Friday, 14 July 2017

भगवान भावना देखते हैं, दिखावा नहीं

भगवान भावना देखते हैं, दिखावा नहीं


आज एक माता की चौकी का निमंत्रण मिला तो जाना हुआ। काफी सुंदर भजन गाने वाले और सुंदर झांकी तैयार की गई थी। भजन गाने वाले भी उपस्थित सभी भक्तों को जोश से भर रहे थे, नाचना, जयकारे, तो कभी अरदास और भावना को जताने के लिए धन का चढ़ावा। इसी बीच एक काली माँ, शिव और पार्वती जी भी पधारे और वहाँ कथा को नृत्य के रूप में पेश किया। फिर आमंत्रित किया गया, उन लोगों को जो काली माँ, शिव जी और पार्वती जी के दर्शन करना चाहते थे। ये सब कलाकार थे जो ये सब बने थे लेकिन लोग ऐसे भक्त के उनके सामने माथा टेक कर ऐसे नाक रगड़ रहे जैसे साक्षात प्रभु उन्हें मिलने आये हों। खैर मेरा मकसद किसी की भावना को आहत करना नहीं है, बस इतना बताना चाह रही हूँ कि ये भक्त कहलाने वाले प्राणी वही थें,जो दिन भर दूसरों की बुराईयां करने से थकते नहीं हैं। घर में बेटी बहुओं को नीचा दिखाने का एक मौका नहीं छोड़ती लेकिन वहाँ माँ के हर स्वरुप को सत सत नमन करती हैं। मैं ऐसे होने वाले किसी भी कार्यक्रम के खिलाफ बिल्कुल नहीं हूँ, हालाँकि वहाँ आए अधिकतर लोग भजन सुनने कम और भंडारा खाने ज्यादा पहुँचे होते हैं, ये बात थोड़ा विचलित जरूर करती है।

हालाँकि ये भी सबकी अपनी सोच है मैं किसी को सिर्फ इस बात पर नहीं परख सकती। लेकिन कारण ऐसे कार्यक्रम में जाने का जो भी हो, दिखावा और झूठ कहाँ तक ठीक होता है? और आप झूठ दिखा भी किसे रहे हैं? सब लोग एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं, तो उन्हें तो आप कुछ पल भक्ति में डूब कर बेवकूफ बना नहीं सकते, बाकी परमेश्वर से तो आप चाह कर भी कुछ नहीं छुपा सकते, बचे आप खुद। अब आप ये झूठ खुद को ही बोल कर धोखा देते हो तो क्या ही कहा जा सकता है?

भावना होनी अच्छी बात है, भक्ति करना भी अच्छा, लेकिन जो दिल से ना हो और सच्ची ना हो तो ये सब बेमानी हैं। ऐसी झूठी भावना और भक्ति से भगवान तो क्या कोई इंसान भी खुश नहीं हो सकता। और जब भावना सच्ची होगी तो यकीन मानिए, ऐसे किसी के भी देवी, देवता बनने पर आप उनके चरणों में नहीं गिरेंगे। दिल से पुकारें, चाहे माँ दुर्गा को चाहे किसी अन्य देवी देवता को, सब मनोकामना पूर्ण होगी, आस्था पक्की और सच्ची रखें और एक बात और अच्छे इंसान जरूर बने रहिये।

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