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Wednesday, 27 January 2016

गांधी नहीं सुभाषचंद्र बोस की सेना ने दिलाई थी भारत को स्वतंत्रता !

नई देहली : नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर संशोधन कर चुके सैन्य इतिहासकार (मिलिट्री हिस्टोरियन) जनरल जीडी बख्शी की पुस्तक ‘बोस: इंडियन समुराई’ में दावा किया गया है कि, सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल सेना (आईएनए) ने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । गांधी के ‘भारत छोडो आंदोलन’ से ज्‍यादा सुभाषचंद्र बोस की सेना के कारण भारत काे स्वतंत्रता मिली ।
बख्शी के अनुसार, तब के ब्रिटिश प्रधानमंत्री रहे क्लीमेंट एटली ने कहा था कि, नेताजी की इंडियन नेशनल सेना ने स्वतंत्रता दिलाने में बडी भूमिका निभार्इ । वहीं, गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे अहिंसा आंदोलन का प्रभाव बहुत कम था ।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री की बातचीत का खुलासा

बख्शी ने, एटली और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे न्यायाधीश पीबी चक्रबर्ती के बीच की बातचीत का भी उल्लेख किया है । वर्ष १९५६ में एटली भारत आए थे और कोलकाता में पीबी चक्रबर्ती के अतिथी थे । भारत की स्वतंत्रता के दस्तावेज पर एटली ने ही हस्ताक्षर किए थे । चक्रबर्ती कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और पश्चिम बंगाल के कार्यवाहक राज्यपाल भी थे ।

सुभाषचंद्र बोस की सेना का प्रभाव

चक्रबर्ती ने इतिहासकार आर.सी. मजूमदार को उनकी पुस्तक ‘ए हिस्ट्री ऑफ बंगाल’ के लिए खत लिखा था । चक्रबर्ती ने लिखा, ‘मेरे राज्यपाल रहने के कालावधी में एटली दो दिन के लिए राज्यपाल भवन में रुके थे । इस दौरान ब्रिटिशर्स के भारत छोडने के कारणों पर लम्बा विचार-विमर्श हुआ । मैंने उनसे पूछा था कि, गांधीजी का भारत छोडो आंदोलन (१९४२) स्वतंत्रता के कुछ साल पहले ही शुरू हुआ था । क्या उसका इतना प्रभाव हुआ कि अंग्रेजों को इंग्‍लैण्‍ड लौटना पडा ?’
बक्‍शी की पुस्तक के अनुसार ‘उत्तर में एटली ने, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सेना के प्रयत्नोंको महत्वपूर्ण बताया था ।’ पुस्तक के अनुसार चक्रबर्ती ने जब एटली से पूछा कि गांधीजी के अहिंसा आंदोलन का कितना प्रभाव हुआ तो एटली ने हंसते हुए जवाब दिया – ‘बहुत कम’ । चक्रबर्ती और एटली की इस बातचीत को १९८२ में ऐतिहासिक समीक्षा संस्थान के राजन बोरा ने ‘सुभाष चंद्र बोस-द इंडियन नेशनल सेना एंड द वॉर ऑफ इंडियाज लिबरेशन’ इस लेख में छापा था ।

सैनिकों का विद्रोह आया काम

१९४६ में रॉयल इंडियन नेवी के २० हजार सैनिकाें ने अंग्रेजों के विरुध्द बगावत कर दी थी । सैनिक ७८ जहाज लेकर मुंबई पहुंच गए थे । इन जहाजों पर तिरंगा भी फहरा दिया गया था । हालांकि तब इस बगावत को दबा लिया गया । लेकिन अंग्रेजों के लिए यह घतरे की घंटी थी ।

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