Wednesday, 5 April 2017

ब्रिटिश सरकार से किसी भी प्रकार का कोई भी रिश्ता ना रखने और उसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आज ही अर्थात 5 अप्रैल सन 1944 को "आजाद हिंद बैंक " का उदघाटन रंगून में किया गया था.

5 अप्रैल - आज़ाद हिन्द बैंक की स्थापना . जानें क्या और क्यों था ये बैंक ?
ब्रिटिश सरकार से किसी भी प्रकार का कोई भी रिश्ता ना रखने और उसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आज ही अर्थात 5 अप्रैल  सन 1944 को  "आजाद हिंद बैंक " का उदघाटन रंगून में किया गया था. बेहद दूरगामी सोच के नेता जी सुबाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजो से पूर्ण स्वाधीनता के लिए युद्ध किया था. उनकी आर पर की लड़ाई में अंग्रेजों की हर निशानी को मिटा देने का संकल्प शामिल था . उनका उन सिक्को , उन नोटों से भी ब्रिटिश प्रभुता हटाने का संकल्प था जिन पर किसी न किसी ब्रिटिश गवर्नर की या किसी ब्रिटिश अधिकारी की फोटो लगी होती थी . आज़ाद हिन्द बैंक में अपनी खुद के सिक्के , खुद के नोट, खुद के कोर्ट , खुद के सिविल कोड व् खुद का स्टाम्प शामिल था .  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के इन्हें बेहद दूरगामी युद्ध नीति ने अंग्रेजो को बेहद विचलित कर दिया था.  60 हजार के सच्चे योद्धा की फ़ौज ले कर पूरे ब्रिटेन पर भारी पड़ते दिख रहे नेता जी के इस कार्य को भारत में बेहद समर्थन मिल रहा था . इसीलिए अंग्रेजों ने अपनों से ही अपनों को मरवाने की चाल चली और ऐसा कुचक्र चला कि 1947 के बाद भी सुभाष चन्द्र बोस जी को अनवरत प्रताड़ित किया जाता रहा , उतनी प्रताड़ना जितनी शायद अंग्रेजो के काल में भी नहीं थी . और प्रताड़ना का ये दौर उस समय तक चला जब तक वो स्वर्ग नहीं सिधार गए .  ऐसे दूरगामी सोच रखने के लिए पराधीन भारत में हिन्द के नाम से स्थापित "आज़ाद हिन्द बैंक" की स्थापना दिवस की आप सभी भारतीयों को के महान क्रांतिवीर के प्रयासों के स्मरण रखना चाहिए . 

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