Monday, 28 March 2016

VASCO-DE-GAMA (वास्कोडिगामा) एक लुटेरा था .कोई खोजी नही 


आज से लगभग ५०० साल पहलेवास्को डी गामा आया था हिंदुस्तान. इतिहास की चोपड़ी मेंइतिहास की किताब में हमसब ने पढ़ा होगा कि सन. १४९८ में मई की २० तारीख को वास्को डी गामा हिंदुस्तान आया था. इतिहास की चोपड़ी में हमको ये बताया गया कि वास्को डी गामा ने हिंदुस्तान की खोज कीपर ऐसा लगता है कि जैसे वास्को डी गामा ने जब हिंदुस्तान की खोज कीतो शायद उसके पहले हिंदुस्तान था ही नहीं.
1वास्को डी गामा यहाँ आया था भारतवर्ष को लुटने के लिएएक बात और जो इतिहास मेंबहुत गलत बताई जाती है कि वास्को डी गामा एक बहूत बहादुर नाविक थाबहादुर सेनापति थाबहादुर सैनिक थाऔर हिंदुस्तान की खोज के अभियान पर निकला थाऐसा कुछ नहीं थासच्चाई ये है………………………………………
कि पुर्तगाल का वो उस ज़माने का डॉन थामाफ़िया था. जैसे आज के ज़माने में हिंदुस्तान में बहूत सारे माफ़िया किंग रहे हैउनका नाम लेने की जरुरत नहीं है,ऐसे ही बहूत सारे डॉन और माफ़िया किंग १५ वी सताब्दी में होते थे यूरोप में. और १५ वी. सताब्दी का जो यूरोप थावहां दो देश बहूत ताकतवर थें उस ज़माने मेंएक था स्पेन और दूसरा था पुर्तगाल. तो वास्को डी गामा जो था वो पुर्तगाल का माफ़िया किंग था. १४९० के आस पास से वास्को डी गामा पुर्तगाल में चोरी का कामलुटेरे का कामडकैती डालने का काम ये सब किया करता था. और अगर सच्चा इतिहास उसका आप खोजिए तो एक चोर और लुटेरे को हमारे इतिहास में गलत तरीके से हीरो बना कर पेश किया गया. और ऐसा जो डॉन और माफ़िया था उस ज़माने का पुर्तगाल का ऐसा ही एक दुसरा लुटेरा और डॉन थामाफ़िया था उसका नाम था कोलंबसवो स्पेन का था. तो हुआ क्या थाकोलंबस गया था अमेरिका को लुटने के लिए और वास्को डी गामा आया था भारतवर्ष को लुटने के लिए. लेकिन इन दोनों के दिमाग में ऐसी बात आई कहाँ सेकोलंबस के दिमाग में ये किसने डाला की चलो अमेरिका को लुटा जाएऔर वास्को डी गामा के दिमाग में किसने डाला कि चलो भारतवर्ष को लुटा जाए. तो इन दोनों को ये कहने वाले लोग कौन थे?
हुआ ये था कि १४ वी. और १५ वी. सताब्दी के बीच का जो समय थायूरोप में दो ही देश थें जो ताकतवर माने जाते थे,एक देश था स्पेनदूसरा था पुर्तगालतो इन दोनों देशो के बीच में अक्सर लड़ाई झगडे होते थेलड़ाई झगड़े किस बात के होते थे कि स्पेन के जो लुटेरे थे, वो कुछ जहांजो को लुटते थें तो उसकी संपत्ति उनके पास आती थीऐसे ही पुर्तगाल के कुछ लुटेरे हुआ करते थे वो जहांज को लुटते थें तो उनके पास संपत्ति आती थीतो संपत्ति का झगड़ा होता था कि कौन-कौन संपत्ति ज्यादा रखेगा. स्पेन के पास ज्यादा संपत्ति जाएगी या पुर्तगाल के पास ज्यादा संपत्ति जाएगी. तो उस संपत्ति का बटवारा करने के लिए कई बार जो झगड़े होते थे वो वहां की धर्मसत्ता के पास ले जाए जाते थे. और उस ज़माने की वहां की जो धर्मसत्ता थीवो क्रिस्चियनिटी की सत्ता थीऔर क्रिस्चियनिटी की सत्ता में १४९२ के आसपास पोप होता था जो सिक्स्थ कहलाता थाछठवा पोप. तो एक बार ऐसे ही झगड़ा हुआपुर्तगाल और स्पेन की सत्ताओ के बीच मेंऔर झगड़ा किस बात को ले कर थाझगड़ा इस बात को ले कर था कि लूट का माल जो मिले वो किसके हिस्से में ज्यादा जाए. तो उस ज़माने के पोप ने एक अध्यादेश जारी किया. सन १४९२ मेंऔर वो नोटिफिकेशन क्या थावो नोटिफिकेशन ये था कि १४९२ के बादसारी दुनिया की संपत्ति को उन्होंने दो हिस्सों में बाँटाऔर दो हिस्सों में ऐसा बाँटा कि दुनिया का एक हिस्सा पूर्वी हिस्सा, और दुनिया का दूसरा हिस्सा पश्चिमी हिस्सा. तो पूर्वी हिस्से की संपत्ति को लुटने का काम पुर्तगाल करेगा और पश्चिमी हिस्से की संपत्ति को लुटने का काम स्पेन करेगा. ये आदेश १४९२ में पोप ने जारी किया. ये आदेश जारी करते समयजो मूल सवाल है वो ये है कि क्या किसी पोप को ये अधिकार है कि वो दुनिया को दो हिस्सों में बांटेऔर उन दोनों हिस्सों को लुटने के लिए दो अलग अलग देशो की नियुक्ति कर देस्पैन को कहा की दुनिया के पश्चिमी हिस्से को तुम लूटोपुर्तगाल को कहा की दुनिया के पूर्वी हिस्से को तुम लूटो और १४९२ में जारी किया हुआ वो आदेश और बुल आज भी एग्जिस्ट करता है. 
ये क्रिस्चियनिटी की धर्मसत्ता कितनी खतरनाक हो सकती है उसका एक अंदाजा इस बात से लगता है कि उन्होंने मान लिया कि सारी दुनिया तो हमारी है और इस दुनिया को दो हिस्सों में बांट दो पुर्तगाली पूर्वी हिस्से को लूटेंगेस्पेनीश लोग पश्चिमी हिस्से को लूटेंगे. पुर्तगालियो को चूँकि दुनिया के पूर्वी हिस्से को लुटने का आदेश मिला पोप की तरफ से तो उसी लुट को करने के लिए वास्को डी गामा हमारे देश आया था. क्योकि भारतवर्ष दुनिया के पूर्वी हिस्से में पड़ता है. और उसी लुट के सिलसिले को बरकरार रखने के लिए कोलंबस अमरीका गया. इतिहास बताता है कि १४९२ में कोलंबस अमरीका पहुंचा, और १४९८ में वास्को डी गामा हिंदुस्तान पहुंचाभारतवर्ष पहुंचा. कोलंबस जब अमरीका पहुंचा तो उसने अमरीका मेंजो मूल प्रजाति थी रेड इंडियन्स जिनको माया सभ्यता के लोग कहते थेउन माया सभ्यता के लोगों से मार कर पिट कर सोना चांदी छिनने का काम शुरु किया. इतिहास में ये बराबर गलत जानकारी हमको दी गई कि कोलंबस कोई महान व्यक्ति थामहान व्यक्ति नहीं थानराधम था. और वो किस दर्जे का नराधम थासोना चांदी लुटने के लिए अगर किसी की हत्या करनी पड़े तो कोलंबस उसमे पीछे नहीं रहता थाउस आदमी ने १४ – १५ वर्षो तक बराबर अमरीका के रेड इन्डियन लोगों को लुटाऔर उस लुट से भर – भर कर जहांज जब स्पेन गए तो स्पेन के लोगों को लगा कि अमेरिका में तो बहुत सम्पत्ति हैतो स्पेन की फ़ौज और स्पेन की आर्मी फिर अमरीका पहुंची. और स्पेन की फ़ौज और स्पेन की आर्मी ने अमरीका में पहुँच कर १० करोड़ रेड इंडियन्स को मौत के घाट उतार दिया. १० करोड़. और ये दस करोड़ रेड इंडियन्स मूल रूप से अमरीका के बाशिंदे थे. ये जो अमरीका का चेहरा आज आपको दिखाई देता हैये अमरीका १० करोड़ रेड इन्डियन की लाश पर खड़ा हुआ एक देश है. कितने हैवानियत वाले लोग होंगेकितने नराधम किस्म के लोग होंगेजो सबसे पहले गए अमरीका को बसाने के लिए,उसका एक अंदाजा आपको लग सकता हैआज स्थिति क्या है कि जो अमरीका की मूल प्रजा हैजिनको रेड इंडियन कहते हैउनकी संख्या मात्र ६५००० रह गई है. 
१० करोड़ लोगों को मौत के घाट उतारने वाले लोग आज हमको सिखाते है कि हिंदुस्तान में ह्यूमन राईट की स्थिति बहुत ख़राब है. जिनका इतिहास ही ह्यूमन राईट के वोइलेसन पे टिका हुआ है, जिनकी पूरी की पूरी सभ्यता १० करोड़ लोगों की लाश पर टिकी हुई हैजिनकी पूरी की पूरी तरक्की और विकास १० करोड़ रेड इंडियनों लोगों के खून से लिखा गया हैऐसे अमरीका के लोग आज हमको कहते है कि हिंदुस्तान में साहबह्यूमन राईट की बड़ी ख़राब स्थिति हैकश्मीर में,पंजाब मेंवगेरह वगेरह. और जो काम मारने कापीटने का, लोगों की हत्याए कर के सोना लुटने काचांदी लुटने का काम कोलंबस और स्पेन के लोगों ने अमरीका में कियाठीक वही काम वास्को डी गामा ने १४९८ में हिंदुस्तान में किया. ये वास्को डी गामा जब कालीकट में आया२० मई१४९८ कोतो कालीकट का राजा था उस समय झामोरिनतो झामोरिन के राज्य में जब ये पहुंचा वास्को डी गामातो उसने कहा कि मै तो आपका मेहमान हुऔर हिंदुस्तान के बारे में उसको कहीं से पता चल गया था कि इस देश में अतिथि देवो भव की परंपरा. तो झामोरिन ने बेचारे नेये अथिति है ऐसा मान कर उसका स्वागत कियावास्को डी गामा ने कहा कि मुझे आपके राज्य में रहने के लिए कुछ जगह चाहिए,आप मुझे रहने की इजाजत दे दोपरमीशन दे दो. झामोरिन बिचारा सीधा सदा आदमी थाउसने कालीकट में वास्को डी गामा को रहने की इजाजत दे दी. जिस वास्को डी गामा को झामोरिन के राजा ने अथिति बनायाउसका आथित्य ग्रहण कियाउसके यहाँ रहना शुरु कियाउसी झामोरिन की वास्को डी गामा ने हत्या कराइ. और हत्या करा के खुद वास्को डी गामा कालीकट का मालिक बना. और कालीकट का मालिक बनने के बाद उसने क्या किया कि समुद्र के किनारे है कालीकट केरल मेंवहां से जो जहांज आते जाते थे, जिसमे हिन्दुस्तानी व्यापारी अपना माल भर-भर के साउथ ईस्ट एशिया और अरब के देशो में व्यापार के लिए भेजते थेउन जहांजो पर टैक्स वसूलने का काम वास्को डी गामा करता था. और अगर कोई जहांज वास्को डी गामा को टैक्स ना देतो उस जहांज को समुद्र में डुबोने का काम वास्को डी गामा करता था.
पोर्तुगीज सरकार के जो डॉक्यूमेंट है वो  बताते है कि वास्को डी गामा पहली बार जब हिंदुस्तान से गयालुट कर सम्पत्ति को ले कर के गयातो ७ जहांज भर के सोने की अशर्फिया, उसके बाद दुबारा फिर आया वास्को डी गामा. वास्को डी गामा हिंदुस्तान में ३ बार आया लगातार लुटने के बादचौथी बार भी आता लेकिन मर गया. दूसरी बार आया तो हिंदुस्तान से लुट कर जो ले गया वो करीब ११ से १२ जहांज भर के सोने की अशर्फिया थी. और तीसरी बार आया और हिंदुस्तान से जो लुट कर ले गया वो २१ से २२ जहांज भर के सोने की अशर्फिया थी.इतना सोना चांदी लुट कर जब वास्को डी गामा यहाँ से ले गया तो पुर्तगाल के लोगों को पता चला कि हिंदुस्तान में तो बहुत सम्पत्ति है. और भारतवर्ष की सम्पत्ति के बारे में उन्होंने पुर्तगालियो ने पहले भी कहीं पढ़ा थाउनको कहीं से ये टेक्स्ट मिल गया था कि भारत एक ऐसा देश हैजहाँ पर महमूद गजनवी नाम का एक व्यक्ति आया१७ साल बराबर आता रहालुटता रहा इस देश कोएक ही मंदिर कोसोमनाथ का मंदिर जो वेरावल में है. उस सोमनाथ के मंदिर को महमूद गजनवी नाम का एक व्यक्ति, एक वर्ष आया अरबों खरबों की सम्पत्ति ले कर चला गयादुसरे साल आयाफिर अरबों खरबों की सम्पत्ति ले गया. तीसरे साल आयाफिर लुट कर ले गया. और १७ साल वो बराबर आता रहाऔर लुट कर ले जाता रहा. तो वो टेक्स्ट भी उनको मिल गए थे कि एक एक मंदिर में इतनी सम्पत्तिइतनी पूंजी है,इतना पैसा है भारत मेंतो चलो इस देश को लुटा जाएऔर उस ज़माने में एक जानकारी और दे दूये जो यूरोप वाले अमरीका वाले जितना अपने आप को विकसित कहेसच्चाई ये है कि १४ वी. और १५ वी. शताब्दी में दुनिया में सबसे ज्यादा गरीबी यूरोप के देशो में थी. खाने पीने को भी कुछ होता नहीं था. प्रकृति ने उनको हमारी तरह कुछ भी नहीं दियान उनके पास नेचुरल रिसोर्सेस है, जितने हमारे पास है. न मौसम बहूत अच्छा हैन खेती बहुत अच्छी होती थी और उद्योगों का तो प्रश्न ही नहीं उठता. १३ फी. और १४ वी. शताब्दी में तो यूरोप में कोई उद्योग नहीं होता था. तो उनलोगों का मूलतः जीविका का जो साधन था जो वो लुटेरे बन के काम से जीविका चलाते थे. चोरी करते थेडकैती करते थेलुट डालते थे,ये मूल काम वाले यूरोप के लोग थेतो उनको पता लगा कि हिंदुस्तान और भारतवर्ष में इतनी सम्पत्ति है तो उस देश को लुटा जाएऔर वास्को डी गामा ने आ कर हिंदुस्तान में लुट का एक नया इतिहास शुरु किया. उससे पहले भी लुट चली हमारीमहमूद गजनवी जैसे लोग हमको लुटते रहे.
लेकिन वास्को डी गामा ने आकर लुट को जिस तरह से केन्द्रित किया और ओर्गनाइजड किया वो समझने की जरूरत है. उसके पीछे पीछे क्या हुआ,पुर्तगाली लोग आएउन्होंने ७० – ८० वर्षो तक इस देश को खूब जम कर लुटा. पुर्तगाली चले गए इस देश को लुटने के बादफिर उसके पीछे फ़्रांसिसी आए,उन्होंने इस देश को खूब जमकर लुटा ७० – ८० वर्ष उन्होंने भी पुरे किए. उसके बाद डच आ गये हालैंड वालेउन्होंने इस देश को लुटा. उसके बाद फिर अंग्रेज आ गए हिंदुस्तान में लुटने के लिए ही नहीं बल्कि इस देश पर राज्य भी करने के लिए. पुर्तगाली आए लुटने के लिएफ़्रांसिसी आए लुटने के लिए,डच आए लुटने के लिएऔर फिर पीछे से अंग्रेज चले आए लुटने के लिएअंग्रेजो ने लुट का तरीका बदल दिया. 

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