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Tuesday, 7 February 2017

बांग्लादेश के एक धर्मांध सांसद द्वारा हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष के साथ मारपीट !

बांग्लादेश के एक धर्मांध सांसद द्वारा हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष के साथ मारपीट !

बांग्लादेशी हिन्दुओं की इस दुःस्थिती में परिवर्तन लाने हेतु क्या,

भारत सरकार कुछ प्रयास करेगी ?
पुलिस की ओर से परिवाद प्रविष्ट करने में भी टामलटोल अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष
ढाका (बांग्लादेश) : बांग्लादेश के पीडित हिन्दुओं के लिए लडनेवाले ‘बांग्लादेश मायनोरिटी वॉच’ इस संघटन के अध्यक्ष तथा हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष (आयु ६३ वर्ष) को धर्मांध सांसद ने गालियां देते हुए पिटाई की ! १. बांग्लादेश में भोला जिले के निवासी श्री. दास के खेत में चावल की फ़सल तथा पेड कांटे गए। इस संदर्भ में परिवाद प्रविष्ट करने हेतु वे अधिवक्ता श्री. घोष के पास गए। २. अतः अधिवक्ता श्री. घोष तथा उनके सहकारी श्री. दिलीपकुमार रॉय तथा श्री. दास ये तीनो न्याय मांगने हेतु ३ फरवरी २०१७ को स्थानीय सांसद नुरुननबी चौधरी के ढाका स्थित निवासस्थान पर गए। ३. उस समय अधिवक्ता श्री. घोष ने सांसद चौधरी को बताया कि, ‘श्री. दास के खेत में चावल की फ़सल तथा पेड कांटकर ले जाने के पीछे स्थानीय स्वराज्य संस्था के अध्यक्ष अबुल काशीम मियां का हाथ है !’ यह बात बताते ही सांसद चौधरी आगबबुला हुए। ४. चौधरी तथा उनके सहकारी गुंडों ने अधिवक्ता श्री. घोष को प्रथम गालियां दी तथा उसके पश्चात उनकी पिटाई कर अपहरण करने का प्रयास किया। ५. सत्य एवं वैध परिस्थिति सुनने की सांसद की सिद्धता ही नहीं थी। उन्होंने अधिवक्ता श्री. घोष को गालियां देते हुए धमकी भी दी कि, ‘आप हिन्दुओं का पक्ष क्यों ले रहें हैं ? आप के विरोध में मैं पुलिस में परिवाद प्रविष्ट कर कार्रवाई करूंगा !’ तत्पश्चात उन तीनों को धक्के मार कर बाहर निकाल दिया गया। ६. उन सभी को वाहन में बिठाकर उनका अपहरण करने का भी गुंडों का षडयंत्र था; किंतु वे सभी जान बचाने हेतु भाग गए; इसलिए वे बच गए ! ७. अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष ने बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुझ्झामान कमाल के साथ भ्रमणभाष पर संपर्क किया तथा उन्हें सर्व घटना कथन की। तदनंतर गृहमंत्री ने अधिवक्ता श्री. घोष को पुलिस थाने में परिवाद प्रविष्ट करने के लिए बताया। ८. तदनुसार अधिवक्ता श्री. घोष सांसद चौधरी के विरोध में परिवाद प्रविष्ट करने हेतु पुलिस थाने में गए; किंतु पुलिस ने परिवाद प्रविष्ट करने के लिए स्पष्ट अस्वीकृती प्रदर्शित की ! ९. इससे पूर्व भी हिन्दुओं को न्याय प्राप्त करवाते समय अनेक प्रसंगों में अधिवक्ता श्री. रवींद्र घोष पर बांग्लादेश के मंत्री, सांसद सदस्य, अधिवक्ताएं आदि द्वारा आक्रमण हुए हैं !

हॉलीवूड की गायिका माइली साइरस के घर पर हुर्इ लक्ष्‍मी पूजा

हॉलीवूड की गायिका माइली साइरस के घर पर हुर्इ लक्ष्‍मी पूजा 

विदेश में हिन्दू धर्म के अनुसार पूजा की जाती है, किंतु भारत में सरकारी कार्यालयो में देवताआेंके चित्र लगाने तथा सत्यनारायण पूजा पर प्रतिबन्ध लगाया जाता है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है ! – 






हॉलीवुड की प्रसिद्ध गायिका माइली साइरस ने अपने लॉस एंजेलेस के घर में लक्ष्मी पूजा का आयोजन किया था। माइली ने विधीवत अगरबत्ती जलाकर, फल और हलवे का भोग चढाकर मां लक्ष्मी की पूजा की। पूजा के बाद माइली ने पूजा की फोटोज सोशल साइट पर अपने प्रशंसकों के साथ शेयर की। माइली ने अपने घर को भी फूलों से सुंदरता से सजाया था। साथ ही पंडित बुलाकर पूरे विधि विधान से पूजा-पाठ किया। माइली ने बाएं कंधे पर ‘ॐ’ का एक टैटू भी बनवाया है।
बता दें कि २०१२ में माइली के हिंदू धर्म को अपनाने की खबरें भी आईं थीं।
जया बच्चन ने राज्यसभा में उठाया भंसाली पर हमले का मुद्दा; कहा,
                        देश में असहिष्णुता बढ़ रही है

समाजवादी पार्टी (एसपी) की सांसद व अभिनेत्री जया बच्चन ने फिल्मकार संजय लीला भंसाली पर हाल में हुए हमले का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में उठाया। उन्होंने कहा, ‘रचनात्मकता के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।’ जया ने कहा कि, देश में असहिष्णुता बढ़ रही है। कुछ लोग मान बैठे हैं कि, वे जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें निश्चित राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। सांसद ने कहा कि, ‘इन लोगों ने कानून एवं व्यवस्था को अपने हाथों में लेना शुरू कर दिया है। वे संवैधानिक मूल्यों या कानून व्यवस्था का सम्मान नहीं करते। फिल्म उद्योग लंबे समय से सरकार के मामूली समर्थन या इसके बगैर ही इस बुराई से लड़ रही है।’ जया ने कहा, ‘फिल्म उद्योग बड़ी संख्या में रोजगार के मौके उत्पन्न करता है और इस तरह की कोई बाधा उद्योग की आय, विकास, रोजगार सृजन को प्रभावित करती है।’ एसपी सदस्य ने इस पर भी नाखुशी जताई कि, भंसाली के साथ मारपीट की गई और सेट पर शूटिंग उपकरणों के साथ भी तोड़फोड़ की गई, पर सरकार ने इसकी निंदा नहीं की। उल्लेखनीय है कि, राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने २७ जनवरी को जयपुर में भंसाली की आगामी फिल्म ‘पद्मावती’ के सेट पर हमला कर दिया था। इस दौरान फिल्मकार भंसाली से मारपीट भी की गई थी।

१७ हजार अस्पतालों की दीवारों पर लिखे जाएंगे श्लोक

१७ हजार अस्पतालों की दीवारों पर लिखे जाएंगे श्लोक



जयपुर : रविवार को स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद मंत्री कालीचरण सराफ ने मातृभाषा और वेदों की वाणी से राज्य की दीवारों को सजाने के संबंध में बड़ी घोषणा की। मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि वेद, पुराण, स्मृति, रामायण और महाभारत के श्लोकों का हिंदी अनुवाद राज्य के १७,००० सरकारी अस्पतालों की दीवारों पर लिखा जाएगा।
इन अस्पतालों में राज्य के सभी सरकारी जिला अस्पताल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शामिल है। ये श्लोक आयुर्वेदिक अस्पतालों के साथ ही होम्योपैथी, एलोपैथी अस्पतालों की दिवारों पर भी लिखा जाएंगे। रविवार को जयपुर स्थित राजस्थान संस्कृत अकादमी में सराफ ने ऐसे ही २६ श्लोकों के पोस्टर्स का अनावरण किया। लिखे जाने वाले सभी श्लोकों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। जिनमें प्रेरणादायक श्लोक, प्रार्थनारूपी श्लोक और ऊर्जा देने वाले श्लोक शामिल हैं। सभी पवित्र ग्रंथों में से हर श्रेणी के लिए १५० श्लोकों का चयन किया जाएगा।
हर विभाग में अलग प्रकृति के श्लोक लिखे जाएंगे। जैसे, ओपीडी में ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामय:’ जिसका भावार्थ है (हर कोई सुखी और स्वस्थ रहे) लिखा जाएगा। ऑपरेशन थिएटर में ‘स्वथस्य स्वास्थ्य रक्षणम्’ (प्रभु व्यक्ति को जीवित और स्वस्थ रखें) लिखा जाएगा वहीं लेबर रूम में ‘आचार: परमो धर्म:’ लिखा जाएगा। जिसका अर्थ है आचरण ही सबसे बड़ा धर्म है।
सराफ ने कहा, संस्कृत अकादमी की अध्यक्ष जया दवे के नेतृत्व में पांच सदस्यों की एक कमिटी बनाई गई है, जो अगले एक महीने तक बाकी श्लोकों के चयन और हिंदी अनुवाद का कार्य पूरा करेगी। दवे ने कहा कि, उनकी कमिटी ऐसे श्लोक और छंदों का चुनाव भी करेगी जिन्हें न्यूरोलजी और ईएनटी विभाग की दीवारों पर लिखा जा सके।
पीओके की भूमि के लिए भारतीय सेना दे रही थी
किराया, सीबीआई ने शुरू की जांच  




नई देहली : भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भूमि का किराया दिए जाने के विषय में जानकार सीबीआई ने इसकी जांच शुरू कर दी है। सीबीआई के अनुसार, भारतीय सेना पिछले १६ वर्षों से पाक अधिकृत कश्मीर स्थित चार भूखंडों का किराया दे रही थी।
सीबीआई अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि, आखिरकार इन भूखंडों के लिए दिया जाने वाला किराया किसकी जेब में जाता था और इन भूमि को किराये पर किसके कहने पर लिया गया था। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, खसरा नंबर- ३०००, ३०३५, ३०४१, ३०४५ की १२२ कनाल और १८ मारला भूमि का उपयोग भारतीय सेना कर रही है। परंतु सच्चाई यह है कि, इस खसरा नंबर की भूमि गुलाम कश्मीर में चली गई है। परंतु, पिछले १६ वर्षों से इस भूमि के किराये की रकम सरकारी खजाने से निकाली जा रही थी।
बताया जाता है कि, डिफेंस एस्टेट विभाग के कुछ अधिकारियों ने आपराधिक षडयंत्र के तहत इस भूमि को भारत में दिखाकर उसे सेना के उपयोग में दिखा दिया और इसके लिए किराया भी दिया जाने लगा। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि, किराया किसी एक व्यक्ति को दिया जाता था या कई लोगों में बांटा जाता था ? सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, हो सकता है कि इस घोटाले में सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हों।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, यह पता लगा कि, तत्कालीन सब डिविजनल डिफेंस एस्टेट अधिकारी आरएएस चंद्रवंशी, नौशेरा के पटवारी दर्शन कुमार ने राजेश कुमार और अन्य व्यक्तियों से मिलकर यह काम किया था। इन लोगों ने भूमि के फर्जी दस्तावेज जमा किए थे। सेना अधिकारी, एस्टेट अधिकारी और अन्य अधिकारियों वाले बोर्ड ने भूमि के लिए ४.९९ लाख रुपए जारी किए।
इस मामले में सरकारी खजाने को छह लाख रुपए का नुकसान पहुंचा। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि, सेना ने नागरिकों से यह भूमि अधिग्रहीत की थी। बोर्ड ने भूमि की जांच करने के बाद किराये के लिए मंजूरी प्रदान की थी। परंतु अधिकारियों के बोर्ड ने एक दूसरे के साठगांठ कर जांच में गलत जानकारी दी थी।

सीबीआई ने बताया कि, बोर्ड की बैठक वर्ष २००० में बुलाई गई जिसमें चंद्रवंशी और दर्शन कुमार को रक्षा बलों में कार्यरत बताया गया और राजेश कुमार को ४.९९ लाख रुपए किराये के जारी किए गए।


धर्म परिवर्तन कराने वाली सबसे बड़ी एजेंसी देश छोड़ कर भागी



धर्म परिवर्तन के खिलाफ मोदी सरकार के प्रयत्नों का बड़ा नतीजा सामने आया है। दुनिया भर में ईसाई धर्मांतरण कराने वाली सबसे बड़ी अमेरिकी एजेंसी ‘कंपैशन’ ने भारत में अपना दफ्तर और सारे ऑपरेशन बंद करने का ऐलान किया है। ये एजेंसी कंपैशन इंडिया नाम के एनजीओ की शक्ल में भारत में बड़े पैमाने पर गरीबों और आदिवासियों को ईसाई बना रही थी।
10 माह पूर्व मोदी सरकार ने इसके विदेश से फंड लेने पर पहले से इजाज़त लेने की शर्त लगा दी थी। मोदी सरकार बनने के बाद जब देश में काम कर रहे तमाम एनजीओ का ऑडिट कराया गया था, तभी यह बात सामने आई थी कि अमेरिकी एनजीओ कंपैशनेट भारत में सबसे ज्यादा पैसे भेज रहा है और ये सारा पैसा ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार में लग रहा है। कंपैशन इंडिया भारत में बीते 30 साल से काम कर रही थी। ये हर साल भारत में 292 करोड़ रुपये विदेशों से लाती थी और इसे 344 छोटे-बड़े एनजीओ में बांटा जाता था। ये सभी एनजीओ देशविरोधी और धर्मांतरण की गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं

कंपैशनेट इंडिया ने एक बयान जारी करके कहा है कि वो भारत में अपना कामकाज बंद कर रहा है क्योंकि फंडिंग के नए नियमों के चलते पैसा मिलना नामुमकिन हो चुका है। कंपैशन इंडिया के खिलाफ रोक-टोक के कारण ओबामा और मोदी सरकार के रिश्तों में भी पिछले साल खटास आ गई थी। यहां तक कि ओबामा सरकार के कई मंत्रियों और अधिकारियों ने भारत आकर इस बात के लिए दबाव डाला था कि कंपैशन इंडिया के लिए रुकावटें पैदा न की जाएं। यहां तक कि कंपैशन इंटरनेशनल के वाइस प्रेसिडेंट स्टीफेन ओकले ने भारत आकर तमाम नेताओं और अफसरों से मुलाकात की थी। उनकी मुलाकात विदेश सचिव एस जयशंकर से भी हुई थी। इस मुलाकात में सरकार की तरफ से उन्हें एनजीओ द्वारा कराए जा रहे धर्मांतरण के सबूत दिखा दिए गए थे। फिलहाल डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद नए विदेशमंत्री रेक्स टिलरसन ने भी बयान दिया है कि वो इस मामले को देखेंगे।

लाखों बच्चों को ईसाई धर्म के जाल में फंसाया
संस्था की वेबसाइट पर साफ-साफ लिखआ हुआ है कि उसका लक्ष्य ‘गरीबी में पल रहे बच्चों को जिम्मेदार और संपन्न ईसाई नौजवान बनाना’ है। मोदी सरकार की जांच में चेन्नई के करुणा बाल विकास ट्रस्ट और कंपैसन ईस्ट इंडिया नाम के दो एनजीओ सबसे पहले फंसे थे। इन दोनों को कंपैशन इंटरनेशनल से करोड़ों रुपये मिल रहे थे और वहां गरीबों की मदद के नाम पर ईसाई बनाने का काम चल रहा था। जिसके बाद बाकी सारे एनजीओ की गतिविधियों का कच्चा-चिट्ठा सामने आ गया।

मीडिया को भी पैसे दे रही थी कंपैशनेट इंडिया!
सूत्रों के मुताबिक जांच में बात भी सामने आई है कि कंपैशन की तरफ से भारत के कुछ मीडिया संस्थानों को भी पैसे दिए जा रहे थे। इन अखबारों और चैनलों ने एनजीओ के खिलाफ मोदी सरकार की पाबंदी के खिलाफ बाकायदा खबरें भी छापी थीं। ये वही मीडिया संस्थान हैं जिन्होंने मोदी सरकार बनने के बाद चर्च पर हमले की झूठी खबरें फैलाई थीं। फिलहाल कंपैशन इंडिया का बोरिया बिस्तर समेटने के बाद अब ईसाई और मुस्लिम धर्मांतरण करवा रहे ऐसे दूसरे एनजीओ को भी सख्त मैसेज गया है। फिलहाल ऐसी कई और विदेशी संस्थाएं सरकार के रेडार पर हैं और बहुत जल्द उन्हें भी भारत में अपना कामकाज बंद करना पड़ सकता है।

गरीब बेसहारा बच्चों को बनाते थे शिकार
कंपैशन इंडिया के बारे में यह बात सामने आई कि उसके फंड किए हुए ज्यादातर एनजीओ सड़कों पर भीख मांगने या रेडलाइट पर सामान बेचने वाले लावारिस और गरीब बच्चों को अपने यहां लेकर आते थे। इन बच्चों को वो नया नाम दे देते थे और उन्हें बता दिया जाता था कि आज से उनका भगवान ईसा मसीह है। संस्था के सेंटरों पर इन बच्चों को रात में सोने की जगह और खाने के लिए एक वक्त का खाना मिल जाता था। लेकिन उन्हें पहले की तरह भीख मांगने या रेडलाइट पर सामान बेचने का काम करते रहने दिया जाता था। कंपैशन इंडिया के इक्का-दुक्का सेंटरों पर ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का इंतजाम होता था।

विपक्ष ने पाकिस्तान मुद्दे पर पीएम मोदी की तारीफ की कहा पाकिस्तान को सबक सिखाने में पीएम मोदी हैं सक्षम

विपक्ष ने पाकिस्तान मुद्दे पर पीएम मोदी की तारीफ की कहा पाकिस्तान को सबक सिखाने में पीएम मोदी हैं सक्षम


कश्मीर मुद्दे पर विपक्ष ने पहली बार मोदी सरकार की तारीफ की है। विपक्ष ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि पाकिस्तान को सबक सिखाने में पीएम मोदी सक्षम है। कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मोदी सरकार को चाहिए कि वो कश्मीर मुद्दे पर संसद में विशेष सत्र बुलाए और सभी मुद्दों पर बातचीत की जाए।
उन्होंने कहा की जरुरत है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी आर्थिक मदद पर रोक लगाई जाए। पीएम मोदी ने कल सिंधु जल संधि पर विचार-विमर्श किया लेकिन केवल विचार करने से कुछ नहीं होगा। उसके लिए जरुरी है कि अम्ल किया जाए। पीएम मोदी पिछले साल पाकिस्तान गए थे वो बेकार साबित हुई। हमें इस तरह का कोई कदम नहीं उठाना चाहिये था। congress praised modi 
हालांकि, पीएम मोदी ने विश्व पटल पर पाकिस्तान को घेरने की जो कोशिश की है वो काबिलेतारीफ है। सिंघवी ने कहा कि पीएम मोदी कश्मीर पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। 
कश्मीर में कश्मीरियों की सुरक्षा की गारंटी हमें लेने की आवश्यकता है और अधिक हिंसा न हो इसका हमे ध्यान रखने की आवश्यकता है। आज कश्मीर उबल रहा है, जो केवल बातचीत के जरिए ही समाधान हो सकती है।वही कांग्रेस के ही शशि थरूर ने भी पीएम मोदी की तारीफ की है।  congress

हरेक भारतीय गौरवान्वित हुआ है

आपको बता दें कल ही सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को खरी खरी सुनाया, जिसकी प्रशंसा केजरीवाल से लेकर प्रमुख विपक्षी नेताओं ने की है। केजरीवाल ने सुषमा स्वराज को भारतीय सिहंनी कहकर पुकारा है। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज ने जो भाषण संयुक्त राष्ट्र में दी है उससे हरेक भारतीय का सीना गौरवान्वित हुआ है। 
वैसे यदि देखा जाए तो कश्मीर मुद्दे को लेकर विपक्ष और पक्ष दोनों एक साथ है ये देश के लिए गर्व की बात है। जिस तरह पक्ष और विपक्ष ने मिलकर जीएसटी बिल को पास किया है ठीक उसी तरह कश्मीर मुद्दे पर दोनों पार्टियों का साझा बयान देना देशवासियों के लिए गौरव की बात है।  

Sunday, 5 February 2017

एक हाथ से और एक रात में बने इस मंदिर के शिवलिंग की नहीं होती है पूजा, आखिर क्यों

त्तराखंड राज्य के जनपद सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ से धारचूला जाने वाले मार्ग पर लगभग सत्तर किलोमीटर दूर स्थित है कस्बा थल जिससे लगभग छः किलोमीटर दूर स्थित है ग्राम सभा बल्तिर । यहीं पर एक 
अभिशप्त देवालय है नाम है एक हथिया देवाल। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, भगवान भोलेनाथ का दर्शन करते हैं, मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला को निहारते हैं और पुनः अपने घरों को लौट जाते हैं। यहां भगवान की पूजा नहीं की जाती
एक हाथ से बना था मंदिर
इस मंदिर का नाम एक हथिया देवाल है जिसका मतलब है - एक हाथ से बना हुआ। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और पुराने ग्रंथों, अभिलेखों में भी इसका जिक्र आता है। किसी समय यहां राजा कत्यूरी का शासन था। उस दौर के शासकों को स्थापत्य कला से बहुत लगाव था। यहां तक कि वे इस मामले में दूसरों से प्रतिस्पर्द्धा भी करते थे।
लोगों का मानना है कि एक बार यहां किसी कुशल कारीगर ने मंदिर का निर्माण करना चाहा। वह काम में जुट गया। कारीगर की एक और खास बात थी। उसने एक हाथ से मंदिर का निर्माण शुरू किया और पूरी रात में मंदिर बना भी दिया।
अद्भुत स्थापत्य कला
मंदिर की स्थापत्य कला नागर और लैटिन शैली की है। चट्टान को तराश कर बनाया गया यह पूर्ण मंदिर है। चट्टान को काट कर ही शिवलिंग बनाया गया है। मंदिर का साधारण प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की तरफ है। मंदिर के मंडप की ऊंचाई 1.85 मीटर और चौड़ाई 3.15 मीटर है। मंदिर को देखने दूर- दूर से लोग पहुंचते हैं, परंतु पूजा अर्चना निषेध होने के कारण केवल देख कर ही लौट जाते हैं।
आखिर क्यों नहीं होती है पूजा?
किंवदंती है कि इस ग्राम में एक मूर्तिकार रहता था जो पत्थरों को काटकाटकर मूर्तियाँ बनाया करता था। एक बार किसी दुर्धटना में उसका एक हाथ जाता रहा। अब वह एक हाथ के सहारे ही मूर्तियाँ बनाना चाहता था। परन्तु गँाव के कुछ लोगों ने उसे यह उलाहना देना शुरू किया कि अब एक हाथ के सहारे वह क्या कर सकेगा? लगभग सारे गाँव से एक जैसी उलाहना सुन सुनकर मूर्तिकार खिन्न हो गया। उसने प्रण कर लिया कि वह अब उस गाँव में नहीं रहेगा और वहाँ से कहीं और चला जायेगा। यह प्रण करने के बाद वह एक रात अपनी छेनी, हथौडी सहित अन्य औजार लेकर वह गाँव के दक्षिणी छोर की ओर निकल पडा। गाँव का दक्षिणी छोर प्रायः ग्रामवासियों के लिये शौच आदि के उपयोग में आता था। वहाँ पर एक विशाल चट्टान थी ।
अगले दिन प्रातःकाल जब गाँव वासी शौच के उस दिशा में गये तो पाया कि किसी ने रात भर में चट्टान को काटकर एक देवालय का रूप दे दिया है। कैतूहल से सबकी आँखे फटी रह गयीं। सारे गांववासी वहाँ पर एकत्रित हुये परन्तु वह कारीगर नहीं आया जिसका एक हाथ कटा था। सभी गांववालों ने गाँव मे जाकर उसे ढूंढा और आपस में एक दूसरे उसके बारे में पूछा परन्त्तु उसके बारे में कुछ भी पता न चल सका , वह एक हाथ का कारीगर गाँव छोडकर जा चुका था।
जब स्थानीय पंडितो ने उस देवालय के अंदर उकेरी गयी भगवान शंकर के लिंग और मूर्ति को देखा तो यह पता चला कि रात्रि में शीघ्रता से बनाये जाने के कारण शिवलिंग का अरघा विपरीत दिशा में बनाया गया है जिसकी पूजा फलदायक नहीं होगी बल्कि दोषपूर्ण मूर्ति का पूजन अनिश्टकारक भी हो सकता है। बस इसी के चलते रातो रात स्थापित हुये उस मंदिर में विराजमान शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती। पास ही बने जल सरोवर में (जिन्हे स्थानीय भाषा में नौला कहा जाता है) मुंडन आदि संस्कार के समय बच्चों को स्नान कराया जाता हैं।
एक अन्य कहानी
जबकि एक अन्य कथा में यह कहा जाता है की एक बार एक राजा ने एक कुशल कारीगर का एक हाथ मात्र इसलिए कटवा दिया की वो कोई दूसरी सुन्दर ईमारत न बनवा सके। लेकिन राजा कारीगर के हौसले को नहीं तोड़ पाया। उस कारीगर ने एक ही रात में एक हाथ से एक शिव मंदिर का निर्माण किया और हमेशा के लिए वो राज्य छोड़कर चला गया।
जब जनता को यह बात मालूम हुई तो उसे बहुत दुख हुआ। लोगों ने यह फैसला किया कि उनके मन में भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा तो पूर्ववत रहेगी लेकिन राजा के इस कृत्य का विरोध जताने के लिए वे मंदिर में पूजन आदि नहीं करेंगे।


इस मंदिर में गणेशजी पर विभीषण ने किया था वार

  • कहा जाता है इस मंदिर की कहानी रावण के भाई विभीषण से जुड़ी है 
  • यह मंदिर लगभग 273 फुट की ऊंचाई पर है
  • और मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सिढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है।
भगवान गणेश का उच्ची पिल्लयार मंदिर तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) नामक स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर बसा हुआ है। कहा जाता है इस मंदिर की कहानी रावण के भाई विभीषण से जुड़ी है यह मंदिर लगभग 273 फुट की ऊंचाई पर है और मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सिढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है।।
मंदिर से जुड़ा इतिहास
कहा जाता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने अपने भक्त और रावण के भाई विभीषण को भगवान विष्णु के ही एक रूप रंगनाथ की मूर्ति प्रदान की थी। विभीषण वह मूर्ति लेकर लंका जाने वाला था। वह राक्षस कुल का था, इसलिए सभी देवता नहीं चाहते थे कि मूर्ति विभीषण के साथ लंका जाए। सभी देवताओं ने भगवान गणेश से सहायता करने की प्रार्थना की। उस मूर्ति को लेकर यह मान्यता थी कि उन्हें जिस जगह पर रख दिया जाएगा, वह हमेशा के लिए उसी जगह पर स्थापित हो जाएगी। चलते-चलते जब विभीषण त्रिचि पहुंच गया तो वहां पर कावेरी नदी को देखकर उसमें स्नान करने का विचार उसके मन में आया। वह मूर्ति संभालने के लिए किसी को खोजने लगा। तभी उस जगह पर भगवान गणेश एक बालक का रूप में आए। विभीषण ने बालक को भगवान रंगनाथ की मूर्ति पकड़ा दी और उसे जमीन पर न रखने की प्रार्थना की। विभीषण के जाने पर गणेश ने उस मूर्ति को जमीन पर रख दिया। जब विभीषण वापस आया तो उसने मूर्ति जमीन पर रखी पाई। उसने मूर्ति को उठाने की बहुत कोशिश की लेकिन उठा न पाया। ऐसा होने पर उसे बहुत क्रोध आया और उस बालक की खोज करने लगा। भगवान गणेश भागते हुए पर्वत के शिखर पर पहुंच गए, आगे रास्ता न होने पर भगवान गणेश उसी स्थान पर बैठ गए। जब विभीषण वे उस बालक को देखा तो क्रोध में उसके सिर पर वार कर दिया। ऐसा होने पर भगवान गणेश ने उसे अपने असली रूप के दर्शन दिए। भगवान गणेश के वास्तविक रूप को देखकर विभीषण ने उनसे क्षमा मांगी और वहां से चले गए। तब से भगवान गणेश उसी पर्वत की चोटी पर ऊंची पिल्लयार के रूप में स्थित है।


Friday, 3 February 2017

नर्मदा जयंती का महत्व



पुण्यदायिनी माँ नर्मदा का जन्मदिवस

अलौकिक और पुण्यदायिनी माँ नर्मदा के जन्मदिवस यानी माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा जयंती महोत्सव प्रति वर्ष मनाया जाता है। वैसे तो संसार में 999 नदियाँ हैं, पर नर्मदाजी के सिवा किसी भी नदी की प्रदक्षिणा करने का प्रमाण नहीं देखा। ऐसी नर्मदाजी अमरकंटक से प्रवाहित होकर रत्नासागर में समाहित हुई है और अनेक जीवों का उद्धार भी किया है।

युगों से हम सभी शक्ति की उपासना करते आए हैं। चाहे वह दैविक, दैहिक तथा भौतिक ही क्यों न हो, हम इसका सम्मान और पूजन करते हैं। ऐसे में कोई शक्ति अजर-अमर होकर लोकहित में अग्रसर रहे तो उनका जन्म कौन नहीं.मनाएगा।
एक समय सभी देवताओं के साथ में ब्रह्मा-विष्णु मिलकर भगवान शिव के पास आए, जो कि (अमरकंटक) मेकल पर्वत पर समाधिस्थ थे। वे अंधकासुर राक्षस का वध कर शांत-सहज समाधि में बैठे थे। अनेक प्रकार से स्तुति-प्रार्थना करने पर शिवजी ने आँखें खोलीं और उपस्थित देवताओं का सम्मान किया।
देवताओं ने निवेदन किया- हे भगवन्‌! हम देवता भोगों में रत रहने से, बहुत-से राक्षसों का वध करने के कारण हमने अनेक पाप किए हैं, उनका निवारण कैसे होगा आप ही कुछ उपाय बताइए। तब शिवजी की भृकुटि से एक तेजोमय. बिन्दु पृथ्वी पर गिरा और कुछ ही देर बाद एक कन्या के रूप में परिवर्तित हुआ। उस कन्या का नाम नर्मदा रखा गया और उसे अनेक वरदानों से सज्जित किया गया।

..'माघै च सप्तमयां दास्त्रामें च रविदिने।
मध्याह्न समये राम भास्करेण कृमागते॥'

माघ शुक्ल सप्तमी को मकर राशि सूर्य मध्याह्न काल के समय नर्मदाजी को जल रूप में बहने का आदेश दिया।

तब नर्मदाजी प्रार्थना करते हुए बोली- 'भगवन्‌! संसार के पापों को मैं कैसे दूर कर सकूँगी?'

तब भगवान विष्णु ने आशीर्वाद रूप में वक्तव्य दिया- 'नर्मदे त्वें माहभागा सर्व पापहरि भव। त्वदत्सु याः शिलाः सर्वा शिव कल्पा भवन्तु ताः।'

अर्थात् तुम सभी पापों का हरण करने वाली होगी तथा तुम्हारे जल के पत्थर शिव-तुल्य पूजे जाएँगे।

तब नर्मदा ने शिवजी से वर माँगा। जैसे उत्तर में गंगा स्वर्ग से आकर प्रसिद्ध हुई है, उसी प्रकार से दक्षिण गंगा के नाम से प्रसिद्ध होऊँ।

शिवजी ने नर्मदाजी को अजर-अमर वरदान और अस्थि-पंजर राखिया शिव रूप में परिवर्तित होने का आशीर्वाद दिया। इसका प्रमाण मार्कण्डेय ऋषि ने दिया, जो कि अजर-अमर हैं। उन्होंने कई कल्प देखे हैं। इसका प्रमाण मार्कण्डेय पुराण में है।

नर्मदाजी का तट सुर्भीक्ष माना गया है। पूर्व में भी जब सूखा पड़ा था तब अनेक ऋषियों ने आकर प्रार्थनाएँ कीं कि भगवन्‌ ऐसी अवस्था में हमें क्या करना चाहिए और कहाँ जाना


चाहिए? आप त्रिकालज्ञ हैं तथा दीर्घायु भी हैं। तब मार्कण्डेय ऋषि ने कहा कि कुरुक्षेत्र तथा उत्तरप्रदेश को त्याग कर दक्षिण गंगा तट पर निवास करें। नर्मदा किनारे अपनी तथा सभी के प्राणों की रक्षा करें

Wednesday, 1 February 2017

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भोलेनाथ ने कंठ में धारण किया था। भगवान भोलेनाथ की हजारों वर्ष की तपस्थली रही यमकेश्वर घाटी का नीलकण्ठ मंदिर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है।

नीलकंठ महादेव मंदिर 
नीलकंठ महादेव मंदिर देहरादून जिले में ऋषिकेश के करीब यमकेश्वर घाटी में है। यह मंदिर अपने आप में कईं वजहों से खास है। यहीं पर समुद्रमन्थन के बाद निकले विष को भोलेनाथ ने कंठ में धारण किया था। भगवान भोलेनाथ की हजारों वर्ष की तपस्थली रही यमकेश्वर घाटी का नीलकण्ठ मंदिर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है।
पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के बाद कालकूट विष को कंठ में धारण किया तो वे नीलकंठ कहलाए। विष की उष्णता के शमन के लिए शिव इस स्थल पर हजारों वर्ष समाधिस्थ रहे। कहा जाता है कि उन्हीं के नाम से इसका नाम नीलकंठ तीर्थ पड़ा, भगवान शिव ने इस स्थान पर 60 हजार वर्षों तक समाधिस्थ रहकर विष की ऊष्णता को शांत किया था।
समाधि के बाद जगद्धात्री मां सती की प्रार्थना पर प्रसन्न होकर जगत का कल्याण करने के लिए भगवान महादेव जिस वटवृक्ष के मूल में समाधिस्थ हुए थे, उसी स्थान पर नीले कण्ठ के स्वरूप में स्वयंभू-लिंग के रूप में प्रकट हुए। इस लिंग का सर्वप्रथम पूजन मां सती ने किया था, कालांन्तर में यही स्थान नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज भी मन्दिर में स्थित शिवलिंग पर नीला निशान दिखाई देता है।
मुख्य पुजारी शिवानन्द गिरी बताते हैं कि मध्यकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण श्री नीलकंठ महादेव देवालय लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व बनाया गया था।
दक्षिण भारतीय वास्तुकला शैली के अनुरूप इस मंदिर की साज सज्जा एवं भव्यता अति विशिष्ट है। मदिंर की दीवारों पर समुद्र मंथन करते देवताओं और राक्षसों की शेषनाग के साथ मूर्तियां विद्यमान हैं। मन्दिर के गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग धातु निर्मित नाग से आच्छादित है। मधुमती और पंकजा नामक नदियों के निर्मित जलकुंड में स्नान कर यात्री तरोताजा होते हैं।
श्रावण मास में भक्तों के अतिरिक्त श्री नीलकंठ महादेव को जल अर्पित करने लाखों की संख्या में कांवड़िये पहुचते हैं। इस स्थान विशेष को अष्टसिद्धि एवं वाणी की सिद्धि को प्रदान करने वाला पुण्य क्षेत्र कहा गया है।
नीलकंठ पुलिस चौकी इंचार्ज टीआर भट्ट बताते है कि पिछले वर्ष सावन में कई लाख श्रद्धालुओं ने नीलकंठ महादेव के दर्शन किए और इस साल इस संख्या में इजाफा हो सकता है।
विश्वकल्याण की भावना से ओतप्रोत भोलेनाथ के इस पवित्र मदिर के दर्शन अगर आप भी करना चाहते हैं तो आने वाले सावन में शिव शम्भू के जयघोष के साथ चले आईए नीलकंठ घाम।

भगवत गीता पर रूस में कट्टरपंथी लगवाना चाहते थे पाबन्दी ,

              पुतिन ने कहा में ऐसा नही होने दूंगा



संनातन धर्म के विरोधी सिर्फ भारत में ही नही पूरी दुनियां बैठे हुए है, ये कट्टरपंथी विरोधी नहीं चाहते लोग सनातन धर्म की अच्छाइयों पढ़कर जानकार सनातन धर्म की और आकर्षित हों,इसके लिए कट्टरपंथी तरह तरह के उपाय निकलते रहते है सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए,यही रूस में भी हुआ।
बात 2011 की है जब रूस के कट्टरपंथी ईसाई वामपंथियों ने रूस में भगवत गीता जो की सनातन धर्म का धार्मिक ग्रंथ है, उस पर पाबंदी लगाई जाये की याचिका दी, जिसमें कहा गया कि गीता हिंसा फैलाती है, भेदभाव फैलाती है ,इस पर पाबंदी लगाना चाहिए ,उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सचमुच भागवत गीता पर पाबंदी लग ही जाएगी।

इस बात की जानकारी भारत और रूस के हिन्दूओ को हुई तो हिन्दुओ में इस बात से गुस्सा फूट पड़ा,वामपंथियों के विरोध में जगह जगह आक्रोस जताया जा रहा था,दरअसल वहां के चर्चो को डर था कि भगवत गीता के पढ़ने से लोग हिन्दू धर्म की तरफ आकर्षित होरहे थे,जो की आजभी होते है।

रूस में गीता के समर्थक एक होने लगे,और अपना विरोध रुसी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मेदवेदेव पहुचाया,भारत और रूस के लोगो ने इन दोनों नेताओं से हस्तक्षेप करने की मांग की,पुतिन के लॉस मामला जैसे ही आया,तोम्स्क शहर के क़ानूनी विभाग तोम्स्क कोर्ट में याचिका डाली और गीता पर प्रतिबंध निरस्त करने की मांग की।

सरकारी याचिका ने कोर्ट को बताया कि भगवत गीता में कोई हिंसात्मक शीख नही है,ओर वो कोई भेदभाव नही फैलती ,क्योंकि मामले को खुद पुतिन ने उठाया था,तो कोर्ट ने कट्टरपंथियों की याचिका खारिज कर दी,और इस तहर पुतिन ने भगवत गीता पर पाबंदी लगने से बचा लिया।