Wednesday, 1 February 2017

भगवत गीता पर रूस में कट्टरपंथी लगवाना चाहते थे पाबन्दी ,

              पुतिन ने कहा में ऐसा नही होने दूंगा



संनातन धर्म के विरोधी सिर्फ भारत में ही नही पूरी दुनियां बैठे हुए है, ये कट्टरपंथी विरोधी नहीं चाहते लोग सनातन धर्म की अच्छाइयों पढ़कर जानकार सनातन धर्म की और आकर्षित हों,इसके लिए कट्टरपंथी तरह तरह के उपाय निकलते रहते है सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए,यही रूस में भी हुआ।
बात 2011 की है जब रूस के कट्टरपंथी ईसाई वामपंथियों ने रूस में भगवत गीता जो की सनातन धर्म का धार्मिक ग्रंथ है, उस पर पाबंदी लगाई जाये की याचिका दी, जिसमें कहा गया कि गीता हिंसा फैलाती है, भेदभाव फैलाती है ,इस पर पाबंदी लगाना चाहिए ,उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सचमुच भागवत गीता पर पाबंदी लग ही जाएगी।

इस बात की जानकारी भारत और रूस के हिन्दूओ को हुई तो हिन्दुओ में इस बात से गुस्सा फूट पड़ा,वामपंथियों के विरोध में जगह जगह आक्रोस जताया जा रहा था,दरअसल वहां के चर्चो को डर था कि भगवत गीता के पढ़ने से लोग हिन्दू धर्म की तरफ आकर्षित होरहे थे,जो की आजभी होते है।

रूस में गीता के समर्थक एक होने लगे,और अपना विरोध रुसी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मेदवेदेव पहुचाया,भारत और रूस के लोगो ने इन दोनों नेताओं से हस्तक्षेप करने की मांग की,पुतिन के लॉस मामला जैसे ही आया,तोम्स्क शहर के क़ानूनी विभाग तोम्स्क कोर्ट में याचिका डाली और गीता पर प्रतिबंध निरस्त करने की मांग की।

सरकारी याचिका ने कोर्ट को बताया कि भगवत गीता में कोई हिंसात्मक शीख नही है,ओर वो कोई भेदभाव नही फैलती ,क्योंकि मामले को खुद पुतिन ने उठाया था,तो कोर्ट ने कट्टरपंथियों की याचिका खारिज कर दी,और इस तहर पुतिन ने भगवत गीता पर पाबंदी लगने से बचा लिया।

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