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Thursday, 20 July 2017

बंगलुरु में मेट्रो स्टेशन पर हिंदी साइन बोर्ड को रक्षणा संगठन ने मिटाया

बंगलुरु में मेट्रो स्टेशन पर हिंदी साइन बोर्ड को रक्षणा संगठन ने मिटाया

कर्नाटक में इन दिनों का अलग झंडे की मांग चरम पर है, लेकिन इसके बीच हिंदी भाषा के प्रयोग के खिलाफ प्रदर्शन फिर तेज हो गया है. कर्नाटक रक्षणा संगठन के कुछ सदस्यों ने बंगलुरु मेट्रो स्टेशन पर साइन बोर्ड पर हिंदी में लिखे निर्देशों को हटा दिया. बंगलुरु के नम्मा मेट्रो स्टेशन पर हिंदी साइन बोर्ड पर पेंट कर दिया गया.
नम्मा स्टेशन के अलावा भी बंगलुरु के कई अन्य स्टेशनों पर भी इसी तरह ही कर्नाटक रक्षणा वैदिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर हिंदी में लिखे नाम को मिटा दिया है. इसके अलावा साथ ही साइन बोर्ड पर हिंदी में लिखा नाम काले रंग से पोत कर छुपा दिया. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर बैठक भी बुलाई थी, इस मुद्दे पर कई पार्टियों ने समर्थन भी किया था.

विभिन्न यज्ञ पात्रों की आवश्यकता

यज्ञ-पात्र


श्रौत-स्मार्त यज्ञों में विविध प्रयोजनों के लिये विभिन्न यज्ञ पात्रों की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार कुँड मंडप आदि को विधि पूर्वक निर्धारित माप के अनुसार बनाया जाता है, उसी प्रकार इन यज्ञ पात्रों को निश्चित वृक्षों के काष्ठ से, निर्धारित माप एवं आकार का बनाया जाता है। विधि पूर्वक बने यज्ञ पात्रों का होना यज्ञ की सफलता के लिये आवश्यक है। नीचे कुछ यज्ञ पात्रों का परिचय दिया जा रहा है। इनका उपयोग विभिन्न यज्ञों में, विभिन्न शाखाओं एवं सूत्र-ग्रन्थों के आधार पर दिया जाता है।
1.अन्तर्धानकट:—वारण काष्ठ का आध अंगुल मोटा, बारह अंगुल का अर्थ चन्द्राकार पात्र। गार्हपत्य कुँड के ऊपर पत्नी संयाज के समय देव पत्नियों को आढ़ करने के लिए इसका उपयोग होता है।

2. पशु-रशना:—तीन मुख वाली बारह हाथ की पशु बाँधने की रस्सी।

3. मयूख:—गूलर का एक अँगुज मोटा, बारह अँगुल का वत्स-बन्धन के लिये शकु मयूख होता है।

4. वसा हवनी:—पाक भाण्ड स्थित स्नेह-वसा हवन करने का जूहू सदृश घाऊ का स्रुक।

5. वेद:—दर्शपूर्णमासादि में 50 कुशाओं से रचित वेणी सदृश कुशमुष्टि।

6. कर्पूर:—चातुर्मास्यादि यज्ञ में बड़े गर्त्तवाला धान भूँजने का पात्र।

7. अनुष्टुव्धि:—जूहू सदृश पीपल का स्रुक।

8. विष्टुति:—उद्गाता द्वारा साम मन्त्रों की गिनती के लिये, नीचे चतुरस्र ऊपर गोल, दश अँगुल की शलाका।

9. पूर्ण पात्र:—दर्शादि इष्टि में यजमान के मुख धोने के लिये जल रखने की स्मार्त प्रोक्षणी।

10. शराव:—पायस रखने के लिए मृत्तिका का बड़े मुख एवं छोटे गर्त्त वाला पात्र।

11. उशकट:—सोम को रखने के लिए वारण काष्ठ का ढाई हाथ लम्बा त्रिकोण, डेढ़ हाथ चौड़ा दो हाथ ऊँचा शकट, जिसमें एक हाथ ऊँचे दो चक्र हों।

12. परिप्लवा:—कलश से सोमरस निकालने वाला काष्ठ का बना स्रुक, दस अँगुल लंबा हंसमुख सदृश नालीदार पाँच अँगुल गोलाई में बना हुआ।

13. पशुकुम्भी:—पशु श्रवण के लिये तैजस पात्र।

14. मुसल:—खैर काष्ठ का बना, मध्य में कुछ मोटा दस अँगुल का मूसल।

15. ऋतुग्रह पात्र:—काष्मरी या पीपल का बना प्रोक्षणी पात्र जिसमें हँसमुख सदृश नलिका होती हैं।

16. आज्यरथाली:—घृत गर्म करने का मृण्मय पात्र

17. उपवेष:—अँगारों को दूर करने के लिये वारण काष्ठ का बना हाथ के सदृश पाँच अँगुल बना हुआ दण्ड।

18. स्थली:—सोमरन रब्जे की सरामयी थाली।

19. इडावात्री:— ब्रह्मा, द्दोता, अध्वर्यु, अग्नीत् और यजमान के भाग रखा जाने वाला पात्र।

20. मेक्षण:—चरू इष्टि में इससे चरू का ग्रहण और होम होता है।

21. पृषदाज्य ग्रहणी:—पीपल का स्रुक, जिससे दधि मिश्रित थी ग्रहण किया जाता है।

22. प्रचरणी:—सोम यान में वैकंगत काष्ठ का बना जुहू सदृश स्रुक जिसका होम करने में उपयोग होता है।

23. परशु:—खदिर काष्ठ का बना हुआ परशु।

24. अग्निहोत्र हवणी:—श्रौत अग्निहोत्र में वंक काष्ठ का बना, जुहू के सदृश बाहुमात्र लंबा स्रुक।

25. अभ्रि:—वारण काष्ठ की बनी नुकीली अभ्रि का वेदी खनन में उपयोग होता है।

26. दोहन पात्र:—वैकंकत का प्रणाली रहित सदंड प्रोक्षणी पात्र सदृश आकार होता है।

27. दर्वी:—दंड सहित कलछी ही दर्वी है।

28. अधिषवण-फलक:—वारण काष्ठ के बने सोमलता कूटने का एक हाथ लम्बा, बारह अँगुल चौड़ा दो काष्ठ फलक होते हैं।

29. असिद:—कुशा काटने के लिये खैर का छुरा।

30. अन्वाहार्य पात्र:—दर्शपूर्ण-मास में, ब्रह्मा, होता, अध्वर्यु और अग्नीघ्र को दक्षिणा में दिया जाने वाला ओदन जिस पात्र में पकाया जाता है।

31—ग्रावा:- पत्थर का बना सोलह अँगुल का मूसल, जिससे सोम लता कूटी जाती है।

32—उपभृत:- पीपल की जुहू सदृश स्रुक उपभृत होती है।

33—उत्पवन पात्र:- प्रोक्षणी पात्र सदृश होता है।

34—उपाँश सवन:- उपाँश नामक सोमलता को जिस पाषाण से कूटा जाता है।

35—उलूखल:- पलास,खैर, धारण का जानु प्रमाण ऊखल।

36—एक धन:- सोमरस को बढ़ाने वाले जल।

37—मूरशल:- वारण, पलास, खैर का दश अँगुल का मूरशल।

38—जुहू:- श्रौत कर्म में जिस स्रुक से हवन किया जाता है।

39—चमस:- चौकोर प्रणीता पात्र सदृश सोमरस को रखने, होम करने, और पानी के लिये चमस होते हैं। से दस भाँति के होते हैं।

40—यजमानाभिषेकासन्दी:- वाजपेय यज्ञ में यजमान को बैठने के लिये मूञ्ज की बिनी हुई एक हाथ लम्बी चौड़ी चतुष्कोण:- लघु खाट।

41—यूपरशना:- आठ हाथ लम्बी दूनी कुश की रस्सी, यूप में लपेटने के लिये यूपरशना होती है।

42—शृतावदान:- पितृ यज्ञ में पक्व पुरोडाश तोड़ने के लिये विकंकत-काष्ठ का होता है।

43—वूते भृत:- सोम रस धारण करने वाले स्वर्ण या मृण्मय-कलश।

44—पुरोडाश पात्री:- वारण काष्ठ की पुरोडाश के स्थान में प्रयुक्त होने वाली पात्री।

45—पिन्वन:- वारण का स्रुक मुख सदृश बना बिना दंड का पात्र।

46—पान्तेजन कलश:- पशु अंगों को प्रक्षालन करने का जल जिस कलश में रखा जाता है।

47—परिशास:- कलछी मुख के सदृश महावीर पात्र को पकड़ने लायक गूलर के बने पात्र।

48—सन्नहन:- इध्म और वर्हि बाँधने के लिये कुशा की वेण्याकार गूँथी रस्सी।

49—होतृ सदन:- वरना काष्ठ की बनी होता के बैठने की पीठ।

50—सोमा सन्दी:- गूलरकी बनी चार पाँवों वाली मुञ्ज की रस्सी से बीनी हुई सोम रखने के लिए बनी आसन्दी

51—सोम पर्याणहन:- वस्त्र से बन्धे सोम को ढाँकने का वस्त्र।

52—संभरणी:- वारण काष्ठ का बना सोम रखने का कटोरा।

53—शंकु:- गूलर का दश अँगुल लम्बा अग्निष्टोमादि यज्ञ में दीक्षिता पत्नी के कन्डूवनादि में उपयुक्त होने वाला।

54—उदत्रवन:- सोम याग में अम्भृण पात्रों से जल निकालने के लिये मिट्टी का पात्र (पुरवा)

55—उपयमनी:- उदुन्वर की दो हाथ लम्बी, स्रुकी के मुख से दूने मुख की, जुहू सदृश स्रुक।

56—इध्म:- पलाश की एक हाथ लम्बी, सीधी, सुन्दर त्वचा सहित,एक शाखा वाली समिधा।

57—वर्हि:- असंस्कृत तथा असंख्यात कुशा।

58—सम्भरण पात्र:- वाजपेय यज्ञ में हवन किये जाने वाले सत्रह प्रकार के अन्नों को जिस पात्र में रखा जाता है।

59—वाजिन भ्राण्ड:- फटे दूध के द्रव भाग (वाजिन) को जिस भाण्ड में रखा जाता है।

60—उपसर्जनी पात्र:- यजमान के लिये गार्हपत्य अग्नि में जल को इस पात्र में गर्म किया जाता है।

61—रौहिणपाल:- मृत्तिका का वता पकाया पात्र जो रौहिणक पुरोडाश पकाने के लिये बनाया जाता है।

62—योक्त्र:- दर्शपूर्ण मासादि यज्ञ में यजमान पत्नी के कटि प्रदेश में बाँधने के लिये तीन लड़ी, मुञ्ज की बनी वेणी सदृश रस्सी।

63—उद्गात्रासन्दी:- गवामयन यज्ञ में उद्गाता बैठने के एक हाथ लम्बी चौड़ी मुञ्ज से बिनी भीढ।

64—विघन:- पीपल का एक हाथ का शंक।

65—विकंकत शकल:- विकंकत काष्ठ की दश अँगुल समिधा।

66—दंड:- सोमयाग में यजमान तथा मैत्रावरुण के लिये मुख तक लम्बाई का गूलर का बना दंड।

67—दधि धर्म:- प्रर्ग्वयमें दस अंगुल का दधि को ग्रहण तथा हवन के लिये गूलर का बना पात्र।

68—दारुपात्री:- कात्यायनों की इड़ापात्री।

69—धवित्:- मृगचर्म से बना पंखा।

70—धृष्टि—अंगार-भस्मादि हटाने के लिये विकेकत काष्ठ का बना पात्र।

71—कृष्ण विषाणा-कृष्ण मृग का शृंग।

72—वाजिनचभस-फटे दूध के द्रव भाग को रखने का प्रणीता सदृश पात्र।

73—गलप्राही ताँबा या पीतल की एक हाथ की संड़सी।

74—स्रुक-विकंकत काष्ठ का बना बाहु प्रमाण लंबा हवन करने का हंसमुख सदृश चोंचदार पात्र।

75—यूप-खैर का बना लंबा शंकु। इसकी लंबाई भिन्न भिन्न यज्ञों में भिन्न भिन्न रखी जाती है।

76—ग्रह-विकंकत काष्ठ का बना उलूखल सदृश सोमरस तथा होमोपयोगी वस्तु रखने का पात्र।

77—स्फ्य-अग्रवेदी को खोदने रेखा करने के लिये एक हाथ लंबा चार अँगुल चौड़ा खैर काष्ठ का वज्र-दंड।

78—स्रुक—होम करने के लिये खैर काण्ड का बना गोल छिद्र संयुक्त एक हाथ लंबा पात्र।

79—ऋतु पात्र ग्रह कार्ष्मय:—पीपल के प्रोक्षपी पात्र सदृश दोनों तरफ हंसमुख सदृश सोमरस ग्रहण करने का पात्र।

80—प्रोक्षणधानी:- जुहू के सदृश बना स्रुक।

81—शूल—वारण काष्ठ का बना, अभ्रि सदृश शूल होता है।

82—प्राशिब्रहरण:- ब्रह्मा को हुत शेव, इस चार अँगुल लम्बे चौड़े वारण काष्ठ से बने चौकोर पात्र द्वारा दिया जाता है।

83—निश्रेणी:- वाजपेय यज्ञ में सत्रह हाथ यूव से ऊपर जाने के लिये धारण काष्ठ से बनी सीढ़ी।

84—नेत्र:- सन और गौपुच्छ के बालों से बनाई गयी चार हाथ की तीन लड़ वाली गूँथी हुई वेणी।

85—निदान:—सोमयाग में गौ तथा बछड़े को बाँधने के लिये बनी रस्सी।

86—चात्र उपमन्थ:- अरणि मन्थन के लिये आठ अँगुल का बना काष्ठ शंकु।

87—वषाल:- सोमयाग में पलास का दश अँगुल लम्बा एक अँगुल गोल-आर पार छिद्र वाला पात्र विशेष।

88—शभ्या:- दर्शपूर्ण मासादि में सिल लोटी के कुट्टन आदि में प्रयुक्त होने वाला पात्र विशेष।

89—षडवत्तपात्र:- अग्नीघ्र ऋत्विक् को भाग देने के लिये वारण काष्ठ का बना एक विशेष प्रकार का पात्र।

90—सगर्त्तपुरोडाशपात्री:- सर्वहुत पुरोडाश के स्थापन और होमादि में प्रयुक्त होने वाला पात्र।

91—स्वरु:- पशुलला स्पर्श एवं होमादि में प्रयुक्त होने वाला दश अँगुल का खड्गाकार पात्र।

92—स्थूण:- गौ बाँधने के लिये बनी खूँटी।

93—सोमोपनहन:- सोमलता बाँधे जाने वाले दौहरे चौहरे वस्त्र।

94—दृपत उपला:- पुरोडाश के पोषण में प्रयुक्त होने वाले दश अँगुल लम्बे आठ अँगुल चौड़े पाषाण।

95—करम्भ पात्री:- दक्षणाग्नि में पक्व सत्तु तथा दधि रखने का छोटे छोटे गोल पात्र।

96—पञ्चविलापात्री:- कृष्ण यजुर्वेदियों के काम आने वाला पात्र विशेष।

97—पिशीलक:- चातुर्मासान्तर्गत गृहमेधि में उपयोग होने वाला पायस रखने का धातु का बड़े मुख वाला पात्र।

98—परिवेचन घट:- आपस्तम्ब के लिये आधवनीय सदृश कलश।

99—त्रिविला पात्री:- वारण काष्ठ से बना एक विशिष्ट भाँति का बना पात्र।

100—दशा पवित्र:- जीवित भेड़ के ऊनों से बना सोमरस छानने के लिये बना हुआ छन्ना।

101—कूर्च:- सायं-प्रातः अग्निहोत्र के समय स्रुक रखने का वारण काष्ठ से बना पात्र विशेष।

102—ओबिली:- मन्थन दन्ड को दबाने के लिये खैर काष्ठ का बना उपमन्थ।

103-समित्:—पलासादि की दश अँगुल लम्बी सुन्दर अविशाखा लकड़ी।

104-महावीर:—सोमयाग में दीपक रखने के लिये मृत्तिका से बना एक विशिष्ट पात्र।

105—मेखला-यजमान के कटि प्रदेश में बाँधने के लिये चार हाथ की मुञ्ज से वेणी सदृश गुँथी रस्सी।

106—तानूनस्र चमस:- इष्टि के अनन्तर सोलहों ऋत्विक् जिस घृत का स्पर्श कर परस्पर अद्रोह की शपथ लेते हैं उस घी को रखने का पात्र।

107—धर्मासन्दी:- धर्म सम्बन्धी सभी पात्रों को रखने के लिये तीन हाथ ऊँचा गूलर का बना आसन विशेष।

108-ध्रवा—करण काष्ठ का बना जुहू के सदृश बाहुप्रमाण स्रुक, जो यज्ञ के अन्त तक रखी जाती है।

Wednesday, 19 July 2017

पुंछ सेक्टर में 25 स्कूलों पर दागे मोर्टार, बच्चे सुरक्षित, सभी स्कूल बंद

पाकिस्तान ने पुंछ सेक्टर में 25 स्कूलों पर दागे मोर्टार, बच्चे सुरक्षित, सभी स्कूल बंद

जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में बुधवार को पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन किया गया. पुंछ में एलओसी पर सीमा पार से मोर्टार दाए गए.
स्कूलों पर शैलिंग
पाकिस्तान की तरफ से स्कूलों को भी निशाना बनाया गया. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक 25 स्कूलों पर मोर्टार दागे गए. बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में मोर्टार आकर गिरे.
सभी स्कूल रहेंगे बंद
पाकिस्तान की इस नापाक करतूत के बाद सभी प्रभावित स्कूलों को बंद कर दिया गया है. पुंछ के जिला विकास कमिश्नर ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से स्कूल बंद कर दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि एहतियातन इलाके के और स्कूलों को भी बंद करने के निर्देश दिए जा सकते हैं.

Friday, 14 July 2017

रल में ऐसा हुआ है, जिससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है.

केरल में SFI ने किया मां सरस्‍वती का अपमान, सोशल मीडिया पर बवाल

केरल में ऐसा हुआ है, जिससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है. इस बार केरल SFI यानी स्‍टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया, केरल ने मां सरस्‍वती का ऐसा पोस्‍टर लगाया है, जो विवाद का कारण है.
दरअसल इस पोस्‍टर में माता सरस्‍वती का चित्र है और ये नग्‍न है.
जैसे ही इस चित्र को सोशल मीडिया पर डाला गया, लोगों ने इस पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी है. राजीनतिक पार्टियां भी आगे आ रही हैं.
पश्चिम बंगाल भी कुछ ऐसा हुआ था
बता दें कि कुछ सप्‍ताह पहले ही एक किशोर की आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के कारण बदुरिया और इसके आसपास के इलाकों- केवशा बाजार, बांसतला, रामचंद्रपुर और तेंतुलिया में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे. आरोपी किशोर की गिरफ्तारी के बाद भी दोनों समुदायों के बीच झाड़पें हुईं. सड़क जाम कर दी गई.
दुकानों को तोड़ दिया गया और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया. हालात काबू में करने के लिए राज्य सरकार को बशीरहाट, बादुरिया, स्वरूपनगर और डेगंगा में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी तौर पर रोकनी पड़ीं, ताकि सोशल मीडिया के जरिये अफवाह फैलने से रोका जा सके.

भगवान भावना देखते हैं, दिखावा नहीं

भगवान भावना देखते हैं, दिखावा नहीं


आज एक माता की चौकी का निमंत्रण मिला तो जाना हुआ। काफी सुंदर भजन गाने वाले और सुंदर झांकी तैयार की गई थी। भजन गाने वाले भी उपस्थित सभी भक्तों को जोश से भर रहे थे, नाचना, जयकारे, तो कभी अरदास और भावना को जताने के लिए धन का चढ़ावा। इसी बीच एक काली माँ, शिव और पार्वती जी भी पधारे और वहाँ कथा को नृत्य के रूप में पेश किया। फिर आमंत्रित किया गया, उन लोगों को जो काली माँ, शिव जी और पार्वती जी के दर्शन करना चाहते थे। ये सब कलाकार थे जो ये सब बने थे लेकिन लोग ऐसे भक्त के उनके सामने माथा टेक कर ऐसे नाक रगड़ रहे जैसे साक्षात प्रभु उन्हें मिलने आये हों। खैर मेरा मकसद किसी की भावना को आहत करना नहीं है, बस इतना बताना चाह रही हूँ कि ये भक्त कहलाने वाले प्राणी वही थें,जो दिन भर दूसरों की बुराईयां करने से थकते नहीं हैं। घर में बेटी बहुओं को नीचा दिखाने का एक मौका नहीं छोड़ती लेकिन वहाँ माँ के हर स्वरुप को सत सत नमन करती हैं। मैं ऐसे होने वाले किसी भी कार्यक्रम के खिलाफ बिल्कुल नहीं हूँ, हालाँकि वहाँ आए अधिकतर लोग भजन सुनने कम और भंडारा खाने ज्यादा पहुँचे होते हैं, ये बात थोड़ा विचलित जरूर करती है।

हालाँकि ये भी सबकी अपनी सोच है मैं किसी को सिर्फ इस बात पर नहीं परख सकती। लेकिन कारण ऐसे कार्यक्रम में जाने का जो भी हो, दिखावा और झूठ कहाँ तक ठीक होता है? और आप झूठ दिखा भी किसे रहे हैं? सब लोग एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं, तो उन्हें तो आप कुछ पल भक्ति में डूब कर बेवकूफ बना नहीं सकते, बाकी परमेश्वर से तो आप चाह कर भी कुछ नहीं छुपा सकते, बचे आप खुद। अब आप ये झूठ खुद को ही बोल कर धोखा देते हो तो क्या ही कहा जा सकता है?

भावना होनी अच्छी बात है, भक्ति करना भी अच्छा, लेकिन जो दिल से ना हो और सच्ची ना हो तो ये सब बेमानी हैं। ऐसी झूठी भावना और भक्ति से भगवान तो क्या कोई इंसान भी खुश नहीं हो सकता। और जब भावना सच्ची होगी तो यकीन मानिए, ऐसे किसी के भी देवी, देवता बनने पर आप उनके चरणों में नहीं गिरेंगे। दिल से पुकारें, चाहे माँ दुर्गा को चाहे किसी अन्य देवी देवता को, सब मनोकामना पूर्ण होगी, आस्था पक्की और सच्ची रखें और एक बात और अच्छे इंसान जरूर बने रहिये।

Monday, 10 July 2017

सावन मास २०१७ विशेषांक !!

इस बार भगवान शिव का प्रिय मास सावन में 50 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। खास यह कि सोमवार से इस माह की शुरुआत हो रही और समापन भी सोमवार को ही होगा। यह काफी शुभ फलदायक है। 10 जुलाई से सावन की शुरुआत होगी और 7 अगस्त को रक्षाबंधन यानी सावन पूर्णिमा है।



,काफी सालों बाद इस बार सावन मास में पांच सोमवार है। खास बात यह कि वैधृति योग के साथ सावन प्रारंभ हो रहा है और आयुष्मान योग के साथ इस मास की समाप्ति। सोमवार, सावन मास, वैधृति योग व आयुष्मान योग सभी के मालिक स्वत: शिव ही हैं। इस लिए इस बार का सावन खास है। पुराणों के अनुसार सावन में भोले शंकर की पूजा, अभिषेक, शिव स्तुति, मंत्र जाप का खास महत्व है। खासकर सोमवारी के दिन महादेव की आराधना से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं।इनकी कृपा से दैविक, दैहिक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। निर्धन को धन और नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। बाबा भोले की पूजा से भाग्य पलट सकता है। सावन में सोमवारी का है
*विशेष महत्व सावन मास में प्रत्येक सोमवारी का विशेष महत्व है*।

अमूमन सावन में चार सोमवारी होती है, लेकिन इस बार पांच सोमवारी है। सभी सोमवारी की पूजा के लिए मंत्र अलग-अलग हैं।

नियमपूर्वक पूजा करने से औघड़दानी की कृपा हमेशा भक्तों पर बनी रहती है।
( १ ) पहली सोमवारी को महामायाधारी की पूजा: - सावन की पहली सोमवार को महामायाधारी भगवान शिव की आराधना की जाती है। पूजा क्रिया के बाद शिव भक्तों को ‘ऊं लक्ष्मी प्रदाय ह्री ऋण मोचने श्री देहि-देहि शिवाय नम: का मंत्र 11 माला जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से लक्ष्मी की प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि और ऋण से मुक्ति मिलती है।

( २ ) द्वितीय सोमवारी को करें महाकालेश्वर की पूजा- दूसरी सोमवार को महाकालेश्वर शिव की विशेष पूजा करने का विधान है। श्रद्धालु को ‘ऊं महाशिवाय वरदाय हीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय नम: मंत्र का रुद्राक्ष की माला से कम से कम 11 मामला जाप करना चाहिए। महाकालेश्वर की पूजा से सुखी गृहस्थ जीवन, पारिवारिक कलह से मुक्ति, पितृ दोष व तांत्रिक दोष से मुक्ति मिलती है।

*( ३ ) तृतीय सोमवार को अर्द्धनारीश्वर की पूजा- सावन की तृतीय सोमवार को अर्द्धनारीश्वर शिव का पूजन किया जाता है। इन्हें खुश करने के लिए ‘ऊं महादेवाय सर्व कार्य सिद्धि देहि-देहि कामेश्वराय नम: मंत्र का 11 माला जाप करना श्रेष्ठ माना गया है। इनकी विशेष पूजन से अखंड सौभाग्य, पूर्ण आयु, संतान प्राप्ति, संतान की सुरक्षा, कन्या विवाह, अकाल मृत्यु निवारण व आकस्मिक धन की प्राप्ति होती है*।

*( ४ ) चौथी सोमवारी को तंत्रेश्वर शिव की आराधना- चौथी सोमवारी को तंत्रेश्वर शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन कुश के आसन पर बैठकर ‘ऊं रुद्राय शत्रु संहाराय क्लीं कार्य सिद्धये महादेवाय फट् मंत्र का जाप 11 माला शिवभक्तों को करनी चाहिए। तंत्रेश्वर शिव की कृपा से समस्त बाधाओं का नाश, अकाल मृत्यु से रक्षा, रोग से मुक्ति व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है*।

*( ५) पांचवीं सोमवार को शिव स्वरूप भोले की पूजा: - पांचवीं सोमवार को श्री त्रयम्बकेश्वर की पूजा की जाती है। वैसे साधन को जो सावन में किसी कारण कोई सोमवारी नहीं कर पाते हैं उन्हें पांचवी सोमवारी करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसमें रुद्राभिषेक, लघु रुद्री, मृत्युंजय या लघु मृत्युंजय का जाप करना चाहिए*।
पूजन विधि :- गंजा जल, दूध, शहद, घी, शर्करा व पंचामृत से बाबा भोले का अभिषेक कर वस्त्र, यज्ञो पवित्र, श्वेत और रक्त चंदन भस्म, श्वेत मदार, कनेर, बेला, गुलाब पुष्प, बिल्वपत्र, धतुरा, बेल फल, भांग आदि चढ़ायें। उसके बाद घी का दीप उत्तर दिशा में जलाएं। पूजा करने के बाद आरती कर क्षमार्चन करें।

. याद रखें ये तिथियां:
10 जुलाई : पहली सोमवार
17 जुलाई : दूसरी सोमवार
24 जुलाई : तीसरी सोमवार
31 जुलाई : चौथी सोमवारी
07 अगस्त: पांचवी सोमवारी

Sunday, 2 July 2017

भगवान शिव के 10 भव्य मंदिर, जो हैं भारत के बाहर!!

भगवान शिव के 10 भव्य मंदिर, जो हैं भारत के बाहर!!



भारतीय संस्कृति के साथ देवी-देवताओं के मंदिर भी दुनियाभर में हैं। अधिकतर देशों में भगवान शिव मंदिर पाए जाते हैं। कुछ मंदिर ऐसे हैं जो उन देशों के लिए पर्यटन का बड़ा केंद्र भी बन गए हैं। विदेशों में भगवान शिव के कई मंदिर तो ऐसे भी हैं, जिनमें भारतीय भक्त कम विदेशी ज्यादा हैं। आइए, आज आपको भगवान शिव के ऐसे ही कुछ विदेशों में बने भव्य मंदिरों के बारे में बताते हैं….

1. अरुल्मिगु श्रीराजा कलिअम्मन मंदिर (जोहोर बरु, मलेशिया)

कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1922 के आस-पास किया गया था। यह मंदिर जोहोर बरु के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। जिस भूमि पर यह मंदिर बना हुआ है, वह भूमि जोहोर बरु के सुल्तान द्वारा भेंट के रूप में भारतीयों को प्रदान की गई थी। कुछ समय पहले तक यह मंदिर बहुत ही छोटा था, लेकिन आज यह एक भव्य मंदिर बन चुका है। मंदिर के गर्भ गृह में लगभग 3,00,000 मोतियों को दीवार पर चिपकाकर सजावट की गई है।

2. शिवा हिन्दू मंदिर (जुईदोस्त, एम्स्टर्डम)

यह मंदिर लगभग 4,000 वर्ग मीटर को क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए जून 2011 को खोले गए थे। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ-साथ भगवान गणेश, देवी दुर्गा, भगवान हनुमान की भी पूजा की जाती है। यहां पर भगवान शिव पंचमुखी शिवलिंग के रूप में है।

3. मुन्नेस्वरम मंदिर (मुन्नेस्वरम, श्रीलंका)

इस मंदिर के इतिहास को रामायण काल से जोड़ा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने इसी जगह पर भगवान शिव की आराधना की थी। इस मंदिर परिसर में पांच मंदिर हैं, जिनमें से सबसे बड़ा और सुंदर मंदिर भगवान शिव का ही है। कहा जाता है कि पुर्तगालियों ने दो बार इस मंदिर पर हमला कर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी।

4. कटासराज मंदिर (चकवाल, पाकिस्तान)

कटासराज मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 कि.मी. की दूरी पर कटस में एक पहाड़ी पर है। कहा जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल (त्रेतायुग) में भी था। इस मंदिर से जुड़ी पांडवों की कई कथाएं प्रसिद्ध हैं। मान्यताओं के अनुसार, कटासराज मंदिर का कटाक्ष कुंड भगवान शिव के आंसुओं से बना है। इस कुंड के निर्माण के पीछे एक कथा है। कहा जाता है कि जब देवी सती की मृत्यु हो गई, तब भगवान शिव उन के दुःख में इतना रोए की उनके आंसुओं से दो कुंड बन गए। जिसमें से एक कुंड राजस्थान के पुष्कर नामक तीर्थ पर है और दूसरा यहां कटासराज मंदिर में।

5. शिवा-विष्णु मंदिर (मेलबोर्न, ऑस्ट्रेलिया)

भगवान शिव और विष्णु को समर्पित इस मंदिर का निर्माण लगभग 1987 के आस-पास किया गया था। मंदिर का उद्घाटन कांचीपुरम और श्रीलंका से दस पुजारियों ने पूजा करके किया था। इस मंदिर की वास्तुकला हिन्दू और ऑस्ट्रेलियाई परंपराओं का अच्छा उदाहरण है। मंदिर परिसर के अंदर भगवान शिव और विष्णु के साथ-साथ अन्य हिंदू देवी-देवताओं की भी पूजा-अर्चना की जाती है।

6. शिवा मंदिर (ऑकलैंड, न्यूजीलैंड)

न्यूजीलैंड के इस मंदिर की स्थापना का मुख्य कारण लोगों के बीच हिंदू धर्म के प्रति आस्था और विश्वार बढ़ाना था। इस मंदिर के निर्माण के बाद 2004 में यह मंदिर आम भक्तों के लिए खोला गया था। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शिवेंद्र महाराज और यज्ञ बाबा के मार्गदर्शन में हिन्दू शास्त्रों के अनुसार किया गया था। इस मंदिर में भगवान शिव को नवदेश्वर शिवलिंग के रूप में है।

7. शिवा विष्णु मंदिर (लिवेरमोरे, कैलिफोर्निया)

यह मंदिर इस क्षेत्र के हिंदू मंदिरों में से सबसे बड़ा मंदिर कहा जाता है। वास्तुकला की दृष्टि से यह मंदिर उत्तर भारत और दक्षिण भारत की कला का सुंदर मिश्रण है। मंदिर में भगवान शिव के साथ-साथ भगवान गणेश, देवी दुर्गा, भगवान अय्यप्पा, देवी लक्ष्मी आदि की भी पूजा की जाती है। मंदिर की अधिकांश मूर्तियों 1985 में तमिलनाडु सरकार द्वारा दान की गई थी।

8. पशुपतिनाथ मंदिर (काठमांडू, नेपाल)
पशुपतिनाथ का मतलब होता है संसार के समस्त जीवों के भगवान। मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण लगभग 11वीं सदी में किया गया था। दीमक की वजह से मंदिर को बहुत नुकसान हुआ, जिसकी कारण लगभग 17वीं सदी में इसका पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर में भगवान शिव की एक चार मुंह वाली मूर्ति है। इस मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति तक पहुंचने के चार दरवाजे बने हुए हैं। वे चारों दरवाजे चांदी के हैं। यह मंदिर हिंदू और नेपाली वास्तुकला का एक अच्छा मिश्रण है।

9. शिवा टैम्पल (जुरीच, स्विट्ज़रलैंड)

यह एक छोटा लेकिन सुंदर शिव मंदिर है। यहां के गर्भ गृह में शिवलिंग के पीछे भगवान शिव की नटराज स्वरूप में और देवी पार्वती की शक्ति से रूप में मूर्तियां स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव से जुड़े हुए सभी त्योहार बहुत ही धूम-धाम से मनाए जाते हैं।

10. प्रम्बानन मंदिर (जावा, इंडोनेशिया)

हिंदू संस्कृति और देवी-देवताओं को समर्पित एक बहुत सुंदर और प्राचीन मंदिर इंडोनेशिया के जावा नाम की जगह पर है। 10वीं शताब्दी में बना यह मंदिर प्रम्बानन मंदिर के नाम से जाना जाता है। प्रम्बानन मंदिर शहर से लगभग 17 कि.मी. की दूरी पर है।







Friday, 30 June 2017

बशीर लश्करी समेत 4 आतंकी घिरे, सुरक्षाबलों ने विस्फोट कर उड़ाया घर

अनंतनाग: बशीर लश्करी समेत 4 आतंकी घिरे, सुरक्षाबलों ने विस्फोट कर उड़ाया घर

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेर लिया है. एसएचओ फिरोज डार की शहादत के जिम्मेदार टॉप लश्कर कमांडर आतंकी बशीर लश्करी के भी छिपे होने की आशंका है. क्रॉस फायरिंग में एक महिला की मौत हो गई है, जबकि 2 घायल हो गए हैं.
सुरक्षाबलों ने अनंतनाग जिले के डेलगम गांव को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है और खोज अभियान शुरू कर दिया है. पिछले महीने एसएचओ फिरोज दार सहित 6 पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए बशीर लश्कर जिम्मेदार है. घर में 4 आतंकियों के घिरे होने की आशंका है. सुरक्षाबलों ने घर में धमाका भी किया है.
कुछ दिन पहले ही लश्कर आतंकी बशीर सुरक्षा बलों के हाथ से बचकर निकल गया था. पुलिस और राष्ट्रीय रायफल्स ने अनंतनाग जिले में सोफ कोकरनाग गांव को लश्कर आतंकी बशीर की उपस्थिति के इनपुट के बाद घेर लिया था. लेकिन बशीर अपने 2 साथियों के साथ बचकर निकल गया था. इसके अलावा शोपियां के 10 गांवों में भी सर्च ऑपरेशन जारी किया है.
कौन है बशीर लश्करी
दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग के कोकेरनाग क्षेत्र का निवासी बशीर लश्करी 1999 में पीओके पार कर गया था. 2012 में राज्य सरकार की योजना के तहत वह पाक अधिकृत कश्मीर से वापस लौटा. 2014 तक वह जेल में रहा. 2015 में वह वापस आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय हो गया. पिछले एक साल के दौरान बशीर ने आंतकी समूहों की संख्या सात तक बढ़ाई. कुछ पाकिस्तानी लश्कर आतंकवादी भी उसके समूह का हिस्सा माने जाते हैं. इनके नाम पर 10 लाख रुपये का इनाम भी है.

Thursday, 29 June 2017

अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा : इस साल 29 जून से दर्शन देंगे बाबा बर्फानी


चालीस दिन चलने वाली वार्षिक पवित्र अमरनाथ यात्रा इस साल 29 जून से शुरू होगी. पिछले साल अमरनाथ यात्रा 48 दिन तक चली थी.
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ‘तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने निर्णय लिया है कि यात्रा 29 जून से शुरू होगी और सात अगस्त को श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी.’
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एवं एसएएसबी के अध्यक्ष एनएन वोहरा ने नई दिल्ली में सोमवार को श्राइन बोर्ड की 32वीं बैठक की अध्यक्षता की.

Tuesday, 27 June 2017

सिक्किम बॉर्डर से सेना हटाए भारत, वरना नहीं होने देंगे मानसरोवर यात्रा

चीन की धमकी- सिक्किम बॉर्डर से सेना हटाए भारत, वरना नहीं होने देंगे मानसरोवर यात्रा

चीन ने एक बार फिर अपनी दादागिरी दिखाते हुए भारत की ओर कड़ा रुख अपनाया है. चीन ने मानसरोवर यात्रा को बंद कर दिया है. चीन की ओर से नाथुला दर्रे रास्ते को बंद कर दिया गया है. हालांकि अभी इस पर भारत के विदेश मंत्रालय का कोई बयान नहीं आया है. इससे पहले खबर थी कि इस मुद्दे पर अभी दोनों देशों में बात चल रही है. चीन ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक भारत सिक्किम बॉर्डर से अपनी सेना नहीं हटाएगा तब तक वह इस मार्ग को नहीं खोलेगा. आपको बता दें कि अभी भी लगभग 6 गुटों को यात्रा करनी है. 
भिड़े थे चीनी और भारत के सैनिक
आपको बता दें कि सोमवार को ही एक वीडियो सामने आई थी जिसमें सिक्किम सेक्टर में भारत-चीन सीमा पर तैनात जवानों और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारत के सिक्किम सेक्टर में घुसकर दो बंकर भी तबाह कर दिए हैं. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के सैनिकों के बीच यह रस्साकशी सिक्किम के डोका ला जनरल एरिया में पिछले दो दस दिनों से चल रही है. 
साथ ही चीनी सैनिकों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं के जत्थे को भी रोक दिया है. इस इलाके में चीनी सैनिकों को भारतीय क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकने के लिए भारतीय सैनिकों को काफी संघर्ष करना पड़ा है. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनियों को रोकने के लिए भारतीय सैनिकों ने मानव श्रृंखला बनाई. इनमें से कुछ जवानों ने घटना की वीडियोग्राफी की और तस्वीरें उतारीं.
गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही सिक्किम के नाथू-ला के पास पहुंचे मानसरोवर यात्रा के दो जत्थों को चीन के बॉर्डर से वापस लौटा दिए जाने की खबर से राजधानी दिल्ली में ठहरे हुए तीसरे जत्थे के यात्रियों की चिंता बढ़ गई थी. दिल्ली में मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले लोगों के लिए ठहराने की व्यवस्था गुजराती समाज भवन में रहती है और यहां पर तीसरे जत्थे के तीर्थयात्री मेडिकल चेकअप के लिए आ चुके हैं. इन यात्रियों को मेडिकल चेकअप में फिटनेस मिलने के बाद 27 जून को नाथू-ला के लिए रवाना किया जाएगा.