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Wednesday, 5 April 2017

ब्रिटिश सरकार से किसी भी प्रकार का कोई भी रिश्ता ना रखने और उसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आज ही अर्थात 5 अप्रैल सन 1944 को "आजाद हिंद बैंक " का उदघाटन रंगून में किया गया था.

5 अप्रैल - आज़ाद हिन्द बैंक की स्थापना . जानें क्या और क्यों था ये बैंक ?
ब्रिटिश सरकार से किसी भी प्रकार का कोई भी रिश्ता ना रखने और उसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आज ही अर्थात 5 अप्रैल  सन 1944 को  "आजाद हिंद बैंक " का उदघाटन रंगून में किया गया था. बेहद दूरगामी सोच के नेता जी सुबाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजो से पूर्ण स्वाधीनता के लिए युद्ध किया था. उनकी आर पर की लड़ाई में अंग्रेजों की हर निशानी को मिटा देने का संकल्प शामिल था . उनका उन सिक्को , उन नोटों से भी ब्रिटिश प्रभुता हटाने का संकल्प था जिन पर किसी न किसी ब्रिटिश गवर्नर की या किसी ब्रिटिश अधिकारी की फोटो लगी होती थी . आज़ाद हिन्द बैंक में अपनी खुद के सिक्के , खुद के नोट, खुद के कोर्ट , खुद के सिविल कोड व् खुद का स्टाम्प शामिल था .  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के इन्हें बेहद दूरगामी युद्ध नीति ने अंग्रेजो को बेहद विचलित कर दिया था.  60 हजार के सच्चे योद्धा की फ़ौज ले कर पूरे ब्रिटेन पर भारी पड़ते दिख रहे नेता जी के इस कार्य को भारत में बेहद समर्थन मिल रहा था . इसीलिए अंग्रेजों ने अपनों से ही अपनों को मरवाने की चाल चली और ऐसा कुचक्र चला कि 1947 के बाद भी सुभाष चन्द्र बोस जी को अनवरत प्रताड़ित किया जाता रहा , उतनी प्रताड़ना जितनी शायद अंग्रेजो के काल में भी नहीं थी . और प्रताड़ना का ये दौर उस समय तक चला जब तक वो स्वर्ग नहीं सिधार गए .  ऐसे दूरगामी सोच रखने के लिए पराधीन भारत में हिन्द के नाम से स्थापित "आज़ाद हिन्द बैंक" की स्थापना दिवस की आप सभी भारतीयों को के महान क्रांतिवीर के प्रयासों के स्मरण रखना चाहिए . 

श्रीनगर : नेशनल काफ्रेंस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला के जहरीले बोल और इन ज़हरों में देशद्रोही बयान बढते जा रहे हैं।

एक बार फिर पत्थरबाजों के हिमायती बने फारुख अब्दुल्ला, दिया देशद्रोही बयान

श्रीनगर : नेशनल काफ्रेंस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला के जहरीले बोल और इन ज़हरों में देशद्रोही बयान बढते जा रहे हैं। दरअसल, कुछ समय से वो देश विरोधी गतिविधियों को लगातार हवा दे रहे है और हद तो तब पार हो गई जब फ़ारुख ने देश के जवानों को अपने पत्थरबाजी से घायल करने वाले आतंकियों का खुला समर्थन किया। फारुख ने कहा कि कश्मीर में जो बच्चे पत्थर मारते हैं, उनका राज्य के टूरिज्म से कोई लेना-देना नहीं है वो अपने देश के लिए लड़ रहे हैं। फारुख ने भारत-पाक के रिश्तों पर कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान मिलकर इस मुद्दे को नहीं सुलझा पा रहे हैं, तो अमेरिका को बीच में आकर समझौता करने चाहिए। यह किसी पार्टी में लड़ाई नहीं है बल्कि सांप्रदायिकता के खिलाफ एक जंग है। वहीं, AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने फारुक की बात से असहमति जताते हुए कहा कि फारुख साहब को चुनाव लड़ना है इसलिए इस तरह की बातें कर रहे हैं, उनके बेटे जब सीएम थे तब 100 से ज्यादा लड़कों की मौत हुई थी। तब तो उन्होंने कुछ नहीं कहा। अब चुनाव हैं तो वह बोल रहे हैं। औवेसी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान का मसला दो देशों का मुद्दा है, इसमें किसी तीसरे की जरुरत नहीं है। फारुक ने कहा कि मैं मोदी साहब को बताना चाहता हूं कि इसमें कोई शक नहीं कि पर्यटन हमारी जिंदगी है लेकिन पथराव करने वालों के पास पर्यटन को बिगाड़ने के लिए कुछ नहीं है। वे भूखे रहेंगे लेकिन देश के लिए पथराव करेंगे और यही हमें समझने की जरूरत है। लेकिन अब फारुख अब्दुल्ला को कौन बताये कि इन पत्थरबाज़ों की हिमायत करके वो देशद्रोह का काम तो कर ही रहे हैं। साथ ही घायल कश्मीर को और ज्यादा जख्म दे रहे हैं। फारुख अब्दुल्ला आज उसी कश्मीर में देशविरोधी बयान दे रहे हैं, जिस राज्य के वो मुख्यमंत्री रह चुके हैं, कश्मीर की नुमाइंदगी करते हुए केंद्र में भी मंत्री रह चुके हैं। आज उनकी ज़ुबान ज़हर उगल रही है। उनके ज़हरीले बोल से अगर किसी को फायदा हो रहा है तो वो पाकिस्तान को। सत्ता से बाहर होने का मतलब ये तो कतई नहीं होता कि आप देशद्रोही हो जाएं। वो भी महज इसलिए कि हाशिए पर पड़ी उनकी पार्टी को कश्मीर में होने वाले उपचुनाव में चंद वोट मिल जाएं। 2014 के विधान सभा चुनाव में उनको करारी हार मिली थी। 87 विधान सभा सीटों मे से फारूख अब्दुल्ला की पार्टी को महज 15 सीटें ही मिल पाईं थीं। 

श्री राम चन्द्र के मन्दिर निर्माण का संकल्प ले कर योगी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए पहुच गए

योगी के मंदिर पहुचे तमाम मुस्लिमों ने कहा - "सौगंध राम की खाते हैं , हम मंदिर वहीँ बनायेगे"


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर गोरखनाथ मन्दिर अचानक ही तब हलचल और कौतूहल से भर गया जब भारी संख्या में बैनर और पोस्टर ले कर ढेर सारे मुसलमान श्री राम चन्द्र के मन्दिर निर्माण का संकल्प ले कर योगी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए पहुच गए .मुस्लिमों ने नारे लगाते हुए कहा कि - न समझौते से ना क़ानून से , श्रीराम मंदिर बनेगा मुसलमानो के सहयोग से . मुसलमानो के इस जुलूस का नेतृत्व भाजपा का अल्पसंख्यक मोर्चा कर रहा था. तमाम मुसलमानो ने कहा कि निश्चित रूप से अयोध्या प्रभु श्रीराम का जन्म स्थल है और वहां मंदिर हर हाल में बनना ही चाहिए . यदि केंद्र और राज्य सरकार मंदिर निर्माण की पहल करती हैं तो मुसलमान इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेगा .  सौगंध राम की कहते हैं , हम मंदिर वहीँ बनायेगे के नारे जब वहां गूंजने लगे तब जुलूस में शामिल मुस्लिमो ने कहा कि पहली ईंट हम ही वहां लगाएंगे . गोरखपुर क्षेत्र के वासियों ने इस पहल का दिल खोल कर स्वागत किया और उनके जुलूस को स्थानीय जनता व मन्दिर प्रशाशन ने पूरा सहयोग किया . जुलूस में शामिल मुस्लिमों के हाथों में बड़े बड़े बैनर , तख्तियां और फोटो थे जिनमे प्रभु श्रीराम और उनके प्रस्तावित मंदिर की भव्य तस्वीरे थी. 

दान-ए-जंग में दुश्मन की 9 गोलियां सीने पर खाने के बाद भी जिंदगी की जंग जीतने वाले CRPF कमांडेंट चेतन कुमार चीता को आखिरकार होश आ गया. वह दो महीने से कोमा में थे

सीने पर 9 गोलियां खाकर भी चेतन चीता ने जीती जिंदगी की जंग

दान-ए-जंग में दुश्मन की 9 गोलियां सीने पर खाने के बाद भी जिंदगी की जंग जीतने वाले CRPF कमांडेंट चेतन कुमार चीता को आखिरकार होश आ गया. वह दो महीने से कोमा में थे. दिल्ली के एम्स अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहे थे. बुधवार को उनको अस्पताल से घर भेज दिया गया.
एम्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों के मुताबिक, चेतन चीता की हालात में पहले से अब काफी सुधार हुआ है. उनको जब अस्पताल लाया गया था, उस वक्त उनके सिर बहुत ही गंभीर चोट थी.  शरीर का ऊपरी हिस्सा बुरी तरहसे फ्रैक्चर था और दाईं आंख पूरी तरह से नष्ट हो गई थी. उनका GCS (सिर की चोट की गंभीरता तय करने का टेस्ट) का स्कोर M3 था, जो अब M6 है. वह पूरी तरह होश में हैं. लोगों की बातों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि चेतन चीता को एडमिट करने के 24 घंटे के अंदर सर्जरी कर उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए हैवी ऐंटीबायॉटिक्स दिए गए थे. उनके गहरे जख्म लगातार साफ किए गए थे. उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं. नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम ने आंख का इलाज किया, लेकिन दाईं आंख में बुरी तरह से चोट लगने की वजह से ठीक नहीं हो सकी. हालांकि, इलाज अभी जारी है.
बताते चलें कि 14 फरवरी को बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में चीता घायल हो गए थे. इस मुठभेड़ में 3 जवानों की मौत हो गई थी. इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खबर के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च अभियान चलाया था, लेकिन इसकी जानकारी आतंकियों को पहले ही मिल गई थी. उन्होंने ठिकाना बदल लिया. चेतन ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे. आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान चीता पर 30 गोलियां दागी गईं, जिनमें 9 गोलियां लगी थीं.
घायल हालत में चीता को पहले श्रीनगर के आर्मी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी ब्लीडिंग रोकने के लिए दवाइयां दी गईं. हालांकि जख्म की गंभीरता को देखते हुए उन्हें एयर ऐंबुलेंस के जरिए एम्स ले जाने का फैसला किया गया. एम्स में पहले से ही तैयार डॉक्टरों की टीम ने कमांडेंट चेतन चीता का इलाज किया. विशेषज्ञों की एक टीम ने ऐंटीबायॉटिक थेरपी के जरिए उनकी देखरेख की थी. दो महीने के इलाज के बाद उनकी स्थिति ठीक हुई है.

सनातन धर्म का अपमान बार बार

फ़िल्मी भांड एक फिल्म "बहन होगी तेरी" लेकर आ रहे हैं जिसमें भगवान शिव को आपत्तिजनक मुद्रा में दिखाया गया है।
सनातन धर्म का  अपमान बार बार
भवन  शिव का पोस्टर पर लिख दिया बहन  होगी तेरी 
फ़िल्मी भांड एक फिल्म "बहन होगी तेरी" लेकर आ रहे हैं जिसमें भगवान शिव को आपत्तिजनक मुद्रा में दिखाया गया है।
आखिर हमेशा सनातन का ही मखौल क्यों उड़ाया जाता है?


सुनने में आया है कि एक्ट्रेस श्रुति हासन और एक्टर राजकुमार राव डायरेक्ट अजय के पन्नालाल करेंगे और फिल्म को प्रोडूयस अमूल विकास मोहन, टोनी डिसूजा और नितिन उपाध्याय करेंगे। इन दिनों श्रुति हासन और राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘बहन होगी तेरी’ की शूटिंग लखनऊ में हो रही है। मेकर्स ने फिल्म की शूटिंग खत्म होने के पहले ही फिल्म की रिलीज डेट घोषित कर दी है। फिल्म ‘बहन होगी तेरी’ 26 मई 2017 

Tuesday, 4 April 2017

पंडितों के अनुसार आज सुबह 11:27 बजे पर दोपहर 1:54 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है.

राम नवमी: अब से कुछ देर में शुरू होगा पूजा का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्र का आज अंतिम दिन है. पंडितों और ज्योतिषियों के अनुसार इस बार राम नवमी 5 अप्रैल यानी आज मनाई जा रही है. हालांकि देश के कुछ राज्यों से कल राम नवमी मनाने की खबरें आई थीं, पर चूंकि आज सूर्योदय के समय नवमी तिथि रही है इसलिए पंडित आज ही राम नवमी मान रहे हैं. 
क्‍यों थी शंका 
दरअसल इस बार नवमी तिथि मंगलवार दोपहर 11:20 बजे से आरंभ हो गई थी, जो आज यानी बुधवार 10:03 बजे तक है. सरकारी ऑफिसों, स्‍कूलों में भी मंगलवार को ही राम नवमी की छुट्टी दी गई थी, इसलिए कई जगह अष्‍टमी-नवमी मंगलवार को ही मनाई गई. 
राम नवमी पर अयोध्‍या में धूम 
यूं तो राम नवमी पूरे देश में मनाई जाती है लेकिन इस मौके पर सबसे अधिक धूम अयोध्‍या में देखने को मिलती है. चूंकि राम की जन्म भूमि अयोध्या है, इसीलिए इस दिन अयोध्या की पवित्र सरयू नदी पर स्नान करने की परंपरा है. फिर लोग भगवान राम की आराधना करते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक उपरोक्त पैसे कथित तौर पर विभिन्न चैनलों के माध्यम से अलगाववादी नेताओं को भेजे गए थे.

कश्मीर में अलगाव की आग भड़काने के लिए ISI ने झोंके 800 करोड़

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने घाटी में अशांति को बढ़ावा देने के लिए सईद अली शाह गिलानी और आसिया अंद्राबी सहित कुछ कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को 800 करोड़ रुपए दिए थे.
रिपोर्ट के मुताबिक उपरोक्त पैसे कथित तौर पर विभिन्न चैनलों के माध्यम से अलगाववादी नेताओं को भेजे गए थे. रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि नवंबर 2016 के बाद जब भारत में बड़े नोटों पर नोटबंदी की घोषणा हुई उसके बाद अवैध धन का आना काफी कम हो गया.
क्या कहती है आई बी की रिपोर्ट 
- आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक आईएसआई द्वारा भेजे गए पैसों का इस्तेमाल घाटी के पत्थरबाजों और पेट्रोल बम फेंकने वालों को पेमेंट करने में किया गया.
- रिपोर्ट में आईबी ने कहा है कि जुलाई 2016 से काफी पहले पाकिस्तान द्वारा घाटी में एक विद्रोह की योजना बनाई गई थी. रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वाणी के साथ हुई मुठभेड़ से आईएसआई को घाटी में विद्रोह की आग फैलाने में काफी मदद मिली.
- आईबी की रिपोर्ट के अनुसार, धन का एक बड़ा हिस्सा आतंकवादियों द्वारा भेजा गया था जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी लांचपैड से भारत में घुसपैठ कर आए थे. उसके बाद पैसे दलालों और हवाला चैनलों के माध्यम से अलगाववादियों को बांटा गया था.
- रिपोर्ट के मुताबिक पैसों का इस्तेमाल घाटी में भारत-विरोधी और सुरक्षा बलों के खिलाफ भावनाएं भड़काने के लिए भी किया गया था.

उत्तर प्रदेश : मदरसे में तीन शिक्षकों ने विधवा से किया सामुहिक बलात्कार

उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर के एक मदरसे में रसोई संभालनेवाली विधवा महिला ने तीन शिक्षकों पर सामुहिक बलात्कार का सनसनीखेज आरोप लगाया है। 
पीड़ित महिला ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। एसपी के निर्देश पर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, अंबेडकरनगर जिले के मालीपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहनेवाली विधवा महिला के दो बच्चे हैं। वह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए जलालपुर के एक मदरसे में रसोईया का कार्य कर रही है। घर दूर होने के कारण कई बार वह मदरसे के ही एक कमरे में रुक जाया करती थी।
आरोप है कि इसी मदरसे में पढ़ानेवाले तीन अन्य शिक्षक भी रात में वहीं रहते हैं। ३० मार्च को रात करीब ११ बजे उन तीनों ने अचानक पहुंचकर उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देते हुए मदरसे से निकाल देने की धमकी भी दी। पुलिस इसकी जांच कर रही है।

केंद्र सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर एक बड़ा फैसला ले सकती है. पिछले कई वर्षों से भारत में आकर बसे रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार कर वापस म्यामांर भेजने की सरकार तैयारी कर रही है

 क्या 40000 रोहिंग्या मुसलमानों को छोड़ना होगा भारत?

 केंद्र सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर एक बड़ा फैसला ले सकती है. पिछले कई वर्षों से भारत में आकर बसे रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार कर वापस म्यामांर भेजने की सरकार तैयारी कर रही है. अगर सरकार इस फैसले पर अमल कर सकती तो इससे भारत में बसे करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमानों को भारत छोड़ना पड़ेगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गृह मंत्रालय फॉरनर्स एक्ट के तहत रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार भेजेगी. ये लोग भारत में समुद्र के रास्ते बांग्लादेश और म्यायांर की सीमा से घुसपैठ कर भारत में घुसे थे. इस मुद्दे को लेकर सोमवार को गृह मंत्रालय में केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि की अध्यक्षता में बैठक हुई है. भारत में सबसे ज्यादा 10 हजार रोंहिग्या मुसलमान जम्मू में बसे हैं. बांग्लादेश में फिलहाल तीन लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 14,000 रोहिंग्या मुसलमान हैं। इस पर सरकार का कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र की ओर से इन्हें शरणार्थी कहे जाने की टर्म के साथ नहीं है और इन्हें देश में घुसे अवैध लोगों के तौर पर देखती है. ऐसे में फॉरनर्स एक्ट के तहत सरकार इन्हें हिरासत में लेने, गिरफ्तार कर सजा देने और प्रत्यर्पण करने का अधिकार रखती है.
100 साल पुराना है रोहिंग्या मुसलमानों का विवाद
दरअसल म्यांमार सरकार ने 1982 में राष्ट्रीयता कानून बनाया था जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों का नागरिक दर्जा खत्म कर दिया गया था. इसके बाद से ही म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करती रही है. हालांकि इस पूरे विवाद की जड़ करीब 100 साल पुरानी है, लेकिन 2012 में म्यांमार के राखिन राज्य में हुए सांप्रदायिक दंगों ने इसमें हवा देने का काम किया. उत्तरी राखिन में रोहिंग्या मुसलमानों और बौद्ध धर्म के लोगों के बीच हुए इस दंगे में 50 से ज्यादा मुस्लिम और करीब 30 बौद्ध लोग मारे गए थे.
रोहिंग्या मुसलमान और म्यांमार के बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय के बीच विवाद 1948 में म्यांमार के आजाद होने के बाद से चला आ रहा है. राखिन राज्य में जिसे अराकान के नाम से भी जाता है, 16वीं शताब्दी से ही मुसलमान रहते हैं. ये वो दौर था जब म्यांमार में ब्रिटिश शासन था. 1826 में जब पहला एंग्लो-बर्मा युद्ध खत्म हुआ तो उसके बाद अराकान पर ब्रिटिश राज कायम हो गया. इस दौरान ब्रिटश शासकों ने बांग्लादेश से मजदूरों को अराकान लाना शुरू किया. इस तरह म्यांमार के राखिन में पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से आने वालों की संख्या लगातार बढ़ती गई. 

Monday, 3 April 2017

दुनिया भर भारतीय संस्कृति को बहुत महत्व दिया जाता है। कहा जाता है कि भारत पर्वों का देश है। यहां की दिनचर्या में ही पर्व-त्योहार बसे हुए हैं। ऐसा ही एक पर्व नवरात्रि के मनाया जाता है। वो है........ 'रामनवमी'।

असुरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने राम रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया और जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्मोत्सव तो धूमधाम से मनाया.पर उनके आदर्शों को जीवन में नहीं उतारा जाता। 
राम नाम उर मैं गहिओ जा कै सम नहीं कोई।। 
जिह सिमरत संकट मिटै दरसु तुम्हारे होई।। 

अयोध्या के राजकुमार होते हुए भी भगवान राम अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए संपूर्ण वैभव को त्याग 14 वर्ष के लिए वन चले गए और आज देखें तो वैभव की लालसा में ही पुत्र अपने माता-पिता का काल बन रहा..
हम रामनवमी और जन्माष्टमी तो उल्लासपूर्वक मनाते हैं पर उनके कर्म व संदेश को नहीं अपनाते। श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता ज्ञान आज सिर्फ एक ग्रंथ बनकर रह गया है।   
तुलसीदासजी ने रामचरित मानस में भगवान राम के जीवन का वर्णन करते हुए बताया है कि श्रीराम प्रातः अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करते थे जबकि आज चरण स्पर्श तो दूर बच्चे माता-पिता की बात तक नहीं मानते।   
जिनके सुंदर नाम को ह्रदय में बसा लेने मात्र से सारे काम पूर्ण हो जाते हैं। जिनके समान कोई दूजा नाम नहीं है। जिनके स्मरण मात्र से सारे संकट मिट जाते हैं। ऐसे प्रभु श्रीराम को मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता.हूं।   
कलयुग में न तो योग, न यज्ञ और न ज्ञान का महत्व है। एक मात्र राम का गुणगान ही जीवों का उद्धार है। संतों का कहना है कि प्रभु श्रीराम की भक्ति में कपट, दिखावा नहीं आंतरिक भक्ति ही आवश्यक है।गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं - ज्ञान और वैराग्य प्रभु को पाने का मार्ग नहीं है बल्कि प्रेम भक्ति से सारे मैल धूल जाते हैं। प्रेम भक्ति से ही श्रीराम मिल जाते हैं।   
छूटहि मलहि मलहि के धोएं। 
धृत कि पाव कोई बारि बिलोएं। 
प्रेम भक्ति जल बिनु रघुराई। 
अभि अंतर मैल कबहुं न जाई।।  
अर्थात् मैल को धोने से क्या मैल छूट सकता है। जल को मथने से क्या किसी को ‍घी मिल सकता है। कभी नहीं। इसी प्रकार प्रेम-भक्ति रूपी निर्मल जल के बिना अंदर का मैल कभी नहीं छूट सकता। प्रभु की भक्ति के बिना अंदर का मैल कभी नहीं छूट सकता। प्रभु की भक्ति के बिना जीवन नीरस है अर्थात् रसहीन है। प्रभु भक्ति का स्वाद ऐसा स्वाद है जिसने इस स्वाद को चख लिया, उसको दुनिया के सारे स्वाद फीके लगेंगे।  
भक्ति जीवन में उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितना स्वादिष्ट भोजन में नमक। 
  भगति हीन गुण सब सुख ऐसे। 
लवन बिना बहु व्यंजन जैसे।।   

अर्थात - जिस तरह नमक के बिना उत्तम से उत्तम व्यंजन स्वादहीन है, उसी तरह प्रभु के चरणों की ‍भक्ति के बिना जीवन का सुख, समृद्धि सभी फीके है।   

रामनवमी के दिन क्या करें: 
  
नाथ एक वर मांगऊं राम कृपा करि देहु। 
जन्म-जन्म प्रभु पद कमल कबहुं घटै जनि नेहु।।   

हे प्रभु राम! मैं आपसे केवल एक ही वर मांगता हूं, इसे देने की कृपा करें। प्रभु आपके चरण कमलों में मेरा प्रेम जन्म-जन्मांतर में कभी न घटे।।  

2. प्रभु से अनुपम प्रेम भक्ति मांगे-   
परमानंद कृपानयन मन परिपूरन काम। 
प्रेम भगति अनपायनी देहु हमहि श्रीराम।। 

हे प्रभु श्रीराम! आप हमें अपनी अत्यंत पावन और तीनों प्रकार के तापों अथवा जन्म-मरण के क्लेशों का नाश करने वाली अनुपम प्रेम...भक्ति का वरदान दीजिए।   

3. प्रभु से शरण में लेने की प्रार्थना कीजिए-  
प्रभु मेरे मन में आप निवास करें। आप मेरे आंतरिक मैल को स्वच्छ करके उसमें भक्ति का समावेश करें। हे दीनानाथ, मैं आपकी शरण में हूं। मुझ शरणागत की रक्षा करें। इस प्रकार निष्कपट भक्ति करने से प्रभु प्रसन्न होकर हर मनोरथ पूर्ण करेंगे। प्रभु की दया और रक्षा के भरोसे सच्चा मनुष्य संसार में सदा निर्भय और निर्लिप्त बना रहता है। प्रभु अपनी शरण में आए जीवों की रक्षा स्वयं करते हैं। प्रभु कहते है कि -   

मम पन सरणागत भयहारी।।   
अर्थात - शरणागत के भय को दूर करना मेरा प्रण है। वे फिर कहते हैं-
  
जो सभ‍ीत आवा सरनाई। रखिहऊं ताहि प्राण की नाई।।   
अर्थात‍ जो भयभीत होकर मेरी शरण में आया है, तो मैं उसे प्राणों की तरह संभाल कर रखूंगा।   

रामनवमी पर यह दृढ़निश्चय करें कि अपने मन और मार्ग को श्रीराम की भक्ति में लगा देंगे।  

ग्वालियर में भी. पथराव के शिकार भी तीनों स्थानों पर लगभग एक ही लोग . वो जो या तो मुसलमान नहीं है या उसके बदन पर वर्दी है .

ग्वालियर बना संभल, संघ की शाखा और पुलिस कोतवाली पर समुदाय विशेष का भीषण पथराव
कभी दूसरे वर्ग पर असहिष्णु होने का आरोप लगाने वाले आज खुद आतंक की सीमा को पार करते जा रहे हैं. इसी क्रम में उन्होंने पहले कश्मीर, फिर सम्भल और और अब ठीक वही अंदाज़ ग्वालियर में भी. पथराव के शिकार भी तीनों स्थानों पर लगभग एक ही लोग . वो जो या तो मुसलमान नहीं है या उसके बदन पर वर्दी है .   इस बार पथराव के निशाने पर था ग्वालियर का श्योपुर इलाके का श्रीराम कालोनी. पहले शांतिपूर्वक अपनी शाखा लगा रहे और भारत माँ की जय बोल रहे संघ के स्वयं सेवकों पर भीषण पथराव किया गया फिर जब पथराव की शिकायत करने स्वयं सेवक कोतवाली पहुचे तब कोतवाली पर भी उन्ही समुदाय विशेष की भीड़ जमा हो गयी और पत्थरों से कोतवाली को भी पाट दिया जिसमे पुलिस के 2 वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए जानकारी के मुताबिक़ 2 अप्रैल की रात श्योपुर की श्रीराम कालोनी में संघ के कुछ स्वयं सेवक व्यायाम कर रहे थे. तभी अचानक उनकी तरफ एक पत्थर फेंका गया . जब स्वयं सेवकों ने पत्थर फेंकने वाले से इसका विरोध किया तब उसके समर्थन में तमाम सम्प्रदाय विशेष के लोग जमा हो गए और उन पर भीषण पथराव शुरू हो गया . इस पथराव में संघ के 2 स्वयं सेवक घायल हुए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है . दुस्साहस की हद तब और भी बढ़ गयी जब इस पथराव की शिकायत करने गए लोगों के साथ साथ पत्थरबाज भीड़ भी चलती रही और कोतवाली को भी निशाने पर लिया गया , बेहद बुरी तरह से हुए पथराव में कोतवाली के 2 पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गए .

मसरत कश्मीर में लोगों को भड़का कर हिंसा फैलाने का मुख्य आरोपी है

जेल में बंद कट्टर अलगाववादी मसरत आलम के पास मिले सेलफोन, पाकिस्तानी हैंडलर्स से करता था संपर्क!

जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले की एक जेल में चेकिंग के दौरान 16 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. जेल अधिकारियों के मुताबिक जेल में बंद आतंकवादी और अलगाववादी नेता पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के साथ मोबाइल फोन के जरिए संपर्क में थे.इस बात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने जेल परिसर में छापा मारकर कैदियों के पास से 16 सेल फोन बरामद किए. पुलिस ने बताया कि कुछ दुर्दांत आतंकवादी और अलगाववादी कैदी इन फोनों के जरिये पाकिस्तान में अपने हैंडलर्स के संपर्क में रह रहे थे और राज्य में अशांति पैदा करने की कोशिशों में जुटे रहते थे.इन फोनों के जरिये कुछ व्हाट्सएप कॉल पाकिस्तान में किए गए थे और पुलिस उन डाटा को खंगालने की कोशिश कर रही है.जेल में कुछ आतंकवादी भी कैद हैं और उनके पास से भी फोन बरामद हुए हैं. उनके फोन में व्हाट्सएप भी हैं कुछ पाकिस्तानी नंबरों से संपर्क में थे.
मसरत कश्मीर में लोगों को भड़का कर हिंसा फैलाने का मुख्य आरोपी है
दो सेल फोन कट्टर अलगाववादी मसरत आलम के पास से बरामद हुए हैं. वह 2010 में कश्मीर में लोगों को भड़का कर हिंसा फैलाने का मुख्य आरोपी है.
साल 2015 में राज्य सरकार ने उसे जेल से रिहा कर दिया था, जिसके फौरन बाद उसने श्रीनगर में पाकिस्तान के समर्थन में एक रैली का नेतृत्व किया था. इसे लेकर काफी राजनीतिक विवाद हुआ था और केंद्र सरकार के दबाव के बाद उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.एसएसपी इम्तियाज हुसैन ने कहा कि मसरत आलम के पास से भी कुछ चीजें बरामद हुई हैं. इस मामले में जो भी कानूनी कार्रवाई संभव है, वह की जाएगी.
दरअसल पिछले हफ्ते कुछ आतंकियों ने जेल के अधिकारी के घर जाकर धमकी दी थी कि अगर जेल में कैदियों को परेशान किया गया तो अंजाम बुरा होगा. हमलावरों ने जेल अधिकारी के कार को भी आग के हवाले कर दिया था, करीब दर्जन भर बदमाश पुलिस अधिकारी के घर घुसकर मारपीट और तोड़ फोड़ की थी.

इन सरोवरों को लेकर कहा जाता है कि इनमें स्नान करने से मनुष्य को निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भारत के 5 पवित्र सरोवर, मान्यता है की यहाँ स्नान करने से मिलता है मोक्ष

आज भी प्राचीन काल की ऐसी कई निशानियां मौजूद हैं, जिनका संबंध देवी-देवताओं या ऋषि-मुनियों से माना जाता है। आज हम आपको ऐसे ही 5 सरोवरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें धार्मिक रूप से बहुत ही खास माना जाता है। इन सरोवरों को लेकर कहा जाता है कि इनमें स्नान करने से मनुष्य को निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पुष्कर सरोवर, अजमेर, राजस्थान (Pushkar Sarovar, Ajmer, Rajasthan) :-
राजस्थान में अजमेर शहर से 14 किलोमीटर दूर पुष्कर झील है। इस झील का संबंध भगवान ब्रह्मा से है। यहां ब्रह्माजी का एकमात्र मंदिर बना है। पुराणों में इसके बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। यह कई प्राचीन ऋषियों की तपोभूमि भी रहा है। पुष्कर की गणना पंच तीर्थों में भी की गई है।
पुष्कर के उद्भव का वर्णन पद्मपुराण में मिलता है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने यहां आकर यज्ञ किया था। पुष्कर का उल्लेख रामायण में भी हुआ है। विश्वामित्र के यहां तप करने की बात कही गई है। इस सरोवर को लेकर एक यह मान्यता भी प्रचलित है कि भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध भी यहीं पर किए थे।
झील की उत्पत्ति के बारे में किंवदंती है कि ब्रह्माजी के हाथ से यहीं पर कमल पुष्प गिरने से जल प्रस्फुटित हुआ जिससे इस झील का उद्भव हुआ। यह मान्यता भी है कि इस झील में डुबकी लगाने से पापों का नाश होता है। झील के चारों ओर 52 घाट व अनेक मंदिर बने हैं। इनमें गऊघाट, वराहघाट, ब्रह्मघाट, जयपुर घाट प्रमुख हैं।
पुष्कर सरोवर 3 हैं- ज्येष्ठ (प्रधान) पुष्कर, मध्य (बूढ़ा) पुष्कर और कनिष्ठ पुष्कर। ज्येष्ठ पुष्कर के देवता ब्रह्माजी, मध्य पुष्कर के देवता भगवान विष्णु और कनिष्ठ पुष्कर के देवता रुद्र हैं। ब्रह्माजी ने पुष्कर में कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णमासी तक यज्ञ किया था जिसकी स्मृति में अनादिकाल से यहां कार्तिक मेला लगता आ रहा है।
तीर्थराज पुष्कर को सब तीर्थों का गुरु कहा जाता है। इसे धर्मशास्त्रों में 5 तीर्थों में सर्वाधिक पवित्र माना गया है। पुष्कर, कुरुक्षेत्र, गया, हरिद्वार और प्रयाग को पंचतीर्थ कहा गया है।
आज भी प्राचीन काल की ऐसी कई निशानियां मौजूद हैं, जिनका संबंध देवी-देवताओं या ऋषि-मुनियों से माना जाता है। आज हम आपको ऐसे ही 5 सरोवरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें धार्मिक रूप से बहुत ही खास माना जाता है। इन सरोवरों को लेकर कहा जाता है कि इनमें स्नान करने से मनुष्य को निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कैलाश मानसरोवर (Kailsah Mansarovar) 
संस्कृत शब्द ‘मानसरोवर’, मानस तथा सरोवर को मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है- ‘मन का सरोवर’। पौराण‌िक कथाओं के अनुसार, यह सरोवर ब्रह्माजी मन से उत्पन्न हुआ था। इस सरोवर के पास ही कैलाश पर्वत है जो भगवान शिव का निवास स्‍थान माना जाता है। जिसके कारण इस सरोवर का महत्व और भी कई गुना बढ़ जाता है।इस सरोवर के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर माता पार्वती स्नान करती हैं। यहां देवी सती के शरीर का दायां हाथ गिरा था इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है। यहां शक्तिपीठ है।
इस जगह को हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म में भी बहुत पवित्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि रानी माया को भगवान बुद्ध की पहचान यहीं हुई थी। जैन धर्म तथा तिब्बत के स्थानीय बोनपा लोग भी इसे पवित्र मानते हैं।
नारायण सरोवर, गुजरात (Narayan Sarovar, Gujarat)
गुजरात के कच्छ जिले के लखपत तहसील में स्थित यह सरोवर भगवान का विष्‍णु का सरोवर माना जाता है। मान्यता है कि इस सरोवर में स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था। कई पुराणों और ग्रंथों में इस सरोवर के महत्व का वर्णन पाया जाता है। यहां सिंधु नदी का सागर से संगम होता है।
पवित्र नारायण सरोवर के तट पर भगवान आदिनारायण का प्राचीन और भव्य मंदिर है। नारायण सरोवर से 4 किमी दूर कोटेश्वर शिव मंदिर है। नारायण सरोवर में कार्तिक पूर्णिमा से 3 दिन का भव्य मेला आयोजित होता है। इसमें उत्तर भारत के सभी संप्रदायों के साधु-संन्यासी और अन्य भक्त शामिल होते हैं। नारायण सरोवर में श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध भी करते हैं।
पंपा सरोवर (Pampa Sarovar, Hampi) 
मैसूर के पास स्थित पंपा सरोवर एक ऐतिहासिक स्थल है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में पंपा सरोवर स्थित है। पंपा सरोवर के निकट पश्चिम में पर्वत के ऊपर कई जीर्ण-शीर्ण मंदिर दिखाई पड़ते हैं। यहीं पर एक पर्वत है, जहां एक गुफा है जिससे शबरी की गुफा कहा जाता है। कहते हैं इसी गुफा में शबरी ने भगवान राम को बेर खिलाएं थें। माना जाता है कि वास्तव में रामायण में वर्णित विशाल पंपा सरोवर यही है।
बिंदु सरोवर, सिद्धपुर, गुजरात (Bindu Sarovar, Sidhpur, Gujarat)
अहमदाबाद से उत्तर में 130 किमी दूरी पर बसे बिंदु सरोवर को लेकर माना जाता है कि इसी सरोवर के किनारे बैठ कर कर्दम ऋषि ने कई हजार वर्षों तक तपस्या की था। इस बात का वर्णन कई ग्रथों और पुराणों में भी पाया जाता है। साथ ही इस जगह को लेकर कहा जाता है कि यहीं पर भगवान परशुराम ने अपनी मां का श्राद्ध किया था।