Saturday, 15 October 2016

जब औरंगजेब ने बनारस के लिए बदल डाली शरीयत

जब औरंगजेब ने बनारस के लिए बदल डाली शरीयत




आज देश में ट्रिपल तलाक को पाबन्द करने को लेकर जिस तरह से हो हल्ला मचा हुआ है और शरीयत में किसी प्रकार के बदलाव को खतरनाक बताया जा रहा है वो चौंकाने वाला है।मुग़ल इतिहास में सर्वाधिक कट्टर माने जाने वाले औरंगजेब ने एक वक्त बनारस के लिए शरीयत को बदलने का फैसला किया था।यह फैसला इसलिए 
महत्वपूर्ण है कि इससे ही बनारस की सांस्कृतिक धरोहरें सुरक्षित रही सकी।
यह 1669 का वक्त था।बादशाह औरंगजेब ने काशी में जबरदस्‍त विध्वंस मचाया था । उसने विश्‍वनाथ मंदिर को तोड़कर लिंग को मंदिर से हटाकर ज्ञानवापी कुएं में फिंकवा दिया। मंदिर के एक हिस्से को नष्‍ट कर उस पर मस्जिद का निर्माण करा दिया। इसके बाद उसने गंगा नदी के पंचगंगा घाट पर स्थित बिंदुमाधव के बेहद भव्‍य मंदिर को भी नष्‍ट कर दिया और उस पर भी मस्जिद का निर्माण करा दिया। औरंगजेब के भय से बिंदुमाधव की मूर्ति को पहले ही पूजारियों ने हटा दिया था।
बनारस में विश्‍वेश्‍र व बिंदुमाधव मंदिर को तोड़े जाने से औरंगजेब का दरबारी कवि पंडित चंद्रभान काश्‍मीरी बहुत आहत हुआ। और उसने औरंगजेब के समक्ष अपनी कविता से विरोध दर्ज कराया,चन्द्रभान ने कहा कि "''बर्बी करामते बुतखानये मरा ऐ श: कि चूं खराब शुवद खानये खुदागर्दद।'' अर्थात ऐ शहंशाह मेरे मंदिर की करामात देख कि खराब होने पर तेरे खुदा का घर बनता है"।

औरंगजेब चंद्रभान काश्‍मीरी के इस विरोध से इतना शर्मिंदा हुआ कि उसने बाद में एक शाही फरमान जारी किया कि ''हमारे शरियत के अनुसार यह निश्चित किया गया है कि हिंदुओं के पुराने मंदिरों को न गिराया जाए, परंतु नए मंदिर नहीं बनने दिया जाए।'' एक दरबारी कवि ने उस धर्मांध बादशाह को अपनी कविता से लज्जित कर उसे बदलने पर मजबूर कर दिया था।औरंगजेब ने इस आदेश के बाद बनारस में कोई भी मंदिर नहीं तोडा गया |

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