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Saturday, 25 February 2017

पाकिस्तानी कलाकारों को वापस भारत बुलाने की तयारी कर रहे है निर्देशक महेश भट्ट

पाकिस्तानी कलाकारों को वापस भारत बुलाने की तयारी कर रहे है निर्देशक महेश भट्ट
पाकिस्तानी करते है भारतीय सैनिकोंपर वार फिर क्यों हम जताते है उनपर प्यार


वर्ष २०१६ में उरी हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी कलाकारों के काम करने पर लगे प्रतिबंध का कई कलाकार और निदेशक ने विरोध किया था, हालांकि करण जौहर निर्देशित फिल्म ऐ दिल है मुश्किल में पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान नजर आए। उनके फिल्म में कास्ट किए जाने को लेकर भी काफी विवाद हुआ। परंतु आगे से अपनी फिल्मों में किसी भी पाकिस्तानी अभिनेता को कास्ट नहीं करेंगे, करण जौहर के इस विश्वास पर फिल्म को महाराष्ट्र में प्रदर्शित किए जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद राहुल ढोलकिया निर्देशित फिल्म रईस में भी शाहरुख खान के साथ पाकिस्तानी कलाकार माहिरा खान को साइन किया गया। यह फिल्म २०१७ में प्रदर्शित हुई, परंतु इसकी रिलीज से पहले भी काफी विवाद हुआ।

बता दे कि, निर्देशक महेश भट्ट पाकिस्तानी कलाकारों को वापस भारत बुलाने की शुरुआत करने जा रहे हैं। अंग्रेजी मनोरंजन साइट बॉलीवुड लाइफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, महेश भट्ट ने पाकिस्तानी गायक-एक्टर अली जफर को करांची में फोन किया और उन्हें सीमा पर शांति की थीम पर गाना गाने का प्रस्ताव दिया। खबर की मानें तो अली ने इस विषय में सकारात्मक प्रतिसाद दिया है। महेश भट्ट के इस प्रोजेक्ट में साथ देने के लिए शफकत अमानत अली भी राजी हो गए हैं और वह भी बिना किसी फीस के। इस प्रोजेक्ट के वीडियो की बात करें तो देहली बेस्ड एक्टर इमरान जाहिद इस प्रोजेक्ट पर महेश भट्ट के साथ काम करेंगे।

इमरान ने कहा, ‘भट्ट साहब ने जिस भी पाकिस्तानी कलाकार से इस विषय में संपर्क किया है, सभी ने बहुत ही जोशपूर्ण प्रतिसाद दिया है। शफकत अमानत अली के मैनेजर ने तो यहां तक कहा कि, वह इसके लिए कोई भी फीस चार्ज नहीं करेंगे। हम राहत फतेह अली खान और आतिफ असलम को भी इस प्रोजेक्ट से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इमरान ने बताया कि, हम ८ जून को देहली में परफॉर्म किए जाने वाले “मिलने दो” के लिए पाकिस्तानी कलाकारों की आवाज का उपयोग करेंगे। यह कार्यक्रम मुंबई में २३ जून को आयोजित किया जाएगा। वहीं भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि, उन्होंने पाकिस्तानी कलाकारों पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया है। जब भारत सरकार ने सब कुछ साफ कर दिया है तो अब विरोधी क्या कर सकते हैं ?

पुणे विश्वविद्यालय में एस्एफ्आय के कार्यकर्त्याआेंद्वारा अखिल भारतीय छात्र परिषद के कार्यकर्ताआें को मारपीट

पुणे विश्वविद्यालय में एस्एफ्आय के कार्यकर्त्याआेंद्वारा अखिल भारतीय छात्र परिषद के कार्यकर्ताआें को मारपीट
देशविरोधी उमर खालिद का पुतला जलाने पर नक्षलप्रेमी एस्एफ्आय आक्रमक

पुणे – देहली के रामजस महाविद्यालय में एबीवीपी द्वारा किए गए विरोध के बाद देशद्रोह का आरोप होनेवोले उमर खालीद का कार्यक्रम न होने के कारण उमर खालीद, कन्हैय्या कुमार, शेहला रशीद ने ‘कश्मीर माँगे आझादी’, ‘केरल माँगे आझादी’, एेसी देशविरोधी घोषणी दी थी । इसका निषेध करने हेतु यहां के सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में एबीवीपी की आेरसे २४ फरवरी को सुबह उमर खालीद का पुतला जलाकर नक्षलवाद तथा आतंकवाद के विरोध में घोषणाबाजी की गर्इ । इसका गुस्सा मन में रखकर ‘एस्एफ्आय’ इस वामपंथी संगठन के कार्यकर्ताआें ने विश्वविद्यालय के क्षेत्र में एबीवीपी द्वारा लगाए गए पोस्टर्स  फाडकर वहां ‘एबीवीपी मुर्दाबाद’, ‘सनातन के चेले को, जुते मारो सालों को’, ‘भगवे राष्ट्रवाद के ठेकेदारों को, जुते मारो सालों को’, एेसे वाक्य उस पोस्टर्स पर चिपकाए । २४ फरवरी को रात ८ बजे के आसपास ‘एस्एफ्आय’ के कार्यकर्त्याआें ने एबीवीपी के कार्यकर्त्याआें के साथ मारपीट थी । इस प्रकरण में चतुःश्रृंगी पोलीस थाना में दोनो पक्षों के कार्यकर्ताआेंको हिरासत में लिया।

१ . उमर खालीद का पुतला जलाना पर दु:ख होने से ही ‘एस्एफ्आय’ झूठे आरोप कर रहा है , एेसे एबीवीपी ने अपने पत्रक में कहा है । नासीर शेख इस ‘एस्एफ्आय’के गुंड ने एबीवीपी के महिला कार्यकर्ता को गाली-गलौज करने का भी उल्लेख इस पत्रक में किया गया है ।

Friday, 24 February 2017

भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरुप

भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरुप का एक आध्यात्मिक विवेचन?


पुराणों में शिव की कल्पना एक ऐसे विशिष्ट व्यक्ति के रूप में की गई है,जिसका आधा शरीर,स्त्री का तथा आधा शरीर पुरुष का है। शिव का यह स्त्री व पुरुष मिश्रित शरीर अर्धनारीश्वर के नाम से जाना जाता है।

शिव पुराण के अनुसार शिव को इस रूप-विधान में परम पुरूष ब्रह्मात्मक मानकर, ब्रह्म से भिन्न उसकी शक्ति माया को स्त्री के आधे रूप में चित्रित किया गया है।

शिव का रूप अग्नि एवं सोम अर्थात सूर्य एवं चंद्रमा के सम्मिलन का भी रूप है। यानी पुरूष का अर्धांश सूर्य और स्त्री का अर्धांश चंद्रमा के प्रतीक हैं। यह भी पुराण सम्मत मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन शिव और शक्तिरूपा पर्वती हुए थे।

कथा में यह भी है कि इसी दिन शिव अत्यंत क्रोधित हुए और संपूर्ण ब्रह्माण्ड के विनाश के लिए विश्व प्रसिद्ध तांडव नृत्य करने लगे। शिव स्वयं यह मानते हैं कि स्त्री-पुरूष समेत प्रत्येक प्राणी की ब्रह्माण्ड में स्वतंत्र सत्ता स्थापित है। इसे ही वैयक्तिक रूप में ब्रह्मात्मक या आत्मपरक माना गया है।

अर्घनारीश्वर के संदर्भ में जो प्रमुख कथा प्रचलन में है,वह है, जब ब्रह्मा ने सृष्टि के विधान को आगे बढ़ाने की बात सोची और इसे साकार करना चाहा, तो उन्हें इसे, अकेले पुरुष रूप से आगे बढ़ाना संभव नहीं लगा।

तब उन्होंने शिव को बुलाकर अपना मंतव्य प्रगट किया। शिव ने ब्रह्मा के मूल भाव को समझते हुए उन्हें अर्घनारीश्वर में दर्शन दिए। अर्थात स्त्री और पुरुष के सम्मिलन या सहवास से सृष्टि के विकास की परिकल्पना दी।

इस सूत्र के हाथ लगने के बाद ही ब्रह्मा सृष्टि के क्रम को निरंतर गतिशील बनाए रखने का विधान रच पाए। सच्चाई भी यही है कि स्त्री व पुरुष का समन्वय ही सृष्टि का वास्तविक विधान है। इसीलिए स्त्री को प्रकृति का प्रतीक भी माना गया है। अर्थात प्रकृति में जिस तरह से सृजन का क्रम जारी रहता है, मनुष्य-योनी में उसी सृजन प्रक्रिया को स्त्री गतिशील बनाए हुए है।

अर्धनारीश्वर यानी आधे-आधे रूपों में स्त्री और पुरुष की देहों का आत्मसात हो जाना, शिव-गौरी का वह महा-सम्मिलन है, जो सृष्टि के बीज को स्त्री की कोख, अर्थात प्रकृति की उर्वरा भूमि में रोपता है। सृष्टि का यह विकास क्रम अनवरत चलता रहे, इसीलिए सृष्टि के निर्माताओं ने इसमें आनंद की उत्तेजक सुखानुभूति भी जोड़ दी है।

सृष्टि के इस आदिभूत मातृत्व व पितृत्व को पुराणों की प्रतीकात्मक भाषा में पर्वती-परमेश्वर या शिव-पर्वती कहा गया है। अर्थात शिव-शक्ति के साथ संयुक्त होकर अर्द्वनारीश्वर बन जाते हैं। इसलिए शिव से कहलाया गया है कि शक्ति यानी स्त्री को स्वीकार किए बिना पुरुष अपूर्ण है।

उसे शिव की प्राप्ती नहीं हो सकती। स्त्री के सहयोग के बिना कोई कल्पना फलित नहीं हो सकती। इसीलिए पुरुषरूपी शिव और प्रकृति रूपी स्त्री जब अर्धनारीश्वर के रूप में एकाकार होते हैं तो सभी भेद और विकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं। अर्थात जब पति-पत्नी के रूप में स्त्री-पुरूष एक दूसरे को आंतरिक रूप से तृप्त करते हैं, तभी अर्धनारीश्वर स्वरूप सार्थक होता है। अर्धनारीश्वर की तरह एकाकार हुए बिना हम अपने जीवन अर्थात काल को आनंद या सुख की अनंत अनुभूति के साथ जी ही नहीं सकते हैं। मनुष्य जीवन में सुख अनंत काल तक बना रहे, इस हेतु स्त्री-पुरूष का एकालाप भी युग-युगांतरों में बने रहना जरूरी है।

दुनिया का एकमात्र अनोखा और चमत्कारी शिवलिंग जो चारों दिशाओं में घूमता है

दुनिया का एकमात्र अनोखा और चमत्कारी शिवलिंग जो चारों दिशाओं में घूमता है


 आपने आज तक एक से बढकर अनोखे शिवलिंग देखे होंगे, लेकिन क्या कभी ऐसा शिवलिंग देखा है जो चारों दिशाओं में घूमता हो। जी हां, इस दुनिया में एकमात्र ऐसा चमत्कारी शिवलिंग भी है जो चारों दिशाओं में घूमता है। ज्यादातर शिवलिंगों की जलहरी का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा की तरफ होता है। लेकिन मध्यप्रदेश के श्योपुर में गोविंदेश्वर महादेव शिवालय में दुनिया का सबसे अनोखो और चमत्कारी शिवलिंग स्थापित है जो चारों दिशाअों में घूमता है। इस शिवलिंग को भक्त अपनी सुविधानुसार किसी भी दिशा में घुमाकर पूजा कर सकते हैं।
किसी भी दिशा में घुमाकर करें पूजा
यह अनोखा और चमत्कारी शिवलिंग श्योपुर के छार बाग मोहल्ले में अष्टफलक की छतरी में स्थित है। इसका निर्माण इस तरह से किया गया है कि यह अपनी धुरी पर चारों दिशाअों में घूमता है। पूजा करने वाले भक्त अपनी इच्छानुसार इसे किसी भी दिशा देकर पूजा कर सकते हैं।
इस राजा ने कराया था निर्माण
चारों दिशाओं में घूमने वाले इस अनोखे शिवलिंग इतिहास भी बहुत पुराना है। इसका निर्माण श्योपुर के गौड़ वंश के राजा पुरूषोत्तम दास ने 294 वर्ष पूर्व यानी सन् 1722 में करवाया था। इस मंदिर में लगे शिलालेख में इसके निर्माण समय बताया हुआ है। यह शिवालय गोविंदेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। हालांकि इससे पहले यह शिवलिंग महाराष्ट्र के सोलापुर में बाम्बेश्वर महादेव के रूप में स्थापित था। गौड़ राजा भगवान शिव के परम भक्त थे। इसी वजह से उन्होंने शिवनगरी के रूप में श्योपुर नगर को बसाया था।
ऐसा चमत्कारी है शिवलिंग
यह अनोखा शिवलिंग लाल पत्थर बना है। इसके दो भाग हैं जिनमें एक पिंड है और दूसरा दूसरा जलहरी। यह शिवलिंग एक धुरी पर स्थापित है जिसकी वजह से चारों दिशाअों में घूमता है। कहा जाता है कि साल में एक बार रात के समय इस शिवालय घंटिया अपने आप बजने लगती हैं। आरती के बाद शिवलिंग अपने आप घूमने लगता हैं। कहा जाता है कि इस शिवलिंग का मुख हमेशा दक्षिण दिशा की अोर रहता है लेकिन अपने ही यह उत्तर या पूर्वमुखी हो जाता है। इस शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि इसकी पूजा करने से सारे कष्टों अौर सर्पदोष, पितृदोष, गृहक्लेश आदि से तुरंत मिलता है।
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यह एक खास पत्ता चढाने से खुश होते हैं भगवान शिव

फल-फूल या पैसा नहीं, यह एक खास पत्ता चढाने से खुश होते हैं भगवान शिव

 भगवान शिव के पूजन में बेलपत्र का विशेष महत्व माना गया है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं। यह भी माना जाता है कि भगवान शिव की उपासना बेलपत्र के बिना पूरी नहीं होती। आप वास्तव में देवों के देव महादेव की कृपा पाना चाहते हैं तो बेलपत्र के महत्व को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही एक पत्ता है जो उन्हें बेहद प्रिय है।
शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र
बेल के पेड़ की पत्तियों को बेलपत्र कहा जाता है। बेलपत्र की सबसे बडी खूबी ये है कि इसमें तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी हुई होती हैं इसके बाजवूद भी इन्हें एक ही पत्ती माना जाता हैं। शिवजी की पूजा में बेलपत्र सब लोग करते हैं और इनके बिना शिव की उपासना सम्पूर्ण नहीं मानी जाती। लेकिन शिवजी की पूजा के साथ ही बेलपत्र में ऐसे औषधीय गुण होते हैं आप जानकर हैरान रह जाएंगे। बेलपत्र के प्रयोग से तमाम बीमारियां दूर हो सकती हैं।
शिव को ऐसे चढाएं बेलपत्र
ज्योति​षियों अनुसार आज जब भी भगवान शिव को बेलपत्र चढाएं कुछ बातों का ध्यान रखना अतिआवश्यक है। क्योंकि गलत तरीके से बेलपत्र चढाने से शिव अप्रसन्न भी हो सकते हैं।
—चढाये जाने वाले बेलपत्र में तीन पत्तियां होनी चाहिए
—पत्तियां कटी—फटी नही होनी चाहिए।
— शिव को बेलपत्र चिकनी ओर से ही चढाऐं
– यह भी विधान है कि तीन पत्तियों वाले एक ही बेलपत्र को जल से धोकर बार-बार भी चढ़ा सकते हैं।
– शिव जी को बेलपत्र चढाते समय जल की धारा भी चढ़ाएं।
– कभी भी बिना जल के बेलपत्र अर्पित नहीं करें।
शिव को क्यों प्यारा है बेलपत्र
हम आपको वदों  के अनुसार बता रहे हैं। बिल्व अर्थात् बेलपत्र वृक्ष की तासीर बहुत शीतल यानी ठंडी होती है। गर्मी की तपिश से बचने के लिए इसके फल का शर्बत यानी ज्याूस बड़ा ही लाभकारी होता है। यह शर्बत कुपचन, आंखों की रोशनी में कमी, पेट में कीड़े और लू लगने जैसी समस्याओं से मुक्ति दिलाने वाला होता है। यह औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी पत्तियों मे टैनिन, लोह, कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नेशियम जैसे तत्व मौजूद होते हैंं। ऐसे में भगवान शिव को बेल पत्र चढाते समय आपके हाथों से ये पत्ते छते हैं तो आपको भी शारीरिक लाभ होता है।

Thursday, 23 February 2017

शिवरात्रि के अवसर पर भारत से भी 200 तीर्थयात्रियों का जत्था पाकिस्तान गया है।

शुक्रवार को महाशिवरात्रि है। महाशिवरात्रि पर भारत में जहां हर जगह मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है वहीं पाकिस्तान के दूसरे प्रांतों में भी ऐसे कई शिव मंदिर हैं जहां हर साल शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

शिवरात्रि के अवसर पर भारत से भी 200 तीर्थयात्रियों का जत्था पाकिस्तान गया है। शिवरात्रि पर ये सभी पाकिस्तान के मशहूर शिव मंदिरों में पूजा करेंगे।

यहां स्थित कटासराज शिव मंदिर 900 साल पुराना है। बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने कुछ सालों पहले ही भारत के यात्रियों को यहां आने की अनुमति दी है। 

पाकिस्तान में सबसे बड़ा शिव मंदिर कटासराज है, जो लाहौर से 270 किमी दूर चकवाल जिले में स्थित है। मान्यता है कि वनवास के दौरान पाण्डव करीब 4 चार साल तक यहां रहे थे और इन्होंने कटासराज शिवलिंग की पूजा की थी।

यह मंदिर 900 साल पुराना है और इसके पास एक सरोवर है। इस सरोवर के विषय में मान्यता है कि सती के अत्मदाह करने के बाद महादेव जब सती का शव लेकर भ्रमण कर रहे थे तब उनकी आंखों से दो बूंद आंसू गिर थे। 
उनके आंसुओं की दो बूंदे धरती पर गिरीं, जिनसे यह सरोवर बना। इनमें से एक कुंड भारत के पुष्कर में ब्रह्म सरोवर है तो दूसरा कटासराज मंदिर में। इस सरोवर का पानी दो रंग का है। जहां सरोवर कम गहरा है वहां का पानी हरा, जबकि गहराई वाली जगह का पानी नीला है।

अम्बेडकर ने भी मोहनदास गांधी को बताया था देश पर सबसे बड़ा खतरा

अम्बेडकर ने भी मोहनदास गांधी को बताया था देश पर सबसे बड़ा खतरा, गांधी वध पर जताई थी ख़ुशी



महात्मा गोडसे ने मोहनदास गांधी का वध दिल्ली में किया था पर आप ये नहीं जानते होंगे की मोहनदास गांधी के वध पर भीमराव आंबेडकर ने क्या विचार व्यक्त किये थे
और आप ये इसलिए नहीं जानते क्योंकि आंबेडकर ने गांधी पर जो विचार व्यक्त किये थे वो सेक्युलरों के लिए जिन्होंने देश का इतिहास और किताबे लिखी उनके लिए बहुत ही दर्दनाक है आपको हम बताना चाहते है कि गांधी के वध पर आंबेडकर
ने क्या कहा था, क्या विचार दिए थे
आंबेडकर ने गांधी वध पर कहा कि
* मेरा सबसे बड़ा शत्रु चला गया, ईश्वर का शुक्र है कि गांधी चला गया
* गांधी इस देश के लिए खतरा बन चूका था, इसने लोगों को जकड़ा हुआ था
* गांधी को मारकर उसने (महात्मा गोडसे) भारत के लोगों को आज़ादी दे दी।
न केवल डॉ. आंबेडकर ने गांधी को भारत पर खतरा बताया था बल्कि आंबेडकर ने महात्मा गोड्स की भी तारीफ करी थी
और ये बात आपसे आजतक सेक्युलरों ने छुपाया हुआ था।




महाशिवरात्रि।

भारत ही नहीं विश्व के अन्य अनेक देशों में भी प्राचीन काल से शिव की पूजा होती रही है इसके अनेक प्रमाण समय समय पर प्राप्त हुए हैं।






हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई में भी ऐसे अवशेष प्राप्त हुए हैं जो शिव पूजा के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। हमारे समस्त प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में भी शिव जी की पूजा की विधियाँ विस्तार से उल्लिखित हैं। शास्त्रों में शिव की शक्ति को रात्रि ही कहा गया है। रात्रि शब्द का अर्थ है जन-मन को अवकाश या उत्सव प्रदान करने वाली। शिव की शक्ति रात्रि ही है जो विश्व के समस्त प्राणियों को अपनी गोद में आराम प्रदान करती है।
ईशान संहिता के अनुसार महाशिवरात्रि को ही ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ। शिव पुराण में ब्रह्मा जी ने कहा है कि संपूर्ण जगत के स्वामी सर्वज्ञ महेश्वर के कान से गुण श्रवण, वाणी से कीर्तन, मन से मनन करना महान साधना माना गया है। इसी लिए महाशिवरात्रि के दिन उपवास, ध्यान, जप, स्नान, दान, कथा श्रवण, प्रसाद एवं अन्य धार्मिक कृत्य करना महाफलदायक होता है। वास्तव में शिव की महिमा अपरंपार है। जिनके कोष में भभूत के अतिरिक्त कुछ नहीं है परंतु वह निरंतर तीनों लोकों का भरण पोषण करने वाले हैं। परम दरिद्र शमशानवासी होकर भी वह समस्त संपदाओं के उद्गम हैं और त्रिलोकी के नाथ हैं। अगाध महासागर की भांति शिव सर्वत्र व्याप्त हैं। वह सर्वेश्वर हैं। अत्यंत भयानक रूप के स्वामी होकर भी स्वयं शिव हैं।
जब भीष्म शरशैरया पर सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे तो पांडवों ने उनसे शिव महिमा के विषय में जानने की जिज्ञासा की तो उन्होंने उत्तर दिया कि कोई भी देहधारी मानव शिव महिमा बताने में सर्वथा असमर्थ है। भारतीय मनीषियों के अनुसार शिव अव्यक्त हैं और जो कुछ व्यक्त है, वह उसी की शक्ति है, वही उसका व्यक्त रूप है। शिव ही निराकार ब्रह्म हैं। मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, पाँचों ज्ञानेंद्रियों और पाँचों कर्मेंद्रियों पर विजय प्राप्त कर शिव शक्ति की साधना करना ही शिवरात्रि व्रत करना है। शिवरात्रि के जागरण के संदर्भ में वही भावना है जो गीता में जागरण के विषय में व्यक्त की गई है। सामान्य प्राणियों की रात्रि में जोगी जागता है और उनके दिन में जोगी सोता है। इस प्रकार जो पाशबद्ध है उसे मनीषियों ने पशु कहा है अपने परम स्वरूप शिव के अधिक से अधिक निकट पहुँचना ही ''पशुपति`` शिव की उपासना का लक्ष्य है और यही जागरण का महत्व है। रात्रि में जागृत जीवन का कोलाहल नहीं रहता। प्रकृति शांत रहती है। यह अवस्था साधना, मनन और चिंतन के लिए अधिक अनुकूल होती है। उपवास का भी एक अर्थ है 'किसी के समीप रहना। वराह उपनिषद के अनुसार उपवास का अर्थ है जीवात्मा का परमात्मा के समीप रहना। महाशिवरात्रि पर जागरण और उपवास का यही लक्ष्य है।
शिव तनिक-सी सेवा से ही प्रसन्न होकर बड़े से बड़े पापियों का उद्धार करने वाले महादेव हैं। कभी केवल जल चढ़ा देने मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं तो कभी बेल पत्र से ही। भले ही पूजा अनजाने में ही हो गई हो वह व्यर्थ नहीं जाती। किसी भी जाति अथवा वर्ण का व्यक्ति उनका भक्त हो सकता है। देव, गंधर्व, राक्षस, किन्नर, नाग, मानव सभी तो उनके आराधक है। हिंदू-अहिंदू में महादेव कोई भेद भाव नहीं करते। शिवलिंग पर तीन पत्ती वाले बेलपत्र और बूंद-बूंद जल का चढ़ाया जाना भी प्रतीकात्मक है। सत, रज और तम तीनों गुणों के रूप में शिव को अर्पित करना उनकी अर्चना है। बूंद-बूंद जल जीवन के एक-एक कण का प्रतीक है। इसका अभिप्राय है कि जीवन का क्षण-क्षण शिव की उपासना को समर्पित होना चाहिए।
शिव तो सर्वस्व देने वाले हैं। विश्व की रक्षार्थ स्वयं विष पान करते हैं। अत्यंत कठिन यात्रा कर गंगा को सिर पर धारण करके मोक्षदायिनी गंगा को धरा पर अवतरित करते हैं। श्रद्धा, आस्था और प्रेम के बदले सब कुछ प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि शिव और पार्वती के वैवाहिक जीवन में प्रवेश का दिन होने के कारण प्रेम का दिन है। यह प्रेम त्याग और आनंद का पर्व है। शिव स्वयं आनंदमय हैं। शिव के समीप ले जा कर सच्चिदानंद का साक्षात्कार करवाने का पर्व ही तो है महाशिवरात्रि।

Wednesday, 22 February 2017

इन पापों को भगवान शि‍व नहीं करते माफ, देते हैं कठोर दंड

इन पापों को भगवान शि‍व नहीं करते माफ, देते हैं कठोर दंड

शिव को भोलेनाथ कहते हैं. क्योंकि शिव सादगी पसंद ईश्वर हैं. उन्हें कच्चा फल पसंद है. एक लोटा पानी से भी शिव खुश हो जाते हैं. खासतौर से अगर आप अपनी जिंदगी से निराश या हताश हैं तो आपको शिव की पूजा जरूर करनी चाहिए.पर भोलेनाथ जितनी जल्दी खुश होते हैं, उतनी ही जल्दी नाराज भी होते हैं. खासतौर से ऐसे लोगों से, जो बेईमानी और धोखेबाजी करते हैं. पंडित प्रवीन मिश्र के अनुसार भगवान शिव हर व्यक्त‍ि के मन की बात सुनते हैं. शायद यही वजह है कि आज 21वीं सदी में शिव की पूजा सबसे ज्यादा लोग करते हैं. खासतौर से युवाओं के बीच शिव जी काफी प्रचलित हैं. लेकिन भगवान शिव जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं, उनका गुस्सा उससे भी प्रलयंकारी है.पंडित प्रवीन मिश्र ने बताया कि शिव पुराण में कार्य, बात-व्यवहार और सोच द्वारा किए गए कुछ पाप वर्णित हैं जिसे भगवान शिव कभी क्षमा नहीं करते. ऐसा व्यक्ति हमेशा ही शिव के कोप का भाजन होगा और कभी भी सुखी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता.आपने सुना होगा कि ऊपरवाले से कुछ छुपा नहीं होता. यहां तक कि आप अपने दिमाग में जो सोच रहे होते हैं, वह भी भगवान से छुपा नहीं है. इसलिए भले ही बात और व्यवहार में आपने किसी को नुकसान ना पहुंचाया हो, लेकिन अगर मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना है या आपने किसी का अहित सोचा हो, तो यह भी पाप की श्रेणी में आता है.
1.शादी तोड़ने की काशिश :-भगवान शिव को ऐसे लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं, जो अपने रिश्ते में ईमानदारी नहीं रखते. खासतौर से किसी दूसरे की शादीशुदा जिंदगी को तोड़ने की कोशिश करने से भोलेनाथ नाराज होते हैं और इस पाप को माफ नहीं करते. दूसरे के पति या पत्नी पर बुरी नजर रखना या उसे पाने की इच्छा करना भी पाप की श्रेणी में आता है.
2. पैसों की धोखेबाजी :-दूसरों का धन अपना बनाने की चाह रखना, पैसों की हेराफेरी करना और धन-संपत्त‍ि लूटना भी पाप की श्रेणी में आता है. भगवान शिव के लिए यह अक्षम्य अपराध है.
3. कष्ट देना :-किसी भोलेभाले और निरपराध इंसान को कष्ट देना, उसे नुकसान पहुंचाना या उसके लिए बाधाएं पैदा करने की योजना बनाना या ऐसी सोच रखना भगवान शिव की नजरों में हर हाल में माफी ना देने योग्य पाप है.
4. गलत रास्ता अपनाना :-कुछ लोग रास्ता भटक जाते हैं, पर सही निर्देश मिलने पर वापस सही रास्ते पर आ जाते हैं. पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सही सुझाव मिलने के बावजूद बुराई का साथ नहीं छोड़ते और बुरी राह को खुद चुनते हैं. ऐसे लोगों के पाप अक्षम्य होते हैं.
5. बुरी सोच :-शिव पुराण के अनुसार जिस प्रकार आप किसी का बुरा नहीं करने के बावजूद, उसके लिए बुरी सोच रखने के कारण भी पाप के हकदार और दंड की श्रेणी में आ जाते हैं, उसी प्रकार भले ही आपने अपने कार्य से किसी का बुरा ना किया हो, लेकिन आपकी बोली अक्षम्य पापों का हकदार भी बना सकती है.
6. गर्भवती महिला को कुवचन :-किसी गर्भवती महिला या मासिक के दौरान किसी महिला को कटु वचन कहना या अपनी बातों से उनका दिल दुखाना शिव की नजरों में अक्षम्य अपराध और पाप है. 
7. नुकसान पहुंचाने के लिए झूठ बोलना -किसी के सम्मान को हानि पहुंचने की नीयत से झूठ बोलना 'छल' की श्रेणी में आता है और अक्षम्य पाप का भागीदार बनाता है.
8. अफवाह फैलाना :-समाज में किसी के मान-सम्मान को हानि पहुंचाने की नीयत से या उसकी पीठ पीछे बातें करना या अफवाह फैलाना भी एक अक्षम्य पाप है.

महाशिवरात्रि में इस शुभ मुहूर्त में करें शिव पूजन

महाशिवरात्रि में इस शुभ मुहूर्त में करें शिव पूजन

शिव पूजा का सबसे बड़ा और पावन दिन महाशि‍वरात्र‍ि को माना गया है. इस शिव मंदिरों में भक्तों का भारी जमावड़ा देखा जा सकता है. सारे देवों में शिव ही ऐसे देव हैं जो अपने भक्‍तों की भक्ति-पूजा से बहुत जल्‍दी ही प्रसन्‍न हो जाते हैं. इस बार 24 फरवरी को महाशि‍वरात्र‍ि मनाई जाएगी.
महाशिवरात्रि हिन्दुओं के बड़े त्योहार और व्रतों में से एक माना गया है. मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था. प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं. इसीलिए इसे महाशिवरात्रि कहा गया है.
इसके अलावा भारत के कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था. वैसे तो हर महीने मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन फाल्गुन के महीने की शिवरात्रि को ही महाशिवरात्रि कहते हैं. 
दो दिन मनाई जाएगी महाशि‍वरात्र‍ि 
वैसे तो महाशि‍वरात्रि 24 फरवरी को पड़ रही है लेकिन त्रयोदशी तिथि पड़ने के कारण महाशिवरात्र‍ि का पूजन इस बार 25 फरवरी को किया जाएगा. 25 फरवरी को शनिवार को चतुर्दशी तिथि रात 9:20 तक रहेगी. इस कारण 24 की रात से 25 फरवरी तक महाशिवरात्र‍ि का पूजन किया जा सकेगा.
पूजा और मुहूर्त का समय 
निशिथ काल पूजा- 24:08 से 24:59
पारण का समय- 06:54 से 15:24 (25 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि आरंभ- 21:38 (24 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि समाप्त- 21:20 (25 फरवरी)

NDTV पत्रकार के आचार्य बालकृष्ण ने दिया बोलती बन्द कर देने वाला जवाब

NDTV पत्रकार के टेढ़े सवालों का पतंजली के CEO आचार्य बालकृष्ण ने दिया बोलती बन्द कर देने वाला जवाब




NDTV पत्रकारों के सवालों को देखकर ये साफ़ लगता है कि देश के ढोंगी सेक्युलरो को मोदी जी पर आरोप लगाने के अलावा कोई और काम नही है बता दें कि NDTV की तरफ से एक महिला प्त्कार हरिद्वार में पतंजली आयुर्वेद के मुख्यालय में गयी और स्वदेशी ब्रांड के CEO आचार्य बाला कृष्ण से मुलाक़ात की .

NDTV पत्रकार का वहां जाने का एक ही मकसद था और वो था पतंजली की योजनाओं का मजाक उडाना लेकिन हर बार की तरह इस बार भी NDTV की उलटी बोलती बंद करवा दी देखें वीडियो :

Tuesday, 21 February 2017

इस मन्दिर में जाते ही ठीक हो जाती है लकवा की बीमारी!

इस मन्दिर में जाते ही ठीक हो जाती है लकवा की बीमारी!


लकवा यानी शरीर का कोई हिस्सा या अंग काम करना बंद कर देता है। लकवे का मारा अंग मुंह से लेकर पैर तक हो सकता है जिसका इलाज करने में कभी—कभार तो डॉक्टर भी असफल रहते हैं। लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मन्दिर भी है जहां पैरालायसिस यानी लकवे का शर्तिया इलाज होता है! इस मन्दिर में हर साल हजारो लोग अपने लकवे के रोग से मुक्त होकर जाते है। यह मन्दिर नागोर जिले के कुचेरा कस्बे के पास है।
सिद्ध योगी की कृपा से होता है लकवा ठीक
कुचेरा के पास स्थित ग्राम बुटाटी में लगभग 500 साल पहले एक संत चतुरदास जी हुए थे जो सिद्ध योगी थे। ये संत अपनी तपस्या से लोगो को रोग मुक्त करते थे। इसके बाद आज भी उनकी समाधी पर सात फेरी लगाने से लकवा जैसी खतरनाक बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है। इस स्थान पर नागोर जिले के अलावा पूरे देश से लोग आते है और रोग मुक्त होकर जाते है। यहां हर वर्ष वैसाख, भादवा और माघ महीने मे पूरे महीने मेला भी लगता है।
नि:शुल्क मिलता है खाना
सन्त चतुरदास जी महाराज के मन्दिर ग्राम बुटाटी में लकवे का इलाज करवाने राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश भर से लोग आते हैं| इस मन्दिर में नि:शुल्क रहने व खाने की व्यवस्था भी है| सबसे बडी और खास बात ये है कि लकवे के रोगियों को यहां कुछ भी चढाने की जरूरत नहीं ब​ल्कि मंदिर में परिक्रमा लगाने से ही बीमारी ठीक हो जाती है। यहां पर मरीज को मन्दिर की महज नियमित 7 परिक्रमा लगवानी होती हैं| इसके बाद हवन कुण्ड की भभूति लगानी होती है इसके बाद लकवे का प्रभाव अपने आप कम होता जाता है।
अपने आप काम करते हैं अंग
सन्त चतुरदास जी महाराज के मन्दिर की परिक्रमा और उनकी भभूति लगाने के बाद शरीर के जो अंग हिलते डुलते नहीं हैं वो धीरे-धीरे काम करने लगते हैं। लकवे से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति की आवाज बन्द हो जाती है वह भी बोलने लगता है। यहां पर ऐसे भी मरीज लाभ प्राप्त कर चुके हैं जो अपना इलाज डॉक्टरो से करवाने के बाद निराश हो गए थे, लेकिन अब वो यहां आकर लाभान्वित है।

शिवजी के प्रिय इस बीज के पेड़ से बनी पटरियों पर चलती है रेल!

शिवजी के प्रिय इस बीज के पेड़ से बनी पटरियों पर चलती है रेल!

नई दिल्ली। रुद्राक्ष यानी भगवान का शिव का साक्षात रूप माना जाता है। भगवान शिव के रूप में रुद्राक्ष को प्रत्येक शिवभक्त पहनता है क्योंकि यह उनका साक्षात प्रतीक है। रूद्राक्ष एक खास तरह के पेड़ का बीज है जिसे भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त है। यह पेड़ आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में एक खास ऊंचाई पर उगता है, जैसे कि हिमालय और पश्चिमी घाट। लेकिन अफसोस की बात यह है लंबे समय से रूद्राक्ष के पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल भारतीय रेल की पटरियां बनाने में काम में लिया जा रहा है। इस वजह से आज भारवर्ष में बहुत ही कम संख्या में रुद्राक्ष के पेड़ बचे हैं। आपको बता दें कि भगवान शिव का प्रमुख आराध्य देश भारत ज्यादातर रुद्राक्ष नेपाल, बर्मा, थाईलैंड या इंडोनेशिया से आयात करता हैं।
रुद्राक्ष का ये है खास महत्त्व
रुद्राक्ष की सबसे खास बात ये है कि इसमें एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है। जो इसे धारण करने वाले के लिए ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है। इस वजह से बाहरी नकारात्मक ऊर्जाएं पहनने वाले को परेशान नहीं कर पाती हैं। इसीलिए रुद्राक्ष आपने ऐसे लोगों को पहने देखा होगा जो लगातार यात्रा करते रहते हैं जैसे कि साधु—संत। ऐसे लोगों को अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ता है उनको मालूम नहीं होता कि कहां नकारात्मक उर्जा है जो उन्हें परेशान कर सकती है, ऐसे रुद्राक्ष उनकी रक्षा करते हुए सकारात्मक उर्जा बनाए रखता है।