जानिए क्या था लाल बहादुर शास्त्री की मौत का 'समझौता'
भारत में कई ऐसे राजनेता रहे जिनकी मृत्यु रहस्यमय परिस्थितियों में हुई। आज तक इन मौतों की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है। उन्हीं नेताओं में लाल बहादुर शास्त्री भी एक थे। देश को 'जय जवान-जय किसान' का नारा देने वाले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत का राज आज भी बरकरार है।‘बियोन्ड द लाइन्स’ पुस्तक में शास्त्री जी की मौत से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। आज उनकी पुण्यतिथि पर जानिए उनकी मौत का सच।
क्या था ‘ताशकंद समझौता’
1965 में नियंत्रण रेखा को पार कर बहुत बड़ी सख्या में पाकिस्तानी फौज जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र में घुस गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय फौज को आदेश दिया कि वह नियंत्रण रेखा को पार कर पाकिस्तान के अन्दर घुस कर उसके क्षेत्र पर कब्जा कर ले। युद्ध को बढ़ता हुआ देखकर अमेरिका – रूस दोनों चिन्तित हो गये। सोवियत नेताओं ने सुझाव दिया कि युद्ध तुरन्त बन्द कराया जाए और भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अय्यूब खां सोवियत रूस के ताशकन्द में मिलें और युद्धविराम समझौता करें। ताशकंद समझौते के सबसे बड़े समर्थक सोवियत रूस के तत्कालीन प्रधानमंत्री कोसिगिन थे।
प्रधानमंत्री को कहा गया देशद्रोही
10 जनवरी, 1966 को शास्त्रीजी और अय्यूब खां ने ताशकन्द में एक समझौता किया जिसके मुताबिक तय हुआ कि दोनों देश एक दूसरे से जीते हुए क्षेत्र को वापस कर देंगे और भविष्य में सारी समस्याओं को मिलकर सुलझाएंगे। ‘बियोन्ड द लाइन्स’ पुस्तक में ये खुलासा किया गया कि समझौते के बाद शास्त्री जी ने जो भारतीय पत्रकारों के साथ प्रेस कान्फ्रेंस की जहां पत्रकारों ने उनका अपमान किया। उनका कहना था कि जीते हुए क्षेत्र पाकिस्तान को वापस नहीं करने चाहिये थे। एक पत्रकार ने तो शास्त्रीजी को देशद्रोही भी कह दिया।
परिवार भी था नाराज़
कान्फ्रेंस के बाद जब शास्त्रीजी अपने होटल आए तब उन्हें बताया गया कि भारत की अधिकतर जनता इस समझौते के खिलाफ है। वह नहीं चाहती है कि पाकिस्तान का वह क्षेत्र जिसे भारत ने जीत लिया था उसे वापस किया जाए। उन्होंने अपने परिवार के लोगों को फोन कर उनकी प्रतिक्रिया पूछी तो सभी ने समझौते की कटु आलोचना की,उनकी लाड़ली बेटी ने भी। शास्त्रीजी की पत्नी ललिता शास्त्री इस समझौते से इतनी नाराज थीं कि बार-बार निवेदन करने पर भी वे फोन पर नहीं आईं। शास्त्रीजी ने बुद्बुदा कर कहा कि जब घर के लोग ही मेरे खिलाफ हो गये तब तो बाहर के लोग खिलाफ होंगे ही।
हार्टअटैक या ज़हर?
शास्त्रीजी ने देर रात थोड़ा-सा खाना खाया। वह भारत के तत्कालीन राजदूत टीएन कॉल के घर से आया था। इसके बाद शास्त्रीजी बेचैन हो गये। उनके निजी सहायक जगन्नाथ ने उन्हें पानी पिलाया। उनके निजी चिकित्सक डॉ. चुग उस होटल से थोड़ी दूरी पर रुके हुए थे। थोड़ी देर बाद शास्त्रीजी की मृत्यु हो गई। जब शास्त्रीजी का शव दिल्ली लाया गया तब उनका शरीर नीला पड़ गया था तथा कई जगह उनके शरीर पर कटे हुए के निशान थे। ललिता शास्त्री ने जब डाक्टरों से पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तब डाक्टरों ने दबी जुबान से कहा कि ऐसा तभी होता है जब किसी व्यक्ति को या तो सांप काटता है या जहर दिया जाता है।
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