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Tuesday, 17 January 2017

        दुनिया की सबसे बड़ी "स्वैछिक सेना" है इन्डियन आर्मी





जानते हैं भारतीय सेना से जुड़े इन तथ्यों को बारे में

हम भारतीय सेना पर गर्व करते हैं। देश की रक्षा के लिए आज भारतीय सेना आज 69वां सेना दिवस बना रही है। आइए जानते हैं भारतीय सेना से जुड़ी कुछ बातें जिन पर हम सब को फ्रख है।

नियंत्रित करती है दुनिया में सबसे ऊँचे युद्ध के मैदान

सियाचिन ग्लेशियर, जो समुद्र तल से 5000 मीटर की ऊंचाई पर है। हमारे जवान देश की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वहाँ हमारे अधिकतर जवानों ने जान युद्ध में नही बल्कि न्यूनतम तापमान के कारण गंवाई है। विकट परिस्थितियों में सुरक्षा करना आसान नही है।

भारतीय सेना में लोग देश प्रेम की भावना से जाना पसंद करते हैं। आपको बता दे कि भारतीय संविधान में जबरदस्ती सेना में भर्ती करने का प्रावधान था लेकिन आज तक इसका प्रयोग नही किया गया है।

भारतीय सेना के वॉरफेयर स्कूल की दुनिया में उच्च दर्जा हासिल

दुनिया में भारतीय सेना का हाई ऑल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल सबसे अच्छे ट्रेनिंग संस्थानों में गिना जाता है। अमेरिका के स्पेशल फ़ोर्स की ट्रेनिंग, अफगानिस्तान भेजे जाने से पहले यहाँ हुई थी। इसके साथ ही रूस और यूके के जवान भी यहाँ से ट्रेनिंग लेते रहे हैं। यह संस्थान ऊंचाई और पहाड़ी क्षेत्रों पर युद्ध करने के लिए जवानों को प्रशिक्षित करता है।

सेना ने परमाणु बम का परीक्षण किया और CIA को भनक भी न                                         लगी

1974 और 1998 में भारत ने परमाणु बम का परीक्षण किया था। तब अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेन्सी CIA को इसकी भनक तक नही लगी। यह CIA की सबसे बड़ी विफलताओं में एक है।

भारतीय सेना में नही है आरक्षण

जवानों की भर्ती परीक्षण, फिटनेस और योग्यता के आधार पर होती है।

भारत-पाकिस्तान के 1971 लोंगेवाला युद्ध का हर किसी ने लोहा                                        माना

इस युद्ध में करीब 120 जवानों ने एक जीप और M-40 राइफल के साथ 2000 पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ जंग लड़ी थी। संख्या में कम होने के बावजूद भारतीय जवान युद्ध के मैदान में डटे रहे और आखिर में जीत हासिल की।

दुनिया में सबसे बड़े नागरिक बचाव कार्यों में से एक 2013 का "                           ऑपरेशन राहत"

उत्तराखंड में आई बाढ़ के बाद प्रभावित नागरिकों के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन राहत’ में भारतीय सेना के योगदान से हम परिचित हैं। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा नागरिक बचाव अभियान था। इस अभियान में भारतीय सेना ने हज़ारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया और 3,82,400 किलो की राहत सामग्री भी पहुंचाई थी।


Monday, 16 January 2017

                    
                           ...... सिर्फ भोलेनाथ का पूजन ही शिवलिंग के रूप में क्यों किया जाता है....


शिवपुराण में कहा गया है कि साकार और निराकार दोनों ही रूप में शिव की पूजा कल्याणकारी होती है, लेकिन शिवलिंग की पूजा करना अधिक उत्तम है। साकार रूप में शिव हाथ में त्रिशूल, डमरू लिए और बाघ की छाल पहने नज़र आते हैं। जबकि महादेव के अतिरिक्त अन्य कोई भी देवता साक्षात् ब्रह्मस्वरूप नहीं हैं। संसार भगवान शिव के ब्रह्मस्वरूप को जान सके इसलिए ही भगवान शिव ज्योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हुए और लिंग के रूप में इनकी पूजा होती है। माना जाता है कि शिवलिंग की पूजा करके जो भक्त शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं, उन्हें सुबह से लेकर दोपहर से पहले ही इनकी पूजा कर लेनी चाहिए। इस दौरान शिवलिंग की पूजा विशेष फलदायी होती है।


शिवलिंग का महत्व

शिवलिंग जो कि भगवान शंकर का प्रतीक है। उनके निश्छल ज्ञान और तेज का यह प्रतिनिधित्व करता है। 'शिव' का अर्थ है - 'कल्याणकारी'। 'लिंग' का अर्थ है - 'सृजन'। सृजनहार के रूप में उत्पादक शक्ति के चिन्ह के रूप में लिंग की पूजा होती है। स्कंद पुराण में भी लिंग का अर्थ लय लगाया गया है। लय ( प्रलय) के समय अग्नि में सब भस्म हो कर शिवलिंग में समा जाता है और सृष्टि के आदि में लिंग से सब प्रकट होता है। लिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और ऊपर प्रणवाख्य महादेव स्थित हैं।

ये भी है एक कथा
एक बार ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद होने लगा। दोनों निर्णय के लिए भगवान शिव के पास गए। विवाद का हल निकालने के लिए भगवान शिव साकार से निराकार रूप में प्रकट हुए। शिव का निराकार रूप अग्नि स्तंभ के रूप में नज़र आ रहा था ब्रह्मा और विष्णु दोनों इसके आदि और अंत का पता लगाने के लिए चल पड़े, लेकिन कई युग बीत गए इसके आदि अंत का पता नहीं लगा। जिस स्थान पर यह घटना हुई, आज वह अरूणाचल के नाम से जाना जाता है।


हर हर महादेव ...

Saturday, 14 January 2017

पूजा करने का सही तरीका

 
                                पूजा करने का सही तरीका


शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि पूजा-पाठ, भगवान का मनन करने से उनसे हमारा सीधा संपर्क हो जाता है। जिसके कारण उनकी कृपा हमारे ऊपर बनी रहती है और हर काम में हमें सफलता प्राप्त होती हैं। माना जाता है कि पूजा करने से हमारे मन को शांति मिलती है। ऐसे में जरूरी है पूजा पाठ का सही नियम जानना। घर में पूजा पाठ से घर में शांति का वातावरण होता है और लोगों के दुःख दूर होते हैं। घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर भागती है और सकारात्मकता आती है। शास्त्रों के अनुसार पूजन के लिए कई आवश्यक नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करते हुए पूजा करने पर श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं। 

सभी प्रकार की पूजा में चावल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। पूजन के लिए ऐसे चावल का उपयोग करना चाहिए जो अखंडित (पूरे चावल) हो यानी टूटे हुए ना हो। चावल चढ़ाने से पहले इन्हें हल्दी से पीला करना बहुत शुभ माना गया है।

पूजन में पान का पत्ता भी रखना चाहिए। ध्यान रखें पान के पत्ते के साथ इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि भी चढ़ाना चाहिए।

पूजन कर्म में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए।

किसी भी भगवान के पूजन में उनका आवाहन करना, ध्यान करना, आसन देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाना, अक्षत (चावल), कुमकुम, चंदन, पुष्प (फूल), प्रसाद आदि अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से अवश्य धो लेना चाहिए।

किसी भी प्रकार के पूजन में कुल देवता, कुल देवी, घर के वास्तु देवता, ग्राम देवता आदि का ध्यान करना भी आवश्यक है। इन सभी का पूजन भी करना चाहिए।

यदि आप प्रतिदिन घी का एक दीपक भी घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे।

सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।

प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है।

तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है।

दीपक हमेशा भगवान की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना चाहिए।

घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है।

पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।

शिवजी को बिल्व पत्र अवश्य चढ़ाएं और किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए अपनी इच्छा के अनुसार भगवान को दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए, दान करना चाहिए।

दक्षिणा अर्पित करते समय अपने दोषों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। दोषों को जल्दी से जल्दी छोड़ने पर मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी।

घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो अपने इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक,कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन भी अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही शंख से जल चढ़ाना चाहिए।

Friday, 13 January 2017

साल की 12 संक्रांत‌ियों में से मकर संक्रांत‌ि का सबसे ज्यादा महत्व है

     साल की 12 संक्रांत‌ियों में से मकर संक्रांत‌ि का सबसे ज्यादा महत्व है 

क्योंक‌ि इस द‌िन सूर्य देव मकर राश‌ि में आते हैं और इसके साथ देवताओं का द‌िन शुरु हो जाता है। इसल‌िए मकर संक्रांत‌ि के द‌िन स्नान, दान और पूजन का बड़ा ही महत्व है। लेक‌िन इन सबसे ज्यादा महत्व है सूर्य देव का अपने पुत्र शन‌ि के घर में आना। इस साल मकर संक्रांत‌ि पर कुछ ऐसा संयोग बना है ज‌िससे सूर्य और शन‌ि दोनों को एक साथ खुश क‌िया जा सकता है और यह ऐसा संयोग है जो कई वर्षों के बाद बना है।


दरअसल इस साल मकर संक्रांत‌ि 14 जनवरी को है क्योंक‌ि इस द‌िन सूर्य देव सुबह 7 बजकर 38 म‌िनट पर मकर राश‌ि में प्रवेश कर रहे हैं। संयोग की बात है क‌ि इस द‌िन शन‌िवार का द‌‌िन है। शन‌िवार के द‌िन मकर संक्रांत‌ि का होना एक दुर्लभ संयोग है।


ज्योत‌िषशास्‍त्र में शन‌ि महाराज को मकर और कुंभ राश‌ि का स्वामी बताया गया है। ऐसे में शन‌िवार के द‌िन शन‌ि की राश‌ि में सूर्य का आगमन शन‌ि महाराज को अनुकूल और शुभ बनाने के ल‌िए बहुत ही अच्छा रहेगा। इस साल 26 जनवरी से मकर राश‌ि वालों की साढ़ेसाती भी शुरु होने वाली है ऐसे में इनके ल‌िए शन‌ि को खुश करने का यह बहुत ही अच्छा मौका है।
मकर राश‌ि के अलावा इस साल तुला, वृश्च‌िक, धनु राश‌ि वालों की भी साढ़ेसाती रहेगी और मेष, वृष, स‌िंह एवं कन्या राश‌ि वालों को ढैय्या लगेगी। ऐसे में इन आठों राश‌ि वालों को इस मकर संक्रांत‌ि के मौके पर शन‌ि महाराज को खुश करने के ल‌िए कुछ आसान से उपाय जरूर करने चाह‌िए। ज‌िनकी शन‌ि की दशा चल रही है उन्हें भी यह उपाय करना चाह‌िए।
मकर संक्रांत‌ि के द‌िन उड़द दाल में ख‌िचड़ी बनाकर दान करें और
                             स्वयं भी भोजन करें।

चार मठ

                                            जानें शंकराचार्यों की महान परम्परा के बारे में



कृते विश्वगुरुर्ब्रह्मा त्रेतायां ऋषिसत्तमः। 
द्वापरे वेदव्यासश्च अहमस्मि कलौयुगे। (मठाम्नाय महानुशासन) 
माहिष्मती सम्राट महाराज सुधन्वा चौहान को सर्वप्रथम यह बात बताई गयी थी कि सत्ययुग में ब्रह्मा, त्रेता में वशिष्ठ, द्वापर में वेदव्यास और कलियुग में रुद्रांश वीरभद्र के अवतार शंकराचार्य जी विश्व के गुरु होते हैं। ये साक्षात् शरीर धारी भगवान् शिव के अंश होते हैं। नररूप धरो हरः 


हिंदू धर्म का संत समाज आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा नियुक्त चार मठों के अधीन है। हिंदू धर्म की एकजुटता और व्यवस्था के लिए चार मठों की परंपरा को जानना आवश्यक है। चार मठों से ही गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह होता है। चार मठों के संतों को छोड़कर अन्य किसी को गुरु बनाना हिंदू संत धारा के अंतर्गत नहीं आता। 

शंकराचार्य जी ने इन मठों की स्थापना के साथ-साथ उनके मठाधीशों की भी नियुक्ति की, जो बाद में स्वयं शंकराचार्य कहे जाते हैं। जो व्यक्ति किसी भी मठ के अंतर्गत संन्यास लेता हैं वह दसनामी संप्रदाय में से किसी एक सम्प्रदाय पद्धति की साधना करता है। 


                                                  -:चार मठ निम्न हैं:- 

श्रृंगेरी मठ


श्रृंगेरी मठ भारत के दक्षिण में रामेश्वरम में स्थित है। श्रृंगेरी मठ के अन्तर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद सरस्वती, भारती तथा पुरी सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। श्रृंगेरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री भारती कृष्णतीर्थ जी महाराज। इस मठ का महावाक्य ‘अहं ब्रह्मास्मि’ है तथा मठ के अन्तर्गत ‘यजुर्वेद’ को रखा गया है। इस मठ के प्रथम मठाधीश आचार्य सुरेश्वरजी थे, जिनका पूर्व में नाम मण्डन मिश्र था।वर्तमान में स्वामी भारती कृष्णतीर्थ इसके 36वें मठाधीश हैं। 



2. गोवर्धन मठ

गोवर्धन मठ भारत के पूर्वी भाग में उड़ीसा राज्य के जगन्नाथ पुरी में स्थित है। गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद ‘आरण्य’ सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज इस मठ का महावाक्य है ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ तथा इस मठ के अंतर्गत ‘ऋग्वेद’ को रखा गया है। इस मठ के पहले मठाधीश आदि शंकराचार्य के पहले शिष्य पद्मपाद हुए। वर्तमान में निश्चलानंद सरस्वती इस मठ के 145 वें मठाधीश हैं। 


 3.शारदा मठ 

शारदा (कालिका) मठ गुजरात में द्वारकाधाम में स्थित है। शारदा मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद ‘तीर्थ’ और ‘आश्रम’ सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। द्वारिका एवं ज्योति पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री स्वरूपानन्द जी महाराज है । इस मठ का महावाक्य है ‘तत्त्वमसि’ तथा इसके अंतर्गत ‘सामवेद’ को रखा गया है। शारदा मठ के प्रथम मठाधीश हस्तामलक (पृथ्वीधर) थे। हस्तामलक आदि शंकराचार्य के प्रमुख चार शिष्यों में से एक थे। वर्तमान में स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती इसके 79 वें मठाधीश हैं।





 4.ज्योतिर्मठ


उत्तरांचल के बद्रीनाथ में स्थित है ज्योतिर्मठ। ज्योतिर्मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद ‘गिरि’, ‘पर्वत’ एवं ‘सागर’ सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। इस मठ का महावाक्य ‘अयमात्मा ब्रह्म’ है। इस मठ के अंतर्गत अथर्ववेद को रखा गया है। ज्योतिर्मठ के प्रथम मठाधीशआचार्य तोटक बनाए गए थे। वर्तमान में कृष्णबोधाश्रम इसके 44 वें मठाधीश थे, जिनके ब्रह्मलीन होने के बाद वर्तमान में श्री स्वरूपानंद जी इस पीठ का अतिरिक्त प्रभार सम्भाल रहे हैं। उक्त मठों तथा इनके अधीन उपमठों के अंतर्गत संन्यस्त संतों को गुरु बनाना या उनसे दीक्षा लेना ही हिंदू धर्म के अंतर्गत माना जाता है। यही हिंदुओं की संत धारा मानी गई है। 



इन पीठों के अलावा बाद में कार्यभार बढ़ने के कारण तीन खंडपीठों की भी स्थापना की गयी, जिनमे काशी सुमेरु, भानपुरा और कांची कामकोटि पीठ सम्मिलित है। वर्तमान में चर्चित शंकर रमन हत्याकांड में इन्हीं कांची कामकोटि खण्डपीठ के शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी को जयललिता के षड्यंत्र पर मुख्य अभियुक्त बनाया गया था, जिसमें वे पूर्णतः निर्दोष सिद्ध हुए। ये सभी पीठ हर वर्ष समाजसेवा में बीस हज़ार करोड़ से भी अधिक धन खर्च करते हैं। आईये हम सब पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्यों का दर्शन कर सौभाग्यशाली बने।

Tuesday, 10 January 2017

जानिए क्या था लाल बहादुर शास्त्री की मौत का 'समझौता'

                                             

जानिए क्या था लाल बहादुर शास्त्री की                     मौत का 'समझौता'

प्रधानमंत्री को कहा गया देशद्रोहीniranjan--621x41410 जनवरी, 1966 को शास्त्रीजी और अय्यूब खां ने ताशकन्द में एक समझौता किया जिसके मुताबिक तय हुआ कि दोनों देश एक दूसरे से जीते हुए क्षेत्र को वापस कर देंगे और भविष्य में सारी समस्याओं को मिलकर सुलझाएंगे। ‘बियोन्ड द लाइन्स’ पुस्तक में ये खुलासा किया गया कि समझौते के बाद  शास्त्री जी ने जो भारतीय पत्रकारों के साथ प्रेस कान्फ्रेंस की जहां पत्रकारों ने उनका अपमान किया। उनका कहना था कि जीते हुए क्षेत्र पाकिस्तान को वापस नहीं करने चाहिये थे। एक पत्रकार ने तो शास्त्रीजी को देशद्रोही भी कह दिया।

परिवार भी था नाराज़shastriकान्फ्रेंस के बाद जब शास्त्रीजी अपने होटल आए तब उन्हें बताया गया कि भारत की अधिकतर जनता इस समझौते के खिलाफ है। वह नहीं चाहती है कि पाकिस्तान का वह क्षेत्र जिसे भारत ने जीत लिया था उसे वापस किया जाए।  उन्होंने अपने परिवार के लोगों को फोन कर उनकी प्रतिक्रिया पूछी तो सभी  ने समझौते की कटु आलोचना की,उनकी लाड़ली बेटी ने भी। शास्त्रीजी की पत्नी ललिता शास्त्री इस समझौते से इतनी नाराज थीं कि बार-बार निवेदन करने पर भी वे फोन पर नहीं आईं। शास्त्रीजी ने बुद्बुदा कर कहा कि जब घर के लोग ही मेरे खिलाफ हो गये तब तो बाहर के लोग खिलाफ होंगे ही।

                         हार्टअटैक या ज़हर?shastri-jiशास्त्रीजी ने देर रात थोड़ा-सा खाना खाया। वह भारत के तत्कालीन राजदूत टीएन कॉल के घर से आया था। इसके बाद शास्त्रीजी बेचैन हो गये। उनके निजी सहायक जगन्नाथ ने उन्हें पानी पिलाया। उनके निजी चिकित्सक डॉ. चुग उस होटल से थोड़ी दूरी पर रुके हुए थे। थोड़ी देर बाद शास्त्रीजी की मृत्यु हो गई। जब शास्त्रीजी का शव दिल्ली लाया गया तब उनका शरीर नीला पड़ गया था तथा कई जगह उनके शरीर पर कटे हुए के निशान थे। ललिता शास्त्री ने जब डाक्टरों से पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तब डाक्टरों ने दबी जुबान से कहा कि ऐसा तभी होता है जब किसी व्यक्ति को या तो सांप काटता है या जहर दिया जाता है।

आज भी उठते हैं मौत पर सवाल

LBSjpg-3103485_p9आज भी ये सवाल उठया जाता है कि आखिर शास्त्रीजी का पोस्टमार्टम रूस या दिल्ली में क्यों नहीं हुआ? उनका आवास एकांत स्थान पर था और शास्त्री के पास मूलभूत सामान- टेलीफोन, घंटी और चिकित्सा सुविधायें भी नहीं थी । क्या इसे ऐसा रूप दिया गया था? उन्हें एकांत में करना और तब मारना, जिससे कोई गवाह न रहे? शास्त्रीजी हार्ट फेल होने के कारण मरे या उन्हें जहर दिया गया था। शास्त्रीजी की मृत्यु से संबंधित सारे कागजात रूस में नष्ट दिये गये थे। यहां एक प्रश्न यह भी उठता है कि पाकिस्तान जो 1965 के युद्ध में बुरी तरह पराजित हो गया था क्या उसके गुप्तचरों ने चोरी छिपे शास्त्रीजी के खाने या पानी में जहर मिला दिया था।

                          गवाहों की मौत

Lal-Bahadur-Shastri-Death2खबरों के मुताबिक शास्त्री जी के डॉक्टर आरएन चुग जब राज नारायण कमेटी के सामने गवाही देने जा रहे थे, तब उन्हें एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इस सड़क हादसे में डॉक्टर चुग की मौत हो गई थी। खबरों के मुताबिक गवाही देने के लिए शास्त्री जी का घरेलू नौकर रामनाथ भी आया था। गवाही से ठीक पहले उसने मोतीलाल नेहरू निवास पर जाकर ललिता शास्त्री से मुलाकात भी की थी। वहां से निकलने के बाद जब वो संसद जा रहा था तब उसे किसी गाड़ी ने टक्कर मार दी। रामनाथ का पैर काटना पड़ा और उसकी याददाश्त हमेशा के लिए चली गई। हादसे के बहुत दिनों बाद उसकी भी मौत हो गई।                           
                       इंदिरा गांधी को फायदा
1345729021_Indira-Gandhiअनुमान यह भी लगाया जाता है कि इंदिरा गांधी ने गलत भूमिका निभाई थी। उन्हें शास्त्री जी की मृत्यु से सीधा लाभ मिलता। शास्त्री जी के समीकरण से बाहर करके, इंदिरा गांधी पार्टी के अंदर बिना किसी विरोध और गतिरोध के देश का नेतृत्व करना चाहती थी। सच उस समय भी उजागर नहीं हुआ था और बहुत संभव है कि इस रहस्य से कभी पर्दा नहीं उठ सके।

Saturday, 7 January 2017

अजमेर शरीफ के दरगाह की सच्चाई


अजमेर शरीफ के दरगाह की सच्चाई





ये सच्चाई है अजमेर शरीफ के दरगाह की जहाँ हिन्दू लोगअपना माथा फोड़ते है वो भी ऐसे इंसान की कब्र पर जिस को इंसान कहना भी गलत होग्गा



 अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था
और फिर किस तरह पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने आत्मघाती बनकर मोइनुद्दीन चिश्ती को 72 हूरों के पास भेजा था तो, शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए। पृथ्वीराज चौहान गोरी को १७ बार युद्ध में हराने के बाद भी उसे छोड़ देता है
जबकि एक बार उस से हारने पर चौहान के आँख फोड़ के बेरहमी से मार कर उसके शव को घसीटते हुए अफ़ग़ानिस्तान ले गया और दफ़्न किया। आज भी चौहान के क़ब्र पर जो भी मुसलमान वहॉ जाता है प्रचलन के अनुसार उनके क़ब्र को वहॉ पे रखे जूते से मारता है।
ऐसी बर्बरता कहीं नहीं देखी होगी। फिरभी हम हैं कि…बेवकुफ secular बने फिर रहे है…!”अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है.


Hundreds protest as Sri Lanka launches                 Chinese industrial zone

Colombo : Sri Lanka police fired teargas to disperse hundreds of people protesting the launch Saturday of a special industrial zone in the island`s south that hopes to attract billions of dollars in Chinese investment.
Protesters pelted government supporters with stones and police retaliated with teargas and water cannon at the launch, which was also attended by the prime minister and the Chinese ambassador, a police official told AFP.
Authorities said about 25 people were hurt in the skirmishes, including 12 police.
Prime Minister Ranil Wickremesinghe and ambassador Yi Xianliang said the zone in Hambantota, 240 kilometres (150 miles) south of Colombo, will generate thousands of jobs and bring in about $5 billion in Chinese investment.
But residents are afraid they will loose their land to the project, which is situated adjacent to a loss-making $1.4 billion harbour that Colombo hopes to turn into a joint venture with a Chinese company.
The port has already proved controversial in itself with hundreds of temporary dock workers going on strike in December demanding that they be absorbed into the main port-owning company ahead of any sale to the Chinese.
The government denies residents will lose any land to the new industrial zone, saying 95 percent of the area allocated for the project is state-owned and the remainder will be bought from private owners. They say there will be no forced acquisitions.
“In the next two to five years, if everything is OK, there will be about $5 billion of (Chinese) investments in this zone,” ambassador Yi said at the launch, adding that 100,000 jobs could be created.
Prime Minister Wickremesinghe said creating the special area for Chinese investors was aimed at making the debt-burdened Hambantota port viable.
“The Hambantota port was going to sink us (Sri Lanka), but we are now trying to leverage it to create new economic activity and boost growth,” Wickremesinghe said.
The government, which came to power in 2015, has been trying to renegotiate the terms of its $8-billion Chinese debt, which includes the construction costs of the Hambantota port as well as a nearby international airport which is used by only one airline.
The former administration relied heavily on China to build ports, highways and railways as Western nations shunned it over its dismal human rights record.

Friday, 6 January 2017

     
क्या आप जानते हैं कि ममता बनर्जी का असली नाम है ...




ममता बनर्जी के बारे में जो जानकारी मिली उससे मैं चकित हूँ आपके समक्ष रख रहा हूँ क्या ये सही है इसके बारे में आप ज़रूर बताइयेगा ।
क्या आपको पता हे ममता बनर्जी का असली नाम है मुमताज़ मासामा ख़ातून ?







वैसे ही एक बहुत बड़ी सच्चाई ममता बानेर्जी के बारे मे है .. औरत इतने हिंदुओं को बंगाल मे क्यूँ मरवा रही है तो विकीपीडिया पर मुझे इसके रिलिजन मे मुस्लिम दिखा पर अभी वो भी हटा दिया गया है .. मैने जिन दोस्तों को बताया था वो भी सवाल उठाने लगे की ऐसा तो नही है .. इसलिए एक बार फिर से कुछ जानकारी इकट्ठा किया है मैने . इस मुस्लिम अंधभक्त के रिलिजन के बारे मे अलग अलग किताबों मे अलग अलग विवरण है .. पर ममता बनर्जी एक मुसलमान है .. ममता बानेर्जी रोज़ नमाज़ पढ़ती है और इनका रियल नाम है मुमताज़ मासामा ख़ातून .. यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता से इस ने मास्टर डिग्री ली है हिस्टरी ऑफ इस्लाम पर.. .. क्या आपको इस पर कभी आश्चर्य नही हुआ की वो हिन्दी से ज़्यादा अच्छा उर्दू क्यूँ बोल लेती हैं ? आज तक किसी ने उसके माथे पर हिंदुओं की तरह बिंदिया देखा है क्या ? क्या आपको पता है बांग्लादेशियों का सब से पहला पड़ाव बंगाल
होता है .. इनको वहाँ "ढाका बेंगालिस" पुकारा जाता है आपको शायद ही पता होगा की वास्तव मे ममता एक मौलवी और इमाम से भी ज़्यादा नफ़रत का भाव रखती है हिंदुओं के लिए... क्या आपको पता है की ममता बनर्जी जब रेलवे मंत्री थी तो ट्रेन से सारे हिंदू देवताओं के नाम और सिंबल्स को हटाने के लिए प्रयासरत थी .. और कुछ ट्रेन जो तीर्थ यात्रा के लिए चलती हैं उसे बैन करना चाहती थी. आज तक ममता के राज मे बंगाल मे हज़ारों हिंदुओं का क़त्ल हो चुका है.. दरअसल उन हिंदुओं की हत्या उन हिंदुओं ने भी की है जिसने इसे वोट दे कर जिताया है .. जो बंगाल मे रहते हैं .. मैने उनको भी बताया तो वो यह राज नही जानते थे .. कोई बड़ी बात नही इस्लाम को
हिन्दुस्तान मे फैलाने के लिए हिंदुओं को मूर्ख बना कर उनके वोट लेने के लिए इस मुमताज़ बहन ने कितनी सफाई से सबकुछ छुपा कर रखा है .

Wednesday, 4 January 2017

मुलायम के जीवन का सबसे बड़ा पाप था रामपुर तिराहा काण्ड


      मुलायम के जीवन का सबसे बड़ा पाप था रामपुर तिराहा काण्ड




ऐसा नही है की मुलायम सिंह ने अपने जीवन में सिर्फ अयोध्या में कारसेवको पर गोली चलवाने का ही पाप किया है ... मुलायम सिंह के पापो और कुकर्मो की लिस्ट बेहद लम्बी है .. और शायद ये अपने उन्ही पापो की वजह से बुढापे में अपने ही पैदा किये हुए सन्तान के हाथो जलील हो रहा है


मुलायम के जीवन का सबसे बड़ा पाप था रामपुर तिराहा काण्ड
जब २ अक्तूबर 1994 को पूरा देश गाँधी जयंती मना रहा था तब मुजफ्फरनगर जिले के रामपुर तिहारे पर यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के आदेश पर हैवानियत और हवस का खुला खेल खेला गया था ...
तब उत्तराखंड नही बना था और उत्तराखंड के निवासी अलग राज्य को लेकर मांग कर रहे थे ..
अलग राज्य की मांग को लेकर पहाड़ के लोग दिल्ली में धरना देने वाले थे ..मुलायम सिंह ने मेरठ और मुजफ्फरनगर के पुलिस अधिकारियो को सख्त आदेश दे दिया था की कोई भी आंदोलनकारी रामपुर तिराहा से आगे नही जाना चाहिए ... रामपुर तिराहे पर २२ कम्पनी पीएसी और भारी पुलिसबल की तैनाती कर दी गयी ... फिर आंदोलनकारियो को वही रोक दिया गया था ... मुलायम सिंह ने आदेश दिया की दिन के उजाले में कुछ मत करना .. सभी आंदोलनकारियो को वही रोक कर रखो .. उनके खाने पिने का इंतजाम करो ...
फिर जैसे ही रात हुई .. मुलायम सिंह का आदेश आ गया की अब हैवानियत और हवस का खेल खेलो ... फिर पुलिस और पीएसी के जवानो ने आन्दोलनकरियो को चारो तरफ से घेर कर रात के अँधेरे में अंधाधुंघ फायरिंग शुरू की ... करीब चालीस महिलाओ लडकियों के साथ बलात्कार किया गया ... सरकारी आंकड़ो में बीस लोग शहीद हुए ... और सरकारी आंकड़ो में ही २०० लोग जिसमे 60 महिलाये है वो अभी भी लापता है ...
हैवानियत का ऐसा नंगा नाच विश्व में अब तक किसी भी शासक ने नही किया होगा जैसा मुलायम सिंह ने उत्तराखंड के लोगो के साथ किया था ..
इस घटना के सामने आने के बाद पूरा विश्व दहल उठा था .. कई पुलिसकर्मीयो को हत्या और बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया .. एक पुलिस अधिकारी ने आत्मग्लानि से आत्महत्या कर लिया था ..
बाद में कई पुलिसवालों पर जुर्म साबित हुआ लेकिन अभी भी मामला कोर्ट में है ..

Amazon पर बिक रहे है भारतीय राष्ट्रीय ध्वजके पायदान

Amazon पर बिक रहे है भारतीय राष्ट्रीय ध्वजके पायदान, राष्ट्रप्रेमी 

नागरिक कर रहे है विरोध !



ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट अमेजॉन ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रचना होनेवाले पायदान की बिक्री शुरु की है। ये पर्सनालाइज़्ड तिरंगे रंग के पायदान इस वेबसाइट पर चित्र और विवरण के साथ उपलब्ध है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज हर भारतीय के लिए हमेशा से सम्मान और देशभक्ति का एक प्रतीक रहा है। ऐसे में अमेजॉन ने इस तरह के पायदान बेचकर भारतीयों की राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। यह प्रॉडक्ट अमेजॉन कॅनडा पर उपलब्ध है ।

अमेजॉन पर जिस प्रॉडक्ट की बिक्री की जाती है उसकी तस्वीर लगाई जाती है। एक ट्विटर उपभोक्ता सचिन चितलांगिया की इस पर नज़र पड़ी। उन्होंने इसकी तस्वीर को ट्वीट करते हुए अमेजॉन से इस मामले में सवाल पूछा और उनसे क्षमा मांगने के लिए कहा है। इस प्रॉडक्ट के डिस्क्रिप्शन पर लगा है, doormat indian flag Personalized Durable Machine-Washable Indoor/Outdoor Door Mat Welcome Doormat.” भारतीय राष्ट्रीय ध्वज जिसके सम्मान के लिए हर भारतीय अपनी हर मुमकिन कोशिश करता है, उसके डिज़ाइन का पायदान इस तरह से बेचा जा रहा है।

इस चित्र को देखकर इस प्रॉडक्ट को बनाने वाले और बेचने वाले की असंवेदनशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। ये किस तरह से किसी देश के राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को ठेस पहुंचा सकते हैं। हालांकि ये प्रॉडक्ट फिलहाल इस वेबसाइट पर अनुपलब्ध है, किंतु अमेजॉन ने इस मामले पर किसी तरह का कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया है, और न ही क्षमा मांगी है।

Sunday, 1 January 2017

सपा समर्थकों ने अखिलेश यादव को भगवान विष्णु के रूप में दिखाकर

मुख्यमंत्री की तुलना भगवान विष्णु से कर अनादर करनेवाले सपा कार्यकर्ताआेंपर आइपीसी                               धाराआें के तहत अपराध प्रविष्ट करना चाहिए 

इलाहाबाद : प्रदेश में सत्ता संभाल रही समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कार्यकर्ताआें ने भगवान विष्णु के रूप में दिखाया है । इलाहाबाद में कार्यकर्ताओं ने ऐसा ही एक पोस्टर जारी किया। एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के साथ उनकी मुलाकात के बाद उभरे नए समीकरणों से उत्साहित कार्यकर्ताओं ने शनिवार को खुशियां मनाते हुए पूरे शहर में प्रदर्शन किया। यहां कार्यकर्ताओं द्वारा जारी किए गए पोस्टर में लिखा है, ‘ये है विष्णु का रूप, ये है अखिलेश का स्वरूप’।
पोस्टर में ​ विष्णु के रूप में अखिलेश को दिखाया
पार्टी के एक कार्यकर्ता अरूण गुप्ता के नेतृत्व में बैरहना क्षेत्र में सड़क पर खुशी मनाने उतरे दर्जनों कार्यकर्ताओं के हाथ में पार्टी के झंडे के अलावा अतिरिक्त मुख्यमंत्री अखिलेश के पोस्टर भी थे।  इन पोस्टरों में अखिलेश को भगवान विष्णु के अवतार के रूप में दर्शाया गया था। अरूण के अनुसार, वर्तमान परिस्थितयों में अखिलेश ने स्वयं को सही सिद्ध किया है।
                        असम सरकार ने अशुभ महीने से बचने के लिए 
                ब्रह्मपुत्र नदी  पर निर्मित पुल का उद्घाटन टाला !



गुवाहाटी : असम सरकार ने अशुभ महीने से बचने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित दूसरे पुल का उद्घाटन टालने की शुक्रवार (३० दिसंबर) को यहां घोषणा की। असम के लोकनिर्माण मंत्री परिमल सुक्लबैद्य ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘कई प्रमुख नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने सरकार को पुल का उद्घाटन पुह के महीने में नहीं करने की सलाह दी थी क्योंकि असमी परंपरा के अनुसार इस महीने में किसी भी सकारात्मक कार्य की शुरुआत नहीं की जाती है। इसलिए हमने इसका उद्घाटन अगले असमी महीने माघ में करने का निर्णय किया।’ उन्होंने कहा कि माघ की शुरुआत १५ जनवरी से होती है और उसे ‘पुह’ की तरह ‘अशुभ’ नहीं माना जाता है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी दूसरे सरायघाट रोड पुल का उद्घाटन एक जनवरी को करने वाले थे । सुक्लवैद्य ने निर्णय की घोषणा दिन में पुल का निरीक्षण करने के बाद की। उन्होंने कहा कि गडकरी औपचारिक रूप से गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर दूसरे पुल का उद्घाटन कम से कम १५ दिन बाद करेंगे, यद्यपि पुल उद्घाटन के लिए पूरी तरह से तैयार था। नया दूसरा पुल सरायघाट में पहले पुल के समानांतर है।