Saturday, 28 November 2015

ओ३म् (ॐ) या ओंकार का अभिप्राय और महत्ता


ओंकार - परमाक्षर
ओ३म् (ॐ) क्या है:- ओ३म् (ॐ) का शाब्दिक और सरल अर्थ प्रणव अर्थात परमेश्वर से है, ओ३म् वास्तविकता में सम्पूर्ण सृष्टि कि उद्भावता कि ओर संकेत करता है, कहने का तात्पर्य यह है कि ओ३म् से ही यह चराचर जगत चलायमान है और इस संसार के कण कण में ओ३म् रमा हुआ है |

ओ३म् किसी भी एक देव का नाम या संकेत नहीं है, अपितु हर धर्म को मानने वालों ने इसे अपने तरीके से प्रचलित किया है | जैसे ब्रह्मा-वाद में विश्वास रखने वाले इसे ब्रह्मा, विष्णु के सम्प्रदाय वाले वैष्णवजन इसे विष्णु तथा शैव या रुद्रानुगामी इसे शिव का प्रतिक मानते है और इसी तरीके से इसको प्रचलित करते है | परन्तु वास्तव में ओ३म् तीनों देवो का मिश्रित तत्त्व है जो कि इस प्रकार है:-

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