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Wednesday, 15 April 2020

what world will we live in after this storm passes

हमें खुद से सवाल पूछना होगा, इस तूफान के गुजर जाने के बाद हम कैसी दुनिया में रहेंगे?

हमें खुद से सवाल पूछना होगा, केवल यही सवाल नहीं कि हम इस संकट से कैसे उबरेंगे, बल्कि यह सवाल भी कि इस तूफान के गुजर जाने के बाद हम कैसी दुनिया में रहेंगे. तूफान गुजर जायेगा, जरूर गुजर जायेगा, हम में से ज्यादातर जिंदा बचेंगे लेकिन हम एक बदली हुई दुनिया में रह रहे होंगे... ये महत्वपूर्ण बात कहने वाले शख्स हैं प्रो. युवाल नोहा हरारी.
मगर अब हम उस दौर में आ गये हैं जब कम खाने की बजाये दुनिया में ज्यादा खाकर मरने वालों की संख्या ज्यादा है. कुपोषण से ज्यादा लोग मोटापे और उससे होने वाली बीमारी से मरते हैं. यहीं वो लिखते हैं जिस युग में मानव जाति प्राकृतिक महामारियों के सामने असहाय हुआ करती थी वह युग शायद अब बीत गया है मगर संभव है उसकी याद आये.
कुछ सालों के अंतराल में ये महामारियां आती रहीं हैं और हमारी सभ्यता पर हमारे इतराने के अहंकार को चूर चूर कर चली जातीं हैं. जब हम राष्ट्रवाद के नशे में डूब रहे हैं तब ये छोटा सा वायरस आकर बताता है कि कहां अपने को सीमाओं के दायर में बांट कर इतरा रहे हो. हम तो वैश्विक हैं ना हम लाख कहें कि ये बीमारी इसने फैलायी या उसने फैलायी मगर ये वायरस का यही खास गुण ही है कि पता ही नहीं चलता कि वायरस लेकर घूमने वाला शख्स बीमार है.


वो अंजाने में बीमारी बांटता है और संक्रमित लोगों की संख्या कई गुना बढ़ता जाता है. कोई धर्म और संप्रदाय किसी को बीमारी नहीं बांटते. दूसरा इस बीमारी से निपटने का तरीका भी बहुत अलग है जो लोगों को इस बीमारी को छिपाने को मजबूर करते हैं. बीमार शख्स को तो एकांतवास में भेजा ही जाता है फिर उसके परिवार और फिर उसका पड़ोस सभी के साथ ये क्रम दोहराया जाता है.जो 21वीं सदी में धरती से मानव जाति का अस्तित्व ही मिटा सकते हैं. इसलिये जरूरी है कि कोरोना से तो कड़ाई से निपटे मगर रोगियों से उदारता से पेश आयें फिर वो चाहे किसी भी धर्म जाति या संप्रदाय के हों. इस महामारी से तो हम जीत जाएंगे ही इस बात का गवाह इतिहास है. मगर समाज में वैमनस्यता घर कर गयी तो देश का बंटवारा ही होता है इस बात की गवाही भी इतिहास ही देता है.

Wednesday, 24 April 2019

जम्मू कश्मीरः LoC ट्रेड रूट में शामिल रहने वाले 10 आतंकियों की हुई पहचान

जम्मू कश्मीरः LoC ट्रेड रूट में शामिल रहने वाले 10 आतंकियों की हुई पहचान
इन सभी पर आतंकी ट्रेडिंग कंपनी बना कर कश्मीर में टेरर फंडिंग में शामिल होने का भी शक है.
सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू कश्मीर के ऐसे 10 आतंकियो की पहचान की है जो एलओसी ट्रेड रूट में शामिल है.
1.मेहराजुद्दीन भट्ट (फिलहाल पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा
2. नजीर अहमद भट्ट (पाकिस्तान),
3.बसरत अहमद भट्ट (पाकिस्तान),
4.शौकत अहमद,
5.नूर मोहम्मद,
6.खुर्शीद,
7. इम्तियाज अहमद,
8.आमिर,
9.एजाज रहमानी
10.और शब्बीर इलाही का नाम शामिल है.

Friday, 22 March 2019

बलिदान दिवस विशेष

भगत सिंह की फांसी रोकने के लिए बहुत कोशिश की थी सुभाषचंद्र बोस ने.. पर कोई था, जिसने नहीं दिया उनका साथ

बहुत कम लोग ही जानते होंगे ये पूरा इतिहास, शायद ही कोई जान पाया हो कि भगत सिंह के बलिदान की इच्छा के बाद भी बहुत ऐसे भी लोग थे जिन्होंने उनकी फांसी को रोकने के लिए हर संभव कोशिश की थी ..उनका नाम भी स्वर्णिम अक्षरों के योग्य था भारत के इतिहास में , पर उसी समय तमाम ऐसे भी थे जो नहीं चाहते थे कि वीर शिरोमणि भगत सिंह मुक्त हों.. वो वचनबद्ध थे अंग्रेजो के प्रति . जानिए वो सच्चा इतिहास जो महान सुभाषचंद्र बोस जी के प्रति आप के मन मे और अधिक श्रद्धा को बढ़ाएगा और नतमस्तक करेगा उस वीर के लिए जो चिंतित था एक अन्य वीर के लिए ..
सुभाष चंद्र बोस की पहली मुलाकात गांधी से 20 जुलाई 1921 को हुई थी। गांधी जी की सलाह पर वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए काम करने लगे। वे जब कलकत्ता महापालिका के प्रमुख अधिकारी बने तो उन्होंने कलकत्ता के रास्तों का अंग्रेजी नाम हटाकर भारतीय नाम पर कर दिया। भारत की आजादी के साथ-साथ उनका जुड़ाव सामाजिक कार्यों में भी बना रहा। बंगाल की भयंकर बाढ़ में घिरे लोगों को उन्होंने भोजन, वस्त्र और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का साहसपूर्ण काम किया था।
भगत सिंह को फांसी की सजा से रिहा कराने के लिए वे जेल से प्रयास कर रहे थे। उनकी रिहाई के लिए उन्होंने गांधी से बात की और कहा कि रिहाई के मुद्दे पर किया गया समझौता वे अंग्रेजों से तोड़ दें। इस समझौते के तहत जेल से भारतीय कैदियों के लिए रिहाई मांगी गई थी। गांधी ब्रिटिश सरकार को दिया गया वचन तोड़ने के लिए राजी नहीं हुए, जिसके बाद भगत सिंह को फांसी दे दी गई। इस घटना के बाद वे गांधी और कांग्रेस के काम करने के तरीके से बहुत नाराज हो गए थे।
अपने सार्वजनिक जीवन में सुभाष को कुल 11 बार कारावास की सजा दी गई थी। सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 को छह महीने का कारावास दिया गया था। 1941 में एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें कलकत्ता की अदालत में पेश होना था, तभी वे अपना घर छोड़कर चले गए और जर्मनी पहुंच गए। जर्मनी में उन्होंने हिटलर से मुलाकात की। अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के लिए उन्होंने आजाद हिन्द फौज का गठन किया और युवाओं को ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा भी दिया।

अभी तक फिलहाल तमाम पार्टियाँ और तमाम नेता इस मौके पर न जाने की बात कर रहे हैं

जानिये पाकिस्तान डे पर भारत की किस पार्टी के किस नेता को मिला है न्योता



इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान ने अपने देश के एक बड़े कार्यक्रम के लिए भारत के गिने चुने लोगों को बुलाया है . अभी तक फिलहाल तमाम पार्टियाँ और तमाम नेता इस मौके पर न जाने की बात कर रहे हैं लेकिन पाकिस्तान अपनी कोशिश जारी रखते हुए उनको बुलाने की हर सम्भव कोशिश कर रहा है जिनको वो अपना शुभचिंतक समझता है . इस बार पकिस्तान ने पाकिस्तान डे के लिए चुनाव है कांग्रेस पार्टी के एक ऐसे नेता को जो अब तक चर्चा में नही था .ज्ञात हो कि पाकिस्तान ने अपने ख़ास पर्व पाकिस्तान डे पर दिल्ली प्रदेश के यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष जैन-ए-आलम को बाकायदा अपने उच्चायोग के माध्यम से निमंत्रण भेजा है. पाकिस्तान में ये दिन आज ही अर्थात 23 मार्च को मनाया जाता है . ये कार्यक्रम दिल्ली में ही मनाया जाता है जिसको आयोजित पाकिस्तानी दूतावास करता है .
यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि इस से पहले भारत ने पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में कड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी नाकाम हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वो सीमा पर लगातार सीजफायर तोड़ रहा है। लेकिन अब सवाल ये बनता है कि आख़िरकार कांग्रेस के नेता जैन ए आलम का पाकिस्तान से ऐसा क्या रिश्ता है जो उनको न्योता दिया गया जबकि कई बड़े नामो को नहीं बुलाया गया .

Thursday, 21 March 2019

ED को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ शाह और अन्य से पूछताछ

ED को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ शाह और अन्य से पूछताछ 


की अनुमति दे दी. मामले में लश्करे तैयबा प्रमुख और 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की संलिप्तता थी
आतंक के वित्तपोषण मामले में एनआईए ने शाह, वताली और कपूर को गिरफ्तार किया था और वे सभी यहां तिहाड़ जेल में हैं.
आतंक के वित्तपोषण मामले में एनआईए ने शाह, वताली और कपूर को गिरफ्तार किया था और वे सभी यहां तिहाड़ जेल में हैं. एनआईए ने पूर्व में आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इसमें हिज्बुल मुजाहिद्दीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का भी नाम है. कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का आरोप है.
एजेंसी ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी सईद और सलाहुद्दीन के अलावा 10 अन्य पर आपराधिक साजिश और देशद्रोह के साथ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के सख्त प्रावधान के तहत आरोप लगाए हैं. एजेंसी ने हुर्रियत नेताओं पर सईद, सलाहुद्दीन और उनके पाकिस्तानी आकाओं से मिले निर्देश और मागदर्शन के तहत काम करने का आरोप लगाया है. उन पर हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू करने की साजिश रचने का भी आरोप है.

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने गुरुवार को पुलवामा आतंकी हमले को लेकर विवादित बयान दिया

रामगोपाल यादव का विवादित बयान, 'पुलवामा हमला वोट पाने के लिए की गई एक साजिश है'


यादव ने अपने बयान में कहा कि अगर केंद्र में सरकार बदली तो हमले के प्रकरण की जांच होगी और बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे.
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने गुरुवार को पुलवामा आतंकी हमले को लेकर विवादित बयान दिया. उन्होंने 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले को साजिश करार दिया ताकि वोट पाए जा सके. वहीं, सीएम योगी ने यादव के बयान पर पलटवार किया है.
यादव ने अपने बयान में कहा कि अगर केंद्र में सरकार बदली तो हमले के प्रकरण की जांच होगी और बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे. होली मिलन समारोह के अवसर पर यादव ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "अर्ध सैन्य बल सरकार से नाराज हैं. वोट के लिए जवान मार दिए गए. जम्मू और श्रीनगर के बीच हाईवे पर कोई चेकिंग नहीं थी. उन्हें (सीआरपीएफ के जवानों को) साधारण बस से भेजा गया. यह सब षड़यंत्र का हिस्सा था. मैं अभी इस पर और बात नहीं करना चाहूंगा लेकिन सरकार बदल गई तो इस पर जांच होगी और बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे."

Friday, 15 February 2019

पुलवामा’ के जख्म पर चीन ने छिडका नमक, दे रहा जिहादी आतंकी मसूद का खुलेआम साथ

पुलवामा’ के जख्म पर चीन ने छिडका नमक, दे रहा जिहादी आतंकी मसूद का खुलेआम साथ



पुलवामा में हुए आतंकी हमले में ४० से ज्यादा भारतीय सैनिक हुतात्मा हुए है । जैश-ए-महंमद ने स्वयं इसका दायित्व लिया है, जिससे यह साफ दिख रहा है की जैश एक आतंकवादी संगठन है । इतने सबूत होनेपर भी चीन खुलेआम जिहादी आतंकवादी मसूद का साथ देकर भारत के जख्मोंपर नमक छिडक रहा है । अब सभी राष्ट्रप्रेमी नागरिकों को चीन के इस भारत-विरोध का उत्तर देते हुए चीन के वस्तुओं का संपूर्ण बहिष्कार करना चाहिए
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आत्मघाती हमले की चीन ने निंदा तो की है लेकिन इस हमले में शामिल आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का साथ नहीं छोड़ा है। चीन भारत के संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के तहत अजहर को वैश्विक आतंकी सूची में डालने के प्रयासों को लगातार विफल करता रहा है। इस जघन्य आतंकी हमले के बाद भी पेइचिंग ने अजहर का ही साथ देते रहने का फैसला किया है और भारत की अपील का साथ देने से फिर से इनकार किया है। बता दें कि पुलवामा आत्मघाती आतंकी हमले में CRPF के 38 जवान शहीद हुए हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने शुक्रवार को कहा, ‘चीन को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की जानकारी मिली है। हमें इस हमले से स्तब्ध हैं। हम शहीदों के परिवारवालों के प्रति संवेदना जताते हैं। हम किसी भी प्रकार के आतंकवाद की निंदा करते हैं। हमें उम्मीद है कि इस क्षेत्र के देश आतंकी खतरे से निपटने के लिए आपसी सहयोग करेंगे और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता को बनाए रखेंगे।’

शुआंग से जब अजहर को वैश्विक आतंकियों की सूची में डालने के बारे में जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘जहां तक इस मुद्दे के लिस्टिंग का सवाल है, मैं आपको कह सकता हूं कि सुरक्षा परिषद की 1267 कमिटी ने लिस्टिंग और आतंकी संगठनों पर अपनी प्रक्रिया और शर्तें साफ कर दी हैं। जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची मैं शामिल किया गया है। चीन इस मसले का जिम्मेदारपूर्ण तरीके से हैंडल करना जारी रखेगा।’

अजहर पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की मांग करते हुए भारत ने कहा, ‘हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सभी सदस्यों से जैश-ए-मोहम्मद चीफ अजहर समेत आतंकियों की लिस्ट के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 सैंक्शंस कमिटी के तहत आतंकी घोषित करने के लिए समर्थन देने की फिर अपील करते हैं। हम पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों से संचालित आतंकी संगठनों को भी बैन करने की मांग करते हैं।’ लेकिन UNSC का स्थायी सदस्य चीन ने भारत की इस मांग को समर्थन देने से फिर से इनकार किया है।

Thursday, 20 December 2018

जो अंसारी पाकिस्तान की जेल से बाहर आया उस पर नजर है खुफिया एजेंसियों की… सवाल ये कि यही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं ?

जासूसी के मामलों में पकड़े गए कुछ अन्य भारतीय कैदियों के नाम व सजा
— गोपाल दास आरोप जासूसी, सजा हुई 24 वर्ष
— सुरजीत सिंह उर्फ मक्खन सिंह आरोप जासूसी, सजा हुई 22 वर्ष
— किरपाल सिंह आरोप जासूसी, पाकिस्तान की जेल में हुई मौत
— भानूदास काराले आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष
— रामराज आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष


हामिद अंसारी, ये पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी नहीं है बल्कि वो हामिद अंसारी है जो जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था तथा जिसे हाल ही में पाकिस्तान ने छोड़ा है. हामिद अंसारी पाकिस्तान से वापस हिंदुस्तान तो लौट आया है लेकिन जिस तरह से उसकी वापसी हुई है तथा पाकिस्तान से हामिद अंसारी पर दया दिखाई है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि जिस तरह से पाकिस्तान ने हामिद अंसारी पर दया दिखाई तथा उसको छोड़ दिया, वही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं दिखाई गई? सवाल ये भी है कि हामिद अंसारी की रिहाई के पीछे पाकिस्तान की कोई नापाक साजिश तो नहीं है ?
मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, पाकिस्तान से वापस आया हामिद निहाल अंसारी भारतीय सुरक्षा एजैंसियों के राडार पर रहने वाला है. इसका कारण ये है कि यह पहला मामला है जब पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में पकड़े गए किसी भारतीय कैदी को इतनी जल्द रिहा कर दिया है. इससे पहले जितने भी भारतीय कैदी जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में पकड़े गए हैं उनको लंबी सजाएं काटनी पड़ीं. यहां तक कि सरबजीत सिंह की तो पाकिस्तान की जेल में ह्त्या तक कर दी गई थी.  यही कारण है कि इस बात का शक एजैंसियों को रहेगा कि कहीं हामिद पाकिस्तान का मुखबिर न बन गया हो.
ज्ञात हो कि हामिद अंसारी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर था जिसका फेसबुक पर एक पाकिस्तान लड़की के साथ प्रेम हो गया था. हालाँकि ये पाकिस्तान का हनी ट्रैप था. उस तथाकथित पाकिस्तानी लड़की को मिलने के लिए हामिद गैरकानूनी ढंग से वर्ष 2012 में अफगानिस्तान के रास्ते पेशावर गया जहां उसको गर्लफ्रैंड की तरफ से बताए गए लॉज में जाना पड़ा लेकिन यहां पर गर्लफ्रैंड की बजाय पाकिस्तानी सुरक्षा एजैंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सुरक्षा एजेंसिया इस बात को लेकर चौकन्नी रहेंगी कि 2012 में गिरफ्तार अंसारी को 2018 में अर्थात 6 साल बाद पाकिस्तान ने छोड़ा है तो कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है, हामिद अंसारी को कहीं जासूस बनाकर तो नहीं भेजा गया?

Thursday, 13 December 2018

सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों

कमलनाथ की CM दावेदारी पर सिख विरोधी दंगों का साया, भाजपा और सिखों ने विरोध जताया
पहले से सीएम चुनने की मुश्किल में घिरी कांग्रेस की मुसीबत सिख नेताओं ने और भी बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में सीएम पद के लिए कमलनाथ का नाम लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि, इस नाम पर प्रदेश के बाहर से विरोध शुरू हो गया है।
दरअसल, सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों ने उनके सीएम बनने की राह में अड़चन पैदा कर दी हैं और पार्टी को एक बार फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में राहुल गांधी के लिए कमलनाथ के बारे में फैसला लेने आसान नहीं होने वाला है।
भाजपा ने पंजाब के सीएम का इस्तीफा मांगा
सिख विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली भाजपा से विरोध की आवाज उठने लगी है। भाजपा के दिल्ली प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा ने देर रात ट्वीट किया और लिखा, 'सुना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 1984 में हुए सिख नरसंहार के हत्यारे कमलनाथ को बतौर सीएम नियुक्त करना चाहते हैं। यह वही शख्स हैं, जिन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज (हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर जी का दाह संस्कार स्थल) में आग लगा दी थी। यह चीज एक बार फिर से दर्शाती है कांग्रेस सिख विरोधी पार्टी है।'
तजिंदर बग्गा (बाएं), एचएच फूलका (मध्य), कंवर संधू (दाएं)
एक अन्य ट्वीट में बग्गा ने कहा, 'जब राहुल गांधी ने 1984 के सिख हत्याकांड के जिम्मेदार कमलनाथ को पंजाब विधानसभा चुनाव का इंचार्ज बनाया था तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विरोध जताया था, जब तक की उन्हें हटा नहीं लिया गया। अगर राहुल गांधी सिखों के हत्यारे कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं तो कैप्टन अमरिंदर को विरोध जताया जताते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।'
पंजाब से भी उठे विरोध के स्वर
दिल्ली ही नहीं विरोध के स्वर पंजाब से उठते दिख रहे हैं। खरड़ से आम आदमी पार्टी की टिकट पर विधानसभा पहुंचे कंवर संधू और वरिष्ठ नेता एच एस फूलका ने कमलनाथ की दावेदारी पर ऐतराज जताया है। संधू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी को ये नहीं भूलना चाहिए कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कमलनाथ के बारे में क्या आम राय है।
फुलका ने कहा- कमलनाथ पर हैं दंगों के दाग
कुछ इसी तरह की बात सिख नेता और वकील एचएस फूलका ने कमलनाथ को लेकर कही। उन्होंने कहा कि भले ही कमलनाथ को 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर किसी आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा लेकिन अभी भी ऐसे गवाह हैं जो बताते हैं कि कमलनाथ राकबगंज के पास की भीड़ को उकसा रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी होने का दावा करती है। उसे ऐसे लोगों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
अकाली दल ने कहा- दंगों के आरोपितों को बचा रहा गांधी परिवार
उधर, अकाली दल ने भी कांग्रेस पर सिख दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने का आरोप लगाया है। पार्टी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, 'जब भी गांधी परिवार सत्ता में आता है तो ये लोग 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के जिम्मेदारों को बचाने का काम करते हैं। अब राहुल कमलनाथ को सीएम पद से नवाज रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी शायद ये संदेश देना चाहते हैं कि सिखों की हत्या में शामिल लोगों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है, वे उनके साथ हैं और उन्हें ईनाम भी देंगे।' सिरसा ने कहा कि अगर राहुल गांधी कमलनाथ को सीएम बनाते हैं तो उन्हें सिखों के गुस्से का सामना करना होगा।

Wednesday, 12 December 2018

श्रद्धालुओं को रेलवे ने दी बड़ी खुशखबरी, कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें

कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें
कुंभ मेला एक जनवरी से है। इसके मद्देनजर कानपुर सेंट्रल स्टेशन अलर्ट मोड पर रहेगा। देशभर से प्रयागराज के लिए आठ सौ स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसमें 622 मेला स्पेशल ट्रेनें अकेले उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद जोन की होंगी।
इन ट्रेनों की धुलाई और उन्हें खड़े करने की व्यवस्था कानपुर से फतेहपुर के बीच अलग-अलग स्टेशनों की लूप लाइनों और यार्ड में होेगी। एनसीआर ने रेलवे बोर्ड से 622 ट्रेनों केलिए 1400 कोच मांगे हैं। यह स्पेशल ट्रेनें 20 कोच की होंगी। रेलवे 13 जनवरी से छह मार्च तक यह व्यवस्थाएं जारी रखेगा।
डेमो पिक
न्यू वाशिंग लाइन में होगी सफाई
जीटी रोड स्थित न्यू अॉटोमेटिक वाशिंग लाइन में अॉटोमेटिक मशीनों से ट्रेनों के कोचों की सफाई होगी। इलाहाबाद और कानपुर में यह व्यवस्था रहेगी। इस रूट की ट्रेनों में बायो टॉयलेट वाले कोच होंगे। स्पेशल ट्रेनों की 70 रेक तैयार होंगी। नियमित ट्रेनों में भी 61 अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे।
कुंभ का सुखद एहसास
स्पेशल ट्रेनों को कुंभ मेले की थीम पर तैयार किया जा रहा है। कोचों पर विनायल रैपिंग की जा रही है। कुंभ, प्रयाग, संगम और प्रमुख इमारतों की तस्वीरों से श्रद्धालुओं को कुंभ मेले का सुखद एहसास होगा।
800 में 622 स्पेशल ट्रेनें उत्तर मध्य रेलवे चलाएगा। इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों के संचालन और उनके रखरखाव में कानपुर की प्रमुख भूमिका होगी। यहां धुलाई, सफाई और ट्रेनों को खड़ा करने की व्यवस्था होगी। कुंभ आने-जाने वालों के लिए कानपुर प्रमुख प्वाइंट होगा।

रोहिंग्याओं के लिए म्यांमार में घर बनवाए भारत की सरकार

कश्मीरी हिन्दू अब तक भटक रहे छत की तलाश में

भारत की वर्तमान सरकार ने वादा तो किया था कि वह सत्ता में आने पर कश्मीरी हिन्दुओं(पंडितों) की कश्मीर में पुनर्वापसी करायेगी, उनके लिए आवास उपलब्ध करायेगी. भाजपा की मोदी सरकार को सत्ता में आये साढ़े चार साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कश्मीरी हिन्दू छत पाने के लिए भटक रहे है. एकतरफ कश्मीरी हिन्दुओं को भाजपा की सरकार आवास उपलब्ध नहीं करा पाई लेकिन म्यांमार में रोहिंग्यओं के लिए भारत सरकार ने घर बनवाकर तैयार कर दिए हैं.
खबर के मुताबिक़, भारत ने मंगलवार को रखाइन राज्य में विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए पहले 50 घरों को म्यांमार को सौंप दिया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनके म्यांमार समकक्ष यू विन मिंट के बीच यहां प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद यह घर सौंपे गए. राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने वार्ता के बाद म्यांमार में न्यायाधीशों की और न्यायिक अधिकारिकों की क्षमता निर्माण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए. राष्ट्रपति का तीन दिवसीय पूर्वी पड़ोसी देश दौरा यहां राष्ट्रपति भवन में एक औपचारिक स्वागत के साथ शुरू हुआ.
बता दें कि भारत ने पिछले साल के अंत में रखाइन के लिए एक विकास कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विस्थापित व्यक्तियों के लौटने के लिए घर निर्माण में म्यांमार सरकार की सहायता करने की बात कही गई थी. इस विकास परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत ढाई सौ घर बनाने की योजना बनाई गई है. कोविंद के दौरे के साथ ही म्यांमार ने भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा की भी घोषणा की है. राष्ट्रपति भवन के बयान के मुताबिक, कोविंद ने वार्ता के दौरान कहा कि भारत, म्यांमार के साथ अपने संबंधों को विशेष प्राथमिकता देता है.
राष्ट्रपति भवन के बयान में कहा गया, “म्यांमार, भारत की एक्ट ईस्ट और पड़ोसी पहले नीतियों के लिए एक मुख्य साझेदार है.” बयान के मुताबिक, “राष्ट्रपति कोविंद ने म्यांमार को भारत से दक्षिणपूर्व एशिया व आसियान की ओर जाने के लिए ‘नेचुरल ब्रिज’ करार दिया.” कोविंद ने म्यांमार की विकास योजनाओं में भारत की भागीदारी पर गर्व जताते हुए म्यांमार से अधूरी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए समर्थन भी मांगा. भारत, म्यांमार और थाईलैंड को जोड़ने वाला एक त्रिपक्षीय राजमार्ग फिलहाल निर्माणाधीन है.
राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में म्यांमार की स्टेट काउंसेलर आंग सान सू की व दो अन्य नेताओं से भी मुलाकात की और विभिन्न द्विपक्षीय व बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की. बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति ने कहा कि भारत, म्यांमार में जारी सुधारों की दिल से प्रशंसा करता है.” उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि यह वक्त म्यांमार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसकी राष्ट्रीय शांति प्रक्रिया के प्रति भारत का पूर्ण समर्थन है.” कोविंद म्यांमार के अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान यांगून की भी यात्रा करेंगे. यह भारत के साथ जमीनी सीमा को साझा करने वाले देश का उनका पहला दौरा होगा.

Saturday, 8 December 2018

बुलंदशहर में बजरंग दल के साथ खड़ा था सिर्फ सुदर्शन न्यूज़

आखिर सामने आने लगा सच


बुलंदशहर हिंसा में मीडिया ट्रायल में मुख्य आरोपी बताये जा रहे बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. बुलंदशहर मामले को लेकर जब जब बजरंग दल तथा योगेश राज को सीधे आरोपी बताते हुए उनका मीडिया ट्रायल किया जा रहा था, उस समय सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ ही था जो बजरंग दल के साथ खड़ा हुआ था. ताजा जानकारी के मुताबिक़, एसआईटी और एसटीएफ की अब तक की जांच में बजरंगदल के जिला संयोजक योगेश राज के खिलाफ बुलंदशहर हिंसा के कोई सबूत नहीं पाए गए हैं. सभी वीडियो में वह सिर्फ पुलिस अधिकारियों से बातचीत और भीड़ को शांत करता दिख रहा है.
जांच अफसर मान रहे हैं कि योगेश राज भीड़ को उकसाने का दोषी जरूर हो सकता है, लेकिन हिंसा करने जैसे सुबूत उसके खिलाफ नहीं मिले हैं. माना जा रहा है कि ठोस सबूत हासिल नहीं होने की वजह से ही पुलिस अधिकारी उसकी गिरफ्तारी से बच रहे हैं. बता दें कि तीन नवंबर को गोकशी के बाद बुलंदशहर में हुई हिंसा में योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया गया है. सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में नामजद 27 लोगों की सूची में योगेश का नाम पहले नंबर पर है. मेरठ रेंज आईजी रामकुमार वर्मा के नेतृत्व में एसआईटी हिंसा की जांच कर रही है. वहीं एसटीएफ को नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी में लगाया है.
सूत्रों ने बताया, एसआईटी को इस केस में अब तक 50 से ज्यादा वीडियो प्राप्त हुई हैं. किसी भी वीडियो में योगेश राज द्वारा हिंसा करने जैसे सुबूत नहीं पाए गए हैं. सिर्फ चार-पांच वीडियो में वह दिख रहा है. एक वीडियो में स्याना सीओ सत्यप्रकाश शर्मा उसे शांत कर एक तरफ ले जाते हुए दिख रहे हैं. दूसरी वीडियो में योगेश राज भीड़ को शांत होने के लिए बोल रहा है. पथराव, आगजनी से जुड़ी किसी भी वीडियो में वह मौजूद नहीं पाया गया है. इन सब चीजों को देखते हुए पुलिस योगेश को गिरफ्तार नहीं कर रही है. हालांकि कहने को उसकी गिरफ्तारी में पूरे मेरठ जोन की पुलिस और एसटीएफ लगी हुई है. सूत्रों का दावा है कि योगेश को जल्द हिंसा के आरोपों से क्लीन चिट दी जा सकती है.

Thursday, 29 November 2018

2019 में संगम नगरी इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले के शाही स्‍नान की तारीख का ऐलान हो चुका है।

यह शाही स्नान 14 जनवरी से शुरू होगा।

मुहूर्त और व्रत विधि

संगम नगरी इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले के शाही स्‍नान की तारीख का ऐलान हो चुका है। यदि आप भी अगले साल कुंभ मेले में स्‍नान करने की सोंच रहे हैं तो यहां जानें शाही स्नान की तारीख...
2019 कुंंभ मेले की शाही स्नान की तारीख-
14-15 जनवरी 2019: मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
21 जनवरी 2019: पौष पूर्णिमा
31 जनवरी 2019: पौष एकादशी स्नान
04 फरवरी 2019: मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान)
10 फरवरी 2019: बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
16 फरवरी 2019: माघी एकादशी
1 9 फरवरी 2019: माघी पूर्णिमा
04 मार्च 2019: महा शिवरात्री