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Wednesday, 12 October 2016

३० वर्ष पुराने हथियारों से भारतीय सैनिकों को करनी पडी सर्जिकल स्‍ट्राइक !

३० वर्ष पुराने हथियारों से भारतीय सैनिकों को करनी 


पडी सर्जिकल स्‍ट्राइक !



११ हजार पैराशूट और एम्‍युनिशन की भी कमी

अब आैर विलंब न करते हुए सरकार जल्द ही सैनिकों के हथियारों के इस कमी की आपूर्ति करनी चाहिए –

नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर में सात सर्जिकल स्‍ट्राइक करने वाले विशेष बलों के कमांडो ने यह कार्रवाई पुराने हथियारों के साथ की। हालांकि, जून २०१५ में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर उनके हथियार बदले जाने के निर्देश दे चुके हैं। खरीद प्रक्रिया में देरी के चलते पैरा कमांडो को पुराने हथियारों से ही २८-२९ सितंबर की रात को आतंकी ठिकानों पर आक्रमण करना पडा।

कुल खर्च १८० करोड रुपए

जानकारी के अनुसार, पिछले साल जून में म्‍यांमार में २१ विशेष बल बटालियन के सीमारेखा पार कर आतंकविरोधी अभियान को अंजाम देने के बाद रक्षामंत्री पर्रिकर के सामने आधुनिकीकरण का प्रस्‍ताव सेना ने रखा था। नए हथियारों के लिए कुल खर्च लगभग १८० करोड रुपए के आसपास है। अधिकारियों के अनुसार नई रक्षा खरीद नीति के बाद रक्षा मंत्रालय ने प्रस्‍ताव पर काम करने का निर्णय लिया किंतु सेना की ओर से कार्रवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है।

विशेष बलों काे हथियारों की आवश्यकता

एक सैन्‍य अधिकारी ने बताया कि म्‍यांमार में सेना ने मणिपुर में १८ सैनिकों के हुतात्मा होने के बाद संदिग्‍ध एनएससीएन-के के ठिकानों पर आक्रमण किया था। यदि म्‍यांमार जैसा अभियान आगे भी करना है तो उन्हे इसके लिए कुछ हथियारों को फौरन खरीदने का विचार था। यदि इस योजना पर काम किया गया होता तो सर्जिकल स्‍ट्राइक करने वाले ४ एसएफ और ९ एसएफ के सैनिक ज्‍यादा आधुनिक और लाइटवेट रॉकेट लॉन्‍चर उपयोग करते। इसकी अपेक्षा उन्हें इस अभियान में ३० साल पुराने कार्ल गुस्‍तोव ८४ एमएम वर्जन से काम चलाना पड़ा।

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