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Thursday, 20 December 2018

जो अंसारी पाकिस्तान की जेल से बाहर आया उस पर नजर है खुफिया एजेंसियों की… सवाल ये कि यही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं ?

जासूसी के मामलों में पकड़े गए कुछ अन्य भारतीय कैदियों के नाम व सजा
— गोपाल दास आरोप जासूसी, सजा हुई 24 वर्ष
— सुरजीत सिंह उर्फ मक्खन सिंह आरोप जासूसी, सजा हुई 22 वर्ष
— किरपाल सिंह आरोप जासूसी, पाकिस्तान की जेल में हुई मौत
— भानूदास काराले आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष
— रामराज आरोप जासूसी, सजा हुई 14 वर्ष


हामिद अंसारी, ये पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी नहीं है बल्कि वो हामिद अंसारी है जो जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था तथा जिसे हाल ही में पाकिस्तान ने छोड़ा है. हामिद अंसारी पाकिस्तान से वापस हिंदुस्तान तो लौट आया है लेकिन जिस तरह से उसकी वापसी हुई है तथा पाकिस्तान से हामिद अंसारी पर दया दिखाई है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि जिस तरह से पाकिस्तान ने हामिद अंसारी पर दया दिखाई तथा उसको छोड़ दिया, वही दया कुलभूषण जाधव पर क्यों नहीं दिखाई गई? सवाल ये भी है कि हामिद अंसारी की रिहाई के पीछे पाकिस्तान की कोई नापाक साजिश तो नहीं है ?
मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, पाकिस्तान से वापस आया हामिद निहाल अंसारी भारतीय सुरक्षा एजैंसियों के राडार पर रहने वाला है. इसका कारण ये है कि यह पहला मामला है जब पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में पकड़े गए किसी भारतीय कैदी को इतनी जल्द रिहा कर दिया है. इससे पहले जितने भी भारतीय कैदी जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में पकड़े गए हैं उनको लंबी सजाएं काटनी पड़ीं. यहां तक कि सरबजीत सिंह की तो पाकिस्तान की जेल में ह्त्या तक कर दी गई थी.  यही कारण है कि इस बात का शक एजैंसियों को रहेगा कि कहीं हामिद पाकिस्तान का मुखबिर न बन गया हो.
ज्ञात हो कि हामिद अंसारी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर था जिसका फेसबुक पर एक पाकिस्तान लड़की के साथ प्रेम हो गया था. हालाँकि ये पाकिस्तान का हनी ट्रैप था. उस तथाकथित पाकिस्तानी लड़की को मिलने के लिए हामिद गैरकानूनी ढंग से वर्ष 2012 में अफगानिस्तान के रास्ते पेशावर गया जहां उसको गर्लफ्रैंड की तरफ से बताए गए लॉज में जाना पड़ा लेकिन यहां पर गर्लफ्रैंड की बजाय पाकिस्तानी सुरक्षा एजैंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सुरक्षा एजेंसिया इस बात को लेकर चौकन्नी रहेंगी कि 2012 में गिरफ्तार अंसारी को 2018 में अर्थात 6 साल बाद पाकिस्तान ने छोड़ा है तो कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है, हामिद अंसारी को कहीं जासूस बनाकर तो नहीं भेजा गया?

Thursday, 13 December 2018

सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों

कमलनाथ की CM दावेदारी पर सिख विरोधी दंगों का साया, भाजपा और सिखों ने विरोध जताया
पहले से सीएम चुनने की मुश्किल में घिरी कांग्रेस की मुसीबत सिख नेताओं ने और भी बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में सीएम पद के लिए कमलनाथ का नाम लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि, इस नाम पर प्रदेश के बाहर से विरोध शुरू हो गया है।
दरअसल, सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की भूमिका के आरोपों ने उनके सीएम बनने की राह में अड़चन पैदा कर दी हैं और पार्टी को एक बार फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में राहुल गांधी के लिए कमलनाथ के बारे में फैसला लेने आसान नहीं होने वाला है।
भाजपा ने पंजाब के सीएम का इस्तीफा मांगा
सिख विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली भाजपा से विरोध की आवाज उठने लगी है। भाजपा के दिल्ली प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा ने देर रात ट्वीट किया और लिखा, 'सुना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 1984 में हुए सिख नरसंहार के हत्यारे कमलनाथ को बतौर सीएम नियुक्त करना चाहते हैं। यह वही शख्स हैं, जिन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज (हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर जी का दाह संस्कार स्थल) में आग लगा दी थी। यह चीज एक बार फिर से दर्शाती है कांग्रेस सिख विरोधी पार्टी है।'
तजिंदर बग्गा (बाएं), एचएच फूलका (मध्य), कंवर संधू (दाएं)
एक अन्य ट्वीट में बग्गा ने कहा, 'जब राहुल गांधी ने 1984 के सिख हत्याकांड के जिम्मेदार कमलनाथ को पंजाब विधानसभा चुनाव का इंचार्ज बनाया था तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विरोध जताया था, जब तक की उन्हें हटा नहीं लिया गया। अगर राहुल गांधी सिखों के हत्यारे कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं तो कैप्टन अमरिंदर को विरोध जताया जताते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।'
पंजाब से भी उठे विरोध के स्वर
दिल्ली ही नहीं विरोध के स्वर पंजाब से उठते दिख रहे हैं। खरड़ से आम आदमी पार्टी की टिकट पर विधानसभा पहुंचे कंवर संधू और वरिष्ठ नेता एच एस फूलका ने कमलनाथ की दावेदारी पर ऐतराज जताया है। संधू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी को ये नहीं भूलना चाहिए कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कमलनाथ के बारे में क्या आम राय है।
फुलका ने कहा- कमलनाथ पर हैं दंगों के दाग
कुछ इसी तरह की बात सिख नेता और वकील एचएस फूलका ने कमलनाथ को लेकर कही। उन्होंने कहा कि भले ही कमलनाथ को 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर किसी आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा लेकिन अभी भी ऐसे गवाह हैं जो बताते हैं कि कमलनाथ राकबगंज के पास की भीड़ को उकसा रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी होने का दावा करती है। उसे ऐसे लोगों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
अकाली दल ने कहा- दंगों के आरोपितों को बचा रहा गांधी परिवार
उधर, अकाली दल ने भी कांग्रेस पर सिख दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने का आरोप लगाया है। पार्टी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, 'जब भी गांधी परिवार सत्ता में आता है तो ये लोग 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के जिम्मेदारों को बचाने का काम करते हैं। अब राहुल कमलनाथ को सीएम पद से नवाज रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी शायद ये संदेश देना चाहते हैं कि सिखों की हत्या में शामिल लोगों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है, वे उनके साथ हैं और उन्हें ईनाम भी देंगे।' सिरसा ने कहा कि अगर राहुल गांधी कमलनाथ को सीएम बनाते हैं तो उन्हें सिखों के गुस्से का सामना करना होगा।

Wednesday, 12 December 2018

श्रद्धालुओं को रेलवे ने दी बड़ी खुशखबरी, कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें

कुंभ मेले के लिए देशभर से चलेंगी 800 स्पेशल ट्रेनें
कुंभ मेला एक जनवरी से है। इसके मद्देनजर कानपुर सेंट्रल स्टेशन अलर्ट मोड पर रहेगा। देशभर से प्रयागराज के लिए आठ सौ स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसमें 622 मेला स्पेशल ट्रेनें अकेले उत्तर मध्य रेलवे, इलाहाबाद जोन की होंगी।
इन ट्रेनों की धुलाई और उन्हें खड़े करने की व्यवस्था कानपुर से फतेहपुर के बीच अलग-अलग स्टेशनों की लूप लाइनों और यार्ड में होेगी। एनसीआर ने रेलवे बोर्ड से 622 ट्रेनों केलिए 1400 कोच मांगे हैं। यह स्पेशल ट्रेनें 20 कोच की होंगी। रेलवे 13 जनवरी से छह मार्च तक यह व्यवस्थाएं जारी रखेगा।
डेमो पिक
न्यू वाशिंग लाइन में होगी सफाई
जीटी रोड स्थित न्यू अॉटोमेटिक वाशिंग लाइन में अॉटोमेटिक मशीनों से ट्रेनों के कोचों की सफाई होगी। इलाहाबाद और कानपुर में यह व्यवस्था रहेगी। इस रूट की ट्रेनों में बायो टॉयलेट वाले कोच होंगे। स्पेशल ट्रेनों की 70 रेक तैयार होंगी। नियमित ट्रेनों में भी 61 अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे।
कुंभ का सुखद एहसास
स्पेशल ट्रेनों को कुंभ मेले की थीम पर तैयार किया जा रहा है। कोचों पर विनायल रैपिंग की जा रही है। कुंभ, प्रयाग, संगम और प्रमुख इमारतों की तस्वीरों से श्रद्धालुओं को कुंभ मेले का सुखद एहसास होगा।
800 में 622 स्पेशल ट्रेनें उत्तर मध्य रेलवे चलाएगा। इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों के संचालन और उनके रखरखाव में कानपुर की प्रमुख भूमिका होगी। यहां धुलाई, सफाई और ट्रेनों को खड़ा करने की व्यवस्था होगी। कुंभ आने-जाने वालों के लिए कानपुर प्रमुख प्वाइंट होगा।

रोहिंग्याओं के लिए म्यांमार में घर बनवाए भारत की सरकार

कश्मीरी हिन्दू अब तक भटक रहे छत की तलाश में

भारत की वर्तमान सरकार ने वादा तो किया था कि वह सत्ता में आने पर कश्मीरी हिन्दुओं(पंडितों) की कश्मीर में पुनर्वापसी करायेगी, उनके लिए आवास उपलब्ध करायेगी. भाजपा की मोदी सरकार को सत्ता में आये साढ़े चार साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कश्मीरी हिन्दू छत पाने के लिए भटक रहे है. एकतरफ कश्मीरी हिन्दुओं को भाजपा की सरकार आवास उपलब्ध नहीं करा पाई लेकिन म्यांमार में रोहिंग्यओं के लिए भारत सरकार ने घर बनवाकर तैयार कर दिए हैं.
खबर के मुताबिक़, भारत ने मंगलवार को रखाइन राज्य में विस्थापित रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए पहले 50 घरों को म्यांमार को सौंप दिया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनके म्यांमार समकक्ष यू विन मिंट के बीच यहां प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद यह घर सौंपे गए. राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने वार्ता के बाद म्यांमार में न्यायाधीशों की और न्यायिक अधिकारिकों की क्षमता निर्माण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए. राष्ट्रपति का तीन दिवसीय पूर्वी पड़ोसी देश दौरा यहां राष्ट्रपति भवन में एक औपचारिक स्वागत के साथ शुरू हुआ.
बता दें कि भारत ने पिछले साल के अंत में रखाइन के लिए एक विकास कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विस्थापित व्यक्तियों के लौटने के लिए घर निर्माण में म्यांमार सरकार की सहायता करने की बात कही गई थी. इस विकास परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत ढाई सौ घर बनाने की योजना बनाई गई है. कोविंद के दौरे के साथ ही म्यांमार ने भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा की भी घोषणा की है. राष्ट्रपति भवन के बयान के मुताबिक, कोविंद ने वार्ता के दौरान कहा कि भारत, म्यांमार के साथ अपने संबंधों को विशेष प्राथमिकता देता है.
राष्ट्रपति भवन के बयान में कहा गया, “म्यांमार, भारत की एक्ट ईस्ट और पड़ोसी पहले नीतियों के लिए एक मुख्य साझेदार है.” बयान के मुताबिक, “राष्ट्रपति कोविंद ने म्यांमार को भारत से दक्षिणपूर्व एशिया व आसियान की ओर जाने के लिए ‘नेचुरल ब्रिज’ करार दिया.” कोविंद ने म्यांमार की विकास योजनाओं में भारत की भागीदारी पर गर्व जताते हुए म्यांमार से अधूरी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए समर्थन भी मांगा. भारत, म्यांमार और थाईलैंड को जोड़ने वाला एक त्रिपक्षीय राजमार्ग फिलहाल निर्माणाधीन है.
राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में म्यांमार की स्टेट काउंसेलर आंग सान सू की व दो अन्य नेताओं से भी मुलाकात की और विभिन्न द्विपक्षीय व बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की. बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति ने कहा कि भारत, म्यांमार में जारी सुधारों की दिल से प्रशंसा करता है.” उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि यह वक्त म्यांमार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसकी राष्ट्रीय शांति प्रक्रिया के प्रति भारत का पूर्ण समर्थन है.” कोविंद म्यांमार के अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान यांगून की भी यात्रा करेंगे. यह भारत के साथ जमीनी सीमा को साझा करने वाले देश का उनका पहला दौरा होगा.

Saturday, 8 December 2018

बुलंदशहर में बजरंग दल के साथ खड़ा था सिर्फ सुदर्शन न्यूज़

आखिर सामने आने लगा सच


बुलंदशहर हिंसा में मीडिया ट्रायल में मुख्य आरोपी बताये जा रहे बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. बुलंदशहर मामले को लेकर जब जब बजरंग दल तथा योगेश राज को सीधे आरोपी बताते हुए उनका मीडिया ट्रायल किया जा रहा था, उस समय सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ ही था जो बजरंग दल के साथ खड़ा हुआ था. ताजा जानकारी के मुताबिक़, एसआईटी और एसटीएफ की अब तक की जांच में बजरंगदल के जिला संयोजक योगेश राज के खिलाफ बुलंदशहर हिंसा के कोई सबूत नहीं पाए गए हैं. सभी वीडियो में वह सिर्फ पुलिस अधिकारियों से बातचीत और भीड़ को शांत करता दिख रहा है.
जांच अफसर मान रहे हैं कि योगेश राज भीड़ को उकसाने का दोषी जरूर हो सकता है, लेकिन हिंसा करने जैसे सुबूत उसके खिलाफ नहीं मिले हैं. माना जा रहा है कि ठोस सबूत हासिल नहीं होने की वजह से ही पुलिस अधिकारी उसकी गिरफ्तारी से बच रहे हैं. बता दें कि तीन नवंबर को गोकशी के बाद बुलंदशहर में हुई हिंसा में योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया गया है. सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में नामजद 27 लोगों की सूची में योगेश का नाम पहले नंबर पर है. मेरठ रेंज आईजी रामकुमार वर्मा के नेतृत्व में एसआईटी हिंसा की जांच कर रही है. वहीं एसटीएफ को नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी में लगाया है.
सूत्रों ने बताया, एसआईटी को इस केस में अब तक 50 से ज्यादा वीडियो प्राप्त हुई हैं. किसी भी वीडियो में योगेश राज द्वारा हिंसा करने जैसे सुबूत नहीं पाए गए हैं. सिर्फ चार-पांच वीडियो में वह दिख रहा है. एक वीडियो में स्याना सीओ सत्यप्रकाश शर्मा उसे शांत कर एक तरफ ले जाते हुए दिख रहे हैं. दूसरी वीडियो में योगेश राज भीड़ को शांत होने के लिए बोल रहा है. पथराव, आगजनी से जुड़ी किसी भी वीडियो में वह मौजूद नहीं पाया गया है. इन सब चीजों को देखते हुए पुलिस योगेश को गिरफ्तार नहीं कर रही है. हालांकि कहने को उसकी गिरफ्तारी में पूरे मेरठ जोन की पुलिस और एसटीएफ लगी हुई है. सूत्रों का दावा है कि योगेश को जल्द हिंसा के आरोपों से क्लीन चिट दी जा सकती है.

Thursday, 29 November 2018

2019 में संगम नगरी इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले के शाही स्‍नान की तारीख का ऐलान हो चुका है।

यह शाही स्नान 14 जनवरी से शुरू होगा।

मुहूर्त और व्रत विधि

संगम नगरी इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले के शाही स्‍नान की तारीख का ऐलान हो चुका है। यदि आप भी अगले साल कुंभ मेले में स्‍नान करने की सोंच रहे हैं तो यहां जानें शाही स्नान की तारीख...
2019 कुंंभ मेले की शाही स्नान की तारीख-
14-15 जनवरी 2019: मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
21 जनवरी 2019: पौष पूर्णिमा
31 जनवरी 2019: पौष एकादशी स्नान
04 फरवरी 2019: मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान)
10 फरवरी 2019: बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
16 फरवरी 2019: माघी एकादशी
1 9 फरवरी 2019: माघी पूर्णिमा
04 मार्च 2019: महा शिवरात्री

Tuesday, 27 November 2018

अब कश्मीरी पंडितों ने उठाई मांग

करीब 15 सौ साल पुरानी उस शारदा पीठ की PoK में है.70 साल बीत चुके हैं वहां किसी हिंदू को जाने की इजाज़त नहीं मिली है.

कश्मीरी पंडित अपनी कुलदेवी तक पहुंचने के लिए लड़ रहे हैं लड़ाई*
आस्था के केंद्र इस मंदिर तक पहुंचना और एक बार फिर से यहां पूजा करना कश्मीरी पंडितों की जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद बन चुका है.अपनी कुलदेवी तक पहुंचने के लिए वो एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं.1947 यानी वो साल जब तक पाकिस्तान का कश्मीर के उस हिस्से पर (PoK) कब्जा नहीं था तब तक हर कश्मीरी पंडित कुलदेवी शारदा के दर्शन के लिए जाते थे. शारदा पीठ में जयकारे गूंजते थे लेकिन पाकिस्तान ने जैसे ही कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा किया उस मंदिर का संपर्क हिंदुओं से खत्म हो गया.हालात ये है कि अब शारदा पीठ सिर्फ नाम के लिए मंदिर है क्योंकि वो खंडहर में तब्दील हो चुका है.
क्या है शारदा पीठ का महत्व*
करीब 15 सौ साल पुरानी उस शारदा पीठ की PoK में है.70 साल बीत चुके हैं वहां किसी हिंदू को जाने की इजाज़त नहीं मिली है. अब तो वो इलाका आतंकियों के कब्जे में है.शारदा शक्तिपीठ प्राचीन काल से ही पूरे विश्व में हिंदुओं और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए शिक्षा का एक बड़ा केंद्र रहा है.यह पीठ नीलम और मधुमति नदी के संगम पर पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद से 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.आजादी के पहले अगस्त में यहां वार्षिक यात्रा आयोजित होती थी.दोनों देशों के बीच 2004 में हुए एक समझौते के तहत नियंत्रण रेखा के दोनों ओर की आबादी को आने-जाने में रियायत दी गई ताकि वह अपने रिश्तेदारों से भी मिल सके और माता के दर्शन भी कर सकें.इस दौरान सेव शारदा संगठन ने इस समझौते में शारदा पीठ की यात्रा को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा था. तभी से ये मांग उठती आ रही है.



Sunday, 4 November 2018

कांग्रेस अध्यक्ष दावा कर रहे “जीसस राज्य” लाने का.. रामराज्य को सांप्रदायिक बताने वाले बुद्धिजीवी खामोश

 कांग्रेस अध्यक्ष दावा कर रहे “जीसस राज्य” लाने का.. रामराज्य को सांप्रदायिक बताने वाले बुद्धिजीवी खामोश
तेलंगाना कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन एन. उत्तम कुमार रेड्डी 
ने ने गिरिजाघरों के पादरियों से वादा किया की उनको दो बैडरूम वाला घर दिया जायेगा, उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा, पांच लाख का हेल्थ और एक्सीडेंट बीमा और राज्य के सभी गिरिजाघरों को मुफ्त बिजली दी जाएगी. उनका कहना था कि इस समुदाय के विद्यार्थियों को स्व रोजगार के लिए क़र्ज़ के साथ 30,000 रुपये महीने का बेरोजगाज़री भत्ता, हॉस्टल और स्किल डेवलपमेंट की सुविधा अलग से दी जाएगी. नए गिरिजाघरों को बनाने के लिए भी उन्होंने ज़मीन देने का वादा किया साथ की उन पूजास्थलों की C.B.I. जांच की भी मांग की जहाँ पर जमीन विवाद चल रहा हैं. उन्होंने ईसाइयों की सामाजिक-आर्थिक दशा की जानकारी के लिए एक न्याययिक कमीशन बनाने का भी वादा किया. उन्होंने क्रिस्चियन फेडरेशन को कई सौ करोड़ का फण्ड देने का भी वादा किया.
जब कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या फिर कोई भी भाजपा नेता रामराज्य की बात करता है तो देश का तथाकथित सेक्यूलरिज्म खतरे में आ जाता है तथा तमाम बुद्धिजीवी रामराज्य की परिकल्पना को सांप्रदायिक बताने लगते हैं. भारतीय जनता पार्टी के तेलंगाना के गोशामहल से विधायक तथा फायरब्रांड हिन्दू राष्ट्रवादी नेता टाइगर राजा सिंह ने अपने ट्विटर पर एक लिंक साझा किया है जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ख़ास तथा तेलंगाना कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने दावा किया है कि अगर तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनती है तो वह तेलंगाना में जीसस राज्य लायेगी.

Tuesday, 25 September 2018

करोड़ रुपये कमाता है ये भारतीय कारोबारी

एक दिन में 300 करोड़ रुपये कमाता है ये भारतीय कारोबारी

उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने लगातार सातवीं बार 'बर्कले हुरुन -2018' में सबसे अमीर भारतीय के रूप में शीर्ष पर जगह बनाई है. इस लिस्ट के अनुसार अंबानी की हर दिन की कमाई में करोड़ों का इजाफा हुआ है. आइए जानते हैं अंबानी एक दिन में कितने रुपये कमाते हैं और उनकी कुल संपत्ति कितनी है...
इस सूची में दूसरे स्थान पर एस. पी. हिन्दुजा एंड फैमिली है, जिनकी अनुमानित संपत्ति 1,59,000 करोड़ रुपये है.
तीसरे स्थान पर आर्सलर मित्तल की एल. एन. मित्तल एंड फैमिली है, जिनकी अनुमानित संपत्ति 1,14,500 करोड़ रुपये है.

इनके बाद विप्रो के अजीम प्रेमजी का नाम है, जिनकी संपत्ति 96,100 करोड़ रुपये है.
सन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड के दिलीप संघवी की संपत्ति 89,700 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक के उदय कोटक की संपत्ति 78,600 करोड़ रुपये है. (दिलीप संघवी)
वहीं सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साइरस पूनावाला की संपत्ति 73,000 करोड़ रुपये, अडानी समूह के गौतम अडानी एंड फैमिली की संपत्ति 71,200 करोड़ रुपये और शापूर जी पालोनजी मिस्त्री के साइरस पी. मिस्त्री की संपत्ति 69,400 करोड़ रुपये है.

सालाना सूची में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाले अमीरों को शामिल किया जाता है. देश में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति रखनेवालों की संख्या साल 2017 में 617 थी, जो साल 2018 में बढ़कर 831 हो चुकी है. 







Tuesday, 11 September 2018

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश की मुश्किलें कम होने का नाम ही ले रही हैं

एक बड़े नेता का दावा- "अपनी माँ को चुडैल कहते हैं अखिलेश यादव"
अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए अमर सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के अवसान का सबसे बड़ा कारण है उत्तर प्रदेश जो राम का देश है. राम जिन्होंने अपनी सौतेली माता कैकई को मां कहा, सौतेले भाई भरत को भाई कहां और अपने पिता की आज्ञा पर वह वनवास गए, उस के विपरीत अखिलेश अपनी सौतेली मां साधना को जादूगरनी और चुड़ैल कहते हैं. सौतेले भाई प्रतीक को नहीं मानते, अपने बूढ़े बाप के कहने पर वनवास ना जाने के बजाए उन्हीं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. अब तो ऐसी नौबत आ गई कि वो कहावत चरितार्थ होने लगी है- रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा बेटा अखिलेश करेगा राज और बूढ़ा बाप मुलायम जंगल को जाएगा. अमर सिंह से जब पूछा गया कि आप पर समाजवादी पार्टी को तोड़ने का आरोप है, इसके जवाब में अमर सिंह ने कहा कि ना मैं उनके बाप से बात करता हूं ना उनके चाचा से बात करता हूं ना अखिलेश से बात करता हूं तो पार्टी कैसे तोडूंगा.आज समाजवादी पार्टी जिस अवसान की ओर जा रहे रही है उसका कारण खुद अखिलेश हैं जिन्होंने राम की धरती से आने बाद भी राम की परंपराओं का अपमान किया है. इसके अलावा अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी के कद्द्दावर नेता अमर सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना मुग़ल आक्रान्ता अलाउद्दीन खिलजी से की जो महिलाओं की इज्जत नहीं करता था तथा उसी तरह आज़म खान ने उनकी बेटियों को तेज़ाब से नहलाने की धमकी दी थी.

Saturday, 1 September 2018

सामने आ रहा सोना घोटाला.. जानिये कहाँ गया देश का सोना और किसने लूटा उसे बस कुछ साल पहले ?

कांग्रेस को अब तक की सबसे करारी हार मिली मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार तो चली गयी लेकिन घोटालों का जिन्न अभी तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा ह

मनमोहन सरकार में इतने घोटाले सामने आये कि घोटालों की आंधी में ही देश की जनता ने मनमोहन सरकार को ही उड़ा दिया. कांग्रेस को अब तक की सबसे करारी हार मिली मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार तो चली गयी लेकिन घोटालों का जिन्न अभी तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा है. जी हां.. इसी बीच एक और घोटाला सामने आया है, जिसका नाम है "सोना घोटाला"..इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि ये घोटाला भी मनमोहन सिंह की UPA2 सरकार के दौरान हुआ था.घोटाला मनमोहन सरकार के आख़िरी ७ दिनों में हुआ था. CBI ने यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल की गोल्ड इंपोर्ट स्कीम की जांच दोबारा शुरू कर दी है. CBI के हाथ कुछ नए सुराग भी लगे हैं. नए सुराग 80:20 गोल्ड इंपोर्ट स्कीम में घोटाले की ओर इशारा कर रहे हैं. खास बात यह है कि ये घोटाला 2 के कार्यकाल के आखिरी 7 दिनों का है. जिसमें उन्होंने कुछ ज्वेलरी कंपनियों की मांग को बिना जांच के फटाफट मान लिया था. इस मामल में तमिलनाडु के कुछ ज्वेलर्स की ओर से आवेदन किए गए थे. जानकारी के मुताबिक़, तमिलनाडु के 6 ज्वैलर्स ने 80:20 गोल्ड इंपोर्ट स्कीम की शर्तों में ढील देने की मांग करते हुए यूपीए सरकार को आवेदन दिए थे. इन आवेदनों की समीक्षा के बिना ही मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी हफ्ते में उनकी मांग को फटाफट मान लिया था. इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक, इस मामले की नए सिरे से CBI ने जांच शुरू की तो कुछ नए सुराग हाथ लगे. आखिरी 7 दिन की बात भी नए सुराग के तहत ही पता चली है. इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने रखा गया है. यह दूसरा मौका है, जब सीबीआई इस मामले में प्रिलिमिनरी इंक्वायरी शुरू कर चुकी है.यूपीए-2 सरकार को सभी छह आवेदन तमिलनाडु से दिए गए थे. आवेदन की भाषा, फॉर्मैट से लेकर की गई मांग सहित सबकुछ एक जैसा था. हालांकि, आवेदनों की तारीख अलग थी, लेकिन सभी फरवरी 2014 में दिए गए थे. आरबीआई ने आम चुनाव का नतीजा आने के बाद इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था. ये 6 कंपनियां उन 7 कंपनियों की पहली लिस्ट से अलग हैं. पहले की 7 कंपनियों में डायमंड ज्वेलर्स नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी की कंपनियां शामिल थीं. सूत्रों के मुताबिक, जांच में उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिन पर मई 2014 से पहले निर्णय लिए गए थे. जांच के दायरे में वह सभी लोग आ सकते हैं, जो 2 के आखिरी कुछ महीनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े थे. जांच अधिकारियों को शक है कि उन आवेदनों का इस्तेमाल गोल्ड इंपोर्ट स्कीम में बदलाव करने की जमीन तैयार करने के लिए किया गया था.यूपीए 2 के कई टॉप नेताओं और आरबीआई के अधिकारियों की भूमिका पर नजर है. एजेंसियों की नजर इस बात पर भी है कि क्या आरबीआई को नई सरकार बनने तक इंतजार करने को कहा गया था. 2016 में CAG रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस स्कीम से सरकारी खजाने को एक लाख करोड़ रुपए की चपत लगी. एनडीए सरकार ने नवंबर 2014 में यह स्कीम रद्द कर दी थी. सूत्रों के मुताबिक, इस स्कीम की सीबीआई की पिछली पीई 'सबूत न मिल पाने के कारण' फंस गई थी. हालांकि, एजेंसी को अब विश्वास है कि वह नए सबूतों की मदद से इसे रेगुलर केस में बदल लेगी. इस मामले में पिछले कुछ दिनों में विभिन्न एजेंसियों के बीच तीन उच्चस्तरीय बैठक हुई हैं. एजेंसियों की प्राथमिकता एक आपराधिक मामला बनाने की है.

अपने कड़वे प्रवचनों के जरिये शिराओं में बर्फ हो चुके रक्त को राष्ट्रभक्ति व धर्म अनुराग का लावा बनकर प्रवाहित कराने वाले जैन मुनि तरुण सागर जी हुए देवलोकवासी

कड़वे प्रवचन देने वाले प्रख्यात जैन मुनि तथा राष्ट्र संत तरुण सागर जी महाराज का आज निधन हो गया. रतलब है कि, 20 दिन पहले उन्हें पीलिया हुआ था. जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्होंने इलाज कराने से मना कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास जाने का निर्णय किया था. बताया जा रहा है कि वे संथारा प्रथा का पालन कर रहे थे और उन्होंने दवाइयां लेने से इंकार कर दिया था. जैन संप्रदाय के लोग संथारा प्रथा के तहत अन्न-जल छोड़ देते हैं, इसका लक्ष्य जीवन को ख़त्म करना होता है. जैन संप्रदाय की मान्यता के अनुसार इस तरह 'मोक्ष' प्राप्त किया जा सकता है. आज शनिवार देर रात करीब 3.30 बजे जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज ने 51 वर्ष की आयु में अपना शरीर छोड़ दिया तथा महाप्रयाण पर चले गये. जैन मुनि के निधन की खबर आने के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गयी है तथा न केवल जैन समाज अपितु सर्व समाज जैन मुनि के देवलोकगमन पर शोकाकुल है तथा उन्हें अपने अपने तरीके से अंतिम विदाई दे रहा है. निश्चित रूप से जैन मुनि एक सच्चे राष्ट्र संत थे जिन्होंने अपनी शब्द अग्नि से शिराओं में बर्फ बन चुके रक्त को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक दायित्व व धर्म अनुराग का लावा बनकर प्रवाहित कराया तथा लोगों में नई चेतना पैदा की.जैन मुनि तरुण सागर का असली नाम पवन कुमार जैन था. उनका जन्म 26 1967 को ग्राम गुहजी, जिला दमोह, राज्य मध्य प्रदेश में हुआ था. कहा जाता है कि उन्होंने 1981 में घर छोड़ दिया था. जिसके बाद उनकी शिक्षा दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई थी. तरुण सागर अपने कड़वे प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध थे. इसी वजह से उन्हें क्रांतिकारी संत भी कहा जाता था. जैन मुनि पर आधारित किताब कड़वे प्रवचन एक वक्त काफी प्रख्यात हुई थी. समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करके के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए हैं. जैन मुनि तरुण सागर को मध्यप्रदेश सरकार ने 6 फरवरी 2002 को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था. बता दें कि, भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में जैन-मुनि के भक्त रहते हैं. तरुण सागर जी की लोकप्रियता जैन समुदाय के बाहर भी थी. जितना सम्मान तरुण सागर जी को जैन समाज देता था उतना ही सम्मान उन्हें जैन समाज के बाहर से मिलता था. जैन मुनि के बारे में कहा जाता है कि उनके शब्दों में वो आग थी जो पूरी तरह से सुसुप्त हो चुकी इंसानी चेतना को भी क्रान्ति के धर्मपथ पर अग्रसर कर देती थी.

Friday, 6 July 2018

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू असुरक्षित !



बांग्लादेश में धर्मांधोंद्वारा हिन्दू सरकारी कर्मचारी चंदनकुमार घोष की हत्या 


ढाका : बांग्लादेश में जेसूर जिले के कोटवाली पुलिस थाना अधिकारक्षेत्र के बसेपरा में महंमद हसिबूर रेहमान एवं उसके अन्य ३ धर्मांध साथियों ने मिलकर हिन्दू सरकारी कर्मचारी चंदनकुमार घोष की हत्या की । बांग्लादेश का हिन्दू संगठन बांग्लादेश माईनॉरिटी वॉचद्वारा इस हत्या प्रकरण के अपराधियों के विरोध में कठोर कार्रवाई की मांग की गई है ।

१. चंदनकुमार घोष लेखापरीक्षक (ऑडिटर)के रूप में ढाका में सरकारी सेवा में कार्यरत थे । वे २० जून को साईकल रिक्शा में ढाका से बसेपरा गांव, अपने घर जा रहे थे । तब महंमद हसिबूर रेहमान एवं उसके ३ मुसलमान साथियों ने मिलकर सडक पर ही छुरा भोंपकर उनकी हत्या की और उनकी बटुआ एवं भ्रमणभाष लुट लिया ।

२. इस हत्या प्रकरण में महंमद हसिबूर रेहमान को बंदी बनाया गया है । उसे जेसूर न्यायदंडाधिकारी के सामने उपस्थित करनेपर उसने हत्या के अपराध की स्वीकृति दे दी है । पुलिसकर्मियों ने इस हत्या प्रकरण में उसके ३ अन्य सहयोगियों के सहभाग की भी पुष्टि की है ।

३. इस हत्या की जानकारी मिलते ही बांग्लादेश माईनॉरिटी वॉच के अध्यक्ष अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष ने कोटवाली पुलिस थाने में भेंट दे कर वहां के अधिकारियों के साथ चर्चा की एवं इस प्रकरण का अन्वेषण कर सभी अपराधियों को तुरंत बंदी बनाने की मांग की ।

४. अधिवक्ता श्री.रवींद्र घोष ने मृत चंदनकुमार घोष के परिवार से भेंट की । अधिवक्ता श्री. घोष ने इस दुखी परिवार को सांत्वना धनराशि देने की एवं मृत व्यक्ति की पत्नी और उनके बच्चों को सरकारी नौकरी देने की मांग की है !