहा हूँ जिन्हे कि षड़यंत्र के तहत शिक्षा एवं साक्षरता से दूर रखा गया तथा किसी तरह से वे अपना जीवन यापन करते रहे हैं। मै उन बुद्धिजीवियों की बात कर रहा हूँ जो कि समलैंगिकों के अधिकारों की वकालत करते नही थकते परंतु उन्हे हमारे देश में शासन कर रहे विदेश में जन्में नेताओं के इतिहास का भान नही है। आज हालात इतने बिगड़ गये हैं कि आज सारा देश एक ऐसी विदेश में जन्मी महिला के आस-पास धूम रहा है जिसके विषय में किसी को कोर्इ जानकारी नही है। 3
क्या आप ने इस बात पर ध्यान नही दिया कि हमें सोनिया गाँधी के इतिहास, पृष्ठभूमि, उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि उसके भार्इ-बहनों, उसके पिता क्या व्यवयाय किया करते थे, वह किस गांव या शहर की रहने वाली है, आदि के बारे में कोर्इ जानकारी नही दी जाती। केवल हमें यह बताया जाता है कि वे गाँधी नेहरु खानदान की बहू हैं इसलिए उन्हे हमारे उपर शासन करने का अधिकार है। तथा यही उनकी पहचान है। भारत में हमें राजीव के दादा का नाम तक नही बताया जाता। हमें यह नही बताया जाता कि जवाहर लाल नेहरु की मौत किस बीमारी से हुर्इ। तथा जवाहर लाल नेहरु का यह नेहरु सरनेम कहां से आया। अगर मोती लाल के पिता का नाम गंगा धर था तो मोतीलाल का नाम मोतीलाल धर क्यों नही पड़ा? मोतीलाल नेहरु कैसे पड़ गया? हमें ऐसी तमाम बातें जाननी होंगी जो कि हमे नही बताया जा रहा है। मै जो कुछ भी बता रहा हूँ ये वे सूचनाएं हैं जो कि पूरी दुनिया में यहां वहां बिखरी पड़ी हैं। 3
यह 21वीं सदी की सबसे रहस्यमयी महिला की कहानी है। वह महिला जो कि भारत की प्रधानमंत्री बनने के कगार पर थी। जैसे-जैसे उसके जीवन पर शोध किया जाता है, वह और भी रहस्यमयी होती जाती है। इस महिला के बारे में अंतिम सत्य क्या है। न तो यह महिला स्वयं बताना चाहती है न ही किसी सामान्य मानव के लिए इसकी सभी सच्चार्इयों को जानना संभव है। यह पूरी किताब केवल इस रहस्यमयी महिला के जीवन के बारे में सूचनाएं एकत्रित कर जनता के समक्ष लाने का गंभीर प्रयास है। इसमें मैं कहां तक सफल हुआ हूँ यह आप ही बता सकेंगे।
सोनिया गाँधी कैथोलिक इसाइ हैं तथा अपने धर्म व देश से बहूत प्रेम करती हैं। यही कारण है कि जब उनको अपनी लड़की का विवाह करना था तो उसके लिए उन्होने इटली की महिला श्रीमति वढे़रा को चुना तथा उनके पुत्र राबर्ट वढ़ेरा जो कि स्वभाविक है इसाइ ही हैं से विवाह किया गया। इस देश के बहूत कम लोग जानते हैं कि सोनिया गाँधी की समधन इटली की नागरिक हैं तथा श्रीमति वढे़रा ने अपने पति एरिक पढेरा को लंबे समय से उसी प्रकार छोड़ रखा है, जैसे राजीव के जन्म के बाद इंदिरा गाँधी ने अपने पति फिरोज खान उर्फ फिरोज गाँधी को छोड़ रखा था।
प्रधानमंत्री बनने के बाद सोनिया क्या करेंगी पक्के तौर पर कहना मुशिकल है परंतु थोड़ा बहूत उसका अनुमान हम उनकी काँग्रेस अध्यक्ष के रुप मे उनके क्रियाकलापों को देखकर लगा सकते हैं।
काँग्रेस अध्यक्ष के रुप में उनके कार्यकाल में दो इसाइ मुख्यमंत्री ऐसे राज्यों में बने जो कि इसाइ बहूल नही हैं। केरल में ए.के. एन्टोनी तथा छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया गया। अपनी लड़की का विवाह उन्होने इतावली महिला के लड़के से किया वह भी इसाइ से।
यह एक तथ्य है कि इटली मूल की सोनिया ज्यादातर इसाइ लोगों से ही सम्बन्ध बनाने में विश्वास करती हैं। उनके काँग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद से राजीव गाँधी के ज्यादातर मित्रों को दरकिनार कर दिया गया है। इस समय उनके सचिव के पद पर शकितशाली इसाइ आस्कर फर्नांडिस विराजमान हैं। मध्यप्रदेश में उनके मुख्यमंत्री हिंदू विरोधी हो हल्ले में शामिल हैं तथा यह सलाह वे दलितों को देते रहे हैं कि उन पर अत्याचार न हो इसलिए वे नये धर्म को अपनाए। (फरवरी 2003 भोपाल घोषणापत्र)। झाबुआ मे जब इसाइ ननों के साथ बलात्कार की घटना घटित हुर्इ तो उन्होने आँख मंूद कर इसका दोष विश्व हिन्दु परिषद तथा बजरंग दल जैसे संगठनों पर मढ़ दिया परंतु जब बाद में कुछ इसाइयों को जिन्होने बलात्कार किया था पकड़ लिया गया तो उन बलात्कारियों की जमानत कराने के लिए कुछ काँग्रेसी नेता सक्रिय देखे गये जिनमें मध्यप्रदेश शासन के प्रभावशाली मंत्री भी थे जिनके मित्र उस समय झाबुआ में न्यायधीश हुआ करते थे। इसके बाद सोनिया गाँधी ने चुप्पी साध ली। छत्तीसगढ़ में भारी मात्रा में धर्मपरिवर्तन की घटनाएं हुर्इ हैं। झारखंड में काँग्रेस पार्टी के नेता पीटर मुंडा हैं, जो कि एक इसाइ हैं। जबकि झारखंड राज्य हिंदू बहूल राज्य है। कुल मिला कर जहां-जहां संभव हैं, सोनिया इसाइयों को पद प्रदान करती हैं तथा जहां ऐसा संभव नही है, वहां ऐसे लोगों की नियुक्त करती हैं, जो कि धर्मपरिवर्तन को मूक समर्थन प्रदान करते हैं।
जब विश्व के ज्यादातर लोकतांत्रिक देश, विदेशों में जन्मे व्यकित को अपने यहां राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री जैसे पदों पर नही बैठने देते तो हम क्यों ऐसा होने दें? अगर हमने विदेशी नागरिकों को अपने उपर शासन करने की छूट प्रदान किये तो वह दिन दूर नही जब ओसामा बिन लादेन, हिटलर, मुसोलिनी आदि की मानसिकता वाले व्यकित हमारे उपर शासन करना प्रारंभ कर दें, जिनका प्रमुख उíेश्य अपनी संस्कृति तथा धर्म को हमारे उपर लादना है।
सोनिया भूलवश भारत की नागरिक नही बन पार्इं हो, अगर ऐसा कोर्इ व्यकित सोचता है, तो यह गलत है। सच्चार्इ यह है कि सोनिया प्रत्येक पांच वर्ष बाद विदेशी कानून के तहत भारत में रहने का परमिट लिया करती थीं। यह परमिट उन लोगों को दिया जाता है जो कि अस्थार्इ तौर पर भारत रहने आते हैं। सोनिया ने सर्वप्रथम भारत में रहने का परमिट 1968 मे प्राप्त किया। 1973 मे पांच वर्ष की समापित पर, अगर वे चाहतीं तो भारत की नागरिक बन सकतीं थीं परंतु उनका दिमाग उस समय किसी भी तरह से भारतीय नागरिक बनने के बारे में नही सोच रहा था। 1973 मे उन्होने आवेदन करके पुन: अगले पांच वर्षों तक भारत में रहने का परमिट प्राप्त किया। 1978 में उन्होने पुन: अगले पांच वर्षों के लिए भारत में रहने का परमिट लिया। यह बातें स्पष्ट दर्शाती हैं कि सोनिया भारत की नागरिक बनना नही चाहती थी। आखिरकार वे प्रत्येक पांच वर्ष में भारत में रहने का परमिट तो लेते ही रहती थी। अब वे हमारे देश की भोली भाली जनता को यह बताकर बेवकूफ बनाने का प्रयास कर रहीं हैं कि जिस दिन वे इदिरा जी के यहां बहू बन कर आर्इ उसी दिन से भारत की नागरिक बन गयी बाकी सब तकनीकी मामला है।
भारत का नागरिक बनने का आवेदन सोनिया ने एन्टोनिया नाम से किया था। आज हम सभी उन्हे जिस नाम से जानते हैं, उस नाम का प्रयोग करने में उन्हे उस समय शर्म महसूस होती थी। उस समय वे अपना इसाइ नाम एन्टोनिया ही इस्तेमाल करती थीं।
हमारे देश का हिन्दु हो या मुसलमान अगर उनके यहां कि लड़की या लड़का किसी अन्य धर्म की लड़की या लड़के से विवाह कर ले तो उसका भारी विरोध हम सभी करते हैं। परंतु जब यही हरकत राजीव गाँधी ने की तो हममे से किसी ने इस पर उंगली उठाना उचित नही समझा। केवल इसलिए क्योंकि गाँधी नेहरु खानदान का व्यकित जो कुछ करे हम उसे आदर भाव से देखते सुनतेे व समझते हैं। सोनिया गाँधी कोर्इ पर्चा लेकर स्टेज पर खड़े होकर पढ़ना शुरु कर दे तो सोनिया गाँधी जिन्दा बाद के नारे कम नही होते। लगता है पता नही कौन सा ज्ञान उसमें से टपकता है। वहीं अगर हमारे घर का बच्चा हमे सोनिया जैसे हिन्दी पढ़कर सुनाना प्रारंभ कर दे तो हम उसे तुरंत थप्पड़ रसीद करते हैं, यह हमारी गुलाम मानसिकता का धोतक है।
बताया जाता है कि राजीव गाँधी ने विवाह के पूर्व कैथोलिक इसाइ धर्म अपना लिया था। अगर यह सच नही है तो जिस प्रकार से सोनिया राजीव के बच्चों का विवाह कैथोलिक इसाइ के साथ चुन चुनकर, कर रहीं हैं, यह अच्छी बात नही है।अगर राजीव ने इसाइ धर्म गृहण कर लिया था तो कम से कम मैडम को यह बात जनता से बताना चाहिए। हालांकि राजीव के पिता की तरह राजीव का भी दाह-संस्कार किया गया था, परंतु नेहरु-गाँधी खानदान का कोर्इ भरोसा नही। वे किसी भी धर्म के व्यकित का दाह-संस्कार कर सकते हैं।
सोनिया का जन्म - सोनिया के सम्बन्ध में आज हमें जो कुछ भी बताया जाता है वह तीन बड़े झूठों पर आधारित है। 1
सोनिया का वास्तविक नाम - सोनिया गाँधी का असली नाम एन्टोनिया मैनो है। सोनिया गाँधी का नाम सोनिया किसने रखा? इस सम्बन्ध में भी बहूत सी दंतकथाएँ व्याप्त हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सोनिया गाँधी का नाम सोनिया वे इंग्लैंड में जिस अंग्रेज दंपत्ती के यहां नौकरानी का काम किया करती थी, उन्हाने रखा था, तो कुछ दंतकथाओं के अनुसार सोनिया गाँधी का नाम सोनिया, लंदन में वे जिस होटल में काम किया करती थी, उन्होने रखा था। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सोनिया का नाम सोनिया इंदिरा गाँधी ने रखा था। मेरी जानकारी के अनुसार सोनिया का नाम एन्टोनिया से सोनिया उनके स्वर्गीय पिता स्टीफानों मैनो ने रखा था। स्टीफानों लंबे समय तक रुस की जेल में रहने के बाद रुस की संस्कृति से काफी प्रभावित हो गये। जब उन्हे पता चला कि इटली के तानाशाह मुसोलिनी का साथ देने के कारण उनकी सम्पत्ति को अमेरिका की सेना ने जप्त कर लिया है तो वे और भी रुस की ओर झूक गये तथा जेल से वापस आने के बाद उन्होने अपनी पुत्री का नाम एन्टोनिया से सोनिया रख दिया जो कि एक रसियन नाम है। यह कोर्इ अंतिम सत्य नही है उम्मीद हैं कि सोनिया गाँधी स्वयं समय आने पर रहस्योदघाटन करेंगी कि इनमें से सच क्या है? खैर महत्व की बात यह है कि आज हम जिस नाम से उन्हे जानते हैं वह उनका असली नाम नही है। उनका इसाइ नाम एन्टोनिया है तथा भारत की नागरिकता प्राप्त करते समय भी उन्होने आवेदन पत्र में इसी नाम का प्रयोग किया था तथा इसी नाम से उसमें हस्ताक्षर भी की थी। 1
सोनिया गाँधी का जन्म स्थान, जन्म तिथि तथा उसके पिता का फासीवादियों से सम्बन्ध - हम सभी जानते हैं कि सोनिया का जन्म इटली में हुआ था। इटली के किस स्थान पर सोनिया गाँधी का जन्म हुआ था यह एक शोध का विषय है। संसद में दी गयी जानकारी के अनुसार सोनिया का जन्म इटली में तुरीन प्रांत के ओरबासानों नामक गांव में 9 दिसंबर 1946 में हुआ था। वास्तव में सोनिया गाँधी का जन्म ओरबासानो में नही अपितु लुसियाना में 1944 में हुआ था जैसा कि उनके बर्थ सार्टिफिकेट में वर्णित है। सोनिया का अपने वास्तविक जन्मस्थान छुपाने का एक कारण उनके पिता का नाजियों तथा मुसोलिनी के फासिस्टों से सम्बन्ध है। जो कि 1945 से अभी तक भूमिगत तौर पर इटली में कार्य कर रहे हैं। लुसियाना वह स्थान है जहां नाजियों तथा फासिवादियों का हेडक्वाटर है। तथा इटली तथा स्वीटजरलैंड की सीमा पर सिथत है। 1 सोनिया का अपने जन्म स्थान व जन्म के समय के संबध में झूठी जानकारी देने का एक और कारण उसके पिता का 1942 से लेकर 1945 तक रुस की जेल में बंद रहना है। जबकि सोनिया गांधी का वास्तविक जन्म लुसियाना प्रांत का 1944 का है। यही कारण है कि वे अपना जन्म 1946 का बताती हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि पश्चात्य संस्कृती में यह सब आम बात है। अगर सोनिया गांधी भारतीय जनता को विश्वास में लेकर सच्चार्इ बताएंगी तो जनता उसे अवश्य स्वीकार कर लेगी।
सोनिया गाँधी की शैक्षणिक योग्यता - सोनिया हार्इस्कूल से ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं। उन्होने 2004 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष इस बात का झूठा शपथपत्र दिया था कि वे प्रख्यात कैमिब्रज विश्वविधालय से अंग्रेजी में डिप्लोमा धारक हैं। 1
सत्य यह है कि सोनिया ने पढ़ार्इ करने के उíेश्य से किसी कालेज का मुंह नही देखा। उसने कैथोलिक इसाइयों द्वारा चलाये जा रहे गियावेनों (जो कि ओरबासानों से 15 किमी दूर सिथत है) के सेमिनरी स्कूल में जिसका नाम मारिया आसीलियेटि्रस स्कूल है में अध्यन किया था। इटली में उन दिनों जवान लड़कियां पहले इस प्रकार के इसाइ स्कूलों में शिक्षा लेती थीं तथा उसके बाद कमाने के उíेश्य से इंगलैंड चली जाती थीं। जहां उन्हे धरेलू नौकरानी तथा होटल में नौकरानी के रुप में कार्य करना होता था। मैनों परिवार तथा सोनिया कि सिथति भी उन दिनों कुछ ऐसी ही थी। सोनिया गांधी के पिता गुप्त समुदाय का सदस्य था तथा माता एक छोटी किसान थी। 1
सोनिया अपनी प्रारंभिक पढ़ार्इ के बाद कैमिब्रज गयी तथा धरेलू नौकरानी के लिए जो अंग्रेजी की जानकारी आवश्यक थी उस जानकारी को उन्होने लीनक्स स्कूल जो कि 1970 में बंद हो चुका है में प्राप्त की। कुल मिलाकर यही शिक्षा है जो सोनिया ने कैमिब्रज में प्राप्त की थी। जिसका एकमात्र उíेश्य धरेलू नौकरानी का कार्य प्राप्त करना था। यहां मै यह बताना आवश्यक समझता हूँ कि लीनक्स स्कूल कभी भी कैमिब्रज विश्वविधालय से संबद्ध नही रहा है तथा सोनिया गाँधी का यह दावा कि उन्होने कैमिब्रज विश्वविधालय से अंग्रेजी में डिप्लोमा प्राप्त किया है पूर्णत: झूठा है। सोनिया का रायबरेली के निर्वाचन अधिकारी तथा अन्य जगहों पर अपनी शैक्षणिक योग्यता की झूठी जानकारी प्रदान करने का उíेश्य यह है कि वे एक पढ़ी लिखी महिला हैं तथा उनकी राजीव गाँधी से मुलाकात कैमिब्रज विश्वविधालय में शिक्षा प्राप्त करते हुए हुर्इ थी। झूठ बोलने का एक अन्य कारण भारतीय समाज में शिक्षा को प्राप्त उच्च स्थान है। सोनिया को यह भी आशंका रही है कि अगर वे यह नही बतायेंगी कि वे शिक्षा प्रापित के उíेश्य से कैमिब्रज गयीं थी तो जनता जानना चाहेगी कि आखिर वे वहां क्या कर रहीं थी व इस प्रकार के प्रश्नों का जवाब देना सोनिया गाँधी नही चाहती हैं। सोनिया गाँधी के द्वारा संसद में झूठी जानकारी प्रदान करना संसद के नैतिक मूल्यों की अवहेलना है तथा सोनिया द्वारा झूठी जानकारी निर्वाचन अधिकारी को प्रदान करना भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत अपराध है। आम आदमी की भाषा में इसे चार सौ बीसी या दस नंबरी कहा जाता है जिसे कि 10 जनपथ के साथ मिलाने की आवश्यकता नही है। 1
दिनांक 1 जून 2004 को मनोज कौशिक ने प्रेस सेंटर कैमिब्रज विश्वविधालय को पत्र लिखकर सोनिया गाँधी तथा उनकी शिक्षा के सम्बन्ध में जानकारी चाही जिसके जवाब में जो पत्राचार हुआ तथा अंत में जो जवाब कैमिब्रज विश्वविधालय से प्राप्त हुआ उसका सीधा सीधा अर्थ यह था कि सोनिया गाँधी कभी भी कैमिब्रज विश्वविधालय की छात्रा नही रहीं हैं तथा लीनक्स स्कूल कभी भी कैमिब्रज विश्वविधालय से संबद्ध नही रहा है। पत्राचार की अंग्रेजी संस्करण इस किताब के संलग्नक एक के रुप में लगाया गया है।
इस सम्बन्ध में डा0 सुब्रमणयम स्वामी ने रायबरेली के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष एक आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। परंतु इस सम्बन्ध में किसी डी0एम0 से न्याय की अपेक्षा करना मुशिकल ही है। डा0 स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि सोनिया गाँधी पुरातातिवक महत्व की वस्तुओं की तश्करी की दोषी हैं तथा वे इस सम्बन्ध में सभी सक्षम कदम उठाएंगे। 5
सोनिया के पिता - स्टीफानो मैनो कौन थे यह पता करना भी एक कठिन कार्य था। परंतु ''वायस आफ जम्मू एण्ड कश्मीर पत्रिका में छपे लेख के अनुसार सोनिया के पिता स्टीफानो मैनो उन लोगों मे से एक थे जो कि बैटीनो मुसोलिनी जो कि इटली के तानाशाह थे तथा जिन्होने जर्मनी के तानाशाह हिटलर से हाथ मिला रखा था, की सेना में काम किया करते थे। सोनिया के पिता का प्रमुख कार्य वामपंथियों को बांधकर उन्हे रेड़ी का तेल पीने हेतु मजबूर करना तथा रेड़ी का तेल पिलाना था। बाद मे मैनो की कार्यप्रणाली से तानाशाही शासन काफी प्रसन्न हुआ तथा उनका प्रमोशन करके उन्हे पूर्वी मोर्चे पर रुस से लड़ने भेज दिया गया था।
नौकरानी के रुप में यूनानी रेस्टारेंट में कार्य तथा राजीव गाँधी से मिलन - होटल में काम प्राप्त करने के लिए जितनी अंग्रेजी आवश्यक होती है उतनी अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त कर लेने के पश्चात सोनिया गाँधी को होटल में बच्चों को खिलाने का कार्य मिल गया। 1
राजीव गाँधी का संक्षिप्त परिचय - सोनिया के पति राजीव के बारे में हालांकि आप सभी सोचते होंगे, कि आप सभी सब कुछ जानते हैं परंतु तो भी मैं राजीव के जीवन पर प्रकाश डालना चाहूँगा। उम्मीद है कि, कुछ नयी जानकारी आपको अवश्य प्राप्त होगी। राजीव के पितामह नवाब खान जूनागढ़ गुजरात के रहने वाले थे तथा इलाहाबाद में शराब का धंधा किया करते थे। राजीव गाँधी के पिता का नाम फिरोज खान था जो कि आनंद भवन में शराब सप्लार्इ किया करते थे। कुछ लेखकों का कहना है कि इंदिरा गाँधी ने फिरोज खान से निकाह करने के पहले इस्लाम धर्म गृहण कर लिया था परंतु महात्मा गाँधी के दवाब में फिरोज खान का सरनेम बदलकर गाँधी कर दिया गया तथा बाद में उनका वैदिक विवाह कराया गया। यह शत-प्रतिशत सत्य है कि, राजीव के पिता इस्लाम धर्म को मानने वाले थे। यह अलग बात है कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हे दफनाने की जगह उनका दाह-संस्कार किया गया। दाह-संस्कार के पीछे प्रमुख कारण, इस देश की हिंदू बहूल आबादी को इस बात का एहसास कराना था कि, फिरोज खान मुसिलम नही थे। धर्म निरपेक्षता का ढिंडोरा पीटने वाला नेहरु-गाँधी खानदान इस बात से सदैव डरता रहा कि कहीं उनकी सच्चार्इ आम जनता को पता न चल जाए। (यहां मुसिलम भार्इयों को गौर फरमाना चाहिए कि हिन्दुओं को खुश करने के लिए नेहरु-गाँधी खानदान के लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं, यहां तक कि एक मुसिलम का मरने के बाद दाह-संस्कार भी कर सकते हैं।) इसके बाद हद तो तब हो गयी जब राजीव गाँधी ने लंदन में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि वे पारसी धर्म को मानने वाले हैं। जिसके माता-पिता-दादा तीनो पारसी न हों वह पारसी कैसे हो सकता है? इसका जवाब कम से कम मै तो नही दे सकता। मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि राजीव गाँधी एण्ड कम्पनी अपने को मुसिलम बताने मे शर्म महसूस करते हैं। वहीं राजीव गाँधी के पुत्र राहुल गाँधी अपने पिता से भी दस कदम आगे हैं। वे भी जनता को नही बताना चाहते कि वे कैथोलिक इसाइ हैं। यही कारण है कि उनका शिगुफा यह है कि उनका धर्म तिरंगा झंडा है।
राजीव गाँधी उच्च शिक्षा की प्रापित हेतु कैमिब्रज विश्वविधालय गये। वहां तीन वर्षों तक एक ही कक्षा में फेल होने के बाद उनका नाम काटकर उन्हे वहां से निकाल दिया गया। हो सकता है राजीव गाँधी सोनिया के प्यार में उलझने के कारण न पढ़ पाये हों या हो सकता है कोर्इ अन्य कारण इसके लिए उत्तरदार्इ रहा हो। परंतु एक ऐसे व्यकित को जो कि तीन वर्षो तक कैमिब्रज में रहकर एक कक्षा भी पास नही कर पाया उसे भारत में इस प्रकार से प्रस्तुत किया गया जैसे उनसे अधिक विद्वान व्यकित देश-विदेश में कोर्इ न हो। उन्हे मिस्टर क्लीन की उपाधि से नवाजा गया। राजीव गाँधी को पायलेट का लायसेंस कैसे प्राप्त हुआ, इस पर भी शोध किया जा सकता है, मुझे उम्मीद है कि बहूत से रहस्य के पर्दे वहां से भी उठेंगे।
सोनिया व राजीव के बीच प्रेम सम्बन्धों का प्रारंभ - राजीव गाँधी भारतीय पिं्रस आफ वेल्स से जब सोनिया गाँधी मिली उस समय वो एक 18 वर्ष की जवान सुदर लड़की थी जो कि वेरासिटी रेस्टारेंट में नौकरानी के रुप में कार्य करती थी।
सोनिया के अपने शब्दों में ''जैसे ही हमारी नजरें पहली बार मिलीं। मुझे महसूस हुआ कि मेरा दिल धड़क रहा है ............. जहां तक मेरा सम्बन्ध है। यह पहली नजरों में ही प्यार था। (एस आवर आर्इस मेट फार द फस्ट टार्इम। आर्इ कुड फील मार्इ हर्ट पाउंडिंग। ...... एस फार एस आर्इ वास कन्सर्नड। इट वाज लव एट फस्ट सार्इट) सोनिया ने अपने परिवार के लोगों को बाद में बताया ''वो वही राजकुमार है जिसकी कल्पना मैने हमेशा से की थी। (ही इज द ब्लू प्रिंस आर्इ आलवेज डिम्ट आफ)
सोनिया ने अपने स्वयं के वक्तव्य में यह बात स्वीकार की है कि वह किसी राजकुमार की तलाश में थी। अब मुíे का प्रश्न यह है कि ये ब्लू प्रिंस रेस्टारेंट में कैसे पहुँचे यह एक खोज का विषय है। इस सम्बन्ध में जो कोर्इ भी थोड़ा बहूत प्रकाश डालने की सिथति में थे वे भगवान को प्यारे हो गये हैं।
यह आँखों का मिलन कैसे प्यार के रुप में परवान चढ़ा यह जवाब देने की सिथति में कम से कम मै नही हूँ। राजीव गाँधी को रेस्टारेंट में कौन लेकर गया था यह हमेशा रहस्य ही रहेगा। मै ऐसा क्यों कह रहा हूँ शायद आप पूरी किताब पढ़ने के बाद समझ पायें।
अगर उनकी मुलाकात कैमिब्रज विश्वविधालय में कोर्इ होना बताये तो यह भी एक शोध का विषय हो सकता है कि जब सोनिया कैमिब्रज विश्वविधालय की छात्रा ही नही थीं (हालांकि उन्होने ऐसी जानकारी संसद में पूर्व में दे रखी थी) तो फिर वे वहां क्या करने जातीं थी? खैर इस पर टीका-टिप्पणी करने की आवश्यकता इसलिए नही है, क्योंकि यह विषय उतना महत्वपूर्ण नही है।
सोनिया गाँधी के पाकिस्तानी एजेंट होने के संदेह वाले व्यकित से सम्बन्ध - जैसा की उपर वर्णित किया जा चुका है अंग्रेजी सीखने के बाद सोनिया नौकरानी के रुप में वेरासिटी रेस्टारेंट में कार्य करने लगी। राजीव गाँधी से उसकी मुलाकात 1965 में उस वक्त हुर्इ जब वो रेस्टारेंट में गये हुए थे। उस समय राजीव कैमिब्रज विश्वविधालय के छात्र हुआ करते थे। परंतु वहां की कठिन पढ़ार्इ वे लंबे समय तक नही झेल पाये। अत: 1966 में वे लंदन पहुँच गये। जहां वे कुछ समय तक इमिपरियल कालेज आफ लंदन में कुछ समय के लिए छात्र रहे। इसी समय सोनिया भी लंदन आ गयी तथा डा0 सुब्रमण्यम स्वामी को प्राप्त सूचना के अनुसार वहां उसे सलमान थासिर नाम के एक सख्श के पास काम मिल गया। जो कि एक लाहौर का रहने वाला बड़ी संपत्ति का मालिक था जिसका आयात निर्यात का कारोबार था तथा जिसका मुख्यालय दुबर्इ में था। वो अपना अधिकतर समय लंदन में ही काटा करता था। यह पूरा विवरण अगर ध्यान से पढ़ा जाए तो किसी आर्इ0एस0आर्इ0 एजेन्ट का ही जान पड़ता है। 1
सोनिया द्वारा नौकरानी रहते हुए राजीव गाँधी को उधार दिया जाना - आप शायद विश्वास न कर पाएं कि एक होटल मे काम करने वाली मामूली सी लड़की भारतीय प्रधानमंत्री के पुत्र को पैसा उधार दे। परंतु प्राप्त जानकारी के अनुसार सोनिया के पास इतना धन आ गया था कि उसने राजीव गाँधी को पैसा उधार दिया। शायद राजीव को जो पैसा घर से दिया जाता था वो उससे ज्यादा खर्च करते थे। इंदिरा गाँधी ने इस बात की चर्चा स्वयं डा0 सुब्रमण्यम स्वामी से एक चाय मुलाकात के दौरान की थी। राजीव गाँधी का संजय गाँधी को पत्र जिसमें उसने इस उधार की बात को स्वीकार किया था तथा इस उधार से बाहर निकालने की बात कही थी भी महत्वपूर्ण हैं। यहां आपको यह बताता चलूं कि उस समय भी संजय गाँधी के पास पर्याप्त धन हुआ करता था। 1
सोनिया के लंदन में अन्य पुरुष मित्र - ऐसा नही है कि केवल राजीव गाँधी ही सोनिया से मिलने वाले उनके पुरुष मित्र थे। उनसे मिलने वाले अन्य पुरुष मित्रों में माधवराव सिंधिया तथा एक जर्मन पुरुष स्टीगलर प्रमुख थे जो कि सोनिया के घनिष्ठ मित्रों में थे। सोनिया गाँधी की माधवराव सिंधिया से मित्रता राजीव से विवाह के पश्चात भी लंबे समय तक जारी रही। 1
माधवराव सिंधिया व सोनिया गाँधी का कार एक्सीडेंट - 1982 मे आर्इ0आर्इ0टी0 गेट दिल्ली के पास माधवराव सिंधिया की कार का एक्सीडेंट हो गया उस समय सोनिया मात्र दूसरी यात्री कार में उपलब्ध थी। जिस समय कार का एक्सीडेंट हुआ उस समय रात्रि के दो बज रहे थे। दोनो को काफी चोटें लगी थी। एक आर्इ0आर्इ0टी0 का छात्र जो कि रात्रि में पढ़ार्इ कर रहा था वो बाहर काफी पीने आया था। उसने इन्हे कार से बाहर निकाला तथा सोनिया गाँधी को जो की काफी जख्मी थीं उनकी इच्छा पर प्रधानमंत्री निवास भेज दिया तथा माधवराव सिंधिया जिनका की पैर टूट गया था तथा काफी चोट आर्इ थी तथा कुछ भी कहने की सिथति में नही थे को दिल्ली पुलिस ने आकर अस्पताल भेज दिया। माधवराव सिंधिया सोनिया गाँधी के धीरे-धीरे आलोचक होते जा रहे थे तथा उन्होने अपने निकटवर्ती मित्रों से सोनिया के सम्बन्ध मे संदेह जाहिर किया था। 1 वायु दुर्घटना मे उनकी रहस्यपूर्ण परिसिथतियों में मौत एक गंभीर घटना है। अब तो गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने भी यह बताया है कि उनकी वायु दुर्घटना महज एक हादसा नही थी। 4
इंदिरा के द्वारा राजीव का सोनिया से शादी का विरोध - जिस प्रकार से जल्दबाजी में राजीव गाँधी द्वारा सोनिया से ओरबासानो की चर्च में विवाह किया गया वह संदेहपूर्ण तो है परंतु कुल मिलाकर वह उनका व्यकितगत मामला था जिसका की सार्वजनिक जीवन पर कोर्इ असर पड़ने नही जा रहा परंतु वह बात जो कि सार्वजनिक महत्व की है वह यह कि इंदिरा गाँधी स्वयं इस विवाह के सख्त खिलाफ थीं तथा वे इस विवाह के लिए तभी तैयार हुर्इं जब सोवियत समर्थक श्री टी0एन0 कौल ने इंदिरा गाँधी को भारत रुस मैत्री संघी प्रगाढ़ करने के लिए इस विवाह के लिए हां कहने के लिए दवाब डाला। अब यह आसानी से समझा जा सकता है कि श्री टी0एन0 कौल ने ऐसा कोर्इ दवाब डाला था तो उसके पीछे सोवियत संघ का आदेश अवश्य रहा होगा। अगर हम पिछले दो वषोर्ं के घटनाक्रम को देखें तो यह बात और स्पष्ट हो जाती है कि सोनिया के रुस से विशेष सम्बन्ध हैं। इसकी पुष्टी काँग्रेस सरकार द्वारा सोवियत संघ से सामान की खरीद में भारी रिश्वत खाने से लेकर सोनिया गाँधी द्वारा बिना किसी विशिष्ट हैसियत के रुस की यात्रा करने से होती है। 1
सोनिया राजीव विवाह - सोनिया गाँधी राजीव गाँधी से कहां मिली होंगी इस सबध में अनुमानों को उपर वर्णित किया जा चुका है। राजीव से जब उनका मिलन हुआ तो उनसे प्यार कर बैठीं। अगर हम जयललिता के शब्दों को उधार लें तो ज्यादा अच्छा होगा जिनके अनुसार सोनिया मैनो नामक महत्वाकांक्षी लड़की, जिसकी श्रेणी का निर्धारण नही किया जा सकता ने भारत के प्रिंस आफ वेल्स को अपने प्यार के जाल में फाँस लिया। ये भारतीय प्रिंस आफ वेल्स वहां पढ़ार्इ मे नही बलिक विदेशी लड़कियों की तलाश में अपना धन बरबाद कर रहे थे। प्यार का बुखार भारतीय प्रिंस आफ वेल्स को इतना तगड़ा था की तीन वषोर्ं तक लगातार उन्होने कैमिब्रज में फेल होने की हैटि्रक बनार्इ तथा उसके बाद नाम काटकर वहां से भारतीय प्रिंस आफ वेल्स को भगा दिया गया। खैर चाहे पड़ार्इ लिखार्इ में शून्य ही साबित हुए हो परंतु प्यार के क्षेत्र में उन्होन एक ऐसी लड़की से प्यार करके नये कीर्तिमान स्थापित किये जो कि न तो हिन्दी जानती थी न ही अंग्रेजी। हालांकि अंग्रेजी सीखना एक स्थानीय रात्रिकालीन कक्षाओं में उसने प्रारंभ कर दिया था।
जब इंदिरा गाँधी को पता चला कि उनके होनहार-वीर्यवान उर्फ भारतीय प्रिंस आफ वेल्स ने अपने लिए राजकुमारी ढूंढ़ ली है तो उन्होने मोहम्मद युनुस को लड़की को देखने के लिए भेज दिया। आखिर यह मोहम्मद युनुस कौन हैं? इनके सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा करना इस किताब में असंभव है परंतु आपकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए मोहम्मद युनुस का संक्षिप्त परिचय आपको अवश्य देता चलूं।
मोहम्मद युनुस ने अपनी किताब 'परसन पैसन एण्ड पालटिक्स में बताया है कि संजय गाँधी की परवरिश इस्लामी रीतिरिवाज के अनुरुप की गयी थी। इस्लामी तरीके से संजय गाँधी की परवरिश क्यों की गयी इसके लिए उन्होने कुछ कारण भी गिनाएं हैं जो कि हजम नही होते। जब संजय गाँधी की मृत्यु हुर्इ तो सबसे ज्यादा रोने वाला व्यकित कोर्इ और नही बलिक मोहम्मद युनुस ही थे। मोहम्मद युनुस के लड़के तथा संजय गाँधी में भार्इयों के समान प्यार था। संजय गाँधी का विवाह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के घर से नही बलिक मोहम्मद युनुस के घर से हुआ था। यह भी एक बहू प्रचारित तथ्य है कि राजीव गाँधी के जन्म के बाद फिरोज व इंदिरा अलग अलग रहने लगे थे। इन्ही सब कारणों की वजह से बहूत से लोग संजय गाँधी को मोहम्मद युनुस के पुत्र के समान मानते हैं। अब पाठक समझ गये होंगे कि इंदिरा गाँधी ने मोहम्मद युनुस को सोनिया गाँधी को देखने को क्यों भेजा था।
सोनिया का विवाह राजीव गाँधी से 1968 में हुआ था। सोनिया भारत की नागरिक विवाह के पंæह वर्ष उपरांत 30 अप्रैल 1983 को बनी। राजीव गाँधी की मौत के बाद सोनिया गाँधी राजनीति से बाहर ही रहीं तथा उनका राजनीति में पदार्पण 1998 में हुआ। इस अफवाह से सोनिया ने आज तक इंकार नही किया है कि उन्होने इटली की नागरिकता नही छोड़ी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि भारत का संविधान दोहरी नागरिकता प्रदान नही करता।
सोनिया गाँधी के रुस की गुप्तचर संस्था के0जी0बी0 सें सम्बन्ध - सोवियत संघ जो कि शीतयुद्ध के दौर में भारत से सम्बन्ध सुधारना चाहता था तथा भारत को अपने खेमें में लाने के लिए प्रयासरत था उस समय रुस की गुप्तचर संस्था भारत कि प्रधानमंत्री इंदरागाँधी के पुत्र पर नजर न लगाये बैठी होगी संभव नही दिखता। तथा जब सोवियत संस्था को इस बात का पता चला होगा कि सोनिया स्टीफानो मैनो जो कि सोवियत समर्थक व्यकित है की पुत्री है तो उन्होने उसका इस्तेमाल करने में कोर्इ कसर नही छोड़ी होगी। चंूकी सोनिया का प्रयोग करके के0जी0बी0 आसानी ने प्रधानमंत्री के निवास की सभी गतिविधियों पर न केवल नजर रख सकती थी बलिक उसका प्रयोग भी कर सकती थी। इससे स्पष्ट हो जाता है कि सोनिया राजीव सम्बन्ध को मजबूती प्रदान करना सोवियत हितों के अनुकूल था। 1
सोनिया का राजीव से विवाह होने के बाद इंदिरा गाँधी की सरकार ने बहूत से रक्षा सौदे सोवियत संघ के साथ किये तथा भरपूर कमीशन प्राप्त किया।
गुप्तचरों का सिकिकम में सक्रिय होना - सोनिया गाँधी के इतिहास की बहूत सी बातें काफी मसालेदार तथा सतर्क कर देने वाली हैं। यह भी कहा जाता है कि सोनिया गाँधी रुस की गुप्तचर संस्था के0जी0बी0 तथा इटली की गुप्तचर संस्था ओपेस डार्इ का अमेरिका की सी0आर्इ0ए0 के कारनामों का संयुक्त जवाब हो सकती हैं। आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका की गुप्तचर संस्था ने क्या किया? आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे तत्कालीन पड़ोसी देश सिकिकम में पूर्व राजा ने अपने राजकुमार को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए एक अमेरिकी महिला मिस कुक को नियुक्त किया था। असलियत में मिस कुक अमेरिका की गुप्तचर संस्था सी0आर्इ0ए0 के लिए काम किया करती थी। मिस कुक पढ़ाते पढ़ाते अपने छात्र से अपनी सुविधा तथा आवश्यकता के अनुरुप प्यार कर बैठीं। जिसकी परिणीति दोनो के विवाह के रुप में सामने आर्इ। श्रीमति कुक ने राजकुमार के बच्चों को भी जन्म दिया। लगभग दो दशक बाद सिकिकम के राजा को पता चला कि श्रीमति कुक सी0आर्इ0ए0 की एजेंट थीं तथा सी0आर्इ0ए0 के लिए जासूसी कर रही थीं। श्रीमति कुक को तलाक देकर सिकिकम से बाहर निकाल दिया गया।
डा0 येवगेनी एल्बेटस का स्कीवीटजर इलुस्ट्रेट समाचार पत्रिका में पर्दाफास - स्वीटजरलैंड की प्रसिद्ध प्रत्रिका स्केविटजर इलुस्ट्रेट के नवम्बर 1991 के अंक में छपी खबर के अनुसार राजीव गाँधी के पास स्वीस बैंक में लगभग 2 बिलियन डालर रुपये नंबर से चलने वाले खाते में मौजूद था। यह खाता राजीव के मरने पर सोनिया को प्राप्त हो गया। डा0 ऐवगेनिया एल्बेटस जो कि हावर्ड विश्वविधालय से पी0एच0डी0 उपाधी प्राप्त हैं एक प्रसिद्ध रुसी विदुषी तथा पत्रकार हैं। उन्होने वे सभी दस्तावेज स्वयं देखी हैं जिसमें तमाम रक्षा सौदों की जानकारी थी तथा उसमें के0जी0बी0 का क्या योगदान रहा इसका वर्णन है। उन्होने अपनी किताब, ''द स्टेट विदइन ए स्टेट, द के0जी0बी0 इन सोवियत यूनियन में उन फार्इलों का नंबर तक दिया है जो कि इन सूचनाओं को लिए हुए हैं। भारत सरकार अगर चाहे तो इन दस्तावेजों को रुस की सरकार से आग्रह करके मांग सकती है। 1
जब 1992 में रुस की सरकार से एल्बेटस के द्वारा जो भंडाफोड़ किया गया था उसके सम्बन्ध में पूछा गया तो उन्होने अपने आधिकारिक प्रवक्ता के द्वारा यह बात स्वीकार की थी कि इस प्रकार के सौदों में धन दिया जाता था क्योंकि यह सोवियत हित के अनुकूल था। यह बात 1992 में हिंदू समाचार पत्र में प्रकाशित भी हुर्इ थी। 1
जब 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया उस समय सोनिया गाँधी के लिए परिसिथतियाँ पूर्णत: बदल गयी। उनके संरक्षक समाप्त हो गये। विघटन के बाद जो रुस बचा वह वित्तीय दुर्दशा एवं बूरी हालत में था। 1
वर्तमान रुसी राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन पुराने के0जी0बी0 के अधिकारी हैं। जैसे ही मनमोहन सिंह सरकार ने कार्यभार संभाला वैसे ही रुस सरकार ने अपने डिप्लोमेट को वापस बुलाकर एक ऐसे व्यकित को भारत का राजदूत बनाकर भेज दिया जो कि 1970 में भारत में के0जी0बी0 के अधिकारी के रुप में तैनात था। अगर डा0 एल्बेटस ने जो कुछ कहा है वह सहीं है तो जरुर यह राजदूत सोनिया के विषय में सबकुछ जानता होगा। यह भी हो सकता हो कि सत्तर के दशक में वही सोनिया को नियंत्रित करता रहा हो। नयी भारतीय सरकार में जिसमें कि सोनिया गाँधी की हैसियत सुपर प्रधानमंत्री की है किसी भी तरह से जोखिम उठाने की सिथति में नही है। ऐसी परिसिथति में भारत गंभीर असुरक्षा वातावरण में जी रहा है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण तब देखने को मिला जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत यात्रा पर परमाणु समझौता भारत के साथ हस्ताक्षर किया। स्वाभाविक है अमेरिकी राष्ट्रपति को यह आशा रही होगी कि भविष्य में भारत में परमाणु सौदों में उन्हे वरियता मिलेगी। परंतु मेहनत करे मुर्गा व अंडा खाये फकीर की तर्ज पर रुस के प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आये तथा परमाणु र्इंघन आपूर्ती का ठेका लेकर चले गये। देखने में ऐसा लगता है कि रुस की मैत्री की वजह से भारत को भारी लाभ हुआ होगा परंतु वास्तविकता कुछ और ही है। वास्तविकता यह है कि रुस ने भारत को बहूत ही घटिया स्तर का सामान बेचा है जिसमें मिग विमान प्रमुख हैं। ये मिग विमान युद्ध के समय अपनी कुशलता को लेकर नही बलिक अपनी दुर्घटना को लेकर ही सदैव समाचार में बने रहते हैं। वास्तविकता यह है कि अब तक लगभग सात सौ मिग विमान दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं तथा यह रुस के खरीदे गये कुल विमानों की संख्या के चालीस प्रतिशत से अधिक है। आज इन मिग विमानों को उड़ते ताबूत के नाम से देश में ज्यादा जाना जाता है।
मैनो परिवार का रातो रात अरबों का असमी बन जाना - सोनिया विवाह के बाद भारतीय नियम कानूनों को ताक पर रखकर पैसा बनाने में जुट गयी। वो मैनो परिवार जो कि गरीबी के फाँके झेल रहा था तथा जिनके यहां की लड़की पैसा कमाने के लिए अपना देश इटली छोड़कर इंगलैंड आकर नौकरानी का कार्य कर रही थी वह मैनो परिवार सोनिया की राजीव से विवाह के बाद रातों रात अरब पति बन गया।
सबसे अंतिम सत्य यह है कि सोनिया को जिस दिन लगेगा कि उसको भारत में खतरा है उसी दिन वह इटली वापस भाग सकती है। पेरु के पूर्व राष्ट्रपति अलबर्ट फुजीमोरी जो कि अपने को सोनिया की तरह ही पेरु देश का परम नागरिक बताते नही थकते थे उनके विरुद्ध जैसे ही भष्टाचार के आरोप लगे तथा कार्यवाही प्रारंभ की गयी वे भागकर जापान चले गये। तथा अपने को जापान का नागरिक बताने लगे। 1
वे लोग जिन्हे भारत से कोर्इ लगाव नही है वो भारत की संपदा को कभी भी लूट कर भाग सकते हैं। मोहम्मद गौरी, नादिर शाह तथा बि्रटिश र्इस्ट इंडिया कंपनी का उदाहरण हमारे सामने है। परंतु सोनिया गाँधी कुछ ज्यादा समझदार है परंतु देश को लूटने के मामले में किसी भी तरह से कम नही। जब इंदिरा व राजीव प्रधानमंत्री थे उस समय ऐसा कोर्इ दिन नही जाता होगा जब बिना जाँच के डिब्बों में भर-भर कर सामान दिल्ली तथा चेन्नर्इ अंतर्राष्ट्रीय हवार्इ अडडे से रोम न जाता होगा। यह समान एयर इंडिया तथा एलिटेलिया जहाजों से जाता था। काँग्रेस के नेता अर्जन सिंह पहले मुख्यमंत्री के रुप में तथा बाद में केन्æीय मंत्री के रुप में सोनिया के कायोर्ं को अंजाम दिया करते थे। यहां से पुरातातिवक महत्व की बहूत सी वस्तुओं को पहले इटली की दो दुकानों जिनका संचालन सोनिया गाँधी की बहन अनुस्का उर्फ अलेजांड्रा किया करती थी में पहुचाया जाता था। इन दुकानों के नाम रिवोल्टा में एटनिका तथा ओरबासानो में गणपति नाम के थे। यहां से झूठा बिल बनाकर इन सामानों को सोथबीज तथा क्रिस्चीज को बेच दिया जाता था तथा इन्हे लंदन नीलामी द्वारा बिक्री हेतु भेज दिया जाता था। इसमें से कुछ धन राहुल गाँधी के नेशनल वेस्टमिनिस्टर बैंक तथा हांगकांग एन्ड संघार्इ बैंक के लंदन सिथत खाते में जमा हो जाता था। परंतु इसमे से ज्यादातर धन केमेन द्वीप सिथत बैंक आफ अमेरिका के गाँधी परिवार के खाते में चला जाता था। 1
राहुल के खर्चे के लिए तथा उसकी एक वर्ष की टयूशन फीस जिस वर्ष वह हावर्ड में था केमेन द्वीप सिथत बैंक के खाते से ही दी गयी थी। गाँधी मैनो परिवार के लोग किस प्रकार के लोग हैं जो कि उस भारत माता का ही हाथ काट रहें हैं जिनसे उन्हे भोजन प्राप्त हो रहा है। हम इस प्रकार के लालची चोरों पर किस तरह विश्वास कर सकते हैं। 1