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Tuesday, 13 February 2018

यदि आपसे कोई यह सवाल करे तो आप फटाक से जवाब में कहेंगे कि ‘2 पुत्र थे’

भगवान शिव के 2 नहीं, 6 पुत्र थे!!
शिव जी की संतान
भगवान शिव के कितने पुत्र थे? यदि आपसे कोई यह सवाल करे तो आप फटाक से जवाब में कहेंगे कि ‘2 पुत्र थे’। एक का नाम गणेश और दूसरे पुत्र हैं कार्तिकेय। लेकिन अगर हम ये कहें कि भगवान शिव के 2 नहीं 6 पुत्र थे तो क्या आप यकीन करेंगे?
शिव जी की संतान
शायद नहीं... लेकिन सत्य यही है कि शिवजी के 2 नहीं, बल्कि 6 पुत्र थे। ये बात अलग है कि अन्य 4 पुत्रों के बारे में कभी जाना नहीं गया, लेकिन अगर पौराणिक घटनाओं को करीब से जाना जाए, तो शिवजी के अन्य 4 पुत्रों का उल्लेख मिल जाता है।

शिव जी की संतान
तो क्या ये पुत्र गणेश जी और कार्तिकेय जी से बड़े थे? या फिर उम्र में छोटे थे? इनका जन्म कब हुआ और कहां हुआ? क्या शिवजी ने इन पुत्रों को कभी अपनाया था? इन सभी सवालों के जवाब हम यहां प्रस्तुत करने जा रहे हैं। भगवान शिव
हिन्दू धर्म में आप त्रिमूर्ति का उल्लेख पा सकते हैं – ब्रह्मा, विष्णु, महेश। एक ने सृष्टि को रचा है, तो दूसरे देव उसका पालन कर रहे हैं। लेकिन जब कोई बड़ा संकट आए या महापाप फैल जाए, तो सृष्टि का सर्वनाश करने के लिए तीसरे देव ‘महेश’ हैं।
भगवान शिव
शिवजी को हिन्दू मान्यताओं में “रौद्र” बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि उन्हें गुस्सा दिलाने वाले का भविष्य संकट में पड़ जाता है। लेकिन अगर दिल से उनकी आराधना की जाए, तो भोले भंडारी जल्द से जल्द मनोकामना पूरी करते हैं।
पहला विवाह
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का विवाह दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। लेकिन सती ने आग में कूद कर स्वयं को भस्म कर लिया था। सती की मृत्यु के बाद सती ने अपना दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय के यहां उमा के रूप में लिया था।
दूसरा विवाह
कठोर तपस्या और व्रत का पालन करने के बाद पार्वती को भगवान शिव वर के रूप में प्राप्त हुए थे। शिव पार्वती के विवाह के बाद उनका गृहस्थ जीवन शुरू हुआ और उन्हें पुत्र प्राप्त हुए।
कार्तिकेय
यह सभी जानते हैं कि माता पार्वती से शिव जी को दो पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। पहले थे कार्तिकेय, जिन्हें भगवान कार्तिकेय के नाम से पुकारा जाता है।कार्तिकेय
कहते हैं कि सती की मृत्यु के बाद भगवान् शिव दुखी हो कर लम्बी तपस्या में बैठ गए थे, जिससे विश्व में दैत्यों का अत्याचार बढ़ गया था। सभी देवता इससे परेशान होकर भगवान् ब्रह्मा के पास उपाय मांगने गए। उसी वक़्त ब्रह्म देव ने कहा था कि शिव और पार्वती से जन्मा पुत्र इस समस्या का समाधान करेगा और शिव पार्वती के विवाह के बाद कार्तिकेय का जन्म हुआ था।
गणेश
भगवान् गणेश के जन्म के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन इन्हीं में से एक कहानी के अनुसार माता पार्वती स्नान करने के लिए जाने लगी थीं कि उन्होंने देखा कि बाहर पहरा देने के लिए कोई नहीं है। तभी उन्होंने उबटन और चन्दन के मिश्रण से गणेश की उत्पत्ति की और उसके बाद स्नान करने गयी थीं।गणेश
माता पार्वती ने गणेश को यह आदेश दिया था कि स्नान करते तक वह किसी को घर में प्रवेश न करने दें। कुछ देर बाद भगवान शिव वहां पहुंचे, जिन्हें गणेश ने घर के भीतर जाने से रोक दिया। इस बात से क्रोधित भगवान शिव ने गणेश का सर धड़ से अलग कर दिया।गणेशजब पार्वती जी ने यह दृश्य देखा तो वे बेहद नाराज़ हुईं। माता पार्वती के गुस्से को शांत करने के लिए भगवान शिव ने कटे धड़ की जगह, हाथी के बच्चे का सर लगा कर गणेश को पुनःजीवित किया।
अयप्पा
ये हैं शिवजी के तीसरे पुत्र, जिन्हें दक्षिण भारत में पूजा जाता है। इन्हें तमिलनाडु में भगवान अयप्पा या फिर भगवान अय्यनर के नाम से भी पुकारा जाता है। ये शिवजी और मोहिनी के पुत्र थे, मोहिनी भगवान विष्णु का ही स्त्री अवतार थीं। पुराणों के अनुसार अयप्पा ने भगवान परशुराम से शस्त्र विद्या प्राप्त की थी, वे एक शक्तिशाली योद्धा थे।
अंधक
शिवजी के अंधक पुत्र का जन्म कैसे हुआ, इसका पुराणों में कोई पुख्ता उल्लेख नहीं है। कहते हैं हिरनयक्ष, जो कि संतान सुख से वंचित था उसकी इच्छा पूर्ण करने के लिए शिवजी यह पुत्र वरदान में दिया था।
अंधक
परंतु वह पुत्र देख नहीं सकता था, इसलिए उसका नाम अंधक रखा गया। कहते हैं स्वयं शिवजी ने ही अंधक का संहार किया था, क्योंकि उसने माता पार्वती को अपमानित करने जैसा पाप किया था।
भौमा
शिवजी के ‘पसीने’ से उतपन्न हुआ था यह पुत्र। एक पौराणिक कथा के अनुसार कठोर तपस्या में लीन शिवजी के पसीने का एक कतरा भूमि देवी पर जाकर गिरा। उस समय शिव जी तपस्या में लीन थे, इसलिए भूमि देवी ने स्वयं ही इस पुत्र के पालन-पोषण की जिम्मेदारी ली।
भौमा
लेकिन कुछ समय के पश्चात जब शिवजी को यह ज्ञात हुआ कि यह उन्हीं का पुत्र है, तो भूमि देवी को सम्मान देते हुए उन्होंने अपने पुत्र का नाम ‘भौमा’ ही रखा। पुराणों में भगवान भौमा के नाम का उल्लेख मिलता है, जिनका रंग-रूप लाल था और उनके चार हाथ थे।
खुजा
पौराणिक वर्णन के अनुसार खुजा धरती से तेज किरणों की तरह निकले थे और सीधा आकाश की ओर निकल गए थे।
अशोक सुंदरी
शिव जी के 6 पुत्रों के अलावा, एक पुत्री भी थी। इस पुत्री का नाम अशोक सुंदरी था। कहते हैं माता पार्वती ने अपने अकेलेपन को खत्म करने के लिए ही इस पुत्री का निर्माण किया था।

अशोक सुंदरी

जी हां... अशोक सुंदरी को माता पार्वती ने एक पेड़ से निर्मित किया था। इन्होंने पार्वती जी का ‘शोक’ समाप्त किया था, इसीलिए उन्होंने अपनी पुत्री का नाम अशोक सुंदरी रखा।

भगवान शिव से जुड़ा अगर कोई बेहद शक्तिशाली एवं अद्भुत फल देने वाला मंत्र है

इस शिवरात्रि करें शिव महामंत्र का जाप, 




शिव महामंत्र का जाप

भगवान शिव से जुड़ा अगर कोई बेहद शक्तिशाली एवं अद्भुत फल देने वाला मंत्र है तो वह है ‘महामृत्युञ्जय मंत्र’। इस मंत्र की शास्त्रों में बेहद महिमा है। कहते हैं कि इस मंत्र का जाप इंसान की हर मन्नत पूरी कर सकता है। यह मंत्र व्यक्ति को मौत के मुंह से भी बाहर निकाल सकता है।
शिवजी को प्रसन्न करना हो तो महामृत्युञ्जय मंत्र को बहुत ही अचूक माना जाता है। कहते हैं कि प्रतिदिन यदि सही संख्या में इस मंत्र का जाप किया जाए तो यह विभिन्न फल प्रदान कराता है। 

आज इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम आपको बताएंगे कि आप महामृत्युञ्जय मंत्र का कितनी बार जाप करें, ताकि आपको भिन्न-भिन्न फलों की प्राप्ति हो 

शिव महामंत्र का जाप

महामृत्युञ्जय मंत्र से जुड़ी यह जानकारी शिव पुराण में दर्ज है, जहां यह बताया गया है कि शिव से जुड़े विशेष दिन या वार जैसे कि प्रदोष, सोमवार, चतुर्दशी, महाशिवरात्रि या हर रोज भी महादेव के इस मंत्र का अलग-अलग रूप और संख्या में जप तन, मन और धन के साथ जप किया जाए तो यह हर सुख देने वाला बनता है।

एक लाख जाप

शिव पुराण के अनुसार महामृत्युञ्जय मंत्र के एक लाख जप करने पर शरीर पवित्र हो जाता है।

दो लाख जाप

अगर इस शक्तिशाली मंत्र के आप 2 लाख जप पूर्ण कर लें तो पूर्वजन्म की बातें याद आ जाती हैं।

तीन लाख जाप

महामृत्युञ्जय मंत्र के तीन लाख जप पूरे होने पर सभी मनचाही सुख-सुविधा और वस्तुएं मिल जाती है।

चार लाख जाप

चार लाख जप पूरे होने पर भगवान शिव सपनों में दर्शन देते हैं और अगर पांच लाख महामृत्युंजय मंत्र जप पूरे हो जाएं तो भगवान शिव स्वयं ही प्रकट होकर अपने भक्त को दर्शन देते हैं और मुंह मांगी मुराद पूरी करते हैं।

शिव मंत्र जाप

इतनी अधिक संख्या में महामृत्युञ्जय मंत्र को पूर्ण कर पाना असंभव तो लगता है लेकिन आस्था की कोई परिभाषा और निश्चित सीमा नहीं होती। यदि भक्त चाहे तो भगवान को प्रसन्न करने के लिए कुछ भी कर सकता है।



शिवरात्रि पर करें यह 10 अभिषेक

शिवरात्रि पर करें यह 10 अभिषेक, पूरी होगी कामना अनेक
महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को प्रसन्न करने का दिन माना जाता है। आइए जानते हैं किस प्रकार की मनोकामना के लिए शिव शंकर का किस द्रव्य से पूजन करना चाहिए। सभी अभिषेक द्रव्य का फल अलग-अलग है।

1. गंगाजल या शुद्ध जल- सौभाग्य वृद्धि।
2. दुग्ध गाय का- गृह शांति तथा लक्ष्मी प्राप्ति।
3. सुगंधित तेल- भोग प्राप्ति।
4. सरसों का तेल- शत्रु नाश।
5. मीठा जल या दुग्ध- बुद्धि विलास।
6. घी- वंश वृद्धि।
7. पंचामृत- मनोवांछित प्राप्ति के लिए।
8. गन्ने का रस या फलों का रस- लक्ष्मी तथा ऐश्वर्य प्राप्ति।
9. छाछ- ज्वर से छुटकारा।
10. शहद- ऐश्वर्य प्राप्ति।

शिवलिंग कई प्रकार के उपयोग में लाए जाते हैं हर शिवलिंग का फल अलग-अलग है।

13 फरवरी को महाशिवरात्रि, किस कामना के लिए करें कैसा पूजन


शव से शिव होने की यात्रा ही जड़ से चैतन्य होने की यात्रा है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह पर्व 'शिवरात्रि' के नाम से जाना जाता है। इस दिन भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। इस‍ दिन शिव मंत्र जप-हवन-अभिषेक हवन का बड़ा महत्व है। यदि मंदिर में पूजन इत्यादि करें तो ठीक अन्यथा घर पर भी पूजन कार्य किया जा सकता है। इस वर्ष शिवरात्रि14 फरवरी 2018 को है।
पूजा विधि
पूजा के लिए आवश्यक है शिवलिंग। नंदी को एक बड़े पात्र में रखें। शिव जी की जलाधारी का मुंह उत्तर दिशा की ओर रखते हुए पूजन प्रारंभ किया जा सकता है।

शिवलिंग कई प्रकार के उपयोग में लाए जाते हैं हर शिवलिंग का फल अलग-अलग है।

1. पार्थिव शिवलिंग- हर कार्य सिद्धि के लिए।
2. गुड़ के शिवलिंग- प्रेम पाने के लिए।
3. भस्म से बने शिवलिंग- सर्वसुख की प्राप्ति के लिए।
4. जौ या चावल या आटे के शिवलिंग- दाम्पत्य सुख, संतान प्राप्ति के लिए।
5. दही से बने शिवलिंग-‍ ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए।
6. पीतल, कांसी के शिवलिंग- मोक्ष प्राप्ति के लिए।
7. सीसा इत्यादि के शिवलिंग- शत्रु संहार के लिए।
8. पारे के शिवलिंग- अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष के लिए।
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शिवरात्रि विशेष : 12 राशियों के लिए पूजन के विशेष प्रकार

चमकदार किस्मत के लिए राशि अनुसार करें महाशिवरात्रि पूजन, (12 राशियां)

शिवरात्रि विशेष : 12 राशियों के लिए पूजन के विशेष प्रकार
महाशिवरात्रि पर्व पर अलग-अलग राशि के लोगों के लिए विशेष पूजन के प्रकार का प्रावधान है। भगवान शिव यूं तो मात्र जल और बिल्वपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन उनका पूजन अगर अपनी राशि के अनुसार किया जाए तो अतिशीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
मेष- रक्तपुष्प से पूजन करें तथा अभिषेक शहद से करें। 'ॐ नम: शिवाय' का जप करें।
वृषभ- श्वेत पुष्प तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। महामृत्युंजय का मंत्र जपें।

मिथुन- अर्क, धतूरा तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिव चालीसा पढ़ें।

कर्क- श्वेत कमल, पुष्प तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिवाष्टक पढ़ें।

सिंह- रक्त पुष्प तथा पंचामृत से पूजन-अभिषेक करें। शिव महिम्न स्त्रोत पढ़ें।

कन्या- हरित पुष्प, भांग तथा सुगंधित तेल से पूजन-अभिषेक करें। शिव पुराण में वर्णित कथा का वाचन करें।

तुला- श्वेत पुष्प तथा दुग्ध धारा से पूजन-‍अभिषेक करें। महाकाल सहस्त्रनाम पढ़ें।

वृश्चिक- रक्त पुष्प तथा सरसों तेल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव जी के 108 नामों का स्मरण करें।
धनु- पीले पुष्प तथा सरसों तेल से पूजन-‍अभिषेक करें। 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करें।

मकर- नीले-काले पुष्प तथा गंगाजल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव पंचाक्षर मंत्र का जप करें।

कुंभ- जामुनिया-नीले पुष्प तथा जल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव षडाक्षर मंत्र का 11 बार स्मरण करें।

मीन- पीले पुष्प तथा मीठे जल से पूजन-‍अभिषेक करें। रावण रचित शिव तांडव का पाठ करें।

नोट : पूजन में पहले ध्यान, आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, पंचामृत स्नान, शुद्धोदक जल स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, उपवस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प, पुष्प माला, धूप-दीप, नैवेद्य नीराजन, पुष्पांजलि, परिक्रमा, क्षमा-प्रार्थना इत्यादि मूल मंत्र का प्रयोग करें।
भोलेनाथ को बिल्वपत्र, भांग, अर्क पुष्प, धतूरे के पुष्प-फल भी चढ़ाए जाते हैं। जो वस्तु कम हो, उस वस्तु की जगह अक्षत का प्रयोग करें।

शिव पंचाक्षरी मंत्र- नम: शिवाय।
शिव षडाक्षरी मंत्र- ॐ नम: शिवाय।
मृत्युंजय मंत्र- ॐ जूं स:।
महामृत्युंजय मंत्र-
ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे, सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्।
उर्वारु‍कमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।
इन मंत्रों में से जो अच्‍छा लगे, उसका जाप तथा उसी से पूजन करें तथा लाभ उठाएं।

जिस तरह हिन्दू धर्म में दिन, समय और मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है उसी तरह यह भी आवश्यक है कि विशेष फल प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जाए।

महाशिवरात्रि 2018: जानिए शिव पूजा का शुभ मुहूर्त

निशिथ काल पूजन: 24:09 से 25:01 (13 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि आरंभ: 22:34 (13 फरवरी)

भगवान शिव ब्रह्मांड के रक्षक हैं और साथ ही साथ विनाशक भी। वह नकारातमकता और बुरी शक्तियों का विनाश कर उसके स्थान पर शुभता और पवित्रता की स्थापना करते हैं...उसके रक्षा करते हैं। वे समस्त बुराइयों का नाश करते हैं, वे तंत्र-मंत्र के जनक भी हैं।
वैसे तो सप्ताह का हर सोमवार देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित हैं लेकिन शिवरात्रि एक ऐसा अवसर है जब महादेव के भक्त उनकी पूरी श्रद्धा और तन्मयता के साथ पूजा करते हैं, उनके प्रति अपनी आस्था का प्रदर्शन करते हैं।
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रति माह शिवरात्रि का त्यौहार आता है, लेकिन फाल्गुन के महीने में आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के तौर पर बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
इस माह यह पर्व 13 तारीख को है, जाहिर तौर पर सभी शिव मंदिरों में इस शिवोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शिव भक्त भी इस दिन को लेकर अति उत्साहित रहते हैं, क्योंकि इस दिन वह अपने अराध्य देव को प्रसन्न कर उनसे मनचाही मुराद मांग सकते हैं।
जिस तरह हिन्दू धर्म में दिन, समय और मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है उसी तरह यह भी आवश्यक है कि विशेष फल प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जाए।

Monday, 12 February 2018

तो मन्दिर के विरोध में खड़ेहिन्दू को किसको उत्तर देना होगा . ?

ओवैसी बोला कि बाबरी पर झुकने वाले मुसलमान अल्लाह को देगे जवाब. मन्दिर विरोधी सेकुलर हिन्दू बताएं कि वो किसे देंगे जवाब ?

खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाला ओवैसी नहीं तैयार है किसी भी प्रकार से बाबरी के नाम पर कोई भी समझौता करने के लिए लेकिन उसकी जुबान पर हर बार किसी न किसी हिन्दू संगठन का नाम साम्प्रदायिकता के रूप में आ ही जाता है . धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाला और धर्मनिरपेक्ष देश की धर्मनिरपेक्ष संसद में धर्मनिरपेक्ष संविधान की शपथ लेने वाला ओवैसी एक बार फिर से सिर्फ और सिर्फ मुसलमान की बात कर रहा है . और ये बात नहीं सीधे सीधे मुसलमानों को साम्प्रदायिक उन्माद के लिए उत्साहित कर रहा है जिसमे सवाल है हिन्दुओं के लिए भी जो श्रीराम मन्दिर के विरोध में खड़े हैं .

ज्ञात हो कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक़ को लेकर समझौते की गुंजाइश से साफ़ इनकार करते हुए आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. जहां तक बाबरी मस्जिद की बात है, मस्जिद मुद्दे पर करने वाले लोग अल्लाह के सामने जवाबदेह होंगे.'' इस बयान के बाद कम से कम सेकुलर और श्रीराम मन्दिर के विरोध में खड़े खुद को हिन्दू कहने वाले उन तमाम सेकुलर ब्रिगेड के सदस्यों से सवाल तो बनता ही है कि अगर मस्जिद से समझौता करने वाले मुसलमान को अल्लाह के आगे जवाब देना होगा तो मन्दिर के विरोध में खड़ेहिन्दू को किसको उत्तर देना होगा . ?

Sunday, 11 February 2018

सनातन धर्म के अनुसार महादेव का ना ही कोई अंत है, ना ही कोई आरंभ। शिव का ना कोई रूप, ना कोई आकार

क्यों की जाती है शिवलिंग पूजा


त्रिदेवों का महत्त्व

सनातन धर्म के अनुसार महादेव का ना ही कोई अंत है, ना ही कोई आरंभ। शिव का ना कोई रूप, ना कोई आकार माना गया है। शिवलिंग को भगवान शिव का प्रतीकात्मक रूप माना जाता है। लेकिन क्या आप कभी समझ पाएं कि क्यों तमाम दैवीय प्रतीकों में केवल शिवलिंग को इतना महत्व दिया जाता है? नहीं, तो चलिए आज जानते हैं शिवलिंग से जुड़े कुछ अहम रहस्य?

क्या है शिवलिंग?

शिव' का अर्थ है– 'परम कल्याणकारी' और 'लिंग' का अर्थ है – ‘सृजन’। लिंग का एक अर्थ शास्त्रों में ऐसी वस्तु से भी है प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती। पृथ्वी की समस्त शक्ति का उद्गम स्थल लिंग को ही माना गया है।

क्या है शिवलिंग?

त्रिदेवों में से एक महादेव शिव से संबंधित होना शिवलिंग की मान्यता को और बल देता है। लेकिन क्या यह शिवजी का “लिंग” यानि पुरुष जननांग है? उत्तर है हां।

कैसे हुई शिवलिंग की उत्पत्ति?

एक कथा अनुसार (जिसे प्रक्षिप्तांश माना गया है), आदिकाल में एक बार भगवान शिव अपने धुन में निर्वस्त्र होकर घूम रहे थे। इसी दौरान वह एक वन से गुजर रहे थे जहां ऋषि-पत्नियां उनके इस रूप को देखकर मोहित हो गईं।

कैसे हुई शिवलिंग की उत्पत्ति?

इसके बाद सभी देवतागण देवी पार्वती जी के पास पहुंचे और उन्होंने शिवलिंग को धारण कर लिया और संसार को प्रलय से बचा लिया। इसके बाद से ही शिवलिंग के नीचे माता पार्वती का भाग विराजमान रहने लगा।
कैसे हुई शिवलिंग की उत्पत्ति?हालांकि शिवपुराण में एक अन्य कथा का वर्णन है जिसके अनुसार भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर हुए विवाद को सुलझाने के लिए एक दिव्य लिंग प्रकट किया था। इस लिंग का आदि और अंत ढूंढते हुए ब्रह्मा और विष्णु को शिव के परब्रह्म स्वरूप का ज्ञान हुआ।
12 ज्योतिर्लिंग
संपूर्ण भारत में 12 ज्योतिर्लिंग हैं जहां साक्षात भोले भंडारी शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इनके नाम हैं सौराष्ट्र प्रदेश में श्री सोमनाथ, श्रीशैल पर श्री मल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्री महाकालेश्वर, ओमकारेश्वर अथवा अमलेश्वर।

12 ज्योतिर्लिंग

इसके अलावा परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्री नागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्री केदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर हैं।

समस्त जगत के आदि और अंत का कारण

शास्त्रों में भगवान शिव को ही संसार की उत्पत्ति का कारण और परब्रह्म कहा गया है। इसी कारण प्रतीकात्मक रूप में शिवजी के लिंग की पूजा की जाती है।

समस्त जगत के आदि और अंत का कारण

शिवलिंग की मान्यता का एक कारण इसका कई वेदों और पुराणों में वर्णन भी है। श्री शिवमहापुराण में वर्णित है कि भगवान शिव ने स्वयं परमपिता ब्रह्मा और पालहार विष्णु जी को यह भेद बताया था कि केवल शिवलिंग के पूजन मात्र से ही समस्त देवों को तृत्प्त किया जा सकता है।

शिवलिंग पर जल क्यों अर्पित किया जाता है?

मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने की प्रथा का आरंभ समुद्र मंथन के समय से हुआ। समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को ग्रहण करने के कारण भगवान शिव के शरीर का ताप अत्यधिक बढ़ गया था जिसे कम करने के लिए अन्य देवताओं ने उनके शरीर पर जल चढ़ाया। इसी के बाद से शिवजी का प्रतीक माने जाने वाले शिवलिंग पर भी चल चढ़ाने की परंपरा शुरु हुई।

शिवलिंग पर जल क्यों अर्पित किया जाता है?

इसके अतिरिक्त यह मान्यता है कि शिवलिंग के ताप को शांत रखने के लिए इसका जलाभिषेक किया जाता है और ऐसी व्यवस्था की जाती है कि शिवलिंग पर निरंतर जल की बूंदे गिरती रहें।
शिवलिंग की पूजा के कुछ विशेष नियम
भगवान शिव का एक नाम भोलेनाथ भी है जो केवल एक क्षमा प्रार्थना से पूजा में हुई गलतियों को माफ कर देते हैं। लेकिन इसके बाद भी कुछ ऐसे नियम हैं जिनका पालन शिवलिंग की पूजा के समय अवश्य करना चाहिए जैसे:

शिवलिंग की पूजा के कुछ विशेष नियम

शिवलिंग को घर में तभी स्थापित करना चाहिए जब आप उसपर निरंतर जल आपूर्ति और प्रतिदिन पूजा को सुनिश्चित कर सकें। घर में शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा करने के बाद ही रखें। शिवलिंग पर केतकी के फूल, तुलसी, हल्दी, कुमकुम आदि नहीं चढ़ाने चाहिए। शिवलिंग पर तिलक के लिए चन्दन का प्रयोग करना चाहिए।

शिवलिंग की पूजा के कुछ विशेष नियम

अविवाहित स्त्रियों को शिवजी की पूजा करने पर कोई रोक नहीं है लेकिन उन्हें शिवलिंग का स्पर्श या इसकी परिक्रमा नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से महादेव की समाधि भंग होती है। समाधि भंग होने से भगवान शिव जातक को अनिष्ट फल भी दे सकते हैं। यह भी कहा जाता है कि शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।

शिवलिंग की पूजा के कुछ विशेष नियम

श्रावण, शिवरात्रि और अन्य शुभ दिवसों पर शिवलिंग का दूध से अभिषेक करना चाहिए। दूध, जल, धतूरा, बेल पत्र, भस्म आदि भगवान शिव को अतिप्रिय हैं।

किस तरह लगानी चाहिए, ताकी हमें शुभ फल की प्राप्ति हो..

वास्तु के अनुसार 
देवी-देवताओं के चित्र घर में लगाने से कई शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं। घर का वातावरण शुद्ध और पवित्र बना रहता है। किसी भी सदस्य का मन इधर-उधर नहीं भटकता और तनाव खत्म होता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं भगवान शिव की तस्वीर घर-दुकान में कहां और किस तरह लगानी चाहिए, ताकी हमें शुभ फल की प्राप्ति हो..
उत्तर दिशा भगवान शिव की प्रिय दिशा है। उत्तर दिशा में भगवान शिव का निवास स्थल यानि कैलाश पर्वत है। इसी वजह से उत्तर दिशा में शिवजी का फोटो लगाने पर सभी शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
कोशिश करे कि भोलेनाथ की तस्वीर उत्तर दिशा में ऐसी जगह पर लगाएं, जहां घर-दूकान में आने वाले सभी लोगों को उनके दर्शन हो सकें। ऐसा होना घर या व्यापार के लिए शुभ होता है।
भगवान की ऐसी तस्वीर लगाएं, जिसमें वे प्रसन्न या ध्यान करने की मुद्रा में विराजित हो या फिर नंदी के ऊपर बैठे हुए हो।
जिस दीवार पर भोलेनाथ की तस्वीर लगाएं वह हमेशा साफ़ और स्वच्छ होनी चाहिए।

जीवन में परेशानियां हैं तो जाहिर तौर पर इनके समाधान भी हैं, जरूरत है तो अपनी जानकारी के दायरे को विस्तृत करने की।

घर की खूबसूरती के साथ-साथ परिवार की खुशहाली का भी ध्यान रखते हैं ये वास्तु टिप्स


परेशानी या किल्ल

मनुष्य जीवन में कई परेशानियां आती-जाती रहती हैं, बहुत हे एकम लोग ऐसे होते हैं जिनका जीवन बिना किसी दुख-परेशानी या किल्लत के बीत जाता है, नहीं तो अधिकांश तो किसी ना किसी चीज की कमी को लेकर परेशान रहते ही हैं।


परेशानियां

किसी की शादी नहीं हो रही तो कोई एक अच्छी जॉब के लिए तरस रहा है, किसी का बिजनेस नहीं चल रहा तो कुछ ऐसे भी हैं जो सबकुछ होने के बाद भी खुशहाल जीवन के लिए तरस रहे हैं। जीवन में परेशानियां हैं तो जाहिर तौर पर इनके समाधान भी हैं, जरूरत है तो अपनी जानकारी के दायरे को विस्तृत करने की।

गृह

ये तो हम जानते ही हैं कि हमारा जीवन हमारे ग्रहों के आधार पर संचालित होता है, उनकी अच्छी-बुरी स्थिति और दशा ही हमारे जीवन को बनाने के साथ-साथ बिगाड़ने का काम भी करती है।


ज्योतिष विद्या

ज्योतिष विद्या में इन्हीं बिगड़े ग्रहों को सुधारने या शांत करने के विभिन्न उपाय दर्ज हैं, जिनका फायदा हम सिर्फ इसलिए नहीं उठा पाते क्योंकि हम इस विज्ञान को कल्पना या मनगढ़ंत मानते हैं। ज्योतिष विद्या की बहुत सी शाखाओं में से एक है वास्तुशास्त्र, जिसका संचालन हमारे वातावरण में मौजूद ऊर्जाओं के आधार पर होता है।


वास्तुशास्त्र

इस लेख के जरिए आप वास्तुशास्त्र से संबंधित कुछ ऐसी चीजों के बारे में जान पाएंगे जो आपकी परेशानियों का हल तो करेंगे ही साथ ही साथ आपके घर की सुंदरता बढ़ाने का काम भी बखूबी निभाएंगे।

लव बर्ड्स

बहुत सामान्य सा दिखने वाले ये लव बर्ड्स आपके घर में चल रहे क्लेश और शीत युद्ध को समाप्त कर सकते हैं। ये पति-पत्नी के बीच प्रेम को तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही साथ परिवार के दूसरे सदस्यों में भी सौहार्द की भावना पैदा करते हैं।

क्रिस्टल बॉल

घर की पूर्वी दिशा में क्रिस्टल की बॉल टांगकर देखिए, ये ना सिर्फ आपके घर की शोभा बढ़ाएगी बल्कि घर के सदस्यों की सेहत और संपन्नता को भी दुरुस्त करेगी। क्रिस्टल बॉल्स आपके वातावरण की सारी नाकारात्मक ऊर्जाओं को सोख लेने की क्षमता रखती है।


पीतल का कछुआ

पीतल की धातु से बना कछुआ घर की संपन्नता के लिए बहुत कारगर सिद्ध होता है। यह परिवार के लोगों के लिए सौभाग्यशाली तो होता ही है साथ ही आर्थिक स्थिति भी मजबूत करता है। इसे ऐसी जगह पर रखें जहां से ये हर आने-जाने लोगों को नजर आएं।

तीन पैरों वाला मेंढक

आपने कई घरों या दुकानों में तीन पैरों वाला मेंढक देखा होगा, जिसके मुंह में सिक्का होता है। यह मेंढक घर में संपन्नता लाता है और आर्थिक परेशानियों को परिवार के सदस्यों से दूर रखता है। इसे बाथरूम या बेडरूम में रखना शुभ होता है।

विंड चाइम

वास्तुशास्त्र हो या फेंगशुई, दोनों के हिसाब से घर में विंड चाइम रखना शुभ होता है। घर में 5 छड़ों वाली विंड चाइम टांगने से आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश निश्चित होता है।

सोनिया के सबसे खासमखास कपिल सिब्बल लड़ रहे एक मस्जिद बचाने की जंग ..

राहुल गांधी जा रहे मन्दिर लेकिन कपिल सिब्बल लड़ रहे एक मस्जिद बचाने की जंग ..जानिए कौन सी ?
राहुल गांधी भले ही मन्दिर मन्दिर जा कर खुद को हिंदुत्व के चेहरे के रूप में दिखा रहे हों लेकिन उनके इस कार्य की आड़ में उनकी पार्टी के नेताओं का मस्जिद प्रेम छिप गया था जो अब सामने आया है .. जहा एक तरफ हिन्दू समाज अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए दिन रात एक कर के अपनी यथाशक्ति से अदाल में मुस्लिमो के दायर प्रतिवाद का सामना कर रहा है वहीं कांग्रेस के कद्दावर व राहुल सोनिया के सबसे खासमखास कपिल सिब्बल लड़ रहे एक मस्जिद बचाने की जंग ..

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया था कि तीन महीने में मस्जिद को हटाकर उस जमीन का कब्जा वापस हाई कोर्ट को सौंप दिया जाए। हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर तय समय सीमा पर अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है तो पुलिस बल के जरिए जमीन को अपने कब्जे में ले लिया जाएगा। इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से वक्फ मस्जिद के लोग खुश नहीं थे और उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। गौरतलब है कि वकील अभिषेक शुक्ल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिद को हटाने को लेकर याचिका दर्ज कराई थी। इसी याचिका को लेकर हाई कोर्ट ने मस्जिद को को लेकर याचिका दर्ज कराई थी। इसी याचिका को लेकर हाई कोर्ट ने मस्जिद को हटाने के निर्देश दिए थे।

वहीं वक्फ मस्जिद की तरफ से इस केस को लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह ढांचा काफी दशकों से यहीं पर है। वहीं इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हाई कोर्ट के पीछे कई इलाकों में जमीन है और मस्जिद को स्थानंतरित करने के लिए इसके कुछ हिस्से पर विचार किया जा सकता है। 


Saturday, 10 February 2018

अंत्योदय के प्रणेता एवं हमारे प्रेरणास्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को पुण्यतिथी के अवसर पर हिन्दू परिवार संगठन संस्था विनम्र अभिवादन !

दीनदयाल उपाध्याय

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ( जन्म: २५ सितम्बर १९१६–११ फ़रवरी १९६८) महान चिन्तक और संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद जैसी प्रगतिशील विचारधारा दी।
उपाध्यायजी नितान्त सरल और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे। राजनीति के अतिरिक्त साहित्यमें भी उनकी गहरी अभिरुचि थी। उनके हिंदी और अंग्रेजी के लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे। केवल एक बैठक में ही उन्होंने चन्द्रगुप्त नाटक लिख डाला था।


संक्षिप्त जीवनी

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म २५ सितम्बर १९१६ को जयपुर जिले के धानक्या ग्राम में, नाना चुन्नीलाल के यहाँ हुआ था | इनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय था ये नगला चंदभान( फरह, मथुरा) के निवासी थे | माता रामप्यारी धार्मिक वृत्ति की थीं। पिता रेल्वे में जलेसर रोड स्टेशन पर सहायक स्टेशन मास्टर थे |रेल की नौकरी होने के कारण उनके पिता का अधिक समय बाहर ही बीतता था। कभी-कभी छुट्टी मिलने पर ही घर आते थे। थोड़े समय बाद ही दीनदयाल के भाई ने जन्म लिया जिसका नाम शिवदयाल रखा गया। पिता भगवती प्रसाद ने बच्चों को ननिहाल भेज दिया। उस समय उनके नाना चुन्नीलाल शुक्ल धनकिया में स्टेशन मास्टर थे। मामा का परिवार बहुत बड़ा था। दीनदयाल अपने ममेरे भाइयों के साथ खाते खेलते बड़े हुए।
३ वर्ष की मासूम उम्र में दीनदयाल पिता के प्यार से वंचित हो गये। पति की मृत्यु से माँ रामप्यारी को अपना जीवन अंधकारमय लगने लगा। वे अत्यधिक बीमार रहने लगीं। उन्हें क्षय रोग लग गया। ८ अगस्त १९२४ को रामप्यारी जी का देहावसान हो गया। ७ वर्ष की कोमल अवस्था में दीनदयाल माता-पिता के प्यार से वंचित हो गये।
उपाध्याय जी ने पिलानी, आगरा तथा प्रयाग में शिक्षा प्राप्त की। बी०.एससी० बी०टी० करने के बाद भी उन्होंने नौकरी नहीं की। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता हो गये थे। अत: कालेज छोड़ने के तुरन्त बाद वे उक्त संस्था के प्रचारक बन गये और एकनिष्ठ भाव से संघ का संगठन कार्य करने लगे। उपाध्यायजी नितान्त सरल और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे।
सन १९५१ ई० में अखिल भारतीय जनसंघ का निर्माण होने पर वे उसके संगठन मन्त्री बनाये गये। दो वर्ष बाद सन् १९५३ ई० में उपाध्यायजी अखिल भारतीय जनसंघ के महामन्त्री निर्वाचित हुए और लगभग१५ वर्ष तक इस पद पर रहकर उन्होंने अपने दल की अमूल्य सेवा की। कालीकट अधिवेशन (दिसम्बर १९६७) में वे अखिल भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। ११ फरवरी१९६८ की रात में रेलयात्रा के दौरान मुगलसराय के आसपास उनकी हत्या कर दी गयी।[1]
विलक्षण बुद्धि, सरल व्यक्तित्व एवं नेतृत्व के अनगिनत गुणों के स्वामी भारतीय राजनीतिक क्षितिज के इस प्रकाशमान सूर्य ने भारतवर्ष में समतामूलक राजनीतिक विचारधारा का प्रचार एवं प्रोत्साहन करते हुए सिर्फ ५२ साल क उम्र में अपने प्राण राष्ट्र को समर्पित कर दिए। अनाकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी दीनदयालजी उच्च-कोटि के दार्शनिक थे किसी प्रकार का भौतिक माया-मोह उन्हें छू तक नहीं सका।

एक दृष्टि में

  • मैट्रिक और इण्टरमीडिएट-दोनों ही परीक्षाओं में गोल्ड मैडल।
  • कानपुर विश्वविद्यालय से आपने बी० ए० किया।
  • सिविल सेवा परीक्षा में भी उतीर्ण हुए लेकिन उसे त्याग दिया।
  • १९३७ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गये।
  • १९४२ से पूरी तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिये काम करना शुरू किया।
  • राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और स्वदे जैसी पत्र-पत्रिकाएँ प्रारम्भ की।
  • १९५१ में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना के समय उत्तर-प्रदेश का महासचिव बनाया गया।

कृतियाँ

जनसंघ के राष्ट्रजीवन दर्शन के निर्माता दीनदयालजी का उद्देश्य स्वतंत्रता की पुर्नरचना के प्रयासों के लिए विशुद्ध भारतीय तत्व-दृष्टी प्रदान करना था. उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद जैसी प्रगतिशील विचारधारा दी। दीनदयालजी को जनसंघ के आर्थिक नीति के रचनाकार बताया जाता है। आर्थिक विकास का मुख्य उद्देश्य समान्य मानव का सुख है या उनका विचार था। विचार–स्वातंत्रय के इस युग में मानव कल्याण के लिए अनेक विचारधारा को पनपने का अवसर मिला है। इसमें साम्यवाद, पूंजीवाद , अन्त्योदय, सर्वोदय आदि मुख्य हैं। किन्तु चराचर जगत को सन्तुलित , स्वस्थ व सुंदर बनाकर मनुष्य मात्र पूर्णता की ओर ले जा सकने वाला एकमात्र प्रक्रम सनातन धर्म द्वारा प्रतिपादित जीवन – विज्ञान, जीवन –कला व जीवन–दर्शन है।
संस्कृतिनिष्ठा दीनदयाल जी के द्वारा निर्मित राजनैतिक जीवनदर्शन का पहला सुत्र है उनके शब्दों में- भारत में रहनेवाला और इसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन हैं . उनकी जीवन प्रणाली ,कला , साहित्य , दर्शन सब भारतीय संस्कृति है . इसलिए भारतीय राष्ट्रवाद का आधार यह संस्कृति है . इस संस्कृतिमें निष्ठा रहे तभी भारत एकात्म रहेगा .
“वसुधैव कुटुम्बकम” हमारी सभ्यता से प्रचलित है। इसी के अनुसार भारत में सभी धर्मो को समान अधिकार प्राप्त हैं। संस्कृति से किसी व्यक्ति ,वर्ग , राष्ट्र आदि की वे बातें जो उनके मन,रुचि, आचार, विचार, कला-कौशल और सभ्यता का सूचक होता है पर विचार होता है। दो शब्दों में कहें तो यह जीवन जीने की शैली है। भारतीय सरकारी राज्य पत्र (गज़ट) इतिहास व संस्कृति संस्करण में यह स्पष्ट वर्णन है कि हिन्दुत्व और हिंदूइज़्म एक ही शब्द हैं तथा यह भारत के संस्कृति और सभ्यता का सूचक है।
उपाध्यायजी पत्रकार तो थे ही चिन्तक और लेखक भी थे। उनकी असामयिक मृत्यु से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि जिस धारा में वह भारतीय राजनीति को ले जाना चाहते थे वह धारा हिन्दुत्व की थी जिसका संकेत उन्होंने अपनी कुछ कृतियों में ही दे दिया था। तभी तो कालीकट अधिवेशन के बाद विश्व भर के मीडिया का ध्यान उनकी ओर गया। उनकी कुछ प्रमुख पुस्तकों के नाम[2] नीचे दिये गये हैं-

  • दो योजनाएँ ,
  • राजनीतिक डायरी,
  • भारतीय अर्थनीति का अवमूल्यन ,
  • सम्राट चन्द्रगुप्त ,
  • जगद्गुरु शंकराचार्य, और
  • एकात्म मानववाद (अंग्रेजी: Integral Humanism)
  • राष्ट्र जीवन की दिशा
  • एक प्रेम कथा

Thursday, 8 February 2018

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 14 मार्च की अगली तारीख दी है.

अयोध्या केस: SC में सामने आईं ये 8 बातें, फैसले में हो सकती है खास भूमिका



अयोध्या मामले में केस अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 14 मार्च की अगली तारीख दी है. गुरुवार को इस मामले की सुनवाई में भले ही कुछ खास न हुआ हो, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सिर्फ कानून के तहत ही जमीन विवाद पर सुनवाई की जाएगी.
अयोध्या के विवादास्पद ढांचे से जुड़े केस को फिर से नई तारीख जरूर मिली है, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत में इसकी सुनवाई और फैसले में ज्यादा का अंतर नहीं दिख रहा है और आज कोर्ट ने 8 अहम फैसले सुनाए जिसकी फैसले पर अहम भूमिका रहेगी.
कोर्ट के 8 अहम फैसले
-चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में 3 जजों की स्पेशल बेंच मामले की सुनवाई कर रही है. बेंच में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया कि सिर्फ कानून के तहत जमीन विवाद पर सुनवाई की जाएगी और इसमें भावनात्मक और राजनीतिक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी.
-14 मार्च को मामले की पहली दलील सुनी जाएगी और सबसे पहले मुख्य पक्षकारों को सुना जाएगी. इसके बाद  दूसरे लोगों की बारी आएगी.
-सुनवाई के दौरान अब कोई भी याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी.
-अन्य दस्तावेजों की तरह रामायण और गीता का भी अनुवाद कोर्ट में जमा कराने का निर्देश दिया.
सभी पक्षकारों से हाईकोर्ट रिकॉर्ड में शामिल सभी वीडियो को दस्वावेज में शामिल करने को कहा. इसके अलावा कोर्ट ने अपने धार्मिक ग्रंथों की अनुवादित कॉपी को भी जमा करवाने का निर्देश दिया.
-2 हफ्ते के भीतर अयोध्या विवाद से संबंधित दस्तावेज और वीडियो जमा कराए जाने का निर्देश.
-कोर्ट ने साफ किया कि मामल से जुड़े जिन लोगों की मौत हो चुकी है उनका नाम हटाया जाएगा.
-विवादित भूमि पर अस्पताल बनाने की श्याम बेनेगल की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विवाद में अब कोई नया पक्ष नहीं जुड़ेगा.