खुलासा: पारसी समुदाय है परशुराम के अनुयायिओं का वंशज
पारसियों का किसी जमाने में था भारत से बहुत गहरा नाता. आपको मेरी ये बात सुनकर थोड़ा अजीब लगे लेकिन भाई, ये मैं नहीं कह रहा. यह तो इस किताब का दावा है और इसने अपनी इस बात को साबित करने के लिए अनेक तर्क भी दिए हैं. जिन्हें जानने के बाद आप भी इस बात पर यकीन करने लगेंगे.
इसके अलावा भी कई ऐतिहासिक परम्पराएं ऐसी हैं, जो इन तथ्यों को सही साबित करती हैं. आपको बता दें, पारसी ‘Zoroastrianism’ पंथ को मानते हैं. यह सम्प्रदाय प्राचीन समय में काफ़ी तेज़ी से फैला था. कई विद्वानों ने इन पर किताबें लिखी है. कुछ का दावा है कि इनका उद्गम प्राचीन भारत से हुआ है.
विद्वानों का दावा है कि पारसी (Parsees) शब्द संस्कृत के परशु (Parashu) से आया है. यह भगवान परशुराम के हथियार का नाम था. आपकों बता दें परशुराम का जन्म त्रेता युग में हुआ था. इनका जन्म क्षत्रियों का नाश करने के लिए हुआ था. परशुराम के अनुयायी ही पारसी कहलाये.
इसके अलावा भी पारसियों का मानना है कि उनकी उत्पत्ति Hapta Hendu क्षेत्र में हुई थी. जिसे हम संस्कृत में Sapta Sindhu के नाम से जानते हैं. जिसमें कि आज का पंजाब और पाकिस्तान वाला क्षेत्र आता है. उनके द्वारा जिस देवता की मुख्य रूप से पूजा की जाती है, उसे Ahura Mazda के नाम से सम्बोधित किया जाता है, जो कि संस्कृत के Asura Mahadev से बना है. उनकी भाषा की उत्त्पत्ति भी संस्कृत भाषा से हुई बतायी जाती है. उनका पवित्र ग्रन्थ Zend Avesta भी संस्कृत ग्रन्थ Chanda Avastha से उद्भित बताया जाता है.
यहां कुछ शब्द हम आपको बताते हैं, जिससे आपको अंदाज़ा लगेगा कि उनकी भाषा Zend (Avestan) और हमारी संस्कृत में कितनी समानता है.
इसके साथ ही ख़ास बात यह है कि दोनों भाषाओँ में इन शब्दों का अर्थ भी समान ही निकलता है.
यहां हम आपकों कुछ ऐसी वैदिक परम्पराएं बता रहे हैं, जो आज भी पारसी धर्म के अनुयायिओं द्वारा फ़ॉलो की जाती है.
- अग्नि को पवित्र मान कर उसकी पूजा करना.
- पवित्र धागा सेरेमनी को मनाना जिसे हम आज Kushti के नाम से जानते हैं.
- जिस तरह वैदिक समय में हमने समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र नामक चार वर्णों में बांटा था उसी तरह पारसियों ने भी अपनी सामाजिक व्यवस्था को Atharva, Ratheshtan, Vastriyoksiya, Huits में बांट रखा है. इस तरह के अनेक प्रमाण मिले हैं, जिनसे निम्न निष्कर्ष निकलते हैं-
- पारसियों की शुरूआती बस्तियां भारत से निकल कर विश्व में फैली हैं.
- पारसी समुदाय वैदिक हिन्दुओं से निकल कर ही बना है. (इस किताब के अनुसार पारसी हिन्दुओं के बिछड़े हुए भाई ही हैं).
विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक वैदिक सभ्यता में अनेक ऐसे पहलू अभी छिपे हुए हैं. जो समय-समय पर होने वाली रिसर्च में सामने आते रहते हैं. देखते हैं, बुद्धिजीवी अपने अगले अध्ययन से इस सभ्यता का कौन-सा पर्दा उठाते हैं.
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