Follow Me On Facebook

Saturday, 17 February 2018

इस घोटाले की नौबत ही नहीं आती. इस घोटाले में 7 बड़ी गलतियां सामने दिखी हैं.

PNB घोटाला: बैंकों की वे 7 बड़ी गलतियां जो पकड़ लेते तो बच जाते हजारों करोड़


पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले ने पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस नीरव मोदी फ्रॉड का जिम्मा एक दूसरे पर फोड़ने पर टिके हुए हैं. लेकिन इसके बावजूद जिन बातों पर ध्यान नहीं जा रहा है, वह हैं कुछ सामान्य गलतियां जो इस फ्रॉड के दौरान हुईं. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाता तो शायद इस घोटाले की नौबत ही नहीं आती. इस घोटाले में 7 बड़ी गलतियां सामने दिखी हैं.
1. जब लेटर ऑफ अंडरटेकिंग को जारी किया जाता है, तो हमेशा ही उस बैंक को भेजा जाता है जो उस प्रक्रिया की भूमिका में प्रमुख है. इस केस में 2010 से लगातार कई बार LoU जारी किए गए थे, लेकिन सवाल यह है कि हर बार इनको विदेशी ब्रांच से भी मंजूरी कौन दे रहा था.
2. LoU जारी होने के बाद दो बैंकों के बीच में संधि की प्रक्रिया होती है जो लोन देने की प्रक्रिया की जांच करती है. सवाल है कि क्या इस केस में इस प्रकार की कोई प्रक्रिया का पालन किया गया था. क्योंकि अगर किया जाता तो नीरव मोदी के सभी बैंक अकाउंट्स और पिछले रिकॉर्ड की जांच होती.
3. अगर लोन चुकाने में तय समय से 2 साल से अधिक का समय बीत जाता है, तो बैंक की तरफ से ऑडिट किया जाता है. ऐसे में क्या किसी भी बैंक ऑडिटर ने इस प्रकार की चिंता की तरफ ध्यान नहीं दिया.
4. जब भी LoU जारी होता है, तो वह लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरता है. यानी जूनियर लेवल से लेकर बड़े लेवल तक प्रक्रिया की जांच होती है. लेकिन इस केस में बार-बार छोटे लेवल के अधिकारियों का नाम आ रहा है, ऐसे में क्या इस प्रक्रिया पालन भी नहीं हो पाया.
5. एलओयू के बाद बैंक खातों की ब्रांच और हेड ऑफिस लेवल पर इंटरनल जांच लगातार जारी रहती है. इसी प्रकार की जांच आरबीआई लेवल पर भी होती है. अगर इस मामले में लगातार गड़बड़ी दिखाई दे रही थी, तो क्या किसी भी लेवल की जांच में ऐसा नहीं पाया गया.
6. चीफ विजिलेंस ऑफिसर जो भी जांच करता है वह बैंक के एमडी को नहीं बल्कि सीधा चीफ विजिलेंस कमिश्नर को रिपोर्ट करता है. अगर कोई गड़बड़ी होती है तो वो सीधा चीफ विजिलेंस कमिश्नर की नज़र में आती है. लेकिन अगर ये घोटाला 7 साल से चल रहा था, तो क्या किसी भी अफसर ने कोई गड़बड़ी महसूस ही नहीं की.
punjab an हर बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में एक आरबीआई का अफसर जरूर शामिल रहता है. ऐसा इसलिए किया जाता है कि बैंक की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके. लेकिन लगता है कि इस केस में ऐसा नहीं हुआ है, ना तो पीएनबी और ना ही आरबीआई के लेवल पर किसी को इस घोटाले की भनक पड़ी.

Friday, 16 February 2018

मान्यता है कि फुलैरा दूज के दिन सच्चे मन से भगवान कृष्ण और राधा की पूजा-अर्चना करने से जीवन में प्रेम और आनंद की कभी कमी नहीं होती

कल है कृष्ण-राधा का विशेष दिन, इस प्रकार पूजा करने से जीवन में कभी नहीं होगी प्रेम की कमी

हिंदू धर्म में राधा-कृष्ण की जोड़ी प्रेम की मिसाल मानी जाती है। राधा और कृष्ण के प्रेम की कई कथाएं प्रचलित हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, बरसाने आदि में राधा-कृष्ण के कई मंदिर बने हैं। इन मंदिरों में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां फाल्गुन मास में एक विशेष दिन को राधा-कृष्ण के प्रेम-दिवस के रूप में मनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन कान्हा और राधा रानी की पूजा करने से प्रेम की प्राप्ति होती है?


मान्यता है कि द्वापर युग में फाल्गुन ही वो माह था जब कृष्ण-राधा का प्रेम चरम पर था। इसी महीने में गोपियों ने दोनों के प्रेम को सहर्ष स्वीकार कर उनपर फूलों की वर्षा की थी। गोकुल की गोपिकाओं ने कृष्ण-राधा के प्रेम पर मोहित होकर फूलों की होली खेली थी। यही वजह है कि इस दिन को यहां विशेष रूप से “फुलैरा दूज” के रूप में मनाया जाता है।
कब मनाई जाती है फुलैरा दूज?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय को “फुलैरा दूज” पर्व मनाया जाता है। इस साल यह 17 फरवरी को मनाई जाएगी जो इस दिन (17 फरवरी को) सुबह 3 बजकर 56 मिनट पर शुरु होगा और अगले दिन यानि 18 फरवरी शाम 4 बजकर 50 मिनट तक चलेगा।
फुलैरा दूज का महत्व
मान्यता है कि फुलैरा दूज के दिन सच्चे मन से भगवान कृष्ण और राधा की पूजा-अर्चना करने से जीवन में प्रेम और आनंद की कभी कमी नहीं होती। प्रेमी जोड़ों को एक-दूसरे का साथ मिलता है। भगवान कृष्ण और देवी राधा भक्तों के जीवन को प्रेम और खुशियों से भर देते हैं।

मनाने का तरीका
यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं। यह बसंत पंचमी के बाद और होली के पहले पड़ता है इसलिए होली की तरह इस दिन भी लोग एक दूसरे के साथ फूलों की होली खेलते हैं और होली का त्यौहार आने तक हर दिन घर को फूलों से सजाते हैं। कह सकते हैं इसी दिन से एक प्रकार से होली की शुरुआत हो जाती है।
मथुरा, वृंदावन में ‘फुलैरा दूज’ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की पूजा करने वाले भक्त इस दिन उनपर जितने फूल बरसाते हैं कान्हा उन भक्तों पर उससे कहीं अधिक प्रेम लुटाते हैं। इस दिन फूलों से सजे कन्हैया लाल को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त मथुरा वृंदावन के मदिरों में आते हैं।
पूजा करने से मिलेगा फल
ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं के अनुसार ‘फुलैरा दूज’ को फाल्गुन माह का सबसे शुभ दिन माना जाता है। अगर आप कोई भी नया काम करने का सोच रहे हैं तो इस दिन बिना सोचे-विचारे उस काम को कर सकते हैं, आपको सफलता मिलेगी।
वैवाहिक जीवन को मधुर बनाने तथा नए प्रेम-संबंध शुरु करने के लिए यह एक शुभ दिन माना जाता है। जिनकी कुंडली में प्रेम का अभाव है उन्हें इस दिन कृष्ण-राधा की पूजा जरूर करनी चाहिए।
विवाह के लिए अति उत्तम दिन
फुलैरा दूज को विवाह के लिए उत्तम दिन माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन विवाह के लिए किसी भी मुहूर्त की जरूरत नहीं होती। ब्रजमंडल में फुलैरा दूज के दिन सबसे ज्यादा विवाह होते हैं।

क्या करें इस दिन?
घर में फूलों की रंगोली बनाएं।
श्रीकृष्ण और राधा की मूर्ति को फूलों से सजाएं।
पूजा करते वक्त मुरली वाले कान्हा को मीठे पकवान का भोग लगाएं।
मीठे पकवानों को भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में बांटें।

Thursday, 15 February 2018

11 हजार करोड़ का घोटाला कि बैंक को भनक तक नहीं लगी?

PNB स्‍कैम: ऐसे हुआ 

पंजाब नेशनल बैंक(पीएनबी) 
में 11, 360 करोड़ रुपये के घोटाले के सामने आने के बाद सरकार समेत जांच एजेंसियों के होश उड़ गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर बैंक की नाक के नीचे से कैसे इतना बड़ा घोटाला हो गया और पता नहीं चला? यह सभी सवाल उठ रहे हैं कि ऑडिट की नजर से यह कैसे बच गया? इन सवालों के जवाब के लिए पूरे मामले की परत दर परत तक जाने की जरूरत है. इसके साथ ही मीडिया रिपोर्टों में अभी तक इस खेल में दो बैंक कर्मियों की मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी के साथ मिलीभगत सामने आ रही है. इनमें से एक पूर्व डिप्‍टी मैनेजर और दूसरा क्‍लर्क है. इस पूरी साठगांठ को समझने के लिए पूरे बैंकिंग सिस्‍टम को समझने की जरूरत है.
1. पीएनबी घोटाले के केंद्र बिंदु में सहमति पत्र यानी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) है. यह पत्र एक तरह से बैंक की तरफ से गारंटी होती है. दरअसल यदि कोई बाहर से सामान आयात करता है तो निर्यातक को विदेश में पैसे चुकाने होते हैं. इसके लिए कई बार आयातक कुछ समय के लिए बैंक से उधार लेता है.
2. इसके लिए बैंक आयातकर्ता के लिए विदेश में मौजूद किसी बैंक को एलओयू देता है. इसमें लिखा होता है कि अमुक काम के लिए आप एक निश्चित पेमेंट कर दीजिए. इसमें बैंक वादा करता है कि आप (विदेशी बैंक) निश्चित अवधि के लिए यह पैसे दे दीजिए और वह निर्धारित अवधि के भीतर ब्‍याज के साथ उस पैसे को लौटा देगा.
16 करोड़ रुपये में नेकलेस बेचकर चर्चा में आए थे नीरव मोदी
3. आमतौर पर होता यह है कि बैंक को व्‍यवसायी तय समय पर पैसे ब्‍यास समेत वापस कर देता है और बैंक आगे विदेशी बैंक को इसकी पेमेंट कर देता है.
4. यहीं पर पूरा खेल हुआ. मुंबई की बैंक की एक कॉरपोरेट ब्रांच के दो कर्मचारियों ने नीरव मोदी के लिए फर्जी एलओयू जारी किए. बैंक का इससे कोई लेना-देना नहीं था.
5. दरअसल एलओयू के लिए एक स्विफ्ट सिस्‍टम होता है. इन कर्मचारियों के पास इसका कंट्रोल था. यह एक अंतरराष्‍ट्रीय कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम होता है तो दुनिया भर के बैंको को आपस में जोड़ता है.
6. इसी स्विफ्ट सिस्‍टम के तहत एलओयू के लिए कोड भेजे जाते हैं. इस सिस्‍टम के जरिये ही एलओयू संदेशों का आदान-प्रदान होता है. इस कारण जब किसी विदेशी बैंक को स्विफ्ट सिस्‍टम के तहत एलओयू कोड मिलते हैं तो वह उनको आधिकारिक और सटीक मानता है और व्‍यवसायी को पैसे उधार के रूप में दे देता है.
7. पीएनबी की उस ब्रांच में इस काम को करने वाले थे- एक क्‍लर्क जो डाटा फीड करता था और दूसरा वह अधिकारी जो इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि करता था. इस मामले में इन लोगों ने फर्जी एलओयू बनाकर भेज दिया.
8. दरअसल इस मामले में ऐसा लगता है कि स्विफ्ट सिस्‍टम, कोर बैंकिंग से जुड़ा नहीं था. ऐसा इसलिए क्‍योंकि कोर बैंकिंग से जुड़ी बैंलेंसशीट रोज ब्रांच मैनेजर के पास पहुंचती है तो उसको पता लग जाता है कि पिछले दिन बैंक ने कहां कर्ज देने की मंजूरी दी.
9. चूंकि फर्जी संदेश भेजे गए. उनको भेजने के बाद डिलीट कर दिया और कोर बैंकिंग में कोई एंट्री नहीं हुई. इस वजह से किसी को कुछ पता नहीं चला.
10. 2011 से यह खेल इसलिए चलता रहा क्‍योंकि एक कर्ज को खत्‍म करने के लिए समय से पहले ही दूसरा बड़ा कर्ज ले लिया जाता रहा. उससे पुराने कर्ज को अदा किया जाता रहा. इससे किसी को पता नहीं चला. इस बीच पिछले साल वह बैंक अधिकारी रिटायर हो गया. उसके रिटायर होने के बाद जब नए एलओयू के लिए नीरव मोदी की कंपनी ने संपर्क साधा तो नए अधिकारी ने जब इसके लिए जमानत राशि मांगी तो उसको बताया गया कि इससे पहले उन्‍होंने कभी कुछ दिया नहीं. यहीं से गड़बड़ के संकेत मिले. उसके बाद जब एक विदेशी बैंक ने समय पूरा होने के बाद पीएनबी से एलओयू के आधार पर पैसे मांगे तो पीएनबी ने कहा कि उसने तो कभी ऐसे लोन के लिए कहा ही नहीं. इसके बाद बैंक ने जांच एजेंसियों के पास शिकायत की. इनकी जांच के बाद अब सारे मामले खुल रहे हैं.

माल्या के बाद दूसरे सबसे बड़े डिफॉल्टर

इस हीरा कारोबारी ने दिया था PNB को सबसे बड़ा झटका


नीरव मोदी इन दिनों चर्चा में है. दरअसल, पीएनबी में हुए 11 हजार करोड़ के फ्रॉड ने सबको हिला कर रख दिया है. शेयर बाजार से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक इस महाघोटले से सकते में हैं. वहीं, सबसे खास बात ये है कि इस घोटाले से बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं. क्योंकि, फ्रॉड को देखकर लगता है कि बैंक ने रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस को फोलो नहीं किया. आरबीआई गाइडलाइंस के बावजूद पीएनबी ने इतना बड़ा लोन कैसे दिया? आपको बता दें यह पहली बार नहीं है जब पीएनबी को इतना बड़ा झटका लगा है. पांच साल पहले भी ऐसा ही एक घोटाले का बैंक शिकार हो चुका है. अब सवाल ये है कि पहले भी हीरा कारोबारी के झांसे में आकर पीएनबी को करोड़ों का नुकसान हुआ था. ऐसे में बैंक दोबारा कैसे झटका खा सकता है.
जतिन मेहता भी दे चुके हैं धोखा
विनसम डायमंड एंड ज्वैलरी लिमिटेड ग्रुप के जतिन मेहता भी हीरा कारोबार से जुड़े थे. पांच साल पहले उनके ग्रुप ने भी भारतीय बैंकों को कुछ इसी तरह धोखा देकर करोड़ों का फ्रॉड किया था. हालांकि, उस वक्त का मामला और बड़ा था, क्योंकि उस वक्त के इस हीरा कारोबारी ने कईं बैंकों का पैसा नहीं चुकाया था. उस वक्त भी सबसे ज्यादा नुकसान पीएनबी को हुआ था.
माल्या के बाद दूसरे सबसे बड़े डिफॉल्टर
जतिन मेहता को विजय माल्या के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा डिफॉल्टर घोषित किया गया. दरअसल, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की अंडरटेकिंग पर बैंकों ने विनसम ग्रुप को 7000 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था. इसमें भी पीएनबी ने सबसे ज्यादा 1800 करोड़ का कर्ज दिया था.
14 बैंकों से लिजा कर्ज
विनसम डायमंड ग्रुप ने 2011 में 14 बैंकों से 3420 करोड़ रुपए का कर्ज लिया. 2012 की पहली तिमाही तक इस कर्ज की सीमा को बढ़कर 4617 करोड़ रुपए कर दिया गया. यह सारा पैसा ग्रुप की तीन कंपनियों को दिया गया. विनसम डायमंड को 4366 करोड़ रुपए का कर्ज दिया गया. फोरएवर प्रिशियस डायमंड को 1932 करोड़ रुपए का कर्ज दिया गया. वहीं, सूरज डायमंड्स को 283 करोड़ का कर्ज दिया गया था.
बैंकों ने लिया था पेमेंट का जिम्मा
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक, 2011 में बैंकों ने विनसम डायमंड को लेटर्स ऑफ क्रेडिट जारी किया था. एसबीएलसी इंटरनेशनल बुलियन बैंक्स को यह लेटर जारी किया गया था. दरअसल, एसबीएलसी इंटरनेशनल बुलियन बैंक ही विनसम ग्रुप को सोने की सप्लाई करती थी. .
क्या था लेटर ऑफ क्रेडिट
बैंकों की ओर से विनसम को दिए गए लेटर्स ऑफ क्रेडिट का मतलब था कि अगर ग्रुप एसबीएलसी इंटरनेशनल बुलियन बैंक्स को सोने का भुगतान नहीं करती तो बैंक उसकी पेमेंट करेंगे. बैंकों ने उसे कर्ज दिया. विनसम ग्रुप ने पैसा नहीं चुकाया. रीपेमेंट का दबाव लगातार बढ़ा
विनसम ने नहीं चुकाया कर्ज
विनसम ग्रुप के क्लाइंट्स को बड़ा नुकसान हुआ. इसके बाद विनसम ने बैंकों को पेमेंट करने से इनकार कर दिया. उसने तर्क दिया की क्लाइंट को नुकसान होने की वजह से वह रीपेमेंट नहीं कर पाएगी. तभी बैंकों को बड़ा झटका लगा.
नीरव मोदी वाले ही थे हालात
नीरव मोदी मामले में भी हालात पांच साल पहले वाले ही हैं. पीएनबी ने सीबीआई को जो तर्क दिया है वो भी वैसा ही है जैसा विनसम ग्रुप के समय पर था. उस घोटाले के बाद से जतिन मेहता का परिवार कभी भारत नहीं लौटा. खबरों की मानें तो मेहता परिवार सिंगापुर में सेटल है और परिवार के कुछ सदस्य दुबई में हैं. जतिन मेहता पर 7 हजार करोड़ लेकर फरार होने का आरोप है और 2012 से उनकी कोई खबर नहीं है.
पनामा पेपर्स में भी नाम
पनामा पेपर्स ने भी अपनी लिस्ट में जतिन मेहता का नाम शामिल किया था. उसके मुताबिक, जतिन मेहता ने बैंकों से लिए कर्ज का इस्तेमाल बहामास में किया, जहां उन्होंने कई जगह निवेश किया. खबरों के मुताबिक, मेहता परिवार ने 2012 में भारत छोड़ा और उसके बाद सिंगापुर, दुबई में रहे, लेकिन 2016 में मेहता परिवार फिर चर्चा में आया जब यह बात सामने आई कि जतिन मेहता ने सेंट किट्स एंड नेविस की नागरिकता ली. बता दें कि सेंट किट्स और नेविस के साथ भारत का कोई प्रत्यर्पण समझौता भी नहीं है.

30 अन्य बैंकों की जांच में पता चलेगी फर्जीवाड़े की सही रकम

और बढ़ सकती है फर्जीवाड़े की रकम, 30 बैंकों की जांच में पता चलेगा असली घोटाला

देश में भूचाल लाने वाले पंजाब नेशनल बैंक के महाघोटाले के मास्टरमाइंड नीरव मोदी ने सरकारी व्यवस्था की खामियों का जमकर फायदा उठाया. बैंक के ही दो अधिकारियों की मिलीभगत से 150 फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी कराए गए जिसकी मदद से 11360 करोड़ रुपये का यह फर्जीवाड़ा किया गया.
30 अन्य बैंकों की जांच में पता चलेगी फर्जीवाड़े की सही रकम
इधर पीएनबी ने देश के 30 अन्य बैंकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें ये कहा गया है कि वे फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के सहारे किए गए इस घोटाले की मॉडस ऑपरेंडी की पड़ताल कर रही है. जैसे-जैसे वे इसकी तह में जा रहे हैं, वैसे-वैसे कई खामियां पता चल रही हैं. पत्र में कहा गया है कि इसके बारे में सभी बैंकों को बताया जाएगा, ताकि वे भी अपने यहां ऐसे किसी भी संदिग्ध लेन-देन की जांच कर सके. ऐसे घोटाले की सही रकम का अंदाजा पीएनबी समेत 30 अन्य बैंकों की जांच के बाद ही पता चल सकेगा.
बिना एंट्री करे जारी किए फर्जी 150 LoU
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक के डिप्टी मैनेजर रहे गोकुलनाथ शेट्टी ने नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग दिया. गोकुलनाथ शेट्टी ने अपने दूसरे साथी अफसर मनोज खरात के साथ मिलकर ये फर्जीवाड़ा किया. इन शातिरों ने पकड़ में आने से बचने के लिए बैंक के दस्तावेजों में नीरव की कोई एंट्री ही नहीं की गई.
इन चार बैंकों की विदेश ब्रांच से निकाले पैसे
नीरव मोदी ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों (LoU) का भरपूर फायदा उठाते हुए हांगकांग में इलाहाबाद बैंक की ब्रांच से 2000 से 2200 करोड़, यूनियन बैंक से 2000 से 2300 करोड़, एक्सिस बैंक से लगभग 2000 करोड़ और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 960 करोड़ रुपये लिए.
क्या होता है LoU
लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) एक तरह से बैंक गारंटी होती है. यह आयात के लिए ओवरसीज भुगतान करने के लिए जारी किया जाता है. LoU जारी करने वाला बैंक गारंटर बन जाता है और वह अपने क्लाइंट के लोन पर प्रिंसिपल अमाउंट और उस पर लगने वाले ब्याज को बिना शर्त भुगतान करना स्वीकार करता है.
SWIFT का भी उठाया फायदा
इतनी भारी-भरकम राशि के लेन-देन के लिए पीएनबी के कर्मचारियों ने 'SWIFT' का भी दुरुपयोग किया. रोजाना की बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को प्रॉसेस करने वाले कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) को ये कर्मचारी चकमा दे गए. इसके जरिये उन्होंने LoUs पर दी जाने वाली गारंटी को जरूरी मंजूरी के बिना ही पास कर लिया और इसी के आधार पर भारतीय बैंकों की विदेश में स्थिजत ब्रांचेस ने कर्ज दिया.
SWIFT क्या है?
जब भी किसी बैंक की तरफ से LoU जारी किया जाता है. इसके बाद क्रेडिट ट्रांसफर की जानकारी विदेश में स्थियत बैंक को दी जाती है. यह जानकारी SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) व्यवस्था के जरिये दी जाती है. यह एक अहम जानकारी होती है, जिसके जरिये बैंक अपनी सहमति और गारंटी देता है. दरअसल, 'स्विफ्ट' से जुड़े मैसेज पीएनबी के पिनैकल सॉफ्टवेयर सिस्टम में तत्काल ट्रैक नहीं होते हैं क्योंकि ये बैंक के CBS में एंट्री किए बिना जारी किए जाते हैं. इसी का फायदा पीएनबी के दो कर्मचारियों ने उठाया और करोड़ों का लेन-देन किया. इस महाघोटाले को करीब 150 LoU के जरिए अंजाम दिया गया.
नीरव और उसके करीबी एक-एक कर हुए फरार
नीरव मोदी एक जनवरी को ही देश छोड़कर स्विट्जरलैंड चला गया है. नीरव का भाई निशाल बेल्जियम का नागरिक है. वह भी एक जनवरी को भारत छोड़ गया. हालांकि वे दोनों साथ गए थे या अलग अलग इसकी जांच अभी की जानी है. नीरव की पत्नी और अमेरिकी नागरिक एमी छह जनवरी को यहां से निकली. उसके चाचा तथा गीतांजलि जूलरी के प्रवर्तक मेहुल चौकसी चार जनवरी को देश छोड़कर चले गए. अब तक नीरव के मुंबई व सूरत समेत कई शहरों में 20 स्थानों पर तलाशी ली गई है.
29 जनवरी को ही PNB ने की थी शिकायत
पीएनबी ने 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बारे में 29 जनवरी को सीबीआई को शिकायत की थी. सीबीआई ने नीरव, उसकी पत्नी, भाई व पार्टनर चौकसी के खिलाफ 31 जनवरी को ही मामला दर्ज किया था. बैंक ने पहली शिकायत के पखवाड़े भर में ही सीबीआई से संपर्क कर कहा कि यह मामला 11,400 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का है. अब इस सवाल की भी पड़ताल की जा रही है कि पीएनबी ने सीबीआई को शिकायत में सारी जानकारी न देकर यह किस्तों में देने का फैसला क्यों किया?

ग्रहण जब लगते हैं तो पृथ्वी के प्राणियों में कुछ हलचल सी होती है

सूर्यग्रहण 16 फरवरी को लगेगा, राशियों पर भी पड़ेगा प्रभाव
ग्रहण जब लगते हैं तो पृथ्वी के प्राणियों में कुछ हलचल सी होती है। 
ग्रहण के दौरान पक्षी अपने घोसलों की ओर लौटना शुरू हो जाते हैं। लगभग 15 दिन पहले साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था अब दूसरा ग्रहण जो सूर्य ग्रहण होगा, लगेगा। यह सूर्य ग्रहण आंशिक होगा, जो कि भारत में दिखाई नहीं देगा। विश्व के अन्य देशों में यह दिखाई देगा। वर्ष 2018 में कुल तीन बार सूर्य ग्रहण लगेंगे। और ये तीनों ही आंशिक रूप से होंगे। ये तीनों सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका के एरिया में दिखाई पड़ेंगे। 16 फरवरी को साल का पहला सूर्यग्रहण पड़ेगा। इससे पहले पिछले महीने की 31 जनवरी को चंद्रग्रहण हुआ था। जो पूरे भारत में दिखाई दिया था। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण 12 बजकर 25 मिनट से शुरू होगा लेकिन भारत में यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा। ग्रहण का मोक्ष सुबह 4 बजे होगा। 
यह सूर्य ग्रहण दक्षिण जार्जिया, प्रशांत महासागर, चिली, ब्राजील  और अंटार्कटिका आदि देशों में दिखाई देगा। जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
इस सूर्य ग्रहण के कारण 16 फरवरी के बाद कुछ राशियों पर इसका नकारात्मक असर रहेगा जबकि कुछ राशियों की खुलेगी किस्मत।
मेष-सूर्य ग्रहण के कारण मेष राशि वालों का कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ेगा, इनकम बढ़ेगी तथा व्यवसाय में उत्तम लाभ होगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के साथ ही रुके हुए कामों में पूर्ण होंगे तथा सफलता मिलने की उम्मीद है।
वृष-कार्य क्षेत्र में व्यस्त रहेंगे। जिसकी वजह से नौकरी में सम्मान बना रहेगा। व्यवसाय में विस्तार होगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। 16 फरवरी के बाद वृष राशि वालों के लिए धन कमाने के कई मौके मिलेंगे। इस दौरान आपको थोड़ी परेशानी और थोड़ी बेचैनी हो सकती हैं। परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के मामले में चिंता और परेशानी हो सकती है।
मिथुन-न्नति और लाभ की संभावना कम है। प्रेम संबंधों में तकरार हो सकती है। पढ़ाई में मन कम ही लगेगा। पारिवारिक विवाद से बचें। विरोधी शांत रहेंगे। व्यावसायिक लाभ सामान्य रहेगा। स्वास्थ्य नरम रहेगा। हालांकि आने वाले समय में कुछ परेशानियां बढ़ सकती है।
 कर्क- यह समय जीवन में थोड़ा कष्टकारी रहेगा। धन हानि और मानहानि भी हो सकती है। यह ग्रहण 16 फरवरी के बाद शुभ समाचार मिल सकेगा। करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे। व्यवसाय में धन लाभ बढ़ेगा। मित्र से भेंट होगी जिसकी वजह से किसी नए प्रोजेक्ट पर आगे बढऩे की संभावना रहेगी।
सिंह-किसी से साझेदारी है तो संभलकर रहें। जीवन साथी को कष्ट हो सकता है। वैवाहिक जीवन में भी उथल-पुथल आ सकती है, सावधानी रखें। भू संपत्ति का अटका कार्य बनेगा। व्यय पर नियंत्रण रखें। व्यवसाय में लाभ कम होगा। स्वास्थ्य नरम रहेगा। कानूनी विवाद में  उलझ सकते हैं। 16 फरवरी के बाद किसी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं इसलिए सावधानी बरतें।
कन्या- विरोधियों और शत्रु का नाश होगा। हर जगह से अच्छी खबर और सफलता प्राप्त होने से खुशी मिलेगी। कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण आने वाला समय अनुकूल रहेगा। कार्य क्षेत्र में विस्तार संभव है। अटके धन की प्राप्ति होगी। व्यवसाय में लाभ बढ़ेगा। घर में खुशी होगी। विदेशी की यात्रा कर सकते हैं।
तुला- ग्रहण के बाद आपका मन विचलित हो सकता है। मानसिक तनाव बढ़ सकता है। पैसों के मामले में नुकसान उठाना पड़ सकता है। सावधानी बरतें।
वृश्चिक- मन अशांत रहेगा। कानूनी परेशानी से मुक्ति मिलेगी। व्यवसाय में सुधार आएगा। धर्म में श्रद्धा बढ़ेगी।
धनु- इच्छाशक्ति में वृद्धि होगी। छोटी यात्रा का योग बनेगा, यात्रा मंगलमय रहेगी। पारिवारिक संबंधों में सुधार बनेगा।अजनबी से सचेत रहें। व्यावसायिक निर्णय सोच समझकर लें। घर में शांति रहेगी।मकर-कार्यक्षेत्र में नया पदभार मिल सकता है। भू संपत्ति से लाभ के अवसर मिलेंगे। व्यावसायिक लाभ बढ़ेगा।
मकर-मानसिक तनाव बढऩे से परेशानी हो सकती है। आमदनी की तुलना में खर्च ज्यादा होगा। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ सकती है।
कुंभ-भोग विलास के साधनों पर व्यय होगा। नौकरी में मन लगेगा। व्यवसाय में धन लाभ होगा। धैर्य बनाए रखें।
मीन-उत्साह में वृद्धि होगी। नौकरी में उन्नति के अवसर मिलेंगे।व्यवसाय में लाभ होगा।संतान पक्ष से चिंता रहेगी।
कार्यक्षेत्र में नया पदभार मिल सकता है। भू संपत्ति से लाभ के अवसर मिलेंगे। व्यावसायिक लाभ बढ़ेगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान शास्त्रों में निर्देश दिए गए हैं जिन्हें मानव को पालन करना चाहिए

* जन्मकुंडली के 12 भाव और 9 ग्रहों का योग जानिए...

शरीर के हर हिस्से पर होता है ग्रहों का प्रभाव, जानिए कैसे?



* जन्मकुंडली के 12 भाव और 9 ग्रहों का योग जानिए...  
ज्योतिष में कुल नौ (9) ग्रहों की गणना की जाती है। इनमें सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति (गुरु), शुक्र, शनि मुख्य ग्रह तथा राहु-केतु छाया ग्रह माने जाते हैं। 
 
इन ग्रहों में सूर्य-मंगल क्रूर ग्रह तथा शनि, राहु व केतु पाप ग्रह माने जाते हैं। सूर्य हमारे नेत्र, सिर और हृदय पर प्रभाव रखता है। मंगल पित्त, रक्त, कान, नाक पर और शनि हड्डियों, मस्तिष्क, पैर-पिंडलियों पर प्रभुत्व रखता है। राहु-केतु का स्वतंत्र प्रभाव नहीं होता है। वे जिस राशि में या जिस ग्रह के साथ बैठते हैं, उसके प्रभाव को बढ़ाते हैं।
 
बृहस्पति, शुक्र, बुध शुभ ग्रह माने जाते हैं। पूर्ण चंद्रमा शुभ कहा गया है। मगर कृष्ण पक्ष की तरफ बढ़ता चंद्रमा पापी हो जाता है। बृहस्पति शरीर में चर्बी, गुर्दे, व पाचन को नियंत्रित करता है। शुक्र वीर्य, आंख व कामशक्ति को नियंत्रण में रखता है। बुध का वर्चस्व वाणी (जीभ) पर होता है। चंद्रमा छाती, फेफड़े व नेत्र ज्योति पर अपना प्रभाव रखता है।
 
ग्रहों का कारकत्व : जन्मकुंडली में 12 भाव होते हैं। भावों के नैसर्गिक कारक निम्नानुसार है-
 
* सूर्य- प्रथम भाव, दशम भाव 
 
* चंद्र- चतुर्थ भाव 
 
* मंगल- तृतीय, षष्ठ भाव
 
* बुध- चतुर्थ भाव
 
* गुरु- द्वितीय, पंचम, नवम, एकादश भाव
 
* शुक्र- सप्तम भाव
 
* शनि- षष्ठ, व्यय, अष्टम भाव
 
* राहु-केतु - स्वतंत्र प्रभाव नहीं

Wednesday, 14 February 2018

15 फ़रवरी को अपने प्राण दे कर सदा सदा के लिए अमर हो गये उन सभी वीरों को हिन्दू परिवार संघठन संस्था की और से बारम्बार नमन करता है

15 फ़रवरी- आज बिहार के मुंगेर में हुआ था देशभक्तों का एक और नरसंहार, ठीक जलियांवाला बाग़ जैसा. जानिये कौन थे वो हुतात्मा ?
आज़ादी अगर चरखे से आई थी तो ये वीर कौन थे ? इनकी आत्मा को दुःख क्यों दिया जाता है एक झूठा गाना गा कर ? आखिर खामोश पड़े सच को झूठ का तेज तेज ढोल पीट कर कब तक दबाया जा सकता है ? मुंगेर आज बिहार का एक जिला है | फ़रवरी 1932 में मुंगेर के शंभुगंज थाना में आने वाले सुपोर जमुआ में एक मीटिंग हो रही थी | श्रीभवन की इसी मीटिंग में तारापुर थाने पर भारत का ध्वज फहराने की बात राखी गई जो किसी भी हाल में अंग्रेजों को स्वीकार नहीं था | मुंगेर का ये इलाका पहाड़ी इलाका है | महाभारत कालीन कर्ण का क्षेत्र अंग देश माने जाने वाले इस इलाके में देवधरा पहाड़ और ढोलपहाड़ी जैसे इलाके हैं जो अपनी बनावट और जंगल की वजह से अक्सर क्रांतिकारियों को सुरक्षा देते थे |


गंगा के उस पार बिहपुर से लेकर बांका और देवघर तक के इलाकों में क्रांतिकारियों का प्रभाव काफी ज्यादा था | 15 फ़रवरी की सुबह होते होते तारापुर में भीड़ जमा होने लगी | दोपहर में जब ये लोग झंडे के साथ आगे बढे तो अंग्रेज कलेक्टर ई. ओली के आदेश पर एक निहत्थी भीड़ पर फिरंगी एस.पी. डब्ल्यू. फ्लैग ने चलवानी शुरू कर दी | गोलियां चलती रही, लोग बढ़ते रहे और आखिर झंडा फहरा दिया गया | आश्चर्यजनक था कि गोलियां चलने पर भी लोगों ने बढ़ना नहीं छोड़ा ! बाद में और कुमुक आने पर पुलिस ने दोबारा थाने को अपने कब्जे में लिया |अंग्रेज कलेक्टर ई. ओली के आदेश पर एक निहत्थी भीड़ पर एस.पी. डब्ल्यू. फ्लैग ने गोलियां चलवा दी थी | नहीं नहीं किसी जलियांवाला की बात नहीं कर रहे भाई | वहां जनरल डायर थे, और वहां लाशें बहाने के लिए गंगा कहाँ होती है ? ये घटना जलियांवाला बाग़ के बाद की है, 15 फ़रवरी 1932 की इस घटना में मारे गए ज्यादातर लोगों को लापता घोषित कर दिया गया था | बिलकुल उसी तरह बेरहमी से मारे गए लोगों का आज जिक्र करना भी किसी को जरूरी नहीं लगता | असली कसूरवार है रीढ़विहीन, गफलत में डूबी, जातिवादी, पलायन के शौक़ीन, उज्जड़, और अन्य कई संबोधनों से नवाजने योग्य जनता का एक वर्ग . क्यों ?
क्योंकि इन्हें अशर्फी मंडल याद नहीं, बसंत धानुक पता नहीं, शीतल और सांता पासी याद नहीं | ये सिर्फ चंद नाम हैं इनके अलावा थे रामेश्वर मंडल, विश्वनाथ सिंह, महिपाल सिंह, सुकुल सोनार, सिंहेश्वर राजहंस, बद्री मंडल, गैबी सिंह, चंडी महतो, झोंटी झा | इनमें से किसी नाम का जिक्र सुना है ? नहीं सुना तो बता दें कि ये वो 13 लोग थे, जिनके शव की शिनाख्त हुई थी | इनके अलावा 31 शव ऐसे थे जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाई थी | जो गंगा में बह गए उनका कोई हिसाब नहीं | आज 15 फ़रवरी को अपने प्राण दे कर सदा सदा के लिए अमर हो गये उन सभी वीरों को हिन्दू परिवार संघठन संस्था की और से बारम्बार नमन करता है और उनकी गौरवगाथा को अनंत काल तक के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है .

Tuesday, 13 February 2018

बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का अभिषेक करने से और पूजा में इनका प्रयोग करने से शिव जल्द प्रसन्न होते हैं।

बेलपत्र को संस्कृत में ‘बिल्वपत्र’ कहा जाता है, 
यह औषधी गुणों से भरपूर वृक्ष भगवान शिव को प्रिय है, पौराणिक मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का अभिषेक करने से और पूजा में इनका प्रयोग करने से शिव जल्द प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र का तोड़ने के लिए पुराणों में ऐसे निर्देश दिए गए हैं, जिससे धर्म का पालन भी हो जाये और वृक्षों का संरक्षण भी हो जाए, यही कारण है कि देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूल और पत्रों को तोड़ने के कुछ नियम हैं, बेलपत्र तोड़ने के भी कुछ नियम हैं :-  
1. चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथ‍ियों को, सं‍क्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें। 
2. भगवान शंकर को बेलपत्र चढ़ाने के लिए इन तिथ‍ियों या वार से पहले तोड़ा गया पत्र ही चढ़ाना चाहिए।  
3. शास्त्रों में कहा गया है कि अगर नया बेलपत्र न मिल सके, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। 
अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:।
शंकरायार्पणीयानि न नवानि यदि क्वचित्।।
(स्कंदपुराण) 
4. टहनी से चुन-चुनकर सिर्फ बेलपत्र ही तोड़ना चाहिए, कभी भी पूरी टहनी नहीं तोड़नी चाहिए। पत्र सावधानी से तोड़ना चाहिए कि वृक्ष को कोई हानि न पहुंचे। 
5. बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम करना चाहिए।
कैसे चढ़ाएं बेलपत्र :- भगवान शिव को बेल पत्र प्रिय हैं ही। साथ ही भगवान शिव के अंशावतार हनुमान जी को भी बेलपत्र अर्पित किया जा सकता है, भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से घर की धन-दौलत में वृद्धि होने लगती है, अधूरी कामनाएं पूर्ण होती हैं।
शिव पुराण के अनुसार सावन के सोमवार को शिवालय में बेलपत्र चढ़ाने से एक करोड़ कन्यादान के बराबर फल मिलता है।
बेलपत्र का वृक्ष हर कामना को पूरी करता है। यही नहीं उसके पत्तों को गंगा जल से धोकर उन्हें बजरंगबली पर अर्पित करने से अनेक तीर्थों का फल मिलता है।
बिल्व वृक्ष (बेल के पेड़) की जड़ सफेद धागे में पिरोकर रविवार को गले में धारण करने से रक्तचाप, क्रोध और असाध्य रोगों से रक्षा होती है।
बिल्व वृक्ष का पूजन पाप व दरिद्रता का अंत कर वैभवशाली बनाने वाला माना गया है। घर में बेल पत्र लगाने से देवी महालक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं।
बेल पत्तों को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इन्हें अपने पास रखने से कभी धन-दौलत का अभाव नहीं होता।
शिव पुराण के अनुसार :-  1. बिल्व वृक्ष के आसपास सर्प नहीं आते ।  
2. यदि किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर
गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है ।
3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता
सबसे अधिक बिल्व वृक्ष में होती है ।
4. चार पांच छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्रक पाने वाला
परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल
मिलता है ।
5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है। और बेल
वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है। 
6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता
है। 
7. बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते है।
8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट
लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। 
9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि
स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे । 
10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी
शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी उसके सारे पाप मुक्त
हो जाते है । 
11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव
से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा अनाज भगवान शिव को
चढ़ाने से क्या फल मिलता है :-
1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।यह सभी अन्न भगवान
को अर्पण करने के बाद गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए। 
शिवपुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन सा रस
(द्रव्य) चढ़ाने से उसका क्या फल मिलता है :-
1. ज्वर (बुखार) होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से
शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी
जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
2. नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक
करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो
उसकी समस्या का निदान संभव है।
3. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को
चढ़ाएं।
4. सुगंधित तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में
वृद्धि होती है।
5. शिवलिंग पर ईख (गन्ना) का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों
की प्राप्ति होती है।
6. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति
होती है।
7. मधु (शहद) से भगवान शिव का अभिषेक करने से राजयक्ष्मा
(टीबी) रोग में आराम मिलता है।
शिवपुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन का फूल
चढ़ाया जाए तो उसका क्या फल मिलता है :-
1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने
पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूल से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान
विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी पत्र (पत्तों) से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती
है।
6. जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की
कमी नहीं होती।
7. कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
8. हारसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि
होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र
प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशनकरता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है। 
11. दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

-- 
हिन्दू परिवार संघटन संस्था
 Cont No-9448487317

शिव और शक्ति का नाम लिंग के अनुसार नहीं बल्कि उनकी विेशेषताओं के आधार पर दिया गया है।

सृष्टि के सर्वनाश के लिए थामा था शिव ने त्रिशूल!
तीन देव
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इन तीन देवों के हाथ में संपूर्ण सृष्टि की बागडोर सौंपी गई है।
विनाशक हैं शिव!
ब्रह्मा को रचयिता, विष्णु को पालनहार और शिव यानी महेश को विनाशक की उपाधि दी गयी है।
शिव का त्रिशूल
शिव के हाथ में मौजूद त्रिशूल भी अपनी अलग कहानी बयां करता है।
विनाश की निशानी
बहुत से लोग इसे विनाश की निशानी मानते हैं तो कुछ का मानना है कि त्रिशूल के रहस्य को समझ पाना वाकई बहुत कठिन है।
रहस्यमय त्रिशूल
हिन्दू पुराणों में कई रहस्य छिपे हैं जिनमें से एक है भगवान शिव के हाथ त्रिशूल। चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये रहस्य क्या हो सकते हैं।
रचना और पालन का भी प्रतीक
बहुत से लोग ये मानते हैं कि ये त्रिशूल ब्रह्मा-विष्णु-महेश यानी रचना, पालन और फिर उसके विनाश का प्रतीक है।
भविष्य को भी दर्शाता है
इसे भूत, वर्तमान और भविष्यकाल के साथ-साथ स्वर्ग, धरती, पाताल और इच्छा, क्रिया और बुद्धि का परिचायक भी माना जाता है।
देवी के हाथ का त्रिशूल
शिव के अलावा हिन्दू देवियों के भी हाथ में त्रिशूल देखा जा सकता है इसलिए कुछ लोगों का ये भी मानना है कि देवी के हाथ में त्रिशूल लक्ष्मी, सरस्वती और काली को दर्शाता है।
विचारों की दुनिया का नाश
ऐसा माना जाता है कि शिव के हाथ के त्रिशूल का निर्माण भौतिक लोक, पूर्वजों की दुनिया और विचारों की दुनिया के सर्वनाश के लिए हुआ था।
पाप का नाश
ताकि इंसानी दुनिया में बढ़ते पाप और अहंकार का विनाश के बाद एक ऐसे आध्यात्मिक लोक की स्थापना की जा सके जहां किसी प्रकार का कोई पाप मौजूद न हो।
ईश्वर निर्गुण है
त्रिशूल, तीनों गुण सत, रज, तम का भी परिचायक है और त्रिशूल का शिव के हाथ में होने का अर्थ है कि भगवान तीनों गुणों से ऊपर है, वह निर्गुण है।
पवित्रता का प्रतीक है त्रिशूल
शिव का त्रिशूल पवित्रता और शुभकर्म का प्रतीक भी है, जिसकी आराधना कर हम अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य के कष्टों से पार पा सकते हैं।
मोक्ष की प्राप्ति
इतना ही नहीं जन्म और मृत्यु के चक्र को छोडकर हमारी आत्मा मोक्ष की प्राप्ति कर ईश्वर का सानिध्य प्राप्त कर सकती है।
नकारात्मकता का सर्वनाश
शिव के त्रिशूल में इंसानी मस्तिष्क और शरीर में व्याप्त विभिन्न बुराइयों और नकारात्मकता को समाप्त करने की भी ताकत है।
मानव शरीर की नाड़ियां
मनुष्य शरीर में भी त्रिशूल, जहां तीन नाड़ियां मिलती हैं, मौजूद है और यह ऊर्जा स्त्रोतों, इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना को दर्शाता है।
ऊर्जा का केन्द्र
सुषुम्ना जो कि मध्य में है, को सातवां चक्र और ऊर्जा का केंद्र कहा जाता है।
बाहरी उठापटक से दूर
हमारे शरीर में एक स्थान ऐसा होता है जो बाहरी उठापटक को पूरी तरह नजरअंदाज करता है और यह तभी कार्य करता है जब सुषुम्ना तक ऊर्जा पहुंचने लगती है।
जीवन की असली शुरुआत
सुषुम्ना तक ऊर्जा पहुंचने के साथ ही जीवन की असली शुरुआत होती है। जब बाहर हो रही किसी भी तरह की गतिविधियों का प्रभाव मनुष्य के भीतर नहीं होता।
इड़ा और पिंगल
वहीं अन्य दो कोनों को इड़ा और पिंगला कहा जाता है।
शिव और शक्ति
इड़ा और पिंगला को शिव और शक्ति का नाम भी दिया जाता है।
विभिन्न विशेषताएं
इन्हें शिव और शक्ति का नाम लिंग के अनुसार नहीं बल्कि उनकी विेशेषताओं के आधार पर दिया गया है।
-- 
हिन्दू परिवार संघटन संस्था
 Cont No-9448487317