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Tuesday, 10 January 2017

जानिए क्या था लाल बहादुर शास्त्री की मौत का 'समझौता'

                                             

जानिए क्या था लाल बहादुर शास्त्री की                     मौत का 'समझौता'

प्रधानमंत्री को कहा गया देशद्रोहीniranjan--621x41410 जनवरी, 1966 को शास्त्रीजी और अय्यूब खां ने ताशकन्द में एक समझौता किया जिसके मुताबिक तय हुआ कि दोनों देश एक दूसरे से जीते हुए क्षेत्र को वापस कर देंगे और भविष्य में सारी समस्याओं को मिलकर सुलझाएंगे। ‘बियोन्ड द लाइन्स’ पुस्तक में ये खुलासा किया गया कि समझौते के बाद  शास्त्री जी ने जो भारतीय पत्रकारों के साथ प्रेस कान्फ्रेंस की जहां पत्रकारों ने उनका अपमान किया। उनका कहना था कि जीते हुए क्षेत्र पाकिस्तान को वापस नहीं करने चाहिये थे। एक पत्रकार ने तो शास्त्रीजी को देशद्रोही भी कह दिया।

परिवार भी था नाराज़shastriकान्फ्रेंस के बाद जब शास्त्रीजी अपने होटल आए तब उन्हें बताया गया कि भारत की अधिकतर जनता इस समझौते के खिलाफ है। वह नहीं चाहती है कि पाकिस्तान का वह क्षेत्र जिसे भारत ने जीत लिया था उसे वापस किया जाए।  उन्होंने अपने परिवार के लोगों को फोन कर उनकी प्रतिक्रिया पूछी तो सभी  ने समझौते की कटु आलोचना की,उनकी लाड़ली बेटी ने भी। शास्त्रीजी की पत्नी ललिता शास्त्री इस समझौते से इतनी नाराज थीं कि बार-बार निवेदन करने पर भी वे फोन पर नहीं आईं। शास्त्रीजी ने बुद्बुदा कर कहा कि जब घर के लोग ही मेरे खिलाफ हो गये तब तो बाहर के लोग खिलाफ होंगे ही।

                         हार्टअटैक या ज़हर?shastri-jiशास्त्रीजी ने देर रात थोड़ा-सा खाना खाया। वह भारत के तत्कालीन राजदूत टीएन कॉल के घर से आया था। इसके बाद शास्त्रीजी बेचैन हो गये। उनके निजी सहायक जगन्नाथ ने उन्हें पानी पिलाया। उनके निजी चिकित्सक डॉ. चुग उस होटल से थोड़ी दूरी पर रुके हुए थे। थोड़ी देर बाद शास्त्रीजी की मृत्यु हो गई। जब शास्त्रीजी का शव दिल्ली लाया गया तब उनका शरीर नीला पड़ गया था तथा कई जगह उनके शरीर पर कटे हुए के निशान थे। ललिता शास्त्री ने जब डाक्टरों से पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तब डाक्टरों ने दबी जुबान से कहा कि ऐसा तभी होता है जब किसी व्यक्ति को या तो सांप काटता है या जहर दिया जाता है।

आज भी उठते हैं मौत पर सवाल

LBSjpg-3103485_p9आज भी ये सवाल उठया जाता है कि आखिर शास्त्रीजी का पोस्टमार्टम रूस या दिल्ली में क्यों नहीं हुआ? उनका आवास एकांत स्थान पर था और शास्त्री के पास मूलभूत सामान- टेलीफोन, घंटी और चिकित्सा सुविधायें भी नहीं थी । क्या इसे ऐसा रूप दिया गया था? उन्हें एकांत में करना और तब मारना, जिससे कोई गवाह न रहे? शास्त्रीजी हार्ट फेल होने के कारण मरे या उन्हें जहर दिया गया था। शास्त्रीजी की मृत्यु से संबंधित सारे कागजात रूस में नष्ट दिये गये थे। यहां एक प्रश्न यह भी उठता है कि पाकिस्तान जो 1965 के युद्ध में बुरी तरह पराजित हो गया था क्या उसके गुप्तचरों ने चोरी छिपे शास्त्रीजी के खाने या पानी में जहर मिला दिया था।

                          गवाहों की मौत

Lal-Bahadur-Shastri-Death2खबरों के मुताबिक शास्त्री जी के डॉक्टर आरएन चुग जब राज नारायण कमेटी के सामने गवाही देने जा रहे थे, तब उन्हें एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इस सड़क हादसे में डॉक्टर चुग की मौत हो गई थी। खबरों के मुताबिक गवाही देने के लिए शास्त्री जी का घरेलू नौकर रामनाथ भी आया था। गवाही से ठीक पहले उसने मोतीलाल नेहरू निवास पर जाकर ललिता शास्त्री से मुलाकात भी की थी। वहां से निकलने के बाद जब वो संसद जा रहा था तब उसे किसी गाड़ी ने टक्कर मार दी। रामनाथ का पैर काटना पड़ा और उसकी याददाश्त हमेशा के लिए चली गई। हादसे के बहुत दिनों बाद उसकी भी मौत हो गई।                           
                       इंदिरा गांधी को फायदा
1345729021_Indira-Gandhiअनुमान यह भी लगाया जाता है कि इंदिरा गांधी ने गलत भूमिका निभाई थी। उन्हें शास्त्री जी की मृत्यु से सीधा लाभ मिलता। शास्त्री जी के समीकरण से बाहर करके, इंदिरा गांधी पार्टी के अंदर बिना किसी विरोध और गतिरोध के देश का नेतृत्व करना चाहती थी। सच उस समय भी उजागर नहीं हुआ था और बहुत संभव है कि इस रहस्य से कभी पर्दा नहीं उठ सके।

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