Follow Me On Facebook

Wednesday, 14 February 2018

15 फ़रवरी को अपने प्राण दे कर सदा सदा के लिए अमर हो गये उन सभी वीरों को हिन्दू परिवार संघठन संस्था की और से बारम्बार नमन करता है

15 फ़रवरी- आज बिहार के मुंगेर में हुआ था देशभक्तों का एक और नरसंहार, ठीक जलियांवाला बाग़ जैसा. जानिये कौन थे वो हुतात्मा ?
आज़ादी अगर चरखे से आई थी तो ये वीर कौन थे ? इनकी आत्मा को दुःख क्यों दिया जाता है एक झूठा गाना गा कर ? आखिर खामोश पड़े सच को झूठ का तेज तेज ढोल पीट कर कब तक दबाया जा सकता है ? मुंगेर आज बिहार का एक जिला है | फ़रवरी 1932 में मुंगेर के शंभुगंज थाना में आने वाले सुपोर जमुआ में एक मीटिंग हो रही थी | श्रीभवन की इसी मीटिंग में तारापुर थाने पर भारत का ध्वज फहराने की बात राखी गई जो किसी भी हाल में अंग्रेजों को स्वीकार नहीं था | मुंगेर का ये इलाका पहाड़ी इलाका है | महाभारत कालीन कर्ण का क्षेत्र अंग देश माने जाने वाले इस इलाके में देवधरा पहाड़ और ढोलपहाड़ी जैसे इलाके हैं जो अपनी बनावट और जंगल की वजह से अक्सर क्रांतिकारियों को सुरक्षा देते थे |


गंगा के उस पार बिहपुर से लेकर बांका और देवघर तक के इलाकों में क्रांतिकारियों का प्रभाव काफी ज्यादा था | 15 फ़रवरी की सुबह होते होते तारापुर में भीड़ जमा होने लगी | दोपहर में जब ये लोग झंडे के साथ आगे बढे तो अंग्रेज कलेक्टर ई. ओली के आदेश पर एक निहत्थी भीड़ पर फिरंगी एस.पी. डब्ल्यू. फ्लैग ने चलवानी शुरू कर दी | गोलियां चलती रही, लोग बढ़ते रहे और आखिर झंडा फहरा दिया गया | आश्चर्यजनक था कि गोलियां चलने पर भी लोगों ने बढ़ना नहीं छोड़ा ! बाद में और कुमुक आने पर पुलिस ने दोबारा थाने को अपने कब्जे में लिया |अंग्रेज कलेक्टर ई. ओली के आदेश पर एक निहत्थी भीड़ पर एस.पी. डब्ल्यू. फ्लैग ने गोलियां चलवा दी थी | नहीं नहीं किसी जलियांवाला की बात नहीं कर रहे भाई | वहां जनरल डायर थे, और वहां लाशें बहाने के लिए गंगा कहाँ होती है ? ये घटना जलियांवाला बाग़ के बाद की है, 15 फ़रवरी 1932 की इस घटना में मारे गए ज्यादातर लोगों को लापता घोषित कर दिया गया था | बिलकुल उसी तरह बेरहमी से मारे गए लोगों का आज जिक्र करना भी किसी को जरूरी नहीं लगता | असली कसूरवार है रीढ़विहीन, गफलत में डूबी, जातिवादी, पलायन के शौक़ीन, उज्जड़, और अन्य कई संबोधनों से नवाजने योग्य जनता का एक वर्ग . क्यों ?
क्योंकि इन्हें अशर्फी मंडल याद नहीं, बसंत धानुक पता नहीं, शीतल और सांता पासी याद नहीं | ये सिर्फ चंद नाम हैं इनके अलावा थे रामेश्वर मंडल, विश्वनाथ सिंह, महिपाल सिंह, सुकुल सोनार, सिंहेश्वर राजहंस, बद्री मंडल, गैबी सिंह, चंडी महतो, झोंटी झा | इनमें से किसी नाम का जिक्र सुना है ? नहीं सुना तो बता दें कि ये वो 13 लोग थे, जिनके शव की शिनाख्त हुई थी | इनके अलावा 31 शव ऐसे थे जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाई थी | जो गंगा में बह गए उनका कोई हिसाब नहीं | आज 15 फ़रवरी को अपने प्राण दे कर सदा सदा के लिए अमर हो गये उन सभी वीरों को हिन्दू परिवार संघठन संस्था की और से बारम्बार नमन करता है और उनकी गौरवगाथा को अनंत काल तक के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है .

No comments:

Post a Comment