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Saturday, 23 June 2018

जानिए कौन हैं वो कश्मीर के 21 कलंक जिनके सर पर नाच रही है मौत ??

हिंदुस्तान का मणिमुकुट कहे जाने वाले कश्मीर की पावन भूमि को लहूलुहान करने वाले इस्लामिक आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना आख़िरी वार को तैयार है.
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगने के बाद भारतीय सेना आक्रामक मूड में तथा आतंकियों के सफाये के लिए प्रतिबद्ध है. अब जो खबर सामने आ रही है वो न सिर्फ आतंकी बल्कि इन आतंकियों के समर्थकों पर कहर बनकर गिरने वाली है. खबर के मुताबिक, कश्मीर में आपरेशन ऑल आउट के दूसरे चरण में सुरक्षाबलों निशाने पर 21 मोस्ट वांटेड आतंकी हैं. इनमें तीन पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल हैं.सुरक्षाबलों ने इनके सफाये के लिए पूरा एक्शन प्लान तैयार कर लिया है. हाल में तैयार की गई इस सूची में कुल 22 आतंकी शामिल थेजिनमें से एक आतंकी दाऊद अहमद सोफी को सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को मार गिराया है। यह आईएसजेके संगठन से जुड़ा था.आतंकियों की इस लिस्ट के बारे में जानकारी मिली हैं कि सुरक्षाबलों की इस सूची में शामिल मोस्ट वांटेड आतंकियों में सबसे ज्यादा 11 हिजबुल मुजाहिदीन के हैं. इनमें मोहम्मद अशरफ खानर्फ अशरफ मौलवी मूलत अनंतनाग का निवासी है तथा सितंबर 2016 में हिजबुल में भर्ती हुआ था. वह ए प्लस श्रेणी का आतंकी है. जबकि अल्ताफ मोहम्मद डार उर्फ अल्ताफ काचरू कुलगाम निवासी है तथा ए डबल प्लस श्रेणी का आतंकी है.वह 2006 से सक्रिय है तथा दक्षिण कश्मीर में हिजबुल का डिविजन कमांडर भी है. इसी प्रकार कुलगाम का आतंकी मोहम्मद अब्बास शेख, ए प्लस आतंकी है तथा 2015 में भर्ती हुआ था. उमर माजिद गनाई ए डबल प्लस श्रेणी, सैफुल्ला मीर (ए श्रेणी), जीनत उल इस्लाम, ए डबल प्लस श्रेणी, रियाज अहमद निक्कू (ए++), लतीफ अहमद डार उर्फ हारुन (ए) तथा उमर फैयाज लोन (ए) शामिल हैं. इन आतंकियों में मन्नान वाणी भी है जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का शोधकर्ता रह चुका है. कुपवाड़ा निवासी मनन इसी साल जनवरी में आतंकी संगठन में भर्ती हुआ था तथा वह बी श्रेणी का आतंकी है. जुनैद अशरफ बी श्रेणी का आतंकी है तथा वह तहरीक ए हुर्रियत के चैयरमैन का बेटा है. इसी साल मार्च में वह आतंकी बना था.सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इसके अलावा सूची में लश्कर ए तैय्यबा के कुल सात आतंकी शामिल हैं. इनमें अबु मुस्लिम पाकिस्तान से आया आतंकी है. उसे ए प्लस श्रेणी में रखा गया है तथा 2017 से वह घाटी में सक्रिय है. पाकिस्तान का दूसरा आतंकी अबु जरगाम उर्फ मोहम्मद भाई भी है. जो2015 से सक्रिय है तथा ए प्लस श्रेणी का आतंकी है. तीसरा पाकिस्तान आतंकी मोहम्मद नावेद (ए प्लस) है जो 2012 से सक्रिय है. लश्कर के अन्य आतंकियों में आजाद अहमद मलिक उर्फ दादा (ए), शकूर अहमद डार (ए प्लस), रियाज अहमद डार (ए) तथा शोपियां निवासी मुस्ताक अहमद मीर (ए डबल प्लस) शामिल हैं. इस लिस्ट में जैश ए मोहम्मद के दो आतंकी शामिल हैं. इनमें जाहिद अहमद वाणी तथा मुदासिर अहमद खान हैं. वाणी पुलवामा एवं मुदासिर अवन्तीपुर का निवासी है. पिछले एक सालों से ये सक्रिय हैं. एक अन्य आतंकी अंसार गजावत उल हिन्द (एजीएच) का है जिसका नाम जाकिर राशिद भट उर्फ जाकिर मूसा है. यह ए ++ श्रेणी का है तथा 2013 से सक्रिय है. सेना ने साफ़ कर दिया है सेना की पहली वरीयता में ये आतंकी शामिल हैं जिन्हें जल्द ही जहन्नुम पहुंचा दिया

Friday, 25 May 2018

पाकिस्तानी मीडिया का दावा यदि सत्य हुआ तो ये होगी राष्ट्र से अब तक की सबसे बड़ी गद्दारी

क्या कभी पाकिस्तानी काला धन जमा करवाया गया भारत मे ? पाकिस्तानी मीडिया का दावा यदि सत्य हुआ तो ये होगी राष्ट्र से अब तक की सबसे बड़ी गद्दारी
जहां सारा भारत देश अपना पैसा स्विस बैंकों में जाने से चिंचित है वहीं सारा पाकिस्तान अब अपना पैसा भारत मे जमा होने से चिंतित है। ये दिलचस्प खुलासा किया है पाकिस्तान की मीडिया ने। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नवाज शरीफ ने भारत में 4.9 अरब डॉलर का कालाधन जमा किया हुआ है।एनएबी की विज्ञप्ति के हवाले से मालूम हुआ है कि ब्यूरो चेयरमैन जस्टिस (रि.) जावेद इकबाल ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। विदित हो कि पाकिस्तान की नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) ने इस मीडिया रिपोर्ट पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले की के आदेश जारी किये हैं। दिलचस्प: दावा ये है कि नवाज शरीफ ने काला धन भारतीय वित्त मंत्रालय में जमा करवाया है।ये उस समय की बात बताई जा रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था और राजनेताओं की भाषणबाज़ी से हर पल युद्ध के हालात लगते थे . मणिशंकर अय्यर के बार बार पाकिस्तान दौरे भी अब इस खुलासे के बाद आ रहे हैं सन्देह के घेरे में ..पाकिस्तान के प्रमुख समाचार माध्यम जियो टीवी ने भी ये खबर दी है।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस घटना का वर्ल्ड बैंक के माइग्रेशन एंड रेमिटेंस बुक 2016 में भी जिक्र है। न्यूज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये रकम भारतीय वित्त मंत्रालय में जमा करवाई गयी है। बतादें कि पाकिस्तान की शीर्ष अदालत शरीफ को अयोग्य घोषित कर चुकी है ओर वहीं सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पनामा पेपर्स मामले में फैसले के बाद नवाज शरीफ एनएबी में पहले ही भ्रष्टाचार के तीन मामलों में जांच में फंसा हुआ है। उधर शरीफ ने इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये सब राजनीति से प्रेरित षड्यंत्र है।

Saturday, 12 May 2018

पत्थर मारनेवालों का कोई धर्म नहीं होता

पत्थरबाज हमेशा भारतीय सेना काे क्याे अपना लक्ष्य बना रहे है ?, 


पत्थरबाजाें का धर्म नही हाेता एेसा कहकर महबूबा मुफ्ती अपने आप काे ही धाेका दे रही है ! अगर पत्थरबाजाें का धर्म नही है ताे महबूबा मुफ्ती इन सवालाें का जवाब दे . . . पत्थरबाज हमेशा भारतीय सेना काे क्याे अपना लक्ष्य बना रहे है ?, पत्थरबाजाें काे फंडिंग पाकिस्थान से क्याे हाे रही हैं ? पत्थरबाज कश्मीर की आजादी क्याें मांग रहे है ? पत्थरबाज भारत विराेधी नारे देकर पाकिस्तान का जयजयकार क्याे करते हैं ? क्या इन सवालाें का जवाब महबूबा मुफ्ती के पास है ? – 
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पथराव में २२ वर्षीय एक युवक की मौत को ‘मानवता की हत्या ’ करार दिया और कहा कि इस घटना ने उनके अंदर की मां को झकझोर दिया है ! मंगलवार को चेन्नई निवासी एस तिरुमणि के पिता से भेंट के बाद विचलित नजर आ रहीं महबूबा ने कहा कि जो लोग किसी को मारने के लिए पत्थर उठाते हैं, उनका कोई धर्म नहीं होता। मुफ्ती ने घाटी के हालात पर चर्चा के लिए राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक का आवाहन किया है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, मुख्यमंत्री बुधवार को श्रीनगर में एक सर्वदलीय बैठक बुला रही हैं जिसमें सांप्रत हालात पर चर्चा की जाएगी। बैठक दोपहर दो बजे शेरे-कश्मीर कांफ्रेंस सेंटर में आयोजित की गई है। घाटी में सोमवार को चेन्नई वासी एक २२ वर्षीय पर्यटक एस थिरुमनी की पत्थरबाजी के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना से व्यथित मुफ्ती ने इसे ‘मानवता की हत्या’ करार दिया था। उन्होंने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर में ऐसा कभी नहीं सुना गया था। इस घटना से आहत मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर अब कई दिनों तक टेलीविजन पर चर्चा और बहस होगी और ‘हम मानवता की हत्या चुपचाप देखते रहेंगे। यह ऐसी घटना है जिसके बारे में जम्मू-कश्मीर में अब तक सुना नहीं गया है !’ दो बेटियों की मां और राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री ने कहा, जिस प्रकार की शिक्षा हमारी अगली पीढ़ी को दी जा रही है, उससे मेरे अंदर की मां विचलित हो गई है। उन्होंने कहा, हम अपने बच्चों को कौन-सी शिक्षा दे रहे हैं कि पत्थर उठाएं और सडक पर जा रहे किसी व्यक्ति को मार दें ? यह वह नहीं है जिसकी हमारा इस्लाम हमें शिक्षा देता है। हमारा धर्म हमें अपने मेहमानों की देखभाल की शिक्षा देता है। ये लोग या लडके, जो किसी को मारने के लिए पत्थर उठाते हैं, उनका कोई धर्म नहीं है। उन्होंने अभिभावकों से सवाल किया कि वे अपने बच्चों को कहां धकेल रहे हैं ?

तिरुमणि और उसका परिवार सोमवार को गुलमर्ग से लौट रहा था । बडगाम में मगाम के समीप उनकी गाडी पथराव में फंस गई। एक पत्थर तिरुमणि की कनपटी में आ लगा। उसे सौरा आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा, क्या कोई कल्पना कर सकता है कि एक गरीब बाप ने अपने परिवार को कश्मीर लाने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च की थी और वह अब अपने बेटे के ताबूत के साथ लौट रहा है। क्या हम यही चाहते हैं ? जब उनसे पूछा गया कि क्या इस घटना का पर्यटन पर असर होगा तो उन्होंने कहा, मैं पर्यटन की बात नहीं कर सकती यह मानवता के बारे में मूल सवाल है। यह कश्मीरियत नहीं हो सकती ! उधर जम्मू-कश्मीर मे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पथराव में पर्यटक की मौत की घटना को दुखद बताया है। उमर ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला करते हुए पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार को विफल बताया। उमर ने ट्वीट में कहा, हमने वाहन पर पत्थर फेंक कर उसमें सवार पर्यटक की हत्या कर दी। हम प्रयास करें और इस तथ्य पर सिर जोडें कि हमने एक पर्यटक पर, एक मेहमान पर पथराव कर उसकी हत्या कर दी जबकि हम पत्थरबाजों और उनके तरीकों का महिमामंडन करते हैं !
स बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने महबूबा मुफ्ती से फोन पर बातचीत कर वहां से सूबे के १३० पर्यटकों की सुरक्षित घर वापसी में उनकी मदद मांगी है। मुख्यमंत्री की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्होंने जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बातचीत कर राज्य के १३० पर्यटकों की सुरक्षित घर वापसी में मदद मांगी है। पर्यटक थिरूमणि सेल्वम के निधन पर शोक प्रकट करते हुए पलानीस्वामी ने पीडित के निकटतम परिजन को तीन लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की !

कश्मीर में पर्यटक की मौत निंदनीय : सीतारमण

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि चेन्नई के रहनेवाले २२ वर्षीय एस थिरुमणि की पथराव के दौरान मौत अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है ! नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता कि यह घटना लापरवाही से हुई या जान-बूझकर इसे अंजाम दिया गया, लेकिन यह पूरी तरह निंदनीय है। यह पूछने पर कि घाटी में व्याप्त स्थिति से निपटने में सेना के कठिन रवैये से क्या आतंकवाद में वृद्धि हुई है ? मंत्री ने कहा सशस्त्र बलों को आतंकवादियों के साथ सख्ती बनाए रखनी होगी !

Friday, 11 May 2018

स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है...मैं इसे लेकर रहूंगा' का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नेता बाल गंगाधर तिलक के अपमान का मामला सामने आया है

राजस्थान के सिलेबस में बाल गंगाधर तिलक को बताया 'आतंकवाद का जनक'

.स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है...मैं इसे लेकर रहूंगा' का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नेता बाल गंगाधर तिलक के अपमान का मामला सामने आया है दरअसल राजस्थान के स्कूलों में कक्षा 8वीं में पढ़ाई जाने वाली अंग्रेजी की सामाजिक विज्ञान की किताब में उन्हें 'आतंक का जनक' (फादर ऑफ टेररिज्म) बताया गया है. सोशल मीडिया पर इसकी निंदा करते हुए लोग कह रहे हैं कि छात्रों को गलत शिक्षा दी जा रही है.

कांग्रेस ने की किताब हटाने की मांग

बाल गंगाधर तिलक को 'आतंक का जनक' (फादर ऑफ टेररिज्म) बताए जाने पर कांग्रेस ने पुस्तक को सिलेबस से हटाने की मांग की है. वहीं प्रकाशक ने इसे अनुवाद की गलती बताते हुए सुधार करने की बात कही है. आपको बता दें, जिस स्कूल में ये किताब पढ़ाई जा रही है वह राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं. राजस्थान राज्य पाठ्यक्रम बोर्ड किताबों को हिंदी में प्रकाशित करता है इसलिये बोर्ड से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के लिए मथुरा के एक प्रकाशक द्वारा प्रकाशित संदर्भ पुस्तक को इस्तेमाल में लाया जाता है.
ये लिखा किताब में

सामाजिक विज्ञान की इस किताब के पेज नंबर 267 पर 22वें चैप्टर में तिलक के बारे में लिखा गया है कि उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन का रास्ता दिखाया था, इसलिये उन्हें ‘आतंकवाद का जनक’ कहा जाता है. पुस्तक में तिलक के बारे में 18वीं और 19वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आंदोलन के बारे में लिखा गया है. पुस्तक में तिलक के हवाले से बताया गया है कि उनका मानना था कि ब्रिटिश अधिकारियों से प्रार्थना करने मात्र से कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता. शिवाजी और गणपति महोत्सवों के जरिये तिलक ने देश में अनूठे तरीके से जागरूकता फैलाने का कार्य किया.
अनुवादक के ओर से हुई गलती

मथुरा के प्रकाशक स्टूडेंट एडवाइजर पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी राजपाल सिंह ने बताया कि गलती पकड़ी जा चुकी है जिसे संशोधित प्रकाशन में सुधार दिया गया है. उन्होंने बताया कि यह गलती अनुवादक की ओर से की गई थी. वहीं गलती के सामने आने पर पिछले माह के अंक में सुधार कर दिया गया है. इसका पहला अंक पिछले वर्ष प्रकाशित किया गया था. इतिहासकारों ने तिलक जैसी महान राष्ट्रीय विभूतियों को अनुवादक की गलतियों के कारण इस तरह बताए जाने की निंदा की है.

इसी के साथ राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने इसे देश का अपमान बताया है. उन्होंने एक बयान देते हुए कहा 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षा के सिलेबस को जिस गलत स्वरूप में पेश किया जा रहा है, उससे स्वतंत्रता सेनानियों की गरिमा को ठेस पहुंच रही है'.

पायलट ने सरकार से मांग की है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के संदर्भ में जिस किताब में गलत तथ्य लिखे गये हैं उसे सिलेबस से हटाया जाए और पुस्तक पर रोक लगा दी जाए.

Saturday, 14 April 2018

ATITHI DEVO BHAVA HIMACHAL PRADESH

15 अप्रैल - देवभूमि हिमांचल प्रदेश की स्थापना दिवस की समस्त राष्ट्रप्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं. जानिए हिमांचल के बारे में वो सच जो यकीनन आप नहीं जानते होंगे
निश्चित रूप से ये हर्ष और उल्लास का विषय है कि आज अर्थात 15 अप्रैल को देवभूमि माने जाने वाले और भारत मे देवी माँ के प्रमुख शक्तिपीठो के वास स्थल हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस है। भारत के लाखों बलिदानियों के बलिदान के बाद आज ही के दिन अर्थात 15 अप्रैल सन 1948 को 28 पहाड़ी रियासतों को एकीकृत करते हुए आपस मिलाकर नया प्रांत बनाया गया था जिसे हिमांचल प्रदेश कहा गया .. न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की सादगी अपितु वैदिक व पौराणिक पावन इतिहास समेटे हिमांचल प्रदेश में कई ऐसी बातें भी हैं, जिनकी वजह से हिमाचल पूरे देश में सबसे आगे है। इनमें से बहुत सी बातें प्रदेश की अच्छी राजनीति की वजह से संभव हो पाई है और उसका श्रेय भी प्रदेश की जनता और वहां का प्रशासन सम्भाल रहे कर्मवीरों को जाता है।


बीच मे कुछ मुद्दे आये जिसके चलते इस पावन प्रदेश की छवि को धूमिल करने के कुत्सित प्रयास हुए जिसका ज्यादातर दोष उस राजनीति को दिया जा सकता है जो मात्र वोट व सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है। बहरहाल, आज जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के बारे में कुछ ऐसी बातें, जो आपको ही नहीं बल्कि प्रत्येक भारतवंशी को हर हाल में मालूम होनी चाहिए।

Friday, 13 April 2018

भारत की धर्मनिरपेक्षता यकीनन दुनिया के लिए एक मिसाल हो सकती है

हज सब्सिडी पर रोक लगते ही दहाड़ उठा सेकुलर वकील वकील गौरव बंसल और लड़ गया मोदी सरकार से मुस्लिमों को हज सब्सिडी वापस दिलाने के लिए


भारत की धर्मनिरपेक्षता यकीनन दुनिया के लिए एक मिसाल हो सकती है . ये सेकुलर शब्द पहले भले ही भारत में कभी न रहा हो लेकिन वर्तमान समय में ये कईयों की आत्मा तक में बस गया है और उसको कायम रखने के लिए ख़ास तौर पर हिन्दू समाज हर कुर्बानी देने के लिए तैयार है . सहिष्णुता कि
अंतिम पराकाष्ठ पर खड़ा हिन्दू कश्मीर तक से भगाए जाने के बाद अपनी मूल थाती सेकुलरिज्म को साथ ले कर चल रहा है . ऐसे ही सेकुलरों में जम्मू में जिस मुकदमे में हिन्दू खुद को प्रताड़ित करने आ आरोप लगा रहे , हिन्दुओ के खिलाफ वही मुकदमा लड़ रही दीपिका हैं , भारत के वो तमाम तथाकथित फिल्म स्टार जो केवल हिन्दुओ के खिलाफ बोलते हैं , गुजरात दंगों में हिन्दुओ के खिलाफ छाती ठोंक कर खड़े हो गये बर्खास्त IPS संजीव भट्ट , मस्जिद बचाने के लिए हिन्दुओ पर गोलियां बरसा देने वाले मुलायम सिंह यादव आदि प्रमुख हैं . अब उन्ही में एक नया नाम जुड़ा है अधिवक्ता गौरव बंसल . एडवोकेट गौरव बंसल ने नई हज नीति में दिव्यांगों को हज के लिए अयोग्य ठहराने को असंवैधानिक बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी  ये एक वकील हैं जो पहले तो साधारण मुकदमों के लिए जाने जाते थे लेकिन जब से इन्होने सुना कि मोदी सरकार ने हज यात्रा में जाने वाले मुस्लिमों में दिव्यांगो का कोटा खत्म कर दिया है अब से इन्होने एक मिनट भी बिना देर गंवाए मोदी सरकार को सबक सिखाने की ठान ली और दायर कर दिया मोदी सरकार के खिलाफ अपनी तरफ से एक मुकदमा जिसमे इन्होने मोदी सरकार के दिव्यांग मुस्लिमों की हज सब्सिडी खत्म करने को चुनौती दे डाली गयी . इनकी याचिका पर मोदी सरकार के प्रतिनिधि को अदालत में हाजिर भी होना पडा और सफाई भी देनी पड़ी . गौरव बंसल नाम के इन धर्मनिरपेक्ष वकील के चलते ही मुस्लिमों में आशा जगी है अपनी सब्सिडी वापस पाने की और इन्होने अचानक ही संजीव भट्ट , तीस्ता सीतलवाड़ जैसा एक बड़ा नाम कमा लय है मुस्लिम समाज के बीच में .. गौरव बंसल की याचिका पर अभी अदालत का फैसला आना बाकी है लेकिन उसके पहले ही इन्होने अपनी एक अलग पहिचान एक बड़े सेकुलर के रूप में बना ली है .


Wednesday, 28 March 2018

पिछले तीन साल में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड लगभग 4 गुना तक बढ़ गया है

3 साल में चार गुना बढ़ी नौकरी छोड़ने वाले जवानों की संख्या, 14,587 ये है

पिछले तीन साल में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड लगभग 4 गुना तक बढ़ गया है. बेहतर करियर की चाह में पिछले 3 साल में 14,587 अधिकारियों और जवानों ने स्वैच्छा से अर्धसैनिक बलों की नौकरी छोड़ी है. 

सरकार रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर रही है, देश की सुरक्षा में तैनात जवानों को बेहतर सुविधाएं दिए जाने का दावा किया जा रहा है. लेकिन, नौकरी छोड़ने वाले जवानों की बढ़ती संख्या कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. पिछले तीन साल में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड लगभग 4 गुना तक बढ़ गया है. बेहतर करियर की चाह में पिछले 3 साल में 14,587 अधिकारियों और जवानों ने स्वैच्छा से अर्धसैनिक बलों की नौकरी छोड़ी है. यह आंकड़ा साल 2015 से 2017 का है.
गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल के 14,587 जवानों और अधिकारियों ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया है. जबकि 2015 में यह आंकड़ा 3425 ही था. 
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ों को बारीकी से देखा जाए तो सीआरपीएफ और बीएसएफ के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड सबसे ज्यादा है. 2015 में सीआरपीएफ के 1376 जवानों ने नौकरी छोड़ी, जबकि 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 5123 पर पहुंच गया. यही हाल बीएसएफ के जवानों का भी रहा. आंकड़े बताते हैं कि 2015 में 909 बीएसएफ जवानों ने नौकरी छोड़ी, वहीं 2017 में यह आंकड़ा 6400 को पार कर गया.
सुरक्षा के लिहाज से अहम हैं सीआरपीएफ और बीएसएफ
आपको बता दें कि इन दोनों ही फोर्सज (सीआरपीएफ और बीएसएफ) को बॉर्डर पर सुरक्षा के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत अहम माना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक बीएसफ पर बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में देश की सुरक्षा का जिम्मा होता है. 2015 से 2017 के बीच 7324 लोगों ने बीएसएफ की नौकरी छोड़ दी. दूसरी तरफ देश की आंतरिक सुरक्षा खास तौर पर नक्सल प्रभावित और जम्मू-कश्मीर इलाकों में सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के जवानों पर होता है. पिछले 3 साल में सीआरपीएफ के 6501 जवानों/अधिकारियों ने स्वैच्छा से रिटायरमेंट लिया.
ये हो सकता है कारण जवानों और अधिकारियों के नौकरी छोड़ने का ये सिलसिला 2024 तक जारी रहने वाला है. एक अधिकारी का कहना है कि बहुत से जवान और अधिकारी बेहतर करियर के लिए प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां तलाश रहे हैं. सिक्योरिटी एजेंसी और ऐसे दूसरे करियर विकल्प भी जॉब छोड़ने के कारणों में से एक हैं. 

Tuesday, 27 March 2018

विधायकों का वेतन तीन गुना किया गया

कर्ज में डूबे उत्तराखंड के मंत्रियों और विधायकों की बल्ले-बल्ले, दोगुनी हुई सैलरी



उत्तराखंड विधानसभा ने विधायकों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर विविध संशोधन विधेयक पास कर दिया है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक विविध संशोधन विधेयक के पास होने से प्रदेश के विधायकों की सैलरी करीब 100 फीसदी तक बढ़ जाएगी.
देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा ने विधायकों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर विविध संशोधन विधेयक पास कर दिया है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक विविध संशोधन विधेयक (मिसलेनियस अमेंडमेंट बिल) के पास होने के बाद प्रदेश के विधायकों की सैलरी करीब 100 फीसदी तक बढ़ जाएगी. इस विधेयक को राज्य सरकार ने शनिवार (24 मार्च) को ही सदन में पेश किया था, जिसे बजट सत्र के आखिरी दिन पास कर दिया गया. विधायक लंबे समय से वेतन भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे थे. विधायकों की मांग पर तदर्थ समिति (एडहॉक कमेटी) का गठन किया गया था. विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
विधायकों का वेतन तीन गुना किया गया
विधायकों के वेतन 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए किया गया है. मंत्रियों के वेतन 45 हजार रुपए से बढ़ाकर 90 हजार रुपए किया गया है. स्पीकर का वेतन 55,000 हजार रुपए से बढ़ाकर 1.10 लाख रुपए किया गया है. डिप्टी स्पीकर की सैलरी भी दोगुनी कर दी गई है. खास बात ये ही विधायकों की सैलरी के साथ जुड़े भत्ते भी दोगुना से तीन गुणा तक बढ़ा दिए गए हैं.
उत्तराखंड के 51 विधायक करोड़पति
रिपोर्ट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के मुताबिक उत्तराखंड के 69 में से 51 विधायक करोड़पति हैं. 51 करोड़पतियों में 10 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले 5, 5-10 करोड़ की संपत्ति वाले 5 और 1-5 करोड़ की संपत्ति वाले 17  विधायक हैं.


इससे पहले 2014 में विजय बहुगुणा सरकार ने विधायकों की सैलरी बढ़ाई थी
इस कमेटी ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट सदन में रखी थी. कैबिनेट की बैठक में भी वेतन भत्ते को बढ़ाने की मंजूरी मिल गई थी. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने विधानसभा में विविध संशोधन विधेयक (मिसलेनियस अमेंडमेंट बिल) पेश किया, जिसे सदन से मंजूरी मिल गई. वर्तमान में उत्तराखंड में विधायकों की सैलरी करीब 1.6 लाख रुपए हर महीने है. स्पीकर और मंत्रियों की सैलरी तो इससे कही ज्यादा है. जनवरी 2014 में विजय बहुगुणा सरकार ने विधायकों के वेतन भत्तों में जबरदस्त बढ़ोतरी की थी. एकबार फिर त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार विधायकों और मंत्रियों की सैलरी बढ़ाने जा रही है.
सैलरी के अलावा ये सुविधाएं भी
विधायकों को सैलरी के अलावा कई तरह की सुविधाएं भी मिलती हैं. जानकारी के मुताबिक एक विधायक को एक साल में तीन लाख कूपन (रेल और हवाई) की मिलती है. विधायकों और उनके परिवारों को क्लास वन ऑफिसर की तरह चिकित्सा सुविधा. इसके अलावा दो मोबाइल फोन, एक टेलीफोन और मकान निर्माण और वाहन क्रय के लिए 8-8 लाख लोन की भी सुविधा है.

Wednesday, 21 March 2018

आज ही क्रूर हत्यारे नादिरशाह ने अपनी बर्बर सेना को दिया था दिल्ली के पुरुषों के नरसंहार और नारियो के बलात्कार का आदेश

22 मार्च- आज ही क्रूर हत्यारे नादिरशाह ने अपनी बर्बर सेना को दिया था दिल्ली के पुरुषों के नरसंहार और नारियो के बलात्कार का आदेश


भले ही आज मोब लिंचिंग और तमाम अन्य घटनाओं का दुष्प्रचार कर के हिन्दू समाज को सोची समझी साजिश के साथ बदनाम किया जा रहा हो लेकिन इतिहास बताता है कि हत्यारे कौन हैं , कौन हैं लुटेरे , किस ने माना इस भूमि को अपना और किस ने किया इसको पराया .. इन तमाम सवालों के जवाब अब तक जनता को मिल भी गये होते लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से एक ही परिवार के आस पास रख कर एक ही प्रकार की बदनामी करते रहने वालों को ये समझ में नहीं आया कि उन्होंने भारत की संस्कृति की जड पर वार किया है और महिमामंडित किया है उन कातिलों को जिन्होंने बहाया है भारत में भारत वालों का ही खून .आज है 22 मार्च .. ये वो दिन है जिस दिन खुलेआम एक उस लुटेरे और हत्यारे ने अपनी सेना को हिन्दुओ के नरसंहार का आदेश दिया था जिसके खिलाफ लिखने में हमारे तमाम तथाकथित इतिहासकार और सेकुलर जमात के बुद्धिजीवी न जाने क्यों शर्म जैसी महसूस करते हैं . वो दिन था 22 मार्च 1739 जब हत्यारे और धर्मांध नादिर शाह ने अपनी सेना को दिल्ली मे जनसंहार की इजाजत दी.. इसके साथ नारियो का बलात्कार भी हुआ और चौराहों पर कत्ल भी .. ये बलात्कार और कत्लेआम 58 दिनों तक चलता रहा और नादिरशाह की हत्यारी फ़ौज में एक भी ऐसा बुद्धिजीवी और सेकुलर नहीं था जो कम से कम एक बार इस क्रूर को इस नरसंहार को रोकने के लिए कह दे .इस लुटेरे क्रूर हत्यारे ने दिल्ली में प्रवेश तो 20 मार्च को ही कर लिया था . 20 मार्च 17३८ को दिल्ली मेें प्रवेश कर नादिरशाह ने 20000 के करीब लोगों का कत्ल कर दिया गया जो केवल अपनी क्रूरता का खौफ जताने के मकसद से था ..उसके बर्बर सैनिक राजधानी में घुस पड़े और उन्होंने लूटमार का बाज़ार गर्म कर दिया। उसके कारण दिल्ली के हज़ारों नागरिक मारे गये और वहाँ भारी लूट की गई। इस लूट में नादिरशाह को बेशुमार दौलत मिली थी। उसे 20 करोड़ की बजाय 30 करोड़ रुपया नक़द मिला। उसके अतिरिक्त ढेरो जवाहरात, बेगमों के बहुमूल्य आभूषण, सोने-चाँदी के अगणित वर्तमान तथा अन्य वेश-क़ीमती वस्तुएँ उसे मिली थीं। इनके साथ ही साथ दिल्ली की लूट में उसे कोहिनूर हीरा और शाहजहाँ का 'तख्त-ए-ताऊस' (मयूर सिंहासन) भी मिला था। वह बहुमूल्य मयूर सिंहासन अब भी ईरान में है या नहीं, इसका ज्ञान किसी को नहीं है। 

नादिरशाह के हाथ पड़ने वाली शाही हरम की सुंदरी बेगमों के अतिरिक्त मुहम्मदशाह की पुत्री 'शहनाज बानू' भी थी, जिसका विवाह उसने अपने पुत्र 'नसरूल्ला ख़ाँ' के साथ कर दिया। नादिरशाह प्राय: दो महीने तक दिल्ली में लूटमार करता रहा था। उसके कारण दिल्ली उजाड़ और बर्बाद सी हो गई थी। जब वह यहाँ से जाने लगा, तब करोड़ो की संपदा के साथ ही साथ वह 1,000 हाथी, 7,000 घोड़े, 10,000 ऊँट, 100 खोजे, 130 लेखक, 200 संगतराश, 100 राज और 200 बढ़ई भी अपने साथ ले गया था। नादिरशाह 17३८ में ईरान वापस गया और 17४६ में उसकी मृत्यु हो गई। अय्याशी और कुकर्म के प्रतीक रहे इस क्रूर लुटेरे और आक्रान्ता को अपने जीवन का अधिकतर समय हरम तथा हिजड़ों में बिताने तथा उसके असंयत और विलासी आचरण के कारण रंगीला कहा गया। सवाल ये है कि 58 दिन तक चले इस महापाप रूपी इतिहास को क्यों नहीं बताते मोब लिंचिंग का प्रचार करने वाले ? 

लिंगायतों का राजनैतिक रुझान -

कर्नाटक के लिंगायत विवाद पर देश की प्रतिक्रिया 


जैसे ही कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने लिंगायत समुदाय को हिन्दू धर्म से प्रथक धर्म घोषित किया गया, सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा | लोगों के गुस्से की बानगी देखिये -

हिन्दू द्रोही पार्टी का खात्मा कब होगा?

लिंगायत हिन्दू नही है 

अगला कदम मराठा हिन्दू नही है राजपूत हिन्दू नही है जाट हिन्दू नही है ये हिन्दू नही है वो हिन्दू नही है?

इस पार्टी को नष्ट होना ही होगा अब।

टुकड़ो के खातिर इसकी चमचागिरी करने वाले भी नष्ट होंगे।लिंगायत को अलग धर्म बनाकर हिन्दुओ को तोड़ने की कोशिश का जबरदस्त असर तय है।अभी तक तो ये आरक्षण के लॉलीपॉप से जातियो को लड़वाते थे अब ये हिन्दू नही होने का फतवा देने लगे है।

कांग्रेस ने लिंगायत समाज को हिन्दू से अलग धर्म बनाने का कानून पास किया है कर्नाटक में...

जल्द ही
ब्राह्मण कायस्थ नाई ठाकुर बनिया यादव जाट पाटीदार हरिजन धोबी को भी हिन्दू से अलग धर्म का घोषित कर देगी 2019 चुनाव जीतने के लिए। ये लोग हिन्दू जाति को अलग धर्म बनाने का प्रयास कर चुनाव जीत के सपने देख रहे हैं।

लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने दे दिया.
और राहुल गांधी ये दावा करते हैं कि हम बांटने की राजनीति नहीं करते. 😉😃
दम है तो अहमदिया और कादियान को अलग धर्म का दर्जा देकर दिखाएं.
बरेलवी मसलक को अलग माने,
देवबंदी को अलग.
शिया और सुन्नी को इस्लाम में ही
अलग दर्जा देकर दिखाएं.
सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि हिंदुत्व जीवन शैली है, मनोदशा है.
लेकिन समझे तो वो जो हिंदू हो. जिसका बपतिस्मा वेटिकन में हुआ हो, उसकी समझ से ये बाहर की बात है.
यूं भी कांग्रेस भारत को बांटने के बाद से सिर्फ बांटने का ही काम करती रही है.
अगड़े, पिछड़े, दलितों को बांटना.
भिंडरावाला को आगे लाकर सिखों को बांटना.
श्रीलंका में दखल देकर तमिलों को बांटना.
इधर राम मंदिर का ताला खुलवाना और उधर शाहबानो मामले में कानून बनाना, बांटना ही तो था.
राहुल गांधी भी अपने पापा और दादी के पदचिह्नों पर हैं.
गुजरात में पटेलों को बांटने की कोशिश.
अब राजस्थान में राजपूतों को बांटने की कोशिश.
महाराष्ट्र में दलितों को सुलगाने की कोशिश.
और अब तो हद हो गई, लिंगायत को अलग धर्म की मान्यता देना. इसमें खास बात ये है कि ये राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है.
खैर कांग्रेस को कानून, संविधान, परंपराओं, मर्यादा और क्षेत्राधिकार से कोई मतलब नहीं है. क्योंकि ये परिवार तो न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका, संविधान सबको अपनी जागीर मानता है.
लेकिन बाटने की मानसिकता वालों और उसके गुर्गों सुन लो. हिंदू नहीं बंटेगा. हिंदू के टुकड़े नहीं होंगे. इतिहास की किताब खोलकर देख लो, जिसने बांटने की कोशिश की है, टुकड़े-टुकड़े हो गया... 

और सबसे बेहतर प्रतिक्रिया है डॉक्टर डेविड फ्राले की - 

एक ओर तो कांग्रेस नेता राहुल गाँधी और शशि थरूर स्वयं को हिन्दू घोषित करते हैं, वहीं दूसरी ओर हिन्दू को विभिन्न सम्प्रदायों में बांटकर ईसाई मिशनरीयों की रणनीति का अनुशरण करते हैं | यह पांडवों जैसा नहीं, असुरों जैसा कृत्य है | 


आईये अब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश करते हैं -

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने लिंगायत और वीरशैव लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक दर्जा देने की केंद्र से सिफारिश करने का फैसला किया है। इसके पूर्व राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस नागामोहन दास की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिसने लिंगायत समुदाय के लिए अलग धर्म के साथ अल्पसंख्यक दर्जे की सिफारिश की थी | कर्नाटक सरकार ने नागमोहन समिति की सिफारिशों को स्टेट माइनॉरिटी कमीशन ऐक्ट की धारा 2डी के तहत मंजूर कर लिया |
ख़ास बात यह है कि राज्य सरकार इस मामले में स्वयं कुछ नहीं कर सकती, उसे अब ये सिफारिश केंद्र सरकार के पास भेजनी होगी और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार ही करेगी |
स्मरणीय है कि बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं। यह समुदाय राज्य में संख्या बल के हिसाब से मजबूत और राजनीतिक रूप से काफी प्रभावशाली है। राज्य में लिंगायत/वीरशैव समुदाय की कुल आबादी में 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी होने का अनुमान है। इन्हें कांग्रेस शासित कर्नाटक में बीजेपी का पारंपरिक वोट माना जाता है। 

किन्तु इस निर्णय का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायत और वीरशैव दोनों समुदाय को अल्‍पसंख्‍यक समुदाय का दर्जा दिए जाने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश की है। जबकि इसके पूर्व तक स्वयं कांग्रेस के नेता और मंत्री अक्‍सर दोनों को अलग-अलग धर्म बताते रहे हैं। लेकिन यू टर्न लेकर राज्‍य सरकार ने वीरशैव को भी लिंगायत का हिस्‍सा बना दिया।' 

वीरशैवों का नेतृत्व करने वाले एक संत एवं बलेहोनुर स्थित रम्भापुरी पीठ के श्री वीर सोमेश्वर शिवाचार्य स्वामी ने कैबिनेट के इस फैसले की निंदा की है। उन्‍होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की साजिश के बाद सिफारिश स्वीकार की गई लेकिन वीरशैव मिल कर इसके खिलाफ लड़ेंगे। 
आइए जानते हैं कि क्या है यह लिंगायत और वीरशैव प्रकरण - 
लिंगायत समाज मुख्य रूप से दक्षिण भारत में है. लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है. कर्नाटक की जनसंख्या में लिंगायत और वीरशैव समुदाय की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत है. इस समुदाय को बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है. 

कौन हैं लिंगायत और क्या हैं इनकी परंपराएं? 

लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है. कर्नाटक की आबादी का 18 फीसदी लिंगायत हैं. पास के राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लिंगायतों की अच्छी खासी आबादी है. 

लिंगायत और वीरशैव कर्नाटक के दो बड़े समुदाय हैं | इन दोनों समुदायों का जन्म 12वीं शताब्दी के समाज सुधार आंदोलन के परिणाम स्वरूप हुआ जिसका नेतृत्व समाज सुधारक बसवन्ना ने किया था, जो खुद ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे किन्तु जन्म आधारित व्यवस्था की जगह कर्म आधारित व्यवस्था में विश्वास करते थे | 

लिंगायत सम्प्रदाय के लोग मूर्ति पूजा तो नहीं करते, किन्तु एक अंडाकार "इष्टलिंग" को धागे से अपने शरीर पर बांधते हैं | लिंगायत इस इष्टलिंग को आंतरिक चेतना का प्रतीक मानते हैं और निराकार परमात्मा को मानव या प्राणियों के आकार में कल्पित न करके विश्व के आकार में इष्टलिंग को मानते हैं | 

लिंगायत पुनर्जन्म में भी विश्वास नहीं करते हैं. लिंगायतों का मानना है कि एक ही जीवन है और कोई भी अपने कर्मों से अपने जीवन को स्वर्ग और नरक बना सकता है. 

लिंगायत में शवों को दफनाने की परंपरा 

लिंगायत परंपरा में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी अलग है. लिंगायत में शवों को दफनाया जाता है. लिंगायत परंपरा में मृत्यु के बाद शव को नहलाकर बिठा दिया जाता है. शव को कपड़े या लकड़ी के सहारे बांध जाता है. जब किसी लिंगायत का निधन होता है तो उसे सजा-धजाकर कुर्सी पर बिठाया जाता है और फिर कंधे पर उठाया जाता है. इसे विमान बांधना कहते हैं. कई जगहों पर लिंगायतों के अलग कब्रिस्तान होते हैं. 

वर्तमान में बसवन्ना के अनुयायियों की दो धाराएँ चल रही हैं | एक का मानना है कि इष्ट लिंग और भगवान बसवेश्वर के बताए गए नियम हिंदू धर्म से बिल्कुल अलग हैं जबकि अन्य लोग मानते हैं कि बसवन्ना का आंदोलन भक्ति आंदोलन की ही तरह था और उसका मकसद हिंदू धर्म से अलग होना नहीं था | 

आम मान्यता ये है कि वीरशैव और लिंगायत एक ही लोग होते हैं किन्तु वीरशैव शिव की मूर्ति पूजा भी करते हैं | भीमन्ना ऑल इंडिया वीरशैव महासभा के पूर्व अध्यक्ष भीमन्ना खांद्रे कहते हैं कि वीरशैव और लिंगायतों में कोई अंतर नहीं है |" 

कर्नाटक में लगभग 17 फीसदी लिंगायत को धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक का दर्जा देना एक लोलीपोप के समान है | कहा जा रहा है कि उन्हें अल्पसंख्यक आरक्षण का फायदा मिलेगा, किन्तु सवाल उठता है कि कैसे ? क्या अन्य अल्पसंख्यक समुदाय जैसे मुसलमान, ईसाई, जैन, बौद्ध और सिख, इसे आसानी से सहन कर लेंगे कि एक अगड़ी जाति उनके हक़ पर अधिकार जमाने आ जाए ? और प्रथक से देने का प्रयास किया तो कोर्ट बीच में आयेगा ही, जैसा कि अब तक होता आया है | कुल मिलाकर यह एक चुनावी शिगूफे के अलावा कुछ नहीं है | 

लिंगायतों का राजनैतिक रुझान - 

1980 के दशक में लिंगायतों ने राज्य के नेता रामकृष्ण हेगड़े पर भरोसा किया था | बाद में लिंगायत कांग्रेस के वीरेंद्र पाटिल के भी साथ गए | इसके बाद लिंगायत समुदाय ने फिर से कांग्रेस से दूरी बना ली और फिर से हेगड़े का समर्थन करने लगे | इसके बाद लिंगायतों ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को अपना नेता चुना, किन्तु जब बीजेपी ने येदियुरप्पा को सीएम पद से हटाया तो इस समुदाय ने बीजेपी से मुंह मोड़ लिया और नतीजा यह निकला कि कांग्रेस सत्ता में आ गई |

Friday, 16 March 2018

108 उपनिषदों की सूची

108 उपनिषदों की सूची
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ईशादि १०८ उपनिषदों की सूची –
१.ईश = शुक्ल यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्
२.केन उपनिषद् = साम वेद, मुख्य उपनिषद्
३.कठ उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्
४.प्रश्नि उपनिषद् = अथर्व वेद, मुख्य उपनिषद्
५.मुण्डक उपनिषद् = अथर्व वेद, मुख्य उपनिषद्
६.माण्डुक्य उपनिषद् = अथर्व वेद, मुख्य उपनिषद्
७.तैत्तिरीय उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्
८.ऐतरेय उपनिषद् = ऋग् वेद, मुख्य उपनिषद्
९.छान्दोग्य उपनिषद् = साम वेद, मुख्य उपनिषद्
१०.बृहदारण्यक उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, मुख्य उपनिषद्
११.ब्रह्म उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
१२.कैवल्य उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
१३.जाबाल उपनिषद् (यजुर्वेद) = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
१४.श्वेताश्वतर उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
१५.हंस उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, योग उपनिषद्
१६.आरुणेय उपनिषद् = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
१७.गर्भ उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
१८.नारायण उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, वैष्णव उपनिषद्
१९.परमहंस उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
२०.अमृत-बिन्दु उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
२१.अमृत-नाद उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
२२.अथर्व-शिर उपनिषद् = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
२३.अथर्व-शिख उपनिषद् =अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
२४.मैत्रायणि उपनिषद् = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
२५.कौषीतकि उपनिषद् = ऋग् वेद, सामान्य उपनिषद्
२६.बृहज्जाबाल उपनिषद् = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
२७.नृसिंहतापनी उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
२८.कालाग्निरुद्र उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
२९.मैत्रेयि उपनिषद् = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
३०.सुबाल उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
३१.क्षुरिक उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
३२.मान्त्रिक उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
३३.सर्व-सार उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
३४.निरालम्ब उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
३५.शुक-रहस्य उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
३६.वज्रसूचि उपनिषद् = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
३७.तेजो-बिन्दु उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
३८.नाद-बिन्दु उपनिषद् = ऋग् वेद, योग उपनिषद्
३९.ध्यानबिन्दु उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
४०.ब्रह्मविद्या उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
४१.योगतत्त्व उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
४२.आत्मबोध उपनिषद् = ऋग् वेद, सामान्य उपनिषद्
४३.परिव्रात् उपनिषद् (नारदपरिव्राजक) = अथर्व वेद, संन्यास उपनिषद्
४४.त्रिषिखि उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, योग उपनिषद्
४५.सीता उपनिषद् = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
४६.योगचूडामणि उपनिषद् = साम वेद, योग उपनिषद्
४७.निर्वाण उपनिषद् = ऋग् वेद, संन्यास उपनिषद्
४८.मण्डलब्राह्मण उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, योग उपनिषद्
४९.दक्षिणामूर्ति उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
५०.शरभ उपनिषद् = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
५१.स्कन्द उपनिषद् (त्रिपाड्विभूटि) = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
५२.महानारायण उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
५३.अद्वयतारक उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
५४.रामरहस्य उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
५५.रामतापणि उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
५६.वासुदेव उपनिषद् = साम वेद, वैष्णव उपनिषद्
५७.मुद्गल उपनिषद् = ऋग् वेद, सामान्य उपनिषद्
५८.शाण्डिल्य उपनिषद् = अथर्व वेद, योग उपनिषद्
५९.पैंगल उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
६०.भिक्षुक उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
६१.महत् उपनिषद् = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
६२.शारीरक उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
६३.योगशिखा उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
६४.तुरीयातीत उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
६५.संन्यास उपनिषद् = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
६६.परमहंस-परिव्राजक उपनिषद् = अथर्व वेद, संन्यास उपनिषद्
६७.अक्षमालिक उपनिषद् = ऋग् वेद, शैव उपनिषद्
६८.अव्यक्त उपनिषद् = साम वेद, वैष्णव उपनिषद्
६९.एकाक्षर उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
७०.अन्नपूर्ण उपनिषद् = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
७१.सूर्य उपनिषद् = अथर्व वेद, सामान्य उपनिषद्
७२.अक्षि उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
७३.अध्यात्मा उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
७४.कुण्डिक उपनिषद् = साम वेद, संन्यास उपनिषद्
७५.सावित्रि उपनिषद् = साम वेद, सामान्य उपनिषद्
७६.आत्मा उपनिषद् = अथर्व वेद, सामान्य उपनिषद्
७७.पाशुपत उपनिषद् = अथर्व वेद, योग उपनिषद्
७८.परब्रह्म उपनिषद् = अथर्व वेद, संन्यास उपनिषद्
७९.अवधूत उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
८०.त्रिपुरातपनि उपनिषद् = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
८१.देवि उपनिषद् = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
८२.त्रिपुर उपनिषद् = ऋग् वेद, शाक्त उपनिषद्
८३.कठरुद्र उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
८४.भावन उपनिषद् = अथर्व वेद, शाक्त उपनिषद्
८५.रुद्र-हृदय उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
८६.योग-कुण्डलिनि उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, योग उपनिषद्
८७.भस्म उपनिषद् = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
८८.रुद्राक्ष उपनिषद् = साम वेद, शैव उपनिषद्
८९.गणपति उपनिषद् = अथर्व वेद, शैव उपनिषद्
९०.दर्शन उपनिषद् = साम वेद, योग उपनिषद्
९१.तारसार उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, वैष्णव उपनिषद्
९२.महावाक्य उपनिषद् = अथर्व वेद, योग उपनिषद्
९३.पञ्च-ब्रह्म उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, शैव उपनिषद्
९४.प्राणाग्नि-होत्र उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद्
९५.गोपाल-तपणि उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
९६.कृष्ण उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
९७.याज्ञवल्क्य उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
९८.वराह उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
९९.शात्यायनि उपनिषद् = शुक्ल यजुर्वेद, संन्यास उपनिषद्
१००.हयग्रीव उपनिषद् (१००) = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
१०१.दत्तात्रेय उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
१०२.गारुड उपनिषद् = अथर्व वेद, वैष्णव उपनिषद्
१०३.कलि-सन्तारण उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, वैष्णव उपनिषद्
१०४.जाबाल उपनिषद् (सामवेद) = साम वेद, शैव उपनिषद्
१०५.सौभाग्य उपनिषद् = ऋग् वेद, शाक्त उपनिषद्
१०६.सरस्वती-रहस्य उपनिषद् = कृष्ण यजुर्वेद, शाक्त उपनिषद्
१०७.बह्वृच उपनिषद् = ऋग् वेद, शाक्त उपनिषद्
१०८.मुक्तिक उपनिषद् (१०८) = शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद।


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Tuesday, 13 March 2018

2018 में रामनवमी कब है ?जानिए रामनवमी का शुभ मुहूर्त

आदि राम तपोवनादि गमनंहत्वा मृगं कांचनम्।
वैदीहीहरणं जटायुमरणंसुग्रीवसंभाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणंलंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्एतद्धि रामायणम्।।

रामनवमी का मुहूर्त
रामनवमी मुहूर्त : 11:14:04 से 13:41:03 तक
अवधि : 2 घंटे 26 मिनट रामनवमी,मध्याह्न समय : 12:27:33 मिनट तक
जय श्री राम,हमारे देश में रामनवमी का पावन और पवित्र त्योहार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।जैसा कि हम सब जानते हैं कि भगवान विष्णु के 7वें अवतार प्रभु श्रीराम थे।हर वर्ष हिन्दू कैंलेडर के अनुसार चैत्र मास की नवमी तिथि को श्रीराम नवमी देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है और चैत्र मास की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक शक्ति की आराधना और सादना का महापर्व नवरात्रि भी मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर भक्त श्रद्धालु व्रत रखते हुए जागरण और मां दुर्गा की पूजा करते हैं ।

रामनवमी उत्सव का हर्षोल्लास
हमारे देश में हिन्दू मतावलम्बी श्री रामनवमी का त्योहार सच्ची श्रद्धा के साथ मनाते हैं वहीं वैष्णव संप्रदाय और संत समाज इस खास अवसर पर विशेष पूजा अर्चना और साधना में समय व्यतित करता है ।
रामनवमी के विशेष अवसर पर भक्तगण श्रीरामचरितमानस का पाठ,  रामरक्षा स्त्रोत का पाठ, भजन-कीर्तन के साथ ही भगवान राम की मूर्ति को फूल-माला से सजाते हैं और घर में स्थापित करते हैं। सात ही  भगवान राम की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं

जानिए राम नवमी की सरल पूजा विधि
रामनवमी के विशेष अवसर पर प्रात: सबसे पहले स्नान करके पवित्र होकर पूजा स्थल पर पूजन सामग्री के साथ हमें बैठना चाहिए,  पूजा में तुलसी दल और कमल का फूल अवश्य रखना चाहिए,और फिर श्रीराम नवमी की पूजा षोडशोपचार विधि से करें, सात ही खीर और फल-मूल को प्रसाद के रूप में तैयार करें।  पूजा संपन्न होने के बाद घर की सबसे छोटी महिला परिवार कुटुंब के सभी लोगों के माथे पर तिलक लगाए और प्रसाद ग्रहण करें।

श्रीरामनवमी के संबंध में हिन्दू धार्मिक पौराणिक मान्यताएँ
जैसा कि हमारे धर्मशास्त्रों में वर्णित है,उसके अनुसार श्री रामनवमी की कहानी लंकापति रावण से शुरू होती है।राक्षसराज रावण के राज में जब आम जन और संत त्राहिमाम करने लगे,देवगण परेशान हो गए तब प्रार्थना करने के लिए भगवान विष्णु के पास गए।और फिर राक्षसों का विनाश और संहार करने के लिए,मानव जाति,धर्म की रक्षा करने के लिए चक्रवर्ती नरेश, महान प्रतापी महाराज दशरथ और मैया कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया। तभी से चैत्र नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाने की परंपरा प्रारंभ। ऐसा कहा जाता है कि नवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने श्रीरामचरित मानस की रचना भी प्रारंभ की थी।

Monday, 12 March 2018

आज भारत जैसे देश में जहां हिन्दुओं की एक बड़ी आबादी रहती है वे ही इस भाषा व संस्कृति को भूलते जा रहे हैं तथा पश्चिमी भाषा, संस्कृति व सभ्यता को अपनाने की ओर अपना झुकाव बढ़ा रहे हैं।

हिंदू धर्म के इन तथ्यों से अनजान हैं अधिकांश भारतीय


पूर्ण जानकारी का महत्व

जब हमें किसी विषय की पर्याप्त जानकारी नहीं होती तो हम कही-सुनी बातों पर भी विश्वास करने लगते हैं। उसी जानकारी के आधार पर विभिन्न निष्कर्षों पर भी आते हैं लेकिन किसी विषय का सार निकालने से पहले हमें उसकी पूर्ण नहीं तो पर्याप्त जानकारी होनी बेहद जरूरी है।

धर्म

धर्म एक ऐसा विषय है जिसकी अधूरी जानकारी के आधार पर लोग छोटी सी बात को भी बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। एक झूठ को सच साबित करने में लगे रहते हैं और विभिन्न अंधविश्वासों को धार्मिक विश्वास की मान्यता देते हैं।

अनजाने तथ्य

इस आर्टिकल में हिन्दू धर्म से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्य हैं जिनसे आज भी मनुष्य अनजान है। और अगर जानकारी रखता भी है तो अधूरी या फिर गलत, जो इस धर्म को गलत राह पर ले जाने के लिए प्रेरित कर रही है।


हिन्दू धर्म का सिद्धांत

किसी का कहना है कि हिन्दू धर्म बहुदेववादी तरीके का पालन करता है, तो किसी का मानना है कि यह धर्म एकेश्वरवादी सिद्धांत से बना है। लेकिन तथ्यों की मानें तो हिन्दू धर्म इन सभी सिद्धातों से पूरित है।

मार्ग अनेक

यह एक ऐसा धर्म है जो किसी को एक सिद्धांत में नहीं बांधता। हिन्दू धर्म का मानना है कि ईश्वर तक पहुंचने के साधन काफी सारे हैं लेकिन परिणाम एक ही है। इसलिए दुनिया को ‘भगवान’ का नाम देने वाले इस धर्म में अनेक देवी-देवताओं को पूजा जाता है।



चार वेद

हिन्दू धर्म के चार वेद – ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद तथा यजुर्वेद, सभी वेद अपने आप में आज भी मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं। हिन्दू धर्म के अनुयायी इन सभी वेदों एवं पौराणिक ग्रंथों को अपना गुरु रूप मानकर अपनी कठिनाइयों का समाधान पाते हैं।


महान ग्रंथ

हिन्दू धर्म के दो महान ग्रंथ- रामायण एवं महाभारत, स्वयं मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। परन्तु आज का आधुनिक मनुष्य इन सिद्धांतों को खुद पर कितना लागू करता है यह एक अलग बात है।

शक्ति की प्रतीक देवी

आजकल लोग स्त्री को अपने बराबर समझें या ना समझें, लेकिन हिन्दू धर्म ने हमेशा से ही स्त्री रूपी ‘शक्ति’ को देवों के समान महान माना है। हिन्दू धर्म की त्रिमूर्ति हैं ब्र्ह्मा, विष्णु एवं महेश (शिव)। भगवान ब्रह्मा जहां सृष्टि की संरचना के लिए पुराणों में उल्लिखित हैं वहीं विष्णुजी को इस संसार का पालनहार माना गया है।

हिन्दू धर्म की त्रिमूर्ति

तथा भगवान शिव भक्तों की इच्छाओं को पूरित करने एवं अपने रौद्र रूप से बुरे प्रभाव को नष्ट करने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म ने एक देवी को हमेशा ही शक्ति का प्रतीक माना है।

प्रत्येक देवी का शक्ति रूप

वह देवी चाहे कोई भी हो, मां लक्ष्मी, माता पार्वती, मां दुर्गा या इनका कोई स्वरूप। प्रत्येक देवी को एक शक्ति के रूप में प्रकट किया गया है जो पापियों का संहार करने के लिए हमेशा ही मौजूद हैं।

सबसे पुराना धर्म

यदि हिन्दू धर्म को अन्य विश्व प्रसिद्ध धर्मों से तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो यह दुनिया के सबसे पुराने धर्म में गिना जाता है। लेकिन यदि आप हिन्दू धर्म के किसी अनुयायी से ऐसा ही कोई प्रश्न करें कि हिन्दू धर्म कितना पुराना है तो वह इसकी गणना लाखों या करोड़ों वर्ष पुरानी भी दे सकता है।

हिन्दू धर्म का समय चक्र

क्योंकि हिन्दू धर्म में समय का चक्र अन्य धर्मों के समय चक्र से काफी भिन्न है। भगवान ब्रह्मा ने समय को ‘कल्प’ के रूप में प्रदर्शित किया था और इस प्रत्येक कल्प में 14 ‘मनवंतरों’ को शामिल किया गया है।

कल्प से बना मनवंतर

इस गणना के अनुसार हम युगों के जाल को पार करते हुए आज केवल सातवें मनवंतर (वैवस्वत) तक ही पहुंच पाए हैं। लेकिन आम मनुष्य केवल युगों को चार विभाजन में पाता है – सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग एवं कलियुग।

चार युगों में विभाजन

और खुद को आज का मनुष्य कलियुग का भाग मानता है, जो कि धार्मिक संरचना के अनुसार दैत्यों का संसार कहा जाता है। केवल यही नहीं, ऐसे कई तथ्य हैं जो हिन्दू धर्म को अन्य धर्म से काफी भिन्न बताते हैं।

धन एक पाप?

कुछ धर्मों के अनुसार ‘पैसे’ को पाप के रूप में परिवर्तित किया जाता है। धन के पीछे पड़ना पाप के समान माना जाता है लेकिन दूसरी ओर हिन्दू धर्म स्वयं में ही धर्म को धन से भी जोड़ता है।

धन तथा समृद्धि की देवी

धन तथा स्मृद्धि के देवी-देवता इस बात का उदाहरण है कि हिन्दू धर्म में धन एवं सम्पदा की रवायत वर्षों पुरानी है। धन की देवी लक्ष्मी तथा धनकुबेर को लोग धन पाने के लिए रोज़ाना पूजते हैं।

धन के देवी-देवताओं का पूजन

विधि पूर्वक उनकी पूजा करते हैं तथा उनके मंत्रों का जाप करते हैं ताकि यह देव उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर उनके जीवन पर छायी कंगाली के प्रभाव को दूर कर सकने में सहायक साबित हों।

तीसरा सबसे विशाल धर्म

हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जो विश्व भर में सबसे बड़े धर्मों में से तीसरे स्थान पर आता है लेकिन इसी धर्म की 95 प्रतिशत जनसंख्या एक देश, एक राष्ट्र ‘भारत’ को बनाती है।

संस्कृत का महत्व

इसके बावजूद भी विश्व भर में इस धर्म को जाना जाता है। ना केवल धार्मिक कथनों बल्कि हिन्दू धर्म को दुनिया भर में प्रस्तुत करने वाली भाषा ‘संस्कृत’ ने भी विश्व भर की अन्य भाषाओं को विकसित करने या फिर कुछ भाषाओं की प्रसिद्ध नामावलियों को रचने का प्रेरणात्मक श्रेय पाया है।

परंतु हिन्दू ही बन रहा पाश्चात्य सभ्यता का पुजारी


लेकिन इसके बावजूद भी आज भारत जैसे देश में जहां हिन्दुओं की एक बड़ी आबादी रहती है वे ही इस भाषा व संस्कृति को भूलते जा रहे हैं तथा पश्चिमी भाषा, संस्कृति व सभ्यता को अपनाने की ओर अपना झुकाव बढ़ा रहे हैं।