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Sunday, 2 April 2017

हिन्दुस्तान मे ही रहेंगे , वन्देमातरम नहीं अल्लाह हु अकबर कहेंगे - मुस्लिम पार्षद, मेरठ

हिन्दुस्तान मे ही रहेंगे , वन्देमातरम नहीं अल्लाह हु अकबर कहेंगे - मुस्लिम पार्षद, मेरठ



मेरठ में कुछ दिनों से गरमाया राष्ट्रगीत विषय अब थमने का नाम नहीं ले रहा . जहाँ एक तरफ भाजपा पार्षद इस बात पर जोर दे रहे कि बैठकों में राष्ट्रगीत के साथ उद्घाटन या समापन किया जाय तो वहीँ दूसरी तरफ मुस्लिम पार्षद अपनी वन्देमातरम के खिलाफ बना चुके हठ से जरा सा भी हटने को तैयार नहीं .  मेरठ के मेयर ने राष्ट्रगीत वंदेमातरम को लेकर उठ रहे विवाद का स्थाई हल निकालने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव के अनुसार भी सदस्य राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गान के दौरान सदन मे मौजूद नही होगा उसे बैठक मे किसी भी हालात में जगह नही दी जायेगी । साथ में माना जा रहा है कि भविष्य में अपनी जिद पर अड़े ऐसे पार्षदो की सदस्यता भी समाप्त की जा सकती है।  मेरठ के मेयर हरिकान्त अहलुवालिया का कहना है कि वन्दे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है जिसे गया कर तमाम देशभक्तों ने अपने प्राण भारत भूमि पर न्योछावर किये हैं . और इसे लेकर प्रस्ताव सदन मे पास हो चुका है। अब जो राष्ट्र का सम्मान नही करेगा उसे सदन मे बैठने नही दिया जाएगा। ज्ञात हो कि मेरठ के नगर निगम बोर्ड की वन्दे मातरम के गायन को लेकर पहले ही विवाद हो चुका है। अब मेरठ के मुस्लिम पार्षदों का साफ़ कहना है कि-  हिन्दुस्तान मे ही रहेंगे , वन्देमातरम नहीं अल्लाह हू अकबर कहेंगे। 

श्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित प्रसिद्ध जादवपुर यूनिवर्सिटी में अब 'आजादी' के विवादास्पद नारे लगाने का सामने आया है कश्मीर, मणिपुर और नगालैंड के लिए 'आजादी' के नारे लगाए

जादवपुर यूनिवर्सिटी में लगे 'आजादी' के नारे, RSS के सेमिनार का विरोध

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित प्रसिद्ध जादवपुर यूनिवर्सिटी में अब 'आजादी' के विवादास्पद नारे लगाने का मामला सामने आया है. जादवपुर यूनिवर्सिटी में छात्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेमीनार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे और इसी दौरान एक छात्र नेता ने कश्मीर, मणिपुर और नगालैंड के लिए 'आजादी' के नारे लगाए.जेएनयू में पहली बार लगे थे आजादी के ऐसे नारे
इससे पहले पहली बार पिछले साल दिल्ली के जेएनयू में आजादी के नारे लगे थे. लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स संगठन के छात्रों पर अफजल की बरसी के दौरान प्रोग्राम कर आजादी के नारे लगाने का आरोप लगे थे. कश्मीर की आजादी के अलावा भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाए गए थे. इसके बाद जमकर हंगामा हुआ था. दिल्ली पुलिस ने एक्शन लेते हुए कन्हैया कुमार और उमर खालिद को अरेस्ट कर लिया था. इन पर देश्द्रोह का मुकदमा चल रहा है. दिल्ली पुलिस और मोदी सरकार के कार्रवाई की आलोचना भी हुई थी. उस दौरान भी कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी में जेएनयू के सपोर्ट में प्रदर्शन हुई थे.

इस फिल्म 31 मार्च 2017 को पहला पोस्टर रलीज किया गया , जिसमे एक हिन्दू संत को चोर के रूप में दिखाया गया है

फ़िल्मबाजों ने फिर हिन्दू संस्कृति  पर साधा निशाना  पर हिन्दू समाज एकदम निष्क्रय और मूक 


ये एक नहीं हिन्दू फिल्म का पोस्टर है फिल्म कक नाम है बैंक चोर 
इस फिल्म 31  मार्च 2017   को पहला पोस्टर रलीज किया गया , जिसमे एक हिन्दू संत को चोर के रूप 
में  दिखाया गया है 
हाथ में  कमंडल, और भगवा वस्त्र और ये है बैंक चोर  साथ ही एक साथ गधा . खचर  जैसे  कुछ एक साइड
हाथी  फूल एक बार इन फुलमबाजो ने हिन्दू समाज ओर ही निशाना बना है इनको कोई पादरी या कोई मौलवी 
 नहीं केवल हिन्दू ही मिलता है  बनांने को  बात दे की इस फिल्म  में बैंक चोर बना है रितेश देशमुख  अब ये कौन है   ये है कांग्रेस के नेता और महाराष्ट्र  के पूर्व मुख्यमंत्री  विलासराव  देशमुख  का बेटा  और महाशहय  की बीवी 
एक ईसाई  है नाम है जेनेलिया डिसूजा 
 और ये सतह के आ रूप धारण  ये  बैंक चोर  बने घूम रहा हिअ  यही छवि   दी जा रही है  भगवा वस्त्र  पहनने  वाले  साधु संत  की ये लोग लगातार  हिन्दू समाज पर ही निशाना  साधते है  और हिन्दू समाज भी  बेहद निष्किय  और मूक  रहता है 
 मुख चीज ये हे  ही लगातार  ही सब देख देख के हिन्दुओ  को भी  अपमान  सहने  की जैसे  आदत ही हो गयी है 

एनडीटीवी चैनल के तथाकथित पत्रकार रवीश कुमार के परिवार के एक और सदस्य को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। भाई के सेक्स स्कैंडल में फंसने के बाद अब बारी बहन की है।

 रवीश कुमार की बहन हैं, आरोप सुनकर शर्म आएगी

एनडीटीवी चैनल के तथाकथित पत्रकार रवीश कुमार के परिवार के एक और सदस्य को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। भाई के सेक्स स्कैंडल में फंसने के बाद अब बारी बहन की है। कथित तौर पर रवीश कुमार की बहन नीता कुमारी पांडेय एक बड़े घोटाले में फंसी हैं और उन्हें नौकरी से निलंबित किया गया है। मामला बिहार का ही है, लिहाजा अभी तक इस मामले में मोदी या बीजेपी की साजिश की थ्योरी नहीं दी जा सकी है। नीता कुमारी पांडेय का संबंध बिहार के शिक्षा माफिया से बताया जा रहा है। इसी के दम पर वो बार-बार पकड़े जाने के बाद भी हर बार कमाऊ पोस्टिंग पाती रही हैं। एक स्थानीय पत्रकार कुंदन कुमार ने नीता के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया। उन्होंने फेसबुक पर सबूतों और दस्तावेजों के साथ पूरी कहानी खोलकर रख दी है। इससे पहले रवीश कुमार के सगे भाई ब्रजेश कुमार पांडेय भी सेक्स स्कैंडल चलाने के आरोपी हैं और अब तक वो फरार हैं । हैरानी की बात ये है कि ऐसे भाई-बहनों के बावजूद रवीश कुमार टीवी पर बैठकर लोगों को सच्चाई और ईमानदारी का ज्ञान देते रहे।

क्या है पूरा मामला?

रवीश कुमार की बहन नीता कुमारी पांडेय बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सर्वशिक्षा अभियान की जिला कार्यक्रम अधिकारी थीं। उन पर कुछ वक्त पहले भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। राज्य सरकार की तरफ से कराई गई जांच सही पाई गई और उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया है। मुजफ्फरपुर के स्थानीय पत्रकार कुंदन कुमार ने इस बारे में फेसबुक पर पोस्ट (नीचे देखें) लिखकर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि “जिले के एक राजकीय मध्य विद्यालय में भवन के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार पर मैंने जब तफतीश शुरू की थी, तब नीता कुमारी पांडेय ने मेरे हर आरोप को यह कहकर खारिज कर दिया था कि विद्यालय की बिल्डिंग के निर्माण में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। जबकि नंगी आंखों से देखा जा सकता था कि बिल्डिंग बनाने में बड़े पैमाने पर लूट हुई थी और छोटे-छोटे बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ किया गया था। ये पहला मौका नहीं है जब नीता कुमारी पांडेय भ्रष्टाचार के केस में निलंबित हुई है। सर्व शिक्षा अभियान से पूर्व वो जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) मुजफ्फरपुर के पद पर भी नियुक्त थीं। उन्होंने वहां पर अवैध निकासी और अवैध शिक्षकों की बहालियां की थीं। जिसकी जांच में भी आरोप सही पाए गए और काफी वक्त सस्पेंड रहीं। पैसे की वसूली और ऊपर तक उसके बंटवारे की एक्सपर्ट मानी जाने वाली इस भ्रष्ट और कुटिल महिला को हमेशा से राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है। बार-बार करप्शन के केस में फंसने के बावजूद वो मनचाहे पदों पर नियुक्ति पाती रही और सरकारी पैसों की लूट को जारी रखा। मुझे पूरा भरोसा है कि बिहार के सुशासक जल्दी ही उन्हें नई जिम्मेदारी देकर परम उद्देश्यों के लिए दोबारा स्थापित कर देंगे।”
दरअसल केंद्र में मोदी सरकार के आने से पहले तक रवीश कुमार बहुत खुशमिजाज किस्म के पत्रकार हुआ करते थे। तमाम घपलों-घोटालों के बावजूद वो कभी कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ उतने आक्रामक नजर नहीं आते थे, जितने मोदी सरकार के लगभग हर काम को लेकर रहते हैं। रवीश कुमार ने ईमानदारी का ऐसा चोला ओढ़ा कि बड़े-बड़े लोग गच्चा खा गए। कांग्रेस के अलावा उन्होंने लगभग सभी गैर-बीजेपी पार्टियों के पक्ष में खबरें देने और उनके लिए माहौल बनाने का काम किया है। यही कारण है कि खुद रवीश कुमार की विश्वसनीयता दर्शकों की नजर में संदिग्ध हो चुकी है।
नीचे आप पत्रकार कुंदन कुमार की फेसबुक पोस्ट देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने विस्तार से पूरे मामले की जानकारी दी है।


बिहार के शिक्षा विभाग की तरफ से जारी निलंबन पत्र

क्या इतना कमज़ोर जो गए हिन्दू हर कोई नेता हिन्दू धर्म का मज़ाक उड़ने लगा है

प्रशांत भूषण ने कहा- लड़कियों को छेड़ते थे भगवान कृष्ण, क्या योगी बनाएंगे 'एंटी कृष्ण स्क्वॉड

मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने भगवान कृष्ण को लेकर टिप्पणी की है. एंटी-रोमियो स्क्वॉड की आलोचना करते हुए भूषण ने भगवान कृष्ण को छेड़खानी करने वाला बताया. जबकि रोमियो को प्यार करने वाला करार दिया. भूषण की इस टिप्पणी की बीजेपी ने आलोचना की है.
प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट कर रोमियो और श्रीकृष्ण की तुलना की. भूषण ने लिखा, 'रोमियो ने अपने जीवन में केवल एक ही लड़की से प्यार किया, जबकि कृष्ण तो कई लड़कियों के साथ छेड़खानी करने के लिए प्रसिद्ध हैं.
Romeo loved just one lady,while Krishna was a legendary Eve teaser.Would Adityanath have the guts to call his vigilantes AntiKrishna squads? https://twitter.com/AnupamConnects/status/848297706992918528 
भूषण ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, 'क्या मुख्यमंत्री आदित्यनाथ में इतनी हिम्मत है कि वह अपने मुस्तैद दस्ते का नाम ऐंटीकृष्ण स्क्वॉड रख सकें?'
बीजेपी का करारा जवाब
प्रशांत भूषण के इस ट्वीट पर बीजेपी ने करारा जवाब दिया. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर भूषण को जवाब दिया. पात्रा ने लिखा,'कृष्ण को समझ ने में कई जन्म लेने पड़ेंगे. कितनी आसानी से कृष्ण को राजनीति में घसीट लाए. दुःख की बात है.
कृष्ण को समझ ने में कई जन्म लेने पड़ेंगे।
कितने आसानी से कृष्ण को राजनीति में घसीट लाए।
दुःख की बात है। https://twitter.com/navbharattimes/status/848363856397295616 
बता दें कि यूपी चुनाव से पहले बीजेपी ने पूरे प्रदेश में एंटी रोमियो दस्ता गठन करने का वादा किया था. योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च को सीएम पद की शपथ लेने के बाद से ही इस पर अमल शुरु कर दिया. पूरे सूबे में पुलिस टीम ने अभियान चलाया और लड़कियों से छेड़खानी करने वालों को सबक सिखाया. हालांकि इस दौरान लड़के-लड़कियों के साथ बदसलूकी और एकसाथ घूम रहे महिला-पुरुष के साथ बदतमीजी की घटनाएं भी सामने आईं. वहीं इस स्क्वॉड का नाम एंटी-रोमियो रखने पर भी कई लोग आपत्ति जता चुके हैं. आलोचकों का कहना है कि रोमियो शेक्सपियर के एक मशहूर नाटक का पात्र है और रोमियो-जूलियट की प्रेम कहानी अपने आपसी प्यार और समर्पण के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है.

Saturday, 1 April 2017

मौलाना के अनुसार लाख सरकार और जमाना बदले लेकिन इस्लाम और उसके क़ानून कभी भी नहीं बदल सकते ।

नरेंद्र मोदी का काम करवाएगा भारत का नुकसान , इस्लामी मामलों से दूर रहें वो - हाफ़िज़ हुसैन अहमद
३ तलाक पर जब अपने पास कोई माकूल  जवाब नहीं बचा तो सबसे आसान शार्ट कट अपनाया मौलानाओं ने । वही शार्ट कट जिसे अपना कर तमाम लोगों ने पहले भी अपनी झेंप मिटाई है .  मदरसा इस्लामिया कुरैना फैजूल उलूम के संचालक हाफिज हुसैन अहमद ने पहले के तमाम लोगों के नक़्शे कदम पर चलते हुए मुस्लिम महिलाओं की इस पीडादायक हालत पर नरेंद्र मोदी को ना सिर्फ दोषी ठह्ताया बल्कि उन्हें परोक्ष रूप से धमकी भी दे डाली . मौलाना हाफ़िज़ हुसैन अहमद ने धमकी भरे अंदाज़ में कहा कि इस विषय में सरकार द्वारा उठाये गए किसी भी कदम से देश का नुक्सान होगा.  भारत की वर्तमान सरकार को इस्लामी दायरे से दूर रहने की विघटनकारी सलाह देते हुए मौलाना ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाए .  ज्ञात हो कि इस्लाम  में तीन तलाक निकाह हलाला और बहुविवाह को चुनौती देने वाली याचिका पर संविधान पीठ 11 मई से सुनवार्इ करेगी। यह पहली बार होगा जब गर्मी की छुट्टियों में सुप्रीम कोर्ट के कम से कम 15 जज इस प्रकार के बेहद महत्‍वपूर्ण संवैधानिक महत्‍व के 3 मामलों की सुनवाई करेंगे जिस से करोडो महिलाओं की पूरी जिंदगी जुडी है । हाफिज हुसैन अहदम ने कहा कि तलाक पर इस्लाम में खुला रास्ता है। एक ही समय पर 3 तलाक देने पर इस्लाम में भी मनाही है। नरेन्द्र मोदी के प्रति तेवर दिखा रहे मौलाना ने ससम्मान खलीफा का उदाहरण देते हुए बताया कि खलीफा ने भी 3 तलाक देने पर इंसान को कोड़े मारे थे। मौलाना ने अपनी धमकी जारी रखते हुए कहा कि ये धर्म पर हमला है व् इस प्रकार की सूरत में केवल अल्लाह का ही कानून माना जाएगा . केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाए जाने को उन्होंने इस्लाम से छेड़छाड़ बताते हुए कहा कि इससे देश का ही नुकसान होगा। बार बार अल्लाह का क़ानून और खलीफा के नियम बताने वाले मौलाना ने अचानक ही धर्म निरपेक्षता का राग छेड़ दिया और कहा कि ऐसा होने के बाद यह देश धर्म निरपेक्ष देश नहीं रह जाएगा।  अपनी धमकी आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि इससे हिन्दू मुस्लिम का आपस में टकराव ही बढ़ेगा। मौलाना के अनुसार लाख सरकार और जमाना बदले लेकिन इस्लाम और उसके क़ानून कभी भी नहीं बदल सकते । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बार बार बोलते हुए  हाफिज हुसैन अहमद ने कहा कि मोदी ने न तो कुरान पढ़ी है और न ही उन्हें कोई जानकारी है, इसलिए उन्हें कुछ भी पता नहीं है।

एक अप्रैल, 1951 को शुरु हुआ पंचवर्षीय योजनाओं का सफर 31 मार्च, 2017 को खत्म हो गया

भारत के विकास की बुनियाद मानी जाने वाली पंचवर्षीय योजना आज से इतिहास बन गई है

एक अप्रैल, 1951 को शुरु हुआ पंचवर्षीय योजनाओं का सफर 31 मार्च, 2017 को खत्म हो गया
'मैं तब तक आराम से नहीं बैठ सकता जब तक कि इस देश के प्रत्येक व्यक्ति को जीवन की न्यूनतम सुविधाएं हासिल नहीं हो जाती. एक राष्ट्र को जांचने के लिए पांच-छह साल का वक्त काफी कम होता है. आप 10 साल और इंतजार कीजिए. इसके बाद आप पाएंगे कि हमारी योजनाएं इस देश का नजारा ऐसे बदल देंगी कि दुनिया भौचक्की रह जाएगी.'
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56) के शुरु होने के दो साल बाद 1953 में ये बातें कही कही थीं. कुछ ही साल पहले आजादी पाने वाले भारत के सामने उस समय कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां थीं.
ये चुनौतियां इतनी बड़ी थीं कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल सहित कई आलोचक एक लोकतांत्रिक देश में भारत के बचे रहने पर संदेह जता चुके थे. आजादी के आंदोलन में तपे नेता इन चुनौतियों से अनजान नहीं थे. 1946 में ही पंडित नेहरू के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने केसी नियोगी की अध्यक्षता में एक सलाहकारी नियोजन बोर्ड बना दिया था. इसने अपनी रिपोर्ट में योजना आयोग बनाने का सुझाव दिया था. इस पर सरकार ने 15 मार्च, 1950 को अपनी सहमति दे दी और यह संस्था वजूद में आ गई.
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले इस आयोग को देश में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विकास के लिए एक प्रभावी योजना बनानी थी. इसे अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय विकास परिषद देती थी. इसके अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही थे. राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें पदेन सदस्य थे. जवाहर लाल नेहरू तत्कालीन सोवियत संघ की चार वर्षीय योजना और इसकी सफलता से प्रभावित थे. इसलिए उन्होंने इसी तर्ज पर एक अप्रैल 1951 से देश में पंचवर्षीय योजना की शुरूआत की गई. तब से चले आ रहे इस सिलसिले पर अब मोदी सरकार ने रोक लगा दी है. यह सिलसिला 12 योजनाओं सहित सात वार्षिक योजनाओं से मिलकर बना था.
उपलब्धियां और विफलताएं
शुरुआत में कई लोगों के मन में इस योजना के सफल होने को लेकर संदेह था. हालांकि 1956 में पहली पंचवर्षीय योजना के नतीजे ने इस पर उठ रहीं आशंकाएं काफी हद तक कम कर दीं. इस योजना के दौरान विकास दर 3.6 फीसदी दर्ज की गई जबकि लक्ष्य 2.1 तय किया गया था. इसके अलावा प्रति व्यक्ति आय सहित अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
पहली पंचवर्षीय योजना में कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई थी जबकि, दूसरी (1956-61) में औद्योगिक क्षेत्रों को. इन पांच वर्षों में दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल), भिलाई (छत्तीसगढ़) और राउरकेला (ओडिशा) में इस्पात संयंत्र की स्थापना की गई. इस योजना में उद्योगों को वरीयता देने की वजह से खाद्यान्न उत्पादन में कमी आई. नतीजतन महंगाई बढ़ गई. दूसरी पंचवर्षी योजना में विकास दर का लक्ष्य 4.5 फीसदी तय किया गया था. लेकिन यह 4.2 फीसदी रही.
तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66) में पहले से तय की गई विकास की गति को और आगे बढ़ाने का लक्ष्य था. लेकिन इस दौरान देश को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. 1962 में चीन का हमला, इसके दो साल बाद नेहरू का निधन और फिर 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी. इन वजहों से यह योजना बुरी तरह विफल रही.
1966 में चौथी पंचवर्षीय योजना की शुरूआत न करके 1969 तक तीन वार्षिक योजनाएं चलाई गईं. इन वार्षिक योजनाओं के दौरान ही हरित क्रांति की शुरूआत हुई जिसकी वजह से देश न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हुआ बल्कि, दूसरे देशों को अनाज निर्यात करने की स्थिति में आ गया.
चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74) में तेजी से विकास दर हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया था. पहले दो वर्षों तक तो स्थिति अच्छी थी लेकिन, इसके बाद बिजली संकट और महंगाई के साथ बांग्लादेश शरणार्थी की समस्या और 1971 में पाकिस्तान के साथ एक और युद्ध ने इस योजना की गति को काफी पीछे धकेल दिया था. आखिर में 5.7 की जगह केवल 3.3 फीसदी विकास दर ही हासिल की जा सकी.
अस्थायी विराम
इसके बाद पांचवीं पंचर्षीय योजना. लेकिन 1974 में शुरू हुई इस योजना को मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार ने तय अवधि से एक साल पहले ही यानी 1978 में खत्म कर दिया. इसकी जगह छह साल की अनवरत योजना (रोलिंग प्लान) की शुरूआत की गई थी. लेकिन, 1980 में सत्ता में वापसी करने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे रद्द कर दिया और पंचवर्षीय योजना का टूटा सिलसिला फिर शुरू हो गया.
छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85) में गरीबी और क्षेत्रीय विषमता को खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया था. इस योजना में विकास दर के लिए 5.2 फीसदी का लक्ष्य था. इस लिहाज से योजना को सफल कहा जा सकता है क्योंकि योजना की समाप्ति पर यह दर 5.4 फीसदी दर्ज की गई.
इसके बाद सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-90) आई. इसके तहत खाद्यान्न उत्पादन और रोजगार के अवसरों में तेजी लाने की बात कही गई थी. विकास दर की दृष्टि से यह योजना भी सफल रही और जीडीपी वृद्धि दर 5.8 फीसदी दर्ज की गई.
फिर रोक
1989 में वीपी सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार बनने के बाद पंचवर्षीय योजना पर एक बार फिर रोक लगा दी गई. इसकी जगह 1990-92 के बीच दो वार्षिक योजनाएं चलाई गईं. यह वह वक्त था जब भारत विदेशी मुद्रा संकट की वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहा था. राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार गिरने के बाद कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आई और आर्थिक सुधारों के साथ ही आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) की शुरूआत भी की गई. इस योजना के दौरान जीडीपी वृद्धि दर 6.8 फीसदी दर्ज की गई जो लक्ष्य से 1.2 फीसदी ज्यादा थी.
इस योजना में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद 'सामाजिक न्याय के साथ विकास' का मकसद तय कर नौंवी पंचवर्षीय योजना (1997-2002) लाई गई. हालांकि, इस दौरान तय विकास दर का लक्ष्य (6.5 फीसदी) हासिल नहीं किया जा सका और जीडीपी वृद्धि दर 5.4 फीसदी रही. इसके बाद 10वीं पंचवर्षीय योजना (2002-07) में आठ फीसदी के तय लक्ष्य की जगह 7.2 फीसदी और 11वीं योजना (2007-2012) में 7.7 फीसदी विकास दर हासिल की जा सकी.
2012 में 12वीं पंचवर्षीय योजना शुरू हुई. इसमें दीर्घकालीन समावेशी विकास और आठ फीसदी जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया था. इस योजना की अवधि 31 मार्च, 2017 को खत्म हो चुकी है. यह योजना अपने लक्ष्यों को हासिल करने में कितनी सफल रही, इसके नतीजे अभी आने बाकी हैं.
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता में आने के साथ ही पंचवर्षीय योजना को हाशिए पर धकेलना शुरू कर दिया था. जनवरी, 2015 में उसने योजना आयोग को खत्म कर दिया और नीति आयोग बनाया.
अब सरकार की नीति क्या होगी?
12वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि खत्म होने के अब क्या होगा, इस बारे में अभी तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इसकी जगह तीन वर्षीय कार्य योजना लाने की तैयारी है. इसकी जिम्मेदारी नीति आयोग को दी गई है. इसके तहत केंद्रीय योजनाओं के तय लक्ष्यों को हासिल किए जाने की बात कही गई है. बताया जाता है कि आयोग इसके साथ 15 वर्षीय नेशनल डेवलपमेंट एजेंडा (एनडीए) और सात वर्षीय नीति पर भी काम कर रहा है.
जानकार मानते हैं कि किसी भी योजना या नीति के लिए पंचवर्षीय योजनाओं की जगह लेना कतई आसान नहीं होगा. उनका मानना है कि भारत के विकास की इमारत आज जितनी भी बड़ी दिख रही है वह दरअसल वह इन योजनाओं की बुनियाद पर ही खड़ी है.

यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) ने दलाई लामा को सलाह दी है कि असम के दौरे में ‘भारत के विचार चीन पर थोपने के लिए असम की धरती’ का इस्तेमाल नहीं करें.

उल्फा की धमकी, दलाई लामा असम की धरती से चीन के खिलाफ न बोलें

गुवाहाटी: यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) ने दलाई लामा को सलाह दी है कि असम के दौरे में ‘भारत के विचार चीन पर थोपने के लिए असम की धरती’ का इस्तेमाल नहीं करें.
उल्फा (आई) के अध्यक्ष अभिजीत असम ने दलाई लामा को संबोधित एक ई..मेल में कहा, ‘अगर आप वास्तव में असम आने का निर्णय करते हैं तो निजी या सार्वजनिक मंच से चीन के खिलाफ कुछ मत कहिए. हम असम की धरती से भारत के विचारों को थोपना बर्दाश्त नहीं करेंगे.’ 
ई..मेल कई मीडिया घरानों को भेजा गया. बौद्ध नेता एक अप्रैल से असम में नमामि ब्रह्मपुत्र उत्सव में शिरकत करेंगे और फिर अरुणाचल प्रदेश के तवांग जाएंगे.
चीन ने शुक्रवार (31 मार्च) को भारत को चेताया कि अगर उसने दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की इजाजत दी तो द्विपक्षीय संबंधों को ‘गंभीर क्षति’ हो सकती है. उसने भारत से यह भी कहा कि वह तिब्बत के मुद्दे पर अपने ‘राजनीतिक संकल्पों’ का सम्मान करे.
चीन ने अरुणाचल पर किया दावा
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने दलाई लामा के आगामी अरुणाचल दौरे के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, ‘हम इस खबर को लेकर चिंतित हैं। चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से पर चीन का स्पष्ट और सतत रुख है.’ चीन ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है.
द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान
लू ने कहा, ‘दलाई गुट का अलगाववादी गतिविधियों में शामिल रहने का निंदाजनक रिकॉर्ड है. भारत को दलाई गुट के असली व्यवहार को लेकर बहुत स्पष्ट होना चाहिए. अगर भारत दलाई लामा को इस क्षेत्र में यात्रा करने के लिए आमंत्रित करता है तो इसका द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर क्षति पहुंचेगी.’

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कुछ हिस्सों में सोना मिश्रित तांबा खनिज पदार्थ की व्यापक पैमाने पर खोज की है

उत्तराखंड में निकल रहा है सोना, GSI के वैज्ञानिकों ने सोना मिश्रित तांबा खनिज पदार्थ की व्यापक पैमाने पर खोज की !

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कुछ हिस्सों में सोना मिश्रित तांबा खनिज पदार्थ की व्यापक पैमाने पर खोज की है.जीएसआई को रुद्रप्रयाग के मंदाकिनी नदी के पास मिलने का संकेत मिला है.करेंट साइंस जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आधार शैल और झरनों के तल से 475 PPB (पार्ट्स पर बिलियन) और 1.42 PPM (पार्ट्स पर बिलियन) सोने के सैंपल इकट्ठा किए गए हैं'
उत्तराखंड के ये हिस्से लेसर हिमालय के नाम से जाने जाते हैं, जो उत्तर की तरफ से मेन सेंट्रल थ्रस्ट और दक्षिण की ओर नॉर्थ अल्मोड़ा थ्रस्ट के बीचोबीच स्थित है.
GSI के वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के लामेरी-कोटेश्वर इलाके से 355 नमूने एकत्रित किए. सोना और आधार धातु का लखनऊ के GSI के केमिकल डिवीजन में विश्लेषण किया गया.
सोने के साथ-साथ चाल्कोपाइराइट, पाइराइट, स्फालेराइट और गैलेना होने के संकेत मिले
रिपोर्ट के मुताबिक नमूनों के एक्स-रे अध्ययन में सोने के साथ-साथ चाल्कोपाइराइट, पाइराइट, स्फालेराइट और गैलेना होने के संकेत मिले. रुद्रप्रयाग इलाके में सोना मिलने की यह पहली घटना है.रिपोर्ट में कहा गया कि जिन इलाकों में सोना पाया गया है, वह रुद्रप्रयाग कस्बे के आसपास मंदाकिनी नदी के किनारे है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 'कई सेंपल का एक्स-रे स्टडी किया गया. इस स्टडी में सोने के साथ चाल्कोपाइराइट, पाइराइट, स्फालेराइट तथा गैलेना होने के संकेत मिले.'
जीएसआई के मुताबिक, मौजूदा वक्त में कर्नाटक के हुत्ती, ऊटी तथा हिराबुद्दनी खदानों में सोने का उत्पादन होता है. इसके अलावा, राजस्थान के खेतरी तथा झारखंड के मोसाबनी, सिंहभूम तथा कुंद्रेकोचा में धातु सल्फाइड से बाई-प्रोडक्ट के रूप में सोने का उत्पादन होता है.

माम योजनाओं से समाजवादी शब्द की बेदखली शुरू कर दी है.

योगी के निशाने पर अखिलेश सरकार, 14 दिन में किए ये 7 बड़े प्रहार

उत्तरप्रदेश में योगी राज का असर पिछली सरकार की योजनाओं पर दिखने लगा है. नई सरकार ने पिछली सरकार में चलाई जाने वाली तमाम योजनाओं से समाजवादी शब्द की बेदखली शुरू कर दी है. कई स्कीमों, राशनकार्ड से अखिलेश यादव की तस्वीरों को हटाने का काम भी शुरू कर दिया है. साथ ही कई मामलों के जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं.
दरअसल बमुश्किल दो सप्ताह पूरे करने वाली योगी सरकार के अंदाज यूपी में साफ नजर आने लगे हैं. ताबड़तोड़ नए फैसलों और पैगामों से उन्होंने अफसरों, अधिकारियों, प्रशासनिक अमलों, स्कूलों और नेताओं तक को हैरत में डाल दिया है. सत्ता के सभी पुराने रंग तेज़ी से उतारे जा रहे हैं.
1. राज्य सरकार की सभी एंबुलेंस से समाजवादी शब्द को हटाया जाएगा. 
2. राज्य से अखिलेश की फोटो वाले तीन करोड़ राशन कार्ड को वापस लिया जाएगा.
3. बुजुर्गों के लिए चलाई जाने वाली समाजवादी श्रवण यात्रा भी सिर्फ श्रवण यात्रा रह जाएगी, समाजवादी शब्द की विदाई कर दी जाएगी.
4. डिंपल यादव की अगुवाई में बने राज्य पोषण मिशन को भंग कर दिया गया है. ये योजना राज्य की कुपोषित महिलाओं और बच्चों की पहचान के लिए चलाई जा रही थी, जिसकी अगुवाई डिंपल यादव कर रही थी.
5. सरकारी स्कूल बैग से अखिलेश यादव की तस्वीर हटाई जा रही है. 
6. शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में पूर्व मंत्री आजम खान पर घोटाले के आरोप लगाए गए और जांच की बात कही गई. 
7 सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश सरकार के दौरान कथित रिवर फ्रंट घोटाले की जांच कराएगी. 45 दिन में न्यायिक जांच की रिपोर्ट देनी होगी.
देश में सत्ता बदलने का ये स्वाभाविक नियम है, जिसमें पिछली सरकारों की योजनाओं के नाम बदल दिए जाते हैं. योजनाएं खत्म कर दी जाती हैं या नेताओं के चेहरे, पार्टी के नाम से जुड़े शब्दों में पलीता लगा दिया जाता है वैसे भी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बहुत जल्दी में है. सत्ता में काबिज होने के साथ ही योगी सरकार ने प्रशासन को दुरुस्त करने के लिए पच्चीसों नए फऱमान जारी किए हैं. साथ ही उनका औचक निरीक्षण और दौरा जारी है.

अखिलेश यादव ने 16 नवंबर 2016 को की थी। यह प्रोजेक्ट अभी अधूरा है। इसके लिए 1500 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था लेकिन 900 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी काम संतोषजनक नहीं है।

सपा सरकार के 1500 करोड़ के प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट की जांच के लिए CM योगी ने दिए आदेश

गोमती रिवर फ्रंट की जांच के लिए पहुंचे योगी ने परियोजना की पूरी जानकारी मांगी। उन्होंने अफसरों से एक-एक पैसे का हिसाब देने को भी कहा।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार के अहम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य में गड़बड़ी आशंका से जांच के आदेश दे दिए हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में ही सीएम योगी अपने कुछ मंत्रियों के साथ मौके पर जांच के लिए पहुंचे थे।अचानक दौरे पर पहुंचे थे योगी 27 मार्च को गोमती रिवर फ्रंट की जांच के लिए पहुंचे योगी ने परियोजना की पूरी जानकारी मांगी। उन्होंने अफसरों से एक-एक पैसे का हिसाब देने को भी कहा। उस दिन करीब आधे घंटे तक चली बैठक के बाद अफसरों से जवाबों से सीएम योगी खुश नहीं नजर आए और आखिरकार शनिवार को उन्होंने परियोजना की जांच के आदेश दे दिए।
बजट पर उठाए थे सवाल सीएम योगी ने परियोजना के बजट पर सवाल उठाए थे और कहा था कि जरूरत से ज्यादा पैसा इस प्रोजेक्ट को दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों से प्रोजेक्ट नया बजट तैयार करने को भी कहा। योगी ने निर्देश दिया कि गोमती नहीं में एक भी नाले का पानी नहीं गिरना चाहिए।प्रोजेक्ट में खर्च हो चुके हैं 900 करोड़ बता दें कि गोमती रिवर फ्रंट परियोजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 16 नवंबर 2016 को की थी। यह प्रोजेक्ट अभी अधूरा है। इसके लिए 1500 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था लेकिन 900 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी काम संतोषजनक नहीं है। 
बजट में कटौती हाल ही में प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने गोमती रिवर फ्रंट के बजट को लेकर कहा कि पिछली सरकार ने आंख मूंदकर पैसा बहाया है। उन्होंने कहा कि बजट में जो 300 करोड़ रुपये की कटौती की जा रही है उससे दूसरे काम आगे बढ़ेंगे।

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने अपने पुत्र यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ बड़ा बयान दिया है

मुलायम का अखिलेश पर वार, जो पिता का न हुआ, किसी और का क्या होगा

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने अपने पुत्र यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ बड़ा बयान दिया है. मुलायम ने अपने गृहजिले मैनपुरी में पार्टी के एक कार्यक्रम में अखिलेश के बारे में कहा कि जो अपने पिता का नहीं हो सका, वो किसी का क्या होगा.मुलायम ने कहा कि उन्होंने चुनाव जीतने पर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया. देश में किसी और नेता ने अब तक ऐसा नहीं किया लेकिन अखिलेश ने अपने चाचा को ही मंत्रिमंडल से हटा दिया. मुलायम ने हाल के चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन पर भी बात की.गौरतलब है कि चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर खुद उसपर अपनी ताजपोशी करा ली थी. साथ ही अखिलेश ने अपने चाचा शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से तो मुलायम के करीबी अमर सिंह को पार्टी से ही निष्कासित कर दिया था.मुलायम तभी से अखिलेश से नाराज चल रहे हैं, इसलिए उन्होंने चुनाव प्रचार से भी खुद को दूर रखा. हालांकि चुनाव के चलते वो अखिलेश के खिलाफ खुलकर कोई बड़ा बयान नहीं दे रहे थे लेकिन मैनपुरी पहुंचने पर उन्होंने साफ कहा कि जो अपने पिता का नहीं हुआ वो किसी और का क्या होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने सीधा सीधा कहा है कि 'आपका इस मामले में क्या मतलब है, हमारे पास आपकी बात सुनने का वक्त नहीं है।

राम भक्तों के लिए बुरी खबर है राम मंदिर के योद्धा सुब्रमनियम स्वामी का सुप्रीम कोर्ट ने बेइज्जत कर दिया 

क्योंकि आज सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के योद्धा सुब्रमनियम स्वामी की जल्द सुनवाई की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि आप कौन होते हो इस मामले में बोलने वाले, दोनों पक्षों में आपका नाम नहीं है, आप पैरोकार नहीं हो तो क्यों बीच में आ रहे हो। जब दोनों पार्टियाँ शांत बैठीं हैं तो आप क्यों परेशान हो रहे हो।
एक तरह से कहें तो आज सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमनियम स्वामी का बहुत अपमान किया है, सुप्रीम कोर्ट ने सीधा सीधा कहा है कि 'आपका इस मामले में क्या मतलब है, हमारे पास आपकी बात सुनने का वक्त नहीं है। 

सुब्रमनियम स्वामी ने खुद से याचिका डालकर सुप्रीम कोर्ट से राममंदिर मामले की जल्द से जल्द सुनवाई की मांग कर रहे थे, कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोनों पक्षों को आपस में मिलकर यह मामला सुलझाना चाहिए, लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनाई करने से ही इनकार कर दिया और सुब्रमनियम स्वामी का अपमान भी कर दिया।