Tuesday, 7 February 2017

पीओके की भूमि के लिए भारतीय सेना दे रही थी
किराया, सीबीआई ने शुरू की जांच  




नई देहली : भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भूमि का किराया दिए जाने के विषय में जानकार सीबीआई ने इसकी जांच शुरू कर दी है। सीबीआई के अनुसार, भारतीय सेना पिछले १६ वर्षों से पाक अधिकृत कश्मीर स्थित चार भूखंडों का किराया दे रही थी।
सीबीआई अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि, आखिरकार इन भूखंडों के लिए दिया जाने वाला किराया किसकी जेब में जाता था और इन भूमि को किराये पर किसके कहने पर लिया गया था। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, खसरा नंबर- ३०००, ३०३५, ३०४१, ३०४५ की १२२ कनाल और १८ मारला भूमि का उपयोग भारतीय सेना कर रही है। परंतु सच्चाई यह है कि, इस खसरा नंबर की भूमि गुलाम कश्मीर में चली गई है। परंतु, पिछले १६ वर्षों से इस भूमि के किराये की रकम सरकारी खजाने से निकाली जा रही थी।
बताया जाता है कि, डिफेंस एस्टेट विभाग के कुछ अधिकारियों ने आपराधिक षडयंत्र के तहत इस भूमि को भारत में दिखाकर उसे सेना के उपयोग में दिखा दिया और इसके लिए किराया भी दिया जाने लगा। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि, किराया किसी एक व्यक्ति को दिया जाता था या कई लोगों में बांटा जाता था ? सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, हो सकता है कि इस घोटाले में सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हों।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, यह पता लगा कि, तत्कालीन सब डिविजनल डिफेंस एस्टेट अधिकारी आरएएस चंद्रवंशी, नौशेरा के पटवारी दर्शन कुमार ने राजेश कुमार और अन्य व्यक्तियों से मिलकर यह काम किया था। इन लोगों ने भूमि के फर्जी दस्तावेज जमा किए थे। सेना अधिकारी, एस्टेट अधिकारी और अन्य अधिकारियों वाले बोर्ड ने भूमि के लिए ४.९९ लाख रुपए जारी किए।
इस मामले में सरकारी खजाने को छह लाख रुपए का नुकसान पहुंचा। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि, सेना ने नागरिकों से यह भूमि अधिग्रहीत की थी। बोर्ड ने भूमि की जांच करने के बाद किराये के लिए मंजूरी प्रदान की थी। परंतु अधिकारियों के बोर्ड ने एक दूसरे के साठगांठ कर जांच में गलत जानकारी दी थी।

सीबीआई ने बताया कि, बोर्ड की बैठक वर्ष २००० में बुलाई गई जिसमें चंद्रवंशी और दर्शन कुमार को रक्षा बलों में कार्यरत बताया गया और राजेश कुमार को ४.९९ लाख रुपए किराये के जारी किए गए।


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