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Friday, 14 April 2017

सीता की जन्मस्थली को लेकर केंद्रीय मंत्री के विवादास्पद बयान

सीता की जन्मस्थली को लेकर केंद्रीय मंत्री के विवादास्पद बयान से संत समाज नाराज

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के सीतामढ़ी को लेकर दिए गए बयान से सीतामढ़ी के संत समाज में आक्रोश है. संत समाज ने मंत्री से अपने बयान पर माफी मांगने को कहा नहीं तो दुष्परिणाम की चेतावनी दी है. बिहार के सीतामढ़ी में माता सीता की प्रकट्य स्थली है. सदियों से ये मान्यता चली आ रही है कि मिथिला के राजा जनक ने भयंकर सूखे चपेट में आए राज्य में वर्षा के लिए जब हल चलाया तो सीतामढ़ी के निकट पुनौरा धरती से माता सीता का जन्म हुआ. वाल्मीकि रामायण में भी ये चर्चा की गई है कि मिथिला में माता सीता का जन्म हुआ था.
लेकिन केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने राज्यसभा में जो जवाब दिया उससे पूरा संत समाज आंदोलित हो उठा है. संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने राज्यसभा में कहा कि सीतामढ़ी बस आस्था और विश्वास का केंद्र है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वहां ऐसा कोई प्रमाण नहीं पाया है जिसकी वजह से सीतामढ़ी को सीता की जन्मस्थली माना जाए. महेश शर्मा मध्य प्रदेश के बीजेपी सांसद प्रभात झा के सवाल का जवाब दे रहे थे. प्रभात झा सीतामढ़ी के मूल निवासी है.
केंद्रीय मंत्री के इस बयान से केवल सीतामढ़ी ही नहीं बल्कि नेपाल में स्थित जनकपुर में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है. सीतामढ़ी के संत समाज ने तो आंदोलन की चेतावनी दी है. उनकी मांग है कि मंत्री अपने बयान के लिए माफी मांगें. इसके लिए संत समाज की शुक्रवार को सीतामढ़ी के जानकी मंदिर में एक आपात बैठक आयोजित की गई. बैठक में शामिल संतों ने मंत्री की आध्यात्मिक जानकारी पर प्रश्न उठाते हुए उनकी मानसिक स्थिति पर भी सवाल खड़ा किया.
मंदिर के पुजारी त्रिलोकी दास ने कहा कि सीतामढ़ी में त्रेयता युग में माता सीता के जन्म का प्रमाण है, जब राक्षसों के अत्याचार से 12 वर्षों तक भयानक सूखे के बाद राजा जनक के द्वारा हल जोतने के दौरान संतों के रक्त से भरे घड़े से माता सीता प्रकट हुई. ऐसे में सीता के जन्म पर सवाल उठाने वाले मंत्री जी राम को मानते हैं सीता को नहीं? इसका सीतामढ़ी का संत समाज कड़ा विरोध करता है और मंत्री जी को अविलंब माफी मांगनी चाहिए, इतना ही नहीं नारद मुनि के आवाह्न पर सीता की प्राकट्य स्थली का नाम सीतामढ़ी रखा गया. इसके प्रमाण पौराणिक ग्रंथों में भी है.
महेश शर्मा बीजेपी के सांसद है. उनकी पार्टी अयोध्या को राम की जन्म भूमि मानती है पर सीता की जन्मस्थली पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. हालांकि ये सही है कि अयोध्या में श्री राम का जन्म हुआ है इसका प्रमाण पुरात्व विभाग को मिला है. लेकिन सीता माता की जन्मस्थली के लिए उस स्तर पर शोध नहीं किया गया तो फिर प्रामाणिकता का क्या सवाल है. रही बात पौराणिक ग्रंथों में तो इसकी चर्चा जरूर मिलती है. और सबसे बड़ी बात अगर सीतामढ़ी में माता सीता का जन्म नहीं हुआ है तो फिर नेपाल में स्थित जनकपुर की क्या प्रामाणिकता है.
जबकि उस समय के मिथिला राज्य में गंगा से उतर स्थित भूभाग को मिथिला का सीमा माना गया है. साथ ही सरयू नदी से लगे क्षेत्रों मे रामायण काल की हुई घटनाओं का जिक्र है. चाहे वो अहिल्या स्थान हो पुनौरा धाम हलेश्वर स्थान पंथ पाकर धनुषा व जनकपुर ये सभी स्थान एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. पौराणिक ग्रंथों में इसकी चर्चा है कि सूखे से जल रही धरती पर वर्षा कराने के आहवान के साथ राजा जनक ने जनकपुर से कुछ दुरी पर हल चलाया था. सीतामढ़ी के पुनौराधाम से जनकपुर की दूरी कोई बहुत ज्यादा नहीं है.
हर साल विवाह पंचमी के अवसर पर अयोध्या से श्रीराम की बारात जनकपुर जाता है. तो क्या ये बिना किसी प्रमाण के ये आयोजन सदियों से चल रहा है. जिन धर्मग्रंथों में राम अयोध्या जनकपुर और लंका का जिक्र है उन्हीं में सीता और उनकी जन्मभूमि मिथिला का भी जिक्र है. उन्हीं धर्मग्रंथों से सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मस्थली माना है.

दुबई के एक गुरुद्वारे ने 101 देशों के अधिकतम लोगों को मुफ्त में नाश्ता कराकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है.

दुबई में गुरुद्वारे ने 101 देशों के लोगों को नाश्ता कराकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

दुबई के एक गुरुद्वारे ने 101 देशों के अधिकतम लोगों को मुफ्त में नाश्ता कराकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. दुबई के जेबेल अली स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार में घंटे भर के कार्यक्रम में 101 देशों के 600 लोगों के लिए नाश्ता परोसा गया. इसके लिए गुरुद्वारे का नाम गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया. इस बाबत आयोजित कार्यक्रम का नाम 'विविधता के लिए नाश्ता' रखा गया था.
खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूली बच्चों, सरकारी अधिकारियों और राजनयिकों ने इस समारोह में भाग लिया. कार्यक्रम में संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत नवदीप सिंह सूरी मुख्य अतिथि थे. शहर के विभिन्न भागों से लोग जेबेल अली गार्डन में जमा हुए और नाश्ते के लिए लगाया गया तंबू पूरी तरह से लोगों से भर गया.
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों ने पुष्टि की कि गुरुद्वारा ने 2015 में इटली के मिलान एक्सपो में नुटेला द्वारा आयोजित 55 देशों के लोगों के नाश्ते करने के पहले के रिकॉर्ड को तोड़ा है. गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार के अध्यक्ष सुरेंद्र कंधारी ने कहा, "सिख धर्म ने हमेशा से विविधता को गले लगाया है, क्योंकि यह हमारे विश्वास और धर्म का हिस्सा है. हम सभी मानव हैं और सबका सम्मान किया जाना चाहिए."

Wednesday, 12 April 2017

1984 कांग्रेस ही है असली कसूरवार

फुल्का का बयान, 84 दंगों के दौरान हिंदूओं ने बचाई थी सिखों की जान, कांग्रेस ही है असली कसूरवार

1984 के सिख दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्टलड़ाई लड़ रहे पंजाब के आप विधायक और विपक्ष नेता एच.एस. फूलका ने ओन्टारियो विधानसभा में पारित उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें  सिख विरोधी दंगों को सिख नरसंहार माना गया है। फूलका ने कहा कि हिंदुओं ने सिखों को नहीं मारा। बल्कि यह तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा सिखों के खिलाफ चली गई चाल थी।
यही कारण है कि दंगा सिखों-हिंदूओं के बीच नहीं। कांग्रेस और सिखों के बीच हुआ था। इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि दंगों के दौरान उन्हें तथा उनके परिवार की रक्षा हिंदु मकान मालिक ने ही की थी। इसके बाद उन्हें सुरक्षित पंजाब भेज दिया गया।अगर उनके मकान मालिक उनकी मदद न करते तो आज वह तथा उनका परिवार जीवित नहीं होता।  हिंदूओ ने कई सिख  परिवारो की जान बचाई थी। उस समय कांग्रेस सरकार ने तो बहुत कोशिश की थी कि कोई भी सिख परिवार बच न पाए।फूलका ने कहा कि इस नरसंहार मानकर के लिए जिम्मेदार आरोपियों को कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए।उल्लेखनीय है कि  कनाडा के ओंटारियो प्रांत की विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर भारत में 1984 में हुए दंगों को आधिकारिक तौर पर सिख नरसंहार माना है।

Tuesday, 11 April 2017

दरअसल, पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर हिंदी और उर्दू में बंगाल, इंग्लिश में बेंगाल और बांग्ला भाषा में 'बांग्ला' पुकारे जाने का प्रस्ताव है. ममता का मानना था कि, जब पूर्वी पाकिस्तान नहीं रहा, वह बांग्लादेश हो गया, ऐसे में विभाजन के वक़्त को हम क्यों याद करें.

पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बंगाल' करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की विधानसभा से पास करवाकर केंद्र को भेज चुकीं हैं,
पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बंगाल' करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की विधानसभा से पास करवाकर केंद्र को भेज चुकीं हैं, लेकिन केंद्र ने अब तक उस पर कोई फैसला नहीं किया है. इससे मुख्यमंत्री ममता नाराज़ हैं.
दरअसल, पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर हिंदी और उर्दू में बंगाल, इंग्लिश में बेंगाल और बांग्ला भाषा में 'बांग्ला' पुकारे जाने का प्रस्ताव है. ममता का मानना था कि, जब पूर्वी पाकिस्तान नहीं रहा, वह बांग्लादेश हो गया, ऐसे में विभाजन के वक़्त को हम क्यों याद करें.लेकिन केंद्र ने इस प्रस्ताव पर कुछ सवाल उठाये हैं, जैसे बांग्ला भाषा में प्रदेश का नाम भी 'बांग्ला' होगा, जिस पर कुछ को ऐतराज है. साथ ही एक प्रदेश के तीन नाम पर भी सवाल हैं. इसी के चलते मामला अटका हुआ है. इससे ममता खासी नाखुश हैं, इस बावत बंगाल सरकार ने गृह मंत्रालय को खत भी लिखा है. इस मसले पर तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर का कहना है कि, विभाजन का वक़्त गया, पूर्वी पाकिस्तान ख़त्म हो गया, फिर नाम बदलने में देरी क्यों?वहीं इस मामले में बीजेपी के पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं कि विधानसभा से जो प्रस्ताव आया है, वह सर्वसम्मति से नहीं बल्कि बहुमत से आया है, इसलिए जल्दबाज़ी में फैसला नहीं किया जा सकता. साथ ही इस मुद्दे पर राज्य में दो राय हैं.वैसे इस मसले पर ममता से विपक्षी चुटकी भी ले रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी कहते हैं कि, राज्यों की होने वाली बैठकों में मुख्यमंत्री के बोलने का नंबर अंग्रेजी वर्णमाला के west bengal के w के चलते बाद में आता था, उनको इंतज़ार करना पड़ता था, इसलिए तुगलकी अंदाज़ में उन्होंने ये फैसला कर लिया. ये होना चाहिए, लेकिन सभी दलों के साथ ही समाज के अहम लोगों और बुद्धिजीवी वर्ग से विचार करके माहौल तैयार करके आगे बढ़ना चाहिए था. कुल मिलाकर एक और मुद्दे पर ममता और केंद्र आमने सामने आ गये हैं.

इस बार सरकार ने राज्य में इतिहास की किताबों में तृणमूल कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा नेताओं के नाम जोड़ने का फैसला किया है.

EXCLUSIVE: पश्चिम बंगाल में बच्चे पढ़ेंगे ममता बनर्जी और TMC नेताओं पर चैप्टर

स्कूल पाठ्यपुस्तकों से भगवान राम के संदर्भ को हटाने के फैसले के बाद ममता बनर्जी सरकार ने एक और विवादित कदम उठाया है. इस बार सरकार ने राज्य में इतिहास की किताबों में तृणमूल कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा नेताओं के नाम जोड़ने का फैसला किया है.पास पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की ओर से तैयार नई पाठ्यपुस्तक की ड्राफ्ट कॉपी है जिसमें सिंगुर जमीन आंदोलन पर अध्याय जोड़ा गया है. बता दें कि इसी आंदोलन की वजह से ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की मुहिम को तेजी मिली थी. 'अतीत ओ एत्झयो' नाम की ये पाठ्यपुस्तक कक्षा आठ के लिए प्रकाशित की जा रही है. इसे अगले शैक्षणिक सत्र से पढ़ाया जाएगा. 
सिंगुर संबंधी अध्याय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद के संदर्भ से शुरू होता है. फिर इसमें तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं- पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय, पुर्णेंदु बासु, अशिमा पात्रा, डोला सेन, बृत्या बासु, अर्पिता घोष, सोवन चटर्जी, फिरहद हकीम, सोवनदेब चटर्जी, सुब्रता बक्शी, रबिंद्रनाथ भट्टाचार्जी, बेचाराम मन्ना आदि के भी नाम आते हैं.
अध्याय में सिंगुर आंदोलन को 'ऐतिहासिक' बताते हुए ममता बनर्जी को ऐसा नेता बताया गया है जिन्होंने जमीन अधिगृहण विरोधी आंदोलन को संगठित किया और किसानों के संघर्ष को दिशा दी. अध्याय में कहा गया है कि आंदोलन ने बहुफसली जमीन पर लखटकिया कार प्रोजेक्ट के लिए फैक्ट्री स्थापित करने की खराब कोशिश को रोक दिया जिसके पीछे विकास के लिए औद्योगिकरण और रोजगार सृजन का नाम लिया जा रहा था.
राज्य सरकार की ओर से पाठ्यपुस्तकों को रिडिजाइन करने के लिए जिम्मेदार एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन अवीक मजूमदार ने इस कदम को सही ठहराया है. मजूमदार ने कहा, 'अगर उन्होंने आंदोलन की अगुआई की है तो ये वैधानिक है कि उन्हें शामिल किया जाए. क्या हम किसी को इसलिए शामिल नहीं करें कि वो एक राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं.'
मजूमदार के मुताबिक पाठ्यक्रम कमेटी ने ये संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की है कि पुराने जमीन आंदोलनों को भी बनाए रखा जाए. इस संबंध में मजूमदार ने तेभागा आंदोलन का नाम गिनाया. मजूमदार के मुताबिक सिंगुर को भारत के अन्य जमीन आंदोलनों की कड़ी मे शामिल किया गया है. इस आंदोलन के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आया जिसने शताब्दी पुरानी जमीन अधिगृहण व्यवस्था को बदल दिया.
बीते साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की पूर्व लेफ्ट फ्रंट सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया था जिसमें टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिगृहीत की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसे किसानों को जमीन वापस करने का आदेश भी दिया था जिन्होंने प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए अपनी जमीन नहीं देने की इच्छा जताई थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ममता बनर्जी के लिए ऐतिहासिक राजनीतिक जीत बताया गया था. बीते साल आने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से ममता बनर्जी सरकार को सिंगुर अध्याय को पाठ्यक्रम से जोड़ने का विचार आया था. यहां ये बताना दिलचस्प होगा कि राजस्थान में वसुंधरा राजे की अगुआई वाली बीजेपी सरकार ने भी हाल में ऐसा ही फैसला किया. वसुंधरा राजे सरकार ने 12वीं कक्षा की अर्थशास्त्र की पुस्तक में नोट बंदी और कैशलेस अर्थव्यवस्था पर चैप्टर जोड़ने का फैसला किया. इसे अगले शैक्षणिक सत्र से पढ़ाया जाएगा.

पुलिस का लाठीचार्ज मंगलवार की सुबह हिंदू जागरण मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता 'जय श्री राम' के नारों के साथ सड़कों पर उतर आए. हालांकि पुलिस ने उन्हें जुलूस की इजाजत नहीं दी थी.

बंगाल के बीरभूम में हनुमान जयंती के जुलूस पर लाठीचार्ज, इलाके में सुरक्षा कड़ी

पुलिस का लाठीचार्ज
मंगलवार की सुबह हिंदू जागरण मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता 'जय श्री राम' के नारों के साथ सड़कों पर उतर आए. हालांकि पुलिस ने उन्हें जुलूस की इजाजत नहीं दी थी. सूरी के बस स्टैंड के पास पुलिसकर्मियों ने जुलूस को रोका तो दोनों ओर से बहस होने लगी. थोड़ी ही देर में नौबत हाथापाई तक पहुंच गई. इसके बाद पुलिस को गुस्साए कार्यकर्ताओं को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. झड़प के बाद इलाके में रेपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है. करीब 10 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है.
ममता पर निशाना 
इससे पहले बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस मामले में तानाशाही रवैये का आरोप लगाया था. राज्य के दौरे पर आए किरन रिजिजू ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधने के लिए कर रही हैं. दूसरी ओर, ममता बनर्जी का कहना है कि बीजेपी और आरएसएस राज्य के सांप्रदायिक सौहार्द को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं.

पाक में फांसी की सजा तक, पढ़ें कुलभूषण की पूरी कहानी

नेवी की नौकरी से पाक में फांसी की सजा तक, पढ़ें कुलभूषण की पूरी कहानी

पाकिस्तान में भारतीय जासूस होने के आरोप में मार्च 2016 में गिरफ्तार हुए कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई गई है. पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के मुताबिक फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने जाधव को मौत की सजा सुनाई और पाक आर्मी चीफ ने इसकी पुष्टि भी कर दी यानी जाधव को 90 दिन के भीतर फांसी की सजा दी जानी है.
आईएसपीआर ने पिछले साल एक वीडियो जारी किया था जिसे उसने जाधव का कबूलनामा बताया था. जाधव को इसी कबूलनामे के आधार पर पाक उसे भारतीय जासूस बता रहा है जबकि भारत ने साफ कर दिया है कि जाधव नौसेना में जरूर था लेकिन वो ये नौकरी छोड़कर ईरान से व्यापार करने लगा था और पाक एजेंसियों ने उसका वहीं से अपहरण किया है.
कुलभूषण के कबूलनामे की पाक की कहानी 
पाक का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना में सेवारत अफसर है और कमांडर है. वो नौसेना के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से है और उसका कवर नाम हुसैन मुबारक पटेल था जो उसने भारतीय एजेंसियों के लिए खुफिया जानकारियां जुटाने के लिए अपनाया था. पाक का दावा है कि कुलभूषण ने 1987 में नेशनल डिफेंस अकेडमी जॉइन की और उसके बाद जनवरी 1991 में उसने इंडियन नेवी में नौकरी शुरू की. दिसंबर 2001 में जब संसद पर हमला हुआ तो कुलभूषण ने अपनी सेवाएं खुफिया सूचनाएं जुटाने के लिए देना शुरू कर दीं. पाक दावा कर रहा है कि कुलभूषण मुंबई में रहता है और अब भी वह नौसेना में सेवारत अफसर है जो 2022 तक रिटायर होगा.
जाधव ने लिया था रॉ के ज्वाइंट सेक्रेटरी का नाम
पाक का कहना है कि जाधव ने ईरान के चाबाहार में एक छोटा बिजनेस शुरू किया था वो इसी मकसद से किया गया था ताकि वो भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम कर सके. जाधव 2003 और 2004 में रॉ के मिशन को पूरा करने के लिए कराची भी आया था. पाक ने जो कबूलनामा जारी किया है उसके मुताबिक जाधव 2013 में रॉ द्वारा चुना गया और तब से वो बलूचिस्तान और कराची में एजेंसी से लिए कई मिशन पूरे कर चुका है. वीडियो में जाधव कहता दिख रहा है कि वो रॉ में संयुक्त सचिव अनिल कुमार गुप्ता को सीधे रिपोर्ट करता है और गुप्ता के पाक खासकर बलूचिस्तान छात्र संगठन में अच्छे कॉन्ट्रैक्ट हैं.
ईरान से पाक में घुसते वक्त गिरफ्तार हुआ
वीडियो में कुलभूषण के हवाले से कहा जा रहा है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ बलूच आंदोलन को फाइनेंस कर रही है और इन आंदोलनकारियों की मदद से पाकिस्तान में देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रही है जिससे पाकिस्तानी नागरिकों की जानमाल का नुकसान हो रहा है. कुलभूषण ने इस कथित कबूलनामे में अपने पकड़े जाने की भी कहानी बताई. उसने कहा कि वो 3 मार्च 2016 को सरावान सीमा से ईरान से पाक में घुसने की कोशिश कर रहा था तभी पाक अथॉरिटीज ने उसे पकड़ लिया. उसने बताया कि वो बलूचिस्तान के अलगाववादियों के साथ मीटिंग करने और उन्हें भारतीय एजेंसियों के संदेश पहुंचाने के लिए पाकिस्तान आ रहा था. इस वीडियो में कुलभूषण खुद को रॉ का जासूस बता रहा है लेकिन पाक एजेंसियों की जमकर तारीफ कर रहा है कि उन्होंने उसके साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया और उसके साथ बर्ताव में उसे उचित सम्मान दिया.
सरताज अजीज ने माना था, जाधव के खिलाफ सबूत नहीं
दिसंबर में ही खबर आई थी कि पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने एक मीटिंग में माना था कि कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाक सरकार और एजेंसियों के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं. पाकिस्तानी टीवी चैनल जिओ न्यूज ने खबर दी थी कि अजीज ने सीनेट चैंबर में सांसदों को ब्रीफ करते हुए साफ कहा कि जाधव ने कबूलनामे के अलावा उसके खिलाफ हमारे पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है. अजीज ने ये भी कहा था कि भारत को दिए जाने वाले डोजियर में जो सबूत हमने रखे हैं, वो काफी नहीं हैं. अब एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वो जाधव के खिलाफ सबूत जुटाने में कितना वक्त लगाती हैं.
कबूलनामे पर उठ चुके हैं सवाल
पाक ने जाधव के कबूलनामे का जो वीडियो जारी किया है उसपर भी एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाए हैं. तकरीबन छह मिनट के इस वीडियो में कई कट हैं. वीडियो को देखकर कई जगह ऐसा लगता है कि कुलभूषण अपनी मर्जी से कुछ बोलने की बजाय सामने टेलीप्रिंटर पर लिखा कुछ पढ़ रहा है. इसीलिए कुलभूषण का वो वीडियो कबूलनामा नहीं बल्कि दबाव डालकर दिलवाया गया बयान ज्यादा साबित हुआ है. हालांकि पाक इस मुद्दे पर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है. भारत ने कई बार पाकिस्तान से कुलभूषण से मिलने देने की अपील की है लेकिन पाकिस्तान ने इसकी इजाजत भारतीय एजेंसियों को नहीं दी.
नेवी में था कुलभूषण, मुंबई में रहने की बात सही
भारत ने कुलभूषण जाधव के भारतीय नागरिक होने या फिर नेवी में नौकरी करने पर कोई सवाल नहीं उठाया लेकिन उसका कहना है कि जाधव नेवी की नौकरी छोड़ने के बाद ईरान में अपना बिजनेस शुरू कर चुका है जिसके उसके पास वैध दस्तावेज हैं. कुलभूषण जाधव ने वीडियो में खुद को मुंबई का निवासी बताया था. बताया जाता है कि उसे 2014 में ही एक पासपोर्ट मुंबई के ठाणे से इश्यू हुआ था. जिसमें ओल्ड मुंबई-पुणे रोड का एक पता दर्ज है. बताया जाता है कि यहां के एक कॉप्लेक्स के जिस फ्लैट में जाधव रहता था वो उसकी मां के नाम रजिस्टर्ड है.

कुलभूषण को किसी भी कीमत पर बचाएंगे, जाएंगे अंतरराष्ट्रीय कोर्ट

राजनाथ बोले- कुलभूषण को किसी भी कीमत पर बचाएंगे, जाएंगे अंतरराष्ट्रीय कोर्ट

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाए जाने पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत सरकार उन्हें किसी भी कीमत पर बचाएगी. राजनाथ सिंह ने कहा कि कुलभूषण के मसले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाएंगे. इसके लिए पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का दबाव बनाया जाएगा.
'लोकमत' के कार्यक्रम में गृह मंत्री ने कहा कि कुलभूषण को पाकिस्तानी एजेंसियों द्वारा अगवा किया गया और गिरफ्तार दिखाया गया. अगर वह जासूस होता तो उसके साथ वैध भारतीय पासपोर्ट नहीं होता. हम निंदा करते हैं कि पाकिस्तान ने पूर्व नियोजित हत्या की साजिश की है.
जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाए जाने पर भारत ने पाकिस्तान को आगाह किया है कि इसके दुरगामी परिणाम होंगे. इसके अलावा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में स्पष्ट रूप से कहा था कि जाधव को बचाने के लिए सरकार 'परिपाटी से हटकर' कदम उठाएगी.
कर सकते हैं अपील 
इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के ताजा बयान के मुताबिक कुलभूषण जाधव चाहें तो अपनी फांसी की सजा के खिलाफ अपील कर सकते हैं. जाधव के लिए अपील दायर करने की यह मियाद 60 वर्किंग दिन की है. वे चाहें तो इस दौरान अपनी फांसी के खिलाफ एक बार फिर अदालत जा सकते हैं.
पाक की सफाई 
जाधव मामले पर पाकिस्तान ने सफाई देते हुए यह भी कहा कि जाधव के केस में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान की संसद में यह बयान दिया है.

Monday, 10 April 2017

ITBP अगले महीने इटली से एक ऐसी गाड़ी खरीद रहा है जो जल, थल और दलदल में चल सकता है.

भारत-चीन सीमा पर ड्रैगन से टक्कर लेगा ITBP का 'कैटरपिलर'

चाहे बर्फीला रेगिस्तान हो या फिर पहाड़ी इलाकों की बड़ी-बड़ी झीलें, जल-थल और दलदल में चलने वाला कैटरपिलर अब ITBP के जवानों का एक हिस्सा बनने जा रहा है. ITBP अगले महीने इटली से एक ऐसी गाड़ी खरीद रहा है जो जल, थल और दलदल में चल सकता है.
एम्फीबियन किस्म की ये गाड़ी 9 लाख की कीमत में इटली से खरीदी जा रही है. जिसको शुरूआती दौर में भारत-चीन सीमा के लद्दाख इलाके में रखा जाएगा. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 2 गाड़ियां ITBP इटली से खरीद रहा है. बाद में इस प्रोजेक्ट में सफलता मिलने पर चीन सीमा के लिए और भी ऐसी गाड़ियां खरीदी जाएंगी.
आपको बता दें कि ITBP ने अपने आधुनिकीकरण के लिए इससे पहले चीन सीमा के लिए बर्फ पर चलने वाले स्नो स्कूटर खरीदा था. ये स्नो स्कूटर चीनी सेना पर कड़ी नजर तो रख सकते हैं. साथ ही सीमा की निगरानी भी करेंगे. इन स्नो स्कूटरों को लद्दाख, उत्तराखंड और सिक्किम में अत्यंत ऊंचाई वाले सीमा ठिकानों पर तैनात किया गया है. इससे सीमा की दूसरी तरफ चीनी सेना की तैनाती पर नजर रखी जा सकेगी.
अमेरिका की एक कंपनी से प्राप्त ये पांच शक्तिशाली स्कूटर लद्दाख, उत्तराखंड और सिक्किम में ऊंचे स्थानों पर सीमा पर ले जाए गए हैं. जहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) तैनात रहती है. गृह मंत्रालय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक करोड़ की कीमत वाले इन आधुनिक स्कूटरों में राइफल और गोला-बारूद के साथ चालक और उसके पीछे एक जवान बैठ सकता है और ये पहाड़ी पर 45 डिग्री की ढलान पर चढ़ सकते हैं. साथ ही इनमें बर्फ पर सुगमता से चलने वाली 278 किलोग्राम वजनी मशीन है जो चेनकेस बेल्टों के सहारे चलती है.
ITBP के जवानों के फास्ट मूवमेंट के लिए हाल ही में एसयूवी कारों को हिमालय की दुर्गम और उंचाई वाली पहाड़ियों पर तैनात किया गया है. जुलाई 2016 में 29 हाई-पावर स्कोर्पियो गाड़ियों को राजधानी दिल्ली सेचीन सीमा के लिए रवाना किया गया था. ITBP के मुताबिक भेजी गई 29 गाड़ियों में से 10 को लद्दाख, 06 को हिमाचल प्रदेश, 05 उत्तराखंड, 02 सिक्किम और 06 को अरूणाचल प्रदेश में चीनी सीमा पर तैनात किया जा चुका है.

आजम खान को झटका, जौहर यूनिवर्सिटी से लाखों की मूर्ति चोरी

आजम खान को झटका, जौहर यूनिवर्सिटी से लाखों की मूर्ति चोरी

समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान सत्ता से बेशक बाहर हो गए हों, लेकिन उनका नाम हमेशा सुर्खियों में बना रहता है. किसी वक्त उनकी भैंस चोरी होने का मामला बहुत चर्चा में रहा था. उस वक्त वो सत्ता में थे. अब आजम द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से लाखों रुपये की मूर्ति चोरी होने का मामला सामने आया है.
अष्टधातु की बनी ये मूर्ति यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी के गेट से चोरी हुई. चोरी की इस घटना के बाद से रामपुर में खलबली मची हुई है. बताया जा रहा है कि रविवार की रात को ये चोरी हुई. यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारी अकबर मसूद ने इस मामले में अजीमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. इसके बाद से हरकत में आई पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
पुलिस सर्किल ऑफिसर (सीओ सिटी) दिनेश कुमार शुक्ला ने यूनिवर्सिटी से मूर्ति चोरी होने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस मामले में टीम गठित की गई है और जल्दी ही खुलासा हो जाएगा. सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. जल्द ही अभियुक्त पकड़ में होंगे. बताया जा रहा है कि लाइब्रेरी के गेट पर दो दरबान की मूर्तियां रखी हुई थीं जिनमें से एक चुरा ली गई.
बताते चलें कि 1 जनवरी 2014 को रामपुर में पसियापुरा स्थित डेयरी फार्म से आजम खां की सात भैंसें चोरी हो गई थीं. महज 24 घंटे बाद एक फरवरी की रात को पुलिस ने भैंसें बरामद कर ली थीं. पुलिस इस मामले में कई लोगों को जेल भेज चुकी है. भैंस चोरी की इसी घटना में मोस्ट वांटेड अपराधी छुन्नन ने अंजाम दिया था, जिसे दो साल बाद पकड़ा गया था.

राम भक्त हनुमानजी के जन्मोत्सव के पावन पर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई व शुभकामना

मंगल को जन्मे मंगल ही करते,
मंगलमय हनुमान,,जय हनुमान जय हनुमान जय जय जय जय जय हनुमान


आज पूर्णिमा का व्रत हे क्योकि पूर्णिमा आज सुबह 10 :22 पर आएगी।कल श्री हनुमान जी का जन्म दिवस है जिसे हनुमान जन्मोत्सव कहा जाता है।श्री हनुमान जी अजर अमर है कलियुग में ये ही सकंट से दूर करते हे।जहाँ जहाँ श्री राम जी की कथा या सत्संग होता है वहाँ श्री हनुमान जी अवश्य आते है चाहे वे किसी भी रूप में रहें।आज की रात जागरण की रात हे जिनके शत्रु पीड़ा या फिर कोई राजकीय परेशानी चल रही है तो आज रात्रि में हनुमान अष्टक का पाठ करते हुए जायफल की आहुति देवें।आप सभी जानते है कि श्री हनुमान जी कार्य तो करते हे लेकिन उनको कहना पड़ता है हे प्रभु आप सब कार्य करने में सक्षम हो में भी आपका भक्त हूँ मेरा भी एक छोटा सा काम है (अपना कार्य या मनोकामना बोले) उसे आप ही कर सकते हे आप अवश्य करें।ऐसा कहने से श्री हनुमान जी अवशय ही आपके रुके हुए कार्य करते हे।कल अगर आप 108 लॉग की माला बनाकर श्री हनुमान जी पहनाए तो श्री हनुमान जी के आशीर्वाद से 9 ग्रह भी आपको पीड़ा नही दे पाते है।कल अगर कोई एक श्री फल(नारियल) और गुड़ श्री हनुमान जी को अर्पण करें तो यश कीर्ति तो मिलती है धन सम्बधित कार्य भी पूर्ण होते है।कल तुलसी के पत्तो पर राम राम लिखकर उसकी माला श्री हनुमान जी पहनावें तो साधक को सिद्धि और कष्ट से छुटकारा मिलता है। दक्षिण मुखी हनुमान जी का सिंदूर का तिलक विजय दिलवाता हे।जिनके मुख्य दरवाजा दक्षिण दिशा में हो वे श्री हनुमान का चित्र लगावे और सिंदूर का तिलक लगावें।श्री हनुमान जी को एक लड्डू में एक लॉग लगाकर भोग लगा ने से आया हुआ संकट दूर होता है।जो श्री हनुमान जी के साधक हे वे पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करें ।

Sunday, 9 April 2017

RBI ने कहा- दस के सभी सिक्के वैध, नहीं लेने पर दर्ज होगा राजद्रोह का मामला

RBI ने कहा- दस के सभी सिक्के वैध, नहीं लेने पर दर्ज होगा राजद्रोह का मामला

देश में दस रुपये के विभिन्न प्रकार के सिक्कों पर जनता के बीच भ्रम की स्थिति को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सिक्का अमान्य नहीं है और सभी सिक्के चलन में हैं. ये समय-समय पर जारी किए गए अलग अलग डिजाइनों के सिक्के हैं. बैंक का कहना है कि शेरावाली की फोटो वाला सिक्का, संसद की तस्वीर वाला सिक्का, बीच में संख्या में 10 लिखा हुआ सिक्का, होमी भाभा की तस्वीर वाला सिक्का, महात्मा गांधी की तस्वीर वाला सिक्का सहित अन्य सभी सिक्के मान्य हैं. केंद्रीय बैंक के अनुसार इन सिक्कों को विभिन्न विशेष मौकों पर जारी किया गया है.
उल्लेखनीय है कि दस रुपये के सिक्कों के लेनदेन को लेकर लोगों के बीच अक्सर विवाद खड़ा हो जाता है. ज्यादातर लोगों का कहना है कि दस पत्ती वाला वहीं सिक्का मान्य है जिसमें 10 का अंक नीचे की तरफ लिखा है और दूसरी तरफ शेर का अशोक स्तंभ अंकित है. केंद्रीय बैंक के एक अधिकारी ने इस संबंध में भाषा से बातचीत में स्पष्ट किया गया कि दस रुपये के सभी सिक्के वैध हैं.
कॉरपोरेट मामलों के वकील शुजा ज़मीर ने कहा 'भारत की वैध मुद्रा को लेने से इनकार करने पर राजद्रोह का मामला बनता है और जो ऐसा करता है उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (1) के तहत मामला दर्ज हो सकता है क्योंकि मुद्रा पर भारत सरकार वचन देती है, इसको लेने से इनकार करना राजद्रोह है.' राष्ट्रीय राजधानी सहित देश के कई हिस्सों में दस रूपये के सिक्को को लेकर भ्रम की स्थिति है और कई दुकानदार और लोग इन सिक्कों को लेने से कतरा रहे हैं.
सबसे ज्यादा विवाद उस सिक्के पर है जिसके बीच में 10 लिखा है और इसे नकली कहा जा रहा है. लेकिन आरबीआई की ओर से भाषा को भेजे एक ईमेल में जानकारी दी गयी है कि यह सिक्का 26 मार्च 2009 को जारी किया गया था. आरबीआई ने कहा है कि केंद्रीय बैंक ने वक्त वक्त पर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक थीम पर सिक्के जारी किए हैं और सिक्कों में 2011 में रुपये का चिन्ह शामिल करने के बाद बदलाव आया.
सिक्के लंबे समय तक सही रहते हैं इसलिए यह मुमकिन है कि बाजार में अलग-अलग डिजाइन और छवि के सिक्के हों, जिनमें बिना रुपये के चिन्ह वाले सिक्के भी शामिल हैं. हालांकि आरबीआई ने किसी का भी लीगल टेंडर वापस नहीं लिया है और सारे सिक्के वैध हैं.

अलवर हमले के बाद आज़म ने वापस भेजी शंकराचार्य की गाय, कहा- गोरक्षकों से डर

सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने रविवार को गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद महाराज से उपहार में मिली गाय लौटा दी. 
सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने रविवार को गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद महाराज से उपहार में मिली गाय लौटा दी. उन्होंने यह कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए कोई भी स्वयंभू गौरक्षक गाय की हत्या कर सकता है.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री ने हिंदू संत को लिखे एक पत्र में कहा, मुस्लिम असुरक्षा के माहौल में रह रहे हैं... कोई भी स्वयंभू गौरक्षक मुझे या मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने के लिए उसे नुकसान पहुंचा सकता है या फिर इस खूबसूरत और लाभकारी गाय की हत्या भी कर सकता है.
आजम खान का कहना है कि राजस्थान के अलवर में गाय पालने के लिए ले जा रहे मुस्लिमों पर स्वयंभू गोरक्षकों ने हमला कर दिया. बेरहमी से की गई पिटाई से पहलू खान की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि यह हमला मुस्लिमों के लिए संदेश है कि वह गाय न पालें.
बता दें कि हिंदू संत ने अक्टूबर 2015 में तब खान को काले रंग की यह गाय गिफ्ट की थी, जब उन्होंने अपनी डेयरी में एक गाय रखने की इच्छा जतायी थी. तभी से यह गाय और उसका बछड़ा आजम खान के तबेले में पल रही थी.
सपा नेता ने शंकराचार्य से कहा कि उन्होंने गाय का अच्छी तरह से पालन-पोषण किया और गाय को उसकी सुरक्षा के मद्देनजर लौटाया जा रहा है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि गाय को दोपहर में संत को सुरक्षित भेज दिया गया.
खान ने आरोप लगाया कि देश में मुस्लिमों के खिलाफ एक कुटिल दुष्प्रचार शुरू किया गया है और उनकी हालत दासों से भी बदतर हो गई है. उन्होंने राज्य सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा वीवीआईपी को मांस का सेवन करने की इजाजत है. लेकिन आम लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और यहां तक कि उनका सफाया कर दिया जा रहा है.